लखनऊ : उत्तर प्रदेश विधानसभा में जल संरक्षण को लेकर एक नई पहल शुरू की गई है। इसके तहत अब यहां सभी को आधा गिलास पानी दिया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित के निर्देश पर प्रमुख सचिव (विधानसभा) प्रदीप दुबे ने विधानसभा और सचिवालय में इस व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू करने की बात कही है। आदेश के मुताबिक- हमेशा पानी से पूरे भरे हुए गिलास के पानी का उपयोग नहीं हो पाता है। अत: शुरू में आधा गिलास पानी ही दिया जाए। जरूरत होने पर पुन: जल उपलब्ध कराया जाए। इससे जल संरक्षण में मदद मिलेगी। इससे पहले लखनऊ में ही किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजेएमयू) में ऐसी पहल को शुरू किया गया था। विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया- हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में आमजन से जल संरक्षण की अपील की थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने आधा गिलास पानी देने का नियम बनाया है।
2030 तक विकराल होगा जल संकट
अधिकारी ने बताया, ”साल 2018 में नीति आयोग ने कहा था कि भारत ‘इतिहास के सबसे भयावह जल संकट’ से जूझ रहा है। 60 करोड़ लोगों को हर रोज पानी की किल्लत से जूझना पड़ रहा है। करीब 2 लाख लोग हर साल साफ पेयजल न मिलने से मर रहे हैं। देश के 75 फीसदी मकानों में पानी की सप्लाई नहीं है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि 2030 तक पानी की किल्लत और विकराल हो जाएगी।
जल संरक्षण : यूपी विधानसभा ने सभी को केवल आधा गिलास पानी देने को कहा
एयरटेल की पीछे छोड़ जियो बनी दूसरी बड़ी टेलीकॉम कम्पनी
मुम्बई : मुकेश अम्बानी की कम्पनी रिलायंस जियो ने ग्राहकों की संख्या के मामले में भारती एयरटेल को पीछे छोड़ दिया है। इस उपलब्धि के साथ वो देश की दूसरी सबसे बड़ी कम्पनी बन गयी है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) के आंकड़ों के मुताबिक मई महीने में जियो के ग्राहकों की संख्या 32.29 करोड़ और बाजार हिस्सेदारी 27.80 फीसदी पहुंच गई है। अभी वोडाफोन-आइडिया पहले स्थान पर बरकार है।
ट्राई के नए आँकड़ों के मुताबिक वोडाफोन-आइडिया के 39.75 करोड़ ग्राहक हैं, वहीं इसकी बाजर में 33.36 फीसदी हिस्सेदारी है। इन आँकड़ों के साथ ये पहले स्थान पर बनी हुई है। बीते साल ही इन दोनों कम्पनियों का विलय हुआ है। दूसरी तरफ, जियो के ग्राहकों की संख्या 32.29 करोड़ पहुँच चुकी है जबकि सुनील मित्तल की भारती एयरटेल के 32.03 करोड़ ग्राहक और 27.58 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है। इन आँकड़ों के साथ वो देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।
जियो ने मई में 81.80 लाख नए ग्राहक जोड़े हैं। इस दौरान वोडाफोन-आइडिया 56.97 लाख करोड़ और एयरटेल ने 15.08 लाख करोड़ ग्राहक कम हुए। वहीं, आर्थिक संकट का सामना कर रही भारत संचार निगल लिमिटेड (BSNL) ने मई के महीने में 2,125 नए वायरलेस सब्सक्राइबर्स जोड़े। वोडाफोन-आइडिया अप्रैल में भी पहले स्थान पर थीं, लेकिन इस दौरान एयरटेल दूसरे स्थान पर थी जबकि जियो तीसरे स्थान पर थी।
सीआरपीएफ की महिला सैनिकों के लिए बॉडी प्रोटेक्टर लॉन्च, 8000 जवानों को मिलेगा फायदा
