Tuesday, July 7, 2026
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जानिए कौन हैं विनायकी..जिनको कहते हैं गणेश का स्त्री अवतार

भगवान गणेश के बारे में आखिर कौन नहीं जानता है हमारे यहां प्रत्येक महीने का चौथा दिन विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है, पर बहुत कम लोग जानते है कि भगवान गणेश का एक स्त्री रूप भी है। मान्यता है कि विनायक का इतिहास केवल मौखिक ही रहा है जिस कारण सदियों पहले ये कहीं खोकर रह गया था पर आज भी कई ऐसी किताबें हैं जो इस बात की तरफ ध्यान आकर्षित करती है कि भगवान गणेश का स्त्री रूप था। इन बातों से इनके स्त्री रूप का प्रमाण मिलता हैं…

इनके मंदिर भी देश के कई राज्यों में हैं

स्त्री गणेश के हैं कई नाम
कई लोगों के इस विषय में अलग अलग कथन है, गणेश जी के स्त्री अवतार को गणेशानी, गजनीनी, गणेश्वरी, गजमुखी के अलावा भी कई और नामों से पुकारा जाता है। मदुरै, तमिलनाडु और व्याग्रपदा में इनकी गणपति के रूप में पूजा की जाती है तो वहीं तिब्बत में गणेश जी के स्त्री रूप की पूजा होती है यहां इनको गणेशानी कहकर पुकारा जाता है।
ऐसे हुआ गणेश का स्त्री अवतार
मत्स्य पुराण और विष्णु-धरमोत्तर पुराण में बताया गया है कि जब राक्षस आंदोक पार्वती का अपहरण करने की कोशिश कर रहा था तब भगवान शिव का त्रिशूल माता पार्वती को लग गया इस कारण जो रक्त जमीन पर गिरा वो स्त्री और पुरुष दो भागों में विभाजित होकर आधी स्त्री और आधा पुरुष का रूप ले लेता जिसे गणेशानी के नाम से जाना गया।

कई प्रतिमाओं में इनका शरीर सुगठित पाया गया है। कहा जाता है कि विनायकी खुद एक देवी हैै जिनका गणेश से कोई सम्बन्ध नहीं है

बौद्ध और जैन साहित्य में दर्ज है कथा
मान्यता ऐसी भी है कि विनायकी एक देवी है ना कि गणेशा की पत्नी, बौद्ध साहित्य की बात करें तो पता चलता है कि इसमें 64 योगियों की बात भी कही गई जिनकी बनावट भी गजानन की तरह ही है। इस तरह की बनावट वाली गणेशनी की इन मूर्तियों को काशी और उड़ीसा में पूजा जाता है इनके हाथ में अक्सर युद्ध की कुल्हाड़ी या परशु होता है। राजस्थान में सबसे पहले इनकी टेराकोटा की मूर्ति पायी गयी थी।
देवी हैं गणेशनी
कई लेखकों ने अपने लेख में इस बात का जिक्र भी किया है कि विनायकी 16वीं शताब्दी में जानकारी में आयी जिसकी आधी बनावट एक हाथी की और आधा शरीर एक सुंदर स्त्री का था इनकी मूर्ति बैठे हुए, खड़े हुए वा नृत्य करते हुए पाई गई। मान्यता ये भी है कि ये खुद एक देवी हैं गणेश जी से इनका कोई संबंध नहीं है।
(साभार – जबलपुर नवरात्रि डॉट कॉम)

साहित्य और फिल्म को जोड़ने का अभिनव प्रयास

कोलकाता :  साहित्य अकादमी और भारतीय भाषा परिषद द्वारा आयोजित साहित्यिक फिल्मोत्सव और बुक बाजार का उद्घाटन आज परिषद सभागार में किया गया। बांग्ला के प्रसिद्ध कथाकार शीर्षेंदु मुखोपाध्याय ने इस अवसर पर परिषद सभाकक्ष में लगे बुक बाजार का उद्घाटन करते हुए कहा कि इस तरह की प्रदर्शनी खुली जगहों पर भी होनी चाहिए ताकि पाठकों को किताबें सहजता से उपलब्ध हो सकें। फिल्मोत्सव का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि साहित्य अकादेमी की विभिन्न भारतीय भाषाओं के साहित्यकारों पर बनाई तथ्यात्मक फिल्में साहित्य के प्रचार प्रसार में सहायक हो सकती हैं। यह फिल्मोत्सव  6 नवंबर तक प्रतिदिन 3 बजे से चलेगा। इसमें सुनील गांगोपाध्याय, केदारनाथ सिंह, महाश्‍वेता देवी, नवकांत बरुआ, गुलजार, सैयद मुस्तफा सिराज, बुद्धदेव बसु आदि प्रसिद्ध साहित्यकारों के जीवन और कृतियों पर बनी फिल्में दिखाई जाएंगी। साथ ही फिल्म निर्देशकों को सम्मानित भी किया जाएगा। इस अवसर पर साहित्य अकादेमी के बांग्ला परामर्श मंडल के संयोजक सुबोध सरकार ने कहा कि यह फिल्मोत्सव भारतीय भाषाओं के बीच सेतुबंधन का काम करेगा। इस अवसर भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने अस्वस्थता के कारण अपने भेजे गए संदेश में कहा कि साहित्य को लोकप्रिय बनाने तथा इसका संदेश जन-जन तक पहुंचाने के लिए ऐसे उत्सवों की बहुत जरूरत है।
साहित्य अकादेमी की तरफ से स्वागत भाषण करते हुए मिहिर कुमार साहू ने कहा कि साहित्य अकादेमी लोक संपर्क करके साहित्यिक व्यक्तित्वों से लोगों का परिचय बढ़ाने का प्रयत्न कर रही है। भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ.शंभुनाथ ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि फिल्में जनता तक पहुंचने का सबल माध्यम हैं और हमें साहित्य के लोकप्रियकरण के लिए यू-ट्यूब आदि माध्यमों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना होगा, क्योंकि नई पीढ़ी साहित्य से कटती जा रही है।

