Thursday, July 2, 2026
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सिंगल पुरुष सैनिकों को भी मिलेगी बच्चे की देखभाल की छुट्टी

नयी दिल्ली : सरकार ने अपने एक अहम फैसले में अकेले जीवन बिता रहे पुरुष सैनिकों को भी बच्चे की देखभाल के लिए मिलने वाली छुट्टी चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) देने को मंजूरी दे दी है। साथ ही रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महिला अधिकारियों के मामले में सीसीएल प्रावधानों में भी कुछ छूट प्रदान कर दी है। वर्तमान में सीसीएल केवल रक्षा बलों में महिला अधिकारियों को ही प्रदान किया जाता है। यह फैसला कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के एक आदेश के अनुरूप है। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने दी।
हाल में डीओपीटी ने प्रावधानों में कुछ संशोधन किए थे, ताकि असैन्य कर्मचारियों को सीसीएल दिया जा सके। इसके तहत महिला कर्मचारियों को दिया जाने वाला सीसीएल सरकारी पुरुष कर्मचारियों को भी दिया जाएगा। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सीसीएल लेने के लिए पहले 40 प्रतिशत विकलांगता वाले बच्चे के मामले में 22 साल की आयु सीमा को भी हटा दिया गया है। साथ ही एक बार में सीसीएल लेने की न्यूनतम अवधि को 15 दिन के बजाय कम करके पांच दिन कर दिया गया है। ऐसे ही लाभ रक्षा कर्मियों को प्रदान करने के एक प्रस्ताव को रक्षा मंत्री ने मंजूरी प्रदान दे दी है। इससे सिंगल (किसी भी कारण से जीवन साथी के बिना जीवन बसर करने वाले) पुरुष सैन्य कर्मी सीसीएल का लाभ उठा सकेंगे। सिंगल पुरुष सैन्य कर्मी और रक्षा बलों की महिला अधिकारी भी 40 प्रतिशत विकलांगता वाले बच्चे के मामले में सीसीएल की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे और इसके लिए बच्चे की आयु की कोई सीमा नहीं होगी।

