Friday, June 19, 2026
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रंगभेद

कविता – निखिता पांडेय

आवृत्ति – पार्वती शॉ

शुभजिता के पाठकों तथा शुभचिन्तकों से

जब युद्ध होता है तो आप दोनों तरफ नहीं रह सकते। आपको पक्ष चुनना पड़ता है। हाल ही में होनहार अभिनेता सुशान्त सिंह राजपूत की मौत ने कई परदों को तार – तार कर दिया है। यह सिर्फ सुशान्त का प्रश्न नहीं है…यह हर उस प्रतिभाशाली युवा का प्रश्न है जो अपने सपने लेकर किसी अनजान शहर में जाता है…..उसे पूरा करने की कोशिश भी करता है मगर उसके आस – पास के स्थापित लोग उसका मनोबल गिराने का प्रयास करते हैं…जाहिर है कि जब पूरा शहर किसी एक युवा के पीछे पड़ता है, उसके खिलाफ साजिशें करता है, तब उसके लिए अकेले लड़ना कठिन हो जाता है…बॉलीवुड ही नहीं हर जगह बड़ी मछली, छोटी मछलियों को खाने की कोशिश करती है…यही होता आ रहा है।

अब सवाल यह है कि हमारा दायित्व क्या है? ये बहुत आसान है कि तटस्थता के नाम पर हम सब यथावत रहने दें….मगर क्या यह अन्याय को प्रोत्साहन देना नहीं है…क्या चढ़ते सूरज को सलाम करने वाली हमारी मानसिकता दोषी नहीं है जो इस सूरज की चकाचौंध में उसके तमाम अपराधों को अनदेखा करती आ रही है….हम नहीं जानते कि सच क्या है मगर सर्वविदित है कि लॉबी तो सक्रिय है…क्या हमने आउटसाइडर कहे जाने वाली इन प्रतिभाओं को अपना सहयोग दिया होता तो स्थिति अलग नहीं होती…मगर हमें तो सफलता देखने की आदत है…यह सही है कि बहिष्कार हो रहा है…होना भी चाहिए…मगर क्या फिर से इनकी चमचमाती रोशनी हमारी आँखों पर परदा नहीं डालेगी, इसकी क्या गारण्टी है…सवाल यह है कि हम अपने बच्चों को किस तरह का भविष्य देना चाहते हैं और दे क्या रहे हैं…क्यों उम्मीद की जाए कि हमारे बच्चों को काजल की कोठरी में सहारा मिलेगा जहाँ जाकर सब काले हो जाते हैं।

अगर हालात बदलने हैं न फिर ऐसी प्रतिभाओं को सहारा दीजिए…अपने बच्चों को मत कहिए कि वह किसी शाहरुख, सलमान की नकल करे…अश्लील गीतों पर फूहड़ तरीके से ठुमके न लगाए…उसे कुछ मौलिक करवाइए..कुछ ऐसा कि वह इन सबसे आगे बढ़ जाए…जो उपेक्षा के अन्धेरे में सितारे हैं, उनको खोज निकालिए….चमकाइए..और सफलता के आकाश में टाँग दीजिए…उनको फॉलो कीजिए…समर्थन करिए…उनकी फिल्में…उनके नाटक…उनका संगीत…उनकी कला को अपना समर्थन दीजिए।

वह क्या है न चढ़ते सूरज को सलाम सब करते तो हैं…मगर यह नहीं जानते कि जब सूरज आकाश पर चढ़ जाए तो उसके ढलने का समय नजदीक होता है…मगर डूबते सूरज को सलाम करने का मतलब है कि वह आज नहीं तो कल…देर से ही सही…उगेगा जरूर…तो सवाल यह है कि पक्ष लेना तो जरूरी है तो हम भी आज पक्ष ले रहे हैं…हमको नहीं पता कि आपका कितना सहयोग मिलेगा…मिलेगा भी या नहीं…मगर सहयोग पाने के लिए समझौते तो नहीं हो सकते न….अब देखिए न…मैथिली ने बॉलीवुड कवर छोड़ दिया। जरा सोचिए तो उस छोटी सी बच्ची में कितनी हिम्मत है….तो
अब एक छोटा सा कदम अपना भी
छोटी ही सही पर शुभजिता में बॉलीवुड गैंग की कोई प्रोमोशनल खबर नहीं जाएगी। हम उनका प्रचार नहीं करेंगे।  कम से कम तब तक, जब ये सोच नहीं बदलती, समानता नहीं आती..यह पक्षपात दूर नहीं होता। हाँ, बीमारी और मौत की बात अलग है क्योंकि मानवता भी तो नहीं छोड़नी। स्कूप हम वैसे भी नहीं डालते।
वो जिनको आउटसाइडर कहते हैं और देश के तमाम संघर्षरत कलाकारों, फिल्मों, नाटक,संगीत, कला इन सबका स्वागत है।