सकारात्मक, उजियारी…खुशियों वाली रहे यह दीवाली

दीवाली आ रही है, आप घर में दीये जलायेंगे। पटाखे फोड़ेंगी..दोस्तों और रिश्तेदारों से मुलाकात होगी या मोबाइल पर शुभकामना भेज दी जाएगी। हर साल यही तो करते आ रहे हैं हम मगर क्या ऐसा कुछ नहीं हो सकता कि दीवाली की सकारात्मकता का प्रकाश बन जाए और उन लोगों के चेहरे पर से अन्धेरे हट जायें, जिनके पास उजाला नहीं है। दरअसल, बात होती है इको फ्रेंडली दीवाली की पर कैसा हो कि यह दीवाली हो पॉजिटिव एनर्जी और खुशियों वाली। तो चलिए हम बताते हैं कैसे –
हर साल दीवाली की सफाई की जाती है। बच्चों की पुरानी किताबें और टेक्स्ट बुक लिए आप कबाड़ी खोजने जा रही हैं तो रुकिये…एक बार देखिए कि क्या कॉपियों में पन्ने बाकी हैं…अगर हैं तो सफेद व खाली पन्नों को अलग कीजिए और उन खाली पन्नों को चमकीले कागज से स्टेपल कीजिए या किसी बाइंडर से करवाइए…हर साल मिठाई के डिब्बे बाँटती हैं। इस बार किसी जरूरतमंद बच्चे या बच्चों को इन खाली पन्नों से बनी चमकीले कागज वाली कॉपियाँ बाँटिए और देखिए खनकती हँसी।
हर साल व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजती हैं तो इस बार रुकिये..सारे बच्चों या घर के सदस्यों के साथ बैठिए और इस बार बनाइए खुद एक ग्रीटिंग कार्ड और उसके साथ डालिए चिट्ठी और उसे सजाकर भेज दीजिए या रिश्तेदार आएँ तो मीठे के साथ ये खत भी दीजिए और कहिए कि वे घर जाकर ही खोलें। अपनेपन की खुशबू मुस्कान न ला दे तो कहिएगा।
दीवाली की सफाई में छोटे कपड़े निकले हैं या कुछ आपकी आलमारी का सामान निकला है तो उसे फेंके नहीं। पहले देखिए कि कहीं कुछ फटा न हो…अगर कपड़े ठीक हैं तो उसे अच्छी तरह धुलवाकर इस्तरी करवाइए और किसी बस्ती में जाकर या किसी संस्था के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को ये कपड़े भिजवा दीजिए..हो गयी टू गुड दीवाली।
अगर आपके पड़ोस में कोई बुर्जुग अकेले हैं तो उनको मन मसोसते न देखें। इस बात की परवाह न करें कि आपका उनका कोई रिश्ता नहीं। एक दीया उनकी देहरी पर रखिए और सम्भव हो तो पूरे घर में उजाला कीजिए। उनको अपने अभिभावकों की तरह आदर दीजिए…और जादू देखिए।
दीवाली में पटाखे लाने का विचार है तो अच्छा है। इस बार पटाखों के साथ मिट्टी के दीए खरीदिए। आपके पास जो वक्त है, उस पर निर्भर करता है, आप इसे पेंट भी कर सकती हैं या करवा सकती हैं या डिजाइनर दीये खरीद सकती हैं। कोशिए कीजिए कि ये दीए और दीवाली का सामान उनके पास से खरीदें…जिनको आपकी जरूरत है। क्या पता आपकी शॉपिंग ही किसी के घर में उजाला भर दे। अब ये सारे दीये अपने रिश्तेदारों और मुहल्लों में बँटवायें।
दीवाली के दिन दफ्तर जाना है तो उदास होकर मत जाइए…ऐसे जाइए कि आपका चेहरा ही रोशनी ला दे। अगर मिठाई ले जा सकती हैं तो बेहतर और ये सम्भव न हो तो सबकी मेज पर एक दीया रख दीजिए…जमकर तस्वीरें खींचिए और खिंचवाइए….हो गयी दीवाली हैप्पी वाली।
इस दिवाली अपने माई – बाबूजी को पॉलिसी का तोहफा दीजिए। यह उनके बुढ़ापे का सहारा होगा।
पैसे के दान से बड़ा है श्रमदान… और इससे भी बड़ा है ज्ञानदान। तो इस दिवाली ज्ञान की ज्योति जलाए और समाज को रोशन करने की कोशिश करें। शुरुआत करें अपने सब्जीवाले के बच्चे से, जो गरीबी के कारण अच्छी शिक्षा नहीं ले पा रहे हैं। आपके घर जो मासी आती हैं, उनके लिए भी ये आइडिया काम आने वाला है।
सरकार काम करती है और बहुत सी योजनाएँ भी हैं..जरूरत उनको ले जाने की है। आप इन योजनाओं की जानकारी अपने आस – पास के लोगों को दे सकती हैं। आपकी एक छोटी सी पहल किसी के जीवन में उजाला भर सकती है।

