नयी दिल्ली : सरकार ने जैव-ईंधनों के आयात पर शर्तें लगाने के कुछ ही दिनों के भीतर इनके निर्यात पर भी आज कुछ अंकुश लगा दिए। जैव-ईंधन के आयात-निर्यात दोनों के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है। जैव ईंधनों में इथाइल अल्कोहल, पेट्रोलियम तेल और बिटुमिनस खनिजों, जैव-डीजल तथा मिश्रणों से प्राप्त तेल शामिल हैं। इससे पहले इनके निर्यात पर कोई शर्तें नहीं थीं। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना में कहा, ‘‘जैव ईंधनों की निर्यात नीति जैव-ईंधनों की राष्ट्रीय नीति 2018 के अनुसार शर्तमुक्त की जगह संशोधित कर शर्तों के तहत कर दी गयी है।’’महानिदेशालय ने इथाइल अल्कोहल एवं अन्य गैर-प्राकृतिक स्पिरिट, जैव-डीजल, पेट्रोलियम तेल तथा बिटुमिनस खनिजों से प्राप्त तेलों समेत जैव-ईंधनों के आयात पर पिछले सप्ताह शर्तें लगा दी थीं।
जनगणना 2021 : आजाद भारत में पहली बार जुटाए जाएंगे ओबीसी के आंकड़े
नयी दिल्ली : साल 2021 की जनगणना में आजाद भारत में पहली बार अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) से संबंधित आंकड़े एकत्रित किए जाएंगे। यह कदम 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश में 1931 की जनगणना में आखिरी बार एकत्रित किए गए जातिगत आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई मंडल आयोग की सिफारिशों पर तत्त्कालीन वी पी सिंह सरकार ने ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की थी।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने 2021 की जनगणना के लिए तैयारियों की समीक्षा की जिसके बाद ओबीसी आंकड़े एकत्रित करने के फैसले का खुलासा किया गया। गृह मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा, पहली बार ओबीसी से संबंधित आंकड़े भी इकट्ठा करने का विचार किया गया है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन की एक शाखा राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) ने 2006 में देश की आबादी पर नमूना सर्वेक्षण रिपोर्ट की घोषणा की और कहा कि देश में ओबीसी आबादी कुल आबादी की करीब 41 फीसदी है।
एनएसएसओ ने ग्रामीण इलाकों में 79,306 परिवारों और शहरी इलाकों में 45,374 परिवारों की गणना की। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 2019 के लोकसभा चुनावों में 2021 जनगणना में ओबीसी आंकड़े एकत्रित करने के फैसले का उल्लेख कर सकती है क्योंकि कई ओबीसी संगठन लंबे समय से इसके लिए मांग कर रहे हैं। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ने 2011 में सामाजिक आर्थिक एवं जाति जनगणना कराई थी और मौजूदा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने तीन जुलाई 2015 में इसके नतीजों का ऐलान किया।
इसके बाद 28 जुलाई 2015 को सरकार ने कहा था कि जाति जनगणना के संबंध में कुल 8.19 करोड़ गलतियां पाई गई हैं जिनमें से 6.73 करोड़ गलतियां सुधार दी गई। हालांकि 1.45 करोड़ गलतियों में अभी सुधार नहीं किया गया है। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि जनगणना 2021 तीन सालों में पूरी हो जाएगी। आज की समीक्षा बैठक में गृह मंत्री ने इसके रोडमैप पर चर्चा की। इस बात पर जोर दिया गया कि डिजाइन और तकनीकी चीजों में सुधार पर जोर दिया जाए ताकि जनगणना करने के तीन साल के अंदर आंकड़ों को अंतिम रूप दे दिया जाए।
