नयी दिल्ली : वायु की गुणवत्ता खराब होने तथा शहरीकरण की रफ्तार बढ़ने से देश में प्रदूषण रोधी मास्क की माँग बढ़ रही है। उद्योग मंडल एसोचैम ने एक रिपोर्ट में कहा कि भारत में प्रदूषण से बचाने वाले मास्क का बाजार 2023 तक बढ़कर 1.68 करोड़ डॉलर यानी 118 करोड़ रुपये पर पहुंच जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का प्रदूषण रोधी मास्क का बाजार 2023 तक 1.68 करोड़ डॉलर होगा जो 2017 में 61.6 लाख डॉलर या करीब 43 करोड़ रुपये का था। एसोचैम का कहना है कि वायु में भारत के उत्तरी इलाकों में प्रदूषकों के उच्चस्तर की वजह से प्रदूषण रोधी मास्क की मांग बढ़ रही है। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवा पर प्रति व्यक्ति खर्च बढ़ने और जागरूकता बढ़ने की वजह से देश में प्रदूषण रोधी मास्क की मांग आगामी वर्षों में बढ़ेगी।
जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर वैश्विक आतंकवादी घोषित
संयुक्त राष्ट्र : पाकिस्तान में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को आखिरकार बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया। अजहर का आतंकवादी समूह 2000 में अस्तित्व में आया था। उसने भारत में पुलवामा आतंकवादी हमले सहित कई आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी ली है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर किए हमले की जिम्मेदारी भी जैश ने ली थी, जिसमें 40 जवान शहीद हो गए थे।
अजहर से जुड़े मुख्य घटनाक्रम इस प्रकार हैं:-
2009: भारत ने अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया, जिससे उसके विश्व में कहीं भी यात्रा करने पर प्रतिबंध लग जाता, उसकी संपत्ति पर रोक लग जाती और उस पर हथियार संबंधी पांबदी भी लागू होती। लेकिन चीन ने इस कदम को रोक लगा दी।
2016: भारत ने एक बार फिर पी3 (अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस) के समर्थन के साथ संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति में अजहर पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव पेश किया।
2017: पी3 देशों ने भी ऐसा ही एक प्रस्ताव पेश किया। लेकिन सुरक्षा परिषद में वीटो प्राप्त चीन ने फिर इस प्रस्ताव को पारित नहीं होने दिया।
27 फरवरी 2019: अमेरिका, ब्रिटेन फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए एक नया प्रस्ताव पेश किया।
13 मार्च 2019: जैश प्रमुख को काली सूची में डालने के प्रयास को एक बार फिर चीन ने पूरा नहीं होने दिया। अजहर को एक वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने का पिछले 10 वर्ष में यह चौथा प्रयास था।
28 मार्च 2019: अमेरिका ने फ्रांस और ब्रिटेन के समर्थन से पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी समूह के प्रमुख को काली सूची में डालने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीधे एक मसौदा प्रस्ताव पेश किया।
3 अप्रैल 2019: अमेरिका की जैश प्रमुख को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए ‘‘मौजूद सभी साधनों’’ का इस्तेमाल करने की धमकी पर चीन ने कहा कि वॉशिंगटन मामले को उलझा रहा है और यह दक्षिण एशिया में शांति एवं स्थिरता के लिए सही नहीं है।
