चेरुवल्लि मुस्लिम जमात समिति इसका खर्च उठाएगी, एक हजार लोगों के खाने की व्यवस्था की गयी
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, परिवार ने समिति से मदद मांगी थी
अलप्पुझा : केरल की एक मस्जिद में 19 जनवरी को होने वाली हिंदू लड़के-लड़की की शादी इन दिनों सुर्खियों में है। इसका जिम्मा चेरुवल्लि मुस्लिम जमात समिति ने उठाया है। समिति के सचिव नुजुमुद्दीन अलुमुट्टिल ने बताया, “लड़की के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। परिवार ने हमसे मदद का अनुरोध किया था। इसके बाद हम आगे आए।” इस शादी का कार्ड भी वायरल हो रहा है। 22 साल की दुल्हन अंजू की शादी शरत शशि से होगी। एक साल पहले दुल्हन के पिता अशोकन का निधन हो गया था। परिवार इतना सक्षम नहीं था कि वह शादी का खर्च उठा सके। मस्जिद समिति अंजू को 10 तोला सोना और दो लाख रुपए उपहार के रूप में देगी। विवाह हिंदू रीति-रिवाजों से होगा। समिति ने एक हजार लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की है।
मस्जिद में होगा हिंदू विवाह , दुल्हन को 10 तोला सोना और 2 लाख रुपये के उपहार भी मिलेंगे
प्रदूषण कम करने के लिए काई वाले ‘सिटी ट्री’ का चलन बढ़ा
यह 275 पेड़ों के बराबर ऑक्सीजन देता हैं
लंदन : शहरों में बढ़ रहे प्रदूषण से निपटने के लिए स्मॉग टॉवर लगाए जा रहे हैं, लेकिन इसके परिणाम उतने असरकारी नहीं हैं। इसी को देखते हुए लंदन और बर्लिन में काई (मॉस) की दीवार वाले ऐसे सिटी ट्री का प्रयोग किया गया है, जो शहरों में कम खर्च और जगह में लगाए जा सकते हैं। इनका परिणाम भी बेहतर है। एक सिटी ट्री करीब 275 पेड़ों के बराबर प्रदूषण सोखने में कारगर है। सिटी ट्री प्रदूषित कणों (पार्टिकुलेट मैटर), कार्बन डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड अवशोषित करता है और ऑक्सीजन का उत्पादन करता है। हाल ही में लंदन में दो सबसे प्रदूषित स्थानों पर सिटी ट्री स्थायी तौर पर लगा दिए गए हैं। अप्रैल 2019 में इन स्थानों पर क्लाइमेट इमरजेंसी घोषित की गई थी। दुनियाभर के प्रदूषित 20 शहर भी इसे आजमा रहे हैं। यही नहीं, जर्मनी के प्रदूषित शहर स्टटगार्ट में ऐसी 100 मीटर दीवार बनाई जा रही है। दुनिया का पहला जैव प्रौद्योगिक प्रदूषण फिल्टर बताया जा रहा सिटी ट्री काई के जरिए काम करता है।
काई की जरूरतें हवा से पूरी हो जाती हैं
काई को आपने अब तक पेड़ के तनों, पुरानी इमारतों या पहाड़ों पर ही देखा होगा। पेड़-पौधे अपनी जरूरतें जड़ों के जरिये पूरी करते हैं, लेकिन काई अपनी सारी जरूरतों को सीधे हवा से पूरी करती है। इसकी इसी खासियत के आधार पर सिटी ट्री का कॉन्सेप्ट तैयार किया गया है। एक सिटी ट्री में काई करीब 13 फीट की ऊंचाई तक लगाई जाती है। सार्वजनिक स्थानों पर इसे स्टील की फ्रेम के साथ लगाया जाता है।
एक सिटी ट्री रोज 250 ग्राम पार्टिकुलेट मैटर सोखता है
इसके आविष्कारकों के मुताबिक, अलग-अलग प्रकार की काई के पौधे प्रदूषण के विभिन्न कारकों से निपटने में सक्षम है। एक सिटी ट्री हर रोज 250 ग्राम पार्टिकुलेट मैटर सोखने की क्षमता रखता है। इस तरह यह एक साल में 90 किग्रा पीएम कण सोख सकता है। यह सालाना 240 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण से हटाता है। इससे आसपास रहने वाले लोगों और वहां से गुजरने वाले लोगों को साफ-स्वच्छ हवा मिलती है।
एक सिटी ट्री 5 मीटर के दायरे में 17 डिग्री तापमान रखता है
सिटी ट्री के हर टावर स्ट्रक्चर में वॉटर टैंक, सोलर पैनल, बैटरी और सेंसर लगे होते हैं। सिटी ट्री आसपास के इलाके में ठंडक भी बनाए रखता है। इसके पांच मीटर के दायरे में तापमान करीब 17 डिग्री रहता है। इससे शहरों की गर्मी कम करने में मदद मिलती है। सिटी ट्री में लगे सोलर सिस्टम के जरिए बारिश के पानी को सहेजा जाता है। वाई-फाई सेंसर से लैस यह सिटी ट्री अपने आप कार्य करता है और इसके रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ती।
सिटी ट्री से बच्चों का जीवन छह सप्ताह बढ़ जाएगा
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, खराब वायु गुणवत्ता के कारण दुनियाभर में हर साल 70 लाख लोगों की मौत हो जाती है। दरअसल, ब्रिटेन में हर साल 50,000 लोग प्रदूषण संबंधी बीमारियों के चलते असमय दम तोड़ देते हैं। दो स्थानों पर सिटी ट्री लगाए जाने के बाद उम्मीद की जा रही है कि इन इलाकों में वर्ष 2013 के बाद जन्मे बच्चों का जीवन औसतन छह हफ्ते बढ़ जाएगा।
