Thursday, April 23, 2026
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लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नारावने आर्मी स्टाफ के वाइस चीफ

नयी दिल्ली : लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नारावने ने आर्मी स्टाफ के वाइस चीफ का पदभार ग्रहण किया। लेफ्टिनेंट जनरल नारावने भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अंबु का स्थान लिया। अंबु 31 अगस्त को रिटायर हो गए थे। सेना ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल नारावने पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियानों में सक्रिय रहे थे। वे श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान भारतीय शांति सेना का भी हिस्सा रहे थे। लेफ्टिनेंट जनरल नारावने को जम्मू-कश्मीर में उल्लेखनीय कार्य के लिए ‘सेना मेडल’ से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें नगालैंड में असम राइफल्स में इंस्पेक्टर जनरल रहने के दौरान ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया जा चुका है। नारावाने ने कहा था- चीनी सेना 100 बार ग्रे जोन में गई तो हमने भी 200 बार ऐसा किया। इससे पहले, पिछले मंगलवार को लेफ्टिनेंट जनरल एमएम नारावने ने एलएसी पर चीनी सैनिकों की घुसपैठ के सवाल पर कहा था कि चीन ने डोकलाम को क्षेत्रीय दबंगई के तौर पर इस्तेमाल किया था। अगर वे 100 बार विवादित क्षेत्र (ग्रे जोन) में गए तो हमने भी 200 बार ऐसा किया। डोकलाम में भारतीय सैनिक चीन के सामने डटे रहे। इससे वक्त साफ संकेत मिला है कि भारतीय सेना पहले से मजबूत है।

5 राज्यों को मिले नये राज्यपाल, केरल के राज्यपाल बने आरिफ मोहम्मद खान

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रविवार को पांच राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए। शाहबानो के मुद्दे पर राजीव गाँधी कैबिनेट छोड़ने वाले आरिफ मोहम्मद खान को केरल का गवर्नर बनाया गया है। तमिलनाडु में भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. तमिलिसाई सुंदरराजन (58) को तेलंगाना की जिम्मेदारी दी गई, वे सबसे युवा मौजूदा राज्यपाल होंगी। इसके अलावा कलराज मिश्र को राजस्थान, भगत सिंह कोश्यारी को महाराष्ट्र, बंडारू दत्तात्रेय को हिमाचल प्रदेश भेजा गया है। कांग्रेस में रहे आरिफ मोहम्मद खान लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर थे। उन्होंने वंदे मातरम् का उर्दू में अनुवाद भी किया था। केंद्र सरकार के तीन तलाक खत्म करने और अनुच्छेद 370 हटाने पर मोदी सरकार के फैसलों की तारीफ की थी। वे 1984 की राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे। तब उन्होंने शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को संसद में कानून बनाकर पलटे जाने के विरोध में मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। आरिफ मोहम्मद ने कहा, ‘‘मेरे लिए यह सेवा करने का एक मौका है। साथ ही देश के एक ऐसे हिस्से को जानने का शानदार अवसर है, जो देश की सीमा से लगा है। विविधताओं वाले इस देश में मेरा जन्म होना सौभाग्य है। इस देश को देवभूमि कहा जाता है।’’ वहीं, बंडारू दत्तात्रेय ने हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद दिया। दत्तात्रेय ने कहा कि उन्होंने राज्यपाल के रूप में मुझे नई जिम्मेदारी दी है।
कल्याण सिंह की जगह कलराज मिश्र को नया गवर्नर नियुक्त किया गया है। केरल में गवर्नर पूर्व चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम थे, जिनका हाल ही में कार्यकाल खत्म हुआ है। 17 जून 1942 को जन्मे भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। वे 2001 से 2002 तक राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे। 2002 से 2007 तक विपक्ष के नेता और 2008 से 2014 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। कोश्यारी बतौर शिक्षक और पत्रकार भी काम कर चुके हैं। आपातकाल के दौरान उन्हें 1977 में जेल भी जाना पड़ा था।

11 महीने की बच्ची के फ्रैक्चर के इलाज के लिए उसकी गुड़िया के पैरों पर भी चढ़ाना पड़ा प्लास्टर

