फोटो खींचना हर किसी को पसंद है। फटोग्राफी का शौक रखने वाले लोग महंगे से महंगा कैमरा खरीदते हैं। बात चाहे सालों पहले की हो या अब की। कैमरे के प्रति लोगों का क्रेज हमेशा से ही बढ़ा है। पहले जहां ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें खींचने वाले कैमरे आते थे, वहीं अब बाजार में रंग-बिरंगी तस्वीरें खींचने वाले डिजिटल कैमरे आते हैं। कैमरे की मदद से ही हमारे जीवन के खास पल फोटो के रूप में कैद हो जाते हैं। आइए जानते हैं दुनिया का पहला डिजिटल कैमरा कब आया था और उसकी क्या खासियत थी।
फोटोग्राफी की दुनिया में क्रांति
सालों पहले जहां कैमरे में रील डाली जाती थी, वहीं अब डिजिटल कैमरों ने फोटोग्राफी की दुनिया में क्रांति ला दी है। साल 1975 में ईस्टममैन कोडक के स्टीवन सैसन नाम के एक इंजीनियर ने दुनिया का सबसे पहला डिजिटल कैमरा बनाने का प्रयास किया था। स्टीवन सैसन के इस कैमरे को पहले डिजिटल स्टैन स्नैपर के रूप में पहचाना जाता था।
ये थी खासियत
इस कैमरे में फेयरचाइल्ड सेमीकंडक्टर द्वारा विकसित तत्कालीन टेक्नोलॉजी वाले CCD इमेज सेंसर का प्रयोग किया गया था।
कैमरे का वजन करीब चार किलोग्राम था।
इस कैमरे मे ब्लैक एंड व्हाइट फोटो खींची जाती थी।
कैमरा का रिजॉल्युशन 0.01 मेगा पिक्सेल था।
दिसंबर 1975 में पहली डिजिटल तस्वीर को रिकॉर्ड करने में इस कैमरा को 23 सेकंड का समय लगा था।
1991 में शुरू हुई थी बिक्री
साल 1991 में ईस्टमैन कोडक कंपनी ने डिजिटल कैमरों की बिक्री शुरू की, जिसके बाद एपल कंप्यूटर और ईस्टमैन कोडक ने पहला कंज्यूमर मॉडल पेश किया। यह साल 1994 में पेश किया गया था। दोनों कंपनियों ने मिलकर एक ऐसा सॉफ्टवेयर पेश किया था, जिसके माध्यम से डिजिटल कैमरे से खींची गई तस्वीर कंप्यूटर में ट्रांसफर की जाने लगी।
चार किलो का था दुनिया का पहला डिजिटल कैमरा
जापानी वैज्ञानिकों को मिली डायनोसॉर की नयी प्रजाति
मुख्य बातें : 7.2 करोड़ साल पुरानी हड्डियों का हुआ विश्लेषण
तोक्यो : जापान के वैज्ञानिकों ने डायनोसॉर की एक नई प्रजाति की पहचान कर ली है। वैज्ञानिकों को इस प्रजाति के डायनोसॉर का जापान में सबसे बड़ा (26 फीट लंबा) कंकाल भी मिला है। वैज्ञानिकों की टीम करीब 7.2 करोड़ साल पुरानी अस्थियों का विश्लेषण करने के बाद इस नतीजे पर पहुंची है कि यह कंकाल एक नई प्रजाति के हैं।
होक्कोाइदो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति को हाड्रोसुआरिड डायनोसॉर नाम दिया है। यह शाकाहारी जीव पृथ्वी पर क्रिटेशस दौर के अंतिम सालों में धरती पर पाया जाता था। सबसे पहले इस जीव की पूंछ का एक छोटा सा हिस्सा जब उत्तरी जापान में 2013 में मिला तो बाद में खुदाई की गई। इस खुदाई में डायनोसॉर का पूरा कंकाल निकल कर बाहर आया। वैज्ञानिक मान रहे हैं कि यह डायनोसॉर नौ साल की उम्र का एक वयस्क था और उसका वजन 4 टन से लेकर 5.3 टन तक हो सकता है। डायनोसॉर का वजन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह दो पैरों से चलता था या फिर चार पैरों पर। इस नई खोज का पूरा ब्यौरा ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
समुद्र किनारे रहना पसंद किया होगा