अभी तक पूरे आंकड़े जारी करने में सात से आठ साल का समय लग जाता है। इस बड़ी कवायद के लिए 25 लाख से अधिक कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है। सिंह ने सिविल पंजीकरण प्रणाली खासतौर से दूरवर्ती इलाकों में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में सुधार करने तथा आंकड़ों का आकलन करने के लिए नमूना पंजीकरण प्रणाली को मजबूत करने जैसे कि शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और प्रजनन दर पर भी जोर दिया।
अक्षय की ‘गोल्ड’ ने बनी सउदी अरब में रिलीज होने वाली बॉलीवुड की पहली फिल्म
मुम्बई : 15 अगस्त को रिलीज हुई अक्षय कुमार की ‘गोल्ड’ भले ही धीमी रफ्तार से बिजनेस कर रही है, लेकिन फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई कर ली है। फिल्म के कमाई के साथ-साथ एक और इतिहास रच दिया है। जी हां, अक्षय और मौनी रॉ स्टारर फिल्म गोल्ड को साउदी अरब में भी रिलीज किया जाएगा। ऐसा करने वाली बॉलीवुड की यह पहली फिल्म होगी, जिसे साउदी अरब में रिलीज किया जा रहा है, जो कि वाकई गर्व की बात है। इस बात की जानकारी खुद अक्षय कुमार ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की है। बता दें कि हॉकी पर बनी अक्षय कुमार की ये फिल्म सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी काफी पसंद की जा रही है। देश में जहां फिल्म ने 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है, वहीं वर्ल्डवाइड फिल्म 150 करोड़ रुपये से भी ज्यादा कमाई करने में कामयाब रही है। फिल्म के साथ-साथ अक्षय कुमार ने भी अपनी झोली में एक और रिकॉर्ड शामिल कर लिया है। दरअसल, गोल्ड को मिलाकर अक्षय की 9 वीं फिल्म 100 करोड़ क्लब में एंट्री करने में सफल रही है। इससे पहले हाउसफुल3, एयरलिफ्ट, रुस्तम, जॉली एलएलबी, हॉलीडे, टॉयलेट और राउडी राठौर इस लिस्ट में अपनी जगह बना चुकी हैं।
अक्षय की फिल्म गोल्ड की बात करें तो ये एक पीरियड ड्रामा है। फिल्म में उस समय की कहानी को दिखाया गया है जब आजादी के बाद भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स में राष्ट्रीय खेल हॉकी में अंग्रेजो के हाथों गोल्ड मेडल मिला था। कहानी में अक्षय कुमार गोल्ड हासिल करने के लिए किस तरह से संघर्ष करते हैं दिखाया गया है। फिल्म ने दर्शकों के दिलों को छू लिया और धीरे-धीरे फिल्म ने 100 करोड़ क्लब में एंट्री कर ली।
हर सेकंड 100 ‘बुरे’ विज्ञापन हटा रहा गूगल
सैन फ्रांसिस्को : गूगल अपनी नीतियों को लेकर सख्त कदम उठाने में लगा हुआ है। इसी के तहत वह हर सेकंड 100 से ज्यादा ऐसे विज्ञापनों को हटा रहा है, जो उसकी नीतियों को उल्लंघन करती हैं। कंपनी ने यह भी फैसला लिया है कि अपने मंच से ‘बुरे’ तत्वों को हटाने के लिए वह जल्द ही एक सत्यापन कार्यक्रम शुरू करने वाला है।
मीडिया खबरों के मुताबिक कई घोटालेबाज विज्ञापन खरीद रहे हैं और बड़ी दिग्गज कंपनियों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं। गूगल ने शनिवार को स्पष्ट कर दिया है कि वह इनके खिलाफ कदम उठा रहे हैं। गूगल के वैश्विक उत्पाद नीति निदेशक डेविड ग्राफ ने बताया, ‘पिछले एक साल में ही हमने 320 करोड़ विज्ञापनों को अपने मंच से हटाया है। इन विज्ञापनों ने हमारी नीतियों का उल्लंघन किया था। हम प्रति सेकंड 100 से ज्यादा खराब विज्ञापनों को हटा रहे हैं।’
