बीते कुछ दिन बहुत भयावह गुजरे हैं…देश का दिल कही जाने वाली दिल्ली में हिंसा की क्रूर चादर फैल गयी। हिंसा ने अनगिनत जानें लीं और अंसख्य घर फूँके…किताबें और शिक्षण संस्थान जलकर खाक हुए…यह निश्चित रूप से हृदय द्रावक है मगर यह सोचने पर विवश भी करता है। जरा सोचिए तो क्या इसके लिए हम और आप जिम्मेदार नहीं….जो घृणा से भरे सन्देश साझा करते हैं, उसे आगे बढ़ाते हैं और फिर उसमें मिर्च – मसाला भी अपनी तरफ से मिला देते हैं। विचारधारा कोई भी हो…पार्टी कोई भी हो मगर सबका काम अपने फायदे के लिए हिंसा फैलाना ही रह जाता है। हमें यह चाहिए…हमें वह नहीं चाहिए….और इन सबके बीच जहर फैलता जाता है…हर तरफ. हर जगह…हालात से अनजान…यह समझे बगैर कि सोशल मीडिया पर हमारी एक गतिविधि क्या रंग दिखाएगी,,,काम जारी रहता है। पिछले 2 माह से देश में कई जगहों पर महिलाएँ धरने पर बैठी हैं…यह माह महिलाओं के लिए है और महिलाओं के नाम है तो यह सवाल तो जेहन में आता ही है कि क्या ये अब अपने हिस्से की लड़ाई लड़ सकेंगी…अशिक्षा…अन्याय..अन्धविश्वास के खिलाफ…?
नहीं पता कि इसका उत्तर क्या है मगर ये जरूर हो सकता है कि हम अब ठहरें…और सोचे कि हम क्या कर रहे हैं,,,,जो खत्म हुआ है….उसे फिर से खड़ा करें….दिल को फिर से जिन्दा करें…पूरे देश को जिन्दा करें…तोड़ने की नहीं बल्कि जोड़ने की बात करें,,,और इसी कड़ी में शुभजिता यू ट्यूब टीवी पर हम लाए हैं….मेरी जान हिन्दुस्तान…करना कुछ नहीं है…आपको भेजना है ऐसा वीडियो…या खबर जिसमें इस देश को जोड़ने की बात कही गयी हो…वह कुछ भी हो सकता है…आपके इलाके की कोई कला, शख्सियत…इमारत…धरोहर…कुछ भी मगर शर्त यह है कि आपको अन्त में मेरी जान हिन्दुस्तान कहकर बताना होगा कि आपकी प्रवष्टि किस तरह से विषय के अनुरूप ठहरती है…आइए…कुछ अच्छा करें…जुड़ें और जोड़ें…क्योंकि मेरी…आपकी और हम सबकी जान है हिन्दुस्तान
क्योंकि हम सबकी जान है हिन्दुस्तान
इंडियन आयडल 11 के विजेता बने सनी हिन्दुस्तानी
मुम्बई : सोनी टीवी के मशहूर सिंगिंग रियलिटी शो इंडियन आयडल 11 में सनी हिन्दुस्तानी विजेता बने। वहीं, लातूर के रोहित राउत उपविजेता रहे। सनी भटिंडा के रहने वाले हैं, जो पहले बूट पॉलिश करते थे। जीत के बाद सनी को 25 लाख की इनामी राशि के साथ चमचमाती ट्रॉफी और टाटा अल्ट्रोज कार प्रदान की गई। साथ ही हिमेश की अगली फिल्म में गाने का मौका मिलेगा। वहीं, रोहित को पांच लाख रुपये की राशि मिली। तीसरे नंबर पर रहीं अकोना मुखर्जी को भी 5 लाख रुपए मिले। शो के तीनों जज विशाल ददलानी, हिमेश रेशमिया और नेहा कक्कड़ ने अपनी जबरदस्त परफॉर्मेंस दी। तीनों की परफॉर्मेंस से ऑडियंस भी खुशी से झूम उठी।
पूर्व तृणमूल सांसद कृष्णा बोस का निधन
कोलकाता : शिक्षक से राजनीतिज्ञ बनीं कृष्णा बोस का शनिवार सुबह निधन हो गया। वह 89 वर्ष की थीं और आयु संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थीं। पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि जादवपुर निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसद बोस कुछ समय से बीमार चल रही थीं। वह आयु संबंधी बीमारियों से ग्रस्त थीं। कुछ दिनों पहले उन्हें दूसरा स्ट्रोक आया था और वह आईसीयू में भर्ती थीं। कृष्णा बोस की शादी सुभाष चंद्र बोस के भतीजे शिशिर बोस से हुई थी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया कि मैंने बहुत ही सम्माननीय और प्रिय कृष्णा बोस को खो दिया। उनके निधन की खबर सुनकर दुखी और सदमे में हूं।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी शिशिर बोस की पत्नी पूर्व तृणमूल सांसद कृष्णा समाज सुधारक, मशहूर कवि और साहसी शिक्षाविद भी थीं। कृष्णा बोस सबसे पहले वर्ष 1996 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा सांसद चुनी गईं और उसके बाद 1998 और 1999 में वह तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर भी जीतकर लोकसभा पहुंचीं। बोस के दो बेटे सुगत और सुमंत्र के अलावा बेटी शर्मिला हैं। ढाका में 26 दिसंबर 1930 को जन्मीं कृष्णा बोस ने करीब 40 वर्षों तक कोलकाता के सिटी कॉलेज में अध्यापन किया। वह बाद में इस कॉलेज की प्रधानाचार्य भी रहीं।
संस्कृत में वर्चुअल पाठ्यक्रम की तैयारी
नयी दिल्ली : श्री लालबहादुरशास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम संस्कृत माध्यम में एक ऐसा आभासी संसार तैयार कर रहा है जहां छात्र कम्प्यूटर साफ्टवेयर के माध्यम से न केवल पढ़ाई कर सकेंगे बल्कि उन्हें पाठ का अभ्यास करने की सुविधा और समस्या आने पर प्राध्यापकों का मार्गदर्शन भी मिलेगा ।
पीटीआई ने विद्यापीठम के कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडे के हवाले से बताया कि श्री लालबहादुरशास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम, संस्कृत माध्यम में वर्चुअल पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है । यह कार्य छह महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और सितंबर तक तैयार हो जायेगा । हम जुलाई 2020 से वर्चुअल कक्षाएं शुरू हो जायेंगी ’’ उन्होंने कहा, ‘‘टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने संस्कृत संस्थाओं के कुलपतियों के साथ बैठक के बाद इस वर्चुअल पाठ्यक्रम को प्लेटफार्म प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की है । ’’ संस्कृत में वर्चुअल कक्षा एक ऐसी अनोखी पहल है जिसे कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर के माध्यम से अमल में लाया जायेगा । इसमें वीडियो, ऑडियो सामग्रियों को एकीकृत कमान के तहत जोडा जाएगा । छात्रों का मार्गदर्शन करने के लिए प्राध्यापक भी उपलब्ध रहेंगे। वेब आधारित इस पहल में सुदूर क्षेत्रों के छात्रों को पढ़ाई करने की सहुलियत मिलेगी ।
प्रो. पांडे ने बताया कि संस्कृत के विद्वान वर्चुअल पाठ्यक्रम को तैयार कर रहे हैं । अभी यह 16 विषय श्रेणी में तैयार किया जा रहा है । विभिन्न श्रेणियों में वेद परिचय, वास्तुकला, व्याकरण, ज्योतिष शास्त्र, पौरोहित, मीमांसा प्रवेशिका, न्याय वैशेषिक, जैन दर्शन आदि शामिल हैं । उन्होंने कहा, ‘‘ जो छात्र कालेज या शिक्षण संस्थानों में नहीं पहुंच सकते, उनके लिये यह वर्चुअल कक्षाएं तैयार की जा रही हैं । प्राचीन भाषा को प्रौद्योगिकी के संयोग से आगे बढ़ाने की यह महत्वपूर्ण पहल है । ’’ गौरतलब है कि देश में संस्कृत के तीन प्रमुख संस्थान श्री लालबहादुरशास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठम, राष्ट्रीय संस्कृत विद्यापीठ तिरूपति और राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान में अभी करीब 16 हजार छात्र पढ़ाई करते हैं ।
विद्यापीठम के कुलपति ने बताया कि इसके अलावा संस्थान ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एक योजना के तहत संस्कृत पाठ्यसामग्रियों को ई..डिजिटल प्रारूप में तैयार किया है । उन्होंने बताया कि संस्कृत माध्यम को रोजगारोन्मुखी बनाने के लिये हाल ही में ‘वास्तु शास्त्र’ में पाठ्यक्रम तैयार किया गया है जिसमें स्कूल आफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर ने सहयोग दिया है । उन्होंने बताया कि छात्रों के रोजगार की दृष्टि से संस्थान में कैम्पस प्लेंसमेंट का भी आयोजन होता है।
बच्चों के स्वस्थ एवं खुशहाल जीवन के मामले में भारत 131वें स्थान पर
संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक रिपोर्ट आई है जिसके मुताबिक संवहनीयता सूचकांक (सस्टेनेबिलीटी इंडेक्स) के मामले में भारत 77वें स्थान पर है और बच्चों की उत्तर जीविता, पालन-पोषण तथा खुशहाली से संबंधित सूचकांक (फ्लोरिशिंग इंडेक्स) में उसका स्थान 131वां है।
संवहनीयता सूचकांक प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन से जुड़ा है जबकि खुशहाली सूचकांक का संबंध किसी भी राष्ट्र में मां-बच्चे की उत्तर जीविता, पलने, बढ़ने तथा उसके कल्याण से है।
दुनियाभर के 40 से अधिक बाल एवं किशोर स्वास्थ्य विशेषज्ञों के एक आयोग ने बुधवार को रिपोर्ट जारी की है। यह शोध विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), संरा बाल कोष (यूनिसेफ) तथा दी लांसेट मेडिकल जर्नल के संयुक्त तत्वावधान में हुआ है। रिपोर्ट में 180 देशों की क्षमता का आकलन किया गया है कि वे यह सुनिश्चित कर पाते हैं या नहीं कि उनके यहां के बच्चे पलें-बढ़ें और खुशहाल रहें। रिपोर्ट के मुताबिक संवहनीयता सूचकांक के मामले में भारत का स्थान 77वां और खुशहाली के मामले में 131वां है।
खुशहाली सूचकांक में आता है माता एवं पांच साल से कम आयु के बच्चों की उत्तर जीविता, आत्महत्या दर, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुविधा, बुनियादी साफ-सफाई और भीषण गरीबी से मुक्ति तथा बच्चे का फलना-फूलना आदि।
इसमें कहा गया कि विश्व की संवहनीयता बच्चों के फलने-फूलने की क्षमता पर निर्भर करती है लेकिन कोई भी देश अपने नौनिहालों को टिकाऊ भविष्य देने के पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहा है। रिपोर्ट के अग्रणी शोधकर्ताओं में से एक यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में विश्व स्वास्थ्य एवं संवहनीयता के प्रोफेसर एंथनी कोटेलो ने कहा, ‘‘दुनिया का कोई भी देश ऐसी परिस्थितियां मुहैया नहीं करवा रहा है जो हर बच्चे के विकसित होने और स्वस्थ्य भविष्य के लिए आवश्यक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बल्कि उन्हें तो जलवायु परिवर्तन तथा व्यावसायिक मार्केटिंग का सीधे-सीधे खतरा है।’’ उत्तर जीविता, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं पोषण दरों के मामलों में नॉर्वे पहले स्थान पर है। इसके बाद दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, मध्य अफ्रीकी गणराज्य और चाड है। हालांकि प्रतिव्यक्ति कार्बन उत्सर्जन के मामले में चाड को छोड़कर बाकी के ये देश बहुत पीछे हैं।
जो देश 2030 के प्रतिव्यक्ति कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य के मुताबिक चल रहे हैं वे हैं अल्बानिया, आर्मेनिया, ग्रेंडा, जॉर्डन, मोलदोवा, श्रीलंका, ट्यूनीशिया, उरुग्वे तथा वियतनाम।
घर खरीदारों की सुविधा के लिए क्रेडाई ने लॉन्च किया एप
नयी दिल्ली : घर खरीदारी की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए क्रेडाई ने क्रेडाई आवास एप लॉन्च किया है। क्रेडाई के मुताबिक एप के जरिए घर खरीदार पसंदीदा प्रोजेक्ट की पहचान कर सीधे डेवलपर से संपर्क कर सकते हैं। इस ऐप पर 220 शहरों के 20 हजार से ज्यादा क्रेडाई सदस्यों के प्रोजेक्ट्स शामिल किए गए हैं। । इस एप को एप्पल ऐप स्टोर और गूगल के प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। इस ऐप का इस्तेमाल घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार के खरीदार कर सकते हैं। क्रेडाई ने बयान जार कर कहा है कि इस ऐप पर घर खरीदारों के हितों का खयाल रखते हुए भरोसेमंद डवलपर्स को एक प्लेटफॉर्म पर लाया गया है। इससे घर खरीदने के दौरान मिडिलमैन से मुक्ति मिलेगी और पूरी प्रक्रिया में पार्दर्शिता आएगी। क्रेडाई के चेयरमैन जक्षय शाह ने कहा कि यह एक अनुभवात्मक और परस्पर संवाद वाला प्लेटफॉर्म है। इस ऐप के माध्यम से खरीदार प्रॉपर्टी के संबंध में पूरी जानकारी ले सकेगा, जिससे वह खरीदारी संबंधी फैसला ले सके। इस ऐप के माध्यम से खरीदार को घर खरीदने का एक स्मूद अनुभव मिलेगा। इस ऐप के माध्यम से पूरे हो चुके प्रोजेक्ट को तेजी से बेचने में मदद मिलेगी और घर खरीदारों का सेंटीमेंट बड़े स्तर पर मजबूत होगा।
उत्साहवर्द्धन / जमकर थिरकीं वेलस्पन इंडिया की सीईओ
वेलस्पन इंडिया की सीईओ दीपिका गोयल ने ऑफिस में डांस किया। उन्होंने इसका एक वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया। इस वीडियो को उन्होंने आनंद्र महिंद्रा समेत कई उद्योगपतियों को ट्वीट किया। उनके इस पहल को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। कई उद्योगपतियों ने दीपिका को कर्मचारियों को प्रेरित करने के इस पहल की सराहना की। वीडियो में दीपिका स्ट्रीड डांसर 3 डी के गाना मुकाबला पर थिरकतीं नजर आईं। डांस समाप्त होने के बाद सभी सहकर्मियों ने ताली बजाकर उनकी तारीफ की।
महिला ने एंटी-कोरोनावायरस टेंट बनाया ताकि बेटी घर के बाहर ऑनलाइन पढ़ाई कर सके
वुहान : चीन में लोगों को कोरोनावायरस के कहर की वजह से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। बाजार, ऑफिस और ट्रांसपोर्ट बंद हैं। लोग घर में कैद हैं। यहीं से काम कर रहे हैं। ऐसा ही नजारा हुबेई प्रांत के सुदूर गांव में देखने को मिला। यहां एक महिला ने अपनी बेटी की ऑनलाइन क्लासेस के लिए घर से बाहर एंटी-कोरोनावायरस टेंट बनाया है। दरअसल, उसके घर के अंदर इंटरनेट नेटवर्क ठीक से नहीं मिलता है। इसलिए उसने घर के बाहर टेंट लगाकर अस्थाई क्लास रूम बना दिया। अब उसकी बेटी बी मेनगी रोज यहां बैठकर बिना किसी रुकावट के ऑनलाइन क्लास ज्वाइन करती है।
चीन के कई प्रांतों में स्कूल और कॉलेज की छुट्टियां घोषित कर दी हैं। स्कूल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं, ताकि उन्हें वायरस के संक्रमण से बचाया जा सके। वायरस के कारण स्कूलों में छुटि्टयां घोषित कर दी गयी हैं। लेकिन बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए शिक्षक ट्यूटोरियल बनाकर मोबाइल एप और लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए कक्षाएं ले रहे हैं।
कोरोनावायरस से बचने के लिए लोग कुछ अलग तरीके भी अपना रहे हैं। सिचुआं प्रांत के शहर लुजोहू में एक महिला इस वायरस से बचने के लिए एक बड़ा सा जिराफ कॉस्ट्यूम पहनकर घूम रही है। पिछले दिनों एक हॉस्पिटल में यह महिला जिराफ कॉस्ट्यूम पहनकर पहुँची, जहाँ किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल दिया। महिला की पहचान सिर्फ नाम से हुई है। उसने बताया कि मैं अपने पिता से मिलने अस्पताल पहुँची थी। उसने कहा कि लोग मेरे बारे में क्या सोचते हैं। इससे फर्क नहीं पड़ता है।
मरने वालों की तादाद 2236 पहुँची
समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, चीन में गुरुवार को कोरोनावायरस के 411 नए मामले सामने आए। वहीं, मरने वालों की तादाद 2236 हो गई है। अभी तक 75400 से ज्यादा मामलों की पुष्टि हुई है।
महिलाओं के लिए वॉशरूम-ऑन-व्हील्स शुरू, महिलाएँ करती हैं देखरेख
स्तनपान के अलावा डायपर, नैपकिन खरीदने की भी सुविधा
पुणे : पुणे में वॉशरूम-ऑन-व्हील्स’ सुविधा इन दिनों चर्चा में। कोई भी महिला पांच रुपये के शुल्क में वॉशरूम और स्तनपान के लिए इसका इस्तेमाल कर सकती है। इसके अलावा, यहां से कोई भी महिला सैनेटरी नेपकिन और डायपर खरीद सकती है।
उद्यमी उल्का सादलकर और राजीव खेर ने इसे शुरू किया है। 12 बसों को शौचालय में बदला गया है। इनका दावा है कि हर रोज औसतन 200 से ज्यादा महिलाएं इनका इस्तेमाल करती हैं। बिजली के लिए इन बसों की छत पर सोलर पैनल भी लगाए गए हैं।
देश के अलग-अलग शहरों में 1000 से ज्यादा शौचालय बनाएंगे
सादलकर ने बताया हमें लगता है कि महिलाओं को स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय मिलना चाहिए और यह उनका मूलभूत अधिकार है। इसलिए हमारी कोशिश है कि अगले पांच साल में हम देश के अलग-अलग शहरों में 1000 से ज्यादा ऐसे शौचालय बनाएं। इनका कहना है कि महिलाओं ने भी इस काम की सराहना की है।
शौचालय का इस्तेमाल करने वाली 18 साल की सुवर्णा डोंगरे कहती हैं कि ऐसी सेवा सभी जगह होनी चाहिए। ये शौचालय बहुत ही आरामदायक और सुरक्षित हैं। इन शौचालयों में काम करने वाली 40 साल की मनीषा अधव कहती हैं कि महिलाओं के लिए काम करने के लिए मुझे अच्छा लगता है। वह बताती हैं कि आसपास सार्वजनिक शौचालय नहीं होने की वजह से यहाँ महिलाएं दूर-दूर से आती हैं।
रखरखाव नहीं होता सार्वजनिक शौचालयों का
केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत देश भर में लाखों शौचालय बनाए गए हैं। लेकिन पानी और बिजली की कमी की वजह से ये इस्तेमाल नहीं होती हैं। राज्य सरकारें भी इनका रखरखाव नहीं कर पाती हैं।