वैज्ञानिकों की टीम के प्रमुख योसित्सुगु कोबायाशी ने बताया कि कभी इस प्रजाति की एक अलग दुनिया जापान और पूर्वी एशिया में मौजूद थी। डायनोसॉर की यह प्रजाति संभवत: तटवर्ती इलाकों में रहती थी जो उस वक्त इसके लिए एक दुर्लभ आवास था। इसके जीवाश्म से उस वक्त के वातावरण के बारे में भी अच्छी जानकारी मिल सकती है। इस खोज से यह भी पता लगता है कि समुद्र के आसपास डायनोसॉर ने आवास बनाना पसंद किया था।
अगर आप पहन रहे हैं जीन्स…
डेनिम यानी जीन्स पहनना सबको पसन्द है। आज हर दूसरा युवा जीन्स पहनना पसन्द करता है और अपने अन्दाज से पहनता भी है। सवाल यह है कि आज पर जीन्स पहनते हैं तो क्या वाकई गम्भीर होकर खरीददारी करते हैं या रखरखाव करते हैं। मामला पैसे का है और सही तरीके से अगर चुनाव किया जाये, पहनने में सावधानी रखी जाये तो जीन्स आपकी सबसे फेवरेट हो सकती है फिर भले ही आप विद्यार्थी हों या प्रोफेशनल। देखा जाता है कि पुरुष जींस पहनते समय कई गलतियां करते हैं, ऐसे में आपके लिए जानना जरुरी है कहीं आप भी तो ये गलतियां नहीं करते।
एंकल जींस या क्रॉप जीस की लंबाई इतनी होनी चाहिए कि ये ठीक एंकल यानी एड़ियों पर खत्म हो जाए। न इससे ऊपर और न ही इससे नीचे। लेकिन अक्सर लड़कों की एंकल जींस उनकी एंकल को कवर करके नीचे तक आ रही होती है और कभी-कभी एंकल से ऊपर होती है। ऐसा करने से बचें।
जींस के साथ आप शर्ट और टी-शर्ट कुछ भी पहन सकते हैं। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि अगर आपकी फिटनेस बहुत अच्छी नहीं है तो बेहतर होगा कि आप शर्ट पहनें। टी-शर्ट पहननी ही है तो लूज पहनें और टक-इन न करें।
कभी-कभी जींस के साथ पहने गए अनमैच फुटवियर आपके लुक को बिगाड़ सकते हैं। हमेशा ध्यान रखें जींस के साथ स्नीकर्स या स्पोर्टी शूज अच्छे लगते हैं। आप रंग के साथ एक्सपेरिमेंट कर सकते हैं लेकिन दूसरे फुटवियर मैच करने से पहले ध्यान रखें।
जींस में दो पैटर्न सबसे अधिक पसंद किए जाते हैं। ये हैं स्लिम फिट और स्किनी। स्लिम फिट जींस आपको अच्छी फिटिंग देती है लेकिन आपकी स्किन से चिपकी नहीं रहती है। जबकि स्किनी जींस काफी फिट होती है। अगर आपकी हाईट अधिक है या आप बहुत अधिक पतले हैं तो स्किनी जींस पहनने से बचें।
मिताली राज ने कहा टी20 क्रिकेट को अलविदा, टीम में आईं 15 साल की शेफाली
नयी दिल्ली : सीमित ओवरों के क्रिकेट में भारत की पूर्व कप्तान मिताली राज ने मंगलवार को टी20 क्रिकेट को अलविदा कह दिया ताकि 2021 में होने वाले 50 ओवरों के विश्व कप के लिये वनडे क्रिकेट पर फोकस कर सकें । छत्तीस बरस की मिताली ने 32 टी20 मैचों में टीम की कप्तानी की है जिसमें तीन महिला टी20 विश्व कप (2012, 2014 और 2016) शामिल हैं ।
मिताली ने कहा ,‘‘ 2006 से टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब मैं इस प्रारूप से संन्यास ले रही हूं ताकि 2021 वनडे विश्व कप पर ध्यान केंद्रित कर सकूं ।’’ मिताली ने टी20 क्रिकेट में 89 मैचों में 37.5 की औसत से भारत के लिये सर्वाधिक 2364 रन बनाये हैं । उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 97 रन रहा । उन्होंने 1999 में इंग्लैंड के खिलाफ गुवाहाटी में टी20 क्रिकेट में पदार्पण किया था । मिताली टी20 क्रिकेट में 2000 रन बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर थी । संन्यास की घोषणा के बाद मिताली अब 50 ओवर के प्ररूप पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगी जिसका विश्व कप 2021 में खेला जाना है। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम 2017 में खेले गये विश्व कप के फाइनल में पहुँची थी। उन्होंने बीसीसीआई द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा ,‘‘ देश के लिये विश्व कप जीतना मेरा सपना है और मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहती हूं । मैं बीसीसीआई को लगातार सहयोग के लिये धन्यवाद देती हूं और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी श्रृंखला के लिये भारतीय टी20 टीम को शुभकामना देती हूं।’’ ऐसी सम्भावना थी कि मिताली मार्च में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गयी टी20 श्रंखला के दौरान संन्यास लेंगी। उन्होंने पिछले सप्ताह कहा था कि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 के लिए उपलब्ध है। मिताली ने हालांकि बाद में अपना मन बदल लिया। मिताली के भविष्य पर उसी समय से कयास लगाये जाने लगे थे जब पिछले साल टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल मुकाबले में अंतिम 11 में उन्हें जगह नहीं मिली थी। उनके बाहर होने पर काफी विवाद हुआ था और मिताली ने कोच रमेश पवार पर उनके करियर को खत्म करने का आरोप लगाया था। यह भी माना जाता है कि टी20 टीम की कप्तान हरमनप्रीत सिंह से उनकी अनबन हो गयी। पवार को कोच पद से हटाये जाने के बाद डब्ल्यूवी रमन को टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया जिसके बाद यह विवाद खत्म हुआ। बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि मिताली का फैसला सही और पहले से अपेक्षित था।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता कि उसने पिछले सप्ताह यह बयान क्यों दिया कि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रृंखला में खेलना चाहती थी। अगले साल की शुरुआत में होने वाले टी20 विश्व कप के लिए वह अंतिम 11 में चयन की दावेदार नहीं है ऐसे में यह जरूरी है कि युवाओं को पर्याप्त मौके दिये जाए।’’ मिताली ने 203 वनडे में 6720 रन बनाये हैं जिसमें सात शतक शामिल है। उन्होंने 10 टेस्ट में एक शतक समेत 663 रन बनाये हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी घरेलू टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिये 15 वर्षीय शेफाली वर्मा ने भारतीय महिला टीम में जगह बनायी।
वायुसेना में शामिल हुए आठ अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर
पठानकोट : अमेरिका निर्मित आठ ‘अपाचे एएच-64ई’ लड़ाकू हेलीकॉप्टर भारतीय वायुसेना में शामिल किए गए। इससे वायुसेना की युद्धक क्षमता में वृ्द्धि होगी। अधिकारियों ने बताया कि पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर आयोजित समारोह में औपचारिक रूप से इन आठ अपाचे हेलीकॉप्टर को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया। इस समारोह में वायुसेना प्रमुख एयल चीफ मार्शल बीएस धनोआ बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। बोइंग ने समारोह में हेलीकॉप्टर की प्रतीकात्मक चाबी वायुसेना को सौंपी।‘अपाचे एएच-64ई’ दुनिया के सबसे उन्नत बहु-भूमिका वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टर हैं और अमेरिकी सेना इनका इस्तेमाल करती है।
वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी न बताया, ‘‘ आठ अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर वायुसेना में शामिल होने जा रहे हैं, जो बल की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाएंगे।’’ भारतीय वायुसेना ने 22 ‘अपाचे हेलीकॉप्टर’ के लिए अमेरिकी सरकार और बोइंग लिमिटेड के साथ सितम्बर 2015 में कई अरब डॉलर का अनुबंध किया था।
लता मंगेशकर को 90वें जन्मदिन पर डॉटर ऑफ द नेशन का खिताब देगी केन्द्र सरकार
मुम्बई : भारतीय फिल्म संगीत में सात दशक के अभूतपूर्व योगदान के लिए स्वर कोकिला लता मंगेशकर को डॉटर ऑफ द नेशन का खिताब दिया जाएगा। केन्द्र सरकार 28 सितंबर को 90वें जन्मदिन पर उन्हें यह सम्मान देगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खास मौके के लिए गीतकार और कवि प्रसून जोशी ने खास गीत लिखा है। सूत्रों ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लता मंगेशकर के बड़े प्रशंसक हैं। वे भारत की सभी आवाजों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्हें सम्मानित करना देश की बेटी को सम्मान देना है। उन्हें 90वें जन्मदिन पर खिताब देने का फैसला लिया गया है। मध्य प्रदेश के इन्दौर में जन्मी लता मंगेशकर ने गाने की शुरुआत 40 के दशक में कर दी थी। तब वो महज 13 साल की थीं। उन्होंने पहला गाना मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ (1942) के लिए रिकॉर्ड किया था, जिसे फाइनल कट से पहले हटा दिया गया था। 1943 में आई मराठी फिल्म ‘गजाभाऊ’ में उन्होंने हिंदी सॉन्ग ‘माता एक सपूत की दुनिया बदल दे’ को आवाज दी। इसे उनका पहला सॉन्ग माना जाता है। तब से लगातार गाने गा रही हैं। लताजी को गायकी की दुनिया में अहम योगदान के लिए अब तक तीन नेशनल अवॉर्ड (फिल्म ‘परिचय’ के लिए 1972 में, ‘कोरा कागज़’ के लिए 1974 में और ‘लेकिन’ के लिए 1990 में) मिल चुके हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण (1969), दादा साहब फाल्के (1989), पद्म विभूषण (1999) और भारत रत्न (2001) से भी सम्मानित किया था।
अब हिन्दी में कर सकेंगे फ्लिपकार्ट पर खरीददारी
नयी दिल्ली : ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने अपने प्लेटफॉर्म पर “हिन्दी” इंटरफेस उपलब्ध कराने की घोषणा की है। कल्याण कृष्णमूर्ति, सीईओ, फ्लिपकार्ट ग्रुप ने कहा, ‘भाषा एक सुविधा है न कि बाधा, हमारा मानना है कि देश में ई-कॉमर्स को अपनाने में मातृ भाषा की क्षमता अहम भूमिका निभाएगी।’
उद्योग से जुड़ा एक अध्ययन बताता है कि भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले 90 फीसदी नए यूजर्स मातृ भाषा का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उन्हें सहज, आराम और निर्णय लेने में मदद करने के लिए मातृ भाषा में ई-कॉमर्स अनुभव उपलब्ध कराना जरूरी है। हिन्दी की क्षमता के साथ यूजर्स अपने मनचाहे उत्पादों की सभी सूचनाएं और सर्च हिन्दी में देख सकेंगे- यह ऐसी भाषा है जिसके यूजर्स की संख्या 2021 तक अंग्रेज़ी से आगे निकल जाएगी।
अध्ययन करने के बाद लिया फैसला
फ्लिपकार्ट ने यह समझने के लिए गहन अध्ययन किया कि किस तरह ग्राहकों को ऑनलाइन लाने और उनके ई-कॉमर्स को बेहतर बनाने के लिहाज़ से मातृ भाषा का अनुभव उपलब्ध कराने के लिए सर्वश्रेष्ठ भारतीय भाषाओं का लाभ उठाया जा सकता है। यूजर रिसर्च से ग्राहकों के व्यवहार के बारे में दिलचस्प जानकारियां सामने आईं जिनसे पता चलता है कि अगर भाषा का समाधान ठीक तरह से किया जाए तो यह एक बाधा नहीं बल्कि अवसर है। हालांकि ग्राहक आधारभूत अंग्रेज़ी में पढ़ना और लिखना जानते हैं, लेकिन मातृभाषा से उन्हें अलग तरह का आराम और सुविधा मिलती है जो उन्हें ऑनलाइन लाने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है।
इस रिसर्च से यह भी पता चला कि छोटे शहरों से आने वाले ग्राहकों के समूह डेबिट/क्रेडिट कार्ड, ईएमआई जैसे डिजिटल शब्दों को बेहतर समझते हैं जिससे उनके लिए ई-कॉमर्स का इस्तेमाल करना आसान होगा। रिसर्च से पता चला कि मातृभाषा में ई-कॉमर्स का इस्तेमाल करने से ग्राहकों को अधिक आत्मविश्वास मिलता है और निर्णय लेने में स्वतंत्रता का अहसास होता है।
विवाह पर्यटन की शुरुआत करेगा मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम
भोपाल : इंदौर, भोपाल, खजुराहो, ग्वालियर, उज्जैन सहित झीलों, महलों, मंदिरों और किले वाले शहरों का उपयोग मैरिज टूरिज्म के लिए किया जाएगा। इसकी शुरुआत मप्र राज्य पर्यटन विकास निगम करेगा। इसमें विश्व स्तर पर मैरिज पर्यटन से जुड़ी हस्तियों और बॉलीवुड के नामचीन लोगों का सहयोग लिया जाएगा। पर्यटन मंत्री सुरेंद्र सिंह बघेल ने हाल ही में कोलकाता में आयोजित इंटरनेशनल कम्यूनिटी ऑफ वेडिंग फ्रटनटि (आईसीडब्ल्यूएफ) के चौथे वार्षिक सम्मेलन में यह जानकारी दी। बघेल ने कहा कि प्रदेश के वर्तमान में अज्ञात या कम जाने जाने वाले किलों, महलों, मंदिरों और झीलों वाले स्थानों को विवाह पर्यटन यानी मैरिज टूरिज्म वाले स्थानों के रूप में प्रचार/ प्रसार की योजना बनाई जा रही है। इसमें इंटरनेशनल कम्यूनिटी ऑफ वेडिंग फ्रटनटि (आईसीडब्ल्यूएफ)अपनी मह्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पर्यटन मंत्री ने इस दौरान आईसीडब्ल्यूएफ के साथ अनुबंध भी किया। मप्र पर्यटन निगम के जीएम जैमन मेथ्यू, ओएसडी विनोद अमर आदि मौजूद थे। साथ ही बॉलीवुड के सुप्रसिद्ध कला निदेशक नितिन देसाई से भी मंत्री बघेल ने प्रदेश में फिल्म पर्यटन को बढावा देने के लिए चर्चा की। वहीं, कार्यक्रम में मौजूद वेडिंग प्लानरों को खजुराहो और ओरछा के सौंदर्य और होटलों की सुविधाओं के बारे में बताते हुए मप्र आने का निमंत्रण भी दिया। विवाह पर्यटन में इस बार 10 फीसदी की बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद जताई गई है। वर्तमान में विश्व स्तर पर 60 यूएस मिलियन डॉलर का मैरिज पर्यटन उद्योग पनप चुका है।
सामाजिक जागरुकता के लिए काम कर रहा दादी-नानियों का थिएटर समूह
अरलंस्कॉय (तुर्की) : तुर्की के छोटे से कस्बे अरलंस्कॉय की 62 साल की दादी माँ इन दिनों पूरे देश में चर्चा हैं। इसकी वजह है- उनके द्वारा शुरू किया गया थियेटर ग्रुप। इस ग्रुप में सभी महिलाएं हैं। ग्रुप क्लाइमेट चेंज को लेकर जागरुकता लाने के लिए अलग-अलग जगह पर नाटक का मंचन करता है। इन दिनों ये महिलाएं अपने नए नाटक ‘मदर, द स्काय इज पीयर्स्ड की रिहर्सल में व्यस्त हैं। इस महिला थियेटर ग्रुप की प्रमुख उम्मिये कोकाक चाहती हैं कि दुनियाभर में लोग इस समस्या को समझें और गम्भीरता से लें। कोकाक के काम को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचाना जाता है। 2013 में तुर्की की महिलाओं पर फिल्म के लिए न्यूयॉर्क फेस्टिवल में अवॉर्ड भी मिला था। कोकाक फुटबॉलर क्रिस्टिआनो रोनाल्डो के साथ एड कर चुका है।
नाटकों का मकसद धारणा बदलना है
कोकाक के मुताबिक, ‘‘क्लाइमेट चेंज सिर्फ उनके कस्बे की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की समस्या है। मैं इस समस्या को लेकर जितनी जोर से आवाज उठा सकती हूं, उठाऊंगी। ये दुनिया हमारी भी है। इसे बेहतर देखभाल की जरुरत है। दरअसल, कोकाक इससे पहले भी नाटक लिखती रही हैं। उनके नाटकों का उद्देश्य धारणाओं को बदलना रहता है। इससे पहले उन्होंने गरीबी, अल्जाइमर रोग, घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर नाटक लिखे हैं। तुर्की के टीवी ड्रामा पर इनकी खासी चर्चा हुई है।’’
महिलाओं की बात सुनी जानी चाहिए
कोकाक का अरलंस्कॉय आना शादी के बाद हुआ। वहां पर उन्होंने देखा कि महिलाएं घर और खेतों में बराबरी से काम करती हैं। उन्हें लगा कि यह ठीक नहीं हैं, इन महिलाओं की बात सुनी जानी चाहिए। वो काफी समय से इस पर काम कर थी। थियेटर ग्रुप इसी का नतीजा है। गांव में कोई हॉल या सेट तो था नहीं, इसलिए कोकाक ने घर के गार्डन में ही रिहर्सल शुरू करवा दीं। धीरे-धीरे इस ग्रुप की चर्चा पूरे तुर्की में फैल गई। अब लोग इन दादी-नानियों को स्थानीय स्तर पर नाटक मंचन के लिए बुलाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो खूब शेयर हो रहे हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)
धोनी उचित विदाई के हकदार: कुम्बले
नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कोच अनिल कुम्बले ने कहा कि इस बात का ‘पक्का यकीन’ नहीं है कि दिग्गज विकेटकीपर बल्लेबाज महेन्द्र सिंह धोनी मौजूदा टीम में जगह पाने के दावेदार है ऐसे में चयनकर्ताओं को उनके भविष्य को लेकर चर्चा करनी चाहिए। कुम्बले का मानना है कि क्रिकेट में शानदार योगदान के लिए धोनी उचित विदायी के हकदार है और इसके लिए चयनकर्ताओं को उनसे बात करना चाहिए। अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट में धोनी का भविष्य चर्चा का विषय है और चयनकर्ताओं ने इस बात के पर्याप्त संकेत दिये है कि वे आगे की सोच रहे है। कुम्बले ने धोनी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खेल जारी रखने के बारे में पूछे जाने पर क्रिकेटनेक्स्ट से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि पंत ने निश्चित रूप से विकेट कीपर-बल्लेबाज के रूप में मजबूत दावा पेश किया है। खासकर टी 20 प्रारूप में उसने अच्छा प्रदर्शन किया है। ऐसे में धोनी से बातचीत करना जरूरी है। वह अच्छी विदायी का हकदार है और आपको उससे बात करनी चाहिए।’’ कुम्बले चाहते हैं कि चयनकर्ता अगले कुछ महीनों में भविष्य को लेकर स्थिति साफ करें। उन्होंने कहा, ‘‘ टीम की खातिर, चयनकर्ताओं को योजनाओं को लेकर चर्चा करना चाहिए क्योंकि यह महत्वपूर्ण है कि इसके बारे में सही से बताया जाए। अगर चयनकर्ताओं का मानना है कि धोनी टी20 विश्व कप के योजना में फिट बैठते हैं, तो मुझे लगता है कि उन्हें हर मैच में खेलना चाहिए।’’ कुम्बले ने कहा, ‘‘ अगर ऐसा नहीं है तक चयनकर्ताओं को उनकी विदायी के बारे में चर्चा करना चाहिए। मुझे लगता है कि उन्हें अगले दो महीने में ऐसा करना चाहिए।’’




