Tuesday, June 30, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 587

फेसबुक भी अमेजन की तरह लॉन्च करेगी वीडियो स्ट्रीमिंग डिवाइस

सोशल मीडिया कंपनी फेसबुक जल्द ही टीवी स्ट्रीमिंग डिवाइस लॉन्च करने जा रही है। यह डिवाइस अमेजन के पोर्टल टीवी डिवाइस फायर स्टिक जैसा होगा। इस डिवाइस को फेसबुक के पोर्टल डिवाइस की सीरीज के तहत लॉन्च किया जाएगा। वैरायटी मैगजीन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें टीवी देखने और ऑगमेंटिड रियल्टी के अलावा कैमरा और वीडियो चैटिंग का फीचर मौजूद होगा। इस डिवाइस के लिए फेसबुक नेटफ्लिक्स, डिज्नी समेत कई थर्ड पार्टी स्ट्रीमिंग सर्विसेज से बातचीत कर सकती है। लोग इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स का कंटेंट इस डिवाइस के जरिए देख सकेंगे। यह डिवाइस एंड्रॉयड पर काम करेगा। इस डिवाइस का इस्तेमाल यूजर्स अपने फेसबुक अकाउंट के जरिए वीडियो कॉलिंग और चैटिंग भी कर सकेंगे। फेसबुक अपने इस डिवाइस को इस साल के आखिर तक लॉन्च करने की तैयारी में है। साथ ही साथ फेसबुक अपने वीडियो चैट डिवाइस पोर्टल के नए वर्जन को भी लॉन्च कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेसबुक कंपनी की तरफ से आधिकारिक तौर पर बताया गया है कि वह एक ‘पोर्टल’ वीडियो चैटिंग डिवाइस लॉन्च करने की तैयारी में है। इस साल के आखिरी महीनों में यह डिवाइस बाजार में आ सकती है। फेसबुक ‘पोर्टल’ को पिछले साल लॉन्च किया गया था। जिसे कई देशों में बेचा जा रहा है। इसके दो मॉडल बिक्री के लिए उपलब्ध है। 10 इंच डिवाइस की कीमत करीब 199 डॉलर (करीब 14 हजार रुपये) है।

पहली बार ड्रोन से बनेगा देश का डिजिटल नक्शा

मैप में 10 सेमी तक की सटीक पहचान मिलेगी
नयी दिल्ली : सर्वे ऑफ इंडिया (एसओआई) पहली बार ड्रोन की मदद से देश का डिजिटल नक्शा बना रहा है। विज्ञान और तकनीकी विभाग के सहयोग से यह काम दो साल में पूरा होगा। इसके लिए तीन डिजिटल केंद्र बनाए गए हैं। यहां से पूरे देश का भौगोलिक डिजिटल डेटा तैयार होगा। सैटेलाइट से नियंत्रित होने वाले जीपीएस सिस्टम की अपेक्षा यह डिजिटल नक्शा ज्यादा सटीक और स्पष्ट होगा। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे स्थानों की मैपिंग नहीं की जाएगी, जो संवेदनशील हैं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक से हो गई है। इससे जमीन संबंधी जानकारियां और ठिकाने की पतासाजी आसानी से की जा सकेगी। यह नक्शा 10 सेंटीमीटर तक की सटीक पहचान प्रदान करेगा। सर्वे ऑफ इंडिया का कहना है कि अभी हमारे पास 2500 से ज्यादा ग्राउंड कंट्रोल पॉइंट्स हैं। इसी आधार पर मैपिंग की जाती रही है। यह ग्राउंड कंट्रोल प्वाइंट्स देश के हर 30 से 40 किमी के दायरे में समान रूप से बांटे गए हैं। हालांकि, नई मैंपिंग के लिए वर्चुअल सीओआरएस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीओआरएस यानी सतत संचालन संदर्भ स्टेशन। इसके नेटवर्क का उपयोग करते हुए अब जो नक्शे बनाए जा रहे हैं, उनसे तत्काल थ्री-डी जानकारी हासिल की जा सकती है। नई तकनीक की मदद से विभाग निर्धारित स्केल पर ही डिजिटल नक्शा उपलब्ध कराएगा। अभी जो नक्शा मौजूद है उसे ब्रिटिश सर्वेयर कर्नल सर जॉर्ज एवरेस्ट ने 1 मई 1830 को बनाया था। 189 साल पुराने इस सटीक नक्शे के प्रकाशन के बाद इसे नए सिरे से बनाने के लिए सरकार ने कई प्रोजेक्ट शुरू किए थे। 2017 में डाक विभाग ने मैपमायइंडिया के साथ जुड़कर एक पायलट डिजिटल प्रोजेक्ट शुरू किया था। इसका नाम ई-लोकेशन्स था। इस डिजिटल मैपिंग प्रोग्राम का उद्देश्य लोगों के पते की डिजिटल मैपिंग करना था, जिससे भारत की डाक सेवा ज्यादा सटीक हो और रियल एस्टेट के बारे में पारदर्शिता आए।
ये फायदे होंगे
नए ड्रोन मैपिंग सर्वे में सभी घरों की जियो मैपिंग होगी। वास्तविक स्थान को नक्शे पर चिह्नित किया जाएगा। इससे संपत्तियों के टैक्स में सामने आने वाली त्रुटियां खत्म होंगी। टैक्स वसूली बढ़ने से नगर निगम और पालिकाओं को आर्थिक मजबूती मिलेगी। बाढ़ के बाद भी खाली प्लॉट की आसानी के साथ मैपिंग की जा सकेगी। इससे लोगों को राहत मिलेगी।

