Saturday, June 20, 2026
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जल और प्रकृति

टीम शुभजिता

जल:एक प्रेरणा

निखिता पाण्डेय

‘जल’
एक ऐसी धारा है,
जिसे. न प्रकृति बांध सकती है
और न ही हम मनुष्य
इसे कैद कर
सकते हैं।
इसकी लीला तो
इतनी निराली है
कि……..
यह जिस भी
बनावट में ढलता है,
उसका आकार ग्रहण
कर लेता है।
हम मनुष्यों को भी…
इस ‘जल’ की भांति
हर परिस्थिति में
ढल जाना चाहिये….
चाहे परिस्थिति
कितनी ही विकट
क्यों न हो?
हमें डटकर
जल की अविरल धारा
के समान
निरंतर आगे बढ़ना चाहिये।
यही है ‘जल’
और यही इसकी ‘प्रेरणा’।

 

2
जल की व्यथा

पार्वती शॉ

मैं जल, तुम सबको
प्राणकथा सुनाने आया हूँ
पहले मुझे पीते थे
नदी से लाकर
फिर तालाब से
फिर कुएँ से
फिर चापाकल से
फिर पम्प नल से…..
देखो ये आकार छोटा होता जा रहा हैं
मुझे डर है
कि कहीं ख़त्म न हो जाऊं एक दिन !
मेरा ख़त्म होना, तुम्हारा ख़त्म होना है
इसलिए बचाये रखो मुझको….
जैसे बचाये रखते हो रुपया…!
सोचो, कैसा होगा वह जीवन
निचोड़ लिया हो पृथ्वी का जल
घरों में भर रखे खूब रुपये
लेकिन पृथ्वी पर हो न एक बूंद भी जल
हाहाकार करेगी पृथ्वी
तब क्या जीवन देगा यह रुपया ?
डरो मत !
यह कल्पना भयावह सच की है
तुम इसे कभी सच नही होने देना
बचाकर रखना एक – एक बूंद
जैसे सहेज कर रखते हो
अपने प्रियजनों को
जैसे माँ पिता रखते है अपने बच्चे को
मुझे भी वैसे ही बचाना – सहेजना
अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानना
हालाँकि मैं हूँ
परंतु तुम भूल गए हो
वहीं याद दिलाने आया हूँ!
मैं जल तुम्हारे जीवन का आधार
आधार को मजबूत बनाओ
देखना भवन भी उतना ही शानदार बनेगा
मेरे प्राणों से ही तुम्हारी जीवनकथा है।

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मृदुल रागिनी

दीपा ओझा
ये लाल सूरज
ये सफेद चांदनी
उतरती संध्या की
नयी मृदुल रागिनी
ये पेड़ों की अंगड़ाइयाँ
सहसा जगना
ये फूलों का
शर्मा कर उठना

ये मन्द हवाओं की
सहमी हुई थपकियाँ
तंद्रालस्य में डूबी
प्रकृति की सहेलियां
ये ढलता हुआ दिन
सुकून देती ये संध्या
ये लाल सूरज
ये सफेद चांदनी
ये उतरती संध्या की
नयी मृदुल रागिनी।
~
4

जल यानी नीर 

संचिता सिंह

जल यानी नीर
है यह नारी का स्वरूप ,
कोमल ,शीतल और समर्पित ।
विज्ञान में..
हायड्रोजन और ऑक्सीजन का मिश्रण !
कहने को मात्र मिश्रण ,
बारिश करती ऐसे समर्पण !
खेतों में ,बंजर ज़मीनों में ,
रेगिस्तान में , शहरों में !
बहता है जल कहीं धारा बनकर ,
तो बरसता है अबाध होकर ।
अपनी सौम्य शीतलता से करता सबको तृप्त।

किंतु शक्ति में है यह अधीश्वरी ।
जो कर सकती इस अवनी को ध्वस्त ।
जल की तरह नारी भी

ढल जाती उसी रंग -आकार में ,
जिसमें यह मिल जाती ।
दिखाती अपने नए रूप ,
कभी तालाब में दर्पण बन कर ,
शिखा की शोभा बनकर ,
सागर -लहरों का चमकती अलंकार बनकर ।
नीर…नारी है ।
है यह हर जगह विद्यमान ।
हर अस्तित्व में ।
ओस से लेकर सागर तक ।
बादल से लेकर भूमि के गर्भ तक ।
असीमित ,अतुल्य ।
जीवनदायिनी नीर ।

