Thursday, October 8, 2026
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गणतन्त्र दिवस पर खूब भाएगा तीन रंग के व्यंजनों का स्वाद

तिरंगा केक

सामग्री : एक बड़ा पैकेट ताजा ब्रेड, एक आम, एक कटोरी मलाई, एक कटोरी पिसी शक्‍कर, अमरूद का जैम आवश्यकता नुसार, एक चम्मच गुलाब जल, (डेकोरेशन के लिए काजू, किशमिश, बादाम)।
विधि : सबसे पहले मलाई में आधा कटोरी शक्‍कर व गुलाब जल मिलाकर इसे अच्‍छी तरह फेंटे। बाकी बची हुई शक्‍कर आम में मिलाकर उसे फेंटें। अब किसी प्लेट में एक ब्रेड रखें, उस पर आम का मिश्रण फैलाएं, इस पर दूसरी ब्रेड रखकर मलाई का मिश्रण फैलाएं। अब उसके ऊपर ब्रेड की तीसरी स्‍लाइस रखकर उस पर जैम लगाएं। इसी प्रकार चौथी ब्रेड रखकर मलाई का मिश्रण लगाएं। अब सजावट हेतु काजू, किशमिश आदि चिपकाएं तथा इसे केक की तरह बीच से दो भागों में काट लें। अब यह तीन रंगों का दिखेगा। लीजिए ब्रेड का लजीज तिरंगा केक तैयार है।

तिरंगा सैंडविच


सामग्री : 6 ब्रेड पीस, आधा कप मक्खन, आधा कप पनीर, कद्दूकस किया हुआ
हरी परत के लिए : पुदीना चटनी, स्वादानुसार नमक
केसरिया परत के लिए – आधा कर कद्दूकस किया हुआ गाजर, 2 बड़ा चम्मच मेयोनीज, स्वादानुसार नमक
विधि : सबसे पहले ब्रेड की स्‍लाइस पर बटर लगाकर रख लें। अब हरी परत के लिए एक कटोरे में पनीर, पुदीना चटनी और नमक मिक्‍स करे। दूसरे कटोरे में घिसी गाजर, मेयोनीज और नमक मिक्स कर केसरिया लेयर तैयार कर लें। ब्रेड स्‍लाइस पर हरा लेयर बिछाएं अब एक दूसरी ब्रेड रखें और इसके पर ऑरेंज लेयर बिछाए़ं इसके बाद तीसरी ब्रेड स्‍लाइस रखें। चाकू से इन्‍हें एक साथ तिकोना काटें और सर्व करें

गणतन्त्र दिवस पर आप भी दिखें कुछ खास

26 जनवरी हम सबका दिन है। जाहिर है कि आप भी इस दिन तिरंगे के रंग में रंगने को तैयार हैं। अपने दोस्तों के साथ या दफ्तर में आप यह दिन मनाने को तैयार हैं तो आपके लिए लिए हैं कुछ फैशन टिप्स, गौर करें –

लड़कों के लिए गणतंत्र दिवस के दिन ब्लेजर एक बहुत बढ़िया विकल्प है। ब्लेजर को फॉर्मल या कैज्युल कपड़ों पर पहन सकते हैं। आप चाहे तो इसे जींस और व्हाइट शर्ट के साथ टीमअप कर सकते हैं। यह आपको स्टाइलिश लुक देगा।
इस दिन आप केसरिया या हरे रंग का ब्लेजर पहन अपने लुक को पूरा कर सकते हैं। गणतंत्र दिवस के मौके पर आप तिरंगे में से किसी भी रंग के कुरते पर कुर्ते के साथ तिरंगा पगड़ी भी पहन सकते हैं। पगड़ी भारतीयों की पहचान होती है।


गणतंत्र दिवस के मौके पर कुर्ता एक बेहतर विकल्प आपके लिए हो सकता है। वैसे तो कुर्ता किसी भी मौके पर पहना जा सकता है, लेकिन हरे या केसरिया रंग का कुर्ता आप इस खास दिन पर पहनेंगे तो बिल्कुल सूट करेगा।
नेहरू जैकेट पहनें। इसे आप किसी भी सफेद कुरते पर पहन सकते हैं। आप पारम्परिक प्रिंट वाला कुरता पहन रहे हैं तो जैकेट प्लेन रखें।
धोती और पंजाबी पहन सकते हैं। आजकल रंगीन धोती भी मिलती है। पंजाबी जीन्स पर भी अच्छी लगती है।
तिरंगे के किसी एक रंग वाली टीशर्ट जीन्स के साथ पहनें और टोपी पहन सकते हैं।

गणतन्त्र दिवस पर तिरंगे हो फैशन का रंग

26 जनवरी हर भारतीय का महापर्व है। हम इस दिन सबसे अलग दिखना चाहते हैं। दफ्तर हो या न हो, झंडा फहराने का उत्साह हम सबमें होता है। अगर छुट्टी के मूड में हों तो भी पहनावे में तीन रंगों का संगम लाना चाहती होंगी आप। जरूरी नहीं है कि देशभक्ति के रंग में रंगने के लिए आप बहुत ज्यादा तैयारी करें। आपके पास जो भी कपड़े या एक्सेसरीज हैं, उनका इस्तेमाल करके ही आप बेहद अलग और खूबसूरत दिख सकती हैं, चलिए हम आपको बताते हैं कुछ तरीके –
सफेद कुर्ता और जीन्स पहनें और उस पर तिरंगे के रंग का कोई दुप्पटा या जैकेट पहन लें।
इस मौके पर सफेद कुर्ता के साथ आप सफेद लेगिंग्स पहन सकती हैं और उस पर केसरिया कलर का दुपट्टा डाल सकती हैं।

आप चाहे तो सफेद साड़ी पहन सकती हैं। तिरंगे के तीन रंगों की चूड़ियाँ, बिन्दी लगा सकती हैं। आप केसरिया या हरे रंग की साड़ी भी चुन सकती हैं। मेकअप के साथ भी प्रयोग कर सकती हैं। इसके लिए आँखों को तिरंगा लुक देने के लिए इनर आई को सिल्वर आईशैडो से कवर कर लें। इसके बाद ऊपर केसरिया आईशैडो और नीचे हरा काजल पेसिंल लगाएं। यही नहीं, तिरंगे के तीनों रंग शैडो के तौर पर भी लगा सकती हैं।
पारम्परिक लुक को और खास बनाने के लिए चेहरे और नाखूनों पर भी तिरंगे रंग का इस्तेमाल करें। इसके लिए आप तिरंगा नेलपेंट इस्तेमाल कर सकती हैं।


इस दिन लड़कियां हरे, सफेद, केसरी रंग के थ्री डी सलवार सूट भी पहन सकती हैं। इसके अलावा इन रंगों की ही साड़ी, वनपीस ड्रेस, गाऊन भी पहन सकती हैं। एक्सेसरीज में तिरंगे वाले इयररिंग, ब्रेसलेट, चूड़ियां, हेयर बैंड भी आजमाएं। केसरी, सफेद और हरे रंग का नेकलेस, ईयररिंग, आई मेकअप भी आपको स्टाइलिश लुक देगा।
हल्का जूड़ा या ढीली चोटी बनाएं। उस पर गेंदे के फूल या मोगरे का गजरा लगा लें।

 

सावित्री गर्ल्स कॉलेज में सोशल मीडिया पर सेमिनार

कोलकाता : सावित्री गर्ल्स कॉलेज की सेमिनार रिसर्च कमेटी और सावित्री गर्ल्स कॉलेज की पूर्व छात्राओं ने हाल ही में सोशल मीडिया : वरदान या अभिशाप विषय पर सेमिनार आयोजित किया। कोलकाता पुलिस की साइबर अपराध शाखा के प्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और उनसे निपटने के तरीके बताए। पश्चिम बंगाल सरकार की फोरेंसिक साइंस लेबरोटरी के पूर्व निदेशक डॉ. डी. सेनगुप्ता, सेंट जेवियर्स कॉलेज के कम्प्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष तथा कॉलेज के कम्प्यूटर सेंटर और सेंटल कम्प्यूटिंग फेसिलटिज के निदेशक प्रो. शलभ अग्रवाल ने सोशल मीडिया के प्रभाव तथा दुष्प्रभावों पर पावर प्रेजेंन्टेशन दिया। कॉलेज की पूर्व छात्रा तथा सलाम दुनिया की वरिष्ठ पत्रकार सोशल मीडिया की सकारात्मकता पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन राजनीतिशास्त्र की असिस्टेंट प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष डॉ. अल्फिया टुंडावाला ने दिया।
सेमिनार में कलकत्ता विश्वविद्यालय के इस्लामिक इतिहास व संस्कृति विभाग के पूर्व प्रोफेसर रंजीत से इसकी अध्यक्षता की। इस सेमिनार में स्वागत भाषण देते हुए सावित्री गर्ल्स कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अमृता दत्ता ने सोशल मीडिया के प्रभाव पर प्रकाश डाला। कॉलेज के शिक्षा विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नवनीता सेन ने विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन इसी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. पियाली घोष ने किया।

भारत माता के सपूत नेताजी सुभाष चन्द्र बोस

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूंगा’ का नारा देने वाले नेताजी सुभाष चंद्र बोस का आज जन्मदिन है। आजाद हिंद फौज के संस्थापक और अंग्रेजों से देश को मुक्त कराने में अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले नेताजी का जन्म 23 जनवरी साल 1897 में हुआ था। नेताजी का पहला प्रेम भारत की आजादी था, लेकिन बहुत कम लोग ही जानते हैं कि उनका दूसरा प्रेम कारें थी। उनकी एक पसंदीदा कार आज देश की धरोहर के रूप मेें संजो कर रखी हुई। इस कार ने आजादी के सफर में नेताजी का खूब साथ दिया और कई बार उनकी जान भी बचाई।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म उड़ीसा के कटक शहर में हुआ था। कटक में प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने रेवेनशा कॉलिजियेट स्कूल में दाखिला लिया। जिसके बाद उन्होंने कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की। 1919 में बीए की परीक्षा उन्होंने प्रथम श्रेणी से पास की और विश्वविद्यालय में उन्हें दूसरा स्थान मिला था।

जब महात्मा गांधी से मिले नेताजी
20 जुलाई 1921 में सुभाष चंद्र बोस की मुलाकात पहली बार महात्मा गांधी जी हुई। गांधी जी की सलाह पर वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए काम करने लगे। भारत की आजादी के साथ-साथ उनका जुड़ाव सामाजिक कार्यों में भी बना रहा। बंगाल की भयंकर बाढ़ में घिरे लोगों को उन्होंने भोजन, वस्त्र और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का साहसपूर्ण काम किया था। समाज सेवा का काम नियमित रूप से चलता रहे इसके लिए उन्होंने ‘युवक-दल’ की स्थापना की।

यूरोप प्रवास
सन् 1933 से लेकर 1936 तक सुभाष यूरोप में रहे। यूरोप में सुभाष ने अपनी सेहत का ख्याल रखते हुए अपना कार्य बदस्तूर जारी रखा। वहाँ वे इटली के नेता मुसोलिनी से मिले, जिन्होंने उन्हें भारत के स्वतन्त्रता संग्राम में सहायता करने का वचन दिया। आयरलैंड के नेता डी वलेरा सुभाष के अच्छे दोस्त बन गये। जिन दिनों सुभाष यूरोप में थे उन्हीं दिनों जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू का ऑस्ट्रिया में निधन हो गया। सुभाष ने वहाँ जाकर जवाहरलाल नेहरू को सान्त्वना दी। बाद में सुभाष यूरोप में विठ्ठल भाई पटेल से मिले। विठ्ठल भाई पटेल के साथ सुभाष ने मन्त्रणा की जिसे पटेल-बोस विश्लेषण के नाम से प्रसिद्धि मिली। इस विश्लेषण में उन दोनों ने गान्धी के नेतृत्व की जमकर निन्दा की। उसके बाद विठ्ठल भाई पटेल जब बीमार हो गये तो सुभाष ने उनकी बहुत सेवा की। मगर विठ्ठल भाई पटेल नहीं बचे, उनका निधन हो गया।
ऑस्ट्रिया में किया था प्रेम विवाह
सन् 1934 में जब सुभाष ऑस्ट्रिया में ठहरे हुए थे, उस समय उन्हें अपनी पुस्तक लिखने हेतु एक अंग्रेजी जानने वाले टाइपिस्ट की आवश्यकता हुई। उनके एक मित्र ने एमिली शेंकल नाम की एक ऑस्ट्रियन महिला से उनकी मुलाकात कराई। एमिली के पिता एक प्रसिद्ध पशु चिकित्सक थे। एमिली ने सुभाष के टाइपिस्ट के तौर पर काम किया। इसी दौरान सुभाष एमिली को दिल दे बैठे। एमिली भी उन्हें बहुत पसंद करती थीं। नाजी जर्मनी के सख्त कानूनों को देखते हुए दोनों ने सन् 1942 में बाड गास्टिन नामक स्थान पर हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया। इसके बाद वियेना में एमिली ने एक पुत्री को जन्म दिया। सुभाष ने उसे पहली बार तब देखा जब वह मुश्किल से चार सप्ताह की थी। उन्होंने उसका नाम अनिता बोस रखा था। अगस्त 1945 में ताइवान में हुई तथाकथित विमान दुर्घटना में जब सुभाष की मौत हुई, अनिता पौने तीन साल की थी। उनका पूरा नाम अनिता बोस फाफ है। अपने पिता के परिवार जनों से मिलने अनिता फाफ कभी-कभी भारत भी आती हैं।
नेताजी को 11 बार कारावास
सार्वजनिक जीवन में नेताजी को कुल 11 बार कारावास की सजा दी गई थी। सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 को छह महीने का कारावास दिया गया था। 1941 में एक मुकदमे के सिलसिले में उन्हें कोलकाता (कलकत्ता) की अदालत में पेश होना था तभी वे अपना घर छोड़कर चले गए और जर्मनी पहुंच गए। जर्मनी में उन्होंने हिटलर से मुलाकात की। अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध के लिए उन्होंने आजाद हिन्द फौज का गठन किया और युवाओं को ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ का नारा भी दिया।


कारों के शौकीन थे नेताजी
नेताजी पर शोध करने वालों का कहना है कि यूं तो नेताजी भवन में कई कारें रखी हुई थीं, लेकिन वांडरर कार छोटी और सस्ती थी और इस कार का आमतौर पर मध्यम आय वर्ग के लोग ही ग्रामीण इलाकों में इस्तेमाल किया करते थे। नेताजी भवन में रखी वांडरर कार का ज्यादा इस्तेमाल नही होता था, इसलिए जल्दी किसी का ध्यान इस पर नहीं जाता था। विलक्षण बुद्धि के मालिक नेताजी भली-भांति जानते थे कि किसी और कार का इस्तेमाल करने पर वे आसानी से ब्रिटिश पुलिस की नजर में आ सकते हैं। अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंकने के लिए उन्होंने इस कार को चुना था। 18 जनवरी, 1941 को इस कार से नेताजी, शिशिर के साथ गोमो रेलवे स्टेशन (तब बिहार में, अब झारखंड में) पहुंचे थे और वहां से कालका मेल पकड़कर दिल्ली गए थे।
नेताजी और मौत पर रहस्य
नेताजी की मौत पर रहस्य बरकरार है। 18 अगस्त 1945 को वे हवाई जहाज से मंचूरिया जा रहे थे। इस सफर के दौरान ताइहोकू हवाई अड्डे पर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। सुभाष चंद्र बोस का निधन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा रहस्य है। उनकी रहस्यमयी मौत पर समय-समय पर कई तरह की अटकलें सामने आती रही हैं। भारत सरकार ने आरटीआइ के जवाब में ये बात साफ तौर पर कही है कि उनकी मौत एक विमान हादसे में हुई थी। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खुद जापान सरकार ने इस बात की पुष्टि की थी कि 18 अगस्त, 1945 को ताइवान में कोई विमान हादसा नहीं हुआ था। इसलिए आज भी नेताजी की मौत का रहस्य खुल नहीं पाया है।
(साभार – दैनिक जागरण)

80 मटके, रोज़ 2000 लीटर से भी ज़्यादा पानी भरकर, दिल्ली की प्यास बुझानेवाले ‘मटका मैन’!

नयी दिल्ली : दिल्ली निवासी 69 वर्षीय अलगरत्नम नटराजन को लोग ‘मटका मैन’ के नाम से भी जानते हैं। वे हर रोज़ दक्षिण दिल्ली में अनगिनत ग़रीब और जरुरतमंदों की प्यास बुझाते हैं। नटराजन दिल्ली में बहुत-सी समाज सेवी संस्थाओं से जुड़े हुए हैं। अपने सामाजिक कार्यों के दौरान जब उन्होंने दिल्ली में लोगों को दो वक़्त के खाने और साफ़ पानी पीने के लिए भी मोहताज पाया तो उन्हें बहुत दुःख हुआ। उन्होंने इस सबसे प्रेरित होकर अपने घर के बाहर एक वाटर कूलर लगा दिया ताकि उस रास्ते से गुजरने वाले राहगीर अपनी प्यास बुझा सकें। जो काम घर के बाहर से शुरू हुआ, वह आज पूरी साउथ दिल्ली तक पहुँच चूका है। उन्होंने यहाँ के अलग-अलग इलाकों में लगभग 80 मटके लगवाए हैं और हर सुबह जाकर इन सारे मटकों को स्वच्छ और पीने योग्य पानी से भरते हैं। इस पहल के बारे में नटराजन कहते हैं, “एक बार मेरे वाटर कूलर से पानी भर रहे एक गार्ड को मैंने पूछा कि वह पानी लेने के लिए इतनी दूर यहाँ क्यों आया है, जहाँ काम करता है वहाँ क्यों नहीं पानी लेता है। उसने बताया कि वहाँ उसको पीने के लिए पानी नहीं दिया जाता है।”


दिल्ली में अलग-अलग जगह पर लगवाए गये पानी के मटके
यह जवाब सुनकर नटराजन स्तब्ध रह गये। और यहीं से उनको ग़रीब और जरुरतमंदों की प्यास बुझाने की प्रेरणा मिली। वाटर कूलर लगवाने में बहुत खर्चा आता, इसलिए उन्होंने मिट्टी के मटके रखवाए। नटराजन के इस काम में उन्हें उनके परिवार का पूरा साथ मिला।
जब नटराजन ने यह काम शुरू किया था, तब लोगों को लगता था कि सरकार ने उन्हें इस काम के लिए नियुक्त किया है। पर नटराजन को न तो सरकार से और न ही किसी संस्था से इस काम के लिए मदद मिलती है। वे अपनी जेब से ही पूरा खर्च उठाते हैं और अब उन्हें उनके जैसे ही कुछ अच्छे लोगों से दान के तौर पर मदद मिल रही है।
नटराजन, मूल रूप से बंगलुरु से हैं। पर युवावस्था में ही लंदन चले गए थे और बतौर व्यवसायी उन्होंने 40 साल वहाँ बिताए। लेकिन नटराजन को वहाँ आंत का कैंसर हो गया था। इलाज करवाने के बाद उन्होंने भारत लौटने का फ़ैसला लिया। यहाँ आकर वे एक अनाथालय व कैंसर के मरीज़ों के आश्रम में स्वयंसेवा करने लगे और चांदनी चौक में बेघरों को लंगर भी खिलाने लगे। नटराजन ने एक वैन में 800 लीटर का टैंकर, पंप और जेनरेटर लगवाया है, जिससे वह रोज़ मटकों में पानी भरते हैं। नटराजन ने बताते है, “गर्मी के दिनों में मटके में हमेशा पानी भरा रखने के लिए मैं दिन में चार चक्कर लगाता हूँ। गर्मी के महीनों में मटकों में पानी भरने के लिए रोज़ 2,000 लीटर पानी की ज़रूरत होती है।”मटकों के अलावा उन्होंने जगह-जगह 100 साइकिल पंप भी लगवाए हैं। यहाँ ग़रीब लोग 24 घंटे हवा भरवा सकते हैं।
(साभार – द बेटर इंडिया)

इन्दिरा नूई हो सकती हैं विश्वबैंक के प्रमुख पद की दावेदार

न्यूयॉर्क : व्हाइट हाउस विश्वबैंक के अध्यक्ष पद के लिए शीतल पेय बनाने वाली वैश्विक कंपनी पेप्सिको की पूर्व सीईओ इन्दिरा नूई के नाम पर विचार कर रहा है। भारत में जन्मीं 63 वर्षीय नूई ने 12 साल तक पेप्सिको का कमान संभालने के बाद पिछले साल अगस्त में पद से इस्तीफा दे दिया था। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक खबर के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने ‘नूई को प्रशासनिक सहयोगी’ बताया है। उल्लेखनीय है कि इवांका विश्वबैंक के नये प्रमुख के लिए नामांकन प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रही हैं।
इस प्रक्रिया से अवगत कुछ लोगों के हवाले से खबर में कहा गया है कि विश्वबैंक प्रमुख के चयन की प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है। प्राय: ऐसा होता है कि ऐसे अहम पदों के लिए नामांकन पर अंतिम निर्णय होने तक शुरुआती दावेदार दौड़ से बाहर हो जाते हैं। हालांकि अब तक यह अस्पष्ट है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा नामित किये जाने पर नूई अपने नामांकन को स्वीकार करेंगी या नहीं।
खबरों के मुताबिक ट्वीट में नूई को ‘मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत’ बताकर इवांका ने पेप्सिको की पूर्व सीईओ का नाम विश्वबैंक के संभावित उत्तराधिकारी के पद के लिए आगे किया है। विश्वबैंक के वर्तमान अध्यक्ष जिम योंग किम ने इस महीने की शुरुआत में ऐलान किया है कि वह फरवरी में अपना पद छोड़ देंगे। इसके बाद वह निजी अवसंरचना से जुड़ी निवेश कंपनी से जुड़ेंगे।

मालामाल कर देगा कुम्भ, होगी 1200 अरब की कमाई

लखनऊ : प्रयागराज में संगम की रेती पर बसे आस्था के कुंभ से उत्तर प्रदेश सरकार को 1,200 अरब रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद है। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने यह अनुमान लगाया है। सीआईआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक 15 जनवरी से 4 मार्च तक आयोजित होने वाला कुंभ मेला हालांकि धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन है, मगर इसके आयोजन से जुड़े कार्यों में छह लाख से ज्यादा कामगारों के लिए रोजगार उत्पन्न हो रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 दिन तक चलने वाले कुंभ मेले के लिए आयोजन के लिए 4,200 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं जो वर्ष 2013 में आयोजित महाकुंभ के बजट का तीन गुना है।
सीआईआई के अध्ययन के मुताबिक कुंभ मेला क्षेत्र में आतिथ्य क्षेत्र में करीब ढाई लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा एयरलाइंस और हवाई अड्डों के आसपास से करीब डेढ़ लाख लोगों को रोजी-रोटी मिलेगी। वहीं, करीब 45,000 टूर ऑपरेटरों को भी रोजगार मिलेगा। साथ ही इको टूरिज्म और मेडिकल टूरिज्म क्षेत्रों में भी लगभग 85,000 रोजगार के अवसर बनेंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक इसके अलावा टूर गाइड टैक्सी चालक द्विभाषिये और स्वयंसेवकों के तौर पर रोजगार के 55 हजार नए अवसर भी सृजित होंगे। इससे सरकारी एजेंसियों तथा वैयक्तिक कारोबारियों की आय बढ़ेगी।
सीआईआई के अनुमान के मुताबिक कुंभ मेले से उत्तर प्रदेश को करीब 12 सौ अरब रुपए का राजस्व मिलेगा। इसके अलावा पड़ोस के राज्यों राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को भी इसका फायदा होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि कुंभ में शामिल होने वाले पर्यटक इन राज्यों के पर्यटन स्थलों पर भी जा सकते हैं। कुंभ मेले में करीब 15 करोड़ लोगों के आने की संभावना है। दुनिया का यह सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन पूरी दुनिया में अपनी आध्यात्मिकता और विलक्षणता के लिए प्रसिद्ध है। (भाषा)

मेजबान महाराष्ट्र ने 228 पदक के साथ खेलो इंडिया ट्रॉफी जीती

मुम्बई : मेजबान महाराष्ट्र 85 स्वर्ण, 62 रजत और 81 कांस्य सहित कुल 228 पदक जीतकर खेलो इंडिया यूथ गेम्स (केआईवाईजी)-2019 में रविवार को ओवरऑल ट्रॉफी हासिल की।
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडे़कर और महाराष्ट्र के खेल मंत्री विनोद तावड़े ने शिव छत्रपति स्पोटर्स कॉम्पलेक्स के बैडमिंटन हॉल में आयोजित समापन समारोह में महाराष्ट्र के खिलाड़ियों और अधिकारियों को ट्रॉफी प्रदान की। जावडे़कर ने इस मौके पर कहा कि खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने प्रधानमंत्री के ‘पांच मिनट और’ के संदेश को सार्थक किया है। साथ ही कहा कि सरकार हर स्कूल में एक घंटे के खेल पीरियड को लाने को लेकर प्रतिबद्ध है।
तावड़े ने कहा कि वह ‘सिर्फ पांच मिनट’ नहीं चाहते बल्कि 50 मिनट चाहते हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की हौसलाअफजाई भी की। महाराष्ट्र खेलो इंडिया स्कूल गेम्स 2018 के विजेता हरियाणा से आगे रहा। हरियाणा ने 62 स्वर्ण, 56 रजत और 60 कांस्य पदक सहित 178 पदक जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया।
दिल्ली 48 स्वर्ण, 37 रजत और 51 कांस्य पदक सहित 136 पदक जीतकर तीसरे स्थान पर रहा। खेलों के आखिरी दिन 15 स्वर्ण पदक दांव पर थे। इनमें से आठ पदक तीरंदाजी में थे, जहां मेजबान महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा ने दो-दो पदक जीते। दिल्ली और पंजाब ने एक-एक पदक हासिल किया। हरियाणा ने हाकी में महिलाओं के अंडर-21 वर्ग के फाइनल में स्वर्ण पदक जीता। यह हरियाणा का हाकी में तीसरा स्वर्ण है। उत्तर प्रदेश, बंगाल, तमिलनाडु और केरल ने वॉलीबाल में स्वर्ण पदक जीते। टेबल टेनिस में गुजरात के मानुश शाह ने अंडर-21 वर्ग में स्वर्ण अपने नाम किया जबकि पश्चिम बंगाल की सुरभि पटवारी ने महिलाओं के अंडर-21 वर्ग में सोने का तमगा हासिल किया।
वॉलीबाल में तमिलनाडु और केरल को स्वर्ण
तमिलनाडु और केरल ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में वॉलीबाल प्रतियोगिता के अंडर-21 में क्रमश: लड़कियों और लड़कों के वर्ग में स्वर्ण पदक जीते। लड़कियों के फाइनल में तमिलनाडु ने केरल को 23-25, 11-25, 25-23, 25-18, 15-9 से हराया। पश्चिम बंगाल ने महाराष्ट्र को हराकर कांस्य पदक जीता। लड़कों के अंडर-21 के फाइनल में केरल ने तमिलनाडु को 21-25, 25-15, 25-23, 25-20 से पराजित किया जबकि उत्तर प्रदेश ने पंजाब को हराकर तीसरा स्थान हासिल किया। लड़कियों के अंडर-17 का स्वर्ण पश्चिम बंगाल ने महाराष्ट्र को 25-15, 25-13, 25-14 से हराकर जीता। इस वर्ग में केरल ने कांस्य पदक हासिल किया। उसने तीसरे स्थान के प्लेआफ में तमिलनाडु को हराया। उत्तर प्रदेश ने लड़कों के अंडर-17 में सोने का तमगा जीता। उसने फाइनल में गुजरात को 25-17, 25-20, 25-23 से हराया। इस वर्ग के तीसरे स्थान के मैच में तमिलनाडु ने केरल को पराजित किया।
पारस-सचिन के स्वर्ण से तीरंदाजी में शीर्ष पर हरियाणा
सचिन गुप्ता और पारस हुड्डा ने लड़कों के क्रमश: अंडर-21 और अंडर-17 रिकर्व वर्ग में स्वर्ण पदक जीते जिससे हरियाणा खेलो इंडिया यूथ गेम्स की तीरंदाजी प्रतियोगिता में पदक तालिका में शीर्ष पर रहा। हरियाणा ने तीरंदाजी में दो स्वर्ण, दो रजत और तीन कांस्य पदक सहित कुल सात पदक जीते। गुप्ता ने अंडर-21 वर्ग में आंध्र प्रदेश के बी धीरज को 2-1 से हराया। तेरह वर्षीय हुड्डा ने अंडर-17 वर्ग में अच्छी वापसी की। वह अपने साथी राहुल से एक समय पीछे चल रहे थे लेकिन उन्होंने वापसी करके आखिरी दो सेट जीते। इस बीच महाराष्ट्र की साक्षी शितोल और इशा केतन पवार ने क्रमश: लड़कियों का अंडर-21 रिकर्व और अंडर-17 कंपाउंड वर्ग का स्वर्ण पदक जीता।

गणतंत्र दिवस को लेकर भारतीय वायुसेना ने 5 राज्यों के लिए जारी किया ‘नोटम’

चंडीगढ़ : 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मद्देनजर भारतीय वायुसेना ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिसके तहत देश के पांच राज्यों को ‘नोटम’ जारी किया गया है। गणतंत्र दिवस की तैयारियों के लिए वायुसेना ने कमर कस ली है। एयरफोर्स ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी व चंडीगढ़ के विभिन्न एयरफोर्स स्टेशनों में एक्सरसाइज शुरू कर दी है।
एयरफोर्स ने उक्त सभी राज्यों में ‘नोटम’ जारी किया है। इन राज्यों के एविएशन विभाग को भी संबंधित दिशा-निर्देश भेजे गए हैं। निर्देश में कहा गया है कि नई दिल्ली से 300 किलोमीटर दायरे में कोई भी नॉन शेड्यूल फ्लाइट बिना अनुमति के नहीं उड़ाई जाएगी। प्रतिबंध दस दिन यानी 29 जनवरी तक के लिए जारी रहेगा। दरअसल, उतरी भारत में इन दिनों कोहरे का काफी असर रहता है। लिहाजा कई शेड्यूल फ्लाइट्स लेट हो जाती हैं। इनमें से कई उड़ानें तो रद्द हो जाती हैं, लेकिन कई फ्लाइट्स नॉन शेड्यूल भी उड़ाई जाती हैं। गणतंत्र दिवस को लेकर की जाने वाली एयरफोर्स की एक्सरसाइज में किसी प्रकार का खलल न पड़े, इसलिए नॉन शेड्यूल फ्लाइट पर प्रतिबंध रहेगा।
यदि इमरजेंसी के दौरान कोई नॉन शेड्यूल उड़ान भरनी पड़ी, तो इसके लिए पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के उत्तरी क्षेत्र मुख्यालय से अनुमति लेनी होगी। मुख्यालय की हरी झंडी मिलने के बाद ही उड़ान भरी जा सकेगी।
वीवीआईपी उड़ानों को रहेगी छूट
वहीं, इस दौरान उक्त राज्यों में वीवीआईपी उड़ानों को प्रतिबंध से छूट रहेगी। दरअसल, राज्यों में सीएम, राज्यपाल व अन्य वीवीआईपी लोगों की एक स्थान से दूसरे स्थान पर मूवमेंट होती रहती है। जल्दी पहुंचने के लिए वे हेलीकॉप्टर व एयरक्राफ्ट प्रयोग करते हैं। इसलिए इस तरह की फ्लाइट्स जारी रहेंगी, लेकिन इसकी सूचना एयरफोर्स अथॉरिटी के कंट्रोल रूम को दी जाएगी।
क्या होता है ‘नोटम’
दरअसल, ‘नोटम’का मतलब ‘नोटिस टू एयरमैन’ होता है, जो एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा विशेष परिस्थितियों में जारी किया जाता है। ये नोटिस उड़ान की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों में या किसी खतरे के मद्देनजर विमान पॉयलटों को सतर्क करने के लिए जारी होता है।