बीसीसीआई ने आखिरकार ‘नाडा’ के दायरे में आना किया मंजूर

नयी दिल्ली : दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट संस्था भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) ने आखिरकार राष्ट्रीय डोपिंगरोधी संस्था (नाडा) के दायरे में आना मंजूर कर लिया, मगर इसके पूरी तरह से प्रभावी होने को लेकर आशंकाएं भी जाहिर की जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में क्रिकेट को धर्म और खिलाड़ियों को भगवान माना जाता है, ऐसे में क्या नाडा क्रिकेट खिलाड़ियों पर अपने पूरे नियमों को लागू कर पाएगा? राष्ट्रीय जूनियर हॉकी टीम के पूर्व फिजिकल ट्रेनर और स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ डॉक्टर सरनजीत सिंह ने अपने खिलाड़ियों के डोप परीक्षण नाडा से कराने के बीसीसीआई के फैसले के पूरी तरह लागू होने पर संदेह जाहिर करते हुए बताया कि भारत में क्रिकेट को पूजा जाता है और खिलाड़ियों को भगवान की तरह माना जाता है तो क्या ये ‘भगवान’ उन सारे नियमों को मानने के लिए तैयार होंगे? क्या वे विश्व डोपिंगरोधी एजेंसी (वाडा) के वर्ष 2004 में बनाए गए ‘ठहरने के स्थान संबंधी नियम’ को पूरी तरह से मानेंगे जिसके तहत उनको हर 1 घंटे पर खुद से जुड़ी सूचनाएं नाडा को देनी पड़ेंगी?
उन्होंने कहा कि अगर क्रिकेटर इन तमाम चीजों के लिए तैयार होते हैं और नाडा पूरी ईमानदारी से काम करती है तो मेरा मानना है कि पृथ्वी शॉ का मामला महज इत्तफाक नहीं है। पंजाब रणजी टीम के भी शारीरिक प्रशिक्षक रह चुके सिंह ने कहा कि जहां तक बीसीसीआई की बात है तो उसे नाडा से डोप परीक्षण करवाने पर रजामंदी देने में इतना वक्त क्यों लगा, यह बहुत बड़ा सवाल है। दूसरी बात यह कि क्या नाडा बीसीसीआई जैसी ताकतवर खेल संस्था के मामले में सभी नियमों को पूरी तरह से लागू कर पाएगी। कई ऐसी ताकतवर खेल संस्थाएं हैं, जो वाडा के सभी नियमों को पूरी तरह नहीं मानती हैं जिनकी वजह से उनके खिलाड़ी बहुत आसानी से डोप परीक्षण में बच जाते हैं। इस सवाल पर कि क्या नाडा इतनी सक्षम है कि वह हर तरह के ड्रग के सेवन के मामलों को पकड़ सके? सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं है, क्योंकि डोपिंग के मामलों को समय से पकड़ने में नाडा और वाडा अक्सर नाकाम रही हैं। यही वजह है कि वर्ष 2012 के ओलंपिक खेलों में प्रतिबंधित दवाएं लेने वाले एथलीट अब पकड़े जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 के दशक में जब डोपिंग पर प्रतिबंध लगाया गया था, उस वक्त महज 5 या 6 कंपाउंड हुआ करते थे। इस साल जनवरी में वाडा ने प्रतिबंधित दवाओं की जो सूची जारी की है उसमें करीब 350 कंपाउंड हैं। उन सभी को पूरी तरह से जांचने का खर्च प्रति खिलाड़ी करीब 500 डॉलर होता है। सवाल यह है कि क्या नाडा हर खिलाड़ी के टेस्ट पर 500 डॉलर खर्च कर सकेगी? भारतीय खेल प्राधिकरण के सलाहकार रह चुके सिंह ने यह भी कहा कि नाडा के पास ऐसी तकनीक भी पूरी तरह से नहीं है, जो हर ड्रग को पकड़ सके। तमाम नई तकनीक हैं जिनकी कीमत अरबों रुपए में है, जो नाडा के पास उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि डोपिंग में पकड़े गए खिलाड़ियों के मुकाबले बहुत बड़ा प्रतिशत ऐसे खिलाड़ियों का है, जो ड्रग्स लेने के बावजूद बड़ी आसानी से बच निकले हैं। स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ पीएसएम चंद्रन का भी कहना है कि नाडा को क्रिकेट खिलाड़ियों के डोप टेस्ट को लेकर उच्चस्तरीय पेशेवर रुख अपनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि विराट कोहली, रोहित शर्मा, जसप्रीत बुमराह और शिखर धवन समेत प्रख्यात खिलाड़ियों के नमूने लेने में एजेंसी को काफी सावधानी बरतनी होगी। मालूम हो कि बरसों तक परहेज करने के बाद आखिरकार बीसीसीआई ने शुक्रवार को नाडा के दायरे में आने पर रजामंदी दे दी। खेल सचिव राधेश्याम जुलानिया ने कहा कि नाडा अब सभी क्रिकेटरों का डोप परीक्षण करेगी।
इससे पहले तक बीसीसीआई नाडा के दायरे में आने से यह कहते हुए इनकार करता रहा था कि वह कोई राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं बल्कि स्वायत्त इकाई है और वह सरकार से धन नहीं लेती है।

मेरी बिन्दिया रे….

