काँचरापाड़ा: काँचरापाड़ा श्रीमानधारी हाई स्कूल(एच.एस.) में हिंदी के महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद का 139वीं जयन्ती मनायी गयी । कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाध्यापक रवीन्द्र कुमार सिंह ने की। उन्होंने मुंशी प्रेमचन्द को भारतीय समाज और संस्कृति का मील का पत्थर कहा। इस अवसर पर छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया साथ ही प्रेमचंद की कहानी ” बड़े भाई साहब” पर बनी फिल्म की प्रस्तुति भी की गयी। कार्यक्रम का संचालन धर्मेंन्द्र राय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन शिक्षक मनोज कुमार तिवारी ने किया।
बंगीय हिन्दी परिषद ने आयोजित की हिन्दी – नेपाली काव्य सन्ध्या
कोलकाता : मित्र राष्ट्र नेपाल से आए कवियों के सम्मान में गत 30 जुलाई को बंगीय हिन्दी परिषद की ओर से उसके सभाकक्ष में एक काव्य संध्या का आयोजन किया गया ।कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए परिषद् के संयुक्त मंत्री डॉ कुमार संकल्प ने स्वागत भाषण दिया और यह बताया कि परिषद् द्वारा हिन्दी और नेपाली साहित्य को जोड़ने का यह पहला ऐतिहासिक प्रयास है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुप्रसिद्ध कवि गिरिधर राय ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य दिया। मुख्य अतिथि डॉ बीरेंद्र मृधा ने बांग्ला में अपनी कविता सुनाई । मित्र राष्ट्र से आये कवियों और साहित्यकारों ने इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के संयोजन हेतु बंगीय हिंदी परिषद के प्रति अपना आभार व्यक्त किया । डॉ. देवी नेपाल ने कहा कि दोनों देशों की संस्कृति तो एक है ही ,हमारी कई साझी विरासतें भी हैं। भारत से हमारा गहरा और अटूट रिश्ता है।ऐसे कार्यक्रमों से यह और अटूट होगा।नेपाल से आये कवि एवं साहित्यकार प्रो० हेमनाथ पौडेल और गोपी कृष्णा ढुंगाना ने भी दोनों देशों की साझी विरासत और सांस्कृतिक सौंदर्य को अपनी कविता में चित्रित किया। योगेंद्र शुक्ल ‘सुमन’, काली प्रसाद जायसवाल, सुषमा राय पटेल, शकील गोण्डवी , रणविजय श्रीवास्तव ,विश्वजीत शर्मा, जीवन सिंह , रमाकांत सिन्हा,चंद्रिका प्रसाद पांडेय ‘अनुरागी’ , राम पुकार सिंह ,चक्रधर प्रधान ने हिंदी में कविता पाठ किया तो नारायण प्रसाद होमगाई, राजू पाठक ,संजीव गुरुंग ,नीमा निष्कर्ष ,आइता आदिम ,टी जी भित्रीकोटी , रामायण धमाल, आशा उपाध्याय ने नेपाली में अपनी कविताएं सुनाईं । कार्यक्रम का संचालन डॉ सत्य प्रकाश तिवारी ने एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ कुमार संकल्प ने किया ।
जनवादी लेखक संघ’ तथा ‘इदारा महफ़िल-ए-ख़ुश रंग’ ने मनायी प्रेमचन्द जयन्ती
हावड़ा : हावड़ा के कल्पना चावला ऑडिटोरियम के प्रांगण में ‘जनवादी लेखक संघ’ तथा ‘इदारा महफ़िल-ए-ख़ुश रंग’ के सौजन्य से ‘प्रेमचंद जयंती समारोह’ मनाया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार कपिल आर्य ने की। कार्यक्रम में स्वागत भाषण कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रो. राम आह्लाद चौधरी ने दिया। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने साझा संस्कृति को केवल अपनाया नहीं, बल्कि उसकी बुनियाद को पुख़्ता बनाया। इस कार्यक्रम का संचालन युवा कवि नीरज सिंह ने किया, जिन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी और उर्दू के बीच के अंतर को अपने शब्दों के ताने-बाने से बुना है।
