Wednesday, April 22, 2026
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सर्जिकल स्ट्राइक के बाद घुसपैठ की घटनाओं में आई 43 फीसदी की कमी: केन्द्र सरकार

नयी दिल्ली : सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद 2018 की तुलना में इस साल सीमा पार से घुसपैठ की घटनाओं में 43 फीसदी की कमी आई है। इसकी जानकारी सरकार द्वारा संसद में दी गई है। एक लिखित प्रश्न का उत्तर कि क्या बालाकोट हवाई हमले के बाद राज्य में घुसपैठ में कमी आई है। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सुरक्षा बलों के ठोस और समन्वित प्रयासों के कारण जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ की घटनाओं में सुधार हुआ है।
सरकार ने सीमा पार से घुसपैठ के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई है। सुरक्षा के ठोस और समन्वित प्रयासों के कारण 2018 की तुलना में राज्य की सुरक्षा स्थिति में सुधार देखा गया है। नित्यानंद राय के अनुसार, 2018 की तुलना में सीमा पार से होने वाले घुसपैठ की घटनाओं में 43 फीसदी की कमी आई है। राज्य सरकार के साथ मिलकर भारत सरकार ने भी सीमा पार से घुसपैठ को रोकने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण अपनाया है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बाड़ लगाने के साथ बहु-स्तरीय निगरानी प्रणाली की तैनाती शामिल है।

राजनीतिक दलों को दो सालों में मिला 985 करोड़ से ज्यादा का चंदाः एडीआर

पिछले दो वित्तीय वर्ष में देश के राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को 985 करोड़ रुपये से ज्यादा का चंदा मिला है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यह चंदा इन दलों के ज्ञात स्त्रोतों का 93 फीसदी है। वहीं 2004-05 से 2014-15 के बीच मिले दान से यह 160 फीसदी ज्यादा है।
आठ सेक्टर से मिला सबसे ज्यादा दान
सबसे ज्यादा आठ सेक्टर से इन दलों को दान मिला है। एडीआर की रिपोर्ट में 20 हजार रुपये ज्यादा के मिले दान को ही इस लिस्ट में शामिल किया है। इनमें 49.58 फीसदी दान (488.42 करोड़ रुपये) इलेक्ट्रोरल ट्रस्ट से, मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर से 12.18 फीसदी (120 करोड़ रुपये), रियल इस्टेट सेक्टर से 9.19 फीसदी (90.57 करोड़ रुपये), खनिज व आयात- निर्यात सेक्टर से 6.55 फीसदी (64.544 करोड़ रुपये) मुख्य तौर पर शामिल हैं।
छह राष्ट्रीय दलों में भाजपा आगे
रिपोर्ट के मुताबिक छह राष्ट्रीय दलों में भाजपा को सबसे ज्यादा ऐसा दान मिला है। कुल 1731 कंपनियों ने भाजपा को 915.596 करोड़ रुपये का दान दिया था। दूसरे स्थान पर कांग्रेस को 151 कंपनियों ने 55.36 करोड़ का दान दिया था। वहीं तीसरे स्थान पर एनसीपी को 23 कंपनियों से 7.737 करोड़ रुपये दान में मिले थे।
इन ट्रस्ट से मिला सबसे ज्यादा पैसा
इन दो वित्त वर्ष में सबसे ज्यादा पैसा प्रूडेंट/सत्या इलेक्ट्रोरल ट्रस्ट ने भाजपा और कांग्रेस को दिया। इस ट्रस्ट ने भाजपा को 33 दानों के जरिए 405.52 करोड़ रुपये और कांग्रेस को 13 दानों के जरिए 23.90 करोड़ रुपये दान में दिए। वहीं एनसीपी को बी.जी. शिरके कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने 2.5 करोड़ रुपये दान में दिए।
इनका नहीं दिया पैन और पते का विवरण
एडीआर के मुताबिक राष्ट्रीय दलों ने अपनी दान रिपोर्ट में ऐसे 916 दानों का विवरण भी दिया है, जिनसे उन्हें 120.14 करोड़ रुपये दान में मिले। वहीं इन दलों के पास 76 ऐसे दान भी आएं जिन्होंने अपने पैन का विवरण नहीं दिया। इनसे इन दलों को 2.59 करोड़ रुपये मिले।

