Sunday, April 26, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 533

गरीब बच्चों को मेडिकल की तैयारी करवाता है ‘जिंदगी’ कार्यक्रम

भुवनेश्वर : गणितज्ञ आनंद कुमार के प्रसिद्ध ‘सुपर 30’ से प्रेरित एक ऐसी ही शानदार पहल की शुरुआत ओडिशा में भी हुई, लेकिन इसमें इंजीनियरिंग के बजाय मेडिकल की तैयारी करायी जाती है। ‘‘जिन्दगी’’ नाम की यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के सपनों को साकार करने का काम कर रही है, उनकी उड़ान को पंख दे रही है।
एक गैर-सरकारी संगठन द्वारा संचालित इस अद्भुत कार्यक्रम के तहत मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कराने के लिए सब्जी विक्रेताओं, मछुआरों और गरीब किसानों जैसे समाज में हाशिये पर पड़े लोगों के बच्चों को चुना जाता है।
इस पहल को शुरू करने की कहानी के पीछे जो शख्स है, उनका नाम है- अजय बहादुर सिंह। उन्हें अपने परिवार की आर्थिक तंगी के कारण अपनी मेडिकल की पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी और परिवार का पेट भरने के लिए चाय और शर्बत बेचना पड़ा था। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में वर्ष 2016 में शुरू किया गया जिंदगी कार्यक्रम वर्तमान में 19 मेधावी छात्रों को मेडिकल की तैयारी करवा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आये हुए हैं, जिनमें लड़के और लड़कियां दोनों शामिल हैं।
इस कार्यक्रम के तहत, एक राज्य स्तरीय परीक्षा के माध्यम से गरीब पृष्ठभूमि के चयनित प्रतिभाशाली छात्रों को डॉक्टर बनने में मदद करने के लिए शिक्षा दी जाती है, जिन्हें मुफ्त भोजन, आवास और अन्य तमाम सुविधाएं प्रदान की जाती है।
इसके चौदह छात्रों ने 2018 में नीट में सफलता पायी थी, जिनमें से 12 को ओडिशा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिला है, जिनकी उपलब्धियों के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने जुलाई में उन्हें सम्मानित किया था।
एक पीटीआई रिपोर्टर ने इस सप्ताह की शुरुआत में जिंदगी फाउंडेशन की कक्षा देखी, वहां का माहौल देखा, विद्यार्थियों के साथ बातचीत की, जिनमें से कुछ सब्जी विक्रेताओं, दिहाड़ी मजदूरों, मछुआरों और गरीब किसानों के बच्चे थे, जिन्होंने सपने में भी कभी डॉक्टर बनने के बारे में नहीं सोचा था, जिसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मेडिकल की तैयारी में अमूमन काफी पैसे खर्च होते हैं और महंगी कोचिंग लेनी पड़ती है।
इन बच्चों में अंगुल जिले के एक गरीब किसान की बेटी क्षीरोदिनी साहू, कोरापुट के एक मजदूर की बेटी रेखा रानी बाग, भद्रक जिले के एक ट्रक ड्राइवर के बेटे स्मृति रंजन सेनापति, पानागढ़ के एक सब्जी विक्रेता के बेटे सत्यजीत साहू और पूर्वी मलकानगिरी के एक मछुआरे के बेटे मंजीत बाला हैं, जो अपने सपने को पंख देने में लगे हुए हैं। ये बच्चे दिन-रात कड़ी मेहनत कर अपनी बाधाओं को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।बाधा पैदा नहीं कर सकती।
उनके हौसलों की एक बानगी खुर्दा जिले के एक छोटे से किसान की बेटी शुभलक्ष्मी साहू के जज्बे में दिखती है, जिसका मानना है, ‘‘जब एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) बन सकता है तो हम डॉक्टर क्यों नहीं बन सकते?’’
उनके शिक्षक- मुकुल कुमार, मानस कुमार नायक और दुर्गा प्रसाद का कहना है कि इन बच्चों के लिए ‘‘करो या मरो’’ की स्थिति है, या तो मेडिकल परीक्षाओं को पास कर एक सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं या अपने उसी अभावग्रस्त जीवन में लौट जाएं।
प्राणि विज्ञान के शिक्षक दुर्गा प्रसाद ने कहा, ‘‘इन सभी बच्चों में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की इच्छा बहुत तीव्र है।’’
जिंदगी कार्यक्रम के समन्वयक ज़ाहिद अख्तर ने कहा कि लड़कों और लड़कियों को संगठन द्वारा संचालित अलग-अलग छात्रावासों में रखा जाता है जहाँ उन्हें सादा लेकिन पौष्टिक भोजन मुफ्त में मिलता है।
जिंदगी फाउंडेशन के वरिष्ठ समन्वयक शिवेन सिंह चौधरी ने कहा कि इसका एक साल का कार्यक्रम होता है, जो जुलाई के पहले सप्ताह में प्रवेश की औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद शुरू होता है।
उन्होंने कहा कि इसमें आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों का ही चयन किया जाता है क्योंकि परियोजना का उद्देश्य दुनिया में गरीब परिवारों को आगे बढ़ाने में मदद करना है।
सुपर 30 के संस्थापक आनंद कुमार को अपना प्रेरणास्रोत मानने वाले जिंदगी फाउंडेशन के संस्थापक अजय बहादुर सिंह ने कहा कि वह यह सब गरीब बच्चों को उनके सपने पूरे करने में मदद करने के लिए कर रहे हैं । वह अपने सपने को इन बच्चों के जरिए पूरा करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि संघर्ष के बावजूद शिक्षा क्षेत्र से जुड़े रहने की उनकी चाहत ने उन्हें यहां तक पहुंचाया है।

ऑस्कर: ब्रैड पिट, लॉरा डर्न को सर्वश्रेष्ठ सह-कलाकार का पुरस्कार

लॉस एंजिलिस : अभिनेता ब्रैड पिट ने ‘वन्स अपॉन ए टाइम इन हॉलीवुड’ में शानदार अदाकारी के दम पर अभिनय की श्रेणी में अपने करियर का पहला ऑस्कर जीता और लॉरा डर्न सर्वश्रेष्ठ सह अभिनेत्री चुनी गई।
92वें अकादमी पुरस्कार समारोह में अभिनेता को सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता की श्रेणी में ऑस्कर मिला। इससे पहले बतौर निर्माता 2014 में उन्हें उनकी फिल्म ‘12 इयर्स ए स्लेव’ के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में ऑस्कर मिला था। पिट ने पुरस्कार स्वीकार करते हुए कहा, ‘‘ मुझे क्लिफ बूथ (फिल्म में उनके किरदार का नाम) के स्वभाव से प्यार है। लोगों में अच्छाई को देखना, मुश्किलों को स्वीकार करना लेकिन सर्वश्रेष्ठ के लिए…’’
वहीं सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेत्री की श्रेणी में लॉरा डर्न ने बाजी मारी। उन्हें फिल्म ‘मैरिज स्टोरी’ में नोरा फैनशॉ का बेहतरीन किरदार निभाने के लिए यह पुरस्कार मिला है। संयोग से डर्न को उनके जन्मदिन के अवसर पर यह पुरस्कार मिला है और इसे स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ यह मेरे जन्मदिन का अभी तक का सबसे बेहतरीन तोहफा है।’’
वहीं बोंग जून-हो को फिल्म ‘पैरासाइट’ के लिए सर्वश्रेष्ठ मौलिक पटकथा की श्रेणी में ऑस्कर मिला है। इसके अलावा फिल्म ‘टॉय स्टोरी 4’ को ‘एमिनेटिड फीचर फिल्म’ की श्रेणी में ऑस्कर मिला, एनिमेशन स्टूडियो ‘पिक्सार’ का इस श्रेणी में यह 10वां ऑस्कर है।

नहीं रहे हिन्दी साहित्यकार पद्मश्री गिरिराज किशोर 

कानपुर : साहित्यकार, कथाकार, नाटककार और उपन्यासकार पद्मश्री गिरिराज किशोर नहीं रहे। गत रविवार सुबह करीब 10 बजे कानपुर के सूटरगंज स्थित आवास पर अंतिम सांसे लीं। वह अपने पीछे पत्नी, दो बेटी और एक बेटे का भरापूरा परिवार छोड़ गए। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में जन्मे गिरिराज किशोर उपन्यासकार, कथाकार, नाटककार के अलावा सशक्त आलोचक रहे। उपन्यास ढाईघर के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया। पहला गिरमिटिया के लिए केके बिरला फाउंडेशन द्वारा व्यास सम्मान से नवाजा गया। 23 मार्च 2007 को साहित्य और शिक्षा के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति स्व. डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें देश के चौथे बड़े नागरिक सम्मान पद्म श्री से नवाजा।

8 जुलाई 1937 को मुजफ्फरनगर में जन्मे गिरिराज किशोर के पिता मुजफ्फरनगर के जमींदार थे। कम उम्र में ही घर छोड़ दिया और स्वतंत्र लेखन शुरू किया। कई सरकारी नौकरी की और छोड़ा लेकिन लेखन जारी रहा। आईआईटी रजिस्ट्रार पद से रिटायर होने के बाद 14 साल तक आईआईटी के रचनात्मक लेखन केंद्र के अध्यक्ष रहे। इसके बाद शहर के सूटरगंज स्थित घर पर भी उनका लेखन जारी रहा। रविवार सुबह करीब 10 बजे अचानक तबीयत बिगड़ी। परिवार के लोगों ने एंबुलेंस बुलाई लेकिन उससे पहले ही सांसे थम गईं। घर में पत्नी मीरा किशोर के अलावा बेटी जया, शिव और बेटा अनीश किशोर हैं। निधन की सूचना पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। शहर के बड़े साहित्यकार, पत्रकार, जनप्रतिनिधि और आम लोगों ने श्रद्धांजलि दी। उनका देहदान सोमवार को सुबह 10 बजे होगा।

सम्मान

  • चेहरे-चेहरे किसके चेहरे नाटक के लिए यूपी हिन्दी संस्थान द्वारा भारतेंदु सम्मान
  • यूपी हिन्दी संस्थान का महात्मा गांधी सम्मान
  • यूपी हिन्दी संस्थान का साहित्यभूषण सम्मान
  • भारतीय भाषा परिषद का शतदल सम्मान
  • 23 मार्च 2007 में देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म श्री से नावाजा गया

संप्रति

  • मास्टर आफ सोशल वर्क में 1960 में आगरा विश्वविद्यालय से डिग्री ली
  • 1960 से 1964 तक प्रदेश में सेवायोजन अधिकारी व प्रोबेशन अधिकारी रहे
  • 1964 से 66 तक इलाहाबाद में स्वतंत्र लेखन
  • 1966 से 1975 तक कानपुर विश्वविद्यालय में सहायक और उप कुलसचिव रहे
  • 1975 से 1983 तक आईआईटी कानपुर में कुलसचिव रहे
  • 1983 से 1997 तक आईआईजी में रचनात्मक लेखन केंद्र के अध्यक्ष रहे
  • एक जुलाई 1997 को सेवानिवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन जारी रहा

कृतियां

  • कहानी संग्रह : नीम के फूल, चार मोती बेआब, पेपरवेट, रिश्ता, शहर-दरशहर, हम प्यार कर लें, जगत्तारनी, वल्द रोजी, यह देह किसकी ? मेरी राजनीतिक कहानियां, हमारे मालिक सबके मालिक
  • उपन्यास : ढाईघर, लोग, चिड़ियाघर, इंद्र सुनें, दावेदार, तीसरी सत्ता, यथा प्रत्तावित, असलाह, अंर्तध्वंस, यातनाघर के अलावा 8 लघु उपन्यास अष्टाचक्र के नाम से प्रकाशित हुए
  • पहला गिरमिटिया को व्यास सम्मान मिला। यह उपन्यास गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका यात्रा के अनुभव पर आधारित है।
  • नाटक : नरमेध, प्रजा ही रहने दो, केवल मेरा नाम लो, जुर्म आयद, काठ की तोप, (लघु नाटक) मोहन का दुख (बच्चों के लिए)
  • निबंध : संवादसेतु, लिखने का तर्क, सरोकार, कथ-अकथ, समपर्णी, एक जनसभा की त्रासदी, जन-जन सनसत्ता

फेलोशिप और उपाधि

  • संस्कृति मंत्रालय में 1998-1999 तक एमेरिट्स फेलोशिप
  • भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान राष्ट्रपति निवास शिमला में मई 1999-2001 तक फेलोशिप
  • 23 मार्च 2007 को राष्ट्रति ने साहित्य और शिक्षा के लिए पद्म श्री से विभूषित किया
  • 2002 में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय से डीलिट की मानद उपाधि
  • साहित्य अकादमी नई दिल्ली के कार्यकारिणी सदस्य रहे
  • हिन्दी सलाहकार समिति रेलवे बोर्ड के सदस्य रहे
  • स्वतंत्र लेखन और आकार का संपादन किया

(साभार – लाइव हिन्दुस्तान)

वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद का निधन

नयी दिल्ली : वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण बलदेव वैद का निधन अमेरिका के न्यूयार्क में 92 साल की उम्र में हो गया है। 27 जुलाई, 1927 पंजाब के दिंगा में जन्मे वैद ने अंग्रेजी से स्नातकोत्तर और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की और अपनी लेखनी से कई पीढ़ियों को प्रभावित किया ।
कृष्ण बलदेव वैद की लेखनी में मनुष्य जीवन के नाटकीय सन्दर्भों की गहरी पहचान है। वैद को साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। अपनी रचनाओं में उन्होंने सदा नए से नए और मौलिक-भाषाई प्रयोग किये हैं जो पाठक को ‘चमत्कृत’ करने के अलावा हिन्दी के आधुनिक-लेखन में एक खास शैली के मौलिक-आविष्कार की दृष्टि से विशेष अर्थपूर्ण हैं।
‘उसका बचपन’, ‘बिमल उर्फ़ जायें तो जायें कहां’, ‘तसरीन’, ‘दूसरा न कोई’, ‘दर्द ला दवा’, ‘गुज़रा हुआ ज़माना’, ‘काला कोलाज’, ‘नर नारी’, ‘माया लोक’, ‘एक नौकरानी की डायरी’ जैसे उपन्यासों से उन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई।
दक्षिण दिल्ली के ‘वसंत कुंज’ के निवासी वैद लम्बे अरसे से अमेरिका में अपनी दो विवाहित बेटियों के साथ रह रहे थे । उनकी लेखिका पत्नी चंपा वैद का कुछ बरस पहले ही निधन हुआ था |
कृष्ण बलदेव वैद अपने दो कालजयी उपन्यासों- ‘उसका बचपन’ और ‘विमल उर्फ़ जाएँ तो जाएँ’ कहाँ के लिए सर्वाधिक चर्चित हुए हैं। एक मुलाक़ात में उन्होंने कहा था- “साहित्य में डलनेस को बहुत महत्व दिया जाता है। भारी-भरकम और गंभीरता को महत्व दिया जाता है। आलम यह है कि भीगी-भीगी तान और भिंची-भिंची सी मुस्कान पसंद की जाती है। और यह भी कि हिन्दी में अब भी शिल्प को शक की निगाह से देखा जाता है।
उन्होंने कहा था, ‘‘बिमल उर्फ जाएँ तो जाएँ कहाँ’’ को अश्लील कहकर खारिज किया गया। मुझ पर विदेशी लेखकों की नकल का आरोप लगाया गया, लेकिन मैं अपनी अवहेलना या किसी बहसबाजी में नहीं पड़ा। अब मैं 82 का हो गया हूँ और बतौर लेखक मैं मानता हूँ कि मेरा कोई नुकसान नहीं कर सका। जैसा लिखना चाहता, वैसा लिखा। जैसे प्रयोग करना चाहे किए।”

क्वीन ऑफ कैबरे” आरती दास का निधन

कोलकाता :‘मिस शेफाली’ के नाम से मशहूर जानी मानी नृत्यांगना एवं अदाकारा आरती दास का दिल का दौरा पड़ने से गुरुवार को निधन हो गया। वह 76 वर्ष की थी। उनका निधन पश्चिम बंगाल में 24 परागना जिला के सोदपुर स्थित उनके घर पर हुआ।
‘क्वीन ऑफ कैबरे’ 60-70 के दशक में अपने नृत्य के लिए खासी मशहूर थी। उनकी भतीजी एल्वीन शेफाली ने कहा, ‘‘ उनके सीने में दर्द था और बेचैनी हो रही थी। डॉक्टरों ने बताया कि दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका निधन हुआ।’’
सूत्रों ने बताया कि आरती को पिछले कुछ समय से किडनी से जुड़ी समस्याएं थी। मशहूर निर्दशक सत्यजीत रे के साथ उन्होंने उनकी ‘प्रतिद्वंदी’ और ‘सीमाबद्ध’ जैसी फिल्मों में काम किया था।

कोलकाता पुस्तक मेले में पुस्तक लोकार्पण तथा कविता पाठ

कोलकाता :  आनंद प्रकाशन के स्टॉल पर कालीप्रसाद जायसवाल के काव्य संग्रह ‘तुम नहीं थे’, पंकज साहा के व्यंग्य संग्रह ‘हा ! बसंत ! ‘ और ‘जन्नत’ तथा राजू कुमार के कविता संग्रह ‘संवेदना के क्षण’ पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आलोचक शंभुनाथ ने कहा कि पंकज साहा के व्यंग्य में हास्य और प्रहार का मिश्रण है ।कालीप्रसाद जायसवाल के काव्य संग्रह पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कविताओं में जीवन के विविध आयामों का जिक्र है।
इस अवसर पर मुकुंद शर्मा, राजेश सिंह, दीपा ओझा, प्रीति साव, रूपेश कुमार यादव, पंकज सिंह, सूर्यदेव रॉय ‘सोनू’, राहुल गौड़, रूपल साव, मधु सिंह, सुमन शर्मा, आशा पांडेय, आनंद गुप्ता, पंकज साहा, सेराज खान बातिश, आशुतोष, मंजू श्रीवास्तव, शैलेश गुप्ता, अनिला राखेचा, ज्योति शोभा, अमरचंद जायसवाल, ऋतु तिवारी, महेश जायसवाल, मीता दास, रामनिवास द्विवेदी, मृत्युंजय, नीलम अग्रवाल और कालीप्रसाद जायसवाल ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम का सफल संचालन संजय जायसवाल और धन्यवाद ज्ञापन दिनेश त्रिपाठी ने किया।

बीएचएस में आयोजित हुई सरस्वती पूजा

कोलकाता : विद्या और ज्ञान की देवी सरस्वती की आराधना हाल ही में बिड़ला हाई स्कूल में आयोजित की गयी। गत 29 जनवरी को वसन्त पंचमी के दिन सभी वासन्ती परिधान में वसन्त का स्वागत कर रहे थे। सरस्वती पूजा समारोह में बिड़ला हाई स्कूल के महासचिव ब्रिगेडियर वी.एन. चतुर्वेदी, बीएचएस के सीनियर सेक्शन की प्रिंसिपल लवलीन सैगल तथा जूनिय़र सेक्शन की हेड मिस्ट्रेस फरीदा सिंह उपस्थित रहे। परम्परा और संस्कृति की भव्यता को दर्शाती सजावट समारोह की भव्यता बढ़ा रही थी। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गये और अन्त में प्रसाद वितरण किया गया।
रपट – सोनालिका चाकी घोष

शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतिभागी – सौरभ झा

शिक्षण संस्थान – खिदिरपुर कॉलेज

कविता – ईश्वर के घर लूट हुई

कवि – गोपाल प्रसाद व्यास

  शुभजिता युवा प्रतिभा सम्मान – प्रतिभागी – प्रियंका सिंह

 शिक्षण संस्थान – कलकत्ता विश्वविद्यालय

प्रतियोगिता – निबन्ध

विषय – हमारे तटरक्षक

हमारे तटरक्षक

विश्व में भारतवर्ष एकता का दर्पण है।भिन्न भिन्न जातियों, भाषाओं और संस्कृति के लोग एकता की जड़ों को कायम रखने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। किसी देश के विकास में देश के नौसेना महत्वपूर्ण कड़ी है,उन के लिए परिचय की आवश्यकता नहीं। उन नौसेनाओं को “देश के रक्षक” या यूं कहें देश की आत्मा कहा जाता है,उन नौसेना में एक शक्ति ‘तटरक्षक’ है।जैसा कि उसके शाब्दिक अर्थ से पता लगता है ‘किनारों के रक्षक’ । कहीं न कहीं सभी देशों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर जोड़ने का माध्यम समुद्र भी है जो प्राकृतिक वरदान है। पश्चिम में अरब सागर, पूर्व में बंगाल की खाड़ी एवं दक्षिण में हिंद महासागर लगी हुई है,इन्हीं समुद्री-पथो की सुरक्षा,गहरे समुद्र में लूट-पात , ऊर्जा सुरक्षा, आंतकवाद आदि से देश की रक्षा की तटरक्षक करते हैं। इसलिए समुद्र क्षेत्र से भारत की रक्षा के लिए तटरक्षक कानून सन्1978 में लागू किया गया, साथ ही साथ 18अगस्त 1978 में भारतीय तटरक्षक की स्थापना की गयी। जलीय क्षेत्र तथा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों की निगरानी करने के साथ तटरक्षक का यह दायित्व रहता है कि वह बल के कार्यों में खोज तथा बचाव करने के अलावा अपने इलाके और व्यापार की रक्षा करें। तटरक्षक की की क्षमता रहती है कि वह मित्रता का साथ बढाकर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग करके देश को सुरक्षित रखें, समुद्री वातावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने साथ ही साथ राष्ट्रीय हितों का ध्यान रखें।


एक बात स्पष्ट हो जाती है कि सभी तटरक्षक देशभक्त होने के साथ-साथ देश के विकास के लिए कार्यरत भी है। तटरक्षक के कमान तटरक्षक महानिदेशक है। इनका मुख्यालय नयी दिल्ली में है। इनके पास सबसे महत्वपूर्ण शक्ति इनकी एकाग्रता है जिसके कारण आने वाले खतरों का सामना बलपूर्वक करते हैं। हमारे तटरक्षक के कर्त्तव्यों के अलावा कुछ बुनियादी कार्य भी है जैसे-१.प्राकृतिक और कृत्रिम दीपों और समुद्रों की रक्षा,२.भारत के समुद्री कानूनों को लागू करना,३.मछुआरों को सुरक्षा प्रदान करना और ४.युद्ध के समय नौसेना की सहायता।
यदि कहा जाए हमारे तटरक्षक औपचारिक और अनौपचारिक रूप से देश के स्तंभों में से एक स्तंभ है तो अनायास प्रतीत जान नहीं पड़ता क्योंकि वह कर्त्तव्यों का पालन करते हुए जनता जैसे व्यापारों मछुआरों और क्षेत्रिय इलाकों की जिम्मेदारी उन्ही के कंधों पर है।
अगर तटरक्षक बलों की उद्देश्यों की बात करें,तो देश में आने वाले आंतकवाद,जो समुद्री मार्ग के जरिए भारत को अपना निशाना बनाते हैं उनके लक्ष्यों को असफल करना साथ ही साथ समुद्र तट के मार्गों को सुरक्षित रखते हुए देश की उन्नति में अपना सहयोग देना यह उनका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण लक्ष्य या उद्देश्य कहा जा सकता है। वह इस लक्ष्य के पूर्ति के लिए अपने प्राणों का बलिदान भी करने में संकोच नहीं करते, साथ वहअपने घर परिवार से दूर रहकर देश की सुरक्षा,स्वाभिमान,और अपने कर्त्तव्यों का पालन करने के लिए कभी पीछे नहीं हटते।
एक बात में कहा जाए तो हमारे तटरक्षक बल देश का अभिमान है। जिसके सहारे हम आप अपने घरों में खुशियां मनाते हैं और सुरक्षित भी है, ऐसे देश के वीरों के लिए दिल में सम्मान हो और भारतवर्ष के निवासी होने के नाते अपने अपने कर्त्तव्यों का पालन करें। हमारे तटरक्षक के सम्मान के लिए कुछ पंक्तियां..
“इसके कर्मी है देश रक्षक
निभाते हैं अपना कर्त्तव्य
इन्हें ना चाहिए कोई तख्ताज
केवल देश करे इनका सम्मान
प्रेम और बलिदान है
इनकी रग- रग में
इसलिए ये कहलाते हैं
देशभक्त”।।।।।।।

 

रियल गर्लफ्रेंड’ उपन्पयास की खरीद पर आकर्षक ऑफर

यह उपन्यास युवाओं को केन्द्र में रखकर लिखा गया है जो सोशल मीडिया की चकाचौंध में भ्रमित युवती की कहानी है जो आगे चलकर अपने मनोचिकित्सक की सहायता से प्रेम के वास्तविक रूप को समझती है और उसे अपना प्रेम भी मिलता है। इसके साथ ही मानसिक अवसाद जैसी समस्या और मनोचिकित्सा को लेकर जो हिचक है, उपन्यास में इस पर भी बात की गयी है। उपन्यास पैरोकार पब्लिकेशन्स ने प्रकाशित किया है और इसकी कीमत 250 रुपये है। रियल गर्लफ्रेंड का प्रचार सहयोगी शुभ सृजन नेटवर्क है।’ पुस्तक अमेजन पर भी शीघ्र उपलब्ध होगी। आप लेखक से 98316 74489 नम्बर पर सम्पर्क कर सकते हैं।
संलग्न  चित्र – लोकार्पण तथा पुस्तक का आवरण चित्र
उपन्यासकार के बारे में –
अनवर हुसैन दैनिक जागरण (कोलकाता) में काम कर चुके हैं, वरिष्ठ पत्रकार हैं।इससे पहले उन्होंने कई प्रतिष्ठित अखबारों में भी इन्होंने सेवाएँ दी हैं तथा कई पत्र – पत्रिकाओं में इनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। इन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से फिल्म एंड टेलिविजन तथा सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट से स्क्रिप्ट राइटिंग (पटकथा लेखन) का शॉर्ट टर्म फाउंडेशन कोर्स किय़ा है। ‘रियल गर्लफ्रेंड’ उनका पहला उपन्यास है। वह कहते हैं, ‘अच्छे लेखकों की कमी है । लेखक अच्छा  लिखेगा तो पाठक उसे खोज कर पढ़ेंगे। मेरे पहले उपन्यास को पढ़ने के लिए आम पाठकों में जिस तरह उत्सुकता पैदा हुई  है उससे मुझे भी आगे और बेहतर लिखने की प्रेरणा मिली है। एक लेखक के तौर पर आम पाठकों की उम्मीदों पर खरा उतरने का मेरा प्रयास जारी रहेगा। अभी तो यात्रा शुरू हुई है ।’

विस्तृत जानकारी तथा पुस्तक प्राप्ति के लिए सम्पर्क करें

अमेजन पर खरीदें – https://www.amazon.in/dp/B084ZFJJYQ/ref=cm_sw_r_wa_apa_i_g0qvEb7VQR7WG

पैरोकार पब्लिकेशन / हाईटेक कम्यूनिकेशन्स एंड कंस्लटैंट्स
स्वास्तिक अपार्टमेंट
पीरतला, आगरपाड़ा
कोलकाता 700109
मोब,  8902233369
[email protected]
तथा
शुभ सृजन नेटवर्क
सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया – 9163986473