‘सुपर 30’ के संस्थापक आनंद कुमार अमेरिका के प्रतिष्ठित टीचिंग अवॉर्ड से सम्मानित

वॉशिंगटन : आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने वाली सुपर 30 के संस्थापक और गणितज्ञ आनंद कुमार को अमेरिका में प्रतिष्ठित टीचिंग अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान जरूरतमंद छात्रों को शिक्षित करने में उनके योगदान के लिए दिया गया। कैलिफोर्निया के सैन जोस में ‘फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस’ संगठन के 25 साल पूरे होने पर सप्ताह के अंत में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें आनंद कुमार ‘द एजुकेशन एक्सीलेंस अवॉर्ड 2019’ से नवाजे गए। इस मौके पर आनंद ने कहा कि लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराने से वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव आएगा। इससे गरीबी, बेरोजगारी, जनसंख्या विस्फोट, पर्यावरण को नुकसान समेत अन्य समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी।आनंद कुमार ने कहा कि आज भारतवंशी अमेरिका समेत दुनियाभर में अलग-अलग क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहे हैं। शिक्षा से बेहतर कोई उपहार नहीं हो सकता। मौजूदा समय में खालीपन बढ़ता जा रहा है और इसे शिक्षा से ही भरा जा सकता है। हाल में आनंद कुमार के जीवन पर फिल्म सुपर 30 रिलीज हुई थी। इसमें ऋतिक रोशन आनंद कुमार की भूमिका में थे।

वॉट्सऐप में आया नया फीचर, किसी भी स्टेटस को म्यूट और हाइड कर पाएंगे

वॉट्सऐप के एंड्रॉयड बीटा वर्जन में नया अपडेट आया है। इस अपडेट के बाद यूजर्स स्टेटस को हाइड कर पाएंगे। वॉट्सऐप को अपडेट करने पर ये फीचर भी फीचर अपडेट हो जाएगा। इससे सारे म्यूटेड अपडेट्स खुद ही छिप जाएंगे और दिखाई देना बंद हो जाएंगे। म्यूटेड अपडेट्स टैब में एक ऐरो बना दिख रहा है, इस पर टैप करने के बाद ही आप ये म्यूट किए गए अपडेट्स देख पाएंगे।
वॉट्सऐप करना होगा अपडेट – स्टेटस म्यूटेज फीचर वॉट्सऐप के लेटेस्ट बीटा वर्जन 2.19.260 में आया है। यदि आप बीटा यूजर नहीं हैं तब आपको इस फीचर का फायदा नहीं मिलेगा। यूजर लेटेस्ट APK फाइल की मदद से भी इस फीचर का फायदा ले सकते हैं। वॉट्सऐप को मिलने वाले अपडेट्स और फीचर्स ट्रैक करने वाली साइट WABetaInfo ने भी इस फीचर को सुनिश्चित किया है। यदि आप बीटा वर्जन इस्तेमाल  रहे हैं लेकिन ये फीचर नहीं मिल रहा है, तब ये जल्द ही अपडेट हो जाएगा।
ऐसे दिखेंगे हिडन स्टेटस – एक बार इस फीचर के अनेबल होने पर सभी म्यूटेड अपडेट्स अपने आप छुप जाएंगे और दिखाई नहीं देंगे। म्यूटेड अपडेट्स टैब में एक ऐरो बना दिख रहा है, इस पर टैप करने के बाद ही आप ये म्यूट किए गए अपडेट्स देख पाएंगे। अभी ऐप में म्यूटेड स्टेटस सबसे नीचे दिखते हैं और पूरी तरह हाइड नहीं होते। अब जरूरत पड़ने पर डाउन ऐरो पर टैप करके म्यूटेड स्टेटस देखे जा सकेंगे और इसी तरह अप-ऐरो पर टैप करके इन्हें दोबारा हाइड भी किया जा सकेगा।
जिस स्टेटस को म्यूट करना है उस पर लंबा टैब करें।
अब नई विंडो खुलेगी जिसमें म्यूट का ऑप्शन होगा। इसके सिलेक्ट कर लें।
अनम्यूट करने के लिए एक बार फिर कॉन्टैक्ट पर टैब करें।