नयी दिल्ली : देश में पहली बार महिला सैनिकों के लिए बॉडी प्रोटेक्टर लॉन्च किया गया है। इससे उन्हें कानून व्यवस्था बनाए रखने के दौरान सुरक्षा में मदद मिलेगी। सीआरपीएफ की महिला सैनिकों के लिए बनाए गए इस प्रोटेक्टर को शुक्रवार को सीआरपीएफ के डीजी राजीव राय भटनागर और डीआरडीओ में लाइफ साइंस के डीजी ने लॉन्च किया। इससे उनकी महिला बटालियन की करीब 8000 सैनिकों को फायदा मिलेगा। इसमें महिलाओं को पुरुष जवानों के समान ही पूरी शरीर की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया है। फुल बॉडी आर्मर में शोल्डर पैड, आर्म गार्ड, फ्रंट और बैक शील्ड को भी शामिल किया गया है।
कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता बनी समिति ने दिखाई तेजी
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय सम्मेलन में उठाया गया था। इसके बाद पुलिस और सशस्त्र बलों में महिलाओं की सुरक्षा समस्याओं के मुद्दे पर लोकसभा में चर्चा के बाद हरी झंडी दिखाई गई। इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सीआरपीएफ के आईजी प्रोविजनिंग अनुपम कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। इसके बाद सीआरपीएफ, डीआईपीएएस (डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेज) और डिफेंस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) के आपसी सहयोग से बॉडी प्रोटेक्टर को डिजाइन किया। डीआईपीएएस के वैज्ञानिकों ने बॉडी गियर डिजाइन करने से पहले सीआरपीएफ की रैपिड एक्शन फोर्स की महिला जवानों का अध्ययन किया था। इसे बनाने में दो साल लगे। दिल्ली पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के इंचार्ज सुमन नुलवा के मुताबिक, ‘‘पुलिस में अक्सर हम पुरुष प्रधान रहते हैं, लेकिन अब इस लिंग भेद समाप्त कर महिलाओं को भी विशेष जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। ताकि, वे अपने कर्तव्यों को अधिक आसानी से निभा सकें।’’ निर्भया केस में विरोध प्रदर्शन को मैनेज करने वाली महिला आईपीएस ने मीडिया को बताया, ‘‘महिला पुलिस को लॉ एंड ऑर्डर को ठीक करने के दौरान ही समस्या आती है। इस दौरान हेलमेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि महिलाओं को अक्सर हेलमेट फिट नहीं होते, क्योंकि वे पुरुषों के अनुरूप मंगाए गए होते हैं। हेलमेट की मांग काफी लंबे समय से की जा रही थी।
आईसीसी ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल हुए तेन्दुलकर, डोनाल्ड और कैथरीन
लंदन : भारत के स्टार बल्लेबाज सचिन तेन्दुलकर को दक्षिण अफ्रीका के महान तेज गेंदबाज एलेन डोनाल्ड के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के ‘ हाल ऑफ फेम ’ में शामिल किया गया। तेन्दुलकर आईसीसी ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल होने वाले छठे भारतीय खिलाड़ी बने। उनसे पहले सुनील गावस्कर, बिशन सिंह बेदी, कपिल देव, अनिल कुंबले और राहुल द्रविड़ ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल हुए थे।
तेन्दुलकर और डोनाल्ड के साथ इस साल ‘हाल ऑफ फेम’ में दो बार के विश्व कप विजेता ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटर कैथरीन फिट्जपैट्रिक को भी शामिल किया गया है। तेन्दुलकर ने ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल करने के समारोह में कहा, ‘‘आईसीसी क्रिकेट ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल किया जाना सम्मान की बात है जो पीढ़ी दर पीढ़ी क्रिकेटरों के योगदान को संजोता है। इन सभी ने खेल के विकास और लोकप्रियता में योगदान दिया है और मैं खुश हूं कि मैंने भी इसमें अपना योगदान दिया। ’’
उन्होंने अपने परिवार और कोच को शुक्रिया कहा जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करीब ढाई दशक के करीब की यात्रा में उनका सहयोग किया।