अगर आपके चेहरे पर बिंदी नहीं जमती और आप ये सोचती हैं कि बिंदी हर किसी पर नहीं फबती, तो आप गलत सोच रही हैं। बहुत हद तक संभह है कि आपने चेहरे के अनुसार सही बिंदी का चयन नहीं किया हो। चलिए, हम आपको बताते हैं कि कौन से शेप के चेहरे पर कौन सी तरह की बिंदी सुंदर लगेगी –
तिकोने आकार के चेहरे के लिए – जिन लोगों का माथा चौड़ा और चिन यानी ठुड्डी नुकीली होती है, उनका फेस ट्राएंगल शेप कहलाता है। इस तरह के चेहरे पर आमतौर पर किसी भी आकार की बिंदी सुंदर लगती है।
चौकोर चेहरे के लिए – जब माथा, गालों की हड्डियां और जबड़े की चौड़ाई सब एक बराबर हो, तो ऐसे चेहरे को रेक्टेंगल शेप कहते हैं। ऐसे चेहरे पर गोल व वी शेप वाली बिंदी बहुत अच्छी लगती है। चौकोर चेहरे पर ज्योमेट्रिकल डिज़ाइ की बिंदी नहीं फबती है।
दिल के आकार के चेहरे के लिए – जिन लोगों का माथा चौड़ा, उभरे हुए गाल और नुकीली चिन हो, ऐसे चेहरे में हार्ट शेप बनता है। इस चेहरे पर छोटी बिंदी खूबसूरती में चार चांद लगा देती है वहीं बड़ी बिंदी लगाने से बचें।
अंडाकार चेहरे के लिए – जिन लोगों का माथा ठुड्डी एक ही अनुपात में हो और गाल उभरे हुए हो, वे अंडाकार चेहरे वाले होते है। इन पर भी हर तरह की बिंदी जंचती है लेकिन लंबी बिंदी ज्यादा खूबसूरत लगाती है।
गोल चेहरे के लिए – जिनके चेहरे का आकार गोल हो तो उन्हें भी लंबी बिंदी लगना चाहिए। इस चेहरे पर बहुत बड़ी बिंदी न लगायें।

विरासत-ए-खालसा बना एशिया का सबसे अधिक देखा जाने वाला म्यूजियम

चंडीगढ़/ आनन्दपुर साहिब : पंजाब सरकार द्वारा आनंदपुर साहिब में बनाया गया दुनिया का म्यूजियम ‘विरासत-ए-खालसा’ अब भारत ही नहीं एशिया में सबसे अधिक देखा जाने वाला म्यूजियम बन गया है। इसका नाम ‘एशिया बुक ऑफ रिकार्ड’ में भी दर्ज हो गया है। पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामलों के मंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने रिकॉर्ड दर्ज होने की पुष्टि की है। पूरे एशिया में विरासत-ए-खालसा अब तक का अकेला म्यूजियम है, जहां एक दिन में सबसे अधिक सैलानी आए हैं। इस 20 मार्च इस म्यूजियम को 20569 सैलानियों ने देखा। मंत्री चन्नी ने बताया कि वास्तव में इस साल यह विरासत-ए-खालसा का बनाया गया तीसरा रिकॉर्ड है। इससे पहले ‘लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड’ फरवरी 2019 एडिशन’ और ‘इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड-2020 एडिशन’ दर्ज किया जा चुका है।
7.5 साल में 1 करोड़ से अधिक सैलानी आए
चन्नी ने कहा, पंजाब और सिखों के गौरवमयी और अतुल्य इतिहास और संस्कृति की यादगार के तौर पर ‘विरासत-ए-खालसा को बनाया गया है। इसके दर्शनों के लिए आने वालों की संख्या पिछले 7.5 सालों में 1 करोड़ को पार कर चुकी है। यह पंजाब के लिए गौरव की बात है।

त्रेतायुग में स्वयं श्रीराम ने की थी रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग की स्थापना

