नीमच : मध्यप्रदेश के नीमच में चाय की गुमटी लगाने वाले सुरेश गंगवाल की 23 वर्षीय बेटी आंचल हैदराबाद में एयरफोर्स ट्रेनिंग एकेडमी में एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया के सामने जब मार्च पास्ट कर रही थीं, तो उनकी आंखें छलक आईं। 20 जून को 123 कैडेट्स के साथ आंचल गंगवाल की एयरफोर्स में कमिश्निंग हो गई। पिता सुरेश गर्व भरी मुस्कान लिए कहते हैं- ‘फादर्स डे पर पिता के लिए इससे अच्छा और क्या तोहफा हो सकता है।
पिता से मिली सीख
आंचल के पिता कहते हैं कि मेरी जिंदगी में खुशी के कम अवसर आए हैं, लेकिन कभी न हार मानने वाली बेटी ने यह साबित कर दिया कि मेरे हर संघर्ष के पसीने की बूंदें किसी मोती से कम नहीं।’ वहीं, आंचल ने कहा- ‘मुसीबतों से नहीं घबराने का सबक उन्होंने अपने पिता से सीखा है। आर्थिक परेशानियां जीवन में आती हैं, लेकिन मुश्किलों का मुकाबला करने का हौसला होना जरूरी है।’
हर हाल में वायुसेना में जाना है
भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में चयनित आंचल का कहना है कि एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बनने के लिए मैंने पुलिस सब इंस्पेक्टर और लेबर इंस्पेक्टर की नौकरी भी छोड़ दी। सिर्फ एक लक्ष्य था- हर हाल में वायुसेना में जाना है। आखिरकार छठवें प्रयास में मुझे सफलता मिल ही गई।
बच्चे हमेशा अनुशासन में रहे
आंचल के पिता कहते हैं- ‘मेरे तीनों बच्चे शुरू से अनुशासन में रहे। मैं पत्नी के साथ बस स्टैंड पर चाय-नाश्ते का ठेला लगाता हूं। जब मैं काम करता तो तीनों बच्चे हमें देखते रहते थे। कभी कुछ फरमाइश नहीं की। जो मिल जाता, उसमें संतुष्ट रहते। कभी दूसरों की देखा-देखी नहीं की। बेटी शुरू से ही पढ़ाई में टॉपर रही है। बोर्ड परीक्षा में 92% से अधिक अंक प्राप्त किए।
बेटी शुरू से ही पढ़ाई में टॉपर रही है
21 जून को बेटी आंचल ने हैदराबाद में वायुसेना के सेंटर पर फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर ज्वाइनिंग कर लिया, यही मेरी अब तक की पूंजी और बचत है। 2013 में उत्तराखंड में आई त्रासदी व वायुसेना ने वहां जिस तरह का काम किया, यह देख बेटी आंचल ने अपना मन बदला और वायुसेना में जाने की तैयारी की। आज बेटी इस मुकाम पर पहुंच गई। यह मेरे लिए गौरव की बात है।’
मातृभूमि की सेवा के लिए हमेशा तैयार हूँ
आंचल मां बबीता और पिता सुरेश गंगवाल के संघर्ष को अपनी कामयाबी का श्रेय देते हुए कहती हैं- ‘जब मैंने अपने माता-पिता से कहा कि मैं डिफेन्स सर्विस में जाना चाहती हूं, तो वे थोड़े चिंतित थे। लेकिन उन्होंने कभी मुझे रोकने की कोशिश नहीं की। वास्तव में, वे हमेशा मेरे जीवन के आधार स्तंभ रहे हैं। मैं अपनी मातृभूमि की सेवा के लिए हमेशा तैयार हूं और इसे ऐसा करने के अवसर के रूप में देखती हूँ।’
चाय बेचते हैं पिता, बेटी ने पायलट बनकर बढ़ाया मान
ब्रॉडबैंड कनेक्शन, एक स्मार्टफोन, सम्पर्क क्षमता और कम्प्यूटर की जानकारी रिक्रूटमेंट इंडस्ट्री में अवसर
किसी भी संस्थान की एचआर गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में भी हम पाते हैं कि महिलाएं सम्पर्क बनाने और आत्मविश्वास बढ़ाने में पुरुषों से बेहतर हो सकती हैं। इसलिए इसमें आश्चर्य नहीं कि जब सही काम के लिए सही व्यक्ति की तलाश की बात होती है तो महिलाएं बेहतर प्रदर्शन करती हैं।
1. पेशेवर या इंडस्ट्री के अर्थों में इस काम को रिक्रूटमेंट, टैलेंट अधिग्रहण, सोर्सिंग या हेड हंटिंग कहते हैं। इन सबके लिए कंसल्टेंसी या रिक्रूटमेंट फर्म सेटअप करना रोमांचक अवसर हो सकता है।
2. इस क्षेत्र में जॉब सर्च करने के लिए ब्रॉडबैंड कनेक्शन, एक स्मार्टफोन, अच्छी सम्पर्क क्षमता एवं रिज्यूमे के अच्छे स्रोत की जरूरत होती है। पहली दो जरूरतें आसानी से पूरी हो जाती हैं।