रामायण एक्सप्रेस : जहाँ-जहाँ गए श्रीराम, ले जाएगी ट्रेन, बुक हुईं सभी सीटें

भारतीय रेल के लिए रामायण सर्किट पर चलाई जाने वाली विशेष टूरिस्ट ट्रेनें लाभ का सौदा साबित हो रही हैं। पहली ट्रेन से उत्साहित होकर रेलवे तीन और ऐसी रेलगाड़ियां शुरू करने जा रहा है। ये रेलगाड़ियां देशके अलग अलग हिस्से से शुरू होकर रामायण से जुड़े तीर्थ स्थलों का सैर कराएंगी। पहली ट्रेन दिल्ली से चेन्नई के बीच 14 नवम्बर से आरंभ हो रही है।
रेल अधिकारियों का कहना है कि स्पेशल ट्रेनों में आम तौर पर 50 से 60 फीसदी सीटें ही भरती हैं, पर रामायण एक्सप्रेस की 7 जुलाई को घोषणा के 15 दिन के अंदर ही इसकी सभी सीटें बुक हो गईं। अब आईआरसीटीसी ऐसी ही तीन टूरिस्ट ट्रेन राजकोट, जयपुर और मदुरै से शुरू करने जा रहा है। इनमें से सभी ट्रेनें अयोध्या अवश्य जाएंगी जो भगवान राम की जन्मस्थली मानी जाती है।
इसके अलावा रामायण से जुड़े स्थल हनुमान गढ़ी, रामकोट और कनकभवन मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। इसके अलावा ट्रेन का ठहराव नंदीग्राम, सीतामढ़ी, जनकपुर, वाराणसी, प्रयागराज, श्रींगवेरपुर, चित्रकूट, नासिक, हंपी और रामेश्वरम में होगा। आईआरसीटीसी के अधिकारी बताते हैं कि रेलवे यात्रियों को उन तीर्थस्थलों तक ले जाएगी, जहां तक ट्रेन नहीं जाती। जैसे सीतामढ़ी से जनकपुर तक का सफर सड़क मार्ग से करना होगा।
800 यात्री एक ट्रेन में
रामायण एक्सप्रेस में स्लीपर क्लास होगा। इसमें 800 यात्रियों के लिए स्थान उपलब्ध होगा। जो लोग श्रीलंका जाना चाहेंगे वे चेन्नई से कोलंबो फ्लाईट से जा सकते हैं। यात्रियों की माँग के अनुसार इन ट्रेनों में अलग अलग बोर्डिंग प्वाइंट भी तय किया जा सकता है। मदुरै से खुलने वाली ट्रेन भी 14 नवंबर से शुरू होगी। इसमें एक व्यक्ति का किराया 15120 रुपये होगा। यह ट्रेन, नासिक, दरभंगा, देवीपट्टनम, थिरुपुलानी भी जाएगी।जयपुर से रामायण सर्किट ट्रेन 22 नवंबर को शुरू होगी। यह ट्रेन अलवर, रेवाड़ी और दिल्ली से भी यात्रियों को लेकर आगे चलेगी। इस ट्रेन का नाम रामायण यात्रा या रामायण एक्सप्रेस होगा। गुजरात के राजकोट से ट्रेन 7 दिसंबर को आरंभ होगी। इस ट्रेन पर यात्री सुरेंद्रनगर, विरमगाम, साबरमती, आणंद, वडोदरा, गोधरा, दाहोद और मेघनगर से सवार हो सकेंगे।

 जानिए धन्वन्तरी और धनतेरस को

हिन्दू धर्म में दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इसे भगवान धन्वन्तरि के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है। इस दिन को भगवान कुबेर और धन की देवी मां लक्ष्मी की अराधना से जोड़ा जाता है। इनकी पूजा कर धनवान बनाने के लिए प्रार्थना की जाती है। इस साल धनतेरस 5 नवंबर 2018 को है। इस दिन नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। समुद्र मंथन के बाद भगवान धन्वंतरी प्रकट हुए थे। तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था इसलिए इस दिन धातू से जुड़े बर्तन या आभूषण खरीदने का चलन निकल पड़ा। मान्यता है कि इस दिन खरीददारी करने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। इस अवसर पर धनिया के बीज खरीद कर भी लोग घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों में या खेतों में बोते हैं। धन्वंतरी आयुर्वेद के चिकित्सक थे, जिन्हें देव पद प्राप्त था। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये भगवान विष्णु के अवतार थे और इनका पृथ्वी लोक में अवतरण समुद्र मंथन के समय हुआ था। शरद पूर्णिमा को चंद्रमा, कार्तिक द्वादशी को कामधेनु गाय, त्रयोदशी को धन्वंतरी, चतुर्दशी को काली माता और अमावस्या को भगवती लक्ष्मी जी का सागर से प्रादुर्भाव हुआ था। इसीलिये दीपावली के दो दिन पूर्व धनतेरस मनाया जाता है।
धनतेरस का महत्व:
1. इस दिन नए उपहार, सिक्का, बर्तन व गहनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। शुभ मुहूर्त में पूजन करने के साथ सात धान्यों की पूजा की जाती है. सात धान्य में गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौ, चावल और मसूर शामिल होता है।
2. धनतेरस के दिन चांदी खरीदना शुभ माना जाता है।
3. भगवान धन्वन्तरी की पूजा से स्वास्थ्य और सेहत मिलता है। इस दिन ही दीपावली की रात लक्ष्मी गणेश की पूजा हेतु मूर्ति भी खरीदते हैं।

दीवाली पर चमचमाए आपका फर्नीचर

दिवाली आते ही हर साल आप ढेरों तैयारियों में जुट जाती हैं। घर के कोने-कोने की सफाई शुरू हो जाती है। घर की दीवारों की पेंटिंग, घर की सजावट वाले सामान, रोशनी की व्यवस्था जैसी हर छोटी-बड़ी बात का पूरा ध्यान रखती हैं। आपकी इन तैयारियों का एक अहम हिस्सा घर का फर्नीचर भी होता है। अब इसे बार-बार तो बदला नहीं जा सकता। हां, इसका रख-रखाव इसे नये जैसा जरूर बनाए रखता है। ऐसे में जरूरी है फर्नीचर को समझना और उसी हिसाब से उसकी देखभाल करना। तभी वो अपनी रंगत बरकरार रख पाते हैं। इसके अलावा अगर इस बार आप घर के लिए नया फर्नीचर खरीदने या बनवाने जा रही हैं तो सिर्फ उसकी डिजाइन पर ध्यान देना जरूरी नहीं है। और भी कुछ बातें हैं जिनका पता लगाकर फर्नीचर घर लाइए, ताकि वो कई सालों तक आपका साथ दें।
फर्नीचर की सफाई को आपने रोज का नियम बना लिया है, तो थम जाइए। ये उसकी रंगत जल्दी फीकी कर देता है। फर्नीचर को चाहिए हफ्ते की सिर्फ एक सफाई। फर्नीचर में अगर पॉलिश सही तरीके से है तो उसमें धूल वैसे ही नहीं जमती। ऐसे में आप सूती कपड़े पर थोड़ा पानी छिड़क कर सफाई करें। हां, अगर पॉलिश नहीं चढ़ी है तो सूखे कपड़े से झाड़ दें। वैसे अनपॉलिश्ड वुड घर पर नहीं रखना चाहिए। वो कीड़ों के लिए खाने का सीधा न्योता है। अगर फर्नीचर पर कहीं अनपॉलिश्ड सतह है भी तो उसको सूखे कपड़े से ही साफ करें।
बचाव है जरूरी
लकड़ी प्राकृतिक होती है, इसलिए कीड़ों के लिए भोजन का काम भी करती है। इसके साथ ही लकड़ी हाइड्रोस्कोपिक भी होती है यानी उसे पानी खासा पसंद है। इन दोनों ही चीजों से लकड़ी को बचाना बेहद जरूरी है। पानी से बचाव के लिए फर्नीचर पर कोटिंग या पॉलिश करवाना जरूरी होता है। वहीं कीड़ों से बचाने के लिए आप प्रिजरवेशन करवाना न भूलें। सबसे सस्ता और आसानी से उपलब्ध प्रिजरवेटिव बोरेक्स बोरिक एसिड है, जो फर्नीचर पर लगा सकती हैं। फर्नीचर बनवाने जा रही हों या पॉलिश करवा रही हों तो प्रिजरवेटिव जरूर लगवाएं।
घर पर तैयार करें पॉलिश
पॉलिश सिर्फ फर्नीचर को चमक देने के मकसद से नहीं लगाई जाती है, वो उसका बचाव भी करती है। इसके लिए कई बार लोग बाजार की वैक्स पॉलिश का इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन ऐसा करना लंबे समय बाद फर्नीचर की सेहत खराब कर देता है। इस काम के लिए घर पर ही पॉलिश तैयार की जा सकती है। इसके लिए आपको चाहिए, सिरका और ऑलिव ऑयल। एक बरतन में एक हिस्सा सिरका और तीन चौथाई हिस्सा ऑलिव ऑयल डालकर मिलाएं। अब इस पॉलिश को सूती कपड़े की मदद से फर्नीचर पर लगा दें। जब भी फर्नीचर पुराना सा लगने लगे तो आप इस पॉलिश का इस्तेमाल कर सकती हैं। सिरका एंटी फंगल और एंटी माइक्रोबल होता है, जो कीड़ों से फर्नीचर को बचाता है। इस काम में नीम के तेल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
वातावरण का प्रभाव
फर्नीचर कितना लंबा चलेगा ये उसकी कोटिंग पर निर्भर करता है। इसलिए जरूरी है कि वातावरण के हिसाब से उसकी कोटिंग का चुनाव किया जाए। घर के भीतर रखे जाने वाले सभी फर्नीचर में इंटीरियो वाली कोटिंग होती है। इन्हें ऑयल फिनिश कहते हैं। ये सिर्फ हल्की नमी से बचाव कर फर्नीचर को चमक देते हैं। ऐसे फर्नीचर को खिड़की आदि के पास रखने से बचें वरना फर्नीचर जल्दी खराब हो जाएगा। अगर आप खुले में फर्नीचर रखना चाहती हैं तो उसमें एक्सटीरियर वाली कोटिंग करवा लें। लकड़ी के अंदर लिगनिंन होता है, जो धूप से पीला पड़ने लगता है। इसी कारण बाहर रखे जाने वाले फर्नीचर पर यूवी रेजिस्टेंट पॉलीयूरेथिन पॉलिश, जिसमें नैनो जिंक ऑक्साइड का इस्तेमाल होता है, लगाना जरूरी है।
न गले दरवाजा
कई बार पानी की मार से बचाने के लिए बाथरूम के दरवाजे पर लोग टिन या एल्यूमीनियम की शीट लगवा देते हैं। लेकिन कभी गौर किया है कि दरवाजा उसके बाद भी गल जाता है। दरअसल कोई भी लकड़ी अपनी समतल सतह से पानी नहीं सोखती है। वो अपने किनारों से ही पानी सोखती है। दरवाजे हमेशा नीचे या ऊपर से गलना शुरू होते हैं। इनके बचाव के लिए आप किनारों पर हर दो साल में ऐरेलडाइट का सल्यूशन लगवा लें।

गूगल ने आसान किया सर्च हिस्ट्री डिलीट करना

कम्प्यूटर और फोन में कुछ सीक्रेट ब्राउजिंग करने के बाद यूजर अपनी सर्च हिस्ट्री क्रोम की हिस्ट्री में से डिलीट कर देते हैं। जो यूजर सर्च हिस्ट्री को सर्वर में से हमेशा के लिए डिलीट करना चाहते थे, वह माय एक्टिविटी पेज पर जाते हैं। माय एक्टिविटी पेज तक पहुंचना बोझिल लगता है। लेकिन, अब गूगल ने इसे आसान बना दिया है। दरअसल, गूगल क्रोम वेब और मोबाइल के लिए नया अपडेट लाने जा रहा है, जिसमें यह फीचर मिलेंगे। गूगल की दुनिया में यूजर को ‘माय अकाउंट’ देखने के लिए पहले क्रोम ब्राउजर में जीमेल अकाउंट लॉगइन करना पड़ता था। टेक जगत के मुताबिक अब क्रोम ब्राउजर में नया विकल्प आएगा, जिस पर क्लिक करने के बाद सीधे माय अकाउंट पेज पर पहुंचा जा सकता है और अपनी हिस्ट्री को आसानी से डिलीट किया जा सकता है।
जीमेल से भी है विकल्प
जीमेल की मदद से माय अकाउंट में जाने के लिए पहले क्रोम ब्राउजर में अपना जीमेल अकाउंट लॉगइन करना होगा। इसके बाद दाईं ओर ऊपर की तरफ दिए गए प्रोफाइल फोटो पर क्लिक करें। ऐसा करने के बाद माय अकाउंट का विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक कर दें। अब जो नई विंडो खुलेगी उसमें आपको नीचे की तरफ ‘माय एक्टिविटी‘ लिखा मिलेगा। इस माई एक्टिविटी पर क्लिक करें और नई विंडो खुलने का इंतजार करें। इसके बाद आपके सामने जो स्क्रीन खुलेगी उसमें आपके द्वारा सर्च किया गया सभी कंटेंट यानी इंटरनेट सर्च हिस्ट्री आसानी से देख सकते हैं। ‘माय एक्टिविटी’ खोलने के लिए आप अपने क्रोम ब्राउजर में myactivity.google.com टाइप भी कर सकते हैं।
ऐसे करें डिलीट
माय एक्टिविटी पर आपके द्वारा सर्च की गई हिस्ट्री ट्िवटर या फेसबुक की टाइम लाइन की तरह दिखती है। इस हिस्ट्री को डिलीट करने के कई उपाए हैं। पहला तो यह कि यूजर जिस कंटेंट को डिलीट करना चाहते हंै उसके ऊपर तीन बिन्दु दिखाई देंगे। उन पर क्लिक करने के बाद ‘डिलीट’ और ‘डिटेल्स’ का विकल्प खुलेगा। फाइल को सर्च हिस्ट्री से हटाने के लिए डिलीट पर क्लिक कर दें। अगर आपको पूरे एक दिन की हिस्ट्री हटानी है तो सबसे ऊपर अंग्रेजी में ‘टुडे’ लिखा मिलेगा। टुडे के पास दिए गए तीन बिन्दुओं वाला विकल्प दिखेगा, उस पर क्लिक करने के बाद डिलीट का विकल्प आएगा और उसे दबा दें। दबाते आज के दिन की सर्च की गई इंटरनेट हिस्ट्री एक साथ खत्म हो जाएगी।