शिवजी के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है तमिलनाड़ू के रामनाथपुरम् में स्थित रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग। रामेश्वरम् मंदिर की कथा श्रीराम से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना त्रेतायुग में स्वयं श्रीराम ने की थी। जानिए रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग से जुड़ी खास बातें…
रामायण के अनुसार त्रेता युग में श्रीराम ने धर्म की स्थापना के लिए अवतार लिया था। उस समय रावण की वजह से सृष्टि में अधर्म फैल रहा था। रावण एक ब्राह्मण था। इस वजह से रावण का वध करने पर श्रीराम पर ब्रह्म हत्या का पाप लगा था। ऋषियों ने श्रीराम को ब्रह्म हत्या के पाप का प्रायश्चित करने के लिए कहा। ऋषियों ने श्रीराम से कहा कि वे शिवलिंग स्थापित करके अभिषेक करें। इसके बाद वहां सीता द्वारा बनाया गया बालू का शिवलिंग स्थापित किया गया और श्रीराम ने उसकी पूजा की। इसी वजह से ज्योतिर्लिंग का नाम रामेश्वरम् पड़ा। यहां की गयी पूजा से शिवजी के साथ ही श्रीराम भी प्रसन्न होते हैं।
वर्तमान रामेश्वरम् मंदिर का निर्माण करीब 350 साल पहले किया गया था। यहां की शिल्पकला बहुत ही सुंदर है। मंदिर पूर्व से पश्चिम तक लगभग 1000 फीट और उत्तर से दक्षिण में लगभग 650 फीट क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां के मुख्य द्वार पर लगभग सौ फीट ऊंचा एक गोपुरम् है। रामेश्वरम् मंदिर परिसर में धनुषकोटि, चक्रतीर्थ, शिव तीर्थ, अगस्त्य तीर्थ, गंगा तीर्थ, यमुना तीर्थ जैसे कुल 24 तीर्थ हैं। इन सभी तीर्थों के दर्शन करने के बाद ही रामेश्वरम् ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ाने का महत्व है। शिवलिंग पर सिर्फ गंगाजल चढ़ाने की परंपरा है। इसके लिए हरिद्वार से जल लाया जाता है।
हवाई मार्ग से रामेश्वरम् पहुंचने के लिए मदुरई एयरपोर्ट पहुंचना पड़ता है। मदुरई से 170 किमी दूर रामेश्वरम् स्थित है। यहां से सड़क मार्ग से मंदिर तक पहुंच सकते हैं। रामेश्वरम् से करीब 3 किमी दूर रेल्वे स्टेशन है। यहां देशभर के सभी बड़े शहरों से ट्रेनें पहुंचती हैं। सड़क मार्ग से भी ये तीर्थ सभी बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

विकी और आयुष्मान बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सुरेखा सीकरी सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री