3. अंग्रेजी, हिन्दी या अन्य किसी भाषा की जरूरत आपके क्लाइंट बेस पर निर्भर करेगी। रिज्यूमे के स्रोत अलग-अलग और काफी विविध होते हैं। इनमें लाखों सीवी वाले बड़े जॉब पोर्टल से लेकर विशेषज्ञता वाले प्रोफेशनल की सीवी रखने वाले स्रोत भी शामिल होते हैं।
4. कुछ पोर्टल भी हैं जो प्रोफेशनल डेटा सहित विस्तृत रिज्यूमे उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा फ्री-टू-यूज वेबसाइट पर भी विज्ञापन डाला जा सकता है। साथ ही अखबारों के क्लासिफाइड की मदद भी ली जा सकती है।
5. यह हायरिंग के लेवल, इंडस्ट्री और हर महीने होने वाले रिक्रूटमेंट की संख्या पर निर्भर होता है। 1-3 साल के अनुभव वाले एंट्री लेवल के जॉब के लिए फिक्स कमीशन पेमेंट होता है।
6. बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में सीएक्सओ स्तर के पदों के लिए सीटीसी के 25 से 50 फीसदी तक कमीशन मिलता है। शुरुआत के लिए रिक्रूटमेंट एजेंसी का बैकग्राउंड जरूर देखना चाहिए। साथ ही इसके मालिकों की जानकारी भी लेनी चाहिए।
7. वर्कऑइड के को फाउंडर रुचिका भारद्वाज और अमित गुप्ता कहते हैं कि इस पेशे में किसी भी उम्र में शुरुआत की जा सकती है। बस आपके पास ध्यान देने की क्षमता, कम्प्यूटर का ज्ञान और फोन पर बात करने का तरीका होना चाहिए।
8. यह काम आपके कम्युनिकेशन स्किल को बेहतर करता है। साथ ही यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में मदद देता है। महिलाएं इसके जरिए खुद को खोज सकती हैं।
(साभार – दैनिक भास्कर)
पुणे के गाँव में सास पापड़ बनाकर पैसे कमा रहीं तो बहुएं केक बनाकर
सास से ज्यादा कमाई की होड़ में लगी हैं
पुणे : बारामती से 28 किलोमीटर दूर एक गांव है इंदापुर। गांव की सास और बहुओं के बीच कमाई की अनोखी प्रतियोगिता शुरू हो गई है। यहां पहले से सात महिलाओं का एसएचजी (स्वयं सहायता समूह) है, जो उड़द दाल के पापड़ बनाने का काम कर रहा है।
इलाके में इनके पापड़ों की इतनी माँग है कि एक महीने में 400 किलो तक पापड़ नजदीकी शारदा नगर कॉलेज की मेस में बिक जाते हैं। समूह की सातों महिलाएं उम्रदराज हैं। इन्हें कमाई करता देखकर अब गाँव की बहुओं ने भी समूह बनाया है, जो चॉकलेट और केक बना रही हैं। सासों का कहना है कि चाहे बहुएं फैशन की कोई भी चीज़ बना लें, लेकिन हमारी कमाई ही ज्यादा रहेगी।
सात लाख रुपये कमा लेती हैं
सप्ताह में तीन दिन काम करने से पापड़ बनाने वाली सात महिलाएं साल में कुल सात लाख रुपये कमा लेती हैं। इन्होंने राजमाता पापड़ यूनिट बनाई है, वहीं बहुओं ने स्वामी सामर्थ्य नाम से अपना एसएचजी बनाया है। इनके कोऑर्डिनेटर और गांव के ही रहने वाले राहुद गुरुजी कहते हैं ‘किसका ग्रुप कितना पैसा कमाता है, इसे लेकर सास-बहुओं में स्पर्धा हो रही है जो अच्छी बात है।
बुराई करने का समय न मिले
हम चाहते हैं कि हमारे गांव की सास और बहुओं को न लड़ने-झगड़ने का समय मिले न एक-दूसरे की बुराई करने का।’ महामारी के समय में जब पुरुषों के पास कोई काम नहीं बचा था, तब इन महिलाओं ने ही पूरे घर खर्च की जिम्मेदारी उठाई। शारदा महिला संघ के तहत बनाए गए इस ग्रुप के संयोजक राजाराम नागरे बताते हैं कि बारामती में इस तरह के 200 समूह हैं जो कुछ न कुछ बना रहे हैं और खुद मार्केटिंग भी कर रहे हैं।
कोविड से जुड़े शोध के बारे में लिखने में भी पुरुष आगे, सिर्फ 34% महिलाओं को मिला मौका
कोरोना वायरस के असर से बीते कुछ महीनों के दौरान रिसर्च पेपर लिखने वाली महिलाओं की संख्या में भारी कमी आई है। एक स्टडी के मुताबिक सिर्फ एक तिहाई महिलाओं ने रिसर्च पेपर लिखे। यहां तक कि सीनियर मानी जाने वाली महिला लेखिकाएँ भी इस काम से दूर रहीं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं द्वारा रिसर्च पेपर लिखने की कम दर यह सवाल पैदा करती है कि कोराेना वायरस के प्रति उनकी गंभीरता कहीं कम तो नहीं है? क्या इसका प्रभाव महिला और पुरुष दोनों पर अलग-अलग हुआ है?