ग्रामीणों ने गंदे तालाब को अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट में बदला, रोजगार और साक्षरता बढ़ी

4 लाख वार्षिक आय वाला गाँव अब 7 करोड़ कमा रहा

इंडोनेशिया के एक गाँव की तस्वीर स्थानीय लोगों ने मिलकर बदल दी। 15 साल पहले गंदगी, बेरोजगारी और गरीबी से जूझते अंबेल पोंगोक गांव को अब एक नामी टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तौर पर जाना जाता है। ग्रामीणों में मिलकर यहां के एक गंदे और प्रदूषित तालाब को अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट में तब्दील कर दिया है। गाँव का हर परिवार अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट से रोजाना 2500 रुपये महीना कमा रहा है। इस तालाब का इंस्टाग्राम अकाउंट हैं जिस पर 40 हजार से अधिक फॉलोअर हैं। कभी गरीब गाँव कहा जाने वाला अंबेल पोंगोक आज इंडोनेशिया के 10 समृद्ध गाँवों की लिस्ट में शामिल है। अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट बनाने का श्रेय इंडोनेशिया के ही जुनैदी मुल्योनो को जाता है। जुनैदी ने कई साल पहले यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों को अंबेल पोंगोक गांव पर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा। रिपोर्ट में गाँव की समस्याओं, खूबियों और इसे कैसे बेहतर बनाया जाए जैसे मुद्दे शामिल किए गए। रिपोर्ट में उन्होंने पाया कि गाँव में एक तालाब है। उन्होंने तालाब को बिजनेस मॉडल में तब्दील करने की प्लानिंग की। इस मॉडल को तिरता मंदिरी नाम दिया। तालाब 20 मीटर लंबा और 50 मीटर चौड़ा है, जिसका इस्तेमाल कपड़े धोने के लिए किया जाता था। जुनैदी ने तालाब को अंडरवॉटर सेल्फी हॉट-स्पॉट में तब्दील करने की योजना बनाई और इसमें गाँव वालों से निवेश करने को कहा। उन्होंने ग्रामीणों से वादा किया इससे होने वाली कमाई का कुछ हिस्सा सालों तक गांव वालों को देते रहेंगे। शुरुआत में गांव के 700 में 430 परिवारों ने निवेश किया। कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने सैलानियों की आमद के बाद निवेश करने का मन बनाया। तालाब को एक खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन और हॉट-स्पॉट में तब्दील कर दिया गया। जुनैदी ने इंस्टाग्राम की मदद से इसे लोकप्रिय बनाया। हर परिवार ने इसमें औसतन 25 हजार रुपये निवेश, जिन्हें अब रिटर्न के तौर पर 2500 रुपए प्रतिमाह मिल रहा है। पर्यटकों के पहुँचने से गाँववालों की आमदनी बढ़ रही है। उनका जीवन बेहतर हो रहा है। बच्चों की साक्षरता दर बढ़ रही है। गांव की अर्थव्यवस्था का नक्शा की बदल गया है। लोगों को रोजगार मिल गया है। 2006 में जुनैदी इस गांव से चुनाव भी लड़ चुके हैं। 2005 में गांव की वार्षिक आय 4 लाख रुपये थी, लेकिन अब सिर्फ एक तालाब की बदौलत यह आँकड़ा 7 करोड़ रुपये हो गया है। वीकेंड पर यहाँ हजारों पर्यटक आते हैं। अंडरवाटर में सेल्फी लेना उन्हें तालाब का दीवाना बना रहा है। सेल्फी को यादगार बनाने के लिए गाँववालों ने तालाब में मोटरसाइकिल, बेंच और पुराने टीवी सेट को रखा है। जिसे साथ आप तस्वीरें ले सकते हैं। यहाँ टूरिस्ट आते हैं और तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हैं, यह इसकी लोकप्रियता में इजाफा कर रहा है।