नयी दिल्ली : लोकनायक अस्पताल में 11 महीने की बच्ची के दोनों पैरों के फ्रैक्चर का इलाज करने के लिए डॉक्टरों को उसकी डॉल (गुड़िया) को भी भर्ती करना पड़ा। डॉक्टरों ने बच्ची की तरह गुड़िया के पैरों पर भी प्लास्टर चढ़ाया और ठीक उसे भी वैसे रखा है, जैसे बच्ची को रखा गया है। दरअसल, 11 महीने की जिक्रा मलिक दिल्ली गेट स्थित अपने घर पर 17 अगस्त को बिस्तर से गिर गयी थी। इससे उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर आ गया। माता-पिता जिक्रा को लेकर अस्पताल पहुँचे। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हड्डियों को जोड़ने के लिए दो हफ्ते तक पैरों को रॉड (गैलन ट्रैक्शन- दो साल तक के बच्चों की हडि्डयों को जोड़ने वाली मेथड) से जोड़कर ऊपर की ओर लटकाकर रखना होगा। माता-पिता ने इलाज के हामी भर दी। लेकिन जिक्रा उनसे अस्तपाल से बाहर जाने की जिद करने लगी और रोने लगी। ऐसे में इलाज करना मुश्किल हो रहा था। डॉक्टरों ने जिक्रा के माता-पिता से उसका पसंदीदा खिलौना लाने को कहा। इस पर बच्ची की माँ फरीन ने डॉक्टरों को बताया कि वह अपनी गुड़िया से दिन भर खेलती है।
गुड़िया के पैरों को लटकाकर जिक्रा का लगाया प्लास्टर
डॉक्टरों ने तय किया कि बच्ची को प्लास्टर लगाने से पहले उसकी गुड़िया का इलाज करना होगा। इससे उसके दिमाग का भय निकल जाएगा। ऐसा ही हुआ। डॉक्टरों से घर से जिक्रा की गुड़िया मँगाई और जिक्रा के बेड पर ही गैलन ट्रैक्शन की पॉजीशन में उसके पैरों को बांध दिया। गुड़िया को इलाज की स्थिति में देखने के बाद जिक्रा ने भी पैरों प्लास्टर चढ़वा लिया। अब स्थिति यह है कि डॉक्टरों को जब जिक्रा को दवाई देनी होती है, तो पहले परी को दवा देने का दिखावा करना होता है। इसके बाद जिक्रा दवा लेती है। लगभग दो सप्ताह होने के बाद अब बच्ची काफी ठीक हो रही है। बच्ची के साथ गुड़िया का इलाज करने के चलते जिक्रा पूरे अस्पताल में गुड़िया वाली बच्ची के नाम से चर्चित हो गयी है। जिक्रा की माँ फरीन ने मीडिया को बताया, जिक्रा हमेशा इधर-उधर चलती रहती थी। उसे पांच मिनट भी एक स्थान पर बिठाना मुश्किल था। अस्पताल के पहले दिन वह अस्पताल में लेटने को भी तैयार नही थी। लोकनायक अस्पताल में हड्‌डी रोग विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ अजय गुप्ता ने बताया, ‘‘11 महीने की बच्ची के पैरों में फ्रैक्चर था, वह इलाज कराने से इनकार कर रही थी। इसलिए उसकी माँ ने आइडिया दिया कि बच्ची के इलाज से पहले उसकी गुडिया का इलाज करने का दिखावा करना होगा। क्योंकि बच्ची सबसे ज्यादा अपनी गुड़िया परी के साथ खेलती है। यह आइडिया कारगर रहा और अब बच्ची आराम से इलाज करा रही है।’’