अगले महीने भारत में आ रही है सबसे सस्ती इलेक्ट्रिक कार
नयी दिल्ली : ऑटो एक्सपो फरवरी के महीने में आयोजित किया जाएगा। इस ऑटो एक्सपो में चीन की कार निर्माता कम्पनी ग्रेट वॉल मोटर्स पहली बार भारत में अपनी गाड़ियां पेश करनेवाली है। इसके साथ ही वह भारत में एंट्री करने की तैयारी कर रही है। ऑटो एक्सपो में ग्रेट वॉल मोटर्स कुछ एसयूवी और एक इलेक्ट्रिक कार Ora R1 (ओरा आर 1) पेश करेगी। Ora R1 को दुनिया की सबसे सस्ती इल्केट्रिक कार भी कहा जाता है। Ore R1 Electric Car 35 किलोवॉट की मोटर से 351 किमी की रेंज तय कर सकती है। Ore R1 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम के साथ कनेक्टिविटी फीचर मिलेगा। जिसे ‘हेलो ओरा’ कह कर एक्टिवेट किया जा सकता है। Ore R1 Electric Car की टॉप स्पीड 100 किमी प्रति घंटा तक होगी। कंपनी Ore R1 कार के साथ तीन साल या 1.20 लाख किमी अथवा आठ साल या फिर 1.50 लाख किमी की गारंटी दे सकती है। Ore R1 की लंबाई 3495 एमएम, चौड़ाई 1660 एमएम और ऊंचाई 1560 एमएम होगी। Ore R1 Electric Car की कीमत 8680 डॉलर से 11293 डॉलर तक होगी, जो भारतीय रुपयों में 6.23 लाख से 8.10 लाख रुपये के आसपास होगी।
अपने घर में मोती उगा रही है आगरा की रंजना
आगरा : आगरा में एक ऐसी युवती है जो घर पर मोती उगाती है। जी हां आपने सही सुना घर पर ही एक ड्रम में किए प्रयोग से हौसला बढ़ा और अब इस युवती ने मोती उगाने की ट्रेनिंग लेकर इस काम को शुरू कर दिया है। मोती उगाने वाली इस बेटी का नाम है रंजना यादव। 14 गुना 14 फीट के तालाब में मोती की फसल लगाकर अब इसमें दो हजार सीप डाली गयी है। रंजना के अनुसार आगरा में मोतियों की खेती का ये पहला प्रयास है। बात लगन की है। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंस से एमएससी कर चुकी रंजना ने पढ़ाई के दौरान पर्लफार्मिंग के बारे में जाना। भुवनेश्वर जाकर पर्ल फार्मिंग का विधिवत प्रशिक्षण लिया। उन्होंने पिता सुरेश यादव के महर्षिपुरम स्थित प्लाट में तालाब बनाया। दो महीने पहले गुजरात से मंगाई गईं सीप इस तालाब में डाली। इन सीपों को तालाब में एक मीटर गहराई में लटकाए गए जालीदार बैग में रखा गया है। रंजना बताती हैं कि इसमें मानवीय प्रयास शामिल है लेकिन मोती प्राकृतिक रूप से पैदा होती हैं और इनकी मांग खूब है।
ऐसे बनता है मोती
प्राकृतिक रूप से मोती का निर्माण तब होता है जब रेत, कीट आदि किसी सीप के अंदर पहुंच जाते हैं। तब उसके ऊपर चमकदार परतें चढ़ती है। यह परत मुख्यत: कैल्शियम की होती है। मोती का उत्पादन भी इसी तरीके से होता है। सीप के अंदर 4-6 मिलीमीटर व्यास के ‘बीड या न्यूक्लियर’ डाले जाते हैं और तैयार होने पर मोती को निकाल कर पॉलिश किया जाता है।
गहन देखभाल है जरूरी
न्यूक्लियर डालने से पहले और बाद में सीप को कई प्रक्रिया से गुजारा जाता है। प्रतिरोधक दवाएं और प्राकृतिक चारा (एल्गी, काई) दिया जाता है फिर तालाब में डाला जाता है। शुरूआत में रोज फिर एक-एक दिन छोड़कर निरीक्षण किया जाता है। बीमार सीपों को दवा देना, मृत सीपों को हटाना, तालाब में ऑक्सीजन का इंतजाम करना और बैग की सफाई आदि जरूरी है। मोती मनचाहे आकार के
रंजना ने बताया कि परंपरागत गोल ही नहीं जिस आकार की चाहें मोती बनाई जा सकती है। यही डिजाइनर मोती है। बस न्यूक्लियर वैसा बनाना पड़ता है। साथ ही न्यूक्लियर को सर्जरी की मदद से सीप में रखने की कुशलता और उचित देखभाल ही मोती की गुणवत्ता को बढ़ाती है। रंजना पर्ल फार्मिंग के इच्छुक लोगों को अपने फार्म पर प्रशिक्षण भी दे रही हैं और कई विद्यार्थी प्रशिक्षित हो चुके हैं।
(साभार – अमर उजाला)
साहित्य कला से अलग नहीं है बल्कि वह भी कला है
प्रशस्ति तिवारी एक कुशल नृत्यांगना हैं। कत्थक की आम परम्परा से अलग इन्होंने साहित्य को चुना। कबीर के पदों पर उनका कत्थक रोमांचित कर देता है। प्रशस्ति नृत्य कार्यशालाएँ भी करवाती हैं और प्रशिक्षण भी देती हैं। हाल ही में 25वें हिन्दी मेले में अपनी प्रस्तुति देने आयी प्रशस्ति से शुभजिता की मुलाकात हुई, पेश हैं प्रमुख अंश –
परम्परागत चीजों से हटकर कुछ नया करना चाहती थी
