दुर्ग : छत्तीसगढ़ से भाजपा की राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय को देश की सबसे प्रतिभाशाली और ग्लैमरस महिला राजनेता चुना गया है। विस्पर इन दा कॉरिडोर नाम की वेबसाइट के सर्वे में राज्यसभा सांसद सरोज को लोगों ने पहली पसंद बताया है। वेबसाइट की ओर से प्रथम छह महिला राजनेताओं को चुनने के लिए सर्वे कराया गया था। ब्यूरोक्रेट्स, पब्लिक इंटर प्राइजेज, पॉलिटिक्स और कॉरपोरेट जगह की गतिविधियों पर नजर रखने वाली बेवसाइट ने ने महिला राजनेताओं के नाम सुझाकर उसमें से शीर्ष 6 राजनेता चुनने के लिए ऑनलाइन सर्वे कराया। सर्वे में लोगों ने पहली पसंद के रूप में राज्य सभा सांसद सरोज पांडेय को चुना। उनके बाद प्रियंका गांधी, स्मृति ईरानी, सुप्रिया सुले, डिंपल यादव और नुसरत को भी शामिल किया।
महाराजा रणजीत सिंह 500 साल के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ शासक : सर्वेक्षण
अमृतसर : पहले सिख शासक और पंजाब को एक सूत्र में पिरोकर उसे पख्तूनख्वा से कश्मीर तक विस्तारित करने वाले महाराजा रणजीत सिंह 500 साल के इतिहास में सर्वश्रेष्ठ शासक साबित हुए हैं। महाराजा रणजीत सिंह के निधन के 180 साल बाद अमेरिकन यूनिवर्सिटी ऑफ अलबामा के सर्वे में इसकी पुष्टि हुई है।
उनकी कार्य शैली, रण कौशल, प्रजा नीति, सेना के नवीनीकरण, आर्थिक और व्यापारिक नीतियों को आधार मान कर टॉप-10 शासकों को सूचीबद्ध किया है। महाराजा रणजीत सिंह पहले स्थान पर रहे। इसी तरह से टॉप-5 शासन काल को किए गए सूची में महाराजा का शासन काल पहले स्थान पर आया है।
वंशज बोले- महाराजा ने गठित की थी सिख खालसा सेना
महाराजा रणजीत सिंह के वंशज डॉ. जसविंदर सिंह तथा एडवोकेट संदीप सिंह ने बताया, “भारत में भले ही महाराजा को वह महत्ता नहीं मिली, लेकिन अब सारी दुनिया उनके शासन काल और कुशल शासक होने का लोहा मानती है। उक्त लोगों का कहना है कि विदेशी हमलावरों के दौर में महाराजा रणजीत सिंह ने देश की पश्चिमी छोर पर उनको रोका और उनको शिकस्त देते हुए सिख साम्राज्य की स्थापना की।”
“वह ऐसे शासक थे जिन्होंने अपने राज्य का विस्तार देश की सीमाओं से बढ़ा कर पेशावर, पख्तूनख्वा, कश्मीर तक किया। यही नहीं बल्कि उन्होंने उस दौर आपस में लड़ने वाले रजवाड़ों को एक सूत्र में पिरो कर एक समृद्ध और संगठित शासन खड़ा किया।”
कभी भी किसी को मृत्युदण्ड नहीं दिया, जजिया कर पर भी लगाई थी रोक
जसविंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने कानून और व्यवस्था कायम की और कभी भी किसी को मृत्युदण्ड नहीं दिया। उनका सूबा धर्मनिरपेक्ष था। उन्होंने हिंदुओं और सिखों से वसूले जाने वाले जजिया पर भी रोक लगाई। कभी भी किसी को सिख धर्म अपनाने के लिए विवश नहीं किया। उन्होंने अमृतसर के हरिमंदिर साहिब गुरुद्वारे में संगमरमर लगवाया और सोना मढ़वाया, तभी से उसे स्वर्ण मंदिर कहा जाने लगा।
खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में युवा दिवस व स्वामी विवेकानंद जयंती
कोलकाता : खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में युवा दिवस व स्वामी विवेकानंद जयंती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज परिसर से विवेकानंद घर की पदयात्रा से हुई। जिसमें कॉलेज के समस्त शिक्षक सहित एनसीसी और एन एस एस के विद्यार्थी शामिल थे।