गरीब प्रतिभावान युवाओं को मुफ्त में संगीत सिखाएंगे कैलाश खेर, खोलेंगे अकादमी

मुम्बई : मशहूर सूफी गायक कैलाश खेर तीर्थनगरी के युवाओं को मुफ्त संगीत सिखाएंगे। ऐसा होगा उनकी संगीत एकेडमी कैलाश खेर एकेडमी ऑफ आर्ट के जरिये। इसे खोलने के लिए आवश्यक विचार विमर्श को वह बुधवार को परमार्थ निकेतन पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रतिभा हर युवा में होती है, लेकिन उसे सामने लाने के लिए एक मंच की जरूरत होती है। एकेडमी यह मंच प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि मुम्बई लौटकर वह इस संबंध में सारी रूपरेखा तैयार करेंगे। इस मौके पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कैलाश खेर से संगीत के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया। उन्हें पर्यावरण के प्रतीक के रूप में रूद्राक्ष का पौधा भी भेंट किया।

मॉनसून और कॉर्न का याराना स्वाद बनाएगा लजीज

चटपटे कॉर्न रोल्स

सामग्री :  2 एकदम फ्रेश भुट्टे, 10 ब्रेड की स्लाइस, पाव कटोरी ताजा कद्दूकस किया हुआ नारियल, 2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई, 1 प्याज बारीक कटा, 1 टमाटर बारीक कटा, 1 चम्मच गरम मसाला, हरा धनिया बारीक कटा, नमक स्वादानुसार।
विधि : सबसे पहले कॉर्न (भुट्टे, मकई) के दाने निकालकर उबाल लें एवं हल्का पीस लें। इसमें कटे प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, नमक, गरम मसाला, किसा हुआ नारियल व अन्य सभी सामग्री मिला लें। अब ब्रेड स्लाइस के किनारे निकालकर पानी में डुबोकर दबाएं, उस पर तैयार मसाला फैलाकर रोल करें। फ्रायपैन में तेल गरम करके डीप फ्राय कर लें। तैयार लाजवाब चटपटे कॉर्न रोल्स को हरी एवं मीठी चटनी तथा सॉस के साथ गरमा-गरम पेश करें।

 

 

 कॉर्न खीर   

सामग्री : 1 या 2 फ्रेश मुलायम भुट्टे, डेढ़ लीटर दूध, 1 कप शक्कर, 1 चम्मच इलायची पावडर, मेवों की कतरन आवश्यकतानुसार।
विधि : सबसे पहले फ्रेश मुलायम भुट्टे के दाने निकाल कर रख लें। अब इन्हें जरूरतानुसार दूध डालकर प्रेशर कुकर में सीटी लगाकर पका लें। तत्पश्चात शेष बचे दूध में शक्कर डालकर गाढ़ा कर लें। अब उसमें दूध के साथ पकाएं भुट्‍टे डालकर धीमी आचं पर 5-7 उबाल आने ‍तक पकाएं।  ऊपर से इलायची व मेवों की कतरन डालें और आंच से उतार लें। तैयार लाजवाब स्वीट कॉर्न खीर को गरमा-गरम पेश करें।

जानिए परफ्यूम लगाने का सही सलीका

सुनने में अजीब लगे मगर कहते हैं कि हर चीज का एक तरीका होता है, एक सलीका होता है। उसी प्रकार परफ्यूम लगाने का भी एटिकेट होता है। परफ्यूम का इस्तेमाल करते व़क़्त हमें इन बातों का ध्यान ज़रूर रखना चाहिए:

