कासरगोड : केरल के कासरगोड में शुक्रवार को छह लोगों में कोरोना संक्रमण की जांच की गई, सभी निगेटिव आए। यहां पिछले सात दिन में केवल 14 और 16 अप्रैल को एक-एक पॉजिटिव केस मिले, बाकी दिन एक भी मामला सामने नहीं आया।
जिले में अब तक दर्ज हुए 167 मामलों में से केवल 51 अस्पताल में हैं और बाकियों को घर भेज दिया गया है। इसकी वजह ‘केरल की कासरगोड पहल’ को माना जा रहा है। पुलिस ने एक रणनीति के तहत लॉकडाउन लागू करवाया है। इसे मॉडल के रूप में देश में बाकी हॉटस्पॉट के लिए अनुकरणीय माना जा रहा है।
खाड़ी देशों से आने वालों पर विशेष नजर रखी…
विदेश से आए लोगों और कोविड-19 मरीजों के पहले व दूसरे स्तर पर संपर्क में आए लोगों को अलग किया गया। ऐसे लोगों पर खास नजर रखी गई जो खाड़ी देशों से आ रहे थे। यह इसलिए क्योंकि यहां तीसरा संक्रमित मामला चीन से आए व्यक्ति में मिला था तो वहीं कई लोग मध्य पूर्वी एशिया से भी यहां आए थे। 15% संक्रमित एनआरआई थे।
तीन लॉक की रणनीति…
लॉक 1 : यहां पारंपरिक रूप से पुलिस ने अपना काम किया। सड़कों को रोका, मोबाइल पेट्रोलिंग करवाई गई। फायदा यह हुआ कि लोगों के घर से बाहर आने पर नियंत्रण हो गया।
लॉक 2 : इसमें जीआईएस तकनीक का उपयोग कर संक्रमित लोगों, क्वारंटीन हुए लोगों, विदेश से आए लोगों और उनसे पहले व दूसरे स्तर पर संपर्क में आए लोगों की मैपिंग हई। किसी को यहां आने या बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
लॉक 3 : सातों क्षेत्रों को कोविड सीमा क्षेत्र में बदले जिले के बाकी हिस्सों से काट दिया गया। विदेश से लौटे जो लोग अपने घर गए और जिन परिजन, रिश्तेदारों व दोस्तों से मिले, पुलिस ने उन सबकी सूची बनाई। घरों के बाहर पुलिस बैठी।
भीलवाड़ा संक्रमण मुक्त जिला
कोरोना महामारी से पहले चरण की जंग जीतकर देश में राेल मॉडल बना राजस्थान काभीलवाड़ा जिला फिलहाल पॉजीटिव रोगियों से मुक्त हो गया है। कलेक्टर राजेन्द्र भट्ट ने बताया कि भीलवाड़ा में अब कोई कोरोना पॉजीटिव नहीं है। वर्तमान में अस्पताल में अभी सिर्फ दो मरीज भर्ती हैं, जिनकी लगातार दो रिपोर्ट नेगेटिव आ चुकी है।
तीसरी नेगेटिव रिपोर्ट आने के बाद इनको अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा उसके बाद वे घर पर 14 दिन के क्वारंटीन में रहेंगे। अब तक आए कुल 28 संक्रमितों में से 24 रोगी अस्पताल से स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं। भट्ट ने बताया कि ऐसी विभीषिका का सामना पहली बार होने से चुनौति बड़ी थी। डॉक्टर्स, मेडिकल सहित सभी के सहयोग से स्थिति नियंत्रण में हो गई है।
दो हफ्ते पहले तक देश का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट केरल का कासरगोड मॉडल बनकर उभरा
मजदूरों के मसीहा बने साइकिलिस्ट मैक्सवेल
मजबूर प्रवासियों को खिला रहे खाना
दिल्ली और मुंबई की तरह लॉकडाउन के चलते बिहार, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के दिहाड़ीदार मजदूरों के हैदराबाद और सिकंदराबाद में फंसे होने की खबर मैक्सवेल ट्रेवर के कानों में भी पड़ी। कुछ को मकान मालिकों ने घर से निकाल दिया था। सैकड़ों जहां खुले आसमान के नीचे थे तो सैकड़ों ने रेलवे की खंडहर इमारतों को ठिकाना बना लिया। मैक्सवेल के लिए यह पीड़ा ओलंपिक नहीं खेल पाने से भी बढ़कर थी। 1980 से लेकर 1990 तक लगातार दस बार के राष्ट्रीय चैंपियन रहे इस एकमात्र साइकिलिस्ट ने इन मजदूरों को दोनों समय का खाना उपलब्ध कराने की ठान ली। शुरुआत में दिक्कत आई, लेकिन अब सिकंदराबाद में मैक्सवेल की मदद को कई अन्य आ गए हैं।