18वें एशियाई खेलों का हुआ समापन, भारत ने किया अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन
जर्काता : मुक्केबाज अमित पांघल और ब्रिज में पुरूष युगल जोड़ी के स्वर्ण पदकों के दम पर भारत ने एशियाई खेलों में अब के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ अपने अभियान का शानदार अंत किया। कांस्य पदक के मुकाबले में भारतीय पुरूष हॉकी टीम ने चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर फाइनल में ना पहुंच पाने की अपनी टीस को कम किया, जबकि महिला स्क्वॉश टीम को फाइनल में हारने के कारण रजत पदक से संतोष करना पड़ा। भारत ने इन खेलों में 15 स्वर्ण, 24 रजत और 30 कांस्य पदक सहित कुल 69 पदक जीते। एशियन गेम्स के इतिहास में यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2010 में ग्वांग्झू एशियाई खेलों में था, जब उसने 14 स्वर्ण सहित 65 पदक जीते थे। भारत ने स्वर्ण पदक के लिहाज से 1951 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों की बराबरी की। तब भी भारत ने 15 स्वर्ण पदक अपने नाम किए थे।

भारत ने प्रतियोगिता के आखिरी दिन भी अपना स्वर्णिम अभियान जारी रखा। पहले अमित (49 किग्रा) ने मौजूदा ओलंपिक रजत पदक विजेता और एशियाई चैंपियन हसनब्वॉय दुस्तामातोव को हराकर सोने का तमगा हासिल किया। जबकि इसके बाद पहली बार इन खेलों में शामिल किये गये ब्रिज के पुरूष युगल स्पर्धा में प्रणब बर्धन और शिबनाथ सरकार ने स्वर्ण पदक जीता। सेना के 22 वर्षीय अमित एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले कुल आठवें भारतीय मुक्केबाज बने। 18वें एशियन गेम्स के फाइनल में पहुंचने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज थे। उन्होंने प्रबल दावेदार दुस्तामातोव को 3-2 से हराया। उन्होंने इस तरह से पिछले साल विश्व चैंपियनशिप में उज्बेकिस्तान के इस मुक्केबाज से मिली हार का बदला भी चुकता कर दिया।
कभी नंगे पांव दौड़ने वाली सरिता अब स्वर्ण पदक विजेता है
अहमदाबाद : एशियाई खेलों में महिलाओं के चार गुणा 400 मीटर रिले टीम दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम की सदस्य सरिता कभी नंगे पांव दौड़ती थी। सरिता गुजरात के आदिवासी बहुल डांग जिले से है। स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा इस खिलाड़ी को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने एक करोड़ रूपये की इनामी राशि देने की घोषणा की है। सरिता के पिता ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। उन्होंने कहा, ‘ मेरे पास खुशी बयां करने के लिए शब्द नहीं है। उसने गांव और पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उसे बचपन से ही दौड़ना पसंद था। अब पूरा देश उसे जानता है।’ उनके कोच अजिमोन के एस ने कहा कि सरिता ने उस वक्त सबका ध्यान अपनी तरफ खिंचा जब उसने अपनी दौड़ एक मिनट से कुछ अधिक समय में पूरी की। अजिमोन ने कहा, ‘ उसने 400 मीटर की दौड़ को एक मिनट एक सेकंड में पूरा किया। वह आदिवासी बहुल डांग जिले से है और वह हिन्दी भी नहीं बोल सकती है। मैंने गुजराती कोच की मदद से उसे नादियाद अकादमी से जुड़ने के लिए तैयार किया।’’
इंडिया पोस्ट का पेमेंट बैंक शुरू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की शुरुआत