इस मौके पर श्यामपुकुर बाटी के प्राचार्य महाराज स्वामी परासरानंद ने कहा कि जीवन में कुछ भी करने के लिए हमें आत्मविश्वास की जरूरत है, बिना इसके हम किसी भी काम को पूरा नहीं कर सकते हैं। अगर भारतवर्ष को उन्नति के रास्ते पर ले जाना है तो हमें स्री शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। संचालन समिति के सदस्य देवाशीष मल्लिक ने कहा कि हमें अपने जातीय विकास के लिए विवेकानंद के कर्मों को ध्यान में रखते हुए समाज का उत्थान करना होगा। डॉ जयश्री रॉय चौधरी ने कहा कि नारी जाति का सम्मान बेहद जरूरी है इसके बिना समाज का कल्याण नहीं हो सकता है। प्रो बिमल शंकर नंदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद और विद्यासागर का दर्शन समान रहा है। दोनों ने ही राष्ट्र के सांस्कृतिक उत्थान में बड़ी भूमिका निभाई है। कॉलेज के प्राचार्य सुबीर दत्ता ने कहा कि हमें सबसे पहले अच्छा इंसान होना पड़ेगा। स्वामी विवेकानंद की जयंती तब ही सफल मानी जायेगी जब हम मनुष्यता को महत्व देंगे। स्वागत गीत प्रो. देबोलिना भट्टाचार्य, प्रो. पायल नंदी, अंतरा बोस, हेमंतिका घोष, टिसूक मजूमदार, लक्ष्मी पॉल, देवाश्रृता सेन, सृजिता चक्रवर्ती, रितिका चौधरी, अदिति सरकार और तपेश पॉल ने प्रस्तुत किया। इस मौके पर विद्यार्थियों के लिए प्रसिद्ध जादूगर पीयूष बनर्जी का मैजिक शो आयोजित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो रामकृष्ण घोष तथा धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कॉलेज के प्रेसिडेंट अशोक चौधरी ने कहा कि सभी विद्यार्थियों को अपने जीवन में एकाग्रता लाने की जरूरत है तभी हम अपने जीवन के उद्देश्य को प्राप्त कर पाएंगे।
सफाई अभियान में भवानीपुर कॉलेज के विद्यार्थियों ने साफ की सड़कें
कोलकाता : वार्ड क्लिनिंग ड्राइव अभियान के तहत भवानीपुर एडूकेशन सोसायटी कॉलेज के विद्यार्थियों ने भवानीपुर के हेशम रोड की सफाई की। कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह, प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रीति, डॉ दिव्येष शाह, डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया। बीस से अधिक विद्यार्थियों ने सफाई अभियान में अपनी सेवाएं प्रदान की। “जो बदलाव विश्व में देखना चाहते हो, पहले स्वयं में बदलाव लाओ” महात्मा गांधी के इस वाक्य से प्रेरित होकर इस अभियान में “सृजन ” रियलिटी डेवलपमेंट के सुप्रयास से भवानीपुर कॉलेज के एनएसएस और एनसीसी के विद्यार्थियों ने वार्ड 70 को साफ करने का बीड़ा उठाया है। इस वार्ड के पार्षद श्री असीम कुमार बोस ने सफाई अभियान को स्पॉन्सर कर विद्यार्थियों को सफाई रखने की प्रेरणा दी है।
सृजन के देबर्षि ने इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दिया। नितीश वर्मा, तहाम टंबावाला, नितेश खत्री, मो. शबब अहमद, रौनक दोशी, श्रीकुंज अग्रवाल, किशन बगड़िया, गौरव किल्ला, आशुतोष कुमार झा, अंशु देवनाथ, आदर्श मुरारका, आयुश सिंह, अभिषेक सिंह आदि छात्रों ने सड़कों की सफाई और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस अभियान में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को धन्यवाद दिया एवं इस कार्यक्रम की जानकारी दी । सुबह दो घंटे तक सफाई में लगे सभी विद्यार्थियों को कॉलेज में चाय नाश्ता दिया गया।