1) परफ्यूम को सही जगह पर लगाना ज़रूरी है। यदि पऱफ़्यूम सही स्थान पर नहीं लगाएंगी तो महक ज़्यादा देर तक नहीं ठहरेगी।

2) पऱफ़्यूम हमेशा बॉडी के पल्स प्वॉइंट्स (जहां धड़कन होती है) पर ही लगाएं। साथ ही दोनों हाथों की कलाइयों, दोनों कानों के पीछे, गले के बीचोंबीच यानी विंड पाइप और दोनों एल्बो जॉइंट्स पर भी परफ्यूम लगाएं।

3) किस जगह पर कैसे परफ्यूम का इस्तेमाल करना चाहिए, इस बात का ध्यान रखना भी बहुत ज़रूरी है. ऑफिस, सेमिनार या ऑफिशियल फंक्शन के दौरान हमेशा माइल्ड यानी हल्के परफ्यूम का इस्तेमाल करें।

4) शाम के व़क़्त कॉकटेल पार्टी, कॉर्पोरेट इवेंट या शादी-विवाह के अवसर पर आप स्ट्रॉन्ग फ्रेगरेंस वाला परफ्यूम इस्तेमाल कर सकती हैं।

5) डेटिंग या किसी ख़ास मौ़के पर आप सिग्नेचर पऱफ़्यूम भी लगा सकती हैं।

6) परफ्यूम के चुनते समय मौसम का भी ध्यान रखना चाहिए। गर्मी के मौसम में हल्की ख़ुशबू वाले और ठंडी में स्ट्रॉन्ग फ्रेगरेंस वाले परफ्यूम लगा सकती हैं।

7) पूरे कपड़ों पर परफ्यूम न छिड़कें। हमेशा शरीर के सभी पल्स प्वॉइंट्स पर एक बार या ज़्यादा-से-़ज़्यादा दो बार परफ्यूम लगाएं।

8) आजकल ऑलराउंड परफ्यूम का चलन बढ़ गया है, जिसका इस्तेमाल आप शरीर और कपड़े दोनों पर कर सकती हैं। इसके इस्तेमाल से न तो कपड़ों पर दाग़ लगता है, न ही शरीर पर कोई ख़राब प्रभाव पड़ता है।

9) इन दिनों यूनीसेक्स परफ्यूम भी काफ़ी पसन्द किये जा रहे हैं।

10) परफ्यूम को हमेशा धूप के सीधे संपर्क से दूर रखें। धूप के सीधे संपर्क से परफ्यूम का असर कम हो जाता है।

मॉनसून में रहिए मस्त, दिखें जबरदस्त

बारिश के दिन हर किसी को पसंद आते हैं क्योंकि ये वातावरण में थोड़ी ठंडक लेकर आते हैं। लेकिन इसी के साथ इस मौसम में पुरुषों को तकलीफ आती है कि किस तरह से खुद के लुक को स्टाइलिश बनाया जाए।  पुरुषों के लिए जरूरी होता है मौसम के अनुसार अपना ड्रेसिंस और स्टाइल चेंज करना जिससे वे खुद का कूल लुक दिखा सकें। आप अपने बैग में छोटा तौलिया या गमछा रख सकते हैं जो कि आपके काम आ सकता है। हम पुरुषों के लिए लेकर आए हैं कुछ टिप्स जो मानसून के दिनों में उनको स्टाइलिश बनाए। तो आइये जानते हैं इन टिप्स के बारे में –
* ट्रेंडी एक्सेसरीज़ – वॉलेट्स में लेदर फैब्रिक वाले पर्स का चुनाव न करें। इस दौरान प्लास्टिक की लेयर चढ़े वॉलेट्स का इस्तेमाल करें। साथ ही वॉटरप्रूफ वॉच, बैग के लिए रेन कवर्स या ब्रीफ केस के लिए रेन कवर्स यूज़ करें। इससे आप बारिश में होने वाली परेशानियों से बचे रहेंगे और स्मार्ट भी दिखेंगे।
* फैब्रिक – इस सीज़न ब्राइट और बोल्ड कलर को सिर्फ लड़कियां ही नहीं आप भी ट्राई कर सकते हैं। मानसून सीज़न में मोटे फैब्रिक को बाय कहें और चुनें हल्के रंग। बहुत ज्यादा गहरे रंग और एक ही रंग के कपड़े पहनने की बजाय इस मौसम में आप मल्टीकलर शर्ट या स्टाइलिश कोट्स वाली टी-शर्ट चुन सकते हैं। साथ ही पैंट या जींस को मोड़कर पहनें।

