Sunday, October 11, 2026
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हिन्दी सीखने के लिए बच्चन, जयशंकर प्रसाद और सुमित्रानंदन पन्त को पढ़ चुके हैं आदित्य ठाकरे

मुम्बई  : बाल ठाकरे अक्सर कहा करते थे कि मैं या मेरे परिवार का कोई सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। लेकिन अब 1966 में बनी पार्टी शिवसेना के मुखिया ठाकरे परिवार की परम्परा टूट रही है। पार्टी की विंग युवा सेना के अध्यक्ष आदित्य ठाकरे करीब 11 साल की लंबी तैयारी के बाद वर्ली (मुम्बई) से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। 29 वर्षीय आदित्य, उद्धव ठाकरे के पुत्र हैं। वे महाराष्ट्र में युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। वे कई बार पार्टी की लाइन से हटकर भी काम करने में नहीं कतराते हैं।
उत्तर भारतीयों के आयोजन के आयोजन में शामिल हुए
हाल ही में आदित्य ने मुंबई में उत्तर भारतीयों के आयोजन कजरी महोत्सव में शिरकत की। वे ऐसे करीब एक दर्जन कार्यक्रमों में गए। यहाँ उन्होंने गमछा ओढ़ा, पगड़ी पहनी और चौपाई भी बोली। जबकि उनकी पार्टी को उत्तर भारतीयों की विरोधी माना जाता है। ऐसे ही मुंबई में जब आरे के जंगल के पेड़ों को बचाने की बात आई, तो उन्होंने सत्तारूढ़ दल होते हुए भी जन भावनाओं के पक्ष में आवाज उठाई। इस बात की जानकारी बहुत ही कम लोगों को है कि उन्होंने सक्रिय राजनीति में आने से पहले, सबसे पहले हिन्दी सीखी।

कभी भी लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ते

आदित्य ठाकरे जब स्कूल में पढ़ते थे, उस वक्त हिंदी के शिक्षक विनय दुबे ने उन्हें घर जाकर हिंदी सिखाई है। वे बताते हैं कि आदित्य की अंग्रेजी पर पकड़ बहुत अच्छी है। लिहाजा उनकी मां रश्मि ठाकरे की इच्छा थी कि वे हिंदी भी धाराप्रवाह बोलें। विनय बताते हैं कि हिंदी सुधारने के लिए उन्होंने हरिवंश राय बच्चन, जयशंकर प्रसाद और सुमित्रानंदन पंत सहित कई कवियों को खूब पढ़ा। मैंने उन्हें हिंदी की बोलचाल में मुहावरों का प्रयोग करना सिखाया। उच्चारण में मुश्किल शब्दों का इस्तेमाल करने से बचने की भी सलाह दी। वे कभी भी लिखा हुआ भाषण नहीं पढ़ते हैं।
कई बॉलीवुड सितारे आदित्य के लिए करना चाहते हैं प्रचार
युवा सेना के सचिव वरुण सरदेसाई आदित्य की कोर टीम के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। वे बताते हैं कि जब से आदित्य ठाकरे ने नामांकन दाखिल किया है कई बॉलीवुड सितारों ने प्रचार करने की इच्छा भी व्यक्त की है। गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन की विशेष उपस्थिति में आदित्य ठाकरे के काव्य संग्रह का विमोचन हुआ था। सलमान खान के घर गणपति का दर्शन करने आदित्य जाते रहे हैं। अक्षय कुमार तो शिवसेना द्वारा मुम्बई में कई स्थानों पर शुरू किए गए ओपन जिम और महिलाओं के लिए शुरू किए गए आत्मरक्षा कक्षाओं यानी  सेल्फ डिफेंस क्लासेस के उद्घाटन समारोह में भी उपस्थित होते रहे हैं।
वर्ली में काफी लोकप्रिय हैं
प्रशांत किशोर की 100 लोगों की टीम शिवसेना को ग्राउंड रियलिटी की जानकारी दे रही है। वरली सहित महाराष्ट्र की जिन 124 सीटों पर शिवसेना चुनाव लड़ रही है, उसकी ग्राउंड रिपोर्ट बूथ वाइज तैयार कर प्रशांत की टीम दे रही है। आदित्य वर्ली में काफी लोकप्रिय हैं, इसलिए केवल तीन दिन ही वहां प्रचार करने के लिए जाएंगे।
कविताएं लिखने का शौक, म्यूजिक एल्बम भी आ चुका
आदित्य ने बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा ली है। इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स से इतिहास में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने केसी लॉ कॉलेज से कानून की भी पढ़ाई की है। वर्ष 2007 में ही उनकी कविताओं की किताब ‘माय थॉट्स इन वाइट एंड ब्लैक’ लॉन्च हो चुकी है। उन्हें जब भी कोई अच्छी लाइन याद आती है वे मोबाइल में ही लिख लेते हैं। उनका उम्मीद नाम से एक म्यूजिक एल्बम भी आया है। आदित्य ने महाराष्ट्र के करीब 40,959 गांवों में से 10 हजार से अधिक गांवों से गुजरते हुए चार हजार किमी की लंबी जन आशीर्वाद यात्रा की है।