मुम्बई : 66वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा हाल ही में की गयी। श्रीराम राघवन निर्देशित ‘अंधाधुन’ को सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला। विकी कौशल को ‘उरी’ और आयुष्मान खुराना को ‘अंधाधुन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवॉर्ड दिया गया। तेलुगु एक्ट्रेस कीर्ति सुरेश को फिल्म ‘महानटी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का अवॉर्ड मिला।
राष्ट्रीय सिनेमा पुरस्कारों की जूरी के चेयरमैन राहुल रवैल ने पुरस्कारों की घोषणा की। इस दौरान सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर मौजूद थे। इन पुरस्कारों का ऐलान दो महीने पहले किया जाना था। लेकिन, लोकसभा चुनावों के चलते अब इनकी घोषणा की गई।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की पूरी सूची
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – विकी कौशल, आयुष्मान खुराना
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता – स्वानंद किरकिरे, चुंबक
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री – कीर्ति सुरेश (तेलुगु)
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री सुरेखा सीकरी, बधाई हो
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक आदित्य धर, उरी द सर्जिकल स्ट्राइक
सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार – पीवी रोहित, समित सिंह, ताला अर्चलरेशु श्रीनिवास पोकाले
सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म सरकारी हीरिया प्राथमिक शाले कसरगोदू (कन्नड़)
सर्वश्रेष्ठ गीतकार – मंजुथा, (नाथीचरमी)
सर्वश्रेष्ठ मेकअप आर्टिस्ट रंजीत
सर्वश्रेष्ठ खेल फिल्म स्वीमिंग थ्रू डार्कनेस
सर्वश्रेष्ठ पारिवारिक मूल्यों वाली फिल्म – चलो जीते हैं
सर्वश्रेष्ठ शॉर्ट फिल्म कसाब
सर्वश्रेष्ठ खोजी फिल्म अमोली
सर्वश्रेष्ठ शैक्षणिक फिल्म सर्लभ विरला
सामाजिक विषय सर्वश्रेष्ठ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म – ताला ते कुंजी
सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण फिल्म द वर्ल्ड मोस्ट फेमस टाइगर
विशेष रूप से उल्लेखनीय पुरस्कार – महान हुतात्मा डायरेक्टर सागर पुराणिक
सर्वश्रेष्ठ संगीत – ज्योति, केदार दिवेकर
सर्वश्रेष्ठ सम्पादन सनराइज, हेमंती सरकार
सर्वश्रेष्ठ ऑडियोग्राफी चिल्ड्रन ऑफ सॉइल, बिश्वदीप चैटर्जी
सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक ब्लेस जॉनी और अनंत विजय
सर्वश्रेष्ठ राजस्थानी फिल्म टर्टल
सर्वश्रेष्ठ पंचांग फिल्म इन द लैंड ऑफ पॉइजनस वीमन
सर्वश्रेष्ठ गारो फिल्म अन्ना
सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म भोंगा
सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म बरम
सर्वश्रेष्ठ उर्दू फिल्म हामिद
सर्वश्रेष्ठ बंगाली फिल्म एक जे छिलो राजा
सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक – संजय लीला भंसाली (पद्मावत)
सर्वश्रेष्ठ बैकग्राउंड अवॉर्ड उरी द सर्जिकल स्ट्राइक
सर्वश्रेष्ठ फिल्म मैत्री राज्य -उत्तराखंड
सर्वश्रेष्ठ एक्शन फिल्म – केजीएफ

हाशिम अमला ने लिया क्रिकेट से संन्यास

दक्षिण अफ्रीका के प्रमुख बल्लेबाजों में से एक हाशिम अमला ने गुरुवार (8 अगस्त) को अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया। अब वे सिर्फ घरेलू क्रिकेट खेलेंगे। इस बात की घोषणा उन्होंने एक स्टेटमेंट जारी करते हुए की। 31 मार्च 1983 को जन्म अमला ने अपने 15 साल के क्रिकेट करियर में 349 मैच (तीनों फॉर्मेट) खेले और कुल 18,672 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने 55 शतक और 88 अर्द्धशतक भी जमाए। अमला जून 2014 से जनवरी 2016 तक दक्षिण अफ्रीकी टीम के कप्तान भी रहे। अचानक उनके संन्यास ले लेने की वजह से दुनियाभर के उनके फैन्स को झटका लगा और उन्होंने इसे क्रिकेट के लिए बड़ा नुकसान बताया। फैन्स ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमला को महान बल्लेबाज बताया और आगे के जीवन के लिए उन्हें शुभकामनाएं दीं। अमला ने अपने वनडे कॅरियर में 181 मैचों में 49.46 के औसत से 8113 रन बनाए। फिलहाल सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने के मामले में वे दुनिया में पांचवें नंबर पर थे। एक तरफ विराट वनडे में सचिन के रिकॉर्ड तोड़ रहे थे और दूसरी तरफ अमला, विराट के रिकॉर्ड तोड़ रहे थे। इस अफ्रीकी बल्लेबाज के नाम वनडे में सबसे तेज 2 हजार, 3 हजार, 4 हजार, 5 हजार, 6 हजार, 7 हजार रन पूरे करने का रिकॉर्ड है। अमला दुनिया के उन 5 खिलाड़ियों में भी शामिल हैं, जिन्होंने वनडे और टेस्ट दोनों में 25 या उससे ज्यादा शतक जमाए हैं। 36 साल के अमला ने साल 2004 में भारत के खिलाफ टेस्ट डेब्यू, साल 2008 में बांग्लादेश के खिलाफ वनडे डेब्यू और साल 2009 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 डेब्यू किया था। अमला ने 124 टेस्ट में 9282 रन, 181 वनडे में 8113 रन और 44 टी20 में 1277 रन बनाए। टेस्ट में उनका बेस्ट 311* था जबकि वनडे में सबसे बड़ी पारी 159 रन थी। वे द. अफ्रीका की ओर से टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले इकलौते बल्लेबाज भी हैं। हाशिम अमला के नाम पर दक्षिण अफ्रीका की ओर से किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी पार्टनरशिप करने का रिकॉर्ड भी है। अक्टूबर 2017 में उन्होंने क्विंटन डिकॉक के साथ मिलकर बांग्लादेश के खिलाफ हुए वनडे में 282* रन जोड़े थे।