रिसर्च पेपर के मुख्य लेखक अना केटेरिना पीहो गोम्स कहते हैं ये चिंता की विषय है कि इस महामारी के बीच महिलाओं के रिसर्च पेपर की संख्या काफी कम है। रिसर्च प्रोफेशनल न्यूज में यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड के रिसर्चर महिलाओं की मौजूदगी के बिना रिसर्च पेपर लिखे जाने में निश्चित तौर से कमी मानते हैं।
बीएमजे ग्लोबल हेल्थ की रिसर्चर स्टडी के अनुसार इस साल जनवरी से अब तक कोविड-19 पर 1,445 पेपर्स पर शोधार्थियों ने अध्ययन किया । इनमें से सिर्फ 34% महिलाओं ने रिसर्च पेपर लिखे। इसकी वजह जानने के लिए पिन्हो गोम्स और उनकी टीम ने कुछ फैक्टर्स रखें। वे कहते हैं कोविड-19 एक ऐसा विषय है जिसके बारे में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों का अध्ययन अधिक है।
परिवार का बोझ बढ़ा है
इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान महिलाओं पर बच्चों, परिवार और घर का बोझ हर हाल में बढ़ा है। घर की तमाम जिम्मेदारी निभाते हुए महिलाओं को रिसर्च पेपर लिखने का समय कम मिला। रिसर्च की ये राय है कि इन कारणों ने महिलाओं की कार्यक्षमता को पूरी तरह प्रभावित किया है।
डाटा बेस अधिक रहता है
साइंटिफिक कंवर्सेशन और रिसर्च के नजरिये से देखें तो महिलाओं के लिखे रिसर्च पेपर को यूनिक मानकर खास महत्व दिया जाता है। महिलाओं की उपस्थिति की वजह से रिसर्च का डाटा बेस हाई रहता है। कोविड-19 के संदर्भ में बात की जाए तो इसकी वजह से हुए सामाजिक और आर्थिक बदलावों को जानने के लिए रिसर्च पेपर में महिलाओं की भारीदारी भी पुरुषों की तरह ही जरूरी है।
समाज को फायदा होगा
वैसे भी रिसर्च पेपर लिखने के लिए महिला शोधार्थियों को अधिक प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। ये बात महामारी के दौरान जितनी जल्दी महिलाएं समझ लें, उतना अच्छा है। उनके योगदान का फायदा सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि पूरे समाज को होगा।
(साभार – दैनिक भास्कर)
#बेलन है ना” के माध्यम से सेलेब्रिटी शेफ ने दिया लोगों को संदेश
मुम्बई : हम में से ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपना समय कुकिंग करके बिताया। इसी दौरान ऐसी कई डिश भी ईजाद हुई जिनसे हम सब अनजान थे जैसे न्यूटला बिरयानी या डेलगोना कॉफी आदि। ये कहा जाए तो गलत नहीं होगा कि यही वह समय था जब हमारे अंदर बैठे शेफ ने दुनिया के सामने अपना हुनर दिखाया।
लॉकडाउन में ऐसे कई सेलिब्रिटी शेफ भी हैं जिन्होंने इस महामारी में “#बेलन है ना” के माध्यम से लोगों तक अपने दिल की बात पहुंचाई। शेफ रणवीर बरार, विकी रत्नानी, संजीव कपूर, अजय चोपड़ा, सारांश गोईला, कुणाल कपूर, विनीत भाटिया और मास्टर शेफ इंडिया सीजन 1 की विनर पंकज भदौरिया ने अपने वीडियाे के माध्यम से यह साबित किया कि किस तरह कुकिंग आपको रिलैक्स करने और परेशानियों से उबारने में मदद करती है। उन्होंने लोगों से यह विनती भी की कि लॉकडाउन में घर में रहें और कुकिंग करके अपनी चिंताओं को भुल जाएं।
इन वीडियो क्लिप में हर शेफ एक दूसरे को बेलन पास करते हुए दिखाई दिया। इस मुश्किल वक्त में बेलन के जरिए वे एक दूसरे को मैसेज देते दिखे। शेफ सारांश ने हांडी बेलन के साथ एक फोटो शेयर करते हुए लिखा कि किस तरह एक शेफ और कुक ने बेलन को जीवित रखा है। सच तो यह है कि बेलन से बनी रोटी हम सबकी जरूरत है।
शेफ संजीव कपूर ने लोगों को मैसेज देते हुए कुकिंग की पॉवर को बयां किया है। वे कहते हैं कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कुकिंग अपनों के लिए कर रहे हैं या किसी जरूरतमंद के लिए। कुकिंग यकीनन हम सबके आत्मविश्वास और साहस को बढ़ाने का काम करती है। अगर ईमानदारी से कहूं तो लॉकडाउन में पेट को सुकून पहुंचाने वाला ये हुनर बहुत काम आया।