नयी दिल्ली : डाक विभाग के पूर्ण स्वामित्व वाले इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) का ऑपरेशन की आधिकारिक रूप से शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में इसकी विधिवत शुरूआत की। इसी के साथ ही देश भर में इसकी 650 शाखाएं और 3250 डाकघरों में सेवा केंद्रों की शुरुआत हो जाएगी। साल के अंत तक देश के 1.55 लाख डाकघरों में यह सेवा शुरू हो जाएगी।
खुलेंगे तीन तरह के सेविंग्स अकाउंट
इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक आपको तीन तरह के सेविंग अकाउंट खोलने की सुविधा देगा। रेगुलर सेविंग अकाउंट, डिजिटल सेविंग अकाउंट और बेसिक सेविंग अकाउंट। ये तीनों अकाउंट जीरो बैलेंस पर खोले जा सकते हैं। खाता खुलने के बाद आप पैसा जमा व निकासी कर सकते हैं। इन सभी के लिए सालाना ब्याज दर 4 फीसदी रहेगी।
पेमेंट्स बैंक की सेवाएँ
इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक आम लोगों तक पहुंच के मामले में भारत का दूसरा सबसे बड़ा पेमेंट बैंक होगा। प्राइवेट सेक्टर में एयरटेल और पेटीएम पहले से पेमेंट बैंक की सर्विस दे रही हैं। IPPB की सर्विसेज के तहत सेविंग्स अकाउंट, करंट अकाउंट, डॉमेस्टिक रेमिटेंस सर्विसेज, डिजिटल पेमेंट, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस, म्युचुअल फंड आदि शामिल हैं। इसके अलावा सरकार पेमेंट्स बैंक का इस्तेमाल नरेगा का वेतन, सब्सिडी, पेंशन आदि बांटने में भी करेगी।
17 करोड़ पोस्टल सेविंग्स बैंक खाते जुड़ेंगे
IPPB को 17 करोड़ पोस्टल सेविंग्स बैंक खातों को अपने साथ जोड़ने की अनुमति दी गई है। आईपीपीबी के काम शुरू करने के बाद ग्रामीण इलाकों में लोगों को डिजिटल बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं की सुविधा मिलने लगेगी। वह किसी भी बैंक खाते में धन हस्तांतरित कर सकेंगे। यह काम वह मोबाइल एप अथवा डाकघर में जाकर कर सकेंगे।
आंवला के 500 पौधों ने बनाया लखपति, कभी चलाता था जीप
नयी दिल्ली : अमर सिंह अपना व अपने परिवार का पेट पालने के लिए कभी जीप चलाया कराता था, लेकिन एक बार किसी अखबार में आंवले के गुणों को जानकर उसने आंवले के पौधे अपने खेत में क्या लगाए कि उसकी गिनती गांव के लखपति के रूप में होती है। वह न केवल अपने परिवार, बल्कि दूसरे लोगों को भी रोजगार दे रहा है। राजस्थान के भरतपुर जिले की कुम्हेर तहसील क्षेत्र के समन गांव का निवासी अमर सिंह ने पारिवारिक परिस्थितियों के कारण 11वीं पास करने के बाद पढ़ाई छोड दी और एक डग्गेमार जीप पर कण्डक्टरी करने लगा तथा तीन महीने बाद जीप चलाना सीखकर इसी पर ड्राइवर बन गया। एक दिन उसे एक रद्दी के कागज के टुकडे में आंवला के 100 गुणकारी फायदे लिखे मिले। जिन्हें देखकर वह तुरन्त कृषि अधिकारियों से मिला और आंवले के 500 पौधों की मांग की। सन 2002 में कृषि विभाग द्वारा उपलब्ध कराये गये पौधों से अमर सिंह ने अपने खेत में आंवले का बाग लगा दिया। आंवले के पौधे लगाने के चार साल बाद अमर सिंह का आंवले का बाग फलों से लद गया, लेकिन अमर सिंह ने आंवले की उपयोगिता के बारे में जो पढ़ा व सुना था, उसके अनुरूप आंवले के दाम नहीं मिल पा रहे थे। अमर सिंह इन आंवलों को लेकर मथुरा भी गया लेकिन वहां भी उसे उचित भाव नहीं मिला। आखिर जो भाव मिलता उसी में बेचने के लिए अमर सिंह मजबूर हो रहा था।