शिक्षक होने का मतलब पाठ्यक्रम समाप्त करना भर नहीं है

श्री शिक्षायतन कॉलेज से कलकत्ता विश्‍वविद्यालय के हिन्दी विभाग की प्रोफेसर और रजिस्ट्रार और उसके बाद सम्प्रति वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन की उपकुलपति प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय का सफर बहुत ही प्रेरक और उम्मीद जगाने वाला रहा है। हाल ही में टोरंटो, कनाडा से अतिशीघ्र प्रकाशित होने वाली पुस्तक भारती संस्थान की त्रैमासिक अन्तराष्ट्रीय शोध-पत्रिका ‘रिसर्च-ई-जर्नल’ एवं साहित्यिक पत्रिका ‘साहित्य सौरभ’ के सम्पादक मंडल में स्थान प्रदान किया गया। कवियत्री, कथाकार अनुवादक व सम्प्रति वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन की कुलपति प्रोफेसर सोमा बंद्योपाध्याय से अपराजिता ने खास बातचीत की, पेश हैं प्रमुख अंश –
प्र. स्त्री लेखन के बारे में क्या कहना चाहेंगी?
कोई भी लेखन, जिसका समाज पर एक सकारात्मक प्रभाव पड़े, अच्छा है, यही बात स्त्री लेखन पर भी लागू होती है। कई बार मैंने देखा है कि लोकप्रियता के लिए नकारात्मकता को विषय बनाया जाता है। नकारात्मकता से मुझे भी परहेज है। मेरा मानना है कि अगर आप गम्भीर समस्याओं को उठाते भी हैं तो उसे एक सकारात्मक दिशा देकर छोड़ें, स्त्री लेखिकाओं के अनुभव को लेकर भी यही कहना चाहूँगी।
प्र. आप एक अनुवादक भी हैं। आज के साहित्य में अनुवाद का महत्व क्या है?
मैं साहित्यिक अनुवाद की बात करूँ तो अपने निजी अनुभव के आधार पर कहूँ तो यह एक सामान्य धारणा है कि अनुवाद का मतलब कृति को एक भाषा से दूसरी भाषा में पढ़ना भर है। मेरी नजर में अनुवाद इससे कहीं ज्यादा है। साहित्यिक अनुवाद से दूसरी भाषाओं के साहित्य के साथ उनकी संस्कृति, साहित्य, परिवेश, भूगोल, इतिहास और नृतत्व की जानकारी मिलती है, उनका अध्ययन होता है और यह आपसी दूरी तय करने में भी सहायक है। भारत जैसे बहुभाषी देश में एकता, अखंडता को बनाए रखने वाला अस्त्र है अनुवाद। अनुवाद दो प्रदेशों के बीच की हर सीमा और अविश्‍वास को पार कर सकता है।
प्र. प्रशासनिक दायित्वों के बीच साहित्य कर्म कैसे निभाती हैं?
सारी चीजें इसलिए हो जाती हैं क्योंकि मेरा सोच सकारात्मक है और ऐसे ही सकारात्क लोग मुझे मिले हैं। परिवार से लेकर सहकर्मियों और शुभचिन्तकों का सहयोग हमेशा से मिलता रहा है तो सब हो जाता है।
प्र. शिक्षिका होने के नाते शिक्षा और छात्रों को लेकर क्या कहेंगी?
शिक्षक होने का मतलब पाठ्यक्रम समाप्त करना भर नहीं है बल्कि विद्यार्थियों को प्रेरित करना है, उनकी प्रतिभा को सामने लाना है। सार्थक शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों को प्रेरित करे और उनकी प्रतिभा को सामने लाये।
प्र. पाठकों को क्या सन्देश देना चाहेंगी?
सकारात्मक सोच रखें, सब सकारात्मक होगा।