शेफ रणवीर बरार कहते हैं लॉकडाउन ही वह समय है जब खाने के जरिये हम लोगों से जुड़ सकते हैं। खाना हमारे दिल, दिमाग और शरीर को सुकून देने का एकमात्र साधन है। इस वीडियो का सन्देश यही था कि अगर आप कोरोना पॉजिटिव हैं तो हेल्दी खाना खाकर जल्दी ठीक हो जाएं। अगर आप स्वस्थ हैं तो घर में रहकर अच्छा खाना बनाएं और सबको खुश करें।
मौत के हफ्ते भर के अंदर दो निर्माताओं ने किया सुशांन्त की बायोपिक बनाने का ऐलान
इंजीनियरिंग विद्यार्थी, बैकग्राउंड डांसर, टीवी अभिनेता और फिर बॉलीवुड के चमकते सितारे रहे सुशांत सिंह राजपूत एक कहानी बन चुके हैं। 14 जून को खुदकुशी करने वाले सुशांत पर अब फिल्में बनने वाली हैं। दो मेकर्स ने इसका ऐलान किया है। पहली एक बायोपिक है, जिसका ऐलान डायरेक्टर निखिल आनंद ने किया है। उनकी फिल्म 2022 में रिलीज होगी, जिसके लिए पैसा पब्लिक फंड से जुटाया जाएगा। वहीं दूसरी फिल्म के लिए डायरेक्टर शमिक मौलिक भी घोषणा कर चुके हैं।
निखिल आनंद सुशांत की जिंदगी पर तीन भाषाओं हिन्दी, तमिल और तेलुगु में फिल्म बनाएंगे। इसके अलावा इस अनाम फिल्म का ऑफिशियल सोशल मीडिया पेज बनाया जाएगा। मिड-डे की खबर के मुताबिक, निखिल ने इस फिल्म को सुशांत के लिए श्रद्धांजलि बताया है। वे कहते हैं- मैं उन्हें सिनेमा जगत में अमर करना चाहता हूं। मैं उम्मीद करता हूं कि इससे सबक लेकर बॉलीवुड नेपोटिज्म पर प्रतिभा को तरजीह देगा।
आनंद कहते हैं, “जैसे ही महामारी से बने हालात में कुछ सुधार आएगा फिल्म भी अगले कुछ महीनों में शुरू कर दी जाएगी। इस बीच टीम स्टोरी और कास्ट पर काम करेगी। फिल्म पूरे देश में रिलीज होगी। हमारी कोशिश इसे दुनिया भर में रिलीज करने की होगी ताकि लोगों को सुशांत के जीवन से प्रेरणा मिले। फिल्म की तैयारी के लिए आनंद ने सुशांत के रिश्तेदारों, परिवार और दोस्तों से मिलने की योजना बना रखा है ताकि कहानी सच्ची हो।”
विजय शेखर गुप्ता और शमिक मौलिक ने भी सुशांत पर फिल्म बनाने की घोषणा की है। फिल्म का टाईटल होगा- सुसाइड या मर्डर: ए स्टार वॉज लॉस्ट। शमिक अपनी फिल्म में बताएंगे कि कैसे एक गैरफिल्मी बैकग्राउंड वाले सुशांत ने अपना मुकाम इंडस्ट्री में बनाया। शमिक ने एक इंटरव्यू में कहा है कि वे बॉलीवुड को इस फिल्म के जरिए एक्सपोज कर देंगे। वे फिल्म में सुशांत के साथ हुई हर उस घटना का जिक्र करेंगे, जिसने उन्हें अपनी जिंदगी खत्म करने पर मजबूर किया।
स्पॉट बॉय की रिपोर्ट के मुताबिक, सुशांत की योजना निर्माता बनने की थी। वे अपने दोस्त और डायरेक्टर संदीप सिंह की फिल्म वंदे भारतम के जरिए प्रोड्यूसर के तौर पर डेब्यू करने वाले थे। अब संदीप ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फिल्म का पोस्टर शेयर किया है। इसमें सुशांत तिरंगे में दिखाई दे रहे हैं। संदीप के मुताबिक, सुशांत ही इस फिल्म में अभिनय करने वाले थे।
जल्द ही स्मार्टफोन बाजार में वापसी करेगी माइक्रोमैक्स, लॉन्च करेगी तीन नए स्मार्टफोन
नयी दिल्ली : भारतीय स्मार्टफोन कंपनी माइक्रोमैक्स जल्द ही बाजार में वापसी करने वाली है। कंपनी भारत में तीन नए स्मार्टफोन लॉन्च करने की योजना बना रही है, जिसमें प्रीमियम फीचर्स और मॉडर्न लुक वाला बजट फोन भी शामिल है। कंपनी ने ट्विटर के जरिए इसकी जानकारी दी। माइक्रोमैक्स ने पिछले साल अक्टूबर में अपना आखिरी स्मार्टफोन iOne नोट लॉन्च किया था जिसकी कीमत 8199 रुपए थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, लॉन्चिंग पर तेजी से काम किया जा रहा है, और तीनों फोन एक साथ लॉन्च किए जाएंगे। उम्मीद की जा रही है कि अगले महीने कंपनी अपने नए स्मार्टफोन को बाजार में उतार सकती है। सभी स्मार्टफोन 10,000 रुपये से कम कीमत में उपलब्ध होंगे।