इस कार्यक्रम में महफ़िल-ए-ख़ुश रंग की ओर से रघुनाथ अग्रवाल, डॉ. अहमद मीराज़, रिफ़त ख़ान तथा उरूसा अर्शी को उनके साहित्यिक एवं सामाजिक स्तर पर योगदान के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का दूसरा सत्र कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का रहा , जिसमें हिंदी एवं उर्दू के कई कवि एवं शायरों ने हिस्सा लिया । जिसमें प्रमुख तौर पर आरती सिंह, सिराज़ खान बातीश, फराग रोहवी, हालीम सबीर, इस्माइल परवाज़, सुल्तान साज़िद,मुश्ताक़ अंजुम, आतिश रज़ा, फ़िरोज़ मिर्ज़ा, ताहीर बेग देहलवी, नसीम हबीबी तथा रौनक़ अफ़रोज़ प्रमुख थें। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रसिद्ध समाज सेवी उसमान जावेद मंज़िल, विप्लव मजूमदार, आइशा जावेद, डॉ. अमित बनर्जी, अनिल कुमार सिंह, इम्तियाज़ अहमद आदि प्रमुख थें। कार्यक्रम के संयोजक के तौर पर अफ़ज़ल ख़ान की प्रमुख भूमिका रही। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सामाजिक एकता को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम में भारी संख्या में युवाओं ने भाग लिया, जिसमें प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय के कई छात्र शामिल थे।
कोलकाता से मुलाकात करवाता नजरिया का कोलकाता अंक
नज़रिया का यह अंक कोलकाता को समर्पित है। इसके सम्पादक हैं दिनेश चारण और कार्यकारी सम्पादक हैं दुष्यंत। 9 हिस्सों में विभाजित इस अंक में कला और साहित्य के सभी अंगों और क्षेत्रों पर विचार-विमर्श है। कलात्मकता आपको पूरी पत्रिका में दिखायी पड़ेगी। कोलकाता को परिभाषित करने वाली तस्वीरें भी इस अंक की खूबसूरती और बढ़ाती हैं। परिचर्चा खंड में कोलकाता के साहित्यिक परिदृश्य पर यहीं के लोगों की समसामायिक टिप्पणियाँ हैं। कोलकाता साहित्य जगत के और कोलकाता से जुड़े मगर फिलहार बाहर बसे लोगों की टिप्पणियाँ कोलकाता के प्रति समझ को मजबूत करेंगी। उमा झुनझुनवाला, अरुण माहेश्वरी, डॉ. एस आनन्द, सौरभ घोष के साथ नवारुण भट्टाचार्य की कहानी और कविता, मन्द्राकान्ता सेन की तीन कहानियाँ हैं|अनुवाद इस अंक की खूबसूरती है जहाँ आप रवीन्द्रनाथ ठाकुर की कविताओं के साथ जीवनानंद दास, नारायण मुखोपाध्याय, सुनील गंगोपाध्याय, शक्ति चट्टोपाध्याय, विष्णु दे, रवीन्द्र गुहा, जॉय गोस्वामी, देबी रॉय, सुकांत भट्टाचार्य,शंख घोष, सुबोध सर्कार, ईशिता भादुरी, शुभ्रो बंदोपाध्याय, ट्रिना निलीना मुखर्जी, नवनीता सेन, सुदीप रंजन सरकार जैसे बंगला के श्रेष्ठ कवियों की चुनिन्दा कविताएँ पढ़ सकेंगे। हिंदी के तमाम नए और पुराने कवि हैं। #साथ ही एक उपन्यासिका भी है – लीला मजुमदार के पीले पक्षी का पंख। कुसुम खेमानी की रश्मिरथी माँ और अलका सरावगी की एक सच्ची-झूठी गाथा का भी आनन्द आप ले सकेंगे इस पत्रिका में|नज़रिया का कोलकाता यह अंक भी नॉटनल पर भी उपलब्ध है। प्रिंट के साथ साथ ई- संस्करण वाला 350 पेज का यह वृहद अंक 80 रूपये में उपलब्ध है। अपने मोबाइल/ कम्प्यूटर पर। क्लिक कीजिए, प्रिव्यू देखिए। अच्छा लगेगा।