लुपिन लैब, मुम्बई की स्वयं सेवी संस्था लुपिन ह्यूमन वैलफेयर एण्ड रिसर्च फाउण्डेशन ने वर्ष 2006 में कुम्हेर कस्बे में फल प्रसंस्करण का प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया। जिसमें समन गांव का अमर सिंह भी शामिल हुआ। वैसे अमर सिंह आंवले के फलों के उचित दाम नहीं मिलने से इतना टूट चुका था कि उसे आंवले के बाग को हटा कर खेती करने का मन बना लिया था, फिर भी अमर सिंह ने फल प्रसंस्करण प्रशिक्षण शिविर में शामिल हुआ। उसने प्रशिक्षण में अन्य फलों के साथ-साथ आंवले के विभिन्न उत्पाद बनाने का गहन प्रशिक्षण लिया। लुपिन संस्था ने पुनः अमर सिंह को आंवले का अचार, मुरब्बा, जैम, जैली, कैण्डी, चैरी आदि का प्रशिक्षण दिलाया और कार्य शुरू कराने के लिए सिडबी एवं विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से 2 लाख का ऋण दिलाया।
अमर सिंह को लुपिन संस्था के मार्गदर्शन एवं आर्थिक सम्बल से आगे बढने का पूरा विश्वास प्राप्त हो गया तो उसने अपने खेत के सारे आंवलों के विभिन्न उत्पाद तैयार करने के लिए 82 क्विंटल चीनी काम में ली अर्थात करीब 150 क्विंटल उत्पाद तैयार किये। जिन्हें तैयार करने के लिए उसका पूरा परिवार एवं गांव के करीब 20 लोगों को तीन माह तक रोजगार दिया।
उसने करीब 100 क्विंटल मुरब्बा, 10-10 क्विंटल अचार, जैम, कैण्डी, जैली आदि बनाई। उसने मुरब्बा बनाने में करीब 25 रुपये प्रति किलो की लागत आई जिसे उसने अपने गांव के आसपास व स्थानीय बाजार में 40 रुपये प्रतिकिलो की दर पर बेच कर करीब 2 लाख रुपये की आय प्राप्त कर ली। अब वह इसकी लागत को और कम करने की दिशा में जुटा हुआ है। वह आगामी वर्षों में अन्य फलों के प्रसंस्करण कर लोगों को कम दामों पर उपलब्ध कराया जिसके लिए लुपिन संस्था निरन्तर प्रयास कर रही है। लुपिन अमर सिंह को नवीन पैकेजिंग विधि के अलावा उत्पादों को राष्ट्रीय मेलों, खादी विक्रय केन्द्रों पर उपलब्ध कराने में सहयोग कर रही है।
अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अगले साल जनवरी में होगी सुनवाई
नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने जम्मू कश्मीर में कानून व्यवस्था की समस्या के बारे केन्द्र और राज्य सरकार के कथन के मद्देनजर संविधान के अनुच्छेद 35-ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई आज अगले साल जनवरी के लिये स्थगित कर दी। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर के नागिरकों को विशेष अधिकार और सुविधायें प्रदान करता है।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की खंडपीठ से केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि राज्य में आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान स्थानीय निकाय के चुनाव हो रहे हैं और वहां कानून व्यवस्था की समस्या है।
इन याचिकाओं पर सुनवाई अगले साल जनवरी के दूसरे सप्ताह के लिये स्थगित करते हुये पीठ ने कहा, ‘‘चुनाव हो जाने दीजिये। हमें बताया गया है कि वहां कानून व्यवस्था की समस्या है। संविधान में 1954 में राष्ट्रपति के आदेश पर अनुच्छेद 35-ए शामिल किया गया था। यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर के नागरिकों को विशेष अधिकार और सुविधायें प्रदान करता है तथा यह राज्य के बाहर के लोगों को इस राज्य में किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति प्राप्त करने पर रोक लगाता है।