कम्पनी का आधिकारिक ट्वीट
माइक्रोमैक्स ट्विटर पर वापसी की योजना के बारे में बताया। माइक्रोमैक्स ने चीनी फोन का विकल्प तैयार करने के लिए यूजर को जवाब देते हुए ट्वीट किया कि – “हम आंतरिक रूप से कड़ी मेहनत कर रहे हैं और जल्द ही हम कुछ बड़ा करेंगे। हमारे साथ बने रहें!” एक अलग ट्वीट में, कम्पनी ने कहा कि वे प्रीमियम फीचर्स के साथ नए डिवाइस को डेवलप कर रही है जो मॉडर्न लुक और बजट के अनुकूल भी होगा। ट्वीट में कम्पनी ने हैशटैग #MadeByIndian और #MadeForIndian का उपयोग किया है। हालांकि, कम्पनी यह नहीं कह रही है कि वे अपने नए स्मार्टफोन का निर्माण भारत में कर रही है या चीन में निर्माता से आउटसोर्सिंग कर रही है।
रीब्रांड चीनी फोन बेचने में रिकॉर्ड बना चुकी है कंपनी
यह जानने भी जरूरी है कि माइक्रोमैक्स के पास रीब्रांड किए गए चीनी फोन बेचने का रिकॉर्ड है। सह-संस्थापक राहुल शर्मा ने दिसंबर 2014 में यू टेलीवर्क नाम के सब-ब्रांड की स्थापना की, जो शुरुआत में शेन्ज़ेन बेस्ड वेंडर कूलपैड से रीब्रांड किए गए फोन लेकर आई। कूलपैड ने बाद में स्वतंत्र रूप से अपने मॉडल बेचने के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश किया था।
मुश्किलों भरी होगी वापसी- विशेषज्ञ
नवकेन्द्र सिंह डायरेक्टर, डिवाइसेस एंड इकोसिस्टम, इंडिया एंड साउथ एशिया, आईडीसी ने कहा कि माइक्रोमैक्स निश्चित रूप से इस समय में वापसी करने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, यह बहुत मुश्किल और चुनौतियों से भरा होगा। न केवल माइक्रोमैक्स बल्कि लेकिन कई नए ब्रांड भी भारत के अत्यधिक जटिल लेकिन संगठित स्मार्टफोन मार्केट में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। सिंह ने कहा कि बाजार अब काफी सीमित है, जिसमें टॉप पांच ब्रांड बाजार ने 75 प्रतिशत से अधिक पर पकड़ बना रखी है, जो माइक्रोमैक्स की वापसी को कठिन बना देगा।
बाजार में राज कर चुकी है माइक्रोमैक्स
माइक्रोमैक्स भारत में मोबाइल फोन बाजार में एक प्रमुख घरेलू खिलाड़ी था। गुरुग्राम की कम्पनी 2014 की तीसरी तिमाही में दुनिया की दसवीं सबसे बड़ी स्मार्टफोन कम्पनी बन गई थी। हालांकि, भारत में शाओमी सहित कई चीनी कंपनियों के विस्तार के बाद इसने बाजार में अपनी पकड़ खो दी।
2018 में, माइक्रोमैक्स ने अपने दो नए स्मार्टफोन मॉडल के रूप में इंफिनिटी N11 और इंफिनिटी N12 को लॉन्च किया था। पिछले साल सिर्फ एक मॉडल माइक्रोमैक्स iOne नोट बाजार में उतारा गया, जिसकी अक्टूबर में देश में बिक्री शुरू हुई।
जेईई और नीट के परीक्षार्थी अब हिन्दी में कर सकेंगे परीक्षा की तैयारी
नयी दिल्ली : जेईई और नीट परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए खुशखबर। नेशनल टेस्ट अभ्यास’ ऐप में अब अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी के पेपर्स भी शामिल किए गए हैं। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक ने जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से तैयार किए गए ऐप नेशनल टेस्ट अभ्यास ऐप पर छात्रों को प्रैक्टिस के लिए हिन्दी में भी पेपर्स मिल सकेंगे।