 कोलकाता में जल्द शुरू होगी भारत का पहला अंडर वॉटर मेट्रो

कोलकाता : रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि देश के पहले अंडर वॉटर मेट्रो की शुरुआत जल्द की जाएगी। गोयल ने ट्वीट किया, ‘‘भारत की पहली अंडर वॉटर ट्रेन जल्द ही कोलकाता में हुगली नदी के नीचे चलाई जाएगी। यह ट्रेन उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का उदाहरण है, जो देश में निरंतर हो रही रेलवे की प्रगति का प्रतीक है। इसके बनने से कोलकाता के लोगों को सुविधा और देश को गर्व का अनुभव होगा।’ भारत की पहली अंडर वॉटर ट्रेन शीघ्र ही कोलकाता में हुगली नदी के नीचे चलना आरंभ होगी। उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का उदाहरण यह ट्रेन देश में निरंतर हो रही रेलवे की प्रगति का प्रतीक है। इसके बनने से कोलकाता निवासियों को सुविधा, और देश को गर्व का अनुभव होगा। गोयल ने एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं। वे मेट्रो सुरंगों के निर्माण में बेहतर इंजीनियरिंग के बारे में बात करते दिखे हैं। भारतीय रेलवे द्वारा जारी वीडियो में दो सुरंगों में पानी के रिसाव को रोकने के लिए सुरक्षा की दृष्टी से चार आवरण के बारे में बात की गई है। ट्रेन कोलकाता मेट्रो लाइन 2 का हिस्सा होगी। इसे ईस्ट-वेस्ट मेट्रो के नाम से भी जाना जाता है। 16 किमी के मेट्रो लाइन को दो फेज में शुरू किया जाएगा। पहले चरण में साल्ट लेक सेक्टर-5 को साल्ट लेक स्टेडियम स्टेशन से जोड़ा जाएगा। पहला फेज पांच किलोमीटर तक फैला होगा। मेट्रो सेवा इसी महीने शुरू होगी। इस लाइन को साल्ट लेक सेक्टर-5 स्टेशन से हावड़ा मैदान तक जोड़ा जाएगा। मेट्रो की सुरंग को अप्रैल 2017 से बनाया जा रहा है। सुरंग 520 मीटर लंबी और 30 मीटर गहरी हैं। इस प्रोजेक्ट के चीफ इंजीनियर परशुराम सिंह ने 2017 में कहा था कि कोलकाता में सबसे पहले मेट्रो सेवा शुरू हुई थी। अब, अंडर वॉटर मेट्रो चलाने वाला भी पहला शहर बनेगा। अभी कोलकाता में केवल एक मेट्रो लाइन है, जिसे नॉर्थ-साउथ मेट्रो के नाम से जाना जाता है।

ऑनर किलिंग के खिलाफ कानून लाने वाला पहला राज्य बना राजस्थान

जयपुर : शायद यह ऑनर किलिंग का पहला मामला था। तब से लेकर अब तक करीब चार साै साल गुजर जाने के बाद भी प्यार करना गुनाह माना जाता रहा। अब राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहां प्यार करना गुनाह नहीं है, बल्कि ऐसे प्रेमी युगलों की सुरक्षा पुलिस करेगी। विधानसभा में ऑनर किलिंग बिल-2019 पारित हुआ है। यह कानून लागू करने वाला राजस्थान प्रदेश में पहला राज्य है। यह कानून बनते ही राजस्थान पुलिस ने इसके प्रचार के लिए भी फिल्म मुगल ए आजम का ही सीन लिया है, जिसे अपने ट्वीटर पर पोस्ट कर लिखा है कि अब मुगल ए आजम का जमाना गया। अब प्यार करना कोई गुनाह नहीं है। अगर प्यार करने वालों को कोई शारीरिक नुकसान पहुंचाता है तो उसे आजीवन कारावास तक हो सकता है। इसके अलावा 5 लाख रुपए तक का जुर्माना भी लग सकता है। आखिरी पंक्ति में दिल का चिह्न लगाकर लिखा है…क्योंकि प्यार करना कोई गुनाह नहीं है।
ऑनर किलिंग बिल के तहत यदि दो वयस्क सहमति से अंतरजातीय विवाह करें और परिजन किसी एक या दोनों की हत्या कर दें तो यह ऑनर किलिंग माना जाएगा। अंतर सामुदायिक, अंतरधार्मिक, समुदाय में शादी पर भी ये नियम लागू होंगे।

महाराजा श्रीषचन्द्र कॉलेज में मनायी गयी प्रेमचंद जयन्ती

कोलकाता : महाराजा श्रीषचन्द्र कॉलेज में प्रेमचंद जयंती समारोह का आयोजन किया गया, जिसका प्रमुख विषय: “प्रेमचंद और आज का समय”। कार्यक्रम का उद्घघाटन भाषण कॉलेज के प्राचार्य डॉ० श्यामल कुमार चक्रवर्ती ने दिया जिसमें उन्होंने प्रेमचंद के लेखनी जीवन के संघर्षों को बताया अपने बीज भाषण में डॉ. कार्तिक चौधरी ने प्रेमचंद आज के समय की जरूरत है। प्रेमचंद ने किसान, दलित, साम्प्रदायिकता, राष्ट्रवाद पर जो नज़रिया दिया है, वह आज के समय से आसानी से जुड़ जाता है और साथ ही प्रेमचंद की कहानियों पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रेमचंद ने अपने कहानियों में जिन मजदूर पात्र को रखा है वह हमारे आस पास के ही लोग है। पूस की रात में जहाँ हल्कू खेती छोड़ने की बात करता है उसका दूसरा पड़ाव ही कफन कहानी का मजदूर पात्र घीसू माधव है। वह कामचोर हो ही नही सकते बल्कि व्यवस्था ने उन्हें ऐसा बना दिया है। कॉलेज की अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो० देबजानी लाहिरी ने प्रेमचंद की ‘कफन’ कहानी को वर्तमान जीवन से जोड़ा।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आचार्य जगदीश चंद्र बोस कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. अभिलाष कुमार गोंड ने अपना व्यक्तव्य रखते हुए कहा प्रेमचंद के कहानी, उपन्यासों के पात्र आज भी समाज में मौजूद है और प्रेमचंद के साहित्य को नयी दृष्टि से देखने की जरूरत है। समापन सत्र में कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ० विजय रवानी ने प्रेमचंद के आधुनिक युग पर प्रभाव को बताया व धन्यवाद ज्ञापन प्रो० प्रतिमा शुक्ला ने किया। कार्यक्रम का संचालन विक्रम साव और पूजा सिंह ने किया। कार्यक्रम में ‘सवा सेर गेंहू’ कहानी पर नाटक, संगीत, नृत्य और भाषण की प्रस्तुति की गई। इस कार्यक्रम में कॉलेज के अलावा विभाग के सुशील, आशीष, विनय, उत्तम, उज़्मा, प्रीति, निधि, माधुरी, पूजा, मंजुला आदि छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया।