Thursday, April 23, 2026
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बेखौफ बातें

बेखौफ बातें युवाओं की अपनी कहानी है। अन्धेरों के बीच रोशनी की तलाश है। लेखिका ने अपनीभावनाओं को इन कहानियों में पिरोया है। पुस्तक खरीदने के लिए सम्पर्क करें – 9163986473

मेघे ढाका तारा..सेपरेशन इज इशेंशियल

डॉ. विजया सिंह

काफी मुश्किलों के बाद और माँ की अतिशय (और कई बार अचम्भित कर देने वाली) साहसिकता के कारण ‘मेघे ढाका तारा‘(मेघाच्छादित नक्षत्र) देख ही आई. यह फिल्म बंगाल के प्रसिद्ध फिल्मकार और पटकथा लेखक रित्विक घटक के जीवन और कार्यों के साथ तत्कालीन परिस्थितियों (बंगाल के अकाल, प्रमुख आंदोलनों, स्वतंत्रता प्राप्ति( हस्तांतरण), असंतोष, कम्युनिष्ट पार्टी के दलीय मतभेद, फूट) को लेकर कलाकार के चेतन और अवचेतन के स्तर पर क्रिया प्रतिक्रिया और अंतःक्रिया की मोटी-महीन बुनाई करती चलती है. गौरतलब है कि रित्विक घटक ने स्वयं भी इस नाम से फिल्म बनाई है. कमलेश्वर मुखर्जी द्वारा निर्देशित यह फिल्म मुझे बेहतरीन लगी. शाश्वत चैटर्जी और अनन्या चैटर्जी ने नीलकंठ बागची और दुर्गा बागची के रूप में दो प्रेम करने वाले संवेदनशील लोगों की कहानी कही हैं जिनके बीच का अलगाव ही सत्य है, जरूरी है. तंगहाल दुर्गा कहती भी है -‘सेपरेशन इज इसेंशियल’.

क्या कलाकार, रचनाकार होना ही लगभग आत्महंता होना है? बार-बार लगता है कि ईमानदार रचनाकार ‘जो है’ और ‘होना चाहिए’ के द्वंद्व में सारे दाँव हारता जाता है. कहने की अपार कोशिशों के बाद उसे पता चलता है कि कोई उसे सुनना ही नहीं चाहता. हाथों से फिसलते जाते सारे तंतु दिमाग और दिल का संतुलन बिगाड़ने लगते हैं. इलेक्ट्रिक शॉक में बेदम होता नीलकंठ डॉक्टर से कहता है कि हजारों बोल्ट के विचार हमेशा उसके दिमाग में चहलकदमी करते हैं. इतने इलेक्ट्रिक शॉक से तो उसे केवल सुरसुरी होती है. ऐसी दुर्दांत चेतना के साथ क्या अकेले हो जाना संभव है…नहीं..बिल्कुल नहीं. लेकिन संयम और संतुलन के बिना तो स्व-विनाश को खुला आमंत्रण भी देना है. गरीबी जनित अभावों, महत्वाकांक्षा तथा मोहभंग के कारण स्वयं से ही उसका संबंध टूट जाता है. वह इतना अकेला हो गया है कि वह खुद भी अपने साथ नहीं और दुर्गा बच्चों के साथ बिल्कुल अकेली..

सामान्य से इतर गहन अनुभूति, पक्षधरता, सिद्धांत तथा मानव सत्य की बात करने वाला क्यों एक पल में समझौताहीन महामानव लगता है जो पागलखाने में पागलों के साथ ही एक नाटक का मंचन कर डालता है और दूसरे ही पल में एक ऐसा इंसान जिसे अपने काम की धुन में पत्नी, तीन बच्चों का कोई ख्याल नहीं रहता. चेतन-अवचेतन में दौड़ लगाते नीलकंठ के लिए असफलता का अवसाद ही सच है. वह जानता है कि पैसा नहीं काम ही बचा रह जाएगा अनवरत (तुम देखना), कि उसका विश्वास सभी में एक मनुष्य होने में है जो धोखेबाज नहीं, कायर नहीं. वहीं बहुत-बहुत प्यार करने वाली पत्नी जो उसकी बीमारी, बढ़ते अतिवाद, न छूटने वाले नशे और परिवार की जद्दोजहद में नौकरी करती है, पढ़ाई करती है. नौकरी व बच्चों के साथ दूर चली जाना चाहती है. वह समझ चुकी है कि नीलकंठ उससे अनजानी दूरियों तक छिटक गया है. उसकी परेशानियाँ वह जानता भले हो पर कर कुछ भी नहीं सकता. वह जब भी उसकी ओर देखती है या उसे सुनते हुए जबरन दूसरी ओर देखने लगती है तो लगता है मानो हताशा में उसके गालों के गड्ढे कहीं ज्यादा गहरे हो गए हैं. जिम्मेदारियों ने साड़ी को गंदला कर दिया है. उसका सच, उसका जीवन, उसकी चेतना नीलकंठ से इतनी भिन्न हो गई है कि शायद एक-दूसरे को समझना-समझाना-चाहना-बने रहना मुश्किल हो गया है. नीलकंठ को धैर्यहीन सृजन करना है, दुर्गा को बचे हुए को प्राणपण से बचाना है. मनुष्य व उसके सत्य का अर्थ उसके लिए जीवन के उलझे तारों को फिर से करीने से पिरोना है. बाकी शेष बचाना लेना है, संभालना है, संवारना है. वह स्त्री है, तीन बच्चों की माँ है. नीलकंठ को सामाजिक-बौद्धिक दुनिया के लिए प्रतिबद्ध होना है जबकि दुर्गा के लिए दुनिया तो उसके निज के संसार में आसन्न उपस्थित है. उसकी दुनिया में उसके भूखे बच्चे हैं, उनकी शिक्षा-दीक्षा की चिंता है, अदद नौकरी की जरूरत शामिल है. उसे भी अपनी सृष्टि की रक्षा करनी है, संजोना है. निश्चित रूप से उसकी और नीलकंठ की जद्दोजहद दो महत्वपूर्ण रचना संसारों के निर्माण से संबंद्ध है. भिन्न किंतु आवश्यक. साथ चलकर एक दूसरे की बची-खुची शक्ति को छीन लेना प्यार का, जीवन का अपमान ही तो है. ऐसे में अलगाव ही उसका एकमात्र बचाव है. निर्णय दुर्गा का है. वही यह फैसला कर सकती है, उसमें ही यह ताकत है और उसके लिए यह जरूरी भी है. नीलकंठ अपने ही तीव्र वेग में खोया निर्णय लेने की ताकत को खो चुका है. अतएव दुर्गा चुनती है और नीलकंठ स्वीकार करता है. सर्जक होने की कीमत दोनों चुकाते हैं.

(लेखिका रानी बिड़ला गर्ल्स कॉलेज में प्रवक्ता हैं)

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने मनाया विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस

कोलकाता :  उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक ने अपने सभी ग्राहकों और मुख्य रूप से वरिष्ठ नागरिकों को विशेष लाभ एवं सेवाएं प्रदान करने के लिए जीवन की घटनाओं पर आधारित बैंकिंग सेवाओं का शुभारंभ करते हुए विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाया। बैंक का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को संकट की घड़ी में बैंकिंग सहायता के माध्यम से उनकी मदद करना है, ताकि वे अच्छी एवं बुरी, दोनों परिस्थितियों में सुरक्षित महसूस करें।
जीवन की घटनाओं पर आधारित बैंकिंग सेवाओं के जरिए वरिष्ठ नागरिकों को कई ख़ास सुविधाएं दी गई हैं, जैसे कि बैंकिंग सेवाओं की घर पर उपलब्धता, जरूरत पड़ने पर विशेष सहायता, तथा शाखाओं में प्राथमिकता सेवाएँ।
वरिष्ठ नागरिकों को विभिन्न बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने में होने वाली कठिनाइयों को अच्छी तरह समझते हुए, उज्जीवन एसएफबी ने उनके जीवन को और मूल्यवान बनाने के लिए इन सुविधाओं को डिज़ाइन किया है, ताकि इन सुविधाओं को उनके दरवाजे तक बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराया जा सके। इन सुविधाओं को व्यक्ति के जीवन के सुखद पलों के साथ-साथ उसके जीवन में होने वाली अप्रत्याशित घटनाओं एवं दुखद परिस्थितियों का समय रहते सामना करने के लिए तैयार किया गया है। उज्जीवन एसएफबी की शाखाओं में समर्पित कर्मचारी वरिष्ठ नागरिकों का हाथ थामने और लेन-देन को पूरा करने में उनकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
इस मौके पर उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी एवं सीईओ, श्री समित घोष ने कहा, “हम अपने ग्राहकों, ख़ासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों के लिए जीवन की घटनाओं पर आधारित बैंकिंग सेवाओं की शुरुआत करते हुए बेहद प्रसन्नता का अनुभव कर रहे हैं। हमें यकीन है कि, इन सेवाओं के माध्यम से वे बेहद आसानी और सुविधा के साथ बैंकिंग को जारी रखने में सक्षम होंगे, जिससे बैंकिंग का अनुभव अधिक फायदेमंद बन जाएगा। इन सेवाओं को ग्राहकों के जीवन के हर चरण की उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है।