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पानी और मनुष्य

प्रियंका सिंह

आओ एक संकल्प लेते हैं
जीवन को बचाने का
पानी को बचाने का
सागर की शीतल लहरों सी
बादल की स्वच्छ बूंदों से
जीवन को पानी सा निर्मल बनाते है
सोचो एक संकल्प बनाते हैं
पानी के बुलबुले की भांति ही सही
लोगों को क्षणिक सुख देते हैं
खुद को निजी स्वार्थ से विहीन कर
सभी पात्रों में ढलने की प्ररेणा लेते हैं
चलों आओ एक संकल्प करते हैं
शहरों को नयी हरियाली देने का
हां, हरपल एक संकल्प जगाते हैं
अपने धरोहर को बचाने का
अपने अमृत्व को संजोने का
पानी और मनुष्य को बचाये रखने का!!!

 

स्त्रियाँ

कवियित्री अनामिका की कविता पढ़ रही हैं.. प्रीति साव

सुरक्षा चेतावनी – सावधान रहें कोविड – 19 को लेकर जालसाजों के हमले से

भारतीय कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इन) ने हाल ही में एक एडवाइजरी जारी की है जिसमें भारत में लोगों के खिलाफ साइबर अपराधियों द्वारा संभावित जालसाजों के हमले के बारे में चेतावनी दी है। आशंका जतायी गयी है कि कोविड -19 के खतरे को हथियार बनाते हुए अपराधी ईमेल आईडी का उपयोग कर सकते हैं। अपराधियों द्वारा बैंक खाते की जानकारी सहित व्यक्तिगत डेटा चोरी करने के इरादे से – [email protected]. का इस्तेमाल करने की आशंका जाहिर की गयी है। बताया जाता है कि हैकर सरकारी एजेंसियों या विभागों का इस्तेमाल कर सकते हैं, आधिकारिक प्रतिनिधियों के रूप में संदेश भेज सकते हैं और मुफ्त कोविड -19 परीक्षण की पेशकश करके अपने व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी साझा करने के लिए लोगों को दिग्भ्रमित कर सकते हैं। दावा किया गया है कि साइबर अपराधी मुम्बई, दिल्ली, हैदराबाद, चेन्नई और अहमदाबाद के निवासियों के लाखों नागरिकों की ईमेल आईडी तक पहुँच सकते हैं।
इस स्थिति में कोटक महिन्द्रा बैंक ने अपने ग्राहकों को हाई अलर्ट किया है। बैंक ने ग्राहकों को कहा है कि किसी भी लिंक को क्लिक करने, कोई अटैचमेंट डाउनलोड और निजी औऱ आर्थिक सूचना अथवा जानकारी जमा करने से पहले दो बार सोचें। कोविड -19 के हालात में लोगों के भय का फायदा उठाकर साइबर अपराधी कोविड – 19 परीक्षण का लालच देकर गोपनीय और बैंकिंग जानकारियों तक पहुँचने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में अप्रशिक्षित लोगों को लक्षित करने की आशंका जाहिर की जा रही है। हालाँकि, सतर्कता बरतने और कुछ बुनियादी सावधानियों का पालन करने से, एक सुरक्षित और सुरक्षित बैंकिंग अनुभव सुनिश्चित किया जा सकता है –
सुरक्षित बैंकिंग टिप्स:
संवेदनशील बैंकिंग जानकारी जैसे पासवर्ड, सीवीवी, ओटीपी, एटीएम पिन, कार्ड विवरण या ऐसी कोई भी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। कोटक इस जानकारी के लिए कभी नहीं पूछेगा।
केवल विश्वसनीय स्रोतों से लिंक पर क्लिक करें। यदि आपको एक अज्ञात प्रेषक से एक ईमेल या पाठ संदेश प्राप्त होता है, तो आपको संदेहास्पद लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जाता है, सावधान रहें और संदेश को पूरी तरह से अनदेखा करें।
आपके द्वारा पहले नहीं देखी गई ईमेल आईडी के लिए एक स्वस्थ संदेह विकसित करें।
स्क्रीन शेयरिंग ऐप जैसे कि AnyDesk, TeamViewer आदि को डाउनलोड करने से बचें, जो जालसाज़ को आपके डिवाइस पर नियंत्रण रखने, गोपनीय बैंकिंग विवरण देखने और आपके खाते और धन को आपकी जानकारी के बिना एक्सेस करने में सक्षम करेगा।
बैंकिंग लेनदेन पर त्वरित अपडेट प्राप्त करने के लिए एसएमएस और ईमेल अलर्ट सक्रिय करें। लेनदेन से संबंधित संदेश और पॉप-अप को बारीकी से पढ़ें।
अपने संपर्क विवरण हमेशा बैंक के पास अपडेट रखें
बैंक के संपर्क विवरण के लिए हमेशा बैंक की आधिकारिक वेबसाइट – www.kotak.com पर जाएं।
इसी तरह, ई-कॉमर्स या किसी भी सेवा प्रदाताओं के सम्पर्क नम्बर के लिए ऑनलाइन खोज करते समय, संपर्क विवरण के लिए आधिकारिक कंपनी की वेबसाइट पर जाएं।
सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत के साथ उपकरणों की सुरक्षा। एंटीवायरस या एंटी-स्पाइवेयर सॉफ़्टवेयर के खतरों के लिए नियमित रूप से स्कैन करके ऑपरेटिंग सिस्टम को सुरक्षित रखें।