राजनीति पर कम खेल, शिक्षा, और रोजगार पर फोकस

युवा सेना के गठन के साथ ही आदित्य ठाकरे के साथ संगठन में सचिव के रूप में पिछले 11 वर्षों से कार्य कर रहे पुर्वेश सरनाईक बताते हैं कि महाराष्ट्र की जनसंख्या करीब 11 करोड़ 24 लाख है। इसमें से करीब 47 फीसदी लोगों की औसत उम्र 29 साल है। आदित्य ठाकरे की उम्र भी इतनी ही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव लड़ने की उनकी टाइमिंग एकदम सही है। युवा सेना सचिव सूरज चव्हाण बताते हैं कि आदित्य दूसरे नेताओं की तरह कुर्ते पायजामे के बदले चाइनीज कॉलर की शर्ट के साथ में चीनोस की पैंट और जूते पहनते हैं। युवाओं के बीच आदित्य पॉलिटिक्स की कम खेल, शिक्षा, कॉलेज और रोजगार जैसे विषयों पर बात करते हैं, जिससे युवा आसानी से उनके साथ जुड़ जाता है।

शिवसैनिकों पर कसी लगाम

आदित्य ठाकरे के मौजूदा कोर ग्रुप में शामिल प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि उन्होंने 18 साल की कम उम्र में ही लोगों से जुड़ने की यात्रा शुरू कर दी थी। वे करीब 9 से 11 वर्षों से सक्रिय राजनीति में रहे हैं। उन्होंने देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई के कॉस्मोपोलिटन कल्चर को समझा। वैलेंटाइन-डे पर शिवसैनिकों द्वारा की जाने वाली तोड़फोड़ की घटना को न सिर्फ लगााम कसी बल्कि अब ऐसी घटनाएं लगभग बंद ही हो गई हैं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

