Sunday, April 26, 2026
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आभासी दुनिया की चकाचौंध में सच्चे प्रेम को परिभाषित करता है उपन्यास ‘रियल गर्लफ्रेंड’

कोलकाता : अन्तरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में 7 फरवरी 2020 को पत्रकार अनवर हुसैन के पहले उपन्यास ‘रियल गर्लफ्रेंड’ का लोकार्पण वाणी प्रकाशन के स्टॉल – 414 पर किया गया। इस अवसर पर एक परिचर्चा भी आयोजित की गयी जिसमें वक्ताओं ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच युवाओं और उपन्यास में उनके चित्रण पर अपनी बात रखी। उपन्यास पैरोकार पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित किया गया है और इसका लोकार्पण पैरोकार पब्लिकेशन की ओर से रोयजादा खातून ने किया। इस अवसर पर पुस्तक पर विचार रखते हुए श्रीश चन्द्र कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. कार्तिक चौधरी ने कहा कि जीवन में गतिशील होना जरूरी है लेकिन गतिशीलता ही जीवन हो, ऐसा जरूरी नहीं। कभी -कभी ठहराव सकारात्मकता को भी व्यक्त करता है। यह सकारात्मक सोच ही अनवर हुसैन के उपन्यास ‘रियल गर्लफ्रेंड’ में है। उपन्यास समाज शास्त्रीय अध्ययन के भी करीब है। लेखक ने आज के समय के असन्तोष, निराशा, खीज को प्रेम के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास किया है। इस अवसर पर उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार कपिल आर्य तथा वरिष्ठ पत्रकार रामाशीष ने भी उपन्यासकार अनवर हुसैन को शुभकामनाएँ दीं और उम्मीद जतायी कि उपन्यास अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचेगा। । लेखकीय वक्तव्य रखते हुए अनवर हुसैन ने कहा. ‘स्मार्ट फोन और डिजिटल के दौर में जहां एक क्लिक में रिश्ते बनते और बिगड़ते हैं वहां प्रेम भी इससे अछूता नहीं है । ऐसे नाजुक क्षण में सच्चे प्रेम के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए मेरा उपन्यास नयी पीढ़ी खासकर युवक युवतियों को जीवन का नया संदेश देता है और प्रेम की चाह में भटकने वालों को सही मार्ग भी दिखाता है । आज के दौर में हर व्यक्ति किसी न किसी मानसिक समस्या से परेशान है। ऐसी स्थिति में युवक- युवतियां अवसादग्रस्त होकर पथ से भटक जाते हैं और उनका जीवन अंततः अंधकारमय हो जाता है। उपन्यास में ऐसी स्थिति से निजात पाने के लिए पात्रों खासकर नायक नायिका के आंतरिक अंतर्द्वद्व के परिप्रेक्ष्य में सलाह भी दी गयी है।  पार्वती शॉ ने उपन्यास के कुछ अंश पढ़े। उपन्यास के बारे में पूर्व टीवी पत्रकार सादिया अजीम, पूजा गौतम, महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में क्षेत्रीय केंद्र कोलकाता के प्रभारी डॉ. सुनील कुमार, विद्यासागर कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद आसिफ आलम और अन्य विशिष्ट लोगों ने ने भी अपने विचार रखे। धन्यवाद ज्ञापन वाणी प्रकाशन की ओर से चन्दन चौधरी ने दिया।

प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय को अम्बेडर ग्रेट विजडम जेम अवार्ड

कोलकाता :    प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय को इस वर्ष का अम्बेडर ग्रेट विजडम जेम अवार्ड प्रदान किया गया है। इसके साथ ही उनको  सुसम वर्ल्ड पीस अवार्ड से भी नवाज़ा गया है।     प्रो. सोमा बंद्योपाध्याय वेस्ट बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, एजूकेशन ऐंड ऐडमिनिस्ट्रेशन के साथ संस्कृत विश्वविद्यालय की भी वाइस चांसलर हैं।

उन्होंने कई  राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों, संगोष्ठियों और कार्यशालाओं में सक्रिय रूप से वक्तव्य एवं आलेख-पाठ किया है।  प्रो. बंद्योपाध्याय को  ‘साहित्य अकादेमी का अनुवाद पुरस्कार’  (2013), ‘प्रयाग साहित्य सम्मेलन सम्मान’ (2013), मीरा स्मृति संस्थान द्वारा सम्मानित (2014), सन्मार्ग द्वारा ‘अपराजिता सम्मान’ (शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए) (2016) समेत कई पुरस्कार प्रदान किये जा चुके हैं।

स्मार्ट फ़ोन से पैदा समस्याओं को संजीदगी से उठाती फ़िल्म ‘नोमोफोबिया यंत्र’

कोलकाता :  स्मार्ट फोन ने आधुनिक जीवन में जहां तमाम सुविधाएं प्रदान की हैं, वहीं तमाम विकृतियां भी पैदा की हैं। एक ओर इसकी गिरफ्त में आकर युवा पीढ़ी गुमराह हो रही है और फोन का सतत उपयोग एक लत बन गयी है। सुपरिचित रंगकर्मी शिव जायसवाल की नयी हिन्दी शार्ट फ़िल्म इसी समस्या को केन्द्र में रखकर बनायी गयी है। फिल्म का नाम है फ़िल्म ‘नोमोफोबिया यंत्र’। इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग  गत रविवार की देर शाम न्यू टाउन में की गयी। इस अवसर पर शिव जायसवाल ने कहा कि अपनी पिछली फ़िल्मों की तरह इस बार भी उन्होंने युवाओं को की समस्याओं को केन्द्र में रखा है। स्मार्ट मोबाइल फ़ोन खोने या पास ना होने पर जो चिंता होती है वह बीमारी नोमोफोबिया कहलाती है। फ़िल्मकार ने फ़ोन के चलते लोगों के सम्बंधों में आते ठंडेपन को तो उजागर किया ही है और फ़ोन के कारण युवाओं में पैदा हो रही तमाम समस्याओं व त्रासदियों से एक -एक कर पर्दा उठाया है। गैंगरेप जैसी घटना इसी क्रम में घटती है। नोमोफोबिया की कहानी भी शिव जायसवाल ने ही लिखी है और निर्देशन भी किया है। इस फ़िल्म की यह भी खा़सियत है कि इसमें कई सुपरिचत रंगकर्मियों ने अभिनय किया है। फ़िल्म के सिनेमेट्रोग्राफ़र श्रीरूप मोदक और रिक हैं। सम्पादन संजय साहा और केशव का है। फ़िल्म में अन्ना दुग्गर भट्टाचार्य, स्मित सिंह, डॉ.अभिज्ञात, रश्मि शर्मा, जयनारायण प्रसाद, शिव जायसवाल, संजीव राय, श्रीरूप मोदक, राकेश सिंह, कोमल दुबे, विशाल कुमार गुप्ता, अरुणाभ दास, सौम्यजित मजुमदार, आकाश (गोहन) जायसवाल, सुनिल यादव विकेश, श्मामली रॉय, राज बंधु, अनुराग सेठ, चंदन यादव, अभिषेक यादव, मोहित कुमार प्रसाद, राहुल चौधुरी, ऋतोश्री दास ने अपने अभिनय का जादू चलाया है। शिव जायसवाल फ़िल्म प्रोडक्शन के बैनर तले यह फि़ल्म यूट्यूब के दर्शकों के लिए भी होगी।

कोलकाता पुस्तक मेले में बच्चों का हुल्लड़

 कोलकाता : हर साल की तरह इस साल भी पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डब्ल्यूबीसीपीसीआर)द्वारा कोलकाता पुस्तक मेले में चाइल्ड फ्रेंडली कॉर्नर रखा गया है। इस स्टॉल का उद्घाटन राज्य की महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. शशि पांजा ने किया।इस मौके पर अभिनेता चिरंजीत चक्रवर्ती तथा संगीतकार सुरजीत चटर्जी भी उपस्थित थे। इस स्टॉल पर बाल अधिकारों की जानकारी देने वाली लिखित सामग्री पर परिपत्रों के अतिरिक्त आयोग की पाक्षिक बाल पत्रिका ‘हुल्लड़’ उपलब्ध हैं। स्टॉल पर रोज कार्यशाला, क्विज, गेम्स जैसी रंगारंग सांस्कृतिक व साहित्यिक गतिविधियाँ आयोजित हो रही हैं। इस साल की थीम ‘मुक्तो करो भय’ है।

गूगल ने स्कॉटिश महिला वैज्ञानिक के सम्मान में बनाया डूडल

गूगल ने गत 2 फरवरी को स्कॉटलैंड की मैरी सोमरविले (Mary Somerville) की याद में डूडल बनाया। बता दें कि डूडल के माध्यम से गूगल समाज में अपना अहम योगदान देने वाले महान लोगों को याद करता है। डूडल में मैरी सोमरविले कुछ लिख रही हैं। स्कॉटलैंड की रहने वाली मैरी एक प्रसिद्ध महिला वैज्ञानिक और खगोलशास्त्री थीं। इस डूडल को बनाकर गूगल ने स्कॉटिश वैज्ञानिक मैरी सोमरविले की विरासत का सम्मान भी किया –

मेरी सोमरविले एक स्कॉटिश वैज्ञानिक थीं। जिन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में विश्व में कई अहम योग्य योगदान दिए है। 1826 में आज के दिन फिजिक्स पर उनके द्वारा किए गए एक्सपेरिमेंट को यूके की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस की द रॉयल सोसाइटी ऑफ लंदन में पढ़ा गया था।

मैरी सोमरविले विश्व की पहली महिला थी जिनका रिसर्च पेपर दुनिया के सबसे पुराने साइंस पब्लिकेशन हाउस में सबके सामने पढ़ा गया था। मैरी ने सौर्य मंडल की संरचना को बहुत बड़ा योगदान दिया था। इनकी रिसर्च पेपर की वजह से ही नेपच्त्यून ग्रह को खोजने में मदद मिली थी।

सर 1834 में मैरी के द्वारा लिखी गई किताब द कनेक्शन ऑफ फिजिकल साइंस उस समय की बेस्ट सेलिंग किताबों में से एक थी।

मैरी ने ना सिर्फ विज्ञान के क्षेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था बल्कि महिलाओं की राजनीतिक मताधिकारों के लिए भी वकालत की थी। वह पहली महिला थी जिन्होंने महिलाओं के बराबर अधिकार के लिए याचिका कोर्ट में दर्ज करवाई थी।

मैरी को अपने जीवन में मेडल इंट्रोड्यूस का पुरस्कार 2016 में दिया गया था। यह पुरस्कार उन वैज्ञानिकों को दिया जाता है जो अपने काम से साइंस के क्षेत्र में कुछ ऐसा कर जाते हैं जिससे लोगों का जीवन बेहतर बनता है।

जॉन स्टुअर्न मिल जो कि एक महान अर्थशास्त्री एवं दर्शनशास्त्री थे, ने महिलाओं को वोट देने के अधिकार के लिए संसद में एक विशाल याचिका का आयोजन किया था। महिलाओं के हक के लिए इस याचिका पर सबसे पहले मैरी सोमरविले ने ही हस्ताक्षर किए थे।

एनआईटी के 3 छात्रों ने मक्के के आटे से बनाया प्लास्टिक

सामान्य प्लास्टिक से सस्ता और साल भर में नष्ट होने का दावा
रायपुर : छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के 3 छात्रों ने ऐसी प्लास्टिक का आविष्कार किया है, जो 100 फीसदी बायोडिग्रेडेबल यानी कि नष्ट होने वाला है। आमतौर पर सिंगल यूज प्लास्टिक को नष्ट होने में 100 साल लगते हैं। वहीं, यह महज एक साल में नष्ट हो जाएगा। इसे रिसाइकिल कर प्रयोग में भी लाया जा सकता है। ऐसे में यह सिंगल यूज प्लास्टिक का भी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इस ईजाद के लिए एनआईटी में हुए ‘पुकार गो ग्रीन फेस्ट’ में छात्रों को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है।


छात्र निखिल वर्मा, कृष्णेंदु और निहाल पांडे ने इस प्लास्टिक को मक्के के आटे (स्टार्च) में ग्लसरीन और बेलेगर को मिलाकर बनाया है। यानी कि इसे अगर बाहर फेंक भी दें तो इससे न तो पर्यावरण को नुकसान है और न जानवरों को। इनका दावा है कि इसकी लागत मौजूदा प्लास्टिक से काफी कम है।
3 माह में इसे तैयार किया, लैब के परीक्षणों में पास
छात्रों ने बताया कि उन्हें इसे बनाने में तीन महीने का वक्त लगा। इसके बाद लैब में परीक्षण किया गया, जिसमें यह परीक्षण सफल  रहा। छात्र निखिल वर्मा बताते हैं कि हमने इसे प्रतियोगिता के लिए तैयार किया था, लेकिन अब हम इसे आगे ले जाएंगे और बाजार में लाएंगे।

अमेरिका में 1980 के बाद से कम हुआ है महिलाओं-पुरुषों के वेतन का अंतर : अध्ययन

वाशिंगटन : अमेरिकी महिलाएं वेतन के लिहाज से पुरुषों की बराबरी तक पहुंचने में काफी हद तक प्रयासरत हैं। एक नये अध्ययन में ऐसा दावा किया गया है जिसमें महिलाओं और पुरुषों को मिलने वाले वेतन के बीच के अंतर को 1980 के बाद से कम होता हुआ दिखाया गया है।
अमेरिका के स्वतंत्र शोध संस्थान ‘प्यू रिसर्च सेंटर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के वेतन में यह इजाफा ऐसी नौकरियां बढ़ने की वजह से हुआ है जिनमें “सामाजिक” कौशल और गहन सोच जैसे उच्च कौशलों को महत्त्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी नौकरियों में अब महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 40 साल से कम की अवधि में महिलाओं को प्रति घंटे मिलने वाले औसत वेतन में 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह 15 डॉलर से बढ़ कर 2018 में 22 डॉलर पर पहुंच गया जबकि इसी अवधि में पुरुषों की पगार में हुई वृद्धि 15 प्रतिशत रही।
हालांकि, पुरुषों की तनख्वाह महिलाओं को प्रति घंटे मिलने वाले 26 डॉलर से ज्यादा रही है और महिलाओं का कार्यस्थल पर प्रतिनिधित्व अब भी कम है।

सोशल मीडिया कम्पनियों को रखना होगा सक्रिय मोबाइल नम्बरों का अलग डेटाबेस

नयी दिल्ली : सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने एक प्रस्ताव किया है कि बड़ी सोशल मीडिया कम्पनियों को अपने ग्राहकों में अधिक सक्रिय रहने वाले मोबाइल नम्बरों का एक अलग डेटाबेस रखना चाहिये। कंपनियों को सत्यापन कारणों को लकर यह डेटाबेस बनाना चाहिये। मंत्रालय के संशोधित नियमों में यह प्रस्ताव किया गया है। एक सूत्र ने कहा है कि यह प्रस्ताव तेजी से फैलते सोशल मीडिया क्षेत्र में उपयोगकर्ताओं को लेकर जानकारी नहीं होने जैसे मुद्दों से निपटने के उद्देश्य से किया गया है। सोशल मीडिया कंपनियों के लिये मौजूदा नियमों में संशोधन के हिस्से के तौर पर पहली बार यह प्रस्ताव किया गया है।
देश में 50 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं वाली सोशल मीडिया कम्पनियों को प्रमुख सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज माना जायेगा। सूत्रों का कहना है कि ऐसी कम्पनियों को नये नियमों के तहत कड़े दायित्वों का पालन करना होगा। इनमें उपयोगकर्ता का पता लगाने का मुद्दा भी शामिल है। आईटी मंत्रालय ने इस बारे में संशोधित नियमों का मसौदा पुनरीक्षण के वास्ते कानून मंत्रालय को सौंपा है।
सूत्र का कहना है कि संशोधित नियमों में बड़ी सोशल मीडिया कम्पनियों तथा अन्य मध्यवर्ती संस्थाओं, मंचों के मामले में उनके दायित्वों और जरूरतों के बीच फर्क पर भी जोर दिया गया है। इन कंपनियों पर लागू होने वाले नियमों में जरूरत और उनके दायित्वों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिये।
सूत्रों ने पीटीआई- भाषा को बताया कि प्रमुख सोशल मीडिया मध्यवर्ती इकाइयों को उनके उपयोगकर्ताओं में सक्रिय रहने वाले मोबाइल नंबरों की पुष्टि करना और उनका अलग डेटा बेस बनाना चाहिये।
इन प्रस्तावित संशोधनों को लेकर नियमों का मसौदा दिसंबर, 2018 में सार्वजनिक कर दिया गया था। इसके बाद आईटी मंत्रालय में नियमों में संशोधन को लेकर बैठकों के कई दौर हो चुके हैं।

पहली बार सूर्य की स्पष्ट तस्वीरें मिलीं: दानेदार है सतह

हवाई (अमेरिका) : वैज्ञानिकों ने पहली बार सूर्य की सबसे स्पष्ट तस्वीरें खींचने में कामयाबी हासिल की है। इन्हें हवाई के नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) के डेनियल के इनौय टेलिस्कोप (डीकेआईएसटी) से लिया गया है। इसमें सूर्य की सतह ग्रेन्यूलर स्ट्रक्चर (दानेदार) की तरह दिख रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हर दाना आकार में फ्रांस से बड़ा है। टेलिस्कोप ने सूर्य के 30 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर किया। हवाई में एक पहाड़ के शिखर पर टेलिस्कोप स्थापित किया गया है।
सूर्य की पृथ्वी से दूरी करीब 15 करोड़ किमी है। तस्वीरों में सूर्य की सतह की कोशिका जैसी संरचना नजर आ रही है। हर सेल के बीच सैकड़ों किलोमीटर की दूरी है। डीकेआईएसटी के निदेशक थॉमस रिममेले ने बताया, “यह तस्वीर सूर्य की सतह पर मौजूद संरचनाओं को दिखाती है।” इसका वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें सूर्य में होने वाले विस्फोट को 14 सेकंड तक दिखाया गया है।

रेलवे का आधुनिक शौचालय, दावा- हर साल चार लाख लीटर पानी की बचत होगी

मुम्बई : देश की आर्थिक राजधानी मुम्बई के मरीन लाइन रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर आधुनिक शौचालय बनवाया है। यहां तैयार टॉयलेट में पानी को फुहार रूप में छोड़ने वाले नलों को लगाया है। इससे पानी की काफी बचत होती है। रेलवे ने शनिवार शाम को सोशल मीडिया पर टॉयलेट के फोटो और जानकारी पोस्ट कीं, जो वायरल हो रही है।
रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक, इस आधुनिक सुविधाओं वाले शौचालय से हर साल करीब 3-4 लाख लीटर पानी की बचत होगी। टॉयलेट का इंटीरियर वुडन कॉन्सेप्ट पर बेस है। टॉयलेट की छत को मंगलुरु स्टाइल कैनॉपी शेप दिया गया है। इस पर पानी नहीं ठहरता है। मरीन लाइन स्टेशन मुंबई के व्यवस्तम स्टेशनों में से एक है। यहाँ से हर दिन लाखों लोग ट्रेन में सफर करते हैं।