Saturday, April 25, 2026
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बिहार की स्वीटी कुमारी को इंटरनेशनल यंग प्लेयर ऑफ द ईयर का अवॉर्ड

पटना : नवादा जिले के बाढ़ की रहने वाली 19 साल की स्वीटी कुमारी ने गरीबी के बावजूद रग्बी खेल कर दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्हें महिला रग्बी की आधिकारिक वेबसाइट स्क्रमक्वींस ‘इंटरनेशनल यंग प्लेयर ऑफ द इयर’ का अवॉर्ड दिया है। स्वीटी के पिता मजदूर हैं और मां आंगनबाड़ी में काम करती हैं। स्वीटी यह अवार्ड पाने वाली देश की पहली महिला रग्बी खिलाड़ी हैं।
दुनिया भर से इस अवॉर्ड के लिए 10 लोगों को नॉमिनेट किया गया था। इसके बाद पब्लिक पोल के आधार पर स्वीटी का नाम चुना गया। इससे पहले उन्हें महाद्वीप की सबसे तेज खिलाड़ी भी घोषित किया जा चुका है।
2019 में स्वीटी ने किया शानदार प्रदर्शन
2019 में स्वीटी का प्रदर्शन काफी शानदार रहा। भारत ने जिन सात टूर्नामेंट में हिस्सा लिया उनमें स्वीटी सबसे अधिक स्कोर करने में सफल रही। स्वीटी ने सिंगापुर के खिलाफ टेस्ट मैच में दो टाई से स्कोर कर भारत को जीत दिलाई। फिलिपिंस के खिलाफ मैच में भी उन्हाेंने बेहतर प्रदर्शन किया। स्वीटी को अमेरिकन रग्बी कोच माइक फ्राइडे भी खेल का गुर सिखा चुके हैं।
सरकारी स्कूल से एथलीट के तौर पर शुरुआत की थी
स्वीटी ने सरकारी स्कूल से ही एथलेटिक्स के तौर पर शुरुआत की थी और बाद में रग्बी खेलना शुरू किया। उन्होंने अपने स्कूल में 100 मीटर 11.58 सेकंड में पूरा की थी इसके बाद अपनी तेज गति का इस्तेमाल रग्बी खेलने के लिए शुरू किया। स्वीटी के भाई ने भी एथलीट को अपनाया था, लेकिन अधिक मेहनत होने और गरीबी के कारण उसे यह छोड़ना पड़ा।

देश की पहली लोकसभा के सांसद रहे डुमरांव महाराजा कमल बहादुर सिंह का निधन

बक्सर : देश की पहली लोकसभा (1952) के सांसद रहे डुमरांव महाराजा कमल बहादुर सिंह का ह्रदय गति रुकने से निधन हो गया। वे 93 साल के थे। पहली लोकसभा के एकमात्र जीवित सांसद और आजाद भारत के अंतिम राजा रहे कमल सिंह ने रविवार सुबह अंतिम सांस ली। मुगल वंश के दूसरे शासक जहांगीर ने कमल सिंह को महाराज बहादुर की उपाधि दी थी। ग्वालियर के महाराज माधव राव सिंधिया और जयपुर के राजा कर्ण सिंह से इनकी रिश्तेदारी थी। महाराजा होने के बावजूद आम लोगों की तरह सादगी से रहना और लोगों से मिलना-जुलना कमल सिंह की पहचान थी। कमल सिंह ने स्कूल, कॉलेज और अस्पताल के लिए कई एकड़ जमीन दान में दी। इस पर बना महाराजा कॉलेज, जैन कॉलेज और बिहार का इकलौता प्रताप सागर टीबी अस्पताल बना है। भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां कमल सिंह के दरबारी वादक थे। राजगढ़ स्थित कमल सिंह के बांके बिहारी मंदिर में बिस्मिल्लाह खां शहनाई बजाया करते थे।
कमल सिंह का राजनीतिक करियर-
1952 में आजाद भारत में हुए पहले आम चुनाव में कमल सिंह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी बक्सर (तब शाहाबाद नॉर्थ वेस्ट) सीट से मैदान में उतरे और कांग्रेस की कलावती को हराकर पहली बार संसद पहुंचे थे। 1957 में हुए दूसरे लोकसभा चुनाव में भी कमल सिंह को जीत मिली। उन्होंने कांग्रेस के हरगोविंद मिश्रा को हराया था। 1962 में हुए आम चुनाव में वे कांग्रेस के अनंत प्रसाद शर्मा से चुनाव हार गए। पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कहने पर अटल बिहारी वाजपेयी, कमल सिंह को लेकर भाजपा में आए। वीपी सिंह कमल बहादुर सिंह के समधी थे। 1989 में हुए आम चुनाव में भाजपा ने उन्हें बक्सर से टिकट दिया लेकिन वे सीपीआई के तेज नारायण सिंह से चुनाव हार गए। 1991 में दोबारा चुनाव हारने के बाद कमल सिंह ने राजनीति से संन्यास ले लिया।

भारतीय महिला हाकी टीम की डिफेंडर सुनीता ने चोट के कारण संन्यास लिया

नयी दिल्ली : भारतीय महिला हाकी टीम की डिफेंडर सुनीता लकड़ा ने को घुटने की चोट के कारण अंतरराष्ट्रीय हाकी से संन्यास की घोषणा की। वह 2018 के एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थीं। उन्होंने कहा कि उन्हें चोट के कारण दोबारा घुटने की सर्जरी करानी पड़ेगी। इस तरह 28 साल की खिलाड़ी का तोक्यो ओलंपिक के लिये भारतीय टीम में जगह बनाने का सपना टूट गया।
हाकी इंडिया द्वारा जारी बयान के अनुसार उन्होंने कहा, ‘‘आज मेरे लिये बहुत भावुक दिन है क्योंकि मैंने अंतरराष्ट्रीय हाकी से संन्यास लेने का फैसला किया है। ’’
सुनीता ने 2008 से टीम से जुड़ने के बाद 2018 की एशियाई चैम्पियंस ट्राफी के दौरान भारत की कप्तानी की जिसमें टीम दूसरे स्थान पर रही थी। उन्होंने भारत के लिये 139 मैच खेले और वह 2014 के एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता टीम का भी हिस्सा रहीं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं भाग्यशाली रही कि 2016 में रियो ओलंपिक में खेल सकी जिसमें तीन दशक में पहली बार भारतीय महिला टीम ने शिरकत की। लेकिन घुटने की चोटों ने तोक्यो ओलंपिक के लिये भारतीय टीम का हिस्सा बनने का मेरा सपना तोड़ दिया। ’’ सुनीता ने कहा, ‘‘डाक्टरों ने मुझे कहा कि मुझे इसके लिये आगामी दिनों में एक और सर्जरी करानी होगी। मुझे नहीं पता कि पूरी तरह उबरने में कितना समय लगेगा। ’’ उन्होंने कहा कि सर्जरी से उबरने के बाद वह घरेलू हाकी में खेलना जारी रखेंगी। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे उपचार के बाद मैं घरेलू हाकी खेलूंगी। नाल्को के लिये खेलूंगी जिन्होंने नौकरी देकर मेरे कॅरियर में बहुत मदद की। ’’ सुनीता ने परिवार के साथ टीम के साथियों, हाकी इंडिया और मुख्य कोच सोर्ड मारिने का शुक्रिया अदा किया।

ट्रेन के कड़वे अनुभव ने मुझे भ्रमित वामपंथी से दयालु पूंजीवादी बनाया : नारायण मूर्ति

मुम्बई : देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति ने आईआईटी मुंबई के टेक फेस्ट में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि 1974 में सर्बिया और बुल्गारिया के सीमावर्ती शहर निस में ट्रेन यात्रा के दौरान एक कड़वे अनुभव ने उन्हें “दयालु पूंजीवादी’ में बदल दिया। जिसके बाद उन्होंने इंफोसिस को बनाया।
घटना को याद करते हुए मूर्ति ने बताया, “मैं ट्रेन में एक लड़की से बातचीत कर रहा था, जो केवल फ्रेंच समझ सकती थी। हम बुल्गारिया में जीवन के बारे में बात कर रहे थे। उस बीच लड़की के साथी लड़के को किसी वजह से परेशानी हुई और वह उठा और पुलिस लेकर आ गया। इसके बाद बुल्गारियाई गार्ड ने मेरा पासपोर्ट, लगेज सब जब्त कर लिया और मुझे घसीटकर ले गए। मुझे एक छोटे से कमरे में बंद कर दिया गया।”
तय किया था कम्युनिस्ट देश का हिस्सा नहीं बनना चाहूंगा
मूर्ति ने बताया कि अगले दिन पुलिस उन्हें प्लेटफार्म पर ले गई और एक मालगाड़ी के गार्ड के डिब्बे में धक्का देकर बैठा दिया। मूर्ति ने बताया कि पुलिस के जवान ने उनसे कहा कि तुम मित्र देश से हो, इसलिए हम तुम्हें जाने दे रहे हैं। इस्तांबुल पहुंचने पर तुम्हारा पासपोर्ट तुम्हें दे देंगे। इस दौरान पांच दिन तक मूर्ति के पास खाने-पीने के लिए कुछ भी नहीं था।
मूर्ति ने बताया कि तभी उन्होंने सोचा कि अगर कोई देश दोस्त के साथ ऐसा बर्ताव करता है, तो मैं कभी भी एक कम्युनिस्ट देश का हिस्सा नहीं बनना चाहूंगा। मूर्ति ने कहा कि इस घटना ने मुझे भ्रमित वामपंथी की जगह “दयालु पूंजीपति’ बना दिया। मैंने तभी अपना कारोबार करने के बारे में निश्चय कर लिया था।

गोल्डन ग्लोब 2020 : ‘1917’ को बेस्ट मोशन पिक्चर अवॉर्ड

जोकिन फीनिक्स बने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता मेल और रिनी जेलवेगर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री 
गोल्डन ग्लोब 2020 का समापन हो चुका है। पुरस्कार समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा बेस्ट फिल्म ‘1917’ की रही। फिल्म ने बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट मोशन पिक्चर के तौर पर दो बड़े अवॉर्ड अपने नाम किए। वहीं, बेस्ट एक्टर बने जोकिन फीनिक्स को उनके किरदार के लिए पहले ही क्रिटिक्स और दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया है। क्रिटिक्स अनुमान लगा रहे हैं कि वो ‘जोकर’ के लिए ऑस्कर भी जीत सकते हैं। अंग्रेजी वेबसाइट हॉलीवुड रिपोर्टर के अनुसार ‘जोकर’ ने दो अवॉर्ड जीतकर गोल्डन ग्लोब में इतिहास रच दिया है। पहली बार किसी कॉमिक बुक फिल्म ने दो अवॉर्ड जीते हैं। अमेरिकन सिंगर और एक्ट्रेस जूडी गारलैंड के जीवन का किरदार निभाने वालीं रिनी जेलवेगर को बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला। गौरतलब है कि जूडी गारलैंड को 1940-50 के समय का सबसे चार्मिंग सेलेब कहा जाता है। ‘रॉकेटमैन’ के ‘आई एम गॉना लव मी अगेन’ को बेस्ट ऑरिजिनल सॉन्ग का पुरस्कार मिला। ‘फ्रोजन 2’ और ‘द लॉयन किंग’ जैसी बड़ी फिल्मों को पछाड़कर इस साल बेस्ट एनिमेटेड मोशन पिक्चर का अवॉर्ड ‘मिसिंग लिंक’ ने जीता। ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन हॉलीवुड’ में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का खिताब ब्रैड पिट को मिला। उन्होंने टॉम हैंक्स, अल पचीनो और जो पेस्की जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ दिया। वहीं, फिल्म के डायरेक्टर क्वेंटिन टैरेंटीनो को बेस्ट स्क्रीनप्ले का अवॉर्ड भी मिला।
म्यूजिकल-कॉमेडी कैटेगिरी में इस बार क्वैंटिन टैरेंटीनो की ‘वन्स अपॉन ए टाइम’ को बेस्ट मूवी चुना गया है। म्यूजिक-कॉमेडी कैटेगरी में ‘रॉकेटमैन’ के लिए टैरॉन ईगर्टन को बेस्ट एक्टर (मेल) का पुरस्कार दिया गया। वहीं, इसी कैटेगरी में ऑक्वाफीना ‘फेयरवेल’ के लिए बेस्ट एक्टर (फीमेल) चुनी गईं। टेलीविजन सीरीज की म्यूजिकल और कॉमेडी कैटेगरी में फोब वॉलर ब्रिज ने बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड जीता। फोब को यह अवॉर्ड ‘फ्लीबैग’ के लिए मिला।

अप्रैल से ज्यादा नियमित चलेंगी दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-मुम्बई रूट की 1800 से ज्यादा रेलगाड़ियां

नयी दिल्ली : दिल्ली-हावड़ा और दिल्ली-मुंबई के बीच 1800 ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों को अप्रैल से राहत मिलनी शुरू हो जाएगी। दरअसल, अप्रैल से डेडीकेटेड फ्रैट कॉरिडोर (मालगाड़ियों का अलग ट्रैक) शुरू होने के बाद मालगाड़ियां मौजूदा लाइन से शिफ्ट हो जाएंगी और ट्रैक सवारी गाड़ियों के लिए खाली हो जाएगा। वहीं, मालगाड़ियां डेडीकेटेड फ्रैट कॉरिडोर (डीएफसी) में चलेंगी। इससे ट्रेनों की औसत गति बढ़ने के साथ-साथ उनका पासिंग के लिए रुकना भी कम हो जाएगा और ट्रेनें 75% से 90% तक नियमित से चलेंगी। ईस्टर्न (दिल्ली-हावड़ा) और वेस्टर्न (दिल्ली-मुंबई) डीएफसी में मार्च से कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। यानी ईस्टर्न में खुर्जा से लेकर भदान तक और वेस्टर्न में रेवाड़ी से लेकर पालनपुर तक मालगाड़ियां चलने लगेंगी। इसके शुरू होने के बाद करीब एक हजार किमी मौजूदा ट्रैक से लगभग 400 मालगाड़ियां शिफ्ट हो जाएंगी। हालांकि, इन्हें एक-एक कर शिफ्ट किया जाएगा।

120 भाषाओं में गाने वाली सुचेता ने ‘जीता ग्लोबल चाइल्ड प्रोडिजी अवॉर्ड’ 

दुबई : 120 भाषाओं में गाना गाने वाली 14 वर्षीय सुचेता सतीश ने शुक्रवार को ‘ग्लोबल चाइल्ड प्रोडिजी अवॉर्ड 2020′ जीत लिया है। भारतीय मूल की सुचेता दुबई में रहती हैं। पिता टीसी सतीश ने बताया कि उनकी बेटी को दुबई इंडियन हाईस्कूल की कोकिला के रूप में जाना जाता है।
क्या है ग्लोबल चाइल्ड प्रोडिजी अवॉर्ड
यह अवॉर्ड नृत्य, संगीत, कला, लेखन, अभिनय, मॉडलिंग, विज्ञान, खेल आदि में बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने का एक मंच है। यह पुरस्कार डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम इंटरनेशनल फाउंडेशन और ऑस्कर पुरस्कार विजेता संगीत निर्माता एआर रहमान द्वारा समर्थित है।
बना चुकी है वर्ल्ड रिकॉर्ड
सुचेता वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुकी हैं। उन्होंने बताया, मुझे मेरे दो कीर्तिमानों के लिए पुरस्कार दिया गया। एक में मैंने एक कॉन्सर्ट में सर्वाधिक भाषाओं में गाने का कीर्तिमान बनाया और दूसरा रिकॉर्ड सबसे लंबे समय तक सीधे प्रसारण में गाने का था। मैंने ये कीर्तिमान बारह साल की उम्र में दुबई में भारतीय वाणिज्य दूतावास के सभागार में बनाए थे जब मैंने 102 भाषाओं में छह घंटे से अधिक समय तक गाया था।
अरबी भाषा में रिलीज किया दूसरा अल्बम ‘या हबीबी’
वर्तमान में सुचेता 12 भाषाओं में गा रही हैं और हाल ही में अरबी भाषा में अपना दूसरा एल्बम ‘या हबीबी’ रिलीज किया है। सिंगिंग के साथ पढ़ाई जारी रखने के बारे पूछे गए सवाल पर सुचेता ने कहा कि मैंने रोजाना रियाज करने का नियम बनाया है और भगवान की कृपा से बिना पढ़ाई को प्रभावित किए मैं ऐसा कर पाती हूं।

वैज्ञानिकों को इंडोनेशिया के जंगल में मिला दुनिया का सबसे बड़ा खिला फूल

सुमात्रा  : इंडोनेशिया के पश्चिम मध्य सुमात्रा के जंगलों में दुनिया का सबसे बड़ा खिला फूल मिला है। वन्य जीव अधिकारियों के मुताबिक, इसका नाम है रेफलिसिया। यह 4 वर्ग फीट में फैला है और अब तक दर्ज रिकॉर्डेड रेफलिसिया फूलों में सबसे बड़ा है। इससे पहले 2017 में 3 फीट चौड़ा और 12 बारह किलो के फूल को देखा गया था। यह फूल केसिरया आसमानी और सफेद रंग का होता है। नर और मादा फूलों की संरचना एक जैसी होती है। यह एक परजीवी पौधा है। इससे बहुत दुर्गंध आती है। यह फूल पांच भागों में बंटा होता है। दल चक्र के बीच में प्यालीनुमा पुष्पनाल होती है, जो आधार पर अंडाशय से जुड़ी होती है। प्यालीनुमा पुष्पनाल में मौजूद गंध कीट पतंगे को आकर्षित करती है, कीट जैसे ही फूल के संपर्क में आते हैं, गिर कर मर जाते हैं। इसी से वे इसे पॉलीनेट करने में कामयाब हो जाते हैं। इस फूल को स्थानीय लोग ‘लाशों का फूल’ भी कहते हैं। 65 दिन के बाद जब फूल खत्म होता है, तब काला पड़ जाता है।
फूल खत्म होने के पहले सड़ने लगता है
इसके पौधे में कोई पत्ती और जड़ नहीं होती है। अपना पोषण दूसरे पौधों से प्राप्त करता है। यह फूल साल के कुछ महीने में ही खिलता है। फूल अक्तूबर में खिलना शुरू होते हैं और मार्च तक खिलते रहते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इसकी उम्र 65 दिन होती है। खत्म होने के एक हफ्ते पहले से इसमें से बदबू आना शुरू हो जाती है। बाद में यह काला पड़ खत्म हो जाता है।

दिल्ली में बन रहा भारत दर्शन पार्क,

कबाड़ से कुतुब मीनार और अजंता-एलोरा की गुफाएं बनेंगी यहाँ 
नयी दिल्ली : वेस्ट टू वंडर पार्क की सफलता के बाद साउथ एमसीडी (दक्षिण दिल्ली नगर निगम) ने भारत दर्शन पार्क बनाने की भी शुरुआत शुक्रवार से कर दी है। स्मारकों का निर्माण साउथ एमसीडी के स्टोर में पड़े कबाड़ से होगा। इसमें कार और बाइक के टायर, नट बोल्ट एवं अन्य सामान के अलावा पुराने पंखे आदि का इस्तेमाल किया जाएगा।
प्रोजेक्ट से जुड़े साउथ एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 17 आकृतियां अभी तक तय कर ली गई हैं। अभी और आकृतियां भी बन सकती हैं। इसमें करीब 350 टन कबाड़ के इस्तेमाल अनुमान है। पार्क तैयार होने में 9-10 महीने का वक्त लगने का अनुमान है।
20 करोड़ रुपये खर्च होंगे
साल के अंत तक पार्क शुरू होने की उम्मीद है। आकृतियां वेस्ट टू वंडर पार्क की आकृतियां बनाने वाली कंपनी या वी डू के कलाकार ही बनाएंगे। इसका टेंडर हो चुका है। पार्क के निर्माण में करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। भारत दर्शन पार्क पंजाबी बाग में 6 एकड़ जमीन पर बनेगा। इसमें खूबसूरत आकृतियों के अलावा लोगों के लिए खान-पान का भी इंतजाम होगा।
ये स्मारक भी शामिल होंगे
कुतुब मीनार, ताजमहल, चार मीनार, गेटवे ऑफ इंडिया, कोणार्क मंदिर, नालंदा स्मारक, मैसूर पैलेस, स्वर्ण मंदिर, मीनाक्षी मंदिर, हंपी, विक्टोरिया मेमोरियल, सांची स्तूप, गोल गुम्बद, अजंता-एलोरा की गुफाएं, जूनागढ़ का किला आदि। यहां बच्चों के लिए खेलने का विशेष स्थान भी होगा, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए एंफीथियेटर, फूड कोर्ट, ऑडियो टूर, फोटोग्राफी व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए स्टॉल, झरने व छोटे तलाब भी।

दिव्यांग बाल वैज्ञानिक ने मल्टीप्लेयर सरक्यूलर चेस बनाया, इसे 60 लोग 100 तरीके से तरह से खेल सकतें हैं

हृदयेश्वर सिंह ने 9 साल की उम्र में जापान के52 तरीके से खेलने वाला शतरंज का रिकॉर्ड तोड़ा था।
जयपुर : जयपुर के हृदयेश्वर सिंह भाटी (17) को 22 जनवरी को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल शक्ति पुरस्कार दिया जाएगा। हृदयेश्वर का 85% शरीर ड्यूशिन सिंड्रोम के कारण दिव्यांग है। उनकी उंगलियां कांपती हैं। लेकिन दिमाग वैज्ञानिक का है। लोग उन्हें छोटा स्टीफन हाकिंग्स और प्यार से हार्डी भी कहते हैं। हार्डी ने 9 साल की उम्र में गोलाकार शतरंज तैयार किया था। इसे मल्टीप्लेयर सरक्यूलर चेस कहा जाता है। इसे तीन आकारों में बनाया गया। पहले को 6, दूसरे को 12 और तीसरे को 60 लोग एक साथ खेल सकते हैं। पहले शतरंज को 11, दूसरे को 27 और तीसरे को 62 तरीके से खेला जा सकता है। इस तरह कुल 100 तरीके से खेला जा सकता है। जापान ने 52 तरीके से खेलने वाला शतरंज बनाया है। हार्डी ने उसका रिकॉर्ड तोड़ा।
ऐसे मिली प्रेरणा
8 साल की उम्र में हार्डी पिता के साथ शतरंज खेल रहे थे। तभी कुछ दोस्त घर आए। दोस्तों ने भी शतरंज खेलने की इच्छा जाहिर की। पिता ने कहा कि शतरंज तो दो खिलाड़ियों के लिए ही बना है। तब हार्डी ने ऐसा शतरंज बनाने का निश्चय किया, जिसे दो से ज्यादा लोग खेल सकें। उन्होंने छह महीने तक रिसर्च की और काम में जुट गए। हार्डी कहते हैं- सबसे बड़ी विकलांगता हौसलों की कमी है, जो चल नहीं सकता, वह हौसलों के दम पर उड़ सकता है।
7 पेटेंट हासिल; स्कूल छूटा, इंटरनेट के जरिए पढ़ाई करते हैं
सरकार ने हार्डी को मोस्ट आउटस्टैंडिंग क्रिएटिव इंवेंटर टीन अवार्ड से नवाजा है। उनके पास 7 पेटेंट हैं। इनमें खुद का बनाया शतरंज भी शमिल है। हार्डी स्कूल नहीं जा पाते, लेकिन घर से ही पूरी दुनिया को यूनिवर्सिटी बनाकर तालीम लेते हैं। वह हर दिन 10 घंटे इंटरनेट और टीवी के जरिए देश-दुनिया की जानकारी लेते हैं। उन्हें भारतीय, पश्चिमी संगीत पसंद है। हार्डी की माता डॉ. मीनाक्षी कंवर स्कूल में अंग्रेजी की शिक्षिका हैं। पिता सरोवर सिंह भाटी गणित में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)