* रबर सोल फुटवियर – मौसम के अनुसार ही फुटवियर का चुनाव करें। इस दौरान लेदर शूज़ न पहनें क्योंकि लेदर शूज बारिश में भीगने के बाद खराब दिखेंगे और आपके पैर को नुकसान भी पहुंचाएंगें। बारिश के मौसम में रबर सोल फुटवेयर का इस्तेमाल सबसे ठीक होता है। रबर लोफर्स भी आज़माए जा सकते हैं, बशर्ते इसकी ऑफिस में मनाही न हो। गीले मोजे व अंडरगारमेंट्स ना पहनें।

* वॉटर रेपैलेंट जींस – इस सीज़न वॉटर रेपैलेंट जींस का चुनाव करें क्योंकि बारिश में भीगने पर भी इसमें रखें वॉलेट और मोबाइल फोन बच जाते हैं। इसे स्त्री व पुरुष दोनों के लिए ही डिज़ाइन किया गया है।

* वॉटरप्रूफ आउटरवियर – स्टाइलिश और स्मार्ट दिखने के लिए मानसून सीज़न में बाज़ार में आपको खूबसूरत वॉटर रेस्सिटेंट लॉन्ग ओवरकोट्स मौज़ूद मिल जाएंगे। इनमें हल्के रंग के स्टाइलिश ओवरकोट्स को पहनकर वाकई आप स्मार्ट दिखेंगे इसलिए इन्हें अपनी वॉर्डरोब का हिस्सा बनाएं।

(साभार – हिन्दी लाइफ बेरी डॉट कॉम)

बारिश में सलामत रखें इन्द्रधनुषी फैशन

मानसून कदम रख चुका है। रिमझिम बारिश ढेर सारी खुशियाँ लाती है तो कपड़े खराब होने का टेंशन भी लाती है। बहुत हल्के रंग के कपड़े पहन नहीं सकतेे और कही जाना भी है तो सलीके से ही जाना है तो इतना सोचने की जरूरत तो नहीं है क्योंकि जरा सी समझदारी आपके कपड़ों की खूबसूरती बचा सकती है और आपको भी स्टाइलिश रख सकती है, जरूरत बस इन बातों का ख्याल रखने की है –