किसिम – किसिम की दोस्ती, किसिम -किसिम के दोस्त
दोस्त… और दोस्ती, जितने दोस्त, उतनी ही अलग उनकी फितरत, उतना ही अलग उनका अन्दाज, बहुत मुश्किल होता है…इनको हैंडल करना…जिन्दगी में जो भी दोस्त होते हैं, वह एक दूसरे से काफी अलग होते हैं…अब आपके पास किस तरह के दोस्त हैं…वह इस लेख से जानिए –
जिन्दगी भर वाले : लाइफटाइम या टिकाऊ टाइप के दोस्त आजकल कम ही दिखाई देते हैं। हां अगर आपकी दोस्ती पुरानी है, और लंबे समय से चली आ रही है, तो आपने जरूर इस दोस्ती का आनंद लिया होगा, लेकिन असल जिंदगी में तो अब इस तरह के दोस्त फिल्मों या किताबों में ही मिलते हैं। इस प्रकार के दोस्त हर हाल में ताउम्र साथ निभाते हैं, और हमारी खुशी के लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने का जज्बा रखते हैं।
ख्याल रखने वाले : इस तरह के दोस्त आपकी हर बात का पूरा ध्यान रखते हैं, बिल्कुल मां की तरह। आपकी पढ़ाई और एक्जाम से लेकर तबियत और खाने-पीने तक का ख्याल उसे रहता है, और वह हर वक्त आपके लिए एक पैर पर हाजिर होता है। अगर आपके पास ऐसा दोस्त है, तो आप खुशकिस्मत हैं। लेकिन संभल कर कहीं इतनी ज्यादा केयर से आप भी असहज न महसूस करने लगे।
पकाने वाले : इस तरह के दोस्तों को इससे कोई मतलब नहीं होता कि आप उनकी बातों और हरकतों से बोर हो रहे हैं, उसे केवल हर बात में अपनी राय रखने की बीमारी होती है। इन्हें लोग फेंकू के नाम से भी जानते हैं। इन्हें बस कोई सुनने वाला चाहिए होता है, जिन्हें यह कभी ज्यादा बोलने का मौका नहीं देते, और यह खुद के सबसे बड़े फैन होते हैं। इनसे बचकर रहने की कोशिश ही आपके लिए बेहतर उपाय है।
अपना उल्लू सीधा करने वाले : इस तरह के दोस्त मौकापरस्त और मतलबी टाइप के होते हैं, जो कई बार आपसे दोस्ती भी मौके का फायदा उठाकर करते हैं।यह आपको अपना लक्ष्य प्राप्त करने की सीढ़ी की तरह इस्तेमाल करता है, और काम हो जाने के बाद आपको याद तक नहीं करता। इस तरह के दोस्तों को पहचानने में आप जितनी देर करेंगे, उतना ही नुकसान उठाना पड़ सकता है।
मूडी दोस्त : इस तरह के दोस्तों का मिजाज बदलते देर नहीं लगती। या तो यह बिल्कुल मेहरबान होते हैं, या फिर खबरदार की मुद्रा में। इन्हें हैंडल करना बहुत ही टेढ़ी खीर साबित होता है, क्योंकि इनका मूड कभी भी ऑन या ऑफ हो सकता है और इन्हें शांत करने के लिए आपको इंतजार भी करना पड़ सकता है। अगर आपको यह कला आती है, तभी इनसे दोस्ती बेहतरीन होती है, वरना बात बिगड़ भी सकती।
मस्तमौला : इस तरह के दोस्त बिल्कुल बेफिक्र और अपनी मस्ती में होते हैं। ऑल टाइम फन इसका फंडा होता है, और यह जियो और जीने दो की तर्ज पर चलना बेहतर समझते हैं। इन्हें खुद भी कोई चिंता नहीं होती और यह आपको भी वैसा ही रखने की चाह रखते हैं। आपके दुख- सुख में यह दोस्त ऑल टाइम अवेलेबल रहते हैं, और बेरंग जिंदगी में भी रंग भरने में सक्षम होते हैं।
बेचारी रोनी सूरत वाले : हमेशा किसी बात का दुख या चिंता में खोए रहना, इस दोस्त की खासियत होती है। इस तरह के दोस्त को हमेशा आपक कंधे की जरूरत होती है, और आपका साथ भर भी इन्हें हिम्मत दिलाने के लिए काफी होता है। कई बार समस्याओं में उलझे रहने के कारण इनका आत्मविश्वास कम होने लगता है, ऐसे में इन्हें आपकी जरूरत होती है। ये इमोशनल और कलाकार होते हैं