30 अप्रैल 2019: चीन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने की प्रक्रिया में ‘‘कुछ प्रगति’’ हुई है और उसे उम्मीद है कि यह विवादस्पद मुद्दा ‘‘ठीक तरह से हल’’ होगा ।
1 मई 2019: चीन के अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के प्रस्ताव पर से रोक हटाने के बाद 1267 प्रतिबंध समिति ने अजहर को एक वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया।
चुनावी मौसम में खादी की बढ़ी माँग, सालाना बिक्री तीन हजार करोड़ के पार
आम चुनावों के दौरान खादी के कुर्ता-पायजामा, अंगोछा, गमछा की माँग काफी बढ़ी है। यही वजह है कि मार्च में समाप्त वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान खादी का कारोबार इससे पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 29 फीसदी की जोरदार वृद्वि के साथ 3,215 करोड़ रूपये के रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया।
खादी ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने बातचीत में यह जानकारी देते हुए कहा कि पिछले 5 साल की यदि बात की जाये तो 2013-14 के बाद खादी के कारोबार में चार गुना वृद्वि दर्ज की गयी है। वर्ष 2013-14 में खादी का कारोबार 811 करोड़ रूपये रहा था जो कि 2018-19 में समाप्त वित्त वर्ष में 3,215 करोड़ रूपये पर पहुंच गया।
सक्सेना ने कहा कि बीते वित वर्ष में आम चुनावों को देखते हुए खादी के कपड़ों की मांग अच्छी रही है। उन्होंने कहा कि गर्मी का मौसम होने की वजह से नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को धूप और गर्मी में काम करना पड़ता है। गर्मी के मौसम में खादी का कपड़ा ज्यादा पहना जाता है। यह धूप और गर्मी में आरामदायक होता है। स्वास्थ्य के लिहाज से भी खादी के कपड़े अनुकूल और फायदेमंद बताए गए हैं।
केवीआईसी के चेयरमैन ने कहा कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत देश के तमाम राज्यों में खादी के कपड़ों और खासतौर से सिले सिलाए कपड़ों की माँग तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि बीते वर्ष के दौरान खादी की बिक्री में 40 प्रतिशत हिस्सा कपड़े का रहा है जबकि 60 फीसदी बिक्री सिले सिलाए कपड़ों की हुई है। देश के दूरदराज गांवों में कारीगरों द्वारा तैयार खादी का कुर्ता पायजामा, जैकेट, अंगोछा, गमछा, महिलाओं के लिए सूट सलवार, धोती साड़ी की लगातार माँग बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में केवीआईसी के एक हजार से अधिक और बिहार में 400 से अधिक बिक्री केन्द्र हैं। बीते वर्ष इन केन्द्रों पर खादी के कपड़ों की अच्छी मांग रही है। देश भर में आयोग के कुल मिलाकर 8,060 बिक्री केन्द्र हैं।
सक्सेना कहते हैं कि यदि 2004 से 2014 की बात की जाए तो इस दौरान खादी के बिक्री कारोबार में करीब सात फीसदी की ही वृद्वि दर्ज की गई जबकि पिछले पांच साल के दौरान यह वृद्वि दहाई अंक से भी ऊपर चली गई थी।
अगर खरीदनी हो नयी कार
आजकल नई-नई कारें बाजार में आ चुकी हैं जिनमे कई अच्छे फीचर्स देखने को मिलते हैं। लेकिन इतने सारे फीचर्स होने के बाद भी अक्सर यह समझ नहीं आता की कौन से फीचर्स सबसे ज्यादा काम के हैं। ऐसे में अगर आप एक नई कार खरीदने की सोच रहे हैं तो यहां हम आपको कुछ ऐसे जरूरी फीचर्स के बारे में बता रहे है जो आपकी नई कार में होने चाइये। आइये जानते हैं…
हमारे हिसाब से हर कार में रिवर्स पार्किंग कैमरा होना चाइये, क्योकिं अक्सर गाड़ी पार्क करते समय पीछे का अंदाजा नहीं होता जिससे कई बार गाड़ी टकरा जाती है और नुकसान पहुंच जाता है। ऐसे में रिवर्स पार्किंग कैमरे और सेंसर की मदद से ड्राइवर को वार्निंग मिल जाती है।
रात में ड्राइविंग करते समय IRVM काफी उपयोगी साबित होता है। प्लेन मिरर में पीछे से आ रही गाड़ियों की लाइट का रिफ्लेक्शन बहुत ज्यादा होता है, जिससे ड्राइवर को परेशानी होती है। जबकि IRVM में यह रिफ्लेक्शन कम हो जाता है। एंट्री लेवल कारों में IRVM नहीं मिलते ऐसे में आप बाजार से इसे लगवा सकते हैं।
आजकल लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल हर वक़्त करते नज़र आते हैं। जिसकी वजह से फोन की बैटरी जल्दी खत्म हो जाती है। ऐसे में एक नई कार में भी यूएसबी चार्जिंग पॉइंट होना बहुत जरूरी है। एंट्री लेवल कारों में अभी भी यह सुविधा नहीं मिलती, आप चार्जिंग पॉइंट पॉइंट बाद में भी लगवा सकते हैं।
हांलाकि यह फीचर महंगी कारों में ही देखने को मिलता है लेकिन एंट्री लेवल मॉडल में फिर भी इसकी कमी देखने को मिलती है। ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल की मदद से आप अपनी गाड़ी के अन्दर का तापमान अपने आप कंट्रोल होता है।
सुनने में आपको जरूर अटपटा लगे लेकिन यह सच है की रोल्स रोयस और स्कोडा जैसे लग्जरी ब्रांड्स अपनी सभी कारों में एक छाता जरूर देती हैं और इसे रखने के लिए भी एक खास जगह कार में बनाई जाती है, दरअसल बारिश के दिनों में छाता काफी काम आता है। बारिश में आप छाते की मदद से आसानी से कार से बाहर निकल सकते हैं।
जो लोग छोटे बच्चों के साथ ज्यादा ट्रैवल करता है उन्हें कार में ISOFIX Mounts जरूर रखना चाइये। यह कार की पिछली सीट पर लगा होता है जिसमें आप बच्चे को बैठा सकते हैं। सुरक्षा के लिहाज से बच्चों को फ्रंट सीट पर नहीं बैठाने की सलाह दी जाती है। ISOFIX Mounts में बैठा बच्चा हादसे के समय सुरक्षित रहता है।
(साभार – अमर उजाला)
इसरो के 5 उपग्रहों ने बचाईं लाखों जान, ‘फानी’ तूफान पर दी हर पल की सूचना
नयी दिल्ली : ओडिशा में चक्रवाती तूफान ‘फानी’ 193 किमी प्रति घंटे की रफ्तार आया. हवा इतनी तेज थी कि कई बड़े पेड़ जड़ों से उखड़ गए. बसें पलट गईं. घरों के दरवाजे और खिड़कियां टूट गयीं। कई जगहों पर टेलीफोन और बिजली के खंबे ढह गए. लेकिन अच्छी बात ये थी कि करीब 11.5 लाख लोगों को सुरक्षित बचाया गया। ऐसा सिर्फ इसलिए हो पाया क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के उपग्रहों ने पहले ही चेतावनी दे दी थी. ये हर 15 मिनट पर ग्राउंड स्टेशन को नई जानकारी दे रहे थे। तूफान फानी को 43 सालों का सबसे खतरनाक तूफान बताया जा रहा है. इसके कारण अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वाले 16 लोगों में से मयूरभंज से चार, व पुरी, भुवनेश्वर और जाजपुर में तीन-तीन एवं क्योंझर, नयागढ़ और केंद्र पाड़ा में एक -एक व्यक्ति शामिल हैं।
इसरो की चेतावनी और पूर्वानुमान की वजह से ओडिशा के करीब 10,000 गांवों और 52 शहरी इलाकों में लोगों को सुरक्षित बचाया जा सका. 5000 से ज्यादा शेल्टर होम तैयार किए गए। इसरो ने इस काम के लिए 5 सैटेलाइट यानी उपग्रह तैनात किए थे। इसरो की Insat-3D, Insat-3DR, Scatsat-1, Oceansat-2 और मेघा ट्रॉपिक्स उपग्रहों ने लगातार ओडिशा पर नजर रखी. इन्होंने अगर समय पर तूफान की पहचान न की होती तो शायद स्थिति बिगड़ जाती।
इसरो के उपग्रह हर 15 मिनट में दे रहे थे तूफान की नयी जानकारी
करीब 7 दिन पहले ही मौसम वैज्ञानिकों ने दक्षिणी हिंद महासागर में निम्न दबाव के चलते चक्रवाती तूफान आने की चेतावनी दी थी। इसरो के 5 उपग्रह लगातार इस पर नजर रख रहे थे. ये हर 15 मिनट पर ग्राउंड स्टेशन को नई जानकारी दे रहे थे। सुरक्षित स्थानों की जानकारी मिलते रहने से लोगों को प्रभावित इलाकों से निकालने में मदद मिली। मौसम विभाग ने बताया कि फानी के केंद्र से 1,000 किमी के दायरे में बादल छाए थे, लेकिन बारिश वाले बादल सिर्फ 100 से 200 किमी के रेंज तक थे. बाकी बादल करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर थे। INSAT सीरीज के उपग्रहों से पहले जो जानकारी मिली, उस पर बारीक नजर रखने के लिए Scatsat-1 को तैनात किया गया. उससे चक्रवाती तूफान के केंद्र पर नजर रखी गयी, फिर Oceansat-2 के जरिए समुद्री सतह, हवा की गति और तूफान के दिशा के बारे में जानकारी मिलती रही। अमेरिका के द न्यूयॉर्क टाइम्स ने फानी तूफान को लेकर भारत और इसरो की तारीफ की है। उसने लिखा है कि इसरो की चेतावनी के बाद भारत सरकार ने अच्छी योजना बनायी। लोगों को को सुरक्षित रहने के लिए 26 लाख मैसेज भेजे गए। 43,000 वॉलेंटियर्स पहले से ही तैनात थे। करीब 1,000 आपातकालीन कर्मचारियों तैनात थे। द वॉशिंगटन पोस्ट ने कहा कि इसरो और सरकार की सर्तकता के कारण बड़ी तबाही छोटी हो गई।
गर्मियों को चाय और दूध के स्वाद से बनाएं कूल
मसाला चाय कुल्फी

सामग्री : 1 कप मसाला चाय, 1 बड़ा चम्मच सौंफ, ¼ कप पिस्ता के टुकड़े, 1 छोटा चम्मच सौंठ का पाउडर, 2 कप रबड़ी
विधि : सौंफ को अच्छे से साफ करके नॉन-स्टिक पैन में भून लें, ठंडा होने के बाद मिक्सी में पीस लें। पिस्ता के टुकडों को भी ख़स्ता होने तक भून लें। एक भगौने में मसाला चाय, सौंफ, सौंठ का पाउडर, भुने पिस्ते और रबड़ी को मिला कर अच्छे से फेंट लें। फिर इस मिश्रण को कुल्फी के साँचो में भर कर 10 घंटे के लिए फ्रीजर में रख दे। 10 घंटे बाद अपने परिवार वालो के साथ इस कुल्फी का आनन्द लें।
दूध की कुल्फी

सामग्री : 1 लीटर दूध (भैंस का दूध हो तो बेहतर) ¼ कप चीनी, ½ कप खोया (फीका मावा), 1 छोटी कटोरी इलायची पाउडर, ¼ कप बादाम और काजू कटे हुये
विधि : सर्वप्रथम एक भगौना/चौड़े पैन में दूध लेकर गैस की मध्यम आंच पर बर्तन को रखेंगे। इसे चम्मच की सहायता से हिलाते रहेंगे जिससे दूध किनारों और नीचे न चिपके। दूध को तब तक उबालते रहेंगे जब तक दूध आधा ना रह जाये। जब दूध आधा हो जाये तो आंच को मध्यम से कम कर देंगे। फिर इसमें चीनी और खोया मिलायेंगे। इन सबको तब तक अच्छे से मिलायेंगे जब तक चीनी और खोया अच्छे से पक नहीं जाते। जब ये पक जायेंगे तब इसमे इलायची पाउडर, बादाम और काजू को डाल देंगे। फिर इसे ठंडा होने के लिए रख देंगे। थोड़ा ठंडा के बाद इस दूध को कुल्फी के साँचो में भरकर फ्रिज में रख देंगे। 15 मिनिट के बाद इसे बाहर निकाल कर परोस देंगे और स्वादिष्ट कुल्फी का लुत्फ उठाएंगे।
स्टाइल से दीजिए गर्मी को मात
गर्मी ने तेजी से अपना कहर ढाना शुरू कर दिया है। मौसम के गर्म मिजाज़ से आप समझ नहीं पाते कि क्या पहनना चाहिए जिससे कॉलेज, ऑफिस या कहीं भी जाने से उन्हें आराम महसूस हो। साथ ही स्टाइलिश भी लगे, ऐसे में गर्मी के मौसम में कपड़ों का चुनाव करना कठिन काम लगता है।
परिधान
गर्मी के दिनों में स्टाइलिश दिखने के साथ-साथ आरामदायक महसूस करने के लिए थोड़ा ढ़ीला-ढ़ाला कॉटन या लेनिन शर्ट, टी- शर्ट और जींस की जगह कॉटन पैंट, कॉटन चीनोस जींस पहने । कपड़ों का चुनाव करते समय उसके रंगो पर ध्यान देना बहुत जरुरी है, भड़कीले रंगो की जगह हल्के रंग के कपड़े उपयोग करें। इसके साथ ही काले रंग के कपड़े का दिन के समय उपयोग नही करना चाहिए।
चश्मा
गर्मियों में पुरुषों के लिए चश्मा सबसे पसंदीदा एक्सेसरीज़ है। यह क्लासी लुक के साथ-साथ आपको धूप की अल्ट्रावॉयलट किरणों से भी आराम देता है। गर्मी में स्टाइलिश लगने के लिए ब्लैक,ब्राउन और सी-ब्लू कलर के ग्लासेस वाले चश्मों को ही चुनना चाहिए। इसके अलावा मेटल की जगह फाइबर कोटेड़ फ्रेम का उपयोग करना सही रहेगा।

घड़ी
हाथ घड़ी जो समय बताने के साथ आपके स्टाइलिश लुक को पूरा करता है, गर्मियों में स्टाइलिश लुक पाने के लिए ब्लू,यलो,ब्राउन डायल के साथ कॉटन या लेदर बेल्ट वाली घड़ी पहन सकते हैं।
स्टाइलिश और आरामदायक हो फुटवियर
गर्मी में पसीना आना लाज़मी है और पूरी तरह स्टाइलिश लगने के लिए ड्रेस के अनुसार ही फुटवियर होना चाहिए। इसलिए जिनके पैरों में पसीना आता है, वे घर में सैंडल, स्लीपर उपयोग कर सकते हैं। साथ ही कॉलेज, ऑफिस जाने वाले लोग टाइटलेस शूज़, बूट की जगह कॉटन मेड लोफर का उपयोग कर अपना स्टाइलिश लुक बनाए रख सकते हैं।
चुनाव की गर्मी में नेत्रियों का सहारा कॉटन साड़ियाँ
चुनावी जंग अपनी जगह है, हर एक दल की महिला नेत्रियाँ जमकर पसीना बहा रही हैं, उनके विचार अलग -अलग हैं मगर एक बात पर सब साथ हैं, वह है साड़ियों से उनका प्यार। इस पर तपती गर्मियों में पसीना बहाते समय सबकी पसन्द साड़ी और उसमें भी कॉटन, खादी जैसी हैंडलूम साड़ियाँ हैं, चलिए इनके साड़ी वाले अन्दाज पर डालते हैं एक नजर –
प्रियंका गांधी

कांग्रेस नेता प्रियंका गाँधी का बहुरंगी कॉटन साड़ियों वाला लुक काफी अच्छा लग रहा है। आँखों को ठंडक देने वाले रंग उनको पसन्द हैं और उनकी शख्सियत पर जँचती भी हैं। उनकी हैंडलूम साड़ियों में गहरे रंग के बॉर्डर देखे जा सकते हैं। प्रियंका गाँधी को अक्सर कॉटन या जूट कॉटन की साड़ी में देखा जाता है। प्रियंका का नो मेकअप लुक उनको और शानदार बनाता है, वह अपनी दादी इन्दिरा गाँधी का स्टाइल ज्यादा पसन्द भी करती हैं और कई बार तो उनकी तरह दिखती भी हैं।
सुप्रिया सुले

एनसीपी नेता और शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले भी इन राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में लगी हुई हैं। सुप्रिया भी चुनावों में कड़ी मेहनत कर रही हैं और हमेशा ही रंगीन कॉटन-सिल्क साड़ियों में नजर आती हैं। आमतौर पर सुप्रिया महाराष्ट्रियन साड़ी पहनना पसंद करती हैं।
स्मृति ईरानी

केन्द्रीय मंत्री व अमेठी से प्रत्याशी स्मृति ईरानी का साड़ी लुक छाया रहता है। गर्मी के मौसम में चटकीले रंगों से लेकर गहरे रंग की कॉटन साड़ी में नजर आने वाली स्मृति का साड़ी पहनने का अंदाज थोड़ा जुदा है। स्मृति साड़ी को काफी कैजुअल तरीके से कैरी करती हैं। इस समय भी चुनाव प्रचार के दौरान कई मौकों पर स्मृति प्रिंटेड कॉटन साड़ी में नजर आईं मगर स्मृति हर तरह की साड़ी पहनती हैं। वे हैंडलूम और मूंगा साड़ी और पटोला साड़ी पहनना पसंद करती हैं। उन्होंने हैंडलूम की साड़ियों को काफी ट्रेंडी बना दिया है। महिलाएं उनका स्टाइल फॉलो करती हैं।
निर्मला सीतारमण

अपनी सादगी के लिए मशहूर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण साड़ी में बेहद गरिमामयी लगती हैं। उनका लुक भले ही सादा हो मगर फीका बिल्कुल नहीं है। गर्मी में उनकी कॉटन, लिनन, पटोला फैब्रिक्स की साड़ियां खूब पसंद की जाती हैं।
डिंपल यादव

समाजवादी पार्टी की डिंपल यादव का साड़ी लुक काफी मशहूर है। डिम्पल साड़ी को बड़ी सादगी और खूबसूरती से पहनती हैं। चटकीले हों या कोई और रंग, उन पर हर तरह की साड़ियाँ अच्छी लगती हैं। डिंपल को कॉटन साड़ियों से खासा प्रेम है। साथ ही उन्हें अक्सर प्रिंटेड, प्लेन, लिनन साड़ियों में देखा जाता है।
हेमा मालिनी

भाजपा से मथुरा में चुनावी मैदान पर उतरी ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी अक्सर डिजाइनर साड़ियों में नजर आती हैं। उम्र के लिहाज से हेमा का स्टाइल और अंदाज और भी निखरता जा रहा है। उनके अक्सर चटकीले रंग की साड़ियों में देखा जाता है। वे हैंडलूम साड़ियाँ भी काफी पसन्द करती हैं।
ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तो पहचान ही सफेद कॉटन साड़ी। ममता, हमेशा ही एक पतले रंगीन बॉर्डर वाली सफेद कॉटन साड़ी पहने नजर आती हैं। उनको आमतौर पर धनियाखाली साड़ी में देखा जा सकता है जो हुगली में बनती हैं। दीदी को देखकर यह तो सीखा ही जा सकता है कि सफेद रंग भी शानदार तरीके से स्टाइलिश बनाया जा सकता है।
हिन्दी व्यंग्य और बाल साहित्य के जानेमाने लेखक डॉ. शेरजंग गर्ग का निधन
नयी दिल्ली : हिन्दी व्यंग्य व बाल साहित्य में अपनी पहचान बनाने वाले डॉ. शेरजंग गर्ग नहीं रहे। 29 मई 1936 को देहरादून में जन्मे डॉ. शेरजंग हिन्दी के जानेमाने साहित्यकारों में एक थे। उनके निधन से साहित्य जगत, खासकर व्यंग्य और बाल साहित्य से जुड़े साहित्यकारों में गहरा शोक है। पिछले वर्ष ही 9 मई को ‘व्यंग्य यात्रा’ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उन्हें प्रथम रवींद्रनाथ त्यागी स्मृति शीर्ष सम्मान से सम्मानित किया गया था। ऐसे में कई साहित्यकारों, पत्रकारों ने डॉ. शेरजंग गर्ग के निधन पर गहरा दुख जताया है। लोगों में वरिष्ठ साहित्यका ममता कालिया, डॉ दिविक रमेश, आलोक मेहता, स्मिता, धीरेंद्र अस्थाना, विनोद अग्निहोत्री, ममता किरण और लालित्य ललित आदि शामिल हैं।