मानव संसाधन मंत्री ने बताया कि अब तक 10 लाख छात्रों ने ये ऐप डाउनलोड किया है और लगभग 17 लाख बार इने पेपर्स को हल किया गया है। उन्होंने बताया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से तैयार किया गया नेशनल टेस्ट अभ्यास ऐप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस AI पर काम करता है।
ऐप को बनाने का मुख्य उद्देश्य अपने घर में रहते हुए जेईई और नीट की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में छात्रों की सहायता करना है। उन्होंने बताया कि छात्र काफी समय से हिन्दी में पेपर्स की माँग कर रहे थे।
निशंक ने कहा कि अब तक इस ऐप पर सिर्फ इंग्लिश में ही पेपर डाले जा रहे थे। अब हिन्दी में तैयारी कर रहे छात्र भी इस ऐप के जरिए मॉक टेस्ट में शामिल हो सकेंगे। हिन्दी भाषा के छात्र अपनी तैयारी में हिन्दी प्रैक्टिस पेपर्स का फायदा उठा पाएंगे और भावी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे।
सेहत और सुन्दरता के लिए बेहतरीन है दही
भोजन के साथ कई लोग नियमित दही लेते है, लेकिन जो लोग इसे अब तक खाना पसंद नहीं करते हैं, दही में छुपे सेहत और सुन्दरता के राज जानने के बाद वे लोग भी इसे रोजाना खाना शुरू कर देंगे। आइए, जानते हैं दही के गुण –
सुन्दरता के लिए
दही व हल्दी – दही में एक चुटकी हल्दी मिलाकर लगाने से एक्ने आदि की समस्या दूर होती है। यह पैक हर तरह की स्किन के लिए अच्छा होता है। इस पैक को बनाने के लिए एक बाउल में दही डालकर उसमें थोड़ी हल्दी मिक्स करें। अंत में इसे चेहरे पर करीबन 15 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। अंत में गुनगुने पानी से चेहरा वॉश करें।
दही व ओट्स – दही व ओट्स एक पैक ही नहीं, बल्कि स्क्रब की तरह भी काम करता है, जिसके कारण यह स्किन को एक्सफोलिएट करता है। इसे बनाने के लिए एक टेबलस्पून दही लेकर उसमें दो टेबलस्पून ओट्स व एक फेंटा हुआ डालकर मिक्स करें। अब चेहरे को साफ करके उस पर यह पैक लगाएं। करीबन पन्द्रह मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा वॉश करें। आप सप्ताह में एक बार इस पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह फेस पैक डेड स्किन को निकालने के साथ−साथ ब्लैकहेड्स व पिंपल्स को भी दूर करता है।
दही व शहद – अगर आपकी त्वचा सामान्य या रूखी है तो आप इस पैक का इस्तेमाल करें। इसके इस्तेमाल के लिए दही में शहद डालकर अच्छी तरह मिक्स करें। इसके बाद इसे चेहरे पर लगाकर करीबन 20 मिनट के लिए छोड़ दें। अंत में ठंडे पानी से चेहरा वॉश कर लें। सप्ताह में एक बार इस पैक का इस्तेमाल करने से न सिर्फ स्किन हाइडेट रहती है, बल्कि बेहद सॉफ्ट भी बनती है।
दही व बेसन – तैलीय त्वचा पर यह पैक अतिरिक्त ऑयल को नियंत्रित करने का काम करता है। इस पैक का इस्तेमाल करने के लिए आप सबसे पहले एक बाउल में दही व बेसन को मिक्स करके एक स्मूद पेस्ट बनाएं। इसके बाद इसे चेहरे पर लगाकर करीबन 15 मिनट के लिए छोड़ दें। अंत में हल्के गर्म पानी से चेहरा वॉश करें। यह पैक ऑयली स्किन के साथ−साथ सेंसेटिव स्किन के लिए भी काफी अच्छा है।
सेहत के लिए
दही के रोजाना सेवन से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। दही में अजवाइन मिलाकर पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है।
गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी पीने से पेट की गर्मी शांत होती है। इसे पीकर बाहर निकले तो लू से भी बचाव होता है।
दही पाचन क्षमता बढ़ाता है। दही में कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होता है। इसे रोजाना खाने से पेट की कई बीमारियां ठीक हो जाती हैं।
दही का रोजाना सेवन सर्दी और सांस की नली में होने वाले इंफेक्शन से बचाता है।