इस महान बल्लेबाज ने कहा, ‘‘इस मौके पर मैं उन सभी को शुक्रिया कहना चाहूंगा जो मेरे लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान मेरे साथ रहे। मेरे माता पिता, भाई अजीत और पत्नी अंजलि मेरे लिये ताकत के स्तंभ रहे हैं जबकि मैं भाग्यशाली रहा कि मुझे शुरू में मार्गदर्शन के लिये रमाकांत आचरेकर जैसा कोच और मेंटर मिला। ’’
क्रिकेट इतिहास के सबसे शानदार बल्लेबाज तेन्दुलकर को ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल होने की योग्यता हासिल करने के तुरंत बाद ही इसमें जगह मिल गयी जिसके लिये एक खिलाड़ी को अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच कम से कम पांच साल पहले खेल लेना चाहिए। पूर्व दाएं हाथ के बल्लेबाज ने सर डोनाल्ड ब्रैडमैन के साथ क्रिकेट खेला है और टेस्ट और वनडे दोनों में सबसे ज्यादा रन जुटाने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं। नवम्बर 2013 में संन्यास ले चुके 46 साल के तेन्दुलकर ने टेस्ट में 15,921 और वनडे में 18,426 रन बनाए हैं जो अब भी रिकार्ड बने हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने सभी कप्तानों, साथी खिलाड़ियों और बीसीसीआई, एमसीए प्रशासकों के इतने वर्षों से समर्थन का भी शुक्रिया करता हूं जिनकी वजह से मैं इतने लंबे समय तक खेल का लुत्फ उठा पाया। मैं आईसीसी को भी मेरे क्रिकेट करियर की सराहना करने के लिये शुक्रिया कहता हूं। ’’ डोनाल्ड खेल के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में से एक हैं जिन्होंने 330 टेस्ट और 272 वनडे विकेट चटकाये हैं। इस 52 साल के क्रिकेटर ने 2003 में क्रिकेट को अलविदा कहा था। वहीं कैथरीन महिला क्रिकेट में दूसरी सर्वाधिक विकेट चटकाने वाली खिलाड़ी हैं जिन्होंने वनडे में 180 और टेस्ट में 80 विकेट चटकाये हैं। कोच के तौर पर उन्होंने आस्ट्रेलियाई महिला टीम को तीन विश्व कप खिताब दिलाये। आईसीसी के मुख्य कार्यकारी मनु स्वाहने ने इन तीनों खिलाड़ियों को ‘हाल ऑफ फेम’ में शामिल होने के लिये बधाई दी।
अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने की प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की तारीफ
नयी दिल्ली : अन्तरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना की शुक्रवार को सराहना की। उसने कहा कि यह पर्यावरण को स्वच्छ बनाने तथा महिलाओं का स्वास्थ्य बेहतर करने की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि है। आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने यहां एक सम्मेलन में कहा, ‘‘वर्ष 2020 तक देशभर में एलपीजी उपलब्ध कराना बड़ी उपलब्धि है। यह ऊर्जा का मुद्दा नहीं है बल्कि यह एक आर्थिक मुद्दा है, सामाजिक मुद्दा है।’’
प्रधानमंत्री ने उत्तरप्रदेश के बलिया में एक मई 2016 को इस योजना की शुरुआत की थी। इसका लक्ष्य गरीब परिवारों को नि:शुल्क एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराकर महिलाओं और बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर बनाना है। अभी तक इस योजना के तहत करीब 7.40 करोड़ कनेक्शन दिये जा चुके हैं। योजना के तहत 2020 तक आठ करोड़ कनेक्शन देने का लक्ष्य है।