एसएससी ने जारी किया 2019-21 कैलेंडर

नयी दिल्ली : स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) ने 1 अक्टूबर, 2019 से 31 मार्च, 2021 तक आयोजित होने वाले एग्जाम का नया कैलेंडर प्रकाशित कर दिया है। कैलेंडर में वेकंसी के लिए विज्ञापन जारी होने की तारीख, आवेदन प्रक्रिया शुरू होने की तारीख, आवेदन की आखिरी तारीख और परीक्षा की तारीख का उल्लेख किया गया है। स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी) ने 1 अक्टूबर, 2019 से 31 मार्च, 2021 तक आयोजित होने वाली परीक्षा का नया कैलेंडर प्रकाशित कर दिया है। एसएससी कैलेंडर में अक्टूबर 2019 सेलेकर मार्च 2021 तक आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं की तारीखें हैं। परीक्षाओं की तारीखों के अलावा कैलेंडर में और सभी जानकारी भी दी गयी हैं। एसएससी कैलेंडर के मुताबिक, कंबाइंड ग्रैजुएट लेवल एग्जामिनेशन-2019 (टियर-I) के लिए विज्ञापन 22 अक्टूबर, 2019 को जारी किया जाएगा। सीजीएल 2019 सीबीई एग्जाम 2-11 मार्च, 2020 तक जारी किया जाएगा। कंबाइंड हायर सेकंड्री एग्जामिनेशन-2019 (टियर-I) के लिए विज्ञापन 3 दिसम्बर, 2019 को जारी किया जाएगा और कम्प्यूटर आधारित परीक्षा 16 से 27 मार्च, 2020 तक होगी। एसएससी एमटीएस 2019 का दूसरा पेपर 26 नवम्बर, 2019 को होगा जबकि एसएससी सीपीओ 2019 का पहला पेपर 9 से 13 दिसम्बर, 2019 तक होगा। परीक्षा के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 16 अक्टूबर, 2019 है। दूसरा पेपर 21 जून, 2020 को होगा। मल्टी टास्किंग (नॉन टेक्निकल) स्टाफ एग्जाम-2020 का आयोजन 21 मार्च, 2021 को होगा।

बार्बी की निर्माता कम्पनी ने बनाई पहली जेंडर न्यूट्रल डॉल

18 महीने लगे, डॉक्टर से भी ली सलाह

बार्बी डॉल (गुड़िया) बनाने के लिए दुनियाभर में मशहूर कम्पनी मैटल का मुख्यालय। अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित इस बिल्डिंग में कंपनी अपने नए खिलौनों को बच्चों के साथ परीक्षण भी करती है। यहां एक खिलौने के परीक्षण के लिए शिया नाम का एक बच्चा है। ये नई बात नहीं है कि लड़के यहां आते हैं, लेकिन शिया जिस खिलौने के लिए आया है वो लड़कों का खिलौना नहीं बल्कि एक गुड़िया है। खास बात यह है कि शिया इसे देखकर बेहद उत्साहित है। दरअसल, यह गुड़िया खास है। दरअसल 1945 में बनी कम्पनी ने हाल ही में दुनिया की पहली जेंडर न्यूट्रल डॉल उतारी है। दुनियाभर में इसकी चर्चा इसलिए है क्योंकि इससे लड़के और लड़कियां दोनों खेल सकते हैं। कम्पनी ने अभी तक लड़कियों के लिए बार्बी (1959 में) और केन (1961 में) डॉल लॉन्च किया था। केन लड़का है इसलिए इसे लड़के ज्यादा पसंद करते हैं। यह पहला मौका है जब कम्पनी ने जेंडर न्यूट्रल डॉल बनाई है। इस डॉल लाइन का नाम ‘क्रिएटेबल वर्ल्ड’ है। इसमें 6 डॉल बनाई गई हैं, जिसकी हेयर स्टाइल, कपड़े आदि बच्चे अपने हिसाब से कस्टमाइज कर सकते हैं। इस गुड़िया को बनाने वाली टीम को किम कलमोन ने लीड किया है। किम कहती हैं कि ‘दुनिया में अब विभिन्न संस्कृतियां मिल रही हैं, लोग उसका सम्मान कर रहे हैं, आनंद ले रहे हैं। यह डॉल इसी संस्कृति को दिखाती है।
डॉल अलग-अलग त्वचा के रंग में उपलब्ध हैं। इनके लिए कई तरह की हेयर स्टाइल डिजाइन की गयी हैं। बच्चे चाहें तो इन्हें स्कर्ट पहना सकते हैं या पैंट या फिर दोनों ही। इसकी एक किट की कीमत 30 डॉलर है।’ किम बताती हैं कि ‘इस डॉल को बनाने में हमें 18 माह का समय लगा। मैटल ने इसके लिए विभिन्न डॉक्टर, जेंडर आइडेंटिटी को समझने वाले विशेषज्ञ आदि से बात की। यही नहीं कम्पनी ने अमेरिका में 250 परिवारों से इसके बारे में बात की।
किम कहती हैं ‘कंपनी ने जाना कि अभी वे किस तरह की डॉल से खेलते हैं और उन्हें क्या नया चाहिए।’ मेटल को अमेरिका में इस डॉल को लेकर शुरुआती रिएक्शन अच्छा मिला है। लोगों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हम उन लोगों को भी बराबर सम्मान दें जो जेंडर फ्ल्यूड (जिन्हें कभी लगता है कि वे लड़के हैं और कभी लगता है कि लड़की हैं) हैं। गौरतलब है कि 2017 में प्यू रिसर्च ने अपने एक सर्वे में बताया था कि 76 फीसदी माता-पिता अपनी बेटियों को लड़कों का खिलौना खेलने देते हैं जबकि 64 फीसदी माता-पिता ही अपने लड़के को लड़कियों वाले खिलौने खेलने की अनुमति देते हैं।
2016 में बार्बी में किया था बदलाव
कम्पनी ने पहले भी बार्बी को लेकर प्रयोग किया है। वर्ष 2016 में कम्पनी ने बार्बी डॉल के तीन नए बॉडी टाइप लॉन्च किए थे। इसमें लंबी बार्बी, छोटे कद की बार्बी और सुडौल बार्बी शामिल हैं। यह करीब 60 साल के बार्बी के इतिहास में पहला मौका था जब कम्पनी ने स्थापित डॉल में कोई बड़ा बदलाव किया था। लेकिन इससे बार्बी को फायदा मिला था। पिछले वर्ष कम्पनी की बिक्री 14 फीसदी बढ़ गई थी।

15 महिलाओं की टीम पहली बार करेगी 21 अक्टूबर को बिना पुरुष के स्पेसवॉक

नासा की यह स्पेसवॉक मैराथन दिसम्बर तक चलेगी
आईएसएस में बैटरी लगाने के लिए होगी स्पेसवॉक
न्यूयॉर्क : नासा पहली बार बिना किसी पुरुष सहयोगी के 15 महिलाओं की टीम को स्पेसवॉक के लिए भेज रही हैं। 21 अक्टूबर को यह टीम अलग-अलग चरणों में स्पेसवॉक करेगी। इसके पहले नासा ने मार्च में महिलाओं को स्पेसवॉक पर भेजने की योजना बनायी थी, लेकिन स्पेससूट का सही साइज न मिलने से उसे स्थगित कर दिया गया था। अब नए सिरे से इसकी तैयारी की गयी है। महिलाओं की इस टीम क नेतृत्व अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच और जेसिका मीर करेंगी, क्योंकि ये पहले अंतरिक्ष की यात्रा का अनुभव ले चुकी हैं। नासा के मुताबिक स्पेससूट उपलब्ध न होने से मार्च में स्पेसवॉक प्रोग्राम स्थगित करने के बाद क्रिस्टीना ने खुद दूसरे सूट को कॉन्फिगर किया और उस पर काम शुरू किया। अब तक तीन सूट बनकर तैयार हो चुके हैं। इन सूटों के बन जाने के बाद अब तीन अंतरिक्ष यात्री स्पेसवॉक कर सकेंगे।
इनमें से दो नासा के अंतरिक्ष यात्री एंड्रयू मॉर्गन के साथ और जेसिका मीर के साथ स्पेसवॉक पर जाएंगी। क्रिस्टीना के साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के लुका परमिटानो भी स्पेसवॉक करेंगी। क्रिस्टीना और जेसिका ने पिछले 6 सालों से एक साथ प्रशिक्षण लिया है, क्योंकि वे दोनों एक ही टीम के सदस्य हैं। नासा की यह स्पेसवॉक मैराथन दिसम्बर तक चलेगी। इस मैराथन का उद्देश्य इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की मरम्मत और अपग्रेड करना है। ऐन मैकक्लेन और क्रिस्टीना सात घंटे तक स्पेसवॉक कर चुकी हैं। दोनों 2013 के एस्ट्रोनॉट क्लास का हिस्सा थीं। इसमें आधे से ज्यादा महिलाएं थीं। नासा में 50% फ्लाइट डायरेक्टर्स महिलाएं हैं। स्पेसवॉक में स्पेसक्राफ्ट की मरम्मत, वैज्ञानिक प्रयोग और नए उपकरणों का परीक्षण होता है। इस बार स्पेसवॉक में जिन दो एस्ट्रोनॉट्स को हिस्सा लेना है, उनमें से ऐन मैकक्लेन और क्रिस्टीना कोच शामिल हैं। मैकक्लेन 22 मार्च को निक हेग के साथ इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में एक लिथियम आयन बैटरी लगाने के लिए स्पेसवॉक में हिस्सा ले चुकी हैं। दोनों का स्पेसवॉक को लेकर लंबा अनुभव रहा है।