हिन्दी पत्रकारिता में स्वप्नों और मूल्यों के रक्षक थे राजकिशोर
कोलकाता : आज हिन्दी पत्रकारिता जितनी संभावनाओं से भरी हुई है उतनी ही चुनौतियों से भी। राजकिशोर पत्रकारिता की जिस परंपरा से जुड़े हुए थे उसमें विचारों और मूल्यों का महत्व था। आज नई पीढ़ी पर उस परंपरा के विकास का दायित्व है। आज भारतीय भाषा परिषद के सहयोग से आयोजित ‘राजकिशोर स्मृति व्याख्यान-माला’ में ये विचार व्यक्त किए गए। राजकिशोर वृहत्तर कोलकाता इलाके से निकले पत्रकार थे जिन्होंने राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की। इस अवसर पर हिन्दी पत्रकार गंगा प्रसाद को ‘राजकिशोर पत्रकारिता सम्मान 2020’ प्रदान किया गया। इस वर्ष से ‘कला साहित्य मंच’, ‘हिंदी ज्ञान’, ‘हिंदी कार्य’, ‘हिंदी कारवां’ और ‘शुभजिता’ ने संयुक्त रूप से इसकी शुरुआत की।
‘मीडिया का नया दौर और हिन्दी पत्रकारिता’ पर बोलते हुए अरुण माहेश्वरी ने कहा कि राजकिशोर ने मुख्य धारा की पत्रकारिता से अपनी लेखन यात्रा शुरू की थी लेकिन अपने जीवन के अंतिम वर्षों में वे छोटे समाचार पत्रों की दुनिया में आ गए थे। उन्होंने कविताएँ और उपन्यास भी लिखे हैं। उनका पुस्तकालयों के बारे में मत था कि इतनी क्षुद्र दुनिया में इतनी सुंदर चीज कैसे है। वे बड़े अध्ययनशील थे। प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के प्रो. ॠषिभूषण चौबे ने कहा कि राजकिशोर की पत्रकारिता हमें निर्भयता की शिक्षा देती है। उनकी दृष्टि और भाषा दोनों बेवाक थी। मृत्युंज ने कहा कि राजकिशोर पत्रकार भर नहीं थे वे हिंदी पत्रकारिता के कबीर थे। इस अवसर पर राजकिशोर की कविताओं की संगीतात्मक प्रस्तुति पूजा गुप्ता, मंजू श्रीवास्तव, मधु सिंह, पंकज सिंह, इबरार खान और राज्यवर्द्धन ने की। राजकिशोर के मित्र महेश जायसवाल ने कहा कि राजकिशोर जैसे संवेदनशील और जागरूक पत्रकार कम होते हैं। वे हावड़ा अंचल के लिए एक कीर्तिमान के रूप में याद किए जाएंगे। शुभजिता की सुषमा त्रिपाठी ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता में महिलाओं की उपेक्षा है, उन्हें सामने आना चाहिए।

अध्यक्षीय भाषण देते हुए शंभुनाथ ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता हमेशा लोकतांत्रिक रही है। दो तरह के पत्रकार होते हैं- प्रचारक पत्रकार और विचारक पत्रकार। आज समाज को राजकिशोर जैसे विचारक पत्रकार की जरूरत है। उन्होंने राजकिशोर विचार कोश बनाने का प्रस्ताव रखा ताकि उनके विपुल लेखन से उनके श्रेष्ठ अवदान सामने आ सके। इस आयोजन के प्रथम सत्र का संचालन सौमित्र आनंद ने और दूसरे सत्र का संचालन प्रो.संजय जायसवाल ने किया। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष कुसुम खेमानी ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि आज निर्भीक और सहृदय पत्रकारिता की बहुत जरूरत है। आयोजन को सफल बनाने में अश्विनी कुमार और राहुल गौड़ की विशेष भूमिका थी।
वीरांगनाओं ने अनाथ बच्चों को भोजन कराया