ओडिशा में 184 कक्षाएं बनीं स्मार्ट कक्षाएं

भुवनेश्वर : ओडिशा के नौ केंद्रीय विद्यालयों की 184 कक्षाओं का डिजिटलीकरण किया गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं स्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केन्द्रीय विद्यालयों की स्मार्ट कक्षाओं का उद्घाटन किया। इनमें से छह स्कूल भुवनेश्वर, दो स्कूल खोरडा रोड और एक कटक में है। अधिकारियों ने बताया कि 184 कक्षाओं को स्मार्ट कक्षाओं में तब्दील किया गया है। इसपर कुल चार करोड़ रुपये का खर्चा आया है। यह कार्य तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओनएजीसी) के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत किया गया है।उन्होंने बताया कि इस पहल से 12,300 छात्र-छात्राओं को लाभ मिलने की उम्मीद है।अधिकारियों ने बताया कि स्मार्ट कक्षाओं में कंप्यूटर, सीखने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर, सुनने में सहयोग देने वाली डिवाइस, नेटवर्किंग और ऑडियो-विजुअल क्षमता होगी। प्रधान ने कहा कि वह 2005 में अमेरिका की यात्रा के दौरान इस तरह की कक्षाओं की शुरुआत करने के लिए प्रेरित हुए थे। प्रधान ने पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए केंद्रीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं से अपील की कि वह अपने लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ें।

राकेश कुमार भदौरिया होंगे अगले वायुसेना प्रमुख

नयी दिल्ली : एयर मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया अगले वायुसेना प्रमुख होंगे। मई में वायुसेना उपप्रमुख बनाए गए भदौरिया वर्तमान वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ की जगह लेंगे। वायुसेना के इतिहास में 28 साल बाद ऐसा संयोग बना है कि सेवानिवृत्ति के दिन उपप्रमुख को प्रमुख बनाया जा रहा है। 1991 में एयर मार्शल एनसी सूरी भी ऐसी ही परिस्थिति में चीफ बने थे। भदौरिया दो साल तक यानी 62 की उम्र तक वायुसेना प्रमुख रहेंगे। गुरुवार को एक और संयोग भी बना, जो घरेलू लड़ाकू विमान तेजस से जुड़ा है। एयर मार्शल भदोरिया जिस तेजस विमान के टेस्ट पायलट रहे हैं, उसकी उड़ान रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भरी और वायुसेना प्रमुख की नियुक्ति की घोषणा भी उसी दिन हुई। भदौरिया ने रफाल सौदे की अध्यक्षता की है: भदौरिया वायुसेना उपप्रमुख बनने से पहले बेंगलुरू ट्रेनिंग कमांड के प्रमुख थे। उन्होंने फ्रांस के साथ 36 रफाल लड़ाकू विमानों के सौदे के लिए नियुक्त भारतीय दल की अध्यक्षता की थी। वह फ्रांस में रफाल उड़ा भी चुके हैं। वह 15 जून 1980 को वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में ‘साॅर्ड ऑफ ऑनर’ सम्मान के साथ शामिल हुए थे। अपने चार दशक के करिअर के दौरान भदौरिया जगुआर स्क्वाॅड्रन और प्रमुख एयरफोर्स स्टेशनों के चीफ रह चुके हैं। उन्हें 26 प्रकार के लड़ाकू विमानों को उड़ाने का 4,250 घंटे का अनुभव है।