ऑन डिमांड पंडिताई बनकर कीजिए कमाई

तकनीक ने ऐसे नए-नए स्टार्टअप पैदा कर दिए हैं। हैलो पंडितजी डॉट कॉम’, ‘माय ओम नमो ऐप’, ‘पूजापाठ सॉल्युशन डॉट कॉम’, ‘पंडित ऑन डिमांड’, ‘बुक योर पंडित’ आदि कंपनियां करोड़ो की कमाई कर रही हैं।
आधुनिक टेक्नोलॉजी ने धर्म-कर्म के स्टार्टअप के लिए भी तरह-तरह के अवसर पैदा कर दिए हैं। मसलन, ‘हैलोपंडितजीडॉटकॉम’, ‘माय ओम नमो ऐप’, ‘पूजापाठसॉल्यूशनडॉटकॉम’, ‘पंडितऑनडिमांड’, ‘बुकयोरपंडित’, ‘वेयरइजमाईपंडित’ आदि-आदि।
ऐसे पोर्टल लॉन्च होने से पहले पंडितों का टेक्नोलॉजी से सम्पर्क सिर्फ जस्टडॉयल के माध्यम से हो पाता था। अब यजमानों को किराये पर पंडित उपलब्ध कराने वाले मकरंद और प्राजक्ता की ‘माय ओम नमो ऐप’ कंपनी अब तक बहत्तर करोड़ रुपए कमा चुकी है। ‘हैलो पंडितजी डॉट कॉम’ को लगभग दो करोड़ का मुनाफा हुआ है तो ‘पूजा पाठ सॉल्यूशन डॉट कॉम’ ने इस दिशा में कई सारे विकल्प पैदा कर दिए हैं।
आज दुनिया में आध्यात्मिक बाजार लगभग तीस अरब डॉलर की हो चुका है। ऑनलाइन पूजन सामग्री उपलब्ध कराने का काम करोड़ों के कारोबार में तब्दील हो चुका है। आईआईटी दिल्ली से बिजनेस मैनेजमेंट कर चुके ऑनलाइन यजमानी से लगभग दो करोड़ की कमाई करने वाले बांदीकुई (राजस्थान) के चन्द्रशेखर ‘हैलो पंडितजीडॉटकॉम’ के माध्यम से पूजा-पाठ की सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ही पुरोहित भी मुहैया करा रहे हैं। पंडितजी को घर से लाने-ले जाने के लिए ओला कैब की भी सुविधा दे रहे हैं। चंद्रशेखर बताते हैं कि कुछ समय पहले हरिद्वार में एक एनआरआई दम्पति से उनकी मुलाकात हुई थी। उनको अपने पूर्वजों के पिंडदान के लिए ऑनलाइन पंडित की जरूरत थी। उसके बाद ही उन्होंने हैलोपंडितजीडॉटकॉम नाम से पूजापाठ कराने वाली अपनी कम्पनी को लॉन्च कर दिया। उनकी कम्पनी अमिताभ बच्चन, जैकी श्रॉफ, हेमा मालिनी, धर्मेंद्र कुमार, अभिषेक बच्चन आदि को ऑनलाइन पंडित उपलब्ध करा चुकी है। इस समय देश के दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई, पुणे, भोपाल, इंदौर, लखनऊ आदि लगभग दो दर्जन महानगरों में उनकी कंपनी का नेटवर्क सक्रिय है। इसी तरह पूजापाठ वाली एक अन्य कम्पनी है ‘माय ओम नमो ऐप’। पचास लाख रुपए लगाकर यह स्टार्टअप शुरू करने वाले दम्पति मकरंद और प्राजक्ता को भी दुबई से उसी तरह आइडिया मिला जैसे एक अन्य एनआरआई से राजस्थान के चन्द्रशेखर को। कंपनी की इस साल लगभग 72 करोड़ रुपए की कमाई हुई है। कम्पनी का वर्ष 2020 तक दस करोड़ डॉलर कमाने का लक्ष्य है। इस समय इस कंपनी के ढाई हजार तो पंजीकृत पुरोहित हैं, जो 12 भाषाओं में पूजा कर सकते हैं। कंपनी हर साल हजारों यजमानों के पूजापाठ करा रही है। बीते दो वर्षों में देश में पांच हजार और अमेरिका में एक हजार लोगों ने इस कंपनी के माध्यम से पूजा कराई है। इस ऐप के माध्यम से लोग पंडित बुक कराने के साथ ही कंपनी के ई-स्टोर पर फल-फूल, केले-तुलसी के पत्ते, प्रसाद आदि पूजन सामग्री का ऑर्डर भी दे सकते हैं। कम्पनी ऑर्गेनिक पूजा सामग्री के अलावा प्रतिदिन की धार्मिक गतिविधियों, ब्राम्हण भोज, भजन कीर्तन, माता की चौकी, मंदिर में दान-दक्षिणा, एस्ट्रोलॉजी, वास्तु एक्सपर्ट, टैरो कार्ड रीडर, मंदिर में वीआईपी एंट्री आदि की सेवाएं भी दे रही है। अब कम्पनी बच्चों के लिए धार्मिक कार्टून सीरिज शुरू करने वाली है। यह कम्पनी भारत के अलावा यूएई, स्पेन, घाना, मलेशिया, सिंगापुर, बहरीन, ओमान तक बिजनेस कर रही है। कंपनी को यूएई से 10 लाख डॉलर की फंडिंग भी मिल चुकी है।
आज ऐसे स्प्रिचुअल स्टॉर्टअप, इक्का-दुक्का नहीं, सैकड़ों हैं। ‘पूजपाठसॉल्युशन डॉटकॉम’ कंपनी तो बाकायदा फ्रेंचाइजी भी चला रही है। इस कंपनी की निःशुल्क वर्गीकृत विज्ञापन वेबसाइट भी है, जिसके माध्यम से पूजन सामग्री, पूजा एसेसरीज, प्रसाद, पंडित बुकिंग, पूजा सर्विस, कुडंली, कथा, दोष निवारण, जाप, यज्ञ, हवन, पिंडदान, ईपूजा, ज्योतिष, अंकशास्त्री, वास्तुशास्त्री, सुदंरकांड, भागवत कथा, भगवान के जेवर -वस्त्र-रत्न, फेंगशुई, श्रीयंत्र, गुडलक बांबू, धार्मिेक म्युजिक, धार्मिक बुक, ज्योतिष मैग्जीन, गंगाजल, कंडे, गोमूत्र, मूर्ति, रूद्राक्ष, अगरबत्ती, धूपबत्ती आदि प्राप्त किए जा सकते हैं। इसके माध्यम से यजमान पूजा पाठ के लिए सीधे पंडित से संपर्क कर सकते हैं। इस कम्पनी की चार ऑनलाइन सेवाएं हैं- पूजापाठ सॉल्यूशन वेबसाइट, पूजापाठ सॉल्युशन ब्लॉग, पूजापाठ साल्युशन युट्यूब चैनल तथा पूजापाठ सॉल्युशन एप। इनके माध्यम से प्रवचन, प्रोग्राम आदि का लाइव प्रसारण भी किया जा सकता है। यहां तक सुविधा है कि इस कंपनी से जुड़कर कोई भी बेरोजगार हर माह तीस हजार रुपए तक कमा सकता है। इसी तरह मुंबई में मोहन शुक्ला ‘वेयर इज माई पंडित’ वेबसाइट चला रहे हैं। इस पोर्टल से सीधे डेढ़ सौ पंडित जुड़े हुए हैं। चेन्नई में ‘प्रीस्ट सर्विसेज’ कंपनी कुंभकोणम के पुजारियों को मौका मुहैया करा रही है। ‘पंडित ऑन डिमांड’ कंपनी छह-छह हजार रुपए लेकर सबसे ज्यादा गृह-प्रवेश के कर्मकांड करा रही है। राहुल कुमार ‘घर का पंडित’ पोर्टल चला रहे हैं।