– बनारस से हूँ। 3 साल की उम्र से कत्थक सीख रही हूँ। बीएचयू से सीखा। 2012 में कबीर के पदों पर पहली बार प्रस्तुति कबीर चौरा में दी। कबीर को इसलिए चुना क्योंकि मैं कत्थक की गुरु – शिष्य परम्पराग की परम्परागत चीजों से हटकर कुछ नया करना चाहती थी। यही कारण है कि मैंने कबीर को चुना। पहली प्रस्तुति बेहद यादगार रही क्योंकि जब जब मैंने इसे किया तो यह एक तरह की क्रांति थी। लोग अपनी छतों से देख रहे थे क्योंकि एक लड़की प्रस्तुति दे रही थी और वह भी परम्परागत चीजों से अलग हटकर कबीर के पदों को प्रस्तुत कर रही थी।
मैं एक कलाकार हूँ और कबीर मेरे लिए अपनी बात कहने का तरीका हैं। बीएचयू में जब आयी तो 12 बांग्लाभाषी विद्यार्थियों के बीच अकेली हिन्दीभाषी छात्रा थी। यह सही है कि हिन्दीभाषी प्रदेशों में लड़कियों के लिए समस्या रहती है मगर आज स्थिति बदल चुकी है। मेरे घर में वातावरण कला और साहित्य का रहा है इसलिए मुझे दिक्कत नहीं हुई पर मैं जानती हूँ कि ऐसी लड़कियाँ हैं जिनके लिए आगे बढ़ना मुश्किल है।
निर्गुण किया तो सवाल उठे
शुरुआती दिनों में काफी चीजें झेलनी पड़ी। शुरुआत में रोड शो करती थी। निर्गुण किया तो सवाल उठे। मैं समाज में अपनी बात कहना चाहती थी मगर आगे बढ़ी।
आर्थिक जरूरतमंद लड़कियों के साथ काम कर रही हूँ
मैं नृत्य कार्यशाला करवाती हूँ। प्रशिक्षण भी देती हूँ। कबीर करना और उस पर निर्गुण करना मेरे लिए कठिन था। मैंने जयशंकर प्रसाद की कविताओं के साथ रश्मिरथी के कर्ण प्रसंग पर काम किया है। आर्थिक जरूरतमंद लड़कियों को लेकर समूह बनाया, प्रशिक्षित किया और आज वे आत्मनिर्भर हैं और दूसरों को भी सिखा रही हैं।
जो साहित्य को पढ़ते हैं, वे कला को भी समझते हैं
मुझे लगता है कि साहित्य कला से अलग नहीं है बल्कि वह भी कला है। जो साहित्य को पढ़ते हैं, वे कला को भी समझते हैं। मुझे याद है कि 2009 में जब मैं पहली बार बीएचयू में मंच पर गयी तो वहाँ सभागार में काशीनाथ सिंह थे। उस दौरान बनारस कविता पर काम कर रही थी, मंच पर जाकर एकदम ब्लैंक हो गयी थी मगर इसके बाद मैंने फिर तैयारी की और सफल प्रस्तुति भी दी।
साहित्य को देखें और अनुभव करें
कोलकाता और हिन्दी मेला आकर बहुत अच्छा लगा। यहाँ 12 साल के बच्चों से कविता सुनना और उनका मंच तक आना बड़ी उपलब्धि है। हिन्दी मेले तक सन्देश लोगों तक जा रहा है और 25 साल तक निरन्तर चलना एक बड़ी बात है। तकनीक से साहित्य को लड़ना है। मेरा सन्देश है कि साहित्य को देखें और अनुभव करें।
नाटक, नृत्य और कविता की शाम बनी ‘चित्राम्बरा 2019’
कोलकाता : कोलकाता की सांस्कृतिक और सामाजिक संस्था ‘वाराही’ की ओर से रविवार को कला मंदिर ऑडिटोरियम, कोलकाता के कला कुंज में नृत्य, नाट्य और कविता का एक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम चित्राम्बरा 2019 के प्रथम चरण में फिल्म जगत के मशहूर निर्माता-निर्देशक, लेखक और नाटककार सागर सरहदी का लिखा बहुचर्चित नाटक “किसी सीमा की एक मामूली सी घटना” को बंगाल के सुप्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक प्रताप जायसवाल के निर्देशन में मंचित किया गया। इस समारोह के दूसरे सत्र में ‘नृत्य विशारद’ पदवी से विभूषित एवं विश्व के विभिन्न देशों में अपने नृत्य का प्रदर्शन कर चुकी प्रियंका साहा व उनकी टीम के कलाकारों द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति की गयी। तृतीय चरण में कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें मंगलेश डबराल, सुभाष, डॉ. आशुतोष, डॉ. अभिज्ञात, यतीश कुमार, जितेंद्र धीर, राज्यवर्धन और निशांत ने काव्यपाठ किया।

वाराही की सचिव नीता अनामिका ने कार्यक्रम का संयोजन किया था। समारोह में डॉ.अभिज्ञात के कविता संग्रह कुछ दुःख कुछ चुप्पियां का लोकार्पण मंगलेश डबराल ने किया। उन्होंने कहा कि अभिज्ञात दुःख को ताकत बनाने वाली कविताएं लिखते हैं। उनकी कविताओं में दुःख हताश या निराश नहीं करते। उनकी कविताओं में शब्दों के अर्थ खोने की चिन्ताएं हैं। वे हाशिये पर गये क्रियाकलापों को महत्व देने की हिमायत करते हैं। समारोह में प्रताप जायसवाल को रंगमंच उनके योगदान के लिए चित्राम्बरा सम्मान से सम्मानित किया गया। संस्कृति के हर पहलू को मोतियों की तरह एक धागे में पिरोने का नीता अनामिका प्रयास सफल रहा |
भवानीपुर एडुकेशन सोसायटी कॉलेज में “उमंग” में भवानीपुर कॉलेज प्रथम
कॉलेज के अध्यक्ष चंपक लाल दोशी ने नुसरत जहाँ को कॉलेज का स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।चार दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में डीन प्रो दिलीप शाह ने स्वागत भाषण में कहा कि उमंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होने के साथ ही विद्यार्थियों की श्रेष्ठतम प्रतिभाओं को भी सामने लाता है। इस वर्ष उमंग में 97 के लगभग इवेंट्स हैं और 56 कॉलेज भाग ले रहे हैं,लगभग 2500 प्रत्याशियों ने चार दिनों में किसी न किसी रूप में भाग लिया है।
उमंग में साहित्य, संस्कृति और विभिन्न आर्ट्स को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण मंच है। पिछले वर्ष ही कॉलेज के डीन प्रो दिलीप शाह ने आने वाले वर्ष 2019 में थीम ” मी एंड वी “की उद्घोषणा की थी। इसी थीम के आधार पर कॉलेज के मुख्य द्वार से लेकर मंच तक की सज्जा की गयी। कॉलेज के प्रमुख द्वार पर पृथ्वी माता की प्रतिमा लगाई गई है जिसमें उसका आधा हिस्सा काला है, एक आंख से अश्रुधारा निकल रही है, जीव – जंतुओं का विनाश हो रहा है।दूसरे हिस्से में सुनहरा संसार है। हम इसी सुख दुख और विनाश के विरोधाभास में जी रहे हैं। एक ओर जंगल कट रहे हैं दूसरी ओर मकानों की बाढ़ है। मछलियां, पक्षियों आदि का मरना, पर्यावरण प्रदूषण, जल प्रदूषण आदि के प्रति युवाओं को जाग्रत करना ही उमंग का उद्देश्य है। उमंग में स्पोर्ट्स, मैनेजमेंट, फोटोग्राफी, नृत्य, संगीत आदि में प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। उद्घाटन समारोह में छात्राओं ने माधुरी दीक्षित के लोकप्रिय गीतों पर समूह नृत्य किया। इस अवसर पर प्रबन्धन के सभी सदस्य, अमर सेठ, शिवानी शाह, प्रदीप सेठ, कॉलेज के डायरेक्टर डॉ सुमन मुखर्जी ने स्वागत भाषण में श्लोक के साथ “हम” की महत्ता बताई। अकेला व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता उसे सभी को साथ लेकर चलना होगा। उमंग को आयोजित करने वाले विद्यार्थियों और वोलेंटियर्स को सम्मानित किया गया।”हम सूफी” संगीत टीम की ओर से सूफी संगीत की प्रस्तुति और उमंग के अंतिम दिन बॉलीवुड के सलीम और सुलेमान के जबरदस्त संगीत ने सभी विद्यार्थियों और श्रोताओं को आनंदित कर दिया।अध्यक्ष चंपक लाल ए दोशी, रेणुका शाह, नलिनी पारेख, अमर सेठ, प्रदीप सेठ मैनेजमेंट के प्रमुख सदस्य एवं प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, दिव्या उडिसि, डॉ दिव्येष शाह आदि शिक्षक शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही । डीन प्रो दिलीप शाह के निर्देशन में तीन दिनों के सभी कार्यक्रम विद्यार्थियों द्वारा किए गए जिसमें 400 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने कार्यक्रम की जानकारी दी।
युवा प्रतिभाओं की सृजनात्मकता से निखरा 25वाँ हिन्दी मेला
कोलकाता : हिन्दी मेला अपने 25वें साल में युवा संस्कृति का एक अनोखा राष्ट्रीय उदाहरण बना। सातवें दिन चुनी गई श्रेष्ठ हिन्दी प्रतिभावों ने लोक संस्कृतियों के साथ हिन्दी काव्य संगीत, सुंदर नृत्य और आवृत्तियां प्रस्तुत की। लगभग 90 शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों और युवाओं ने सात दिनों तक हिन्दी मेला को जीवंत और रंगारंग बना के रखा। इसमें हिन्दी के अलावा संस्कृत, बांग्ला, उड़िया, पंजाबी, भोजपुरी, राजस्थानी भाषाओं की विशेष उपस्थिति थी। शुभजिता में पेश है हिन्दी मेले की सात दिवसीय रपट –
सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त महासचिव प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि हिन्दी मेला सिर्फ हिन्दी नहीं सभी भारतीय भाषाओं का आंगन है और आगे भी बना रहेगा। हमें हिन्दी मेला को एक आंदोलन का रूप में देना है । हिन्दी मेला कोलकाता में पिछले 25 सालों से लगातार आयोजित हो रहा है। इसमें हिन्दी के लेखकों, शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों तथा विद्यार्थियों की विशेष भूमिका होती है। इसमें दूर-दूर से लोग आते हैं। नव वर्ष का पहला दिन भारतीय सोच के युवाओं ने अपने उच्च कलाओं, साहित्य और संस्कृति के साथ मनाया। डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि हिन्दी मेला ने साहित्य को आनंदोत्सव का रूप दे दिया है।
हिन्दी मेला में कविताओं को विशेष राग से गाने वाले संगीतज्ञ अजय राय का उनके बड़े योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अजय राय ने कहा कि हिन्दी परिवारों में हिन्दी काव्य के गायन की बाकायदा शिक्षा दी जानी चाहिए जिसका अभाव है। हिन्दी मेले में अजय विद्यार्थी को युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान और भोगेन्द्र झा को प्रो. कल्याणमल लोढ़ा शिक्षक सम्मान दिया गया। रांची से आये प्रो. रवि भूषण ने कहा कि हिन्दी के ऐसे समर्पित युवाओं के जैसा उत्साह हिन्दी राज्यों में दुर्लभ है। कोलकाता कभी आधुनिक हिन्दी की गंगोत्री रही है। आज यह महानगर फिर एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है।
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित यूको बैंक के कार्यपालक निदेशक चरण सिंह ने कहा कि हिन्दी मेला एक अनोखा सांस्कृतिक उत्सव है जिसका विस्तार होना चाहिए। मिशन के संरक्षक रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि हिन्दी मेला भारतीय आत्मा की अभिव्यक्ति है जिसका सन्देश मानवता है। नरेश कुमार ने हिन्दी मेला के युवा आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। नववर्ष पर होने वाले हिन्दी मेला के समापन के अवसर पर ढाई सौ से अधिक युवाओं को स्मृति चिन्ह, उपहार, मैडल और नगद राशि से सम्मानित किया गया। संचालन विकास जायसवाल, सुशील पांडेय, मधु सिंह, राहुल गौड़, धनंजय प्रसाद, विशाल कुमार साव, पंकज सिंह, सूर्यदेव रॉय, रूपेश कुमार यादव, अनिल कुमार साह, और संजय सिंह ने किया।

मानवतावाद और प्रकृति प्रेम का संदेश है छायावाद
गत 31 दिसम्बर को छायावाद के विविध पक्षों पर सेमिनार आयोजित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि छायावाद ने मानवतावाद और प्रकृति-प्रेम का संदेश दिया। इसने बुद्धिवाद और वैज्ञानिक विकास के साथ-साथ हृदय को महत्व दिया। हिंदी के प्रमुख छायावादी कवि प्रसाद,निराला,पंत और महादेवी ने उच्च मानव मूल्यों का पक्ष लिया तथा कट्टरवाद और आडम्बर का विरोध किया। हिन्दी मेला के केंद्रित “छायावाद, मानवतावाद और वर्तमान परिदृश्य” पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद में विद्वानों ने यह बात कही। बंगबासी कॉलेज के शिक्षक पीयूषकान्त राय ने कहा कि छायावाद ने मानवता को जो कुछ दिया, वह आज भी भाईचारा,सहिष्णुता,प्रेम और हिंदी मेला जैसे आयोजनों के सिलसिला में बचा हुआ है। हम छायावाद की मानवता को खोकर देश की प्रगति नहीं कर सकते। विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि आज का विश्व भौतिकवाद से काफी आकर्षित है, जहाँ चमक-धमक है लेकिन मानव हृदय का क्षय हुआ है। छायावादी साहित्य इसलिए महान है कि इसने विज्ञान और टेक्नोलॉजी के समानांतर मानव हृदय को महत्व दिया। जालान गर्ल्स कॉलेज के प्रो. विवेक सिंह ने कहा कि छायावाद का संबंध 19वीं सदी के नवजागरण से है। छायावाद ने धर्म,नस्ल और जाति से ऊपर उठकर सोचने की दृष्टि दी। बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि छायावाद ने जब सौ साल पहले साहित्य में कदम रखा था तब लोगों ने प्रसाद,निराला,महादेवी,पंत जैसे विद्रोही कवियों पर अंगुलियाँ उठाई थी लेकिन उनकी युगवाणी के समक्ष निंदा के लिए उठी अंगुलियाँ धीरे-धीरे स्वागत में जुड़ गई। उन्होंने कहा- निराला ने नए विचारों का अध्ययन किया था “प्रिय स्वतंत्र नव अमृत छंद नव,भारत में भर दे”। छायावाद ने मनुष्य की आत्मा को विराट बनाना चाहा था। प्रथम सत्र का अध्यक्षीय भाषण देते हुए डॉ विजय बहादुर सिंह ने कहा कि छायावादी कविता गुलामी के दिनों की आजादी की कविता है। यहाँ सिर्फ राजनीतिक आजादी ही नहीं, संस्कृति आजादी की भी कविता है। यदि हम छायावाद को नहीं समझते तो भारत को भी नहीं समझ सकते। यह परंपरा के पुनर्निर्माण का काव्य है।
राष्ट्रीय परिसंवाद के दूसरे सत्र में विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि हम इतिहास और परंपरा से विच्छिन्न हो रहे हैं। छायावाद इसी मानवजीवन को समझने का साहित्य है। विश्वभारती विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की प्रो. मंजूरानी सिन्हा ने कहा कि जीवन में आचरण के बिना सिद्धांत का कोई अर्थ नहीं है। वागर्थ के संपादक प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि छायावादी काव्य व्यक्ति के स्व का उद्घोष है। इसके कवि बाहर से अभावग्रस्त और भीतर से भाव से परिपूर्ण हुआ करते थे जबकि आज ठीक इसके विपरीत है। वर्तमान समय में हो रहे तोड़-फोड़ और वस्तुकरण से लड़ने की प्रेरणा हम छायावाद से ले सकते हैं। प्रसिद्ध आलोचक रविभूषण ने कहा कि छायावाद सांस्कृतिक जागरण का काव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्वतंत्रता का काव्य है। राष्ट्रीय परिसंवाद में दिव्या प्रसाद और निखिता पांडेय ने अपना आलेख पाठ किया। रचनात्मक लेखन प्रतियोगिता में प्रथम सम्मान पवन कुमार, महात्मा गांधी कॉलेज, बिहार,द्वितीय स्थान सूर्यदेव रॉय, इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, तृतीय स्थान पंकज सिंह, विद्यासागर विश्वविद्यालय, मधु सिंह, विद्यासागर विश्वविद्यालय को मिला। कार्यक्रम का सफल संचालन राहुल शर्मा, पूजा गुप्ता और धन्यवाद ज्ञापन विनोद यादव ने दिया।

30 दिसम्बर – मानवजाति के विकास के लिए पर्यावरण सरंक्षण की जगह औद्योगिक विकास जरूरी है। इस विषय पर वाद-विवाद में कुछ विद्यार्थियों ने हिन्दी मेला के पांचवें दिन मत व्यक्त किया कि पर्यावरण संरक्षण का आंदोलन विकास विरोधी है। कुछ एनजीओ पर्यावरण आदोलन के नाम पर वस्तुत: विकास राह में रुकावट पैदा कर रहे हैं। वहीं कई युवाओं ने कहा कि कुछ सालों से जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण प्रदूषण की तरफ विकसित देश ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसलिए पृथ्वी संकट में है, मनुष्यता संकट में है और संस्कृति विकृति में बदल रही है। वाद विवाद के अंत में यह बात स्थापित हुई कि हमें विकास की ओर बढ़ना है लेकिन पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को पूरा करते हुए। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित 25वें हिंदी मेला में वाद-विवाद प्रतियोगिता के अलावा आशु भाषण भी हुए, जिनमें युवाओं ने अपनी सोचने की क्षमता का परिचय दिया। इस दिन दूसरे सत्र में हिंदी मेले के दूसरे हिस्से में हिंदी कविता उत्सव आयोजित किया गया था जिसमें बाहर आए लगभग 45 कवियों ने अपनी कविताएँ सुनाई। कविता उत्सव में काली प्रसाद जायसवाल के ‘काव्य संग्रह तुम नहीं थे’ तथा मुम्बई से आये विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’ के काव्य संग्रह ‘आओ नई सहर का नया शम्स रोक लें’ का लोकार्पण भी सम्पन्न हुआ। इसकी अध्यक्षता विजय बहादुर सिंह, रविभूषण और अवधेश प्रधान ने की। काली प्रसाद जायसवाल, सेराजखान बातिश, आशुतोष, महेश जायसवाल,निर्मला तोदी, गीता दूबे राज्यवर्द्धन, राजेश मिश्रा, विनोद प्रकाश गुप्ता, अतीश कुमार, अभिज्ञात, य़तीश कुमार, आनंद गुप्ता, सुषमा त्रिपाठी,राजेश कमल, ज्योति शोभा, घुंघरू परमार, पूनम सोनछात्रा, राहुल शर्मा, इबरार खान, विनोद यादव, मधु सिंह, राहुल गौड़, सूर्यदेव यादव आदि ने अपनी कविता सुनायी।

29 दिसम्बर – इस दिन काव्य संगीत, लोकगीत तथा भाव नृत्य प्रतियोगिता आयोजित की गयी। इसके अतिरिक्त वाराणसी से आमंत्रित प्रशस्ति तिवारी ने कबीर के पदों पर कत्थक का अद्भुत प्रदर्शन किया जबकि पटना से आमंत्रित हीरावल ने शानदार काव्य व लोक गीत की प्रस्तुति की। लोकगीत समूह का शिखर सम्मान डगलस मेमोरियरल स्कूल, प्रथम स्थान रश्मि त्रिपाठी दल, द्वितीय नवीन मिश्रा एवं दल को, विशेष स्थान प्रीति साव एवं दल, एकल का शिखर सम्मान रूपांजलि सिंह, हमारा प्रयास, प्रथम स्थान कालीचरण तिवारी, द्वितीय स्थान अजीत पांडेय, तृतीय स्थान ,कुमारी,हराप्रसाद प्राइमरी, विशेष स्थान रेणू सिन्हा, प्रकाश खरवाल, नैना प्रसाद, अदिति दूबे, राजेश सिंह को मिला। भाव नृत्य एकल का शिखर सम्मान मनीषा चक्रवर्ती, सेंट ल्यूक्स डे स्कूल, प्रथम स्थान प्रेमशंकर पांडेय, द्वितीय स्थान अदिति दास,तृतीय स्थान प्रकाश पासवान, चतुर्थ स्थान अंतरा विश्वास, विशेष स्थान नंदिनी साव, नैहा चौबे, शिवानी सिंह, एकता प्रसाद और अंजलि सिंह को मिला। भाव नृत्य समूह का शिखर सम्मान संयुक्त रूप से विद्या विकास हाई स्कूल एवं मणिशंकर कलाकेंद्र, प्रथम स्थान डगलस मेमोरियल हाई स्कूल, द्वितीय स्थान सोहनलाल देवरालिया, तृतीय स्थान विद्या विकास डे स्कूल, चतुर्थ रूबी शर्मा एवं दल को मिला। आशु भाषण वर्ग अ का शिखर सम्मान शिखा झा,सोहनलाल देवरालिया, प्रथम स्थान संयुक्त रूप से इंदु तारा माली एवं आशुतोष रावत, द्वितीय स्थान प्रेरणा प्रसाद, तृतीय स्थान सौरभ कुमार मिश्रा, आरपी हाई स्कूल, चतुर्थ स्थान जय प्रकाश यादव को मिला। आशु भाषण क का शिखर सम्मान नूपुर श्रीवास्तव, पांडुआ कॉलेज, प्रथम स्थान श्वेता त्रिपाठी, प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय, द्वितीय स्थान, पूजा बोथरा, श्रीशिक्षायातन कॉलेज, एवं अदिति दूबे, हावड़ा नवज्योति, तृतीय संचिता पांडेय, सुरेंद्रनाथ कॉलेज, विशेष प्रिंस राज, ओम कुमार चौरसिया, रूपेश यादव को मिला।
वाद-विवाद प्रतियोगिता वर्ग क का शिखर सम्मान मनीष गुप्ता, प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय,प्रथम स्थान रूपेश कुमार यादव, विद्यासागर विश्वविद्यालय, द्वितीय नूपुर श्रीवास्तव एवं प्रदीप कुमार प्रसाद, तृतीय स्थान संचिता पांडेय, स्वाति प्रजापति एवं स्वेता त्रिपाठी को मिला। वाद-विवाद अ वर्ग का शिखर सम्मान आशुतोष कुमार रावत, लाजपत हाई स्कूल, प्रथम जयप्रकाश यादव, सेंट ल्यूक्स डे स्कूल, द्वितीय प्रेरणा प्रसाद, सोहनलाल देवरालिया, तृतीय स्थान अंकित कुमार, आदर्श हिंदी स्कूल को मिला।

कविताओं और गजलों ने समां बांधा हिंदी मेला में
28 दिसम्बर – हिन्दी मेले के तीसरे दिन काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता आयोजित की गयी तथा प्रख्यात गजल गायक हरिओम की प्रस्तुति हुई। हिन्दी मेला के तीसरे दिन काफी संख्या में युवाओं ने निराला, दिनकर, अज्ञेय, सर्वेश्वर, केदारनाथ सिंह आदि की कविताएं सुनाई। लखनऊ से आए प्रसिद्ध गजल गायक डॉ. हरिओम तथा उनके संगीतकारों का कोलकाता के नागरिकों की ओर से कवि व भोजपुरी कथाकार मृत्यंजय कुमार सिंह ने सम्मानित किया। डॉ. हरिओम ने गालिब, फैज अहमद फैज, सुल्तानपुरी तथा अपनी लिखी गजलों के गायन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. हरिओम लखनऊ की उच्च प्रशासनिक सेवा में हैं। उनकी यह पंक्ति ‘मैं सिकंदर हूं पर हारा हुआ हूं, फिर भी मैं नई दुनिया का हरकारा हुआ हूं’, काफी सराही गई। इसके अलावा ‘ये मेल हमारा झूठ न सच क्यों रार करो, क्यों दोष धरों किस कारण झूठी बात करौ’ इन पंक्तियों पर भी श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई। आगरा से आए प्रो. प्रेमशंकर ने कहा कि हिन्दी मेला जैसे सांस्कृतिक आयोजन युवकों को नई प्रेरणा देते हैं। यूको बैंक के महाप्रबंधक नरेश कुमार ने कहा कि हिन्दी मेला जैसे आयोजनों को अधिक से अधिक प्रोत्साहन देने की जरूरत है। उन्होंने मेला के प्रतिभागी युवाओं को बधाई दी। वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी अमल दास ने इसे हिन्दी के विकास के लिए जरुरी अभियान बताया। डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने कहा कि हिन्दी मेला का यह आयोजन हमें सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध करता है। इस अवसर पर विशिष्ट समाज सेवी प्रियांगु पांडेय ने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि हिन्दी मेला का यह आयोजन एक साहित्यिक और सांस्कृतिक आंदोलन है।

प्रो. रेखा सिंह ने कहा कि हिन्दी मेला हमारे भीतर पर्यावरण को बचाने का संस्कार निर्मित कर रहा है। कवि राज्यवर्द्धन ने कहा कि 25 वर्षों से हिन्दी मेला उदारीकरण और वैश्विककरण के बरक्स एक सृजनात्मक प्रतिरोध निर्मित कर रहा है। प्रो. शुभ्रा उपाध्याय ने कहा कि हिंदी मेला का यह मंच विद्यार्थियों के लिए एक सृजनात्मक प्रयोगशाला है। प्रो. अल्पना नायक ने कहा कि हिन्दी मेला ने उपनगरीय शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं के लिए आत्मविश्वास दिया है। पत्रकार जितेंद्र जितांशु ने कहा कि हिन्दी मेला ने तीन पीढ़ियों को मंच प्रदान किया है।
कविता आवृत्ति प्रतियोगिता वर्ग शिशु का शिखर सम्मान अनुप्रिया सिंह, द हेरिटेज, प्रथम स्थान वत्सल पांडेय, डॉन बास्को(लिलुआ), द्वितीय स्थान संचिता डोमनिया, लक्ष्मीपत सिंघानिया, तृतीय स्थान पर रिद्धिमा सिंह, हरियाणा विद्या, विशेष अरमान आनंद, आर.पी. मेमोरियल, श्री राव,सेंट ल्यूक्स डे स्कूल, अंकिता पंडित, विद्या विकास हाई स्कूल, अलीना परवीन, टर्निंग प्वाइंट स्कूल, निर्मल दास, विद्या विकास हाई स्कूल, संजना गौड़, नैहाटी म्युनिसिपल प्री प्राईमरी स्कूल, वैष्णवी महतो, विद्या विकास स्कूल को मिला। वर्ग अ का शिखर सम्मान रौनक पांडेय, प्रथम स्थान धीरज चौधरी, द्वितीय स्थान लावण्या साव, तृतीय स्थान पूर्वी भंडारी, नलिनी साहा, संजना जायसवाल, अलफिया खुर्शीद, अदिति ए संजय, विकास कुमार ठाकुर, राहुल कुमार गुप्ता, अनन्या मिश्रा, आंचल साव, अश्विका सिंह, कोमल कुमारी को मिला। गत 27 दिसम्बर को दूसरे दिन चित्रांकन व कविता पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गयी।

उद्धघाटन तथा लघु नाटक प्रतियोगिता – हिन्दी मेला के रजत जयंती आयोजन की शुरुआत फेडरेशन हॉल से निकली प्रभातफेरी से हुई। 25 साल पूरे होने पर विश्वविद्यालयों- कॉलेजों के युवाओं में विशेष रूप से उत्साह था। वे हिंदी नाट्य मेले में भाग लेने आए थे। प्रभात फेरी में सैकड़ों नौजवानों के अलावा लेखक, शिक्षक और बुद्धिजीवी हाथ में तख्ती लेकर खड़े थे – ‘हम देश की एकता और अखंडता से प्रतिबद्ध हैं’, ‘डर के विरुद्ध शब्द की दहाड़’, ‘यौन अत्याचार बंद करो’, हिंदी मेला का सुपरिचित नारा मुखर था – ‘पढ़ना लड़ना है’।
हिन्दी मेला का उद्घाटन करते हुए प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ विजय बहादुर सिंह ने कहा कि, ‘हिंदी मेला के 25 सालों का सफर पूरे भारत के लिए संदेश है कि हर शहर में हिंदी मेला हो। दिल्ली में भी रोज ड्रामा हो रहा है लेकिन आज का नाट्य मेला सामाजिक यथार्थ की अभिव्यक्ति है।‘हिंदी मेला के उद्घाटन सत्र और नाट्य मेला का संचालन अनिता राय ने किया। उनके सहयोगी आरंभ में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त सचिव प्रोफेसर संजय जयसवाल ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि हिंदी मेला युवाओं का, युवाओं के द्वारा और युवाओं के लिए है। प्रोफेसर राजेश मिश्र ने हिंदी मेला कि 25 सालों की यात्रा को कोलकाता में हिंदी की ऐतिहासिक यात्रा से जोड़ा। इस अवसर पर प्रसिद्ध रंगकर्मी सुशील कांति को ‘माधव शुक्ल नाट्य सम्मान’ प्रदान किया गया।
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉक्टर शंभुनाथ ने कहा कि, हिंदी मेला युवाओं का सांस्कृतिक जनतंत्र है जिसके आधार हैं बंधुत्व, बौद्धिक स्वतंत्रता और कलात्मक सृजन की भावना। सृनात्मकता हर युग में कट्टरवाद की चुनौती बनी है। उन्होंने कहा कि आज राजनीति और सोशल मीडिया को झूठ का लाउड स्पीकर बना दिया गया है। ऐसे समय में युवाओं को प्रह्लाद की कथा से सीखना है कि हमें सत्य पर दृढ रहना चाहिए। हमें एक भेदभाव और भयमुक्त समाज बनाना है।बतौर निर्णायक उपस्थित थे महेश जायसवाल, जितेंद्र सिंह एवं अर्धेन्दु चक्रवर्ती ।जूही कर्ण, पूजा गुप्ता, दिव्या प्रसाद, सुशील पांडे,पूजा सिंह, रतन राजभर, विनोद कुमार यादव (मास्टर जी) और धनंजय प्रसाद की प्रमुख भूमिका रही। रामनिवास द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि हिंदी मेला सांस्कृतिक पुनर्निर्माण का संकल्प हैं।
जायसवाल विद्या मंदिर में पुस्तक दिवस
कोलकाता : गत 2 जनवरी को पुस्तक दिवस के अवसर पर जायसवाल विद्या मंदिर के सांस्कृतिक कक्ष में पुस्तक वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया।उक्त कार्यक्रम में विद्यालय के विद्यर्थियों को पुस्तकें वितरण की गई।उक्त कार्यक्रम में विद्यालय के प्रेसिडेंट श्री राजकुमार जायसवाल ने बच्चों को नए वर्ष की शुभकामनाएं दी। विद्यालय के प्रधानाचार्य महेंद्र प्रसाद ने पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डाला।विद्यालय के अन्य शिक्षक और शिक्षिकाओं पुण्यज्योति बरुवा,रवि कुमार, रंजुलता और संगीता मंडल ने विद्यर्थियों को मुख्यमंत्री द्वारा प्रदत्त शुभेच्छा पत्र प्रदान किये। कार्यक्रम का संचालन चिन्मय कुमार विश्वास और धन्यवाद ज्ञापन चंदन मुखोपाध्याय ने किया।
इंदौर लगातार चौथी बार सबसे स्वच्छ शहर
नयी दिल्ली : केंद्र सरकार के स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर को लगातार चौथी बार भारत का सबसे स्वच्छ शहर चुना गया। सर्वेक्षण के नतीजे हाल ही में घोषित किए गए। पहली तिमाही (अप्रैल से जून) के नतीजों में भोपाल दूसरे स्थान पर रहा जबकि दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के नतीजों में राजकोट ने दूसरा स्थान हासिल किया। पहली तिमाही में सूरत को और दूसरी तिमाही में नवी मुंबई को तीसरा स्थान मिला।