यही नहीं, इस राज्य की कोई महिला यदि किसी बाहरी व्यक्ति से शादी करती है तो उसे संपत्ति के अधिकार से वंचित किया जाता है और उसके उत्तराधिकारियों पर भी यह प्रावधान लागू होता है। मामले पर सुनवाई शुरू होते ही अतिरिक्त सालिसीटर जनरल ने कहा कि राज्य में 4,500 सरपंचों और दूसरे स्थानीय निकाय के पदों के लिये आठ चरणों में सितंबर से दिसंबर के दौरान चुनाव होंगे।
उन्होंने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुये कहा कि यदि स्थानीय निकाय के चुनाव नहीं हुये तो इसके लिये आवंटित 4,335 करोड़ रुपये की धनराशि का इस्तेमाल इस मद में नहीं हो सकेगा। उन्होंने राज्य की मौजूदा कानून व्यवस्था की ओर भी पीठ का ध्यान आकर्षित किया। अटार्नी जनरल ने कहा कि बड़ी संख्या में अर्द्धसैनिक बल वहां पर तैनात हैं। वहां शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव हो जाने दीजिये और इसके बाद जनवरी या मार्च में इन याचिकाओं पर सुनवाई की जा सकती है। यह विषय बहुत ही संवेदनशील है।
अतिरिक्त सालिसीटर जनरल का कहना था कि हालांकि यह मुद्दा लैंगिक भेदभाव से संबंधित है परंतु इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिये यह उचित समय नहीं है। संविधान के इस अनुच्छेद का विरोध कर रहे समूह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार ने कहा कि जम्मू कश्मीर जाकर वहां 60 साल से रहने वाले लोगों को वहां रोजगार या मेडिकल और इंजीनियरिंग कालेजों में शिक्षा के लिये प्रवेश का लाभ नहीं मिल रहा है।नेशनल कांफ्रेंस और मार्क्सवादी पार्टी सहित कुछ राजनीतिक दलों ने इस अनुच्छेद का समर्थन करते हुये भी शीर्ष अदालत में याचिकायें दायर की हैं
अवसाद के शिकार बच्चों को बातचीत और पढ़ाई में होती है ज्यादा परेशानी
टोरंटो : अवसाद से पीड़ित बच्चों में सामाजिक और एकेडेमिक कौशल में कमी की छह गुना अधिक संभावना होती है। ऐसे बच्चों को लोगों से बातचीत और पढ़ाई में परेशानी हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि छह से 12 वर्ष तक की आयु के तीन प्रतिशत बच्चों में अवसाद की समस्या हो सकती है लेकिन माता-पिता तथा शिक्षक बच्चों में अवसाद को आसानी से नहीं पहचान पाते।
अमेरिका के मिसौरी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर कीथ हर्मन ने कहा कि जब आप शिक्षकों और माता-पिता को बच्चों में अवसाद का स्तर मापने के लिए कहते हैं तो आम तौर पर उनकी रेटिंग में 5-10 प्रतिशत का अंतर होता है। उन्होंने कहा कि उदाहरण के तौर पर शिक्षक को यह पता हो सकता है कि बच्चे को कक्षा में दोस्त बनाने में परेशानियां आ रही हैं लेकिन शायद माता-पिता घर में इस बात पर ध्यान न दे सके हों।
शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन के लिए प्राथमिक स्कूल के 643 बच्चों के प्रोफाइल का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि पढ़ाई में 30 प्रतिशत बच्चों में अवसाद का हल्के से ज्यादा अनुभव हुआ लेकिन माता-पिता और शिक्षक अक्सर बच्चों में अवसाद को पहचानने में विफल हो जाते हैं। हर्मन ने पाया कि जिन बच्चों में अवसाद के संकेत पाए गए, उनमें अपनी उम्र के अन्य बच्चों के मुकाबले कौशल की कमी की छह गुना ज्यादा आशंका होने की बात सामने आई।