जीनियस फाउंडेशन ने की अम्फान व कोविड -19 पीड़ितों की मदद

कोलकाता : जीनियस कन्सल्टेंट्स लिमिटेड की सीएसआर पहल जीनियस फाउंडेशन ने कोविड – 19 और अम्फान पीड़ितों के लिए सहायता का हाथ आगे बढ़ाया है। जीनियस फाउंडेशन ने राजारहाट के बीडीओ जयन्त चटर्जी की उपस्थित में 600 से अधिक लोगों को राहत सामग्री वितरित की। इस राहत सामग्री में खाद्य सामग्री, हाइजिन किट औऱ आवश्यक वस्तुओं के पैकेट शामिल थे। यह सेवा कार्य जीनियस फाउंडेशन ने कन्फडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई ) के साथ किया।

काम पर वापसी : मदद करेगा मेडीबडी डॉक्स ऐप का मेडिक्लिनिक

सम्पादन – निखिता पांडेय

नयी दिल्ली : कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन के बाद अब सभी काम पर वापस जाने को तैयार हैं। ऐसी स्थिति में सुरक्षा और सावधानी, दोनों की जरूरत है और इसे लेकर जिज्ञासाएँ भी बहुत उठ रही हैं। इस परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए मेडिबडी डॉक्स ऐप ने जारी किया है – मेडिक्लिनिक।
दरअसल, कई कंपनियों ने कार्यालयों से काम करना फिर से शुरू कर दिया है और यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गया है कि इस समय के दौरान खुद को और अपने आसपास के सभी लोगों को कोविद ​के संभावित जोखिम से सुरक्षित रखने के तरीके के बारे में एक आसान निर्देशिका तैयार हो। मेडिक्लिनिक में चिकित्सा जनशक्ति- विशेषज्ञ, डॉक्टर, पैरामेडिक्स, नर्स और आपातकालीन देखभाल की सुविधा है। मेडिक्लिनिक दैनन्दिन आधार पर सुरक्षित कर्मचारियों के कार्यालय जाने को किस तरह से सुनिश्चित किया जाए, बताता है। इसके अतिरिक्त कार्यालय में लोगों की सुरक्षा किस तरह सुनिश्चित की जाए। यह विशिष्ट चिकित्सा सहायता, सामाजिक दूरी के पालन, कर्मचारियों, उनके परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करने का तरीका बताता है।

मेडीबडी-डॉक्स ऐप्प ‘मेडीक्लिनिक’ के जरिए 260 से अधिक संगठनों की सहायता करता है,जो कि उस संरचना और प्रणाली को सुनिश्चित करने के लिए है,जिसे हम ‘कोविद संवेदनशील वातावरण’ की जरूरतों को पूरा करते हैं और एक सुरक्षित और कोविद संवेदनशील वातावरण बनाते हैं। यह तीन प्रमुख पहलुओं, कार्यालय पहुँचने के पहले, कार्यालय में और घर वापस लौटने की स्थिति में सहायता प्रदान करता है।
मेडीबडी-डॉक्स ऐप्प के सह-संस्थापक और सीईओ श्री सतीश कन्नन के मुताबिक मेडिक्लिनिक ऐसी पहल है जहाँ एक साथ हर समाधान मिल सकता है, जो परामर्श देने से लेकर उसे लागू करने तक में सहायता प्रदान करता है। तक समाधान प्रदान कर सकता है। यह आपको सोचने की करने की सलाह दे रहा है। हम मेडीबडी-डॉक्स ऐप्प पर अपना काम कर रहे हैं और यह स्पष्ट है कि हम सभी को मानवता के सबसे नए दुश्मन से लड़ने के लिए मिलकर काम करना होगा।”
कम्पनी कई कॉरपोरेट्स को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्वीपमेंट(पीपीई) की आपूर्ति के लिए उपभोग सामग्रियों का समर्थन भी प्रदान करती है और कर्मचारियों को घर पर ही कोविद परीक्षण कराने में मदद करती है।