(साभार योर स्टोरी)

निजी स्कूलों के खातों का ऑडिट क्यों नहीं : हाईकोर्ट

नयी दिल्ली : राजधानी में निजी स्कूलों के खातों का हर साल ऑडिट नहीं कराए जाने पर हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार और नगर निगमों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। हाईकोर्ट ने सरकार और नगर निगमों को यह बताने के लिए कहा है कि सभी निजी स्कूलों के खातों का हर साल ऑडिट क्यों नहीं कराया जा रहा है। चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस अनूप जे. भम्भानी की पीठ ने निजी स्कूलों के खातों का हर साल ऑडिट कराने और अन्य मांगों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर यह आदेश दिया है। गैर सरकारी संगठन जस्टिस फॉर ऑल की याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद निजी स्कूलों के खातों का हर साल ऑडिट कराने में सरकार विफल रही है। राजधानी में दिल्ली सरकार के अलावा नगर निगम भी निजी स्कूलों को मान्यता देती है, इसलिए नगर निगमों से भी रिपोर्ट मांगा गया है। पीठ ने सभी पक्षों को 4 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी को होगी। संगठन की ओर से अधिवक्ता खगेश झा ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मॉडर्न स्कूल मामले में सरकार को सभी निजी स्कूलों के खातों की हर साल ऑडिट कराने और यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया था कि छात्रों से जिस मद में पैसा लिया जा रहा है, वह उसी मद में खर्च हो। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, सरकारी जमीन पर बने स्कूलों में हर साल फीस बढ़ाने से पहले और निजी जमीन पर बने स्कूलों में बाद में खातों के ऑडिट कराने का प्रावधान है।
हाईकोर्ट ने तीनों निगमों और नई दिल्ली पालिका परिषद से यह बताने के लिए कहा है कि सरकारी जमीन पर बने उनसे मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में बिना पूर्व मंजूरी के फीस में कैसे बढ़ोतरी हो रही है। हाईकोर्ट ने यह आदेश तब दिया जब याचिकाकर्ता संगठन ने कहा कि सरकार के शिक्षा निदेशालय सरकारी जमीन पर बने स्कूलों को फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं देती है। लेकिन नगर निगम व परिषद इस निर्देश का पालन नहीं कर रहे हैं।
याचिका में कहा गया है कि सरकारी जमीन पर बने निजी स्कूलों में फीस बढ़ाने से पहले दिल्ली सरकार ऑडिट कराती है और इससे अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है। अधिवक्ता खगेश ने पीठ को बताया कि लेकिन सरकार निजी भूमि पर बने निजी स्कूलों के खातों का बाद में ऑडिट नहीं करा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की इस विफलता के कारण उन स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी होती है। याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि नगर निगम न तो सरकारी और न ही निजी जमीन पर बने उन स्कूलों के खातों की ऑडिट कराता है जिसे उसने मान्यता दी है। पीठ को बताया गया है कि स्कूल प्रत्येक वर्ष अपने लेखा-जोखा को भी शिक्षा निदेशालय में पेश नहीं करता है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के एक संघ की उस मांग को ठुकरा दिया, जिसमें वह इस मामले में पक्षकार बनने का आग्रह कर रहा था। हाईकोर्ट ने कहा कि यह सरकार और अभिभावकों के बीच का मामला है और इसमें स्कूल की कोई भूमिका नहीं है। पीठ ने कहा कि फिर भी यदि स्कूल मामले में पक्षकार बनना चाहता है तो वह इसके लिए उचित अर्जी दाखिल करे और हम बाद में विस्तृत आदेश पारित करेंगे।

देश के लिए फुटबॉल खेल चुकी ये महिला खिलाड़ी अब बेचती है चाय

जलपाईगुड़ी : 10 साल पहले देश की नुमाइंदगी करने वाली एक महिला फुटबॉलर आर्थिक तंगहाली के कारण यहां सड़क पर चाय बेचने को मजबूर है। 26 वर्षीय कल्पना रॉय अभी भी 30 लड़कों को दिन में दो बार प्रशिक्षण देती है। उसका सपना एक बार फिर देश के लिए खेलने का है। कल्पना को 2013 में भारतीय फुटबॉल संघ द्वारा आयोजित महिला लीग के दौरान दाहिने पैर में चोट लगी थी। उन्होंने बताया, ‘मुझे इससे उबरने में एक साल लगा। मुझे किसी से कोई आर्थिक मदद नहीं मिली। इसके अलावा तब से मैं चाय का ठेला लगा रही हूं।’ उसके पिता चाय का ठेला लगाते थे लेकिन अब वो बढ़ती उम्र की बीमारियों से परेशान है। कल्पना ने कहा, ‘सीनियर राष्ट्रीय टीम के ट्रायल के लिए मुझे बुलाया गया था लेकिन आर्थिक दिक्कतों के कारण मैं नहीं गई। मेरे पास कोलकाता में रहने की कोई जगह नहीं है। इसके अलावा अगर मैं गई तो परिवार को कौन देखेगा। मेरे पिता की तबीयत ठीक नहीं रहती।’ कल्पना पांच बहनों में सबसे छोटी है। उनमें से चार की शादी हो चुकी है और एक उसके साथ रहती है। उसकी मां का चार साल पहले निधन हो गया। अब परिवार कल्पना ही चलाती है। कल्पना ने 2008 में अंडर-19 फुटबॉलर के तौर पर चार अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। अब वो 30 लड़कों को सुबह और शाम कोचिंग देती है । वो 4 बजे दुकान बंद करके दो घंटे अभ्यास कराती है और फिर दुकान खोलती है। कल्पना ने कहा, ‘लड़कों का क्लब मुझे 3000 रुपये महीना देता है जो मेरे लिए बहुत जरूरी है।’ कल्पना ने कहा कि वो सीनियर स्तर पर खेलने के लिए फिट है और कोचिंग के लिए अनुभवी भी। उन्होंने कहा, ‘मैं दोनों तरीकों से योगदान दे सकती हूं। मुझे एक नौकरी की जरूरत है ताकि परिवार चला सकूं।’