बिरोल ने कहा कि ग्रामीण परिवारों में रसोई में लकड़ी, उपले और दूसरे कृषि अपशिष्टों का इस्तेमाल किया जाने से सांस संबंधी बीमारियों का मुख्य कारण है। एलपीजी से स्वच्छ पर्यावरण मुहैया कराने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा, ‘‘उज्ज्वला महज ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धि नहीं है बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक उपलब्धि भी है।’’ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी पिछले साल इस योजना की तारीफ की थी। बिरोल ने कहा कि भारत ने पिछले साल सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया। जल्दी ही सभी घरों में बिजली पहुंच जाएगी। यह एक बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि भारत ने 2022 तक सौर ऊर्जा एवं अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों से 175 गीगावाट बिजली उत्पादन करने का लक्ष्य तय किया है। यदि यही रफ्तार रही तो लक्ष्य को संशोधित कर बढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही जैव ईंधन के इस्तेमाल पर अधिक जोर देना भी बहुत महत्वपूर्ण है। तेल एवं गैस का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ ही इन कदमों से देश को आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
नहीं बढ़ा मुकेश अम्बानी का वेतन, पैकेज लगातार 11वें साल 15 करोड़ रुपये
मुम्बई : भारत के सबसे अमीर उद्यमी और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अम्बानी का वार्षिक वेतन पैकेज लगातार 11वें साल 15 करोड़ रुपये के स्तर पर बना रहा । कंपनी से मिलने वाली अम्बानी की वार्षिक परिलब्धियां वर्ष 2008-09 से स्थिर हैं। कम्पनी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार ‘‘चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अम्बानी की कुल परिलब्धियां वार्षिक 15 करोड़ रुपये के स्तर पर बरकरार रखी गयी हैं। यह कम्पनी में प्रबंधकीय स्तर की परिलब्धियों को संतुलित रखने के विषय में स्वयं एक उदाहरण प्रस्तुत करते रहने की उनकी इच्छा को दर्शाता है।’’ इसी दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज में अम्बानी के सभी पूर्णकालिक निदेशकों के मानदेय में अच्छी वृद्धि दर्ज की गयी है जिनमें उनके निकट संबंधी निखिल और हीतल मेसानी भी हैं। मुकेश अम्बानी के वित्त वर्ष 2018-19 की परिलब्धियों में 4.45 करोड़ रुपये वेतन एवं भत्ते के रूप में दिए गए। उनका वेतन एवं भत्ता 2017-18 में 4.49 करोड़ रुपये रहा था। अम्बानी ने स्वेच्छा से अपनी परिलब्धियां स्थिर रखने की अक्टूबर 2009 में घोषणा की थी। निखिल और हीतल दोनों को 2018-19 में 20.57-20.57 करोड़ रुपये का पैकेज दिया गया। एक साल पहले इन दोनों में से प्रत्येक को 19.99 करोड़ रुपये मिले थे। इसी दौरान कंपनी के कार्यकारी निदेशक पी.एम.एस. प्रसाद का मानदेय 8.99 करोड़ रुपये से बढ़कर 10.01 करोड़ रुपये किया गया । इसी तरह कंपनी के तेल परिशोधन कारोबार के प्रमुख पवन कुमार कपिल का मानदेय भी 3.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 4.17 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी के पूर्णकालिक निदेशकों में अंबानी के अलावा निखिल, हीतल, प्रसाद और कपिल शामिल हैं।
आरटीआई से खुलासा : नयी दिल्ली में भुनाये गये 80.6 प्रतिशत चुनावी बॉन्ड
इन्दौर : सूचना के अधिकार (आरटीआई) से खुलासा हुआ है कि सियासी दलों को चंदा देने के लिये मार्च 2018 से मई 2019 के बीच कुल 5,851.41 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गये। गौर करने वाली बात यह है कि इनमें से 80.6 प्रतिशत बॉन्ड सिर्फ नयी दिल्ली में भुनाये गये जहां प्रमुख सियासी दलों के राष्ट्रीय मुख्यालय स्थित हैं। मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने दो अलग-अलग अर्जियों पर सूचना के अधिकार के तहत भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से मिले आंकड़े “पीटीआई-भाषा” के साथ रविवार को साझा किये। यह जानकारी चुनावी बॉन्डों की बिक्री और इन्हें भुनाये जाने के शुरूआती 10 चरणों पर आधारित है। उन्होंने बताया कि आलोच्य अवधि में नयी दिल्ली में कुल 874.50 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बिके, जबकि राष्ट्रीय राजधानी में इस रकम के मुकाबले पांच गुना से भी ज्यादा 4,715.58 करोड़ रुपये के बॉन्ड भुनाये गये।
मुंबई में 1,782.36 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गये लेकिन वहां इनमें से केवल 7% यानी 121.13 करोड़ रुपये के बॉन्ड ही भुनाए गए। इसी तरह कोलकाता में करीब 1,389 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्डों की बिक्री हुई और वहां 167.50 करोड़ रुपये के बॉन्ड (12%) भुनाये। बेंगलुरू में करीब 195 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गये लेकिन उनमें से वहां इनमें से महज 1.5 करोड़ रुपये यानी एक प्रतिशत बॉन्ड ही भुनाये गये। हैदराबाद में 806.12 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बिके और 512.30 करोड़ रुपये के बॉन्ड भुनाये गये। भुवनेश्वर में 315.76 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बिके और 226.50 करोड़ रुपये के बॉन्ड भुनाये गये। चेन्नई में 184.20 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बिके और 51.55 करोड़ रुपये के बॉन्ड भुनाये गये।
आलोच्य अवधि के दौरान देश भर में मार्च 2018 से मई 2019 के बीच 5,851.41 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गये। कुल 10 चरणों में बंटी इस अवधि के दौरान 5,831.16 करोड़ रुपये के बॉन्ड भुनाये गये। यानी 20.25 करोड़ रुपये के शेष बॉन्ड तय समय-सीमा में भुनाये नहीं जा सके और नियमानुसार इनकी वैधता समाप्त हो गयी। आलोच्य अवधि में गांधीनगर, गुवाहाटी, जयपुर, रायपुर, पणजी, तिरुअनंतपुरम और विशाखापत्तनम में कुल 279.70 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड बिके। लेकिन सातों शहरों में एक भी बॉन्ड नहीं भुनाया गया। शुरूआती 10 चरणों के दौरान 13 शहरों-अगरतला, आइजोल, बादामी बाग (श्रीनगर), भोपाल, देहरादून, गंगटोक, इम्फाल, ईटानगर, कोहिमा, पटना, रांची, शिलॉन्ग और शिमला में एक भी चुनावी बॉन्ड नहीं बिका। लेकिन बादामी बाग, पटना, रांची और गंगटोक में कुल 17.5 करोड़ रुपये के बॉन्ड भुनाये गये। बहरहाल, आरटीआई के तहत इस बात का ब्योरा सामने नहीं आया है कि चुनावी बॉन्ड खरीदने वाले चंदादाता कौन थे और इन बंधपत्रों से किन-किन सियासी पार्टियों के खजाने में कितनी रकम जमा हुई। लेकिन नियमों के मुताबिक वे ही सियासी दल चुनावी बॉन्ड के जरिये चंदा लेने की पात्रता रखते हैं जो लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 29-ए के तहत पंजीबद्ध हैं और जिन्हें लोकसभा या विधानसभा के पिछले आम चुनाव में पड़े वोटों में से कम से कम एक प्रतिशत वोट मिले हों। गौरतलब है कि आलोच्य अवधि में देश भर में एसबीआई की विभिन्न अधिकृत शाखाओं के जरिये एक हजार रुपये, दस हजार रुपये, एक लाख रुपये, दस लाख रुपये और एक करोड़ रुपये के मूल्य वर्गों वाले चुनावी बॉन्ड बिक्री के लिये जारी किये गये थे। ये बॉन्ड चंदा पाने वाले सियासी दलों द्वारा एसबीआई की अधिकृत शाखाओं में चालू खाते खोलकर भुनाये गये।
हिमा की 400 मीटर में वापसी, जुलाई में पांचवां स्वर्ण पदक जीता
नोवे मेस्तो (चेक गणराज्य) : भारत की स्टार धाविका हिमा दास ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए यहां अपनी पसंदीदा 400 मीटर दौड़ में 52 . 09 सेकेंड के सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ इस महीने का पांचवां स्वर्ण पदक जीता। गत शनिवार का हिमा का यह प्रदर्शन हालांकि 50 . 79 के उनके निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से धीमा है जो उन्होंने जकार्ता एशियाई खेलों के दौरान बनाया था। वह साथ ही 51 . 80 सेकेंड के विश्व चैंपियनशिप के क्वालीफाइंग स्तर से भी चूक गई। हिमा का यह प्रदर्शन हालांकि 52 . 88 सेकेंड के सत्र में उनके पिछले सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से बेहतर है। दो जुलाई को यूरोप में पहली प्रतिस्पर्धी दौड़ में हिस्सा लेने के बाद से हिमा का यह पांचवां स्वर्ण पदक है। हिमा ने साल की अपनी पहली 200 मीटर प्रतिस्पर्धी दौड़ में 23 . 65 सेकेंड के समय के साथ दो जुलाई को पोलैंड में पोजनान एथलेटिक्स ग्रां प्री में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने सात जुलाई को पोलैंड में ही कुत्नो एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 23 .97 सेकेंड के साथ 200 मीटर में स्वर्ण पदक जीता।
चेक गणराज्य में 13 जुलाई को क्लादनो एथलेटिक्स प्रतियोगिता में हिमा ने 23 . 43 सेकेंड से स्वर्ण पदक जीता जबकि बुधवार को इसी देश में उन्होंने ताबोर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में चौथा सोने का तमगा जीता। इस साल अप्रैल में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पीठ की तकलीफ के कारण परेशान रहने के बाद असम की 19 साल की हिमा ने पहली बार 400 मीटर में हिस्सा लिया था। इस बीच एमपी जबीर ने भी 400 मीटर बाधा दौड़ में 49 . 66 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता लेकिन मोहम्मद अनस को 200 मीटर में 20 . 95 सेकेंड के समय से कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा।
राजमार्ग परियोजनाओं के लिए 2024 तक 1.25 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा देगी एलआईसी : गडकरी
नयी दिल्ली : देश के बुनियादी ढांचा क्षेत्र की वित्तपोषण की जरूरतों को पूरा करने के नवोन्मेषी तरीकों के तहत बीमा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने 2024 तक राजमार्ग परियोजनाओं के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये की ऋण सुविधा देने का फैसला किया है। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी दी। मंत्रालय 8.41 लाख करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना का समय पर क्रियान्वयन करना चाहता है। इसके जरिये अखिल भारतीय स्तर पर राजमार्गों का ‘ग्रिड’ बिछाया जा सकेगा। मंत्रालय इस परियोजना के लिए पेंशन और बीमा कोषों सहित वित्तपोषण के विभिन्न स्रोतों तक पहुंचना चाहता है। गडकरी ने कहा, ‘‘एलआईसी ने हमें एक साल में 25,000 करोड़ रुपये और पाँच साल में 1.25 लाख करोड़ रुपये की ऋण सुविधा की पेशकश की है। इस पर वे सैद्धान्तिक रूप से सहमत हैं। हम राजमार्ग निर्माण में इस कोष का इस्तेमाल करेंगे।’’ एलआईसी के चेयरमैन आर कुमार ने पिछले सप्ताह गडकरी से मुलाकात की थी। मंत्री ने कहा कि इस ऋण सुविधा का इस्तेमाल भारतमाला परियोजना के लिए किया जाएगा जिसकी संशोधित लागत 8.41 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गयी है।