अम्फान पीड़ितों की मदद के लिए आगे आया ‘स्पेड’

कोलकाता : मई 2020 में कोलकाता में 2009 के चक्रवात आइला से भी भयावह अम्फान तूफान आया और इसे सदी की प्राकृतिक आपदाओं में भी गिना जा रहा है। अम्फान के कारण घर, पेड़, बिजली के खम्भे गिरे, गाँवों में पानी भर आया और लोग पुल और सड़कों पर आ गये। दो माह पहले से ही कोविड से पीड़ित महानगर में अम्फान के कारण स्थिति और भी बिगड़ गयी। अम्फान के कारण अर्थव्यवस्था को गहरी क्षति पहुँची, अन्न की कमी और महँगाई भी बढ़ गयी। ऐसी स्थिति में स्पेड दक्षिण 24 परगना के नामखाना और सागर द्वीप औऱ पूर्व मिदनापुर के सूताहाटा ब्लॉक में लोगों की मदद कर रहा है। इन इलाकों में भी लोग भोजन और पेयजल को तरस गये थे। इस स्थिति को देखते हुए स्पेड ने सोशल मीडिया खासकर फेसबुक का सहारा लिया. व्यक्तिगत और संस्थानगत सम्पर्कों की मदद से 6 लाख रुपये एकत्रित किये गये। स्पेड के स्व निर्भर समूहों की महिलाओं ने 1 हजार रुपये की कीमत वाले 600 बैग तैयार किये जिनमें जरूरी सामान थे। पीड़ित ग्रामीणों तक सहायता पहुँचाना भी एक चुनौती थी। मैटाडोर वैन्स,नाव औऱ पैदल ही पहुँचने की तैयारी की गयी। स्पेड इन दिनों माँ शारदा महिला संघ और पी यू पी ए के साथ काम कर रहा है और लम्बे समय से ऑक्सफैम इंडिया, इन्डो ग्लोबल सोशल सर्विसेज (आईजीएसएसएस) के साथ ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सक्रिय है। स्पेड का मानना है कि लोग आपदा के समय साथ खड़े होने को तैयार रहते हैं। स्पेड के निदेशक (संसाधन) इन्द्रजीत दत्त कहते हैं कि उनका यह गैर सरकारी संगठन पिछले 25 साल से जरूरतमंद लोगों के साथ है और आपदा के समय में राहत प्रदान कर रहा है, उनके साथ है। अब योजना पीड़ित लोगों के पुर्नवास की है, उनके जीवन – यापन की व्यवस्था कर देने की है और यथाशीघ्र स्कूल खड़ा करने की योजना है जिससे जीवन सामान्य हो सके।

8 साल तक बेरोजगार थे ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ के अब्दुल, अब 2 रेस्तरां  के हैं मालिक

मुम्बई :  ‘तारक मेहता का उल्‍टा चश्‍मा’ टीवी का लोकप्रिय धारावाहिक है। शो में हर किरदार अपनी अनूठी अदाकारी से लोगों को खूब हंसाते है। यह शो 28 जुलाई 2008 को शुरू हुआ था। शो में अब्दुल यानी शरद सांकला का किरदार लोगों को खूब पसंद है। शरद ने 35 से ज्यादा फिल्मों में भी काम किया है, लेकिन इसके बाद भी वो 8 साल तक बेरोजगार थे लेकिन तारक मेहता सीरियल को साइन करने के उनकी जिंदगी बदल गयी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुडकर नहीं देखा। शरद ने अपनी पहली फिल्म 1990 में ‘वंश’ से इंडस्ट्री में कदम रखा था। इस फिल्म में शरद ने ‘चार्ली चैप्लिन’ की भूमिका अदा की थी। इस फिल्म में शरद को 50 रुपए प्रति दिन के मिलते थे।
इसके बाद शरद खिलाड़ी, बाजीगर और बादशाह जैसी कई बड़ी फिल्मों में भी नजर आए। लेकिन इसके बाद शरद 8 सालों तक जॉबलेस रहे। शरद ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इन आठ सालों में मैं अपना पोर्टफोलियो लेकर प्रोड्यूसर्स के दरवाजे खटखटाता फिरता था। नाम होने के बावजूद काम नहीं मिला मुझे।
मुझे सरवाइव करना था तो असिस्टेंट डायरेक्टर, कोरियोग्राफर और कास्टिंग डायरेक्टर के तौर पर मैंने काम करना शुरू किया। कुछ कैमियो भी किए। लेकिन बड़ा कुछ नहीं मिला। फिर मैंने ‘तारक मेहता…’ ज्वॉइन किया और फिर मुड़कर नहीं देखा।
शरद ने बताया कि शुरुआत में मैं महीने में 2-3 दिन शूट करता था। लेकिन चरित्र लोकप्रिय हो गया और लोग मुझे शरद न सही अब्दुल के रूप में जानने लगे। कभी 50 रुपए कमाने वाले शरद को आज तारक शो के लिए 35 से 40 हजार रुपए मिलते हैं। उनका खुद का मुंबई में घर है और उनके दो रेस्तरां भी है, जो मुम्बई में है।