शिक्षा और भाषा को पेशेवर धार देनी होगी, यह बहुत जरूरी है

जीवन की अलग – अलग परिभाषाएँ हैं और हर परिभाषा का अपना सत्य है..मगर अन्तत: हर सत्य एक ही निष्कर्ष पर पहुँचता है..ज्ञान और खुशियों को जहाँ तक बाँटा जा सके, बाँटना चाहिए। ज्ञान तो शिक्षक बाँटते हैं मगर खुशियाँ बाँटना तो हमारे हाथ में है। आज शिक्षा के व्यवसायीकरण पर आपत्ति बहुत की जाती है मगर देखा जाए तो एक विषमता हमारे चारों ओर भरी पड़ी है। जहाँ तक हमारा प्रश्न है, हमारा मानना है कि शिक्षा के व्यवसायीकरण में बुराई नहीं बल्कि बुराई उसे धंधा बना देने में है। शिक्षक का महत्व और उसकी गरिमा का होना बहुत आवश्यक है मगर सोचने वाली बात यह है कि जब पेट भूखा होगा और घर में तंगी रहेगी तो शिक्षक भी मन से कैसे पढ़ाएगा। हम यही बात हिन्दी साहित्य के लिए भी कह सकते हैं और हमारे पूरे समाज में ठहराव का जो दौर है, जो काई जमी पड़ी है..उसका कोई कारण है तो वह यही है कि हमने साहित्य और शिक्षा के बाजारीकरण पर विरोध तो जताया पर उसे संरचनागत दृष्टि से सक्षम नहीं बना सके। आप भले ही बाजार के नाम से चिढ़ते हों मगर बाजार के बगैर दोनों का टिकना नामुमकिन है क्योंकि किताबें लिखने के लिए पढ़ाने के लिए श्रम की जरूरत पड़ती है, शोध की जरूरत पड़ती है. यह एक मेहनत वाला काम है। शिक्षक को तो फिर भी वेतन मिलता है, लेखक को वह भी नहीं मिलता। साहित्यिक सेवाओं के बाजार पर हमने कभी ध्यान ही नहीं दिया क्योंकि रुपये हम खर्च नहीं करना चाहते…नतीजा यह है कि गुणवत्ता सिरे से गायब हो रही है और लगातार मंच, हिन्दी और साहित्य, तीनों की गरिमा गिरती जा रही है। आपको सचमुच इन तीनों चीजों से लगाव है तो आपको मुफ्तखोरी छोड़नी होगी..खर्च कीजिए…पेशेवर बनिए…वैसे ही जैसे अँग्रेजी है, बांग्ला व अन्य भाषाएँ हैं…। हिन्दी व भारतीय भाषाओं को पेशेवर और धारधार युवा अन्दाज देने का नाम ही है शुभ सृजन..जिसकी विस्तृत जानकारी आपको वेबपत्रिका में ही मिल जाएगी..बहरहाल गणेश चतुर्थी, शिक्षक दिवस और हिन्दी दिवस की शुभकामनाएँ…रचते रहिए..।

हजारों साल से पूजे जाते रहे हैं अनादि गणेश

गणेश अनादि हैं। इतिहास में भी इसके साक्ष्य हैं। उनकी पूजा के प्रमाण आज से 5000 साल पहले से मिलने लगते हैं। वे अलग-अलग रूपों में विभिन्न संस्कृतियों में हैं। जापान में उन्हें कांगीतेन कहा जाता है। चीन, अफगानिस्तान, ईरान, और मैक्सिको की माया संस्कृति तक में उनकी मूर्तियां मिली हैं।

ईरान में 3200 साल पुरानी गणेश प्रतिमा मिली

माइथोलॉजी और सिम्बॉलिज्म के विशेषज्ञ लायर्ड स्क्रैन्टन की किताब ‘प्वाइंट ऑफ ओरिजनः गोओबलकी टिपे एंड स्पिरिचुयल मैट्रिक्स फॉर द वर्ल्ड कॉस्मोलॉजी’ के अनुसार ईसा पूर्व 3000 में गणेश पूजा का उल्लेख मिलने लगता है। सिंधु घाटी और हड़प्पा सभ्यता में भी गणेश प्रतिमा मिली थी। वहीं ईरान के लोरिस्तान में 1200 साल ईसा पूर्व की गणेश प्रतिमा मिली है।

अफगान में भी गणेशजी प्रतिमा स्थापित की गई थी

राबर्ट ब्राउन की किताब ‘गणेशः स्टडीज ऑफ एन एशियन गॉड’ के मुताबिक अफगानिस्तान के उत्तरी काबुल में गणेश की एक प्रतिमा चौथी सदी की मिली है। वहीं, पख्तिया प्रांत के गार्देज शहर में एक प्रतिमा 5वीं सदी की पाई गई। संगमरमर की इस मूर्ति पर दर्ज है- ‘ये मनमोहक प्रतिमा महाविनायक की है, जिसे शाही राजा खिंगाल ने स्थापित कराया था।’