भारतमाला परियोजना की शुरुआती लागत 5.35 लाख करोड़ रुपये थी। बाद में भूमि अधिग्रहण की लागत की वजह से इसमें इजाफा हो गया। पहले चरण में 34,800 किलोमीटर का उन्नयन किया जाएगा। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (एनएचडीपी) का शेष 10,000 किलोमीटर भी शामिल है। गडकरी ने कहा कि भारतमाला परियोजना का वित्तपोषण उपकर, टोल राजस्व, बाजार से कर्ज, निजी क्षेत्र की भागीदारी, बीमा कोष, पेंशन कोष, मसाला बांड और अन्य पहल के जरिये किया जाएगा। एलआईसी से ऋण सुविधा ऐसी ही एक पहल है।
शुरुआती योजना के अनुसार इसके लिए कोष 30 साल की अवधि के लिए जुटाया जाएगा और प्रत्येक दस साल में ब्याज दरों में संशोधन होगा।
एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) तथा एलआईसी के अधिकारी मिलकर इसके तौर तरीके तय करेंगे। यह कर्ज एनएचएआई द्वारा जारी बांड के रूप में होगा। गडकरी ने कहा, ‘‘हमारे पास कोष की कमी नहीं है।‘‘ उन्होंने कहा कि जैसे ही परियोजनाएं पूरी होंगी उनका मौद्रिकरण किया जाएगा और उससे हासिल कोष को पुन: राजमार्ग निर्माण में लगाया जाएगा।
एनएचएआई परिचालन में आ चुके राजमार्ग खंडों की नीलामी के तीसरे चरण में निगाह टीओटी (टोल, परिचालन और स्थानांतरण) माडल पर चल रहे कुल 566 किलोमीटर के नौ मार्ग खंड नीलाम करना चाह रही है। इससे 4,995 करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद है। ये खंड उत्तर प्रदेश , बिहार , झारखंड और तमिलनाडु में पड़ते हैं।
एनआईए कानून बढ़ाएगा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी की ताकत
नयी दिल्ली : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए ) संशोधन विधेयक 2019 पारित हो चुका है। अब दोनों सदनों पारित होने के बाद जांच एजेंसी पहले से और अधिक मजबूत हो जाएगी। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार, एनआईए अधिनियम 2008 में तीन प्रमुख संशोधन किए गए हैं।
पहला बदलाव अपराधों का प्रकार है, जिसकी जाँच एनआईए कर सकती है और मुकदमा चला सकती है। मौजूदा अधिनियम के एनआईए परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम, 1967 जैसे अधिनियमों के तहत अपराधों की जांच कर सकती है।
संशोधित विधेयक एनआईए को मानव तस्करी, जाली मुद्रा, प्रतिबंधित हथियारों के निर्माण या बिक्री, साइबर आतंकवाद, और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 जैसे अपराधों की जांच करने में सक्षम बनाएगा।
दूसरा बदलाव एनआईए के अधिकार क्षेत्र से संबंधित है। मौजूदा अधिनियम के तहत, इसके दायरे में आने वाले अपराधों के लिए, एनआईए अधिकारियों के पास अन्य पुलिस अधिकारियों के समान शक्ति होती है। देश के किसी भी राज्य में जांच करने के लिए यह स्वतंत्र है। लेकिन संशोधित विधेयक एनआईए अधिकारियों को भारत के बाहर किए गए अपराधों की जांच करने की शक्ति प्रदान करता है। हालांकि एनआईए का क्षेत्राधिकार अंतरराष्ट्रीय संधियों और अन्य देशों के घरेलू कानूनों के अधीन होगा।
3. तीसरा बदलाव एनआईए के दायरे में आने वाले अपराधों या तथाकथित सूचीबद्ध अपराधों के लिए विशेष परीक्षण अदालतों से संबंधित है। मौजूदा अधिनियम केंद्र को एनआईए की जाँच के लिए विशेष अदालतों का गठन करने की अनुमति देता है। लेकिन संशोधित विधेयक केंद्र सरकार को इस तरह की जांच के लिए सत्र अदालतों को विशेष अदालत के रूप में गठित करने शक्ति प्रदान करता है।




