कोलकाता : एडमास यूनिवर्सिटी का दीक्षान्त समारोह गत 22 जनवरी को आयोजित किया गया। दीक्षान्त समारोह में 243 स्नातकों और 63 स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को डिग्रियाँ प्रदान की गयीं। इसके अतिरिक्त स्कूल ऑफ फर्मास्यूटिकल टेक्नोलॉजी के 50 विद्यार्थियों ने डिप्लोमा प्राप्त किया। टेक्नोक्रैट तथा रुमा आचार्य को डी.एससी की उपाधि दी गयी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उद्यमी औऱ एचसीएल समूह के सह संस्थापक तथा इवॉल्को इंक, सान्ता क्लारा, अमेरिका के चेयरमैन अर्जुन मल्होत्रा उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि जब भी हम कोई काम करें, हमारे पास उसे करने का एक अलग तरीका होना चाहिए। किसी और की तरह बनने की कोशिश न करें। हर व्यक्ति खास होता है और आप (विद्यार्थी) भी खास हैं। प्रधान अतिथि के रूप में मस्कट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में मेकेनिकल इंजीनियरिंग के वॉरेन एंड टाउनले रोशेनाउ प्रोफेसर ललित आनन्द मौजूद रहे। दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित करते हुए एडमास यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर मधुसूदन चक्रवर्ती विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी दी। इस समय विश्वविद्यालय में 3237 विद्यार्थी और 118 शोधार्थी हैं। एडमास यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. समित राय ने कहा कि विद्यार्थियों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर विश्वविद्यालय विशेष रूप से स्नातकोत्तर स्तर कई और पाठ्यक्रम लाने पर विचार कर रहा है।
शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान : आवृत्ति
कविता – कारवां गुजर गया
आवृत्ति – दीपा ओझा
कवि – गोपाल दास नीरज
विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं 80 प्रतिशत भारतीय
6 करोड़ लोग करते हैं ध्रूमपान, 3 करोड़ छोड़ना चाहते हैं
पूर्वी भारत में स्ट्राइड्स ने उतारा एनआरटी गम निक्जिट तथा ज्वाएंट फ्लेक्स
कोलकाता : भारत के 80 प्रतिशत लोग विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। 180 मिलियन आर्थेपेडिक मरीज हैं। इसके अतिरिक्त 6 करोड़ लोग ध्रूमपान करते हैं औऱ इनमें से अधिकतर लोग इसे छोड़ना चाहते हैं। बंगलुरू की कन्ज्यूमर हेल्थ केयर कम्पनी स्ट्राइड्स कन्ज्यूमर द्वारा करवाये गये सर्वेक्षण में यह बात सामने आयी है। सर्वेक्षण के मुताबिक 3 करोड़ लोग ध्रूमपान छोड़ना चाहते हैं मगर उनको इसे छोड़ने का तरीका नहीं मालूम। निकोटिन थेरेपी का इस्तेमाल भी महज 10 प्रतिशत लोग ही करते हैं। ने अब पूर्वी भारत में कदम रख दिया है। कम्पनी ने जोड़ों के दर्द के लिए ज्वाइंट फ्लेक्स और ध्रूमपान छुड़ाने वाला गम निक्जिट बाजार में उतारा है। स्ट्राइड्स कन्ज्यूमर प्राइवेट लिमिटेड के बिजनेस हेड (भारत तथा दक्षिण एशिया) हिमाव नाथ ने बताया कि ज्वाएंट फ्लेक्स अमेरिका में 20 साल से एक लोकप्रिय ब्रांड है और भारतीय बाजार को देखते हुए इसे आर्युवेदिक फॉर्मूले के साथ पेश किया गया है। कम्पनी का कहना है कि भारत में उपलब्ध अधिकतर एनाल्जेसिक उत्पाद सिर्फ मांसपेशियों के दर्द का उपचार करते हैं जबकि यह औषधि विशेष रूप से जोड़ों के दर्द को ध्यान में रखकर तैयार की गयी है। वहीं निक्जिट एनआरटी गम है। एनआरटी गम डब्ल्यूएचओ तथा यूएसएफडीए की अनुशंसा वाली थेरेपी है जो 3 माह में ध्रूमपान छुड़वा सकती है। यह 2 मिगा और 4 मिगा के पैक में उपलब्ध है।
नेताजी का तुलादान

देखा पूरब में आज सुबह,
एक नई रोशनी फूटी थी।
एक नई किरन, ले नया संदेशा,
अग्निबान-सी छूटी थी॥
एक नई हवा ले नया राग,
कुछ गुन-गुन करती आती थी।
आज़ाद परिन्दों की टोली,
एक नई दिशा में जाती थी॥
एक नई कली चटकी इस दिन,
रौनक उपवन में आई थी।
एक नया जोश, एक नई ताज़गी,
हर चेहरे पर छाई थी॥
नेताजी का था जन्मदिवस,
उल्लास न आज समाता था।
सिंगापुर का कोना-कोना,
मस्ती में भीगा जाता था।
हर गली, हाट, चौराहे पर,
जनता ने द्वार सजाए थे।
हर घर में मंगलाचार खुशी के,
बांटे गए बधाए थे॥
पंजाबी वीर रमणियों ने,
बदले सलवार पुराने थे।
थे नए दुपट्टे, नई खुशी में,
गये नये तराने थे॥
वे गोल बांधकर बैठ गईं,
ढोलक-मंजीर बजाती थीं।
हीर-रांझा को छोड़ आज,
वे गीत पठानी गाती थीं।
गुजराती बहनें खड़ी हुईं,
गरबा की नई तैयारी में।
मानो वसन्त ही आया हो,
सिंगापुर की फुलवारी में॥
महाराष्ट्र-नन्दिनी बहनों ने,
इकतारा आज बजाया था।
स्वामी समर्थ के शब्दों को,
गीतों में गति से गाया था॥
वे बंगवासिनी, वीर-बहूटी,
फूली नहीं समाती थीं।
अंचल गर्दन में डाल,
इष्ट के सम्मुख शीश झुकाती थीं-
“प्यारा सुभाष चिरंजीवी हो,
हो जन्मभूमि, जननी स्वतंत्र!
मां कात्यायिनि ऐसा वर दो,
भारत में फैले प्रजातंत्र!!”
हर कण्ठ-कण्ठ से शब्द यही,
सर्वत्र सुनाई देते थे।
सिंगापुर के नर-नारि आज,
उल्लसित दिखाई देते थे॥
उस दिन सुभाष सेनापति ने,
कौमी झण्डा फहराया था।
उस दिन परेड में सेना ने,
फौजी सैल्यूट बजाया था॥
उस दिन सारे सिंगापुर में,
स्वागत की नई तैयारी थी।
था तुलादान नेताजी का,
लोगों में चर्चा भारी थी ॥
उस रोज तिरंगे फूलों की,
एक तुला सामने आई थी॥
उस रोज तुला ने सचमुच ही,
एक ऐसी शक्ति उठाई थी-
जो अतुल, नहीं तुल सकती थी,
दुनिया की किसी तराजू से!
जो ठोस, सिर्फ बस ठोस,
जिसे देखो चाहे जिस बाजू से!!
वह महाशक्ति सीमित होकर,
पलड़े में आन विराजी थी।
दूसरी ओर सोना-चांदी,
रत्नों की लगती बाजी थी॥
उस मन्त्रपूत मुद मंडप में,
सुमधुर शंख-ध्वनि छाई थी।
जब कुन्दन-सी काया सुभाष की,
पलड़े में मुस्काई थी॥
एक वृद्धा का धन सर्वप्रथम,
उस धर्म-तुला पर आया था।
सोने की ईटों में जिसने,
अपना सर्वस्व चढ़ाया था॥
गुजराती मां की पांच ईंट,
मानो पलड़े में आईं थीं।
या पंचयज्ञ से हो प्रसन्न,
कमला ही वहां समाई थीं!!
फिर क्या था, एक-एक करके,
आभूषण उतरे आते थे।
वे आत्मदान के साथ-साथ,
पलड़े पर चढ़ते जाते थे॥
मुंदरी आई, छल्ले आए,
जो पी की प्रेम-निशानी थे।
कंगन आए, बाजू आए,
जो रस की स्वयं कहानी थे॥
आ गया हार, ले जीत स्वयं,
माला ने बन्धन छोड़ा था।
ललनाओं ने परवशता की,
जंजीरों को धर तोड़ा था॥
आ गईं मूर्तियां मन्दिर की,
कुछ फूलदान, टिक्के आए।
तलवारों की मूठें आईं,
कुछ सोने के सिक्के आए॥
कुछ तुलादान के लिए,
युवतियों ने आभूषण छोड़े थे।
जर्जर वृद्धाओं ने भेजे,
अपने सोने के तोड़े थे॥
छोटी-छोटी कन्याओं ने भी,
करणफूल दे डाले थे।
ताबीज गले से उतरे थे,
कानों से उतरे बाले थे॥
प्रति आभूषण के साथ-साथ,
एक नई कहानी आती थी।
रोमांच नया, उदगार नया,
पलड़े में भरती जाती थी॥
नस-नस में हिन्दुस्तानी की,
बलिदान आज बल खाता था।
सोना-चांदी, हीरा-पन्ना,
सब उसको तुच्छ दिखाता था॥
अब चीर गुलामी का कोहरा,
एक नई किरण जो आई थी।
उसने भारत की युग-युग से,
यह सोई जाति जगाई थी॥
लोगों ने अपना धन-सरबस,
पलड़े पर आज चढ़ाया था।
पर वजन अभी पूरा नहीं हुआ,
कांटा न बीच में आया था॥
तो पास खड़ी सुन्दरियों ने,
कानों के कुण्डल खोल दिए।
हाथों के कंगन खोल दिए,
जूड़ों के पिन अनमोल दिए॥
एक सुन्दर सुघड़ कलाई की,
खुल ‘रिस्टवाच’ भी आई थी।
पर नहीं तराजू की डण्डी,
कांटे को सम पर लाई थी॥
कोने में तभी सिसकियों की,
देखा आवाज़ सुनाई दी।
कप्तान लक्ष्मी लिए एक,
तरुणी को साथ दिखाई दी॥
उसका जूड़ा था खुला हुआ,
आंखें सूजी थीं लाल-लाल!
इसके पति को युद्ध-स्थल में,
कल निगल गया था कठिन काल!!
नेताजी ने टोपी उतार,
उस महिला का सम्मान किया।
जिसने अपने प्यारे पति को,
आज़ादी पर कुर्बान किया॥
महिला के कम्पित हाथों से,
पलड़े में शीशफूल आया!
सौभाग्य चिह्न के आते ही,
कांटा सहमा, कुछ थर्राया!
दर्शक जनता की आंखों में,
आंसू छल-छल कर आए थे।
बाबू सुभाष ने रुद्ध कण्ठ से,
यूं कुछ बोल सुनाए थे-
“हे बहन, देवता तरसेंगे,
तेरे पुनीत पद-वन्दन को।
हम भारतवासी याद रखेंगे,
तेरे करुणा-क्रन्दन को!!
पर पलड़ा अभी अधूरा था,
सौभाग्य-चिह्न को पाकर भी।
थी स्वर्ण-राशि में अभी कमी,
इतना बेहद ग़म खाकर भी॥
पर, वृद्धा एक तभी आई,
जर्जर तन में अकुलाती-सी।
अपनी छाती से लगा एक,
सुन्दर-चित्र छिपाती-सी॥
बोली, “अपने इकलौते का,
मैं चित्र साथ में लाई हूं।
नेताजी, लो सर्वस्व मेरा,
मैं बहुत दूर से आई हूं॥ “
वृद्धा ने दी तस्वीर पटक,
शीशा चरमर कर चूर हुआ!
वह स्वर्ण-चौखटा निकल आप,
उसमें से खुद ही दूर हुआ!!
वह क्रुद्ध सिंहनी-सी बोली,
“बेटे ने फांसी खाई थी!
उसने माता के दूध-कोख को,
कालिख नहीं लगाई थी!!
हां, इतना गम है, अगर कहीं,
यदि एक पुत्र भी पाती मैं!
तो उसको भी अपनी भारत-
माता की भेंट चढ़ाती मैं!!”
इन शब्दों के ही साथ-साथ,
चौखटा तुला पर आया था!
हो गई तुला समतल, कांटा,
झुक गया, नहीं टिक पाया था!!
बाबू सुभाष उठ खड़े हुए,
वृद्धा के चरणों को छूते!
बोले, “मां, मैं कृतकृत्य हुआ,
तुझ-सी माताओं के बूते!!
है कौन आज जो कहता है,
दुश्मन बरबाद नहीं होगा!
है कौन आज जो कहता है,
भारत आज़ाद नहीं होगा!!”
केरल में 1500 शेफ ने दुनिया का सबसे लंबा केक बनाया, चीन को पीछे छोड़ा
त्रिसूर : केरल में बुधवार को दुनिया का सबसे लंबा केक बनाने का रिकॉर्ड बना। 6.5 किमी लंबे केक को 1500 से ज्यादा बेकर और शेफ ने मिलकर तैयार किया। इस वेनिला केक का वजन करीब 27 हजार किग्रा था। यह चार इंच (10 सेंटीमीटर) मोटा और चौड़ा था।
हजारों टेबल और डेस्क को जोड़कर उन पर इस केक को बनाया गया। इस दौरान बेकर और शेफ सफेद टी शर्ट और एप्रिन पहने हुए थे। इस बनाने में करीब 4 घंटे का वक्त लगा। करीब 12 हजार किग्रा शक्कर और आटे का इस्तेमाल किया गया। इस इवेंट के हजारों लोग गवाह बने।
गिनीज बुक में नाम दर्ज होगा
इस केक को बेकर्स एसोसिएशन केरल (बेक) ने बनाया। बेक के सचिव नौशाद ने कहा कि गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने केक की लंबाई को नापा है और यह करीब 6500 मीटर लंबा था, लेकिन उन्होंने अभी इसका प्रमाणपत्र नहीं दिया है। हमें विश्वास है कि यह गिनीज बुक में रिकॉर्ड्स बनाएगा।
चीन का रिकॉर्ड टूट सकता है
नौशाद ने बताया कि यह केक चीन का रिकॉर्ड तोड़ देगा। 2018 में चीन में 3.2 किमी लंबा फ्रूटकेक बनाया गया था। जिसे चाइनीज बेकर्स इन जिझी ने बनाया था। हमारा यह प्रयास दुनिया को हमारे कौशल को दिखाता है। हमने इसे बनाते समय इसके स्वाद, क्वालिटी और स्वच्छता को बरकरार रखा।
खेलो इंडिया यूथ गेम्स में चैंपियन महाराष्ट्र, जीते 78 स्वर्ण पदक सहित 256 पदक
खेलो इंडिया यूथ गेम्स का तीसरा सत्र रंगारंग समारोह के साथ संपन्न हो गया। महाराष्ट्र की टीम इन खेलों की चैंपियन बनी जिसने 78 स्वर्ण पदक सहित 256 पदक जीते। इस 13 दिवसीय प्रतियोगिता के दौरान महाराष्ट्र ने 78 स्वर्ण, 77 रजत और 101 कांस्य पदक के साथ अपनी लगातार दूसरी खेलो इंडिया युवा खेल ट्रॉफी जीती।
हरियाणा 200 पदक (68 स्वर्ण, 60 रजत और 72 कांस्य पदक) के साथ दूसरे जबकि दिल्ली 122 पदक (39 स्वर्ण, 36 रजत और 47 कांस्य) के साथ तीसरे स्थान पर रहा। समापन समारोह के दौरान चीन के वुशु मार्शल आर्ट्स कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। 10 जनवरी को शुरू हुए इन खेलों में 37 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 6800 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। इन खेलों में 20 खेलों की स्पर्द्धाओं का आयोजन किया गया।
चंद्रगुप्त मौर्य पर फिल्म बनाना चाहती हैं कंगना रनौत
मुम्बई : कंगना रनौत की फिल्म मणिकर्णिका ने बॉक्स ऑफिस पर औसत कमाई की थी। इन दिनों बॉलीवुड में एतिहासिक फिल्मों की बाढ़ आ गई है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म तानाजी इसका बेहतरीन उदाहरण है। अभिनेत्री कंगना एक बार फिर ऐसी ही फिल्मों पर दांव लगना चाहती हैं।
इन दिनों कंगना रनौत अपनी आने वाली फिल्म पंगा के प्रमोशन में व्यस्त हैं। बीते दिन अभिनेत्री बिहार की राजधानी पटना पहुंचीं थीं। यहां एक कार्यक्रम के दौरान कंगना ने अपनी इच्छा जाहिर की। मणिकर्णिका फिल्म में रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभा चुकी कंगना से यह पूछे जाने पर कि क्या वे बिहार के किसी एतिहासिक व्यक्ति पर कोई फिल्म करना चाहती हैं, कंगना ने कहा ‘मैं चंद्रगुप्त मौर्य पर फिल्म बनाना चाहती हूं’।
कंगना ने बताया कि उन्होंने मुंबई में मणिकर्णिका नाम से एक प्रोडक्शन हाउस खोला है और इसके तहत वह अपनी पहली फिल्म अयोध्या बना रही हैं।
जब मनाना हो गणतन्त्र दिवस का जश्न
26 जनवरी 2020 में देश 71वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। अगर आप भी इस गणतंत्र दिवस के मौके पर देशभक्ति के रंग में डूब जाना चाहते हैं तो मार्केट में आपके लिए कई विकल्प मौजूद हैं। खाने से लेकर कपड़ों तक में आपको देशभक्ति के रंग देखने को मिल सकते हैं। इसमें तिरंगा सलाद से लेकर फेस पर तिरंगे वाला टैटू आपकी मदद करेगा। आइए जानते हैं इस गणतंत्र दिवस को आप कैसे खास बना सकते हैं…
तिरंगा डिजाइन कुर्ते
तिरंगा कलेक्शन में सूट्स, कुर्ता और कुर्तीज, केसरिया, सफेद और हरे हैं। यह बेसिक कुर्ता आपको ट्राई रंग के साथ कूल लुक भी देगा। इस ट्राई लुक में वनपीस ड्रेस से लेकर परम्परागत कपड़े कई वैराइटी बाजार में उपलब्ध हैं।

तिरंगा आहार
बेकरी उत्पादों से लेकर प्रॉपर फूड तक तिरंगे के रंग में रंगी खाने की तमाम चीजें दुकानों में मिल जाएंगी। आप तिरंगा पराठा, तिरंगा इडली, तिरंगा सैंडविच, तिरंगा पुलाव या तिरंगा केक जैसे कई व्यंजन घर पर भी बना सकती हैं।
थ्री डी आई मेकअप
बात अगर मेकअप की करें तो इस गणतंत्र दिवस बटरफ्लाई, फ्लावर, बर्ड्स काफी ट्रेंड में हैं। जिन्हें खूबसूरत बनाने के लिए कलर, क्रिस्टल, स्पार्कल और ग्लिटर का यूज किया जा रहा है। आंखों को ट्राई लुक देने के लिए इनर आई को सिल्वर आईशैडो से कवर कर लें। इसके बाद ऊपर ऑरेंज आईशैडो और नीचे ग्रीन काजल पेसिंल लगाएं। आंखों के साइड में लाइट ब्लू विंग आपको अट्रैक्टिव दिखाएगा। यही नहीं, तिरंगे के तीनों रंग शैडो के तौर पर भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
चलता-फिरता हीटर है ‘कांगड़ी’, पहाड़ों से निकलकर विदेशों तक जमा रही धाक
श्रीनगर : सर्दी हो और कश्मीर की पारंपरिक कांगड़ी का जिक्र न हो, ऐसा कैसे हो सकता है। भले ही बाहर बर्फ गिर रही हो और तापमान शून्य से नीचे माइनस में चला जाए, कांगड़ी का एहसास ही आपको गर्माहट ला देगा। आधुनिक इलेक्ट्रानिक उपकरणों के इस दौर में भी कांगड़ी का क्रेज कम नहीं हुआ है। खुद को गर्म रखने से लेकर ड्राइंग रूम में सजाने तक कांगड़ी का इस्तेमाल हो रहा है। कश्मीर की हस्तशिल्प की पहचान कांगड़ी अब पहाड़ों से निकलकर जम्मू, हिमाचल प्रदेश, मैदानी इलाकों और विदेशों में भी धाक जमा रही है।
बांडीपोरा की कांगड़ी की बात ही कुछ और
वैसे तो पूरे कश्मीर में कई जगह कांगड़ी बनाई और बेची जाती है, लेकिन बांडीपोरा और चार-ए-शरीफ की कांगड़ी की बात ही कुछ ओर है। कश्मीर के लोगों के अलावा देश-विदेश से कश्मीर घूमने आने वाले पर्यटकों को कांगड़ी खूब लुभा रही है।
जीवनरक्षक है पर कुछ नुकसान भी
कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के समय कई-कई दिन तक बिजली नहीं होती, तब खुद को गर्म रखने के लिए कांगड़ी ही सहारा है। भीषण सर्दी में यह जीवनरक्षक से कम नहीं। हालांकि चिकित्सकों का कहना है कि बंद कमरे में ज्यादा कांगड़ी सेंकना हानिकारक भी हो सकता है। इससे सांस की दिक्कत और चर्मरोग भी हो सकता है।
पोशक्विन कांगर से बनी जाती है
एक कांगड़ी तैयार करने में काफी मेहनत लगती है। पहले कुम्हार मिट्टी से कटोरानुमा बर्तन बनाता है। इसके बाद पोशक्विन कांगर और लिनक्विन कांगर नामक पौधे की टहनी (बांस नुमा तिनके) से हाथ से कांगड़ी बुनी जाती है। इसके बाद मिट्टी का बर्तन कांगड़ी में इस तरह फिट किया जाता है कि वह हिले नहीं। इसके बाद कांगड़ी को ऊपर से मोतियों से सजाया जाता है। वजन में भी यह काफी हल्की होती है।
200 से 2000 रुपये तक है कीमत
कांगड़ी की कीमत उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है। अच्छी लकड़ी (पोशक्विन कांगर) की टहनियों से बनी कांगड़ी दो हजार तक मिलती है। वैसे बाजार में 200-400 रुपये की कांगड़ी भी उपलब्ध है।
कांगडी सेंकना महारत से कम नहीं
कांगड़ी में कोयले को जलाकर डाला जाता है। धुंए वाले कोयले को छांट कर बाहर निकाल दिया जाता है। इसे कश्मीर के लोग फिरन (कश्मीरी परिधान) के अंदर हाथ में पकड़कर चलते-फिरते भी सेंकते हैं। इससे हाथ और छाती गर्म रहती है। खुद को जलने से बचाते हुए कांगड़ी सेंकना भी महारत का काम है। गर्म कांगड़ी तीन से चार घंटे आराम से चलती है।
माँ शादी में बेटी को और नयी बहू सास को देती है यह उपहार
कांगड़ी कश्मीर की परंपरा से भी जुड़ी है। शादी के समय मां अपनी बेटी को विदा करते समय कांगड़ी देती है। नयी बहू अपनी सास को भी कांगड़ी तोहफे में देती है, जिसे बड़े चाव से घर में सजाकर रखा जाता है। इतना ही नहीं, घर में आने वाले मेहमान का स्वागत गर्म कांगड़ी देकर किया जाता है। कश्मीर में सीजन की पहली बर्फबारी को ‘शीन मुबारक’ कहा जाता है। शीन मुबारक बोलकर भी कांगड़ी तोहफे में दी जाती है। कश्मीर में कांगड़ी पर कई लोकगीत भी प्रचलित हैं।
(साभार – दैनिक जागरण)