चीन और जापान में गणेश पेंटिंग मिलीं

चीन के मोगाओ गुफा में भी गणेश की छठी शताब्दी की पेटिंग मिलती है। यह बौद्ध गुफा है। इसमें बौद्ध धर्म से संबंधित हजारों चित्र हैं। इस गुफा के 25 किमी के दायरे में 492 मंदिर हैं। माना जाता है कि बौद्ध धर्म ने ही यहां गणेश पूजा शुरू की। चीन से ही गणपति जापान भी पहुंचे। यही वजह है कि जापान में 1200 साल पुरानी गणेश प्रतिमा और चित्र मिले हैं।

गणेश के आठ अवतार

गणेश पुराण में गणेश के आठ अवतार बताए गए हैं। ये अवतार प्रतीकात्मक हैं, जिनमें वे मानव मन की मोह, ममता, क्रोध जैसी आठ कमियों पर विजय पाने की प्रेरणा देते हैं। इनमें गणेशजी के मूषक के अलावा शेर, माेर और शेषनाग सहित चार वाहन बताए गए हैं। यानी जमीन, आकाश और पानी तीनों में चलने वाले वाहन।

गणेशजी के वाहनों में चलने, उड़ने और तैरने वाले तीनों साधन

मूषक और शेर चलने वाले वाहन : पांच अवतारों में गणेशजी का वाहन मूषक है। गजाननावतार में वे लोभासुर, स्कंदावतार में मदासुर, महोदरावतार में मोहासुर, लंबोदरावतार में क्रोधासुर और धूम्रवर्णावतार में वे अभिमान असुर का वध करते हैं। वक्रतुंडावतार में वाहन शेर हैं। वे मत्सरासुर का वध करते हैं।

उड़ने वाला मयूर वाहन

विकटावतार में गणेशजी का वाहन मयूर पक्षी है। इस अवतार में वे कामासुर नाम के राक्षस का वध करते हैं।

तैरने वाला शेषनाग वाहन

गणपति के विघ्नराज अवतार में वाहन शेषनाग है। इस अवतार में गणपति ममतासुर राक्षस का वध करते हैं।

तमिल में गणेश पिल्लै हैं, तेलुगु में विनायाकुडू

तमिल में गणेशजी को विनायागार और पिल्लै भी कहा जाता है। तेलुगु में उनका नाम विनायाकुडू है। बरमा में उन्हें पाली महा विनायक, थाइलैंड में फरा फिकानेत कहते हैं। गणेशजी की पूजा बौद्ध धर्म में भी होती है। गणेश पुराण के अनुसार इंसान के शरीर का मूलाधार चक्र गणेश कहलाता है। शिव महापुराण के अनुसार गणेशजी का रंग हरा और लाल है।

(आलेख एवं तस्वीर कोलाज – साभार दैनिक भास्कर)

पूजो आशछेन : आया मौसम हैंडलूम साड़ियों का

खादी मीना बूटी हैंडलूम साड़ियाँ बेहद फैशनेबल और आरामदायक हैं। इन साड़ियों में मीना बूटी डिजाइन हैं और यह साड़ियाँ ब्लाउज पीस के साथ आती हैं। इनकी कीमत 980 रुपये है ।

 

लिनेन बेहद आरामदायक फैब्रिक है। साड़ी का जरी बॉर्डर प्यारा है और पल्लू के साथ पूरी साड़ी पर पर खूबसूरत बूटियों का काम है। ब्लाउज पीस उपलब्ध है। कीमत 1499 रुपये है
यह है लिनेन जरी बॉर्डर हैंडलूम साड़ी। ब्लाउज पीस उपलब्ध है। कीमत 1400 रुपये

 

यह खूबसूरत कलेक्शन शुभागता दे द्वारा उपलब्ध करवाया गया है.

 

 

 

 

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से मिला स्वच्छ भारत का सन्देश