प्रतिभा सिंह को दुबई में ग्लोबल समिट में मिला सुरश्री सम्मान

कोलकाता/दुबईः दुबई में बिहारी कनेक्ट लंदन की ओर से आयोजित ग्लोबल समिट 2019 में कोलकाता की प्रख्यात गायिका व अभिनेत्री प्रतिभा सिंह को सुरश्री सम्मान प्रदान किया गया। इस तीन दिवसीय समारोह में 20 देशों में रहने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उसमें मुख्य अतिथि के तौर पर भारतीय जनता पार्टी के सांसद अर्जुन सिंह, भारत के कौंसुल जनरल विपुल, ग्रेट ब्रिटेन में बिहारी कनेक्ट के चैयरमैन उदेश्वर सिंह प्रमुख थे। सम्मानित होने वालों में संपूर्ण भोजपुरी विकास मंच के महामंत्री प्रदीप कुमार सिंह, गायक मोहन राठौड़ और देवी प्रमुख है।

यूएई ने प्रदान किया प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान

अबुधाबी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारत एवं संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका के निभाने लिए शनिवार को इस देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायेद’ से सम्मानित किया गया। इससे पहले विश्व के कई नेता इस सम्मान से नवाजे जा चुके हैं, जिनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय एवं चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग शामिल हैं। इस सम्मान के लिये मोदी ने यूएई सरकार का शुक्रिया अदा किया और इस सम्मान को 1.3 अरब भारतीयों के कौशल और क्षमताओं को समर्पित किया।
अबुधाबी में राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मोदी को अबु धाबी के इस सम्मान से नवाजा गया। इस पुरस्कार का नामकरण यूएई के संस्थापक शेख जायेद बिन सुल्तान अल नहयान के नाम पर किया गया है।बाद में मोदी ने ट्वीट किया, ‘‘कुछ समय पहले ‘ऑर्डर ऑफ जायेद’ से सम्मानित होने पर कृतज्ञ हूं। यह पुरस्कार एक व्यक्ति को नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा और 130 करोड़ भारतीयों को समर्पित है। इस सम्मान के लिये मैं यूएई सरकार का शुक्रिया अदा करता हूं।’’ मोदी की यूएई की यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि इस पुरस्कार का नामकरण यूएई के संस्थापक शेख जायेद बिन सुल्तान अल नहयान के नाम पर किया गया है। इसका विशेष महत्व है क्योंकि ‘‘शेख जायेद के जन्मशती वर्ष में प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान दिया जाने वाला है।’’ इसमें कहा गया कि भारत और यूएई के बीच मजबूत, करीबी और बहुआयामी संबंध रहा है जो सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक सूत्रों भी जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इससे पहले अगस्त 2015 में यूएई की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापक सामरिक भागीदारी भी बढ़ी। यूएई ने अप्रैल में मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा की थी। अबुधाबी के वली अहद शहजादा मोहम्मद बिन जायेद अल नहयान ने अप्रैल में एक ट्वीट कर बताया, ‘‘भारत के साथ हमारे ऐतिहासिक और व्यापक सामरिक संबंध रहे हैं, जिसमें मेरे अभिन्न मित्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उन्होंने इन संबंधों में और प्रगाढ़ता लाने का काम किया।’’ करीब 60 अरब अमेरिकी डॉलर के वार्षिक द्विपक्षीय कारोबार के साथ यूएई भारत का तीसरा बड़ा कारोबारी सहयोगी है। यह भारत के लिये तेल निर्यात करने वाला चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है।

आठ साल की उम्र में पदक जीत रहा है निशानेबाजी का ‘वंडर ब्वाय’

नयी दिल्ली : आठ बरस की उम्र में जब हमउम्र बच्चे कार्टून या मोबाइल देखने में मसरूफ रहते है, पिथौरागढ का दिव्यांश जोशी निशानेबाजी रेंज पर कड़ी मेहनत करता है ताकि अपनी बहन की तरह भविष्य में भारत की पदक उम्मीद बन सके ।
भारत के सीमावर्ती पिथौरागढ जिले में कक्षा चार के छात्र दिव्यांश ने इंटर स्कूल और इंटर कालेज राज्य स्तरीय निशानेबाजी स्पर्धा में 50 मीटर राइफल प्रोन में स्वर्ण पदक जीता । उनकी बड़ी बहन यशस्वी राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज है और अभी तक विभिन्न राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर के टूर्नामेंटों में चार स्वर्ण समेत 16 पदक जीत चुकी है । अपने पिता मनोज जोशी के मार्गदर्शन में निशानेबाजी के गुर सीख रहे दोनों भाई बहनों ने अक्तूबर में भोपाल में होने वाले राष्ट्रीय स्कूली खेलों के लिये क्वालीफाई कर लिया है । यशस्वी ने 25 मीटर पिस्टल में स्वर्ण और 10 मीटर पिस्टल में कांस्य पदक जीता । मनोज जोशी ने कहा ,‘‘पिछले एक साल से दिव्यांश ने अपनी बहन को देखकर निशानेबाजी शुरू की । लोग हैरान हो जाते थे कि बित्ती भर का लड़का राइफल कैसे उठा लेता है । वैसे वह प्रोन पोजिशन में खेलता है लेकिन अब ‘हैंड होल्ड’ करने लगा है । उसने 200 में से 168 अंक लेकर स्वर्ण जीता ।’’ ‘पिस्टल किंग’ जसपाल राणा को अपना आदर्श मानने वाले दिव्यांश के शेड्यूल के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा ,‘‘ वैसे तो हमने घर में भी एक रेंज बनाई हुई है लेकिन फायर आर्म रेंज अलग है जहां कुल 13 बच्चे अभ्यास करते हैं । दिव्यांश सुबह एक घंटा और शाम को दो घंटा रेंज पर बिताता है और बहुत तेजी से सीख रहा है। ’यह पूछने पर कि इतनी कम उम्र में खेल में पदार्पण करने से क्या पढाई बाधित नहीं होती, उन्होंने कहा ,‘‘ वह टीवी और मोबाइल से दूर रहता है जिससे अभ्यास का समय निकल पाता है । पढाई पर असर तो पड़ता है लेकिन मैनेज हो जाता है । वैसे भी विदेशों में इसी उम्र से बच्चे तैयारी करने लगते हैं ताकि बड़े बेसिक्स मजबूत हो जायें । मैं भी उसी दिशा में इसे तैयार कर रहा हूं ।’’
ओलंपिक में भारत ने निशानेबाजी में अभी तक एक स्वर्ण (अभिनव बिंद्रा 2008) , दो रजत (राज्यवर्धन सिंह राठौड़ 2004 और विजय कुमार 2012) और एक कांस्य (गगन नारंग 2012) पदक जीता है । राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में भी निशानेबाजी में भारत का प्रदर्शन अच्छा रहा है । जोशी की अकादमी में बच्चों को कोचिंग और उपकरण की सुविधा निशुल्क है लेकिन प्रायोजन के अभाव में वह ज्यादा बच्चों को प्रवेश नहीं दे पा रहे । उन्होंने केंद्र और प्रदेश सरकार से वित्तीय सहायता की गुजारिश की है । अब तक उनके प्रशिक्षु राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 25 से अधिक पदक जीत चुके हैं । उन्होंने कहा ,‘‘ इस इलाके में प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन हमारे पास संसाधन सीमित है । मैने पूर्व खेलमंत्री विजय गोयल से मदद माँगी थी । वित्तीय सहायता मिलने पर हम काफी होनहार निशानेबाज दे सकते हैं ।’’

एक मित्र की तरफ से एक मित्र को स्नेह भरी सौगात

कवि नवल

हिन्दी के वरिष्ठ कवि -कथाकार, उपन्यासकार, नाटककार और चित्रकार आदरणीय आलोक शर्मा के 84वें वर्ष -प्रवेश कवि नवल ने यह लेख अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा। वे शतायु हों और स्वस्थ -प्रसन्न रहकर दीर्घ काल तक साहित्य सृजन करते रहें । हम इसे साभार आपको पढ़वा रहे हैं..यह समकालीन साहित्य का दस्तावेज है और एक मित्र की तरफ से एक मित्र को स्नेह भरी सौगात –

आलोक शर्मा : तल्लीनता उनका नैसर्गिक गुण है !

कुछ लोग बहुत देर तक चुप नहीं बैठ सकते । इसका मतलब यह नहीं कि वे वाचाल होते हैं, वरन् कुदरत ने उनके भीतर इतनी ऊर्जा भरी होती है कि वे बिना ख़ुद को अभिव्यक्त किए जी नहीं सकते! यह जिजीविषा उनकी पहचान के साथ जुड़ी होती है।

आलोक शर्मा एक ऐसे अनोखे रचनाकार हैं, जो अपने भीतर के रंगों को बाहर लाने के लिए अलग-अलग कूचियों या विधाओं का इस्तेमाल करते रहते हैं ।

अपने लेखन की शुरुआत उन्होंने एक रहस्य उपन्यास लिखकर की थी, लेकिन जब उनके साहित्यकार मित्रों का दायरा बढ़ा, जिनमें अधिकांश कवि थे, उन्होंने कविता लिखनी शुरू की और देखते –देखते उन्होंने अपना पहला कविता संकलन ” आयाम ” स्वटंकित निकाला और उसकी सिर्फ़ तीस प्रतियाँ तैयार कीं । जिल्दबंदी भी ख़ुद की और हर प्रति का कोलाजनुमा चित्र भी बनाया । उनकी व्यवहारिक बुद्धि ने उन्हें रास्ता सुझाया और उन्होंने आयाम संकलन की प्रतियाँ हिन्दी के शीर्ष रचनाकारों के पास भेज दीं । इस नायाब तोहफ़े को पाकर हर बड़े रचनाकार ने बधाई का उन्हें पत्र लिखा, जिसके अंश उन्होंने अपनी अगली मुद्रित पुस्तक में प्रकाशित भी किए ।

आलोक ने एक संवादहीन गम्भीर नाटक लिखा ” चेहरों का जंगल ” , जिसे सुनकर मोहन राकेश ने कहा था, यह आइडिया तो मैं चुराऊंगा , आलोक !

जब तक चेहरों का जंगल छप कर आता , मोहन राकेश का संवादहीन नाटक छपकर आ गया । मोहन राकेश लिक्खाड़ तो थे ही , आलोक मन मसोस कर रह गए ! इस घटना का ज़िक्र मनमोहन ठाकौर साहब ने अपनी आत्मकथा ” अन्तरंग ” में किया है ।

अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का आलोक को ज़बरदस्त अभ्यास है। एक ज़माने में जब वे काॅफ़ी हाउस आते तो काॅफ़ी पीते-बातें करते खाली सिगरेट के पैकेट से कभी ऊँट, कभी घोड़ा, कभी गधा , कभी जिराफ़ बनाया करते । गधा-घोड़ा बनाने में उनकी तल्लीनता इतनी अधिक होती थी कि वे काॅफ़ी पीना भूल जाया करते । काॅफ़ी हाउस के बैरे उनके प्रशंसक तो थे ही , सिगरेट के पैकेट से बनी उनकी कलाकृति को वे सँभाल कर रखते और अगले दिन उनको ही भेंट में नज़र करते !

अपने पहले टंकित-अंकित कविता संग्रह आयाम की वजह से तत्कालीन हिन्दी रचनाकारों के बीच वे अपनी पहचान तो बना ही चुके थे, अपने संवादहीन नाटक ” चेहरों का जंगल ” के ज़रिए बंगाली रंगकर्मियों के बीच भी प्रसिद्ध हो गए , जिनमें शंभु मित्र और ऋत्विक घटक अधिक उल्लेखनीय हैं ।

यह तल्लीनता उनका नैसर्गिक गुण है। वे किसी भी काम में हाथ लगाकर उसे अधूरा नहीं छोड़ते । वे अपने आप में इतना रमे होते हैं कि उन्हें बाहर की दुनिया में कदम रखने में कुछ वक्त लग ही जाता है । अक्सर वे दूसरों की बातों को उतने मनोयोग से सुन नहीं पाते क्योंकि वे ख़ुद के मोनोलाॅग में चले जाते हैं यानी उनकी चुप्पी सही माने में चुप्पी नहीं होती । एक अनभिव्यक्त संवाद उनके भीतर चलता रहता है ।

आलोक अनन्त ऊर्जा के मालिक हैं और उसी ऊर्जा के कारण बहुआयामी कल्पना के स्वामी भी । मैंने आज तक ऐसा ऊर्जावान व्यक्ति नहीं देखा जो सोते-जागते कुछ-न-कुछ करता रहता हो!

पिछले दिनों अपनी किसी कविता को सुनाने से पहले उन्होंने एक टिप्पणी की कि यह कविता स्वप्न में लिखी थी । ‘ लिखी थी ‘ से लोगों को उनके जागने का भ्रम हो सकता है । वे कहना यह चाहते थे कि उन्होंने स्वप्न में ख़ुद को कविता लिखते हुए देखा और स्वप्न -भंग होने पर उसे काग़ज़ पर लिपिबद्ध किया ।

उनकी स्मरणशक्ति भी अद्भुत है और किस्सा सुनाने की शैली भी वैसी ही मोहक । कविता या गद्य सुनाते वक्त वे एक सम्मोहन रचते हैं और यह स्वभाव उन्हें प्रकृति से वरदान के रूप में मिला है ।

अपने अतीन्द्रिय जगत में नख-शिख डूबे आलोक अवचेतन मन के सिद्ध कलाकार हैं, जिनका वाह्य जगत से सिर्फ़ इतना नाता है कि उनका एक शरीर है, शरीर से बँधे कुछ कर्म हैं, कुछ रिश्ते हैं, जिनका निर्वाह करने की कोशिश तो करते हैं लेकिन शायद पूरा न्याय नहीं कर पाते!

स्वभावतः आलोक शर्मा प्रयोगधर्मा कवि हैं । लोगों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए वे ऐसा नया भी कुछ कर गुज़रते हैं कि वे हास्यास्पद दीखने लगें, लेकिन इस बात की चिन्ता उन्हें नहीं होती । एक ज़माने में उन्होंने पण्डितराज जगन्नाथ पर थीसिस लिखनी शुरू कर दी, जबकि उनकी स्कूली शिक्षा तब तक किसी तरह से ले-दे कर मैट्रिकुलेशन तक थी ।

उनका अवचेतन उनको हमेशा कन्ट्रोल करता रहता है और यही उनके लेखन का महत्वपूर्ण बिन्दु है । यह बिन्दु उन्हें अनेक स्तरों पर उद्वेलित किये रहता है जैसे कोई कुम्भकार नये-नये बर्तन , खिलौने या कभी -कभी बेतुके आकार तक उगलता रहता है ।

प्रकृति -बिम्बों से उनका गहरा रिश्ता इसलिए भी बन पाया कि उनके आरम्भिक जीवन की ग्रामीण स्मृतियाँ उनके पास सुरक्षित रह पायीं । यह स्मृति -सम्पदा आलोक शर्मा के पूरे व्यक्तित्व की अथाह पूँजी है ।

अभी हाल ही में उनका एक नया उपन्यास आया है ” उनकी ज़िन्दगी के दिन” जिसकी पृष्ठभूमि उनके मन में बस रहे किसी गाँव पर आधारित है ।

हिन्दी का पहला बैले “एक पंछी की हत्या ” और विश्व के कुछ महान कवियों की कविताओं की अनुवाद- पुस्तक भी पिछले दिनों ही प्रकाशित हुई है । इसी संग्रह में आलोक जी ने अपनी कुछ चुनी हुई कविताएँ इसलिए दीं ताकि पाठक विश्व -स्तर के कवियों के साथ हिन्दी कविता का भी रसास्वादन कर सकें !

अपराजिता की तरफ से कवि को जन्मदिन की हार्दिक बधाई व नवल सर के साथ आपकी मित्रता यूँ ही बनी रहे,

(आलेख कवि नवल सर की फेसबुक वॉल से और तस्वीर नीलांबर की वॉल से)

 

प्राकृतिक संसाधनों से सफल उद्यमी बनने का हुनर सिखा रहा आईआईएम काशीपुर

नयी दिल्ली : उत्तराखंड स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), काशीपुर सरसों की चटनी, छतों पर कम खर्च में बगीचा लगाने की तकनीक, घास काटने की सस्ती मशीन जैसे उत्पाद बनाने वाले स्टार्टअप को तकनीकी और प्रबंधकीय प्रशिक्षण के साथ सफल उद्यमी बनने का रास्ता दिखा रहा है। राज्य के उधम सिंह नगर जिले में स्थित प्रबंधन संस्थान का कहना है कि इस पहल से जहां एक तरफ देश में उद्यमी तैयार होंगे, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड समेत देश में रोजगार सृजन और कृषि विकास तथा किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इस पहल के तहत प्रबंधन संस्थान ने देश में उद्यमियों को तैयार करने के लिये हाल ही में पालना (इनक्यूबेशन) केंद्र के रूप में उद्यमिता विकास और नवप्रवर्तन फाउंडेशन (एफआईईडी) का गठन किया है। इसकी शुरुआत करते हुए, संस्थान देश भर से कृषि क्षेत्र से जुड़े 40 स्टार्टअप का चयन कर उन्हें अपने उत्पादों के विपणन और भावी विकास के गुर सिखाने में जुटा है। इस बारे में संस्थान के निदेशक प्रोफेसर कुलभूषण बलूनी ने फोन पर ‘भाषा’ से बातचीत में कहा, ‘‘इस पहल का मकसद उत्तराखंड के साथ देश में उद्यमिता संस्कृति को बढ़ावा देना है। हमने फिलहाल कृषि, पर्यटन, दस्तकारी, आयुर्वेद और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने का फैसला किया है। इसकी शुरुआत हमने कृषि क्षेत्र से की है।’’ उन्होंने कहा कि इसके लिये हमने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, कृषि मंत्रालय के साथ गठजोड़ किया है। साथ ही हम उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। एफआईईडी के प्रभारी प्रोफेसर सफल बत्रा ने कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा, ‘‘हमने इस दिशा में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई), रफ्तार के तहत कृषि विभाग के साथ मिलकर पहला कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत देश भर से कृषि क्षेत्र में काम कर रहे 350 स्टार्टअप में से 40 का चयन कर उन्हें पालना केंद्र एफआईईडी में प्रशिक्षण देना शुरू किया है।’ उन्होंने बताया कि 20 अगस्त से शुरू यह कार्यक्रम दो महीने के लिये है। इस दौरान उन्हें प्रबंधकीय, तकनीकी प्रशिक्षण के साथ हरसंभव सहायता दी जाएगी। इसके लिये हर दिन बाहर से उद्यमियों और विशेषज्ञों को बुलाकर उन्हें जानकारी उपलब्ध करायी जा रही है।
संस्थान, प्रशिक्षण के लिये चुने गये स्टार्टअप को 10,000 रुपये मासिक वजीफा भी दे रहा है। स्टार्टअप को प्रशिक्षण देने की जरूरत के बारे में पूछे जाने पर बत्रा ने कहा, ‘‘इन लोगों ने पाचन क्रिया में उपयोगी बेहतर गुणवत्ता वाली हल्दी और सरसों की चटनी, घास काटने की सस्ती मशीन, गधी के दूध का साबुन, जैविक खेती, कम खर्च में छतों-बरामदों पर बगीचा लगाने की तकनीक जैसे उत्पाद बनाये, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि अब आगे क्या करना है? स्टार्टअप को यह नहीं पता कि उत्पादों का विपणन कैसे किया जाए? उन्हें इस प्रशिक्षण से आगे की तरक्की और सफल उद्यमी बनने का रास्ता मिलेगा।’’
इसके लाभ के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि ये स्टार्टअप अगर क्षमता अनुसार काम करेंगे तो बड़ी संख्या में रोजगार सृजित होंगे। अगर इन्हीं 40 स्टार्टअप को लिया जाए तो इनके पूर्ण रूप से काम करने पर 4,000 तक रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इसके साथ ही ये किसानों से सरसों या उनकी दूसरी उपज खरीदेंगे, उन्हें खेती की सस्ती तकनीक उपलब्ध कराएंगे, इससे किसानों को भी लाभ होगा और आय बढ़ेगी।’’ एक सवाल के जवाब में बत्रा ने कहा कि ये स्टार्टअप उत्तराखंड समेत 15 राज्यों से हैं और कृषि के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इनकी जरूरत के अनुसार इन्हें 5 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक का वित्तपोषण मिलेगा।

रिश्ते को छुपाने से अच्छा हैं उसे जाहिर करना: दुती

नयी दिल्ली : समलैंगिक रिश्ते का खुलासा करने वाली भारत की पहली एथलीट दुती चंद ने कहा कि उनके लिए रिश्ते को सर्वाजनिक करना छुपाने से बेहतर है। दुती ने मई में ओड़िशा के अपने गांव की एक महिला के साथ अपने रिश्ते को सार्वजनिक करके सुर्खियां बटोरी थीं। उनके इस फैसले के बाद परिवार ने उन से नाता तोड़ने जबकि उनकी बड़ी बहन ने अलग होने की धमकी दी थी लेकिन दुती पर इसका कोई असर नहीं हुआ। दुती ने उस महिला के साथ घर बसाने की इच्छा जाहिर की। अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए कई पदक जीतने वाली 23 साल की इस फर्राटा धावक ने कहा, ‘‘ मेरी निजी जिंदगी के कारण अब मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है क्योंकि मैंने इसका खुलासा कर दिया है। दरअसल जब तक मैंने इसे छुपा रखा था तब तक मैं डर रही थी और दबाव महसूस करती थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ इस रिश्ते को सार्वजनिक करने के बाद कई लोगों ने मुझ से बात कि और मेरा समर्थन किया। उन्होंने मेरे प्रयास की सराहना की जिससे मुझे अच्छा महसूस हुआ।’’ दुती हाल ही में विश्व यूनिवर्सिटी खेलों में 100 मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला ट्रैक और फील्ड खिलाड़ी बनी है। पिछले महीने नपोली में हुए इन खेलों में दुती ने 11.32 सेकेंड का समय निकालकर रेस जीती । वह मंगलवार से लखनऊ में खेले जाने वाले राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैम्पियनशिप में भाग लेंगी जहां उनका लक्ष्य अगले महीने दोहा में खेले जाने वाले विश्व चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाई करना होगा। राष्ट्रीय रिकार्डधारी (100 मीटर की दौड़ 11.26 सेकेंड में) दुती ने कहा, ‘‘ मैं राष्ट्रीय अंतर-राज्यीय चैम्पियनशिप में भाग ले रही हूं और मैं अपको भरोसा देती हूं कि आप मेरे समय में सुधार देखेंगे।’’ विश्व चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाइंग समय 11.24 सेकेंड है।दुती का लक्ष्य अगले साल तोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करना है। महिलाओं के 100 मीटर रेस के लिए ओलंपिक क्वालीफाई के लिए 11.15 सेकेंड का समय रखा गया है। दुती ने कहा, ‘‘ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना और प्रतिस्पर्धा करना हर खिलाड़ी का सपना होता है और मैं अलग नहीं हूं। मैं निश्चित रूप से अपने देश के लिए पदक जीतना चाहूंगी और इसके लिए मेरी तैयारियां जोरों पर हैं।’’

बांग्ला फिल्म का सह निर्माण करेंगे भंडारकर

कोलकाता : जाने माने फिल्मकार सत्यजीत रे ने विभूति भूषण बंदोपाध्याय की 1932 के उपन्यास ‘अपराजितो’ पर आधारित ‘अपूर संसार’ का निर्माण किया था और अब 60 साल बाद मधुर भंडारकर इसी उपन्यास पर आधारित बांग्ला फिल्म ‘अभिजात्रिक’ (अपु की जीवन यात्रा) का सहनिर्माण करने वाले हैं। इस श्वेत श्याम फिल्म का निर्देशन युवा फिल्मकार शुभ्रजीत मित्रा करेंगे और निर्माण भंडारकर करेंगे। मित्रा ने बताया, ‘‘फिल्म की कहानी विभूति भूषण बंदोपाध्याय के उपन्यास का अंतिम भाग है, जिसे अपु की तीन संस्करणों वाली फिल्मों में नहीं दर्शाया गया है। यह फिल्म अपु, उनके बेटे की जीवन यात्रा को दर्शाती है और यह उस जगह से शुरू होती जहां से अपु का संसार (अपुर संसार) खत्म होती है। यह फिल्म महान फिल्मकार (रे) को श्रद्धांजलि होगी।’’ निर्देशक ने कहा कि फिल्म में अपु अपने बेटे की आँखों से अपने बचपन को जियेगा, जिसमें वह बनारस और अपने गांव निश्चिंदीपुर की यात्रा करेगा।