सम्मान सिद्धि योजना / किसान खुद ही कर सकेंगे पीएम-किसान पोर्टल पर पंजीकरण

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री किसान सम्मान सिद्धि योजना के तहत सालाना 6 हजार रुपए लेने के लिए किसान अगले हफ्ते से सीधे पीएम-किसान पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। भुगतान की जानकारी पता कर सकेंगे। पोर्टल के जरिए आधार सत्यापन भी कर पाएंगे। कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने यह जानकारी दी। अग्रवाल ने बताया कि सरकार अब तक 6.55 लाख किसानों को एक-दो किश्तें जारी कर चुकी है। विभिन्न राज्यों में किसानों को भुगतान मिला है या नहीं इसकी जांच की जा रही है। राज्य सरकारों से भी क्रॉस चेक करने के लिए कहा है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान सिद्धि (पीएमकेएसएस) योजना के तहत किसानों को हर साल 6000 रुपए तीन किश्तों में दिए जाएंगे। यह 87,000 करोड़ रुपए की योजना है। अंतरिम बजट में इसका ऐलान किया था। पहले 2 हेक्टेयर तक जमीन वालों के लिए योजना का लाभ देने की शर्त रखी गई। मई में सभी किसानों को इसमें शामिल कर लिया गया।

इस नवरात्र वैष्णो देवी मंदिर में लगेगा सोने का दरवाजा

श्रीनगर : वैष्णो देवी मंदिर में सोने का दरवाजा लगाया जा रहा है। 96 फीट लंबी पारंपरिक गुफा के इस दरवाजे को 29 सितंबर से शुरू हो रही नवरात्र में लगाया जाएगा। इससे पहले गुफा के बाहर संगमरमर का दरवाजा होता था। यह पारंपरिक गुफा सिर्फ सर्दियों में कुछ दिनों के लिए ही श्रद्धालुओं के लिए खोली जाती है। हालांकि हर दिन पुजारी आरती के लिए इसी पारंपरिक गुफा वाले दरवाजे का इस्तेमाल करते हैं। सोने के इस नए दरवाजे के एक पल्ले पर माता लक्ष्मी और दूसरे पर आरती उकेरी गई है। इसके अलावा इस पर भगवान गणपति की तस्वीर और मंत्र हैं। दरवाजे के ऊपरी हिस्से में गुंबद और छत्र हैं, जिस पर नौ सीढ़ियां बनाई गई हैं जो नौ देवियों का प्रतीक हैं। श्राइन बोर्ड के सीईओ सिमरनदीप सिंह के मुताबिक सोने के इस दरवाजे को श्राइन बोर्ड की नई डोनेशन पॉलिसी के तहत बनवाया गया है। नवरात्र के लिए माता के भवन को थाईलैंड, हॉलैंड, मलेशिया, सिंगापुर, ऊंटी और पालमपुर से मंगवाए देसी-विदेशी फूलों और फलों से सजाया जाएगा। यहीं नहीं पहली बार कटरा बेस कैंप से भवन तक के 13 किमी लंबे घुमावदार रास्ते पर रंगबिरंगी लाइटिंग की जा रही है। इसके अलावा पिछले साल कटरा में शुरू हुए लंगर में नवरात्र के दौरान फलाहार दिया जाएगा।इस नवरात्र उत्सव के दौरान नौ दिनों तक अलग-अलग कार्यक्रम होंगे और राज्यपाल सत्यपाल मलिक इसका उद्घाटन करेंगे। हर बार की तरह ही नवरात्र के मशहूर दंगल का आयोजन होगा। 2005 से 2012 तक पाकिस्तान के पहलवान भी इस दंगल में भाग लेने आते थे। भारत-पाक के बीच तनाव के चलते 2013 से इन्हें बुलाना बंद कर दिया गया है और इस बार भी पाकिस्तानी पहलवान नहीं आएंगे। कटरा में इस उत्सव का आयोजन 1996 से हो रहा है। दर्शनार्थियों की सुरक्षा के मद्देनजर राज्य पुलिस ने पैरामिलिट्री के साथ मिलकर खास ग्रिड तैयार किया है। पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती के अलावा कटरा टाउन, भवन के इलाके और यात्रा मार्ग को सीसीटीवी कैमरे की जद में लाया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि इस बार इन नौ दिनों में 3-4 लाख श्रद्धालु वैष्णो देवी के दर्शन करने आएंगे।
3 महीने में कारीगरों ने गुफा के पास ही वर्कशॉप में तैयार किया दरवाजा
इस दरवाजे को कारीगरों ने तीन महीने में तैयार किया है। इसे बनाने के लिए श्राइन बोर्ड ने उन कारीगरों को बुलाया था जिन्होंने इससे पहले मुंबई में सिद्धिविनायक और दिल्ली में झंडेवालान मंदिर में नक्काशी का काम किया है। श्राइन बोर्ड ने गुफा के पास ही एक खास वर्कशॉप में इस दरवाजे को तैयार करवाया है। दरवाजे को ठोस चांदी से बनाया गया है जबकि इसकी परत सोने की है।
साभार – दैनिक भास्कर

वैचारिक ऊर्जा और आधुनिक समाज

राखी राय हल्दर

रफ्तार के साथ भागती जिन्दगी में हर व्यक्ति व्यस्त है। ज्यादा से ज्यादा ऐशो आराम के साधन जुटा लेने को ही वह सुख समृद्धि का आधार मानकर उन्हें बटोरने के लिए लगातार दौड़ रहा है। अपने परिवार को सुखी और सम्पन्न बनाने की कोशिश में वह खुद को काम में डुबो देता है। लेकिन यहाँ उसकी व्यस्तता परिवार के साथ उसके रिश्तों के रेशों को कमजोर करती जाती है। रिश्तों को बचाने के लिए समय का निवेश करने की जरूरत होती है और सुख-साधन बटोरने का काम भी समय की माँग करता है। ऐसे में व्यक्ति समय निवेश करे भो तो कहाँ करे? यही बहुत बड़ी उलझन बन जाती है। दरअसल समय देने की क्रिया एक जटिल क्रिया है जिसमें समय के साथ और बहुत कुछ निवेश किया जाता है। मन-मस्तिष्क और ध्यान इस निवेश में शामिल है। ये तीनों क्वांटम स्तर पर ऊर्जा की सृष्टि करते हैं और यह ऊर्जा हमें उद्देश्य प्राप्ति की दिशा में ले जाती है। इसलिए सफलता हासिल करने के सवाल पर आने से पहले इंसान के लिए यह तय करना जरूरी है कि उसके लिए सफलता का क्या मतलब है? उसकी चाहत के कितने आयाम हैं? उनमें से महत्वपूर्ण आयाम कौन से हैं? और वह अपनी सर्वाधिक ऊर्जा का निवेश कहाँ करना चाहता है? मुँह में परिवार को सुखी बनाने का मंत्र हो और समिधा वस्तुओं को बटोरने के यज्ञ में दी जाए तो आदमी की स्थिति त्रिशंकु जैसी हो जाती है। परिवार को सुखी रखने के लिए बटोरी गई वस्तुओं में ही परिवार रमा रहता है और स्वजनों की आत्मा तक व्यक्ति की ऊर्जा पहुँच नहीं पाती। क्योंकि सारी ऊर्जा साधनों को बटोरने में लगा दी गई है। अन्य शब्दों में कहें तो स्वजनों को समय न दिए जाने के कारण उस रिश्ते में उचित ऊर्जा का निवेश नहीं हो पाता। इसका फल व्यक्ति उस उम्र में भोगता है जिस उम्र में उसे स्वजनों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जीवन की इस स्थिति की व्याख्या भी विज्ञान के क्वांटम ऊर्जा की अवधारणा के जरिए पेश की जा सकती है। लेकिन वर्तमान शिक्षा पद्धति में तो विज्ञान को प्रयोगों की सीढ़ी पर चढ़े हुए एक आसमानी विषय के रूप में पेश किया जाता है। वैज्ञानिक चेतना के अभाव में जहाँ एक ओर जीवन की नदी सूख रही है वहीं विज्ञान को जीवन से काट देने वाले विषयों में ऊर्जा निवेश करके किताबी बुद्धि की नदी में बाढ़ लाई जा रही है।
वर्तमान दौर का फैशन है कि शुद्धाचरण की बात करने वाले को ज्ञानी बाबा या संत कहकर दूर से प्रणाम किया जाए लेकिन सफलता की मनमानी अवधारणा गढ़कर उसके पीछे दौड़ने वालों को यह नहीं दिखता कि ईमानदारी, विश्वास, वफादारी जैसे मूल्यों की दुर्लभता उनके जीवन में भी हर कदम पर मुश्किलें खड़ी कर रही हैं। शक, चौकीदारी, सुरक्षा के प्रश्नों पर ज्यादा ऊर्जा का व्यय करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं वे खुद इन मूल्यों को लेकर चलने के प्रति भी आश्वस्त नहीं हैं। क्योंकि यह बात आम हो गई है कि आजकल भलाई का जमाना नहीं रहा। गौर से देखें तो सुख, शान्ति, शक्ति, आनन्द, ज्ञान, और प्रेम जैसे मूल्य प्राथमिक मूल्य हैं। इन मूल्यों के बगैर ईमानदारी, विश्वास, वफादारी जैसे मूल्यों को टिकने का आधार नहीं मिलता। प्राथमिक मूल्यों से आत्मा को मिली शक्ति से ही वह ईमानदारी, विश्वास और वफादारी जैसे गुणों का सृजन करती है। गौर करें कि आज हम सुख, शान्ति, शक्ति, आनन्द, ज्ञान और प्रेम पाने के लिए बाह्य साधनों पर निर्भर करने लगे हैं। आत्मा के भीतर ही इन मूल्यों का अक्षय कोष है यह जान ही नहीं पाते। आत्मा के विकास के प्रश्न को दरकिनार करके आधुनिक मानव प्राथमिक मूल्यों को बाहर खोजता है। आत्मा पर नियंत्रण पाए बगैर इन मूल्यों की खोज में खुद को परिस्थिति के हवाले कर देता है। तब परिस्थिति उसके ‘स्व’ को अपने इशारों पर नचाती है। आत्मतत्व को पुष्ट करने की शिक्षा के बगैर ‘स्व’ तत्व की ऊर्जा को जान पना मुश्किल है। यह शिक्षा प्राचीन भारत में विद्यमान थी। आज क्वांटम सिद्धांत में भी ऊर्जा के अनगिनत रूप होने की बात की जा रही है। लेकिन नई पीढ़ी विद्यालय स्तर से ऊर्जा के कुछ सीमित रूपों के बारे में ही जान पाती है तभी वह समझ भी नहीं सकती कि विचार भी एक ऊर्जा ही है। इंसान का दिमाग कम्प्यूटर के रैम की तरह है। इसमें से नकारात्मक स्मृतियों को डिलीट करने की जरूरत पड़ती है। क्योंकि ऐसी स्मृतियाँ वैचारिक ऊर्जा को अपने दायरे में फँसाकर उन्हें या तो नष्ट करती है या फिर उनसे नकारात्मक ऊर्जा को जन्म देती हैं। जिसे हम मनोवैज्ञानिक स्तर पर ईर्ष्या, द्वेष, घृणा जैसे तमाम भावों के रूप में महसूस करते हैं। एक बार किसी नकारात्मक स्मृति पर ध्यान केन्द्रित करके उससे शरीर पर तत्क्षण पड़ने वाले प्रभाव को महसूस करने की कोशिश करें तो वैचारिक ऊर्जा के प्रभाव का पता चल जाएगा। ठीक उसके बाद किसी शुभचिंता से भरी स्मृति को केन्द्र में रखकर यही प्रयोग किया जाए तो वैचारिक ऊर्जा के स्फूर्ति दायक लक्षण को भी महसूस किया जा सकता है।
वर्तमान शिक्षा विद्यार्थियों को परिस्थिति से मुकाबला करने का प्रशिक्षण नहीं देती। बल्कि शिक्षित होकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की बात करती है। और इसी को सफलता कहती है। व्यक्ति शिक्षित होकर आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनने से पहले अनगिनत दौरों से गुजरता है। अनगिनत लोगों के संपर्क में आता है, अनगिनत अनुभव अपनी झोली में बटोर लेता है, अनगिनत परिस्थितियों से टकराकर मन को स्थिर और आश्वस्त करने के लिए संघर्ष से गुजरता है। इस क्रम में कभी उसका अहं तो कभी संस्कार मन में बवंडर खड़ा करते हैं। वह इन बवंडरों से भी गुजरता है। अनजानी इच्छाएँ परिवेश से आकर उसके मन में घर जमा लेती हैं। इन इच्छाओं की पूर्ति और अपूर्ति के हिंडोलों में भी वह शिक्षित होने का प्रमाणपत्र पाने तक झूल लेता है। शिक्षित होने तक आत्मा के स्तर पर व्यक्ति इतना कुछ झेल लेता है। आत्मतत्व को समझने, उसे स्थिर और पुष्ट रखने के सुनिश्चित प्रशिक्षण के बगैर ही इन हालातों से टकराते हुए संस्कार उसके भीतर आकार लेने लगते हैं। परिस्थितियों के ठेलम ठेल में संस्कारों को यूं ही तैयार होने की इजाजत न देकर वैज्ञानिक ढंग से आत्म शिक्षा के जरिए इसे बचपन से ही तैयार करने की कोशिश की जाए तो समाज में सकारात्मक मूल्यों का प्रसार हो सकता है। लेकिन यह प्रशिक्षण विज्ञान सम्मत ढंग से एक अलग पाठ्यक्रम के संरचना की गुंजाइश रखता है।
यह बहुत बड़ी विडम्बना है कि व्यक्ति अपनी वैचारिक ऊर्जा को नजरअंदाज करके ऊर्जा के बाह्य साधनों की ही बात करता रहा है। हकीकत तो यह है कि वैचारिक ऊर्जा को जब उसने ऊर्जा के बाह्य साधनों को समझने में लगया तब उन साधनों का राज़ उसके सामने खुला। ऐसे ही सृष्टि में अनगिनत साधन हैं जिन्हें खोलने की चाभी व्यक्ति की वैचारिक ऊर्जा ही है। इस लिहाज से देखें तो वैचारिक ऊर्जा को पैदा करने वाली आत्मशक्ति इस सृष्टि का कितना बड़ा तोहफा है। व्यक्ति में एक मिनट में पच्चीस से तीस किस्म के विचार जन्म लेते हैं। दिन भर में मन में उठने वाले विचारों की संख्या कितनी विशाल होती है यह सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन व्यक्ति अगर अपने मन में उठने वाले विचारों के प्रति सचेत न हो तो उसके भीतर से पैदा होने वाली यह ऊर्जा दिन में किस परिमाण में नष्ट होती है, इसका अंदाज लगाना कठिन नहीं है। आत्मशक्ति को जानने और नियंत्रित करने का प्रशिक्षण मिले तो दिन भर में फलदायक विचारों को पैदा करके उन्हें सुनिश्चित दिशा में प्रवाहित किया जा सकता है। इस तरह किसी क्षेत्र में निवेश की गई वैचरिक ऊर्जा से उस क्षेत्र को जानने का द्वार खुल सकता है। हर व्यक्ति का आत्मतत्व अनोखा और मौलिक है। इस आत्मतत्व को जानने के लिए ऊर्जा का निवेश करने का प्रशिक्षण अनगिनत लोगों को सृष्टि के अनगिनत सत्यों को जानने का मौका दे सकती है। यहाँ एक बात गौरतलब है कि विकारमुक्तता आत्मा की सर्वाधिक परिपुष्ट स्थिति है। अंतर्मन में उठने वाले विचारों को सचेत होकर देखना और नकारात्मक विचारों को पहचान कर खुद को उससे मुक्त करते रहने की प्रक्रिया ही आत्मा को उत्तरोत्तर सशक्त बनाने की प्रक्रिया है। आत्मिक दृष्टि से सशक्त व्यक्ति का रिमोट परिस्थिति के हाथ में नहीं होता। बल्कि वह अपने चुनाव के अधिकार का प्रयोग करते हुए सूझबूझ के साथ अपनी प्रतिक्रिया का चुनाव करता है। उसकी आत्मा का पासवर्ड सिर्फ उसके पास होता है। वह किसी अनिष्टकारी सोच को अपने आत्मतत्व को विचलित करने की इजाजत नहीं देता।
आधुनिक समाज में भौतिक साधनों के आधार पर जीवन स्तर को नापा जाता है। आन्तरिक साधनों की घोर उपेक्षा के कारण ऊँचा जीवन स्तर हासिल करने के बावजूद भी धन सम्पन्न लोगों के जीवन में गुणवत्ता की कमी पाई जाती है। आत्मतत्व को समृद्ध करने की शिक्षा के बगैर जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने के सवाल पर विचार करना नामुमकिन है। आज समाज एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जहाँ आत्मविकास की शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है। समाज हो या साहित्य सबमें आत्मस्खलन और आत्मा के संकट का प्रश्न ही मुँह बाए खड़ा है। आत्मस्खलन के चलते सांस्कृतिक संकट की जड़ें जीवन और समाज में गहराती जा रही हैं। इस संकट को चुनौती देना आज के युग की बहुत बड़ी माँग है।

सम्पर्क

नं. 2, देशबन्धु नगर
पो. – सोदपुर,
कोलकाता – 700110
दूरभाष – 9231622659