कोलकाता : पूर्वी क्षेत्र पाइपलाइन्स, कोलकाता में दिनांक 16-31 अगस्त , 2019 तक ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में, दिनांक हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा संस्कृति नाट्य मंच के तत्वावधान में ‘गाँव से शहर तक’ नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। नाटक का मंचन कार्यालय परिसर के बाहर किया गया ताकि इंडियन ऑयल के कार्मिकों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूप बनाया जा सके।  इस मौके पर उपस्थित जे. पी. सिन्हा, कार्यकारी निदेशक ने स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य सामान्य जनता को स्वच्छता के बारे में जागृत करना है। विदेशों में लोग स्वच्छता के प्रति इतने सजग होते हैं कि एक छोटे से कागज के रैपर को भी पॉकेट में रख लेते हैं तथा उचित स्थान पर ही उसे फेंकते हैं। हमें भी स्वच्छता को गंभीर रूप से लेने की आवश्यकता है। हम आगे भी इस तरह के नाटक का आयोजन सार्वजनिक स्थलों जैसे पार्क, बाजार आदि पर कर सकते हैं जिससे विशाल जन समूह को इसका लाभ मिल सके। कार्यक्रम के दौरान कार्यकारी निदेशक महोदय के साथ-साथ  संजय कुमार वी, मुख्य महाप्रबंधक (प्रचालन) एवं पूर्वी क्षेत्र पाइपलाइन्स, कोलकाता के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण भी उपस्थित थें ।  ‘गांव से शहर तक’ नाटक के निर्देशक, श्री संजय कुमार जायसवाल सहित संस्कृति नाट्य मंच के सभी रंगकर्मियों को  स्मृति चिह्न प्रदान किया गया । कार्यक्रम का सफल संचालन नागेंद्र पंडित, सहायक हिन्दी अधिकारी ने किया ।

गोएयर लगातार 11 वीं बार बनीं सर्वाधिक विश्वसनीय एयरलाइन

नयी दिल्ली :  भारत की सबसे तेजी से बढ़ती एयरलाइन गोएयर ने एक बार फिर सबसे भरोसेमंद एयरलाइन के तौर पर उभर कर एक तरह का कीर्तिमान रच दिया है। जुलाई2019 में गोएयर ने शिड्यूल किए गए घरेलू कैरियर्स के बीच लगातार 11 वें महीने के लिए एक बार फिर उच्चतम ऑन-टाइम-परफॉर्मेंस (ओटीपी) हासिल किया है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार गोएयर ने 80.5% ओटीपी दर्ज की है, जो शिड्यूल की गई घरेलू एयरलाइनों के बीच सबसे अधिक है। गौर करने की बात यह है कि मानसून छा जाने तथा देश भर में मौसम की खराब परिस्थितियों के चलते जुलाई का महीना मुश्किलों भरा था।

हमारी डायनेमिक इंडस्ट्री में यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है- किसी विशेष गंतव्य पर एकदम ठीक समय पर पहुंचने की आवश्यकता। विभिन्न शोध अध्ययनों से यह स्पष्ट हुआ है कि बेहतर ग्राहक संतुष्टि प्राप्त करना केवल विमान किराए और उड़ान की उपलब्धता पर ही निर्भर नहीं होता। किसी एयरलाइन का चयन करने के बारे में विचार करते समय समय के अनुसार होने वाले प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान देते हैं। किसी एयरलाइन में भरोसा कायम करने के लिए उड़ान का समय पर आगमन उनके मन में एक प्रमुख कारक होता है।

गोएयर का ओटीपी नेतृत्व एयरलाइन द्वारा सेवा प्रदान करने को लेकर बिना कोई समझौता किए ग्राहक अनुभव बेहतर बनाने पर लगातार ध्यान केंद्रित करने का परिणाम है। जुलाई 2019 महीने के दौरान गोएयर ने 13.26 लाख यात्रियों को उड़ान भरवाई, जिनमें से मामूली 0.46% बुकिंग्स रद्द हुईं और प्रति 20,000 यात्रियों में मात्र 1 शिकायत सामने आई।

समय के अनुसार प्रबन्धन संस्थानों को बदलने के पक्ष में हैं शिक्षाविद् व प्रबन्धन शिक्षक

मुख्य बातें –
बीआईएमएस, कोलकाता, इंडियन मैनेजमेंट स्कूल एसोसिएशन ने आयोजित किया एम्स का पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन
वरिष्ठ शिक्षाविद तथा प्रबंधन शिक्षकों ने  की‘प्रबन्धन के नए आदर्शों’ पर चर्चा 