सरकार की मंजूरी से खाना खिलाना शुरू किया
मैक्सवेल ने कहा कि पहले वह इनकी मदद का रास्ता खोजते रहे। एक दिन दोस्त उमाकांत को फोन पर कहा कि वह दिहाड़ीदारों को खाना खिलाने जा रहे हैं। दोस्त ने कहा कि ऐसे करोगे तो फंस जाओगे, पहले राज्य सरकार को बता दो। उन्होंने फिर जिला प्रशासन को फोन कर मंजूरी हासिल की। हैदराबाद में दिहाड़ीदारों को काम पर ले जाने के लिए जगह-जगह लेबर अड्डे लगते हैं। पहले वह इन्हीं अड्डों पर गए। जब वह खाना देने लगे तो सभी सामाजिक दूरी भूल उनके पास टूट पड़े। मैक्सवेल कहते हैं कि भला भूख के आगे सामाजिक दूरी का पालन भी कैसे हो। उन्हें लगा यह काम आसान नहीं है। लेकिन काफी समझाने के बाद अब मजदूर लाइन में लगकर खाना लेते हैं। कुछ जगहों पर अब भी दिक्कत आ रही है। शरुआत में उन्होंने कुछ स्थानों को चुना था, लेकिन अब दायरा बढ़ गया है। अभी वह सिकंदराबाद के तारनाक, हुबसीगुडा, मेट्टागुडा, सीताफलमंडी, लाल्लागुडा, लालपेट और उसके आसपास के इलाकों में खाना खिला रहे हैं।
अकादमी के शिष्य भी जुटते हैं साथ में
1982 और 1986 के एशियाई खेलों में शिरकत करने वाले मैक्सवेल की हैदराबाद में साइकिलिंग अकादमी है। उनके साथ खाना बांटने के काम में उनके शिष्य भी जुटते हैं। शुरुआत खाने के छह सौ पैकेट से की थी। अब यह संख्या बढ़ती जा रही है। लोगों को जब उनके बारे में पता लगा तो वे राशन से लेकर आर्थिक मदद कर रहे हैं।
10 दोस्तों ने तोड़ी गुल्लक, अब ‘एक पहल’ से खिला रहे जरूरतमंदों को खाना
नयी दिल्ली : हर सुबह नजफगढ़ में सात बजे 10 युवा एक खाली प्लॉट में इकट्ठा होते हैं और खाना बनाना शुरू करते हैं। सुबह 11 बजे तक खाना बनकर तैयार हो जाता है फिर एक घंटे तक इस खाने को पैक किया जाता है। इसके बाद ये लोग दोपहर में जय विहार स्थित लाल स्टेडियम पहुंचते हैं और खाने के पैकेट बांटते हैं।
यह युवा किसी संस्था आदि से ताल्लुक नहीं रखते बल्कि ये सभी दस युवा 12वीं के छात्र हैं और दिल्ली के विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। ये सभी बोर्ड परीक्षा दे चुके हैं और इनका मानना है कि यह समय घर में बैठने का नहीं बल्कि लोगों के लिए कुछ करने का है।
जब लॉकडाउन शुरू हुआ और वो लोग जो अपने घर नहीं जा सके और इस वक्त शहर के तमाम शिविरों में रह रहे हैं उनके लिए इन दस युवाओं ने कुछ करने की सोची। इसके लिए उन्होंने अपने गुल्लक तोड़े और पॉकेट मनी का पैसा मिलाकर लोगों को खाना बांटने की सोची। छह दिन में ये छात्र 1200 से ज्यादा लोगों को खाना खिला चुके हैं।
रौनक चौधरी जो द्वारका के स्कूल ऑफ एक्सिलेंस में विज्ञान स्ट्रीम के छात्र हैं उनका कहना है कि जब हमने सुना कि दिल्ली सरकार लोगों को खाना बांट रही है तो हमने सोचा कि हम भी उनकी सहायता करते हैं। हमने एक समूह बनाया जिसका नाम रखा ‘एक पहल’ उसकी मदद से पैसा जुटाया और अब खाना बनाकर लोगों को बांट रहे हैं।
उनके दोस्त अभिषेक चौधरी जो दिचांव कलां के सर्वोदय विद्यालय के छात्र हैं, का कहना है कि, नजफगढ़ में हमारे घर के पास एक खाली प्लॉट है। सबसे पहले हमने बर्तन जुटाए, फिर गैस और सिलिंडर लाकर प्लॉट में खाना पकाने लगे। हमारा एक दोस्त जो जानता है कि ज्यादा मात्रा में खाना कैसे बनाते हैं, उसने हमारी बहुत मदद की।
स्विट्जरलैंड के आल्प्स पर्वत पर चमका तिरंगा
पूरी दुनिया इस समय कोरोना वायरस के खतरे से जूझ रही है। इसके चलते हमारे देश में लॉकडाउन जारी है, जिसकी वजह से लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। कोरोना के संकट को देखते ही भारत सरकार ने जिस तेजी से निर्णय लिए, उसकी प्रशंसा विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसे संगठन भी कर चुके हैं।
कोरोना से लड़ने के भारत के तरीके की दुनियाभर में सराहना हो रही है। स्विट्जरलैंड ने भी भारत की प्रशंसा की है, हालांकि उसका तरीका थोड़ा अनूठा रहा। दरअसल स्विट्जरलैंड ने आल्प्स के मैटरहॉर्न पर्वत पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की रोशनी की।
इस रोशनी के जरिए स्विजट्जरलैंड ने कोरोना महामारी से जीतने की उम्मीद और जज्बे का संदेश दिया है। स्विट्जरलैंड में भारतीय दूतावास ने इस फोटो को ट्विटर पर शेयर किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा कि पूरी दुनिया कोविड-19 से लड़ाई में एकजुट है। मानवता निश्चित रूप से इस महामारी से जीतेगी।
स्विट्जरलैंड के मशहूर लाइट आर्टिस्ट गेरी हॉफस्टेटर ने 14,690 फीट के पहाड़ को तिरंगे के आकार में रोशनी दी थी। बता दें कि इस पहाड़ पर 24 मार्च से कोरोना महामारी के खिलाफ दुनिया की एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए हर दिन अलग-अलग देशों के झंडों को दर्शाती हुई रोशनी की जाती है।
इस पहाड़ पर स्विट्जरलैंड, अमेरिका, ब्रिटेन, इटली और स्विस क्षेत्र टिसिनो के झंडों को दर्शाती हुई रोशनी की जा चुकी है। गेरी हॉफस्टेटर ने बताया कि प्रकाश का मतलब आशा और उम्मीद होता है।
गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड में अब तक 18,000 से अधिक लोग संक्रमित पाए गए हैं जबकि 430 लोगों की जान भी जा चुकी है। इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार ने स्कूल, बार, रेस्तरां और गैर जरूरी चीजों की दुकानें बंद कर दी हैं।
सीएसआईआर ने कोरोना वॉरियर्स के लिए तैयार किया सुरक्षा कवच
नयी दिल्ली : वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएएल) ने बंगलूरू की एमएएफ क्लोथिंग प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर कोरोना वॉरियर्स के लिए एक खास सुरक्षा कवच तैयार किया है। कई परत वाले पॉलीप्रोपलिलिन स्पून लैमिनेटेड सिंथेटिक से बना ये कवच स्वास्थ्य कर्मियों को पूरी तरह संक्रमण से दूर रखेगा। यह कोरोना से जंग लड़ रहे डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ और हेल्थ केयर वर्कर्स की 24 घंटे सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
डॉ. हरीश सी बरशिलिया और डॉ. हेमंत कुमार शुक्ला के नेतृत्व में सीएसआईआर-एनएएल की टीम ने पूरी तरह स्वदेशी सामग्री से नई तरह की प्रक्रियाओं की पहचान कर इसे बनाया है। इसका सीआईटीआरए कोयंबटूर में सख्त कसौटी पर कसा गया। टेस्ट में पास होने के बाद ही इसके विनिर्माण को अनुमति दी गई है। अब इस सुरक्षा कवच का उत्पादन बढ़ाने की योजना है। अभी चार सप्ताह के भीतर हर दिन 30 हजार सुरक्षा कवच बनाए जा सकेंगे।
सीएसआईआर-एनएएल के निदेशक जितेंद्र जे जाधव ने कहा, इस कवच की खास बात यह है कि इस तरह के अन्य कवर बनाने वाली कंपनियों की तुलना में यह खासा विश्वसनीय है।
धोनी-रोहित चुने गए आईपीएल के सर्वकालिक महान कप्तान
चेन्नई सुपर किंग्स के करिश्माई कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और मुंबई इंडियंस के रोहित शर्मा को संयुक्त रूप से इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का सबसे महान कप्तान घोषित किया गया। इन दोनों खिलाड़ियों का चयन स्टार स्पोर्ट्स के 50 लोगों की चयन समिति ने किया, जिसमें 20 पूर्व क्रिकेटरों के साथ 10 खेल पत्रकार, 10 सांख्यिकीविद् और 10 विश्लेषक शामिल थे।
धोनी की अगुवाई में चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल के 11 में से 10 प्लेऑफ में पहुंचने में सफल रही है। टीम तीन बार चैम्पियन और पांच बार उपविजेता रही है। रोहित ने 2013 में मुंबई इंडियंस की कमान संभाली और उसे चार बार चैम्पियन बनाया।
दक्षिण अफ्रीका के एबी डिविलियर्स को सर्वकालिक महानतम बल्लेबाज जबकि श्रीलंका के लसिथ मलिंगा को महानतम गेंदबाज चुना गया। ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉटसन सर्वश्रेष्ठ हरफनमौला जबकि स्टीफन फ्लेमिंग को सर्वश्रेष्ठ कोच चुना गया।
रॉयज चैलेंजर्स बैंगलोर और भारतीय कप्तान विराट कोहली को महानतम भारतीय बल्लेबाज चुना गया। कोहली ने 177 आईपीएल मैचों में 5412 रन बनाए हैं। कोविड-19 महामारी के कारण आईपीएल के 13वें सत्र को अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया गया है।
अर्जुन पुरस्कार विजेता हैं महाभारत के ‘भीम’, एशियाड में हासिल किया था स्वर्ण
मुम्बई : दूरदर्शन पर बीआर चोपड़ा की महाभारत के पु:न प्रसारण से लोगों को पुरानी यादें फिर ताजा कर दी है। जैसे ही रामायण, महाभारत सहित पौराणिक शो के फिर प्रसारण शुरू हुए इनके कलाकारों के बारे में जानने-पढ़ने की जिज्ञासा लोगों में फिर जागी। महाभारत में भीम का किरदार निभाने वाले प्रवीण कुमार सोबती अपने लंबी चौड़ी कद-काठी के कारण पहचाने गए थे और इस शो से उन्हें खूब पहचान मिली। प्रवीण कुमार सोबती न केवल अभिनेता थे बल्कि एक एथलीट और बीएसएफ के जवान भी रह चुके हैं। महाभारत शो में कास्ट होने से पहले वह एथलीट ही थे। वह एशिया के नंबर वन खिलाड़ी रह चुके हैं। वे हैमर और डिस्क थ्रो में कमाल कर चुके हैं। 60 और 70 के दशक में भारतीय एथलिट्स में उन्होंने खूब शानदार प्रदर्शन किया था। वह 1967 में अर्जुन अवॉर्ड भी पा चुके हैं।
1966 के एशियन गेम्स में भारत ने एथलेटिक्स में 11 पदक जीते थे जिसमें 5 स्वर्ण, 5 कांस्य पदक थे। सोबती ने इनमें से दो पदक हासिल किए थे। यही नहीं बैंकॉक में एशियाड में उन्होंने डिस्क थ्रो में स्वर्ण पदक हासिल किया था। उन्होंने हैमर थ्रो में कांस्य भी पाया था। 1970 में भी अगले टूर्नामेंट में गोल्ड जीते थे। 1974 में उन्होंने तेहरान में रजत पदक जीता था।
एथलीट के रूप में उनका यह सफर यहीं खत्म नहीं हुआ। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी खूब अच्छा प्रदर्शन किया। किंग्सटन कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 1966 में हैमर थ्रो में रजत पदक हासिल किया था। उनके क्रेडिट में 1968 और 1972 में दो ओलंपिक पार्टिसिपेशन है।
बीआर चोपड़ा की महाभारत में भीम के रोल के लिए अभिनेता की तलाश में परेशान थे। उन्होंने मजबूत और लंबी कद-काठी का अभिनेता चाहिए था। उनके एक दोस्त ने ही यह जानकारी दी कि बीआर चोपड़ा उनसे मिलना चाहते है। उन्हें देखते ही भीम के रोल के लिए फाइनल कर लिया। बता दें कि चाचा चौधरी में साबू का किरदार भी प्रवीण ने ही निभाया है। वे 50 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं।
सरकार ने एफडीआई नीति में किया बदलाव
नयी दिल्ली : भारत सरकार ने एफडीआई नीति यानी फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट की अपनी नीति में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने कहा है कि अब भारत के पड़ोसी देशों, चीन, पाकिस्तान, बांग्लादेश की कंपनियों को भारतीय कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की अनुमति लेना होगा। बता दें, बीते दिनों चीन के बैंक ने एचडीएफसी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 1 फीसदी से अधिक कर ली थी। सवाल उठे थे कि कहीं चीन कोरोना वायरस के बाद कमजोर हुआ भारतीय अर्थव्यवस्था का फायदा तो नहीं उठाना चाह रहा है। इसे बाद ही सरकार ने शनिवार को यह घोषणा की।
दुनिया के एक बड़े धड़े का मानना है कि कोरोना वायरस चीन की साजिश है। इस सोच तब और बल मिलता है जब चीनी कम्पनियाँ कोरोना वायरस के कारण कमजोर हो चुकी दूसरे देशों की कम्पनियों में निवेश लेकर आती हैं। इसी आशंका को रोकने के लिए अमेरिका और यूरोपीय यूनियन ने चीनी कम्पनियों के निवेश को पूरी तरह रोक दिया है।
पाकिस्तान के जरिए भी चीन नहीं कर पाएगा निवेश
भारत सरकार को आशंका है कि चीन की कोई कंपनी पहले खुद को पाकिस्तान में रजिस्टर कर और इसके बाद भारत में निवेश करे। इसीलिए सरकार ने भारत की सीमा से सटे देशों की कंपनियों पर यह पाबंदी लगाई है। बता दें, अमेरिका पहले ही चीन पर भड़का हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्म्प खुलेआम कह चुके हैं कि कोरोना वायरस चीन के शहर वुहान की एक लैब में बन रहा था और इसे साजिशन बाकी दुनिया में फैसला गया है।
स्कूली बच्चों के लिए दूरदर्शन और आकाशवाणी ने शुरू की वर्चुअल कक्षाएँ
नयी दिल्ली : कोरोना वायरस संक्रमण और देशव्यपी लॉकडाउन के चलते सभी राज्यों में स्कूल बंद हैं। कई स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुई हैं, लेकिन अधिकांश स्थानों पर अलग-अलग तकनीकी माध्यम से बच्चों की पढ़ाई व्यवस्था की जा रही है। ऐसे में दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो ने वर्चुअल क्लासेस शुरू की है। ये वर्चुअल क्लासेस और शैक्षणिक कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रीय चैनलों, प्रसारण केंद्रों और यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित किए जा रहे हैं।
बता दें कि देशभर के स्कूल लॉकडाउन के चलते बंद हैं, ऐसे में ये वर्चुअल और ऑनलाइन कक्षाएं बच्चों के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है। खासतौर से जो बच्चे 10वीं और 12वीं कक्षा में हैं, जो प्रवेश परीक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां कर रहे हैं, उन्हें काफी फायदा मिल रहा है। इन कार्यक्रमों में कक्षावार केमिस्ट्री, गणित, बायाेलॉजी, इंग्लिश, बिजनेस स्टडी, साइंस सहित अन्य सभी विषयों के लेक्चर शामिल किए जा रहे हैं।
बता दें कि दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो ने प्राइमरी, मीडिल और हाई स्कूल स्तर के बच्चों के लिए पाठ्यक्रम आधारित कक्षाएं शुरू की हैं। इनमें वर्चुअल, ऑडियो, वीडियो सभी तरह की क्लासेस शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में 10वीं और 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए मॉडल क्वेश्चन पेपर और पूर्व के वर्षों की परीक्षाओं के प्रश्नों को शामिल करते हुए स्तरीय गेस पेपर भी बच्चों को मुहैया कराए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, केरल, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में दूरदर्शन केंद्रों ने अपने यहां वर्चुअल क्लासेस शुरू कर दी हैं। वहीं ऑल इंडिया रेडियो के विजयवाड़ा, हैदराबाद, बेंगलुरु, तिरुचिरापल्ली, कोयंबटुर, पुडूचेरी, मदुरै, त्रिवेंद्रम, पणजी, जलगांव, रत्नागिरी, सांगली, औरंगाबाद, पुणे, नागपुर, मुंबई, गंगटोक, गुवाहाटी, बीकानेर, उदयपुर, जोधपुर, जयपुर सहित अन्य प्रसारण केंद्रों से कार्यक्रम शुरू किए हैं।दूरदर्शन प्रति दिन औसतन ढाई घंटे के शैक्षणिक कार्यक्रम और ऑल इंडिया रेडियो 30 मिनट के कार्यक्रम प्रसारित कर रहा है।
हिंदी विश्वविद्यालय कोलकाता केंद्र में ऑनलाइन कक्षाएँ जारी
कोलकाता : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के क्षेत्रीय केंद्र, कोलकाता में लॉकडाउन को देखते हुए ऑनलाइन कक्षाएँ सुचारु तरीके से संचालित की जा रही हैं। केंद्र के प्रभारी डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ ने बताया कि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रजनीश कुमार शुक्ल के निर्देशन-मार्गदर्शन में यहाँ जनसंचार एवं हिंदी साहित्य में ऑनलाइन कक्षाएँ गूगल मीट, व्हाट्सअप, कॉन्फ्रेंस फोन कॉल आदि माध्यमों से नियमित रूप से संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को ईमेल और व्हाट्सअप द्वारा सहायक अध्ययन सामग्रियाँ लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं। डॉ सुनील ने बताया कि हमारे केंद्र के विद्यार्थी मुख्यालय वर्धा से जुड़कर भाषा विज्ञान की विशेष कक्षाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। अपनी नियमित कक्षाओं के अतिरिक्त विद्यार्थी अपने सत्रांत और संगोष्ठी पत्र लिखने में भी व्यस्त हैं, जिनके विषय बहुत पहले ही केंद्र द्वारा सभी विद्यार्थियों को आवंटित किए जा चुके हैं। इसके साथ-साथ एमए अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थी अपने परियोजना शोध कार्य में भी संलग्न हैं। विद्यार्थियों को केंद्र के अतिथि अध्यापकों डॉ ललित कुमार, डॉ शिवशंकर सिंह, डॉ आशा सिंह तथा प्रभारी डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’ द्वारा हर तरह का अकादमिक मार्गदर्शन एवं सहयोग मिल रहा है।