जोएन एस. बास बनीं अमेरिकी वायुसेना की चीफ मास्टर सार्जेंट चुनी जाने वाली पहली महिला

वाशिंगटन : चीफ मास्टर सार्जेंट जोएन एस. बास को वायु सेना का 19वां चीफ मास्टर सार्जेंट चुना गया है और इसी के साथ वह किसी अमेरिकी सैन्य सेवा में शीर्ष ‘एन्लिस्टिड लीडर’ चुनी जाने वाली पहली महिला बन गई हैं।
वायुसेना ने चीफ मास्टर सार्जेंट के रूप में किसी महिला का चयन कर इस महीने में दूसरी बार इतिहास रचा है। इससे करीब दो सप्ताह पहले सीनेट ने जनरल चार्ल्स क्यू. ब्राउन की वायु सेना के चीफ ऑफ स्टाफ पद पर नियुक्ति की पुष्टि की थी। ब्राउन अमेरिका की किसी सैन्य सेवा का नेतृत्व करने वाले पहले अश्वेत अधिकारी बन गए हैं। वह अगस्त में कार्यभाल संभालेंगे। अमेरिका सेना में वरिष्ठ पदों पर अपेक्षाकृत बहुत कम महिलाओं को पदोन्नत किया जाता है।
अभी तक किसी भी महिला को किसी सैन्य सेवा के चीफ के रूप में सेवाएं देने का मौका नहीं दिया गया है और न ही किसी महिला ने ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के सदस्य के तौर पर सेवाएं दी है। बास सेवा के एन्लिस्टिड (सूचीबद्ध) कर्मियों के कल्याण संबंधी मामलों पर ब्राउन और वायु सेना सचिव बारबरा बैरेट की वरिष्ठ एन्लिस्टिड सलाहकार होंगी।
हवाई की रहने वाली बास मिसिसिपी में कीस्लर वायु सेना अड्डे पर कमांड चीफ मास्टर सार्जेंट के रूप में सेवाएं दे रही हैं। वह 1993 में वायुसेना में भर्ती हुई थी।
वायुसेना ने बास के हवाले से कहा, ‘‘यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मुझे वायु की 19वीं चीफ मास्टर सार्जेंट के तौर पर चुना गया।’’

टाउन एंड कंट्र्री पत्रिका की फिलांथ्रोपिस्ट्स सूची में नीता अम्बानी

अमरीकी पत्रिका ने कोरोना के दौैरान मिली मदद को सराहा

नयी दिल्ली : अमेरिका की प्रमुख जनरल इंटरेस्ट पत्रिका टाउन एंड कंट्र्री ने अपने गृष्म अंक में नीता अंबानी और रिलायंस फाउंडेशन को 2020 के टॉप फिलांथ्रोपिस्ट्स की सूची में शामिल किया है। उन्हें यह सम्मान कोरोनावायरस महामारी की रोकथाम से जूड़े कार्यों में मदद करने के लिए दिया गया है। पत्रिका की आवरण कथा में कहा गया है कि गरीबों और मजदूरों को खाना खिलाने, वित्तीय योगदान करने और देश का पहला कोविड-19 अस्पताल स्थापित करने में रिलायंस फाउंडेशन की कोशिशों में अंबानी ने अग्रणी भूमिका निभाई है।

टिम कुक, माइकेल ब्लूमबर्ग व ओप्राह विनफ्रे भी सूची में शामिल
टॉप फिलांथ्रोपिस्ट्स की इस सूची में नीता अंबानी एकमात्र भारतीय हैं। