नयी दिल्ली : एयर इंडिया ने अपने सभी पायलटों के साथ कॉकपिट क्रू को निर्देश दिया है कि वे फ्लाइट में स्पेशल खाना न मंगवाएं। एविएशन कंपनी का कहना है कि यह नियमों के खिलाफ है। फ्लाइट में क्रू को वही खाना खाना चाहिए, जो कंपनी सर्व करवा रही है। एयर इंडिया के डायरेक्टर ऑपरेशन अमिताभ सिंह ने कहा कि फ्लाइट में केवल मेडिकल ग्राउंड पर स्पेशल खाना मंगवाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए चिकित्सक की अनुशंसा जरूरी है।
डायरेक्टर ऑपरेशन ने कहा कि प्रबंधन के नोटिस में यह बात आई थी कि फ्लाइट के दौरान पायलट और अन्य स्टाफ अपने लिए स्पेशल खाना मंगवाते हैं। इसमें बर्गर और सूप जैसी चीजें शामिल हैं। सिंह का कहना है कि पायलटों के इस रवैये से एयर इंडिया का फूड बिल खर्च बढ़ रहा है। उनका कहना है कि इससे क्रू के लिए खाने का प्रबंधन करने में भी परेशानी हो रही है। कंपनी जिस खाने को सर्व कराती है, उसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा।
एयर इंडिया ने फ्लाइट्स में मेन्यू बदला
एयर इंडिया ने यात्रियों के सुझाव पर दो साल बाद फ्लाइट्स में मेन्यू बदल दिया है। अब कोल्ड ड्रिंक्स और जूस की जगह आम पना, छाछ और मसाला लस्सी मिलेगी। साथ ही ब्रेक फास्ट, लंच और डिनर में भी बदलाव किया गया है। यात्रियों को हाई-टी में तला-भुना आइटम और कटे फल व सलाद नहीं दिए जाएंगे। इसकी जगह इंडियन फूड, जैसे इंदौर के नमकीन आदि दिए जाएंगे। नया मेन्यू घरेलू उड़ानों में लागू हो गया है और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1 अप्रैल से लागू हुआ। एयर इंडिया के मुताबिक कोशिश यही होगी कि फ्लाइट जहां जा रही है, वहां की प्रसिद्ध चीजें यात्रियों को परोसी जाएं। जैसे कोई फ्लाइट दिल्ली से तमिलनाडु जा रही है, तो उसमें तमिलनाडु की कोई फेमस डिश परोसी जाएगी।
फ्लाइट में अपने लिए स्पेशल खाना न मंगवाएं पायलट
हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है कश्मीर
माना जाता है कि कश्यप ऋषि के नाम पर ही कश्यप सागर (कैस्पियन सागर) और कश्मीर का प्राचीन नाम था। शोधकर्ताओं के अनुसार कैस्पियन सागर से लेकर कश्मीर तक ऋषि कश्यप के कुल के लोगों का राज फैला हुआ था। कश्यप ऋषि का इतिहास प्राचीन माना जाता है। कैलाश पर्वत के आसपास भगवान शिव के गणों की सत्ता थी। उक्त इलाके में ही दक्ष राजा का भी साम्राज्य भी था। जम्मू का उल्लेख महाभारत में भी मिलता है। हाल में अखनूर से प्राप्त हड़प्पा कालीन अवशेषों तथा मौर्य, कुषाण और गुप्त काल की कलाकृतियों से जम्मू के प्राचीन इतिहास का पता चलता है।
कहते हैं कि कश्यप ऋषि कश्मीर के पहले राजा थे। कश्मीर को उन्होंने अपने सपनों का राज्य बनाया। उनकी एक पत्नी कद्रू के गर्भ से नागों की उत्पत्ति हुई जिनमें प्रमुख 8 नाग थे- अनंत (शेष), वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, शंख और कुलिक। इन्हीं से नागवंश की स्थापना हुई। आज भी कश्मीर में इन नागों के नाम पर ही स्थानों के नाम हैं। कश्मीर का अनंतनाग नागवंशियों की राजधानी थी।
राजतरंगिणी तथा नीलम पुराण की कथा के अनुसार कश्मीर की घाटी कभी बहुत बड़ी झील हुआ करती थी। कश्यप ऋषि ने यहां से पानी निकाल लिया और इसे मनोरम प्राकृतिक स्थल में बदल दिया। इस तरह कश्मीर की घाटी अस्तित्व में आई। हालांकि भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार खदियानयार, बारामूला में पहाड़ों के धंसने से झील का पानी बहकर निकल गया और इस तरह कश्मीर में रहने लायक स्थान बने। राजतरंगिणी 1184 ईसा पूर्व के राजा गोनंद से लेकर राजा विजय सिम्हा (1129 ईसवी) तक के कश्मीर के प्राचीन राजवंशों और राजाओं का प्रमाणिक दस्तावेज है।
कश्मीर का इतिहास : ईसा पूर्व 3री शताब्दी में महान सम्राट अशोक ने कश्मीर में बौद्ध धर्म का प्रसार किया था। बाद में यहां कनिष्क का अधिकार रहा। कनिष्क के समय श्रीनगर के कुंडल वन विहार में प्रसिद्ध बौद्ध विद्वान वसुमित्र की अध्यक्षता में सर्वस्तिवाद परम्परा की चौथी बौद्ध महासंगीति का आयोजन किया था। 6ठी शताब्दी के आरंभ में कश्मीर पर हूणों का अधिकार हो गया। सन् 530 में कश्मीर घाटी एक स्वतंत्र राज्य रहा। इसके बाद इस पर उज्जैन साम्राज्य के राजाओं का अधिकार रहा। एक समय ऐसा था जब उज्जैन अखंड भारत की राजधानी हुआ करता था।
विक्रमादित्य राजवंश के पतन के बाद कश्मीर पर स्थानीय शासक राज करने लगे। वहां हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का मिश्रित रूप विकसित हुआ। कश्मीर में छठी शताब्दी में अपने तरह का शैव दर्शन विकसित हुआ। वसुगुप्त की सूक्तियों का संकलन ‘स्पन्दकारिका’ इसका पहला प्रामाणिक ग्रन्थ माना जाता है। शैव राजाओं में सबसे पहला और प्रमुख नाम मिहिरकुल का है जो हूण वंश का था।
हूण वंश के बाद गोनंद द्वितीय और कार्कोटा नाग वंश का शासन हुआ जिसके राजा ललितादित्य मुक्तपीड को कश्मीर के सबसे महान राजाओं में शामिल किया जाता है। कश्मीर के हिन्दू राजाओं में ललितादित्य (सन् 697 से सन् 738) सबसे प्रसिद्ध राजा हुए जिनका राज्य पूर्व में बंगाल तक, दक्षिण में कोंकण, उत्तर-पश्चिम में तुर्किस्तान और उत्तर-पूर्व में तिब्बत तक फैला था। इस क्रम में अगला नाम 855 ईस्वी में सत्ता में आए उत्पल वंश के अवन्तिवर्मन का लिया जाता है जिनका शासन काल कश्मीर के सुख और समृद्धि का काल था। उसके 28 साल के शासन काल में मंदिरों आदि का निर्माण बड़े पैमाने पर हुआ। कश्मीर में साहित्यकारों और संस्कृत आचार्यों की भी लंबी परंपरा रही है। प्रसिद्ध वैयाकरणिक रम्मत, मुक्तकण, शिवस्वामिन और कवि आनंदवर्धन तथा रत्नाकर अवन्तिवर्मन की राजसभा के सदस्य थे। सातवीं सदी में भीम भट्ट, दामोदर गुप्त, आठवीं सदी में क्षीर स्वामी, रत्नाकर, वल्लभ देव, नौवीं सदी में मम्मट, क्षेमेन्द्र, सोमदेव से लेकर दसवीं सदी के मिल्हण, जयद्रथ और ग्यारहवीं सदी के कल्हण जैसे संस्कृत के विद्वान कवियों-भाष्यकारों की एक लम्बी परम्परा रही। अवन्तिवर्मन की मृत्यु के बाद हिन्दू राजाओं के पतन का काल शुरू हो गया था। तत्कालीन राजा सहदेव के समय मंगोल आक्रमणकारी दुलचा ने आक्रमण किया। इस अवसर का फायदा उठा कर तिब्बत से आया एक बौद्ध रिंचन ने इस्लाम कबूल कर अपने मित्र तथा सहदेव के सेनापति रामचंद्र की बेटी कोटारानी के सहयोग से कश्मीर की गद्दी पर अधिकार कर लिया। इस तरह वह कश्मीर (जम्मू या लद्दाख नहीं) का पहला मुस्लिम शासक बना। कालांतर में शाहमीर ने कश्मीर की गद्दी पर कब्जा कर लिया और इस तरह उसके वंशजों ने लंबे काल तक कश्मीर पर राज किया। आरम्भ में ये सुल्तान सहिष्णु रहे लेकिन हमादान से आए शाह हमादान के समय में शुरू हुआ इस्लामीकरण सुल्तान सिकन्दर के समय अपने चरम पर पहुंच गया। इस काल में हिन्दू लोगों को इस्लाम कबूल करना पड़ा और इस तरह धीरे-धीरे कश्मीर के अधिकतर लोग मुसलमान बन गए जिसमें जम्मू के भी कुछ हिस्से थे। उल्लेखनीय है कि जम्मू का एक हिस्सा पाकिस्तान के अधिन है, जिसमें कश्मीर का हिस्सा अलग है।
शाह हमादान के बेटे मीर हमदानी के नेतृत्व में मंदिरों को तोड़ने और तलवार के दम पर इस्लामीकरण का दौर सिकन्दर के बेटे अलीशाह तक चला लेकिन उसके बाद 1420-70 में ज़ैनुल आब्दीन (बड शाह) गद्दी पर बैठा। इसका शासन अच्छा रहा।

16 अक्टूबर 1586 को मुगल सिपहसालार कासिम खान मीर ने चक शासक याकूब खान को हराकर कश्मीर पर मुगलिया सल्तनत को स्थापित किया। इसके बाद अगले 361 सालों तक घाटी पर गैर कश्मीरियों का शासन रहा जिसमें मुगल, अफगान, सिख, डोगरे आदि रहे। मुगल शासक औरंगजेब और उसके बाद के शासकों ने हिन्दुओं के साथ-साथ यहां शिया मुसलमानों पर दमनकारी नीति अपनाई जिसके चलते हजारों लोग मारे गए।
मुगल वंश के पतन के बाद 1752-53 में अहमद शाह अब्दाली के नेतृत्व में अफगानों ने कश्मीर (जम्मू और लद्दाख नहीं) पर कब्जा कर लिया। अफगानियों मुसलमानों ने कश्मीर की जनता (मुस्लिम, हिन्दू आदि सभी) पर भयंकर अत्याचार किए। उनकी स्त्री और धन को खूब लूटा। यह लूट और खसोट का कार्य पांच अलग-अलग पठान गवर्नरों के राज में जारी रहा। 67 साल तक पठानों ने कश्मीर घाटी पर शासन किया।
इन अत्याचारों से तंग आकर एक कश्मीरी पंडित बीरबल धर ने सिख राजा रणजीत सिंह से मदद मांगी। उन्होंने अपने उत्तराधिकारी खड़क सिंह के नेतृत्व में हरि सिंह नलवा सहित अपने सबसे काबिल सरदारों के साथ तीस हजार की फौज रवाना की। आज़िम खान अपने भाई जब्बार खान के भरोसे कश्मीर को छोड़कर काबुल भाग गया, इस तरह 15 जून 1819 को कश्मीर में सिख शासन की स्थापना हुई। 1839 में रणजीत सिंह की मौत के साथ लाहौर का सिख साम्राज्य बिखरने लगा. अंग्रेज़ों के लिए यह अफगानिस्तान की ख़तरनाक सीमा पर नियंत्रण का मौक़ा था तो जम्मू के राजा गुलाब सिंह के लिए खुद को स्वतंत्र घोषित करने का।
*महाराजा रणजीत सिंह ने जम्मू को पंजाब में मिला लिया था। बाद में उन्होंने गुलाब सिंह को जम्मू सौंप दिया। एक सूची यह भी पाई जाती है जो जम्मू के राजाओं की है:
*राय सूरज देव 850-920
*राय भोज देव 920-987
*राय अवतार देव 987-1030
*राय जसदेव 1030-1061
*राय संग्राम देव 1061-1095
*राय जसास्कर 1095-1165
*राय ब्रजदेव 1165-1216
*राय नरसिंहदेव 1216-1258
*राय अर्जुनदेव 1258-1313
*राय जोधदेव 1313-1361
*राय मलदेव 1361-1400
*राय हमीरदेव (भीमदेव) 1400-1423
*राय अजायब देव राय (1528 तक)
*राय कूपर देव 1530-1570
*राय समील देव 1570-1594
*राय संग्राम, जम्मू राजा 1594-1624
*राय भूप देव 1624-1650
*राय हरिदेव 1650-1686
*राय गुजै देव 1686-1703
*राजा ध्रुव देव 1703-1725
*राजा रंजीत देव 1725-1782
*राजा ब्रजराज देव 1782-1787
*राजा संसपूर्ण सिंह 1787-1797
*राजा जीत सिंह 1797-1816
*राजाकिशोर सिंह 1820-1822
जम्मू और कश्मीर के महाराजा-
* महाराजा गुलाब सिंह 1822 से 1856।
* महाराजा रणबीर सिंह 1856 से 1885।
* महाराजा हरि सिंह 1925 से 1947 तक।
* जम्मू 22 पहाड़ी रियासतों में बंटा हुआ था। डोगरा शासक राजा मालदेव ने कई क्षेत्रों को जीतकर अपने विशाल राज्य की स्थापना की। सन् 1733 से 1782 तक राजा रंजीत देव ने जम्मू पर शासन किया किंतु उनके उत्तराधिकारी दुर्बल थे, इसलिए महाराजा रणजीत सिंह ने जम्मू को पंजाब में मिला लिया।
* सुदूर उत्तर में कश्मीर के महाराजा की सत्ता कराकोरम पर्वत श्रेणी तक फैली हुई थी। उत्तर में अक्साई चिन और लद्दाख भी इस राज्य के अंतर्गत था।
*1947 में जम्मू और कश्मीर पर डोगरा शासकों का शासन रहा। इसके बाद महाराज हरि सिंह ने 26 अक्तूबर 1947 को भारतीय संघ में विलय के समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। जम्मू-कश्मीर रियासत का विलय देश की नई प्रशासनिक व्यवस्था में अंग्रेजों के चले जाने के लगभग 2 महीने बाद 26 अक्तूबर 1947 को हुआ। वह भी तब, जब रियासत पर कबायलियों के रूप में पाकिस्तानी सेना ने आक्रमण कर दिया और उसके काफी हिस्से पर कब्जा कर लिया।
(साभार – वेबदुनिया)
गर्मियों का सनस्क्रीन टमाटर
टमाटर खाने से चेहरा स्वस्थ और ग्लोइंग होता हैं। एक अध्ययन में भी ये बात सिद्ध हो चुकी है कि टमाटर में लाइकोपीन पाया जाता है, जो सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से हमारी त्वचा की रक्षा करता है। इसी के कारण टमाटर का रंग लाल होता है। पके हुए टमाटर में यह तत्व उच्च स्तर पर पाया जाता है। उनका कहना है कि टमाटर खाने से आपकी त्वचा सूर्य की हानिकारक किरणों में भी सुरक्षित रहती है। टमाटर का फेसपैक न सिर्फ आपके चेहरे पर सनप्रोटेक्शन का काम करता है, बल्कि इसमें मौजूद ल्यूटिन चेहरे को हाइड्रेड बनाए रखने के साथ ही कसावट भी लाता है।
टमाटर और नींबू
टैनिंग हटाने के लिए टमाटर के गूदे को नींबू के रस में मिलाकर लगाएं। सूखने पर इसे ठंडें पानी से धो लें।इसके रोजाना इस्तेमाल से टैनिंग हटेगी और स्किन के पोर्स खुलेंगे। साथ ही त्वचा मे कसाव आता है।
टमाटर, दही और नींबू
टमाटर, दही और नींबू का रस त्वचा पर प्राकृतिक ब्लीच का काम करते हैं। प्राकृतिक टोनर होने के चलते यह रोमछिद्रों को साफ करके अतिरिक्त तेल को हटाता है। नींबू ब्लीच और एंटी बैक्टीरियल तत्व का काम करता है। वहीं दही त्वचा को नमी प्रदान करती है जिससे आपकी त्वचा का रूखापन दूर होता है।
टमाटर और चीनी
टमाटर के एक टुकड़े पर चीनी डालकर स्क्रब की तरह चेहरे पर लगाएं। यह मुंहासें और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करता है। 10 मिनट के बाद चेहरे को धो दें।इसके बाद शहद को टमाटर के साथ मिलाकर लगाएं। सूखने पर पानी से साफ कर दे। यह त्वचा को काफी चमकदार और दमकता हुआ बनाता है।
टमाटर, शहद और बेसन
चेहरे को चमक एवं खूबसूरती प्रदान करने के लिए टमाटर का पैक बहुत कारगर होता है। टमाटर,शहद, बेसन, दलिया, पुदीने के पत्तों का पेस्ट तथा खीरा और खट्टी दही लें को आपस में मिला लें।
(साभार – द बोल्ड स्काई)
जुकरबर्ग ने इंटरनेट नियमन के लिए ‘अधिक सक्रिय’ सरकारी भूमिका की अपील की
वॉशिंगटन : फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने इंटरनेट के नियमन के लिए सरकारों से “ज्यादा सक्रिय भूमिका” निभाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने ज्यादातर देशों से उपयोगकर्ता की निजता को ध्यान में रखते हुए बने यूरोपीय नियमों के संस्करण को अपनाने की भी अपील की।
फेसबुक एवं इंटरनेट की अन्य दिग्गज कंपनियों के प्रतिरोध की वजह से लंबे अरसे तक सरकारों ने इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं किया। लेकिन फेसबुक ने नियमन के लिए तेज होती आवाजों के बीच अपना रुख बदल लिया है। जुकरबर्ग ने वॉशिंगटन पोस्ट में शनिवार को प्रकाशित एक लेख में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि सरकारों और नियामकों को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है।”
उन्होंने कहा, “इंटरनेट के लिए नियमों को अद्यतन कर हम इसे संरक्षित करने के साथ ही समाज को बड़े नुकसानों से भी बचा सकते हैं।” जुकरबर्ग ने तर्क दिया कि नये नियमनों की चार क्षेत्रों – नुकसानदेह कंटेंट, चुनावों का संरक्षण, निजता एवं डेटा स्थानांतरण में जरूरत है।
चुनावी मौसम में पीआर पेशेवरों की भारी माँग
मुम्बई : महाराष्ट्र में इस चुनावी मौसम में पीआर एजेंसियों की जबर्दस्त मांग है और सियासतदान मतदाताओं के बीच अपनी छवि को चमकाने के लिए इन एजेंसियों की मदद ले रहे हैं।राज्य में सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता अपनी छवि चमकाने, भाषण तैयार करने, सोशल मीडिया प्रोफाइल का प्रबंध देखने के लिए जनसंपर्क (पीआर) और समाचार निगरानी एजेंसियों की सेवाएं ले रहे हैं। दिल्ली स्थित एक पीआर कंपनी के संस्थापक सुनील खोसला ने कहा कि आज के दौर में राजनीतिक जऩसंपर्क रैलियों और पारंपरिक प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे काफी आगे निकल गया है। राजनीति पीआर बहुत वैज्ञानिक, आक्रमक और विशिष्ट हो गया है। यह ग्राहकों के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाता है जहां बोले गए हर शब्द का एक रणनीतिक मतलब होता है, जिसका ठीक से पालन नहीं करने पर प्रतिकूल असर हो सकता है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि एजेंसियों को सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए वीडियो बनाने का काम सौंपा गया है। साथ में लोगों के बीच उम्मीदवारों की छवि बदलने का काम भी सौंपा गया है। उद्योग के वरिष्ठ पेशेवर हेमांग पलान ने कहा कि सोशल मीडिया के प्रभाव पर विचार करते हुए लगभग सभी प्रत्याशियों ने फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सऐप्प ग्रुप के जरिए लोगों से जुड़ रहे हैं। वह 2014 के चुनाव में भाजपा के कुछ प्रत्याशियों के मीडिया प्रबंधक थे।
भाजपा के एक नेता एवं लोकसभा सदस्य ने कहा कि इन एजेंसियों की सेवा लेना वक्त की जरूरत है। यह उम्मीदवारों की रणनीति बनाने में मदद करते हैं। मुम्बई उत्तर पश्चिम सीट से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने कहा कि उन्होंने अपनी और पार्टी की मदद के लिए दो एजेंसियों की सेवा ली है। उन्होंने कहा कि वे हमारी विभिन्न रणनीतियों को बनाने में मदद करते हैं, लेकिन आपको भी समान रूप से स्मार्ट और सक्रिय होने की जरूरत है। जन संपर्क पेशेवर आपकी अकेले मदद नहीं कर सकते हैं। आईटी उद्योग से जुड़े टीवी मोहनदास पाई के मुताबिक, सोशल मीडिया लोकसभा चुनाव में चार-पांच प्रतिशत मत को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जहां जीत का अंतर कम होता है वहां यह अहम कारक बन गया है।
मिजोरम में पहली बार महिला लड़ेगी लोकसभा चुनाव
नयी दिल्ली : मिजोरम के इतिहास में पहली बार महिला उम्मीदवार लालथलामौनी लोकसभा का चुनाव लड़ने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि मैंने यह कदम भगवान के इशारे पर उठाया है। वे मिजोरम में एनजीओ के जरिए यहूदी समुदाय के लोगों के कल्याण के लिए काम करती हैं। उधर, तेलंगाना की निजामाबाद सीट पर इस बार 185 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से 175 उम्मीदवार मूल रूप से किसान हैं। यह सीट मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की बेटी के.कविता की है। सरकार के प्रति नाराजगी के चलते इतनी बड़ी संख्या में किसानों से इस सीट से दावेदारी जताई है ताकि उनकी समस्याओं के प्रति लोगों का ध्यान खींचा जा सके।उम्मीदवारों की इतनी बड़ी संख्या के चलते आयोग की चुनाैती यह है कि ईवीएम में केवल 64 नाम आ सकते हैं। ऐसे में चुनाव बैलेट पेपर के जरिए करवाना होगा, जिसके लिए आयोग को अगले दस दिनों में 15 लाख जम्बो साइज बैलेट पेपर प्रिंट करवाना पड़ेंगे।
मिजोरम के इतिहास में पहली बार एक महिला उम्मीदवार लोकसभा का चुनाव लड़ने जा रही है। इस चुनाव में लालथलामौनी का मुकाबला 5 पुरुष उम्मीदवारों से होगा। फिलहाल यहाँ के मौजूदा सांसद कांग्रेस के सीएल रौला (83) हैं, जो दो बार चुनाव जीत चुके हैं। पिछले साल मिजोरम के विधानसभा चुनाव में 15 महिला उम्मीदवार उतरी थीं। लालथलामौनी भी उन्हीं में से एक हैं, जिन्हें इस चुनाव में केवल 69 वोट मिले थे।
63 वर्षीय लालथलामौनी ने कहा, ”मैंने यह कदम भगवान के इशारे पर उठाया। यह एक पवित्र लड़ाई है, जो मिजोरम में महिलाओं के लिए है। मेरी चुनौती मिजोरम की महिलाओं के लिए भी है। हमारे पास किसी तरह का राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं है। हम दुनिया के सामने अपनी पहचान को लेकर बात करते रहते हैं। अब समय आ गया है कि संसद को अपने प्लेटफॉर्म के तौर पर उपयोग करें। हमें कोई ऐसा चाहिए जो न सिर्फ हमारे लिए खड़ा हो बल्कि यह सुनिश्चित करे कि हमारी आवाज सुनी जाए।”
भारत ने अन्तरिक्ष में भी दुश्मन को मार गिराने की क्षमता हासिल की
नयी दिल्ली : अंतरिक्ष में उपग्रह को मार गिराने की क्षमता हासिल करते हुए भारत एक नई महाशक्ति बन गया है। भारतीय वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक उपग्रहरोधी A-SAT का परीक्षण कर लिया है। पृथ्वी से 300 किलोमीटर दूरी पर स्थित इस सैटलाइट को निशाना बनाते हुए मार गिराया गया। पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए इसकी जानकारी दी। आज सुबह बुधवार को 11:45 पर देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट के जरिए कहा था कि वे देश को संबोधित करेंगे। इसके बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। लगभग 12:30 के आसपास पीएम ने देश को संबोधित किया और जानकारी दी कि भारत के वैज्ञानिकों ने मिशन शक्ति के जिरए लोअर अर्थ ऑर्बिट में एक सैटलाइट को मार गिराया है। अब थल, जल और वायु के बाद भारत अंतरिक्ष में भी अपनी रक्षा करने में सक्षम हो गया है। इसकी वजह से अब कोई भी दुश्मन देश भारत की अवैध निगरानी नहीं कर सकता है। अब तक दुनिया के 3 देश अमेरिका, रूस और चीन को अंतरिक्ष में यह उपलब्धि हासिल थी। भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला अब चौथा देश बन गया है। भारत के लिए यह गौरवशाली पल हैं। वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में 300 किलोमीटर दूर LEO (लोअर अर्थ ऑर्बिट) में एक लाइट सैटलाइट को मार गिराया है। यह पूर्व निर्धारित लक्ष्य था। केवल तीन मिनट में सफलता के साथ यह मिशन पूरा हुआ। यह ‘मिशन शक्ति’ बहुत कठिन मिशन था। सबसे बड़ी बात ये है कि जहां चीन जैसे देश इस मिशन को पांचवी बार में सफलतापूर्वक अंजाम दे पाए वहीं हमारे देश के वैज्ञानिकों ने इसे पहले ही प्रयास में कर दिखाया। इसमें बड़ी तकनीकी क्षमता की जरूरत थी। वैज्ञानिकों ने सभी निर्धारित लक्ष्य और उद्देश हासिल किए। यह गर्व की बात है। पीएम ने कहा कि वैज्ञानिकों द्वारा निर्धारित सभी लक्ष्य हासिल कर लिए गए। उन्होंने कहा कि विश्व में स्पेस और सैटेलाइट का महत्व बढ़ने वाला है। हमारा सामरिक उद्देश्य शांति बनाए रखना है।
मोदी की पढ़ी कविता को मिली लता मंगेशकर की आवाज
मुम्बई : 93 साल की लता मंगेशकर ने हाल ही में देशभक्ति से भरा एक गाना रिकॉर्ड किया है। इसका वीडियो उन्होंने अपने अपने ट्विटर पर शेयर किया है। पीएम मोदी ने कुछ दिन पहले चुनाव प्रचार के दौरान एक कविता की पक्ति ‘सौगंध मुझे इस मिट्टी की..’ बोली थी। इन पंक्तियों से इम्प्रेस होकर लता जी ने अपनी आवाज में एक गाना रिकॉर्ड किया है। उन्होंने ये गाना देश की जनता और जवानों को समर्पित किया है। गाना सुनकर बेहद भावुक पीएम मोदी ने ट्विटर पर लता के नाम इमोशनल मैसेज लिखा। उन्होंने लिखा- ‘हृदय की गहराइयों से इस गीत के रूप में निकला आपका स्नेह और आशीर्वाद मेरे लिए प्रेरणास्त्रोत है’।
शाहरुख की मीर फाउंडेशन ने एसिड अटैक सर्वाइवर्स की करवाई सर्जरी
मुम्बई : शाहरुख खान मीर फाउंडेशन से जुड़े हुए हैं और इसके साथ मिलकर समाज की बेहतरी में योगदान देते रहते हैं। इस महिला दिवस पर भी शाहरुख ने मीर फाउंडेशन के साथ मिलकर बर्न और एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए सर्जरी प्रोग्राम का आोजन किया था। 5 मार्च से इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई। इस कार्यक्रम के तहत नई दिल्ली में बीएलके सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और वाराणसी में जीएस मेमोरियल प्लास्टिक सर्जरी अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में सर्जरी की गई। इसमें दिल्ली, यूपी, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तराखंड की 85% महिलाओं और बच्चों की सर्जरी की गई। यह संगठन जल्द ही कोलकाता में अपने अगले चरण का संचालन करने जा रहा है। मीर फाउंडेशन के बारे में बात करते हुए शाहरुख खान ने कहा- ‘मीर फाउंडेशन में किया गया काम मेरे दिल के बहुत करीब है और हम पिछले तीन सालों से इस पर ध्यानपूर्वक काम कर रहे हैं। मीर में उनके पुनर्वास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करके एसिड हमलों के पीड़ितों की मदद की जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए हमने अपनी नई पहल ToGETher Transformed लॉन्च किया है और मैं देश भर में मौजूद अपने सहयोगी डॉक्टर, वकील, अस्पताल, गैर-सरकारी संगठन और स्वयंसेवकों का आभारी हूं, जो हमारे उद्देश्य में हमारी मदद कर रहे हैं। मैं उम्मीद करता हूं कि जल्द-जल्द से एसिड अटैक की घटनाएं खत्म हों। शाहरुख सक्रिय रूप से जरूरतमंद लोगों को अपना समर्थन देते आये है। पिछले साल शाहरुख खान को डेविस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2018 में एसिड अटैक सर्वाइवर्स के प्रति उनके काम के लिए क्रिस्टल अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स 15 करोड़ टन कोयला उत्पादन करने वाली पहली कम्पनी
कोलकाता : साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड एक वित्त वर्ष में 15 करोड़ टन कोयला उत्पादन करने वाली देश की पहली कम्पनी बन गई है। 2018-19 के दौरान , कम्पनी का कोयला उत्पादन 15 करोड़ टन के पार चला गया है। कम्पनी के एक अधिकारी ने कहा कि एसईसीएल ने 2018-19 के दौरान 15 करोड़ टन कोयला उत्पादन के लक्ष्य को पार किया है। कंपनी ने 20 मार्च को यह आंकड़ा पार किया।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स के मुख्य प्रबंधक (पीएंडए) पी नरेंद्र कुमार ने पीटीआई – भाषा को बताया , ” बिजली क्षेत्र की बढ़ती माँग को देखते हुए एसईसीएल कोयला निकालने के लिए पूरी ताकत के साथ कड़ी मेहनत कर रही है। हमने 20 मार्च को 15 करोड़ टन कोयला उत्पादन के स्तर को पार कर लिया है और 15.3 करोड़ टन कोयले का उत्पादन कर चुके हैं। कुमार ने कहा कि कम्पनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ए पी पांडा ने कोयला उत्पादन में तेजी लाने के लिए सभी कदम उठाए हैं जिसके चलते कंपनी ने इस महीने एक दिन में 7.44 लाख टन कोयला उत्पादन के सर्वकालिक उच्च स्तर को भी छुआ। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान एसईसीएल ने 14.47 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया था। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स , कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सबसे बड़ी अनुषंगी कंपनी है।