कंजूस यानी दमड़ी बचाने वाले : कैंटीन या खर्चीली जगहों पर इनकी जेब से कभी वॉलेट नहीं निकलता। किसी चीज को व्यर्थ गंवाने के बजाय इन्हें चीजों का आखरी दम तक प्रयोग करना अच्छा लगता है। कम खर्चे में काम चलाना इन्हें अच्छी तरह से आता है। इनसे किसी भी तरह के आमंत्रण की उम्मीद आप न ही करें तो बेहतर होगा। साथ ही किसी मौके पर इनके हिस्से का खर्च देने के लिए भी आप तैयार रहें।
टाइमपास करने वाले : किसी यात्रा के दौरान बस या ट्रेन में इस तरह के दोस्त आसानी से मिल जाते हैं, और फोन, लेटर, मैसेज या फेसबुक तक ही सीमित रहते हैं। कुछ देर गॉसिपिंग, जोक्स शेअरिंग व अन्य आवश्यकतानुसार बातों के अलावा इनसे ज्यादा आपसी समझ विकसित नहीं हो पाती। इन्हें पूरी तरह से जानना संभव नहीं होता, अत: अपनी पर्सनल बातें शेअर करने से बचना चाहिए।
पजेसिव होने वाले : इस तरह के दोस्त आपके लिए काफी संवेदनशील और केअरिंग और मददगार होते हैं। लेकिन कई बार आपका कोई काम अकेले और इन्हें बगैर शामिल किए करना इन्हें रास नहीं आता। अगर आप किसी दोस्त के ज्यादा करीबी बन रहे हैं, तो यह इन्हें बिल्कुल गवारा नहीं होता, और वे आपसे अनकही शिकायत रखकर मुंह फुला लेते हैं। दरअसल इन भावनाओं के पीछे उनका आपके प्रति प्यार होता है, लेकिन अति किसी भी चीज की ठीक नहीं है।
(साभार – वेबदुनिया)
मिस रेनबो प्रतियोगिता २०१९ का आयोजन
कोलकाता : लोरेटो रेनबो होम्स ने मैक्स फैशन के साथ मिलकर कोलकाता के लोरेटो डे स्कूल, बाउबाजार में मिस रेनबो प्रतियोगिता २०१९ का आयोजन किया। मिस रेनबो प्रतियोगिता एक ऐसा मंच है जो लड़कियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और अपने स्वयं के शहर में पहचान दिलाने की सुविधा देता है। इस प्रतियोगिता में प्रतिभाशाली युवा लड़कियों ने मैक्स प्री ऑटम संग्रह को पहनकर अपनी कला, प्रतिभा और दक्षता का प्रदर्शन किया। टॉलीवुड अभिनेता जीत, फैशन डिज़ाइनर अग्निमित्र पॉल, देबलीना दत्ता, ओइन्द्रिला दत्त इस अवसर पर उपस्थित थे। मिस रेनबो प्रतियोगिता लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ाने की एक पहल है, जिससे वे भी दूसरों की तरह कुछ कर सकती है साथ ही वे साबित करती है की इस दुनिया में सबसे अधिक अप्रभावित स्थानों में भी सौंदर्य पाया जा सकता है। प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल शारीरिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि प्रत्येक प्रतिभागी की आंतरिक सुंदरता, उनकी प्रतिभा और उनके अस्तित्व को मजबूती प्रदान करना था। राजीब मुखर्जी, एवीपी पूर्व और मध्य भारत- मैक्स फैशन ने कहा, “हमें लोरेटो द्वारा आयोजित इस पहल का हिस्सा बनने पर गर्व है।
‘कुली लाइन्स’ द्वारा प्रवीण कुमार झा ने इतिहास के वृत में छिद्र कर दिया है- यतीन्द्र मिश्र