कोलकाताः अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फाउंडेशन, पश्चिम बंगाल की वीरांगनाओं ने डॉन बॉस्को आशालयम, लिलुआ अनाथ आश्रम के बच्चों के साथ समय बिताया और उन्हें भोजन कराया और उपहार भी दिये। संगठन की प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह, महासचिव प्रतिमा सिंह, उपाध्यक्ष रीता सिंह, संयुक्त महासचिव ममता सिंह, महानगर इकाई की अध्यक्ष मीनू सिंह, महासचिव इंदु सिंह, सोदपुर अंचल की अध्यक्ष सुनीता सिंह, महासचिव आशा सिंह तथा पदाधिकारियों सुनीता सिंह-बारानगर, मीरा सिंह, ललिता सिंह, शकुंतला, जयश्री सिंह, अनिता आदि ने उनके दुख सुख को जाना और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
सुशीला बिड़ला में स्नेह भरा ‘समायन’
कोलकाता : सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की स्नेह कमेटी द्वारा स्कूल में हाल ही में ‘समायन’ कार्यक्रम गत 7 तथा 10 दिसम्बर को आयोजित किया गया। विशेष जरूरतमंद बच्चों की सहायता को ध्यान में रखकर आयोजित किये गये इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ सेरेब्रल पॉल्सी (आईआईसीपी) की सचिव डॉ. रीना सेन ने प्रतिभागियों को सम्बोधित किया। पहले दिन अकादमिक बूथ, टेक्नो स्किल, टी शर्ट पेंटिंग, चित्रांकन, क्ले मॉडलिंग के अतिरिक्त हिन्दी, बांग्ला, अंग्रेजी में काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता आयोजित की गयी।
इसके बाद 10 दिसम्बर को विद्या मंदिर सभागार में कई अन्य़ प्रतियोगिताएँ आयोजित की गयीं जिनमें ड्रेस टू इम्प्रेस, स्टेप अप तथा माइम जैसी प्रतियोगिताएँ शामिल थीं। इस मौके पर स्पेशल ओलम्पिक्स में लॉस एंजेलिस में आयोजित वर्ल्ड गेम्स में भारत के स्वर्ण पदक विजेता रणवीर सिंह सैनी उपस्थित थे। समायन’ में 15 स्कूलों ने भाग लिया। बेहला बोधायन को ओवर ऑल विनर की ट्रॉफी मिली। सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की स्नेह कमेटी की सदस्याओं को सम्मानित किया गया।
मधुबनी लोकचित्र परम्परा को समृद्ध करते दो भाई
कोलकाता : हमारे जीवन को संवारने में कला, साहित्य व संस्कृति का विशेष योगदान रहता है क्योंकि यही हमारे जीवन को संवारती हैं। यह सरकार का ही नहीं बल्कि हमारा भी दायित्व है कि हम इसका संरक्षण करें। देखा जाए तो कई बार कलाएँ ही किसी राज्य तथा देश का भी सांस्कृतिक परिचय बन जाती हैं. जैसे बिहार की सांस्कृतिक व कलात्मक पहचान मधुबनी या मिथिला पेंटिंग से है। इस कला को संवारने और समृद्ध करने के लिए कई पीढ़ियाँ लगी रहीं। हाल ही में शुभजिता जब विधाननगर मेले में पहुँची तो वहाँ उसकी मुलाकात एक ऐसे ही युवा कलाकार से हुई। हम बात कर रहे हैं मधुबनी पेंटिंग कलाकार प्रभाकर झा। प्रभाकर कोलकाता में ही रह रहे हैं और अपने भाई दिवाकर के साथ मधुबनी पेंटि्ग्स की विविधता को बिखेर रहे हैं। प्रभाकर बताते हैं कि वे जिस कलाग्राम जितवारपुर में जन्मे, उसका नाम कलाग्राम इसलिए पड़ा क्योंकि वहाँ 80 प्रतिशत लोग कला के क्षेत्र में ही सक्रिय है। दोनों भाइयों ने अपनी कला के साथ अपने अध्ययन को भी महत्व दिया। आज प्रभाकर कोलकाता में सी ए की पढ़ाई कर रहे हैं तो दिवाकर भोपाल में बी.टेक कर रहे हैं। प्रभाकर के अनुसार मधुबनी (मिथिला) लोकचित्र बनाना इनके लिए विरासत को सम्भालने जैसा है और यह हुनर उनमें आनुवांशिक है तो यह कला उन्होंने अपनी माँ पूनम देवी से सीखी जो खुद एक दक्ष कलाकार हैं। दोनों भाई मधुबनी लोकचित्र बनाने के साथ दुर्गापूजा पंडालों में भी अपनी कला का कमाल दिखाते हैं। कई बड़ी प्रदर्शनियों में भाग ले चुके हैं। आप भी सुनिए प्रभाकर क्या कह रहे हैं –