डेनिम न पहनें –  डेनिम को सूखने में बहुत वक्त लगता है। लंबे समय तक गीला डेनिम पहनने से त्वचा की समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए डेनिम जैकेट्स, शॉर्ट्स, जींस पहनना बंद कर दें। इनकी बजाय ढीले फिट वाले कॉटन के बॉटम्स पहनना शुरू करें। जैसे- पलाजो, मिडी स्कर्ट्स, क्यूलॉट्स, वाइड लेग ट्राउजर्स और स्लिम पैंट्स। इस सीज़न वॉटर रेपैलेंट जींस का भी चुनाव कर सकती हैं क्योंकि बारिश में भीगने पर भी इसमें रखें वॉलेट और मोबाइल फोन बच जाते हैं। इसे स्त्री व पुरुष दोनों के लिए ही डिज़ाइन किया गया है।
  रेन बूट्स या सैंडल पहनें – इस सीजन में आप हाई हील्स सैंडल्स न पहनें, यही बेहतर है। इसकी जगह आप स्टाइलिश फ्लिप फ्लॉप सैंडल या स्टाइलिश रेनी शूज पहन सकतीं हैं। वैसे तो मानसून में स्लिपर्स ज्यादा पहने जातें है, लेकिन अगर आप कुछ स्पेशल ट्राई करना चाहती हैं तो गमबूट और मैकक्वीन हील्स पहन सकती हैं। ये आरामदायक तो होते ही हैं साथ ही शॉर्ट ड्रेसेस के साथ स्टाइलिश भी लगते हैं। रंगीन फुटवियर्स के लिए यह मौसम एकदम बेस्ट है, साथ ही जितना हो सके ब्लैक या ब्राउन लेदर बूट्स से बचने की कोशिश करें . इसके अलावा रेन बूट्स भी पहन सकती हैं। ये आपके लुक को पूरा करने के साथ-साथ आपके पैरों को सही रखें।
 ढीले कपड़े पहनें – गीले होने पर टाइट फिट आउटफिट्स बॉडी पर चिपकते हैं। इस मौसम में कॉटन, खादी या सिंथेटिक मटेरियल के ढीले कपड़े पहने जा सकते हैं। फुल स्लीव की जगह हाफ स्लीव या स्लीवलेस परिधान चुनिए। ऑफ शोल्डर पहना जा सकता है। लिनन या कॉटन के डंग्रीज़ और जंपसूट्स पहने जा सकते हैं। इसके अलावा आप ट्रेडिशनल लुक के प्‍लाजो भी आजमा सकती है। इन द‍िनों स्‍कर्ट भी फैशन हैं ये आपके स्‍टाइल‍िश लुक देने के साथ ही आपको बार‍िश के इस सीजन में कम्‍फर्टटेबल भी महसूस कराएंगे। आजकल स्कर्ट का लुक देने वाले पलाजो भी बाजार में हैं।
बाल कसकर न बाँधें – ढीली चोटी या खुले बाल, आपकी बारिश को खूबसूरत बना सकते हैं। शॉर्ट हेयर कट लिया जा सकता है क्योंकि मॉनसून के लिए ये बेहद प्रैक्टिल स्टाइल होगा। लेयर वाला हेवी मेकअप अवॉइड करें। वॉटरप्रूफ प्रोडक्ट्स के साथ लाइट मेकअप किया जा सकता है।
भारी मेकअप और जेवरों से बनायें दूरी – मिनिमल और म्यूटेड एसेसरीज इस्तेमाल करें किसी भी लुक में मिनिमल और म्यूटेड एसेसरीज शामिल की जा सकती हैं। पानी सोखने वाले टाइट फुटवियर पहनने से बचिए। इससे बैक्टीरियल ग्रोथ की संभावना रहती है। न्यूड शेड ग्लैडिएटर सैंडल्स, ओपन सैंडल्स, बैलरीना, स्लिप-ऑन्स पहने जा सकते हैं। मेटल एसेसरीज पहनना बंद कर सकते हैं क्योंकि गीले होने पर इनसे स्किन एलर्जी हो सकती है। ब्राइट स्कार्फ्स पहने जा सकते हैं। बारिश के मौसम में खुले टोट बैग्स कैरी करने से भी बचिए। पॉलीस्टर इनर लाइनिंग और जिपर वाले बैग्स ही कैरी करें। ब्राइट रंग की छतरियां ट्रेंडी हैं। ट्रांसपेरेंट और प्रिंटेड छतरियां भी खूब देखने में आ रही हैं।

 

जानिए रथयात्रा के तीनों रथों की कहानी

जगन्नाथ भगवान हिंदु धर्म के चार धामों में जगन्नाथ पुरी का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु रामेश्वरम में स्नान, द्वारका में शयन, बद्रीनाथ में ध्यान और पुरी में भोजन करते हैं। भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए बिना चारों धामों की यात्रा अधूरी मानी जाती है। आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा प्रारंभ होती है। ऐसा कहा जाता है कि रथ यात्रा के जरिए भगवान मौसी के घर जनकपुर जाते हैं। रथ यात्रा में बलरामजी के रथ को ‘तालध्वज ’ कहते हैं। देवी सुभद्रा के रथ को ‘दर्पदलन’, जबकि भगवान जगन्नाथ के रथ को ‘नंदीघोष’ या ‘गरुड़ध्वज ’ कहा जाता है। यह सबसे पीछे रहता है। इन तीनों रथों की उंचाई, पहिए और आकृति अलग-अलग होती हैं।

ये है तीनों रथों की खासियत
1. भगवान जगन्नाथ का रथ
इस रथ को गरुड़ध्वज, कपिध्वज या नंदीघोष कहा जाता है। इसमें 16 पहिए होते हैं व ऊंचाई साढ़े 13 मीटर तक होती है। लाल और पीले रंग का लगभग 1100 मीटर कपड़ा रथ को ढंकने के लिए उपयोग में लाया जाता है। इस रथ को बनाने में 832 लकड़ी के टुकड़ों का उपयोग किया जाता है।
इस रथ के सारथी का नाम दारुक है। इस रथ के रक्षक भगवान विष्णु के वाहन पक्षीराज गरुड़ और नृसिंह हैं। रथ पर लगे झंडे को यानी ध्वजा का नाम त्रिलोक्यमोहिनी है। रथ में जय और विजय नाम के दो द्वारपाल होते हैं।
इस रथ के घोड़ों का नाम शंख, बलाहक, श्वेत एवं हरिदाश्व है, जिनका रंग सफेद होता है। इसके अलावा भगवान जगन्नाथ के रथ की रक्षा के लिए शंख और सुदर्शन स्तंभ भी होता है। रथ को जिस रस्सी से खींचा जाता है, वह शंखचूड़ (एक प्रकार का नाग) नाम से जानी जाती है।
इस रथ में भगवान जगन्नाथ के अलावा अन्य सहायक देवता के रूप में वराह, गोवर्धन, कृष्ण, नृसिंह, राम, नारायण, त्रिविक्रम, हनुमान और रूद्र भी होते हैं। भगवान जगन्नाथ के रथ के साथ 8 ऋषि भी चलते हैं जिनके नाम नारद, देवल, व्यास, शुक, पाराशर, विशिष्ठ, विश्वामित्र और रूद्र हैं।
 बलराम जी का रथ
इस रथ का नाम तालध्वज है। यह रथ 13.2 मीटर ऊंचा व 14 पहियों का होता है, जो लाल, हरे रंग के कपड़े व लकड़ी के 763 टुकड़ों से बना होता है। इस रथ के रक्षक वासुदेव और सारथी मताली होते हैं। इनके रथ की ध्वजा का नाम उनानी हैं।
इस रथ में काले रंग के 4 घोड़े लगे होते हैं। जिनका नाम त्रिब्रा, घोरा, दीर्घशर्मा व स्वर्णनवा है। इस रथ में नंद और सुनंद नाम के 2 द्वारपाल होते हैं। रथ की रक्षा के लिए हल और मुसल भी होते हैं। इनके रथ की शक्तियों के नाम ब्रह्म और शिवा है। इनके रथ को खिंचने के लिए वासुकी नाग के रुप में रस्सी होती है।
इस रथ में बलराम जी के अलावा अन्य सहायक देवता के रूप में गणेश, कार्तिकेय, सर्वमंगल, प्रलंबरी, हलायुध, मृत्युंजय, नटवर, मुक्तेश्वर और शेषदेव होते हैं। बलराम जी के रथ के साथ अंगिरा, पौलस्त्य, पुलह, असस्ति, मुद्गल, अत्रेय और कश्यप ऋषि भी चलते हैं।

देवी सुभद्रा का रथ
सुभद्रा के रथ का नाम देवदलन है। इसके अन्य नाम दर्पदलन और पद्मध्वज भी है। 12.9 मीटर ऊंचे 12 पहिए के इस रथ में लाल, काले कपड़े के साथ लकड़ी के 593 टुकड़ों का इस्तेमाल होता है।
इस रथ के रक्षक जयदुर्गा और सारथी अर्जुन होते हैं। इस रथ की द्वारपाल गंगा और यमुना होती हैं। इनके रथ की ध्वजा का नाम नदंबिका है। इनके रथ की रक्षा के लिए पद्म और कल्हर के रुप में शस्त्र होते हैं।
इस रथ की शक्तियों के नाम चक्र और भुवनेश्वरी है। सुभद्रा जी के रथ में लाल रंग के 4 घोड़े होते हैं। जिनके नाम रोचिक, मोचिक, जिता व अपराजिता है। इस रथ को खींचने वाली रस्सी को स्वर्णचुड़ा कहते हैं।
सुभद्रा जी के इनके अलावा रथ में सहायक देवियों के रुप में चंडी, चामुंडा, उग्रतारा, वनदुर्गा, वराही, श्यामा, काली, मंगला और विमला नाम की देवियां होती हैं। इनके रथ के साथ भृगु, सुपर्व, व्रज, श्रृंगी, ध्रुव और उलूक ऋषि चलते हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

कोलकाता की रूपसा बनीं सुपर डांसर की विनर

मुम्बई : बच्चों के डांस रियलटी शो सुपर डांसर चैप्टर-3 का ग्रैंड फिनाले 23 जून को हुआ जिसमें कोलकाता की 6 साल की रूपसा बतबयाल ने जीत हासिल की। रूपसा को 15 लाख रुपए का चेक ईनाम के तौर पर मिला। साथ ही उनके ट्रेनर निशांत को भी 5 लाख रुपए का चेक दिया गया। शो के सभी फाइनलिस्ट्स को भी एक-एक लाख रुपए दिए गए। रूपसा का मुकाबला मुंबई के तेजस वर्मा से था। वहीं फाइनलिस्ट के तौर पर गौरव सरवन, सक्षम शर्मा और जयश्री गोगोई भी रूपसा के प्रतियोगी थे।ग्रैंड फिनाले में सभी प्रतिभागियों ने अपने गुरू के साथ परफॉर्म किया था। शिल्पा ने ग्रैंड फिनाले के लिए पहली बार टीवी पर भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। वे बतौर जज अनुराग बासु और गीता कपूर के साथ भी मौजूद रहीं। रूपसा की परफॉर्मेन्स के बाद शिल्पा ने रूपसा के पैर भी चूम लिए।

मोटर व्हीकल संशोधन बिल को मंजूरी, 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव

नयी दिल्ली : केंद्रीय कैबिनेट ने मोटर व्हीकल (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी। इसमें नियम तोड़ने वालों पर 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। इमरजेंसी वाहनों को रास्ता नहीं देने और योग्य नहीं होने के बावजूद ड्राइविंग करते पाए जाने पर 10,000 रुपये तक जुर्माना लगेगा। ओवर स्पीड पर 1,000 से 2,000 रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव है। ड्राइविंग लाइसेंस के नियमों का उल्लंघन करने वाले कैब चालकों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा। ओवरलोडिंग पर 20,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। इस बिल को संसद के मौजूदा सत्र में पारित करवाने की कोशिश की जाएगी। न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।
नाबालिग चालकों के मामले में अभिभावकों को दोषी माना जाएगा
बिना इंश्योरेंस ड्राइविंग करते पाए जाने पर 2,000 रुपये और हेलमेट नहीं लगाने वालों पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। साथ ही 3 महीने के लिए लाइसेंस भी निलंबित किया जाएगा। नाबालिगों द्वारा नियम तोड़ने पर वाहन मालिक और अभिभावकों को दोषी मानते हुए व्हीकल का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा। 3 साल की जेल के साथ 25,000 रुपये के जुर्माने का भी प्रस्ताव है। ट्रैफिक नियम तोड़ने पर 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। अभी 100 रुपये का जुर्माना लगता है। संबंधित अधिकारी का आदेश नहीं मानने पर 500 रुपए की बजाय 2000 रुपये फाइन लगेगा।