अल्सर जैसी बीमारी में दही के सेवन से विशेष लाभ मिलता है।
मुंह में छाले होने पर दही का कुल्ला करने से छाले ठीक हो जाते हैं।
ये 10 असरकारक योगासन करें वर्क डेस्क पर
ऑफिस या घर की डेस्क पर कार्य करते हुए मन और शरीर दोनों पर प्रभाव पड़ता है। मन तनाव से घिर जाता है तो शरीर में गर्दन, रीढ़, कंधे और आंखें अकड़न और दर्द का शिकार हो जाती हैं। तनाव जहां हमें कुंठा से ग्रस्त कर हमारे स्नायुतंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है वहीं सीट पर लगातार 8 से 9 घंटे बैठे रहने से गर्दन, कंधे और रीढ़ की हड्डी में अकड़न और दर्द पैदा हो जाता है। इसके अलावा व्यक्ति सिरदर्द, श्वास संबंधी रोग, कब्ज और अनावश्यक डर आदि का शिकार हो जाते हैं।
सर्वप्रथम आप कुर्सी पर सही मुद्रा में बैठना सीखें। आरामपूर्ण व सहज बैठने या खड़े रहने का सबसे अनिवार्य रूप से अभ्यास किया जाना चाहिए। अकसर हम सही मुद्रा में खड़े या बैठे नहीं रहने के कारण समस्याओं से घिर जाते हैं। इस कारण रीढ़ की हड्डी़, कंधे, गर्दन और आंखों में शिकायत का शिकार हो जाते हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं योग के अंग सचालन और कुछ योगासन के बारे में।
1.अंग संचालन : इसे सूक्ष्म व्यायाम भी कहते हैं। अंग सचालन खड़े रहकर, बैठक और लेटकर किए जाते हैं। इसके लिए आपके अपने हाथों की कलाइयों को, एड़ियों को, कमर को, आंखों की पुतलियों को, गर्दन को और कंधों को क्लाकवाइज एवं एंटी-क्लाकवाइज 4 से 5 बार घुमाते हैं।
आंखों को, जीभ को, हाथ-पैर की कलाइयों और पंजों को, कमर को, गर्दन को दाएं-बाएं और ऊपर-नीचे करते हुए गोल-गोल घुमाएं। हाथों की मुट्ठी को खोलें और बंद करें। इसी तरह पैरों की अंगुलियों की योगा एक्सरसाइज करें। दोनों कंधों को एक साथ कमर पर हाथेलियां रखते हुए क्लाकवाइज और एंटीक्लाकवाइज घुमाएं।
यह एक्सरसाइज पूरे हाथ-पैर, सर्वाइकल स्पोंडोलाइटिस, फ्रोजन सोल्डर, जोड़ों का दर्द, साइटिका, नेत्र रोग, तनाव, सिरदर्द, गर्दन का दर्द, कमर दर्द, पीठ दर्द, पेट के रोग, कमजोर बोन, कमजोरी, रक्त अशुद्धता, आलस्य, कब्ज आदि रोगों में लाभदायक है।
2. अंगड़ाई लेना : कानों को मरोड़ें, पूरा मुंह खोलकर बंद करें। अंगड़ाई आए तो उसको अच्छे से मजा लेते हुए करें।
बिल्ली या कुत्ते की तरह अंगड़ाई लेना भी एक प्रकार का योग है जिससे मांसपेशियों में खिंचाव होता है और वे फिर से तरोताजा हो जाती है।
3. हाथ पैरों की एक्सरसाइज : दाएं से बायां और बाएं हाथ से दायां कंधा पकड़कर उसे दबाएं। फिर दोनों हाथों से एक दूसरे हाथ की कलाई पकड़कर ऊपर उठाते हुए सिर के पीछे ले जाएं। श्वास अन्दर भरते हुए दाएं हाथ से बाएं हाथ को दाहिनी ओर सिर के पीछे से खीचें। गर्दन व सिर स्थिर रहे। फिर श्वास छोड़ते हुए हाथों को ऊपर ले जाएं। इसी प्रकार दूसरी ओर से इस क्रिया को करें।
4. पांच मिनट का ध्यान करें : समय हो तो मात्र 3 मिनट का ध्यान करें। इसे आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगे। मानसिक द्वंद्व, चिंता, दुख: या दिमागी बहस शांत हो जाएगी और तनाव दूर होगा। तनावग्रस्त्र या ज्यादा सोचग्रस्त्र रहें तो ध्यान करते वक्त पेट और फेफड़ों की हवा पूरी तरह से बाहर निकाल दें और नए सिरे से ताजी हवा भरें। ऐसा पांच से छह बार करें।