कोलकाता :  भारतीय विद्या भवन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस (बीआईएमएस) ने इंडियन मैनेजमेंट स्कूल एसोसिएशन के साथ संयुक्त तौर एम्स पूर्वी क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सम्मेलन का उद्देश्य भारत में प्रबन्धन शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने वाले देश के रूप में स्थापित करने के लिए अप्रयुक्त सम्भावनाएँ तलाशना था, जो कि वैश्विक शिक्षा के लिए नवीन एवं सक्रिय योगदान के माध्यम से प्राप्त किया जा सके। सम्मेलन ने वरिष्ठ शिक्षाविदों तथा प्रबंधन शिक्षकों को एक साथ लाने का कार्य किया जिन्होंने अपने बहुमूल्य विचारों एवं अन्तर्दृष्टियों को साझा किया, ‘प्रबन्धन के नए आदर्शों’ विषय पर अपने विचार रखते हुए उन्होंने अपने क्षेत्रीय स्तर के कार्यानुभवों को बाँटा तथा महत्वपूर्ण कार्य प्रणालियों को भी रेखांकित किया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रो. आर.सी. भट्टाचार्य (अध्यक्ष, एम्स, पश्चिम बंगाल खंड) जी ने प्रबंधन शिक्षा में आधुनिक अधिगम के तकनीकों तथा पाठ्यक्रमों की आवश्यकताओं पर बल दिया। उन्होंने कहा, “आधुनिक प्रबंधन शिक्षा में, हम लोग कई नवीन तकनीकों से अवगत हुए है जैसे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, आईओटी आदि। और हमें इन विषयों को अपने में समाहित करना है, अन्यथा हमारे छात्र पीछे रह जाएँगे। साथ ही, अमेरिका के एएसीएसबी के एक अध्ययन के अनुसार, कई छात्र एस टी ई एम (विज्ञान, तकनीक, अभियांत्रिकी तथा गणित) को चुन रहे हैं, इसलिए आवयश्कता है कि हम गहराई में जा कर देखे और महसूस करें कि क्या ऐसे विषयों को हमारे पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवयश्कता है।’’ सम्मेलन के विषय में बात करते हुए इन्होंने कहा, “ हमने सम्मेलन का विषय ‘प्रबंधन के नए आदर्श’ रखा, ताकि हम भारत तथा विश्व में हो रहे विभिन्न परिवर्तनों को देख सकें। अब आवश्यकता है कि हम पुनः अपने प्रबंधन की शिक्षा को देखे तथा सही रणनीति खोजें। मुझे यकीन है कि आज के विवेचना के पश्चात, हम कुछ नए विषयों एवं विचारों को समझेंगे, जिसे हमें अपने पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए ताकि आज के वर्तमान संदर्भ में प्रबंधन शिक्षा को अधिक प्रासंगिक बनाया जा सकें। अपने सम्बोधन में, डॉ. सुजाता मंगाराज़ (निदेशक एवं डीन (शिक्षाविद) भवन्स सेन्टर फॉर कम्यूनिकेशन्स एंड मैनेजमेंट ने कहा, “ प्रबन्धन शिक्षा लगातार उत्कृष्टता के लक्ष्य की प्राप्ति तथा मूल्यों के वितरण के लिए परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। व्यापार अत्यधिक जटिल एवं प्रतिस्पर्द्धी हो गया है, काम करने का माहौल काफी बदल रहा है इसलिए बिजनेस स्कूल को नये तरीके खोजने होंगे जिससे नए परिप्रेक्ष्य में नेतृत्व करने वाले तथा भविष्य के प्रबंधको को वैश्विक व्यापार की चुनौतियों पर विजय हासिल करने के लिए तैयार किया जा सकें। अवधारणाएँ अब एक भिन्न रणभूमि पर पहुँच गई है, जो आलोचनात्मक वैचारिक योग्यता, डाटा एनालिटिक्स, डिजिटल अवरोधों , नवोन्मेष, रचनात्मकता, सामाजिक उद्दमिता