नयी दिल्ली : गिरमिटियों के इतिहास पर आधारित युवा रचनाकार प्रवीण कुमार झा की पुस्तक ‘कुली लाइन्स’ पर एक संवाद का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, एनेक्स, हॉल नम्बर-1 में किया गया। ज्ञात हो कि अपने प्रकाशन के 75 दिनों के भीतर ही इस शोधपरक पुस्तक का दूसरा संस्करण आ चुका है। कार्यक्रम में पद्मश्री मालिनी अवस्थी जी अध्यक्षता में संपन्न हुआ। मुख्य वक्ता के तौर पर यतीन्द्र मिश्र जी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वाणी प्रकाशन की प्रधान संपादक रश्मि भारद्वाज द्वारा किया गया। स्वागत भाषण से कार्यक्रम का औपचारिक आरम्भ करते हुए वाणी प्रकाशन की निदेशक अदिति माहेश्वरी जी ने वाणी प्रकाशन के समृद्ध इतिहास के बारे में बताते हुए युवा वाणी की परियोजना से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि अरुण कमल, अनामिका, उदय प्रकाश, ममता कालिया से लेकर गीता श्री, प्रभात रंजन, वीरू सोनकर, सुशोभित, अभय मिश्र, प्रवीण झा, संजय सिंह और अणुशक्ति सिंह आदि प्रतिभाओं की पहली पुस्तक प्रकाशित कर वाणी प्रकाशन युवाओं, उनकी नई आवाज़ों और नये विचारों को प्रस्तुत करने का सशक्त मंच रहा है। रश्मि भारद्वाज के अनुसार युवा वाणी के अंतर्गत विश्व पुस्तक मेले-2020 में बहुत उल्लेखनीय पुस्तकें प्रकाशित की जाएंगी। रचनाकार प्रवीण कुमार झा के अनुसार वैसे तो कई लोगों ने गिरमिटियों का इतिहास लिखा है, और लिखा जा रहा है, लेकिन हिन्दी में पहली बार सभी द्वीपों के इतिहास को एक साथ रखने का प्रयास किया गया है। आगे बात करते हुए प्रवीण झा ने बताया कि गिरमिटिया अपनी छ: पीढ़ी के बाद भी अपने आपको भारतीय मानते हैं। शुरुआत में जो स्त्रियाँ गिरमिटिया मज़दूरों के रूप में बाहर गईं, उनके लिए उनकी मुक्ति प्रमुख थी, परंतु बाद में उन्होंने भी भारतीय संस्कृति को बचाने का प्रयास किया। यतीन्द्र मिश्र ने किताब के बारे में बोलते हुए कहा कि हर पन्ने में लेखक का मानस खुलता जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्ष मालिनी अवस्थी के मॉरीशस और फिजी में भारतीयता ज़्यादा दिखाई देती है। अगर आपको जानना है कि आप क्या थे तो आप सूरीनाम और त्रिनिडाड जाइये, जहाँ के गिरमिटिया लोगों के वंशजों ने भारतीयता के मूल रूप को समरक्षित रखा है। अंत में प्रबंध निदेशक अरुण माहेश्वरी जी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
प्रतिभा सिंह फिर चुनी गयीं वीरांगना की प्रदेश अध्यक्ष
कोलकाता : अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन पश्चिम बंगाल की नयी कार्यकारिणी जल्द घोषित की जायेगी। लिलुआ में आयोजित एक बैठक में अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन के मुख्य संरक्षक डॉ.एमएस सिंह मानस और अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री भारती सिंह ने विख्यात गायिका प्रतिभा सिंह को फिर वीरांगना की पश्चिम बंगाल इकाई का अध्यक्ष घोषित किया। समाजसेवी प्रतिमा सिंह पुनः संगठन की महासचिव बनायी गयीं। बैठक में ममता सिंह, पूजा सिंह, रीता राजेश सिंह, मीनू सिंह, सुमन सिंह, सुनीता सिंह, आशा सिंह, रीना सिंह, पूनम सिंह, किरण सिंह, रीता सिंह-सोदपुर, मीरा सिंह, सुलेखा सिंह, दीपमाला सिंह, संगीता सिंह, रेखा सिंह, ज्योति सिंह, इंदु सिंह, रीता सिंह-बालीगंज, विद्या सिंह, गिरिजा दारोगा सिंह, गिरिजा दुर्गादत्त सिंह, सुनीता विजय सिंह को संगठन का आजीवन सदस्यता प्रमाणपत्र वितरित किया गया।
मुक्ति की आकांक्षा का लेखन है प्रेमचंद का साहित्य-प्रो.अमरनाथ शर्मा