5. झपकी ध्यान : जहां भी जैसी भी स्थिति में बैठे या खड़े हैं तो स्वयं को स्थिर करते हुए पूरी तरह से आंखें बंद करके सिर्फ एक मिनट का झपकी ध्यान करें। जब भी लगे की नींद सता रही है तो झपकी मार ही लें। इसमें सांसों के आवागमन को तल्लीनता से महसूस करें। गहरी-गहरी सांस लें। आठ घंटे की नींद से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है एक मिनट का यह झपकी ध्यान, जो मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाता है और व्यक्ति को हमेशा तरोताजा रखता है। इससे मानसिक तनाव घटता है तथा आँखों को आराम मिलता है। इससे श्वास संतुलित बनती है और हृदय तथा फेंफड़ों में पुन: जाग्रति आती है।
6. तनाव : ऑफिस में तनाव होने के कई कारण हो सकते हैं। तनाव से निजात पाने के लिए मात्र 1 मिनट का अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें। नियमित अभ्यास करने से नकारात्मक विचारों और भावों को अपने पास फटकने न दें। अत्यधिक विचार, भीड़, शोर और प्रदूषण हमारे मस्तिष्क की शांति को भंग करते हैं। अशांत और बेचैन रहने की भी आदत हो जाती है। उक्त आदतों से सिर्फ ध्यान और प्राणायाम ही छुटकारा दिला सकता है।
7. हस्त मुद्राएं : आप कम से कम 10 महत्वपूर्ण हस्त मुद्राएं सीख लें। यह बहुत ही काम की होती है। इससे शरीर में एक ओर जहां खून का संचरण सुचारू रूप से चलता है वहीं कई प्रकार के रोग दूर रोते हैं। यह करने में बहुत ही आसान होती हैं। घेरंड में 25 और हठयोग प्रदीपिका में 10 मुद्राओं का उल्लेख मिलता है, लेकिन सभी योग के ग्रंथों की मुद्राओं को मिलाकर कुल 50 से 60 हस्त मुद्राएं हैं।
मुख्यत: दस हस्त मुद्राएं : उक्त के अलावा हस्त मुद्राओं में प्रमुख दस मुद्राओं का महत्व है जो निम्न है: -(1) ज्ञान मुद्रा, (2) पृथवि मुद्रा, (3) वरुण मुद्रा, (4) वायु मुद्रा, (5) शून्य मुद्रा, (6) सूर्य मुद्रा, (7) प्राण मुद्रा, (8) लिंग मुद्रा, (9) अपान मुद्रा, (10) अपान वायु मुद्रा।
8. कुर्सी पर आसन : आप घर या ऑफिस की कुर्सी (चेयर) पर मार्जरी-बितिलासन, ऊर्ध्व हस्तासन, उत्तानासन, उत्थित पार्श्वकोणासन, एकपद राजकपोतासन, गरुड़ासन, अर्ध मत्स्येन्द्रासन, वीरभद्रासन, विपरीत वीरभद्रासन, पर्वतासन, ताड़ासान आदि आसन कर सकते हैं।
9. हास्य योग : हंसने का मौका कभी नहीं चूकना चाहिए। हास्य योग से आपका दिल, दिमाग और रक्त तो स्वस्थ और शुद्ध रहता ही है इससे पेट सहित संपूर्ण शरीर में खिंचाव होने से भीतर के अंग स्वस्थ होने लगते हैं। व्यक्ति बगैर किसी एक्सरसाइज़ के युवा बना रह सकता है। तो प्रतिदिन सुबह, दोपहर, शाम और रात को सोने से पहले एक बार अकेले में और फिर सामूहिक रूप से खिलखिलाकर जोर से हँसे जरूर। यह मत सोचे की कोई क्या सोचेगा। सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग। हंसी तो संक्रामक रोग है इस रोग को जितना हो सके फैलाएं। ज्यादा से ज्यादा चुककुलों को अपने जीवन में सुने और सुनाए। बस।
10. नमस्कार मुद्रा और ताली : आप नमस्कार की मुद्रा में दोनों हाथों की हथेलियों को हल्का से प्रेशर दें अर्थात एक दूसरे को दबाएं। इससे आपके कंधे और गर्दन की नसें खुलेंगी और उनमें रक्त संचार अच्छे से होगा। दूसरा आप हथेलियों को बजाने के की बजाएं ठोंके इससे भी स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।
हमारे हाथ के तंतु मष्तिष्क के तंतुओं से जुड़े हैं। हथेलियों को दबाने से या जोड़े रखने से हृदयचक्र और आज्ञाचक्र में सक्रियता आती है जिससे जागरण बढ़ता है। उक्त जागरण से मन शांत एवं चित्त में प्रसन्नता उत्पन्न होती है। हृदय में पुष्टता आती है तथा निर्भिकता बढ़ती है। इस मुद्रा का प्रभाव हमारे समूचे भावनात्मक और वैचारिक मनोभावों पर पड़ता है, जिससे सकारात्मकता बढ़ती है। यह सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से भी लाभदायक है।