सेवामूलक कार्यों पर 200 करोड़ रुपये खर्च करेगा रोटरी 3291
वार्षिक डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस 2020 कल 11 जनवरी से
कोलकाता : रोटरी 3291 का वार्षिक डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस 2020 कल 11 जनवरी से आरम्भ होने जा रहा है। रोटरी इंडिया तथा रोटरी 3291 भारत में 100 साल पूरे कर रहे हैं। रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3291 का यह जिला सम्मेलन ‘आह्वान’ सेवा के लिए उनके सभी सदस्यों का आह्वान है। रोटरी के विश्व नेता मार्क डैनियल मालोनी रोटरी कनेक्ट्स द वर्ल्ड पर वक्तव्य देंगे। डिस्ट्रिक्ट कॉन्फ्रेंस में देश भर से इस अवसर को विशेष बनाते हुए संगठन अपने सेवामूलक कार्यों का भी विस्तार कर रहा है। रोटरी डिस्ट्रिक्ट3291 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर रोटेरियन अजय अग्रवाल ने बताया कि संगठन स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करेगा और इन क्षेत्रों से सम्बन्धित विभिन्न परियोजनाओं पर 200 करोड़ रुपये खर्च किये जा रहे हैं। संगठन 35 हजार शौचालय बनाने जा रहा है। रोटरी 3291 पैलान में 1000 बच्चों की क्षमता वाला नि:शुल्क आवासीय स्कूल बनायेगा। स्कूलों की आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए अब तक 200 स्कूलों को लेकर कार्य हो चुका है और इस बार लक्ष्य 500 स्कूलों की आधारभूत संरचना को मजबूत करना है। 5 हजार साइकिल रिक्शा वितरण भी किये जाएँगे।
गौरतलब है कि इस समय रोटरी के 152 क्लब कोलकाता में हैं। रोटरी के विश्व भर में 1.2 मीलियन सदस्य हैं।
बीआईटीएम में राष्ट्रीय विज्ञान नाट्य उत्सव
कोलकाता : विज्ञान के प्रति जागरुकता लाने के लिए आयोजित किया जाने वाला राष्ट्रीय विज्ञान नाट्य उत्सव बिड़ला औद्योगिक तथा प्रौद्योगिक संग्रहालय (बीआईटीएम) में आयोजित किया गया। बीआईटीएम ने राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की ओर से आयोजित किया गया। इस नाट्योत्सव का विषय विज्ञान और समाज था। इस नाट्योत्सव का उद्धघाटन समारोह में राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव मनीष जैन ने किया। इस अवसर पर पदातिक थियेटर के कला निदेशक विनय शर्मा, ईस्टर्न जोनल कल्चरल सेंटर की निदेशक गौरी बसु के अतिरिक्त बीआईटीएम के निदेशक वी.एस. रामचन्द्रन भी उपस्थित थे।

नाट्योत्सव में विशेषज्ञ के तौर पर प्रो. शुभाशीष हल्दर, नयन प्रसाद, सुमन कुमार, डॉ. के. रामकृष्ण, योगेश सोमेन उपस्थित थे। इस नाट्योत्सव में इन्द्रप्रस्थ विद्यालय, कर्नाटक, मिठीराम सैकिया हायर सेकेन्डरी स्कूल, असम, जी लिट्रा वैली स्कूल (सीनियर सेकेन्डरी), भिवानी, धर्मनगर गवर्नमेंट गर्ल्स हायर सेकेन्डरी स्कूल, त्रिपुरा, लिटिल फ्लावर्स पब्लिक स्कूल, दिल्ली, गोखले मेमोरियल गर्ल्स स्कूल, कोलकाता, श्री समर्थ हाई स्कूल, अमरावती, गवर्नमेंट ओरिएंटल हायर सेकेंडरी स्कूल, पट्टाम्बी, केरल, चिल्ड्रेन्स अकादमी, मुम्बई, पंचायत राज हाई स्कूल, धेनकल, ओडिशा के 90 प्रतिभागियों ने भाग लिया। ये प्रतिभागी जिला व राज्य स्तर इस प्रतियोगिता के विजेता हैं।