डॉ. शेरजंग गर्ग अपनी गजलों में व्यंग्य की प्रहारक शक्ति के प्रयोग के लिए भी प्रसिद्ध थे। सरल भाषा में इनके गजल कहने का अंदाज बहुत चर्चित रहा। डॉ. शेरजंग गर्ग ने गद्य और पद्य दोनों में समाज सापेक्ष और मानवीय मूल्यों पर आधारित रचनाएं लिखीं। ‘चंद ताजा गुलाब मेरे नाम’ काव्य संकलन उनकी काव्य प्रतिभा का और ‘बाजार से गुजरा हूं’ उनकी गद्य व्यंग्य प्रतिभा का सजग उदाहरण है। बाल-साहित्य भी उनके योगदान को कभी विस्मृत नहीं कर सकता। ऐसे दौर में जब हिंदी साहित्य में शिशु गीत न के बराबर थे, डॉ. गर्ग ने उनकी शुरूआत की। बाल-साहित्य के प्रति उनके योगदान को देखते हुए हिंदी अकादमी दिल्ली द्वारा उन्हें साहित्यकार सम्मान व श्रेष्ठ बालसाहित्य के लिए दो बार पुरस्कृत किया गया था। वह काका हाथरसी हास्यरत्न सम्मान से भी अलंकृत हुए थे। उन्होंने कई पुस्तकों का संपादन भी किया, जिनमें लोकप्रिय गीतकार दुष्यंतकुमार, गोपालदास नीरज, वीरेंद्र मिश्र, गिरिजाकुमार माथुर, बालस्वरूप राही के संकलनों, हिंदी गजल शतक, बीरबल ही बीरबल शामिल है।
कानून को पलट यूएई ने हिन्दू पिता और मुस्लिम मां की बेटी को दिया जन्म प्रमाणपत्र
दुबई : संयुक्त अरब अमीरात सरकार ने प्रवासियों के लिए शादी के नियमों से इतर भारत के एक हिन्दू व्यक्ति और मुस्लिम महिला की बेटी को जन्म प्रमाणपत्र दे दिया। मीडिया में आई खबर के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में प्रवासियों के लिए शादी के नियम के अनुसार, मुस्लिम पुरुष तो किसी गैर मुस्लिम महिला से शादी कर सकता है लेकिन मुसलमान महिला किसी गैर मुस्लिम व्यक्ति से विवाह नहीं कर सकती। खलीज टाइम्स की खबर के अनुसार शारजाह में रहने वाले किरण बाबू और सनम साबू सिद्दीकी ने 2016 में केरल में शादी की थी। उन्हें तब परेशानी का सामना करना पड़ा जब जुलाई 2018 में उनके यहां बेटी का जन्म हुआ। बाबू ने कहा, ‘मेरे पास अबु धाबी का वीजा है। मेरा वहां बीमा हो रखा है। मैंने अपनी पत्नी को अमीरात के मेदीवर 24X7 अस्पताल में भर्ती कराया। बेटी के जन्म के बाद, मेरे हिन्दू होने की वजह से जन्म प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया गया।’
उन्होंने कहा, ‘इसके बाद मैंने अदालत के जरिए अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया। इसके लिए चार महीने तक सुनवाई चली, मगर मेरे मामले को खारिज कर दिया गया।’ बाबू ने कहा कि उनकी बेटी के पास कोई कानूनी दस्तावेज नहीं था तो उनकी सारी उम्मीदें माफी मिलने पर टिक गईं। यूएई ने 2019 को ‘सहिष्णुता’ वर्ष के तौर पर घोषित किया है। इसके तहत यूएई सहिष्णु राष्ट्र की मिसाल पेश करेगा और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच संवाद की कमी को पूरा करेगा तथा ऐसा माहौल बनाएगा जहां लोग एक-दूसरे को अपनाएं।
बाबू ने कहा कि वे दिन काफी तनावपूर्ण थे और माफी ही एक उम्मीद थी। भारतीय दूतावास ने मदद की। उन्होंने बताया कि न्यायिक विभाग ने उनके मामले को एक अपवाद बनाया। बाबू फिर से अदालत गए और इस बार उनके मामले को मंजूरी मिल गई। दंपति को 14 अप्रैल को उनकी बेटी के जन्म का प्रमाणपत्र मिल गया