आदि की माँग करता है। इस नए उभरते शिक्षा जगत में, हमें पुनः वर्तमान व्यापारिक शिक्षा के मॉडल को जाँच करना चाहिए तथा इस उद्योग के मानदंडो पर खरा न उतरने वाले अप्रचलित मानकों को बदल देना चाहिए। इसलिए इसी संदर्भ में विचार करते हुए, AIMS पूर्वी क्षेत्र ने प्रबंधन शिक्षा के नए आदर्श उद्योग का नया युग 4.0 विषय पर सम्मेलन रखना उपयुक्त समझा। ’’ सम्मेलन में दो पैनल चर्चा तथा पत्र प्रस्तुति का भी आयोजन किया गया। प्रथम पैनल चर्चा सत्र का विषय – ‘ नए युग में उद्योग 4.0 – बी-स्कूलों के लिए अनिवार्य ’ पर हुआ जिसमें देवार्घ देव ( क्षेत्रीय HR , डाबर इंडिया, लि. ), श्री नदीम काज़ीम (ग्रुप सीएचआरओ, ट्रैक्टर इंडिया लि.) तथा सीतानाथ मुखोपाध्याय (एमएसएमई विभाग) वक्ता के तौर पर शामिल हुए। दूसरे पैनल चर्चा के सत्र में, वक्ता के रूप में मनमीत सिंह (वरिष्ठ संयुक्त निदेशक, व्यावसायिक श्रेष्ठ, केलॉग्स इंडिया लि. ) तथा डॉ. चंद्रिमा बनर्जी ( निदेशक, यूनिग्रो सोल्यूशन्स प्राइवेट लि. ) साथ ही संचालक के रूप में प्रो. (डॉ.) शांतनु राय (निदेशक, एसएनयू) रहे, जिन्होंने ‘ स्पर्श बिंदु से विश्वास बिंदु ’ विषय पर चर्चा की।
सम्मेलन के समापन सत्र में डॉ. राजगोपाल धर चक्रवर्ती ( निदेशक , आईआईएसडब्ल्यूबीएम तथा संरक्षक, एम्स, पश्चिम बंगाल खंड ), डॉ. अजय पाठक (निदेशक,आईसीएफएआई , कोलकाता) , डॉ. नवीन दास ( निदेशक, एनएसएचएम, कोलकाता) एवं डॉ. तापस साहा (निदेशक, आईएमएस, कोलकाता तथा कोषाध्यक्ष एम्स, कोलकाता खंड ) उपस्थित थे। डॉ. आर.के. पात्र (प्राचार्य, बीआईएमएस, कार्यकारी सदस्य, पूर्वी क्षेत्र तथा संयोजक सचिव, एम्स) ने कहा, “ भारतीय विद्या भवन प्रबंधन संस्थान में, हम प्रयास करते हैं कि अन्तर्निहित क्षमताओं को विज्ञान एवं प्रबंधन जगत में बढ़ते हुए व्यवासायिक शिक्षा से मिलाकर तैयार करें। हमें बहुत प्रसन्नता है कि ऐसे सम्मेलन का आयोजन हमारे परिसर में हुआ है। हमें यकीन है कि सम्मेलन के विवेचना का जो निष्कर्ष निकाला है, वो हमारे छात्रों को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ हमारे शिक्षकों को भी प्रासंगिक प्रबंधन शिक्षा प्रदान करने में प्रबुद्ध करेगा। ’’
उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर डॉ. सैकत मित्रा (उपकुलपति, मौलाना अबुल कलाम आजाद तकनीकी विश्वविद्यालय – एमएकेएयूटी ), प्रमुख अतिथि डॉ. ध्रुव ज्योति चट्टोपाध्याय (उपकुलपति, एमिटी विश्वविद्यालय, कोलकाता), विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रीति रंजन माँझी (प्राचार्या, आरसीएम भुवनेश्वर तथा कार्यकारी बोर्ड सदस्य, पूर्वी क्षेत्र एम्स), डॉ. सुजाता मंगाराज (निदेशक एवं डीन (शिक्षाविद) भवन्स संचार एवं प्रबंधन केंद्र, भुवनेश्वर तथा क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, एम्स पूर्वी क्षेत्र मौजूद रहे, वक्ता के तौर पर श्री सीतानाथ मुखोपाध्याय (एमएसएमई विभाग) साथ ही डॉ. आर.के. पात्र (प्राचार्य, बीआईएमएस, कार्यकारी सदस्य, पूर्वी क्षेत्र तथा संयोजक सचिव, एम्स) एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

(अनुवादक – नीरज सिंह)