भूमि पेडनेकर बनीं ‘फेस ऑफ एशिया’

बुसान : भू‍मि पेडनेकर संभवत: पहली भारतीय अभिनेत्री बन गयी हैं, जिन्‍होंने बुसान में ‘फेस ऑफ एशिया’ अवॉर्ड जीत लिया है। भूमि, 24वें बुसान फिल्म फेस्टिवल में ‘डॉली किट्टी और वो चमकते सितारे’ के लिए गईं थीं। फिल्‍म वहां के कॉम्पटीशन कैटेगरी में है। भूमि को ‘फेस ऑफ एशिया’ का अवॉर्ड कोरिया की प्रतिष्ठित फैशन पत्रिका ने दिया है। फिल्‍म फेस्टिवल में तकरीबन 150 मेकर्स जमा हुए थे। भूमि ने जीत पर खुशी जतायी।

जयललिता की बायोपिक ‘थलाइवी’ में एमजी रामचंद्रन बनेंगे अरविंद स्वामी

मुम्बई : जयललिता की बायोपिक ‘थलाइवी’ के मेकर्स ने साउथ फिल्मों के स्टार अरविंद स्वामी को कास्ट किया है। वे फिल्म में तमिलनाडु के पूर्व सीएम एमजी रामचंद्रन का रोल करने वाले हैं। जबकि फिल्म में लीड रोल कंगना रनोट निभाएंगी। थलाइवी की शूटिंग मैसूर में नवम्बर के पहले हफ्ते से शुरू होगी। जबकि अरविंद 15 नवम्बर से जॉइन करेंगे। अरविंद तमिल, तेलुगु के अलावा हिन्दी भाषा पर भी अच्छी पकड़ रखते हैं। थलाइवी का निर्देशन एएल विजय कर रहे हैं। वहीं प्रोडक्शन विष्णु वर्धन इंदुरी और शैलेष आर का है। प्रोस्थेटिक सेशन लॉस एंजिल्स में देने के बाद कंगना फिर से भरतनाट्यम सीखने में जुट गई हैं। कंगना की टीम ने इंस्टाग्राम पर उनके भरतनाट्यम क्लास का एक फोटो भी शेयर किया है, जिसमें उनका डांस में परफेक्शन देखा जा सकता है। 1965 से लेकर 1973 तक जयललिता के साथ एमजीआर ने करीब 28 फिल्मों में काम किया था। जयललिता की एमजीआर के साथ पहली फिल्म आइराथिल ओरुवन थी। जो 1965 में आई थी। उन्हें राजनीति में लाने में भी एमजीआर की अहम भूमिका रही।

सुरक्षाबलों के लिए स्वदेशी बुलेटप्रूफ जैकेट ‘भाभा कवच’ तैयार

ए के-47 की गोली भी रहेगी बेअसर
विदेशी जैकेट से आधी कीमत और वजन में भी हल्की
भाभा कवच ने 30 से ज्यादा परीक्षण पूरे किए

नयी दिल्ली : देश में सुरक्षाबलों के लिए स्वदेश में कारगर बुलेटप्रूफ जैकेट तैयार की गयी है। देश के भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) ने अगली पीढ़ी की इस जैकेट को तैयार किया है। यह जैकेट न सिर्फ वजन में हल्की है, बल्कि विदेश से आयात की जाने वाली जैकेट की तुलना में बेहद सस्ती भी है। इस जैकेट को परमाणु वैज्ञानिक डॉ. होमी जहांगीर भाभा के नाम पर ‘भाभा कवच’ का नाम दिया गया है। गृह मंत्रालय के अनुरोध पर बार्क के ट्रॉम्बे सेंटर ने इस जैकेट को तैयार किया है। स्वदेशी बुलेटप्रूफ जैकेट हमारे सैनिकों को एसएलआर, इन्सास रायफल के साथ, एके-47 की गोलियों से भी बचा सकती है। ‘भाभा कवच’ का दाम जहां 70 हजार रुपए के करीब है, तो वहीं आयातित जैकेट की कीमत 1.5 लाख रुपए के करीब होती है। इतना ही नहीं, वजन में आधी होने के चलते स्वदेशी जैकेट सुरक्षाबलों के लिए इस्तेमाल में आसान है। बार्क के वैज्ञानिकों के मुताबिक भाभा कवच जैकेट का वजन महज 6 से 7 किलो के बीच है। इससे पहले विदेश से मंगाई जाने वाली जैकेट का वजन 17 से 20 किलो के बीच होता था।

बलूचिस्तान का हिंगलाज मंदिर, श्रीराम ने भी यहाँ किए थे माँ के दर्शन

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंगलाज माता मंदिर है। यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहीं माता सती का सिर गिरा था। ये मंदिर मकरान रेगिस्तान की खेरथार पहाड़ियों के अंत में है। मंदिर एक छोटी प्राकृतिक गुफा में बना हुआ है, जहाँ एक मिट्टी की वेदी बनी हुई है। देवी की कोई मानव निर्मित छवि नहीं है। बल्कि एक शिला रूप में हिंगलाज माता की आकृति उभरी हुई है।
इसे नानी का घर भी कहा जाता है
हिंगलाज माता मंदिर बलूचिस्तान के जिस इलाके में है, वहाँ पहुंचना काफी कठिन है। रास्ता दुर्गम है और सड़कें भी खराब हैं। नवरात्रि में सिंध- कराची से हजारों हिंदू 500 किमी तक की पैदल यात्रा करके यहां आते हैं। यहां एक शिला पर हिंगलाज माता की छवि उभरी हुई है। मंदिर में कोई दरवाजा भी नहीं है। हर साल दोनों नवरात्र में विशेष मेला लगता है। हिंगलाज माता को बलूचिस्तान और सिंध के मुस्लिम भी मानते हैंं। स्थानीय लोग देवी को कई नामों से बुलाते हैं, जिनमें कोट्टरी, कोट्टवी, कोट्टरिशा शामिल हैं। मुस्लिम भक्त इसे नानी या बीबी नानी कहते हैं।
भगवान राम ने भी किए थे यहां माँ के दर्शन
हिगंलाज गुफा जिस इलाके में है, वहां तीन ज्वालामुखी हैं। इन्हें गणेश, शिव और पार्वती के नाम से जाना जाता है। कराची से तकरीबन 250 किमी दूर स्थित इस मंदिर में भगवान राम ने भी दर्शन किए थे। उनके अलावा गुरु गोरखनाथ, गुरुनानक देव, दादा मखान जैसे आध्यात्मिक संत भी यहां आ चुके हैं। हिंगलाज देवी, हिंदू खत्री समुदाय की कुलदेवी भी हैं। एक अनुमान के अनुसार, भारत में इनकी आबादी 1.5 लाख है और इनमें 80% राजस्थान और गुजरात में हैं।

घरेलू सहायिका की मदद के लिए एमबीए दम्पति रोज लगाता है फूड स्टॉल

मुम्बई : एमबी पासआउट दम्पति अपनी घरेलू सहायिका की आर्थिक मदद के लिए कांदिवली रेलवे स्टेशन के बाहर स्ट्रीट फूल स्टॉल लगाता हैं। इससे होने वाली कमाई वे पति -पत्नी अपनी घरेलू सहायिका को देते हैं। अश्वनी शेनॉय शाह और उनके पति रोज सुबह 4 बजे से 10 बजे तक फूड स्टॉल पर पोहा, उपमा और पराठा बेचते हैं। फेसबुक यूजर दीपाली भाटिया ने यह जानकारी एक पोस्ट के जरिए दी। दीपाली ने लिखा, “वे गांधी जयन्ती ( 2 अक्टूबर) पर अच्छा खाना खोज रही थीं। इसी दौरान वह शाह के फूड स्टॉल पर पहुंची। यहां पर स्नैक्स मौजूदा था। खाने का स्वाद लेने के बाद मैंने दम्पति से पूछा इतना स्वादिष्ट खाना रोड किनारे स्टॉल लगाकर क्यों बेच रहे हो। मैं दोनों का जवाब सुनकर हैरान रह गईं और बेहद प्रभावित हुई।” उन्होंने बताया कि मैं यह सबको बताना चाहती थी इसलिए फेसबुक पर पोस्ट लिखी। आप सोचिए कि यह दम्पति रोज सुबह से खाने का स्टॉल लगाकर अपनी 55 साल की घरेलू सहायिका की मदद करता है। उनकी घरेलू सहायिका के पति पैरालिसिस से पीड़ित हैं। वह स्नैक बनाने में घरेलू सहायिका की मदद भी करते हैं, फिर उसे यहाँ खड़े होकर बेचते हैं।

गूगल मैप्स में आया इन्कॉग्निटो मोड, लोकेशन डेटा को गोपनीय रख सकेंगे यूजर्स

गूगल की कम्पनी अल्फाबेट ने गूगल मैप्स, यूट्यूब और वॉइस असिस्टेंट के लिए नए प्राइवेट फीचर्स रोल जारी कर दिए हैं। अब इसमें यूजर्स इन्कॉग्निटो मोड और ऑटोमैटिक डेटा डिलिशन जैसे फीचर्स भी मिलेंगे। इन फीचर्स से यूजर्स की प्राइवेसी ज्यादा सुरक्षित रहेगी। खासकर सोशल मीडिया माध्यमों पर यूजर अपने डेटा को सम्भाल पाएंगे। इन्कॉग्निटो मोड की मदद से यूजर्स गूगल मैप्स पर अपनी गतिविधि को रोक सकता है। वो मैप्स पर किन जगहों को सर्च कर रहा है, ये डेटा भी वहां सेव नहीं होगा।
गूगल ने पासवर्ड चेकअप नाम का फीचर भी शुरू किया है। इस फीचर की मदद से यूजर को उसके अकाउंट में हुई छेड़छाड़ के बारे में पता चल जाएगा। साथ ही, ये यूजर को पासवर्ड कमजोर के बारे में भी बताएगा। कम्पनी ने बताया कि यूट्यूब पर ऑटो डिलीट ऑप्शन भी जोड़ा गया है। इस फीचर के मदद से यूजर्स डेटा डिलीट होने की अवधि सेट कर पाएंगे। सेट की हुई अवधि के बाद डेटा ऑटोमैटिक डिलीट हो जाएगा। गूगल आने वाले सप्ताह में वॉयस असिस्टेंट में भी डिलीट करने का फीचर ला रहे हैं।