तो किसी, खान, कपूर, चोपड़ा या स्टार किड की खबर आप नहीं देखेंगे

कला और हिन्दी का मतलब मुंबई नहीं होता
कोई प्रोफेशनलीज्म आत्मा की आवाज से, जमीर से बड़ा नहीं होता
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अगला सुपर स्टार कोई आउट साइडर होगा, और बिहारी होगा क्योंकि कड़वा सत्य है कि आज के युवा बिहार और बिहारी शब्द से परहेज करने लगे हैं…वह हर जगह अपमानित और उपेक्षित हो रहा है मगर भरोसा है और आप सब साथ रहे तो यह होगा भी…..

#सुशांत#

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(असुविधा के लिए खेद है)

कंगना ने खोली बॉलीवुड लिंचिंग की पोल

मुम्बई : फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद फिल्म एक्ट्रेस कंगना रनोट ने ‘नेपो-गैंग’ के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया हैl वह उनपर बाहरी व्यक्ति सुशांत सिंह राजपूत को दरकिनार करने का आरोप लगा रही है। अपने हालिया वीडियो में उन्होंने बताया है कि कैसे बॉलीवुड भावनात्मक और मानसिक रूप से बाहरी लोगों को परेशान करती हैं। मणिकर्णिका अभिनेत्री कंगना रनोट ने पहले बयान दिया कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या बॉलीवुड के भाई-भतीजावाद गिरोह के हाथों ‘सुनियोजित हत्या’ थी। उन्होंने एक बार फिर बॉलीवुड में व्याप्त भाई-भतीजावाद के खिलाफ जंग छेड़ी और कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में बड़े निर्माताओं ने सुशांत के काम को स्वीकार नहीं किया। अब अपने हालिया वीडियो में कंगना ने बॉलीवुड में एक बाहरी व्यक्ति के साथ होने वाले भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक, और मानसिक तनाव के बारे में बात की है।

आप भी सुनिए

मारुति के स्विफ्ट मॉडल ने पूरे किये 15 साल, 22 लाख से ज्यादा कारें बिकीं

नयी दिल्ली : मारुति सुजुकी की प्रीमियम हैचबैक कार स्विफ्ट को बाजार में आए 15 साल पूरे हो गए। इस दौरान कंपनी के इस मॉडल की 22 लाख से अधिक कारें बिकीं।
कम्पनी ने गत मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी कि वर्ष 2005 में पेश स्विफ्ट ने भारतीय बाजार में प्रीमियम हैचबैक कार श्रेणी को शुरू किया और एक अच्छा विरासत कायम की है।
इन 15 साल में इसकी 22 लाख से अधिक इकाइयां बिकीं और यह अपनी श्रेणी में सबसे ज्यादा बिकने वाली कार है।
स्विफ्ट की तीसरी पीढ़ी ने भी 2019-20 में प्रीमियम हैचबैक श्रेणी में करीब 30 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी हासिल की है।
मारुति सुजुकी इंडिया के विपणन और बिक्री कार्यकारी निदेशक शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि स्विफ्ट पहला ऐसा ब्रांड था जिसने हैचबैक को लेकर विभिन्न धारणाओं को चुनौती दी। यह एक कार से ज्यादा नया विचार थी। इसका डिजाइन यूरोपीय लुक के साथ काफी आकर्षक था। वहीं दूसरी तरफ यह उतनी ही किफायती भी है।

देसी-विदेश में बिकेगा दिल्ली आईआईटी की पूर्व छात्रा और प्रोफेसर का एन-सेफ मास्क

नयी दिल्ली : दुनियाभर में कोरोना महामारी का कहर जारी है। ऐसे में घर से बिना मास्क बाहर निकलने पर भारत समेत कई देशों ने पाबंदी लगा दी है। लेकिन बाजार में बिक रहे ज्यादातर मास्क सिंगल टाइम इस्तेमाल करने वाले है। तो कई मास्क वायरस को रोकने के लिए सक्षम नहीं है। वहीं ज्यादातर मास्क ईको-फ्रैंडली ना होने के कारण उनका सही से निस्तारण नहीं हो पाता है। और वे पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं।
इन सब बातों को ध्यान में रखकर दिल्ली आईआईटी की एलुमनी छात्रा डॉ. अनसूया रॉय और टेक्सटाइल एंड फाइबर इंजीनियरिंग विभाग, आईआईटी दिल्ली की निदेशक व स्टार्टअप की संस्थापक प्रोफेसर मंगला जोशी ने मिलकर एक एंटी-माइक्रोबियल और वॉशेबल फेस मास्क बनाया है। जो बाजार में एन-95 से कम कीमत के साथ-साथ 50 बार धोकर इस्तेमाल किया जा सकता है। एन-सेफ नाम का ये मास्क भारत के बाद अब दुनिया के कई देशों के बाजारों में बिकता नजर आएगा। क्यों कि विश्व के कई देशों ने इस मास्क की डिमांड के साथ-साथ इसे बनाने की तकनीक को खरीदने को तैयार है।

दुनिया में इसलिए बढ़ी भारतीय मास्क की माँग
मास्क को बनाने में आईआईटी दिल्ली की पूर्व छात्र और नैनो-सेफ सॉल्यूशंस की संस्थापक व सीईओ डॉ अनसूया रॉय ने बताया कि कोरोना वायरस के कारण दुनिया के कई देशों में लोगों में उत्पन्न एंटी चाइना सेंटिमेंट के चलते चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है। चीन दुनिया का मैन्यूफैक्चरिंग हब है क्यों कि वहां उत्पादन लागत कम आती है। लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण चीनी उत्पादों का दुनिया के कई देशों के साथ-साथ वहां के नागरिकों ने भी बहिष्कार कर रहे हैं। ऐसे में दुनियां में भारतीय मास्क की माँग ज्यादा होने लगी है।
आईआईटी दिल्ली की एलुमनी डॉ अनसूया रॉय और प्रो. मंगला जोशी द्वारा विशेष तकनीक से तैयार किए मास्क एन-सेफ की डिमांड यूनाइटेड किंग्डम, लेटिन अमेरिका, यूएस, मैक्सिको, दुबई, म्यांमार, नेपाल, अफ्रीका, कनाडा, वेस्टइंडीज, न्यूजीलैंड समेत कई देशों ने की है। यहां जल्द ही मास्क की बड़ी खेप निर्यात की जाएगी। साथ ही इनमें से कुछ देशों ने तकनीक ट्रांसफर कर वहीं पर साझेदारी में मास्क उत्पादन की भी मांग की है।
(साभार – दैनिक भास्कर)

नौकरी.कॉम ने पेश किया ‘नौकरी फास्‍ट फॉर्वर्ड ट्रांजिशन सर्विसेज’ फीचर

रोजगार खोने वालों को मिलेगा इसका लाभ
नयी दिल्ली : कोरोनावायरस महामारी के चलते बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी जा रही है। कंपनियां अपने कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेज रही हैं। ऐसे में लोग बेरोजगार हो रहे हैं। इसे देखते हुए नौकरी डॉट कॉम ने खास सेवा शुरू की है। इसका नाम है ‘नौकरी फास्‍ट फॉर्वर्ड ट्रांजिशन सर्विसेज’। यह सेवा कंपनियों से निकाले गए कर्मचारियों को रोजगार दिलाने में मदद करती है।
नौकरी ढ़ूढने में मदद के अलावा कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ाएगी
इस सर्विस में कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी। इनमें मोटिवेशनल स्‍पीकर वर्कशॉप, जॉब सर्च काउंसलिंग, जॉब असिस्‍टेंस सर्विसेज, डोमेन एक्‍सपर्ट के साथ इंटरव्‍यू मॉक सेशन और इंप्रूव्‍ड रेज्‍यूमे विजिबिलिटी फीचर शामिल हैं। नौकरी फास्‍ट फॉर्वर्ड के चीफ बिजनेस ऑफिसर विवेक जैन ने कहा, ”मौजूदा संकट में कंपनियां अपने कर्मचारियों की छंटनी करने के लिए मजबूर हैं। ऐसे में हमने छंटनी किए गए कर्मचारी के लिए इस सेवा को लॉन्‍च किया है। यह कर्मचारियों के आउट प्‍लेसमेंट में मदद करेगी। यह सेवा निकाले गए कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाएगी। साथ ही उन्‍हें चुनौतीपूर्ण जॉब मार्केट में नौकरी तलाशने में मदद करेगी।”
मई में नियुक्ति गतिविधियों में 61% की गिरावट
मई में देश में रोजगार गतिविधियों में 61 फीसदी की कमी आई है। नौकरी डॉट कॉम के मासिक रोजगार इंडेक्स ‘नौकरी जॉब स्पीक’ के मुताबिक, कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से मई में रोजगार गतिविधियों में 61 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। हाल में जारी मैनपावर ग्रुप के इम्‍प्‍लॉयमेंट आउटलुक सर्वे के मुताबिक, आगामी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मात्र पांच फीसदी कंपनियां ही फिलहाल नए लोगों को भर्ती करने की योजना बना रही हैं। यह पिछले 15 साल में सबसे खराब स्थिति है। ऐसे में रोजगार तलाशना वाकई कठिन है।
इन सेक्टर्स में है सबसे ज्यादा गिरावट
नौकरी.कॉम के मुताबिक, हायरिंग में गिरावट सबसे ज्यादा होटल, रेस्तरां, ट्रैवल और एयरलाइंस सेक्टर में आई है। इनमें करीब 91 फीसदी की गिरावट देखी गई है। जबकि रिटेल में 87 प्रतिशत, ऑटो एंसिलियरी में 87 प्रतिशत और बीएफएसआई में 70 प्रतिशत की गिरावट आई है। सर्वे में यह भी सामने आया है कि सभी शहरों में भर्ती में दो अंकों में गिरावट दर्ज की गई है। यह 50 प्रतिशत से ज्यादा है।

राजनीतिक विज्ञापनों को ब्लॉक कर सकेंगे फेसबुक और इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता

नयी दिल्ली : फेसबुक के प्रमुख मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि उसके उपयोगकर्ता अपने अकाउंट पर राजनीतिक विज्ञापनों को अपने से रोक सकेंगे। यह सुविधा इंस्टाग्राम के उपयोगकर्ताओं को भी मिलेगी। उपयोगकर्ताओं के अकाउंट में इस फीचर को जोड़ने की प्रक्रिया बुधवार से ही शुरू की जा रही है। गलत सूचनाओं वाले राजनीतिक विज्ञापनों को लेकर फेसबुक को काफी आलोचना झेलनी पड़ी है। फेसबुक के प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म ट्विटर ने पिछले साल अक्टूबर में राजनीतिक विज्ञापनों पर रोक लगा दी थी।
ब्लॉक किए जाने के बाद भी यदि विज्ञापन दिखेंगे, तो उपयोगकर्ता इसकी शिकायत कर सकेंगे
यूएसए टुडे में प्रकाशित अपने एक आलेख में जुकरबर्ग ने कहा कि हम एक फीचर ला रहे हैं, जिसकी मदद से राजनीतिक विज्ञापनों को टर्न ऑफ किया जा सकेगा। फेसबुक और उसकी सहायक कंपनी इंस्टाग्राम अपने उपयोगकर्ताओं को यह सुविधा देगी कि राजनीतिक विज्ञापनों के दिखने पर वे इन्हें टर्न ऑफ कर सकेंगे। सेटिंग में जाकर भी इन विज्ञापनों को ब्लॉक किया जा सकेगा। राजनीतिक विज्ञापनों को ब्लॉक किए जाने के बाद भी यदि वे दिखते रहेंगे, तो उपयोगकर्ता इसकी शिकायत भी कर सकेंगे।
‘पेड फॉर’ डिस्क्लेमर वाले विज्ञापनों को किया जा सकेगा टर्न ऑफ
राजनीतिक विज्ञापनों को ब्लॉक करने वाले फीचर को जोड़ने की प्रक्रिया बुधवार से ही शुरू की जा रही है। इस फीचर के सहारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ता ऐसे विज्ञापनों को टर्न ऑफ कर सकेंगे, जिन पर ‘पेड फॉर’ का डिस्क्लेमर लगा होगा। अगले कुछ सप्ताह में सभी अमेरिकी उपयोगकर्ताओं के अकाउंट्स में यह फीचर उपलब्ध हो जाएगा। कुछ महीने ऑटम सीजन में यह सुविधा अन्य देशों के अकाउंट होल्डर्स को भी मिल जाएगी।

अमेरिका में राष्ट्र्रपति चुनाव से पहले सोशल मीडिया की भूमिका चर्चा में आ गई है
अमेरिका में नवंबर में राष्ट्र्रपति चुनाव होना है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पहले सोशल मीडिया की भूमिका भी काफी चर्चा में है। मई में अमेरिका के राष्ट्र्रपति डोनाल्ड ट्र्रंप ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किया था, जिसका मकसद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को मिली कुछ कानूनी सुरक्षा को हटाना है। ट्रंप कई बार ट्विटर और फेसबुक जैसी कंपनियों पर राजनीतिक पक्षपात करने का आरोप लगा चुके हैं।

फ्लिपकार्ट 90 मिनट में पहुँचाएगी सामान, लॉजिस्टिक्‍स स्‍टार्टअप शैडोफैक्‍स से मिलाया हाथ

नयी दिल्ली : ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट आपके घर पर सामान की डिलीवरी सिर्फ 90 मिनट में ही कर देगी। इसके लिए कंपनी एक अलग बिजनेस सेगमेंट शुरू करने की तैयारी में है। इस नए प्रोजेक्ट के तहत कंपनी लोकल स्‍टोरों से संपर्क करके ग्रॉसरी सर्विसेज से इसकी शुरुआत करेगी। सूत्रों की माने तो यह सर्विस एक महीने में लॉन्‍च हो सकती है।
कैसे काम करेगी योजना
90 मिनट में आपके घर तक सामान पहुंचाने के लिए कंपनी लोकल स्‍टोरों और अपने केंद्रों का सहारा लेगी। इस सुविधा के साथ कंपनी हाइपर लोकल सेगमेंट में उतरना चाहती है। रिलायंस की जियो मार्ट और अमेजन जैसी कंपनियों के इस सेगमेंट में उतरने से कॉम्पिटिशन काफी बढ़ गया है। ऐसे में फ्लिपकार्ट खुद को बेहतर बनाने पर काम कर रही है।
लॉजिस्टिक्‍स स्‍टार्टअप शैडोफैक्‍स से मिलाया हाथ
फ्लिपकार्ट ने इसके लिए लॉजिस्टिक्‍स स्‍टार्टअप शैडोफैक्‍स से हाथ मिलाया है। यह इस सेगमेंट में एंट्री करने में फ्लिपकार्ट की मदद करेगी। सूत्रों की माने तो यह सर्विस एक महीने में लॉन्‍च हो सकती है। शुरुआत में फ्लिकार्ट अपने डार्क स्‍टोर या लोकल वेयरहाउस और चुनिंदा दुकानों से डिलीवरी शुरू करेगी और समय के साथ इसका विस्तार करेगी।
जियो मार्ट ने हाल ही में 200 शहरों में शुरू की डिलीवरी सर्विस
रिलायंस इंडस्ट्रीज की ऑनलाइन ग्रॉसरी सर्विस प्लेटफॉर्म जियोमार्ट (JioMart) देश के 200 से अधिक शहरों में उपलब्ध है। मई महीने के अंत में कंपनी ने एक ट्वीट के जरिए इस बात की जानकारी दी थी। जियो मार्ट भी लगातार अपना विस्तार कर रहा है।

बढ़ाएं लंबे समय से वार्डरोब में रखी सिल्क साड़ियों की उम्र

इस समय सारे उत्सव और पार्टियाँ बंद हैं। ऐसे में आपके वार्डरोब में लंबे समय से साड़ियां रखी हुई होंगी। जानें कुछ ऐसे टिप्स जो सिल्क साड़ियों की उम्र बढ़ाएंगे।
अगर आप सिल्क की साड़ी को घर में धोना चाहती हैं तो इसके लिए साड़ी को तीन भागों में मतलब पल्लू, बॉर्डर और साड़ी के बाकी हिस्सों को अलग धोएं।{जब भी साड़ी घर पर धोएं तो शैंपू इस्तेमाल करें। आप साड़ी घर में नहीं धोना चाहती हैं तो ड्राइक्लीन करें या करवाएं।
सिल्क साड़ी पर फोल्ड यानी मुड़ने के निशान जल्दी बनते हैं इसलिए हर तीन महीने में साड़ी को वार्डरोब से निकालकर उन्हें उलट-पलटकर रीफोल्ड करें ताकि साड़ी में पड़े फोल्ड के निशान दिखाई न दें।{ सिल्क की साड़ियों को हमेशा बाकी फैब्रिक से अलग रखें।


इन्हें हमेशा साफ कॉटन और मलमल के कपड़े में लपेटकर रखें।{ सिल्क की साड़ी को कभी भी अलमारी में हैंग करके न रखें।
बारिश आने वाली है। ऐसे में साड़ी में नमी की गंध न आए, इसके लिए साड़ियों को थोड़ी देर धूप जरूर दिखा लें।
साड़ी को हमेशा ठंडे और डार्क प्लेस में ही स्टोर करें।{ साड़ी में अगर दाग लग जाए तो उसे हटाने के लिए पेट्रोल का प्रयोग कर सकते हैं।
जूस, आइसक्रीम व चाय के दाग हटाने के लिए माइल्ड डिटर्जेंट को कॉटन में लेकर हल्के हाथ से दाग पर मलें, ऐसा करने से दाग आसानी से हट जाते हैं।
घर पर आयरन करते वक्त साड़ी के नीचे कॉटन कपड़ा जरूर रखें, इससे सुविधा होगी।
सिल्क की साड़ी पर अगर पानी गिर जाए तो धूप में सुखाने की गलती न करें वरना पानी का धब्बा कभी नहीं जाएगा, बल्कि ड्राइक्लीन कराएं।

(साभार – दैनिक भास्कर)

इस्कॉन मंदिर के भीतर ही आयोजित होगी रथयात्रा

कोलकाता :  कोलकाता में स्थित इस्कॉन मंदिर द्वारा आयोजित किया जाने वाला रथयात्रा उत्सव बिना भक्तों के मंदिर परिसर के अंदर ही संपन्न होगा। मंदिर के एक प्रवक्ता ने यह जानकारी दी। कोविड​​-19 के प्रकोप को देखते हुए यह अभूतपूर्व निर्णय लिया गया।

पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस से 11,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं, जबकि देश में 3.5 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं।

इस्कॉन-कोलकाता केंद्र के उपाध्यक्ष और प्रवक्ता राधारमण दास ने बताया, ‘‘इस्कॉन कोलकाता ने रथयात्रा से संबंधित सभी समारोह अपने परिसर के अंदर करने का फैसला किया है और हम किसी भी भक्त को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं देंगे।’’

उन्होंने बताया कि 23 जून से रथयात्रा शुरू हो रही है और पिछले साल 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने नौ दिवसीय उत्सव में भाग लिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि कोविड-19 का खतरा बढ़ रहा है और बिल्कुल कम नहीं हुआ है। रथयात्रा को खुले में मनाना जोखिम भरा होगा क्योंकि बड़ी संख्या में लोग रथ खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं। सामाजिक दूरी बनाए रखते हुए ऐसा करना व्यावहारिक रूप से असंभव है।’’

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले साल के महोत्सव को झंडी दिखाई थी। इस्कॉन के प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने राज्य सरकार को इस्कॉन मंदिर के अंदर रथयात्रा आयोजित करने के अपने निर्णय के बारे में सूचित कर दिया है