मिदनापुर : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से ‘प्रेमचंद की प्रासांगिकता’ विषय पर प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया। इस मौके पर कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. अमरनाथ शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद की सबसे बड़ी देन है कि उन्होंने घीसू और माधव के जरिए समाज के यथार्थ को प्रस्तुत किया है। उनका लेखन मुक्ति की आकांक्षा का लेखन है। विद्यासागर विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष (कला व वाणिज्य) प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य व्यापक होने के कारण उनके साहित्य में प्रेम, क्षमा, ममत्व आदि सभी का समावेश है और इसलिए प्रेमचंद का साहित्य क्लासिक है। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मानव-जीवन की समग्रता का आख्यान है। प्रो. प्रमोद प्रसाद ने कहा कि प्रेमचंद ने अपने लेखन से समाज को एक नई दृष्टि प्रदान की है। विभाग की ओर से प्रेमचंद केंद्रित ज्ञान प्रतियोगिता में प्रथम स्थान सलोनी शर्मा, रूपेश कुमार यादव और गुलनार बानो दल को मिला। इस अवसर पर आयोजित परिचर्चा में विनय प्रसाद, राजकुमार मिश्रा, राहुल गौड़, अभिलक्ष्य आनंद, श्रद्धा उपाध्याय और विनीता बेहरा आलेख पाठ किया। वहीं अनु तिवारी, मधु सिंह और रूक्सार परवीन ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर स्वागत गीत पंकज सिंह ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन रिया श्रीवास्तव ने किया। प्रो. धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रो. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद ने किसानों की समस्या का यथार्थ चित्रण अपने साहित्य में किया है और हाशिए के समाज को अपने लेखन का केंद्रीय विषय़ बनाया है।
राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, तीन तलाक बिल बना कानून
नयी दिल्ली : राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने संसद में पारित तीन तलाक विधेयक को मंजूरी दे दी, जिससे अब यह एक कानून बन गया है। सरकारी अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। पत्नी को तीन तलाक के जरिए छोड़ने वाले मुस्लिम पुरुष को तीन साल तक की सजा के प्रावधान वाले इस विधेयक को मंगलवार को पारित किया गया था। लोकसभा में मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को पिछले सप्ताह पारित किया गया था, जिसके बाद राज्यसभा ने 84 के मुकाबले 99 मतों से इसे पारित कर दिया। राष्ट्रपति के इसे मंजूरी देने के बाद अब पत्नी को तीन तलाक देने वाले मुस्लिम पुरुष को तीन साल तक की सजा हो सकती है। वहीं पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि तीन तलाक विधेयक के विरोध ने ‘छद्म उदारवादियों का पर्दाफाश कर दिया है। साथ ही, उन्होंने महिलाओं के लिए न्याय की तुलना में ‘कट्टरपंथी’ वोट बैंक को ज्यादा प्राथमिकता देने को लेकर कांग्रेस पर भी प्रहार किया। जेटली ने एक ब्लॉग में कहा कि ‘उदारवादियों’ को मौखिक तलाक (तलाक ए बिद्दत) के तहत महिला के साथ हुए भेदभाव और अन्याय का विरोध करना चाहिए था। लेकिन इस मामले में विधेयक के पक्ष में कोई भी नहीं बोला, जबकि यह विधेयक अन्याय को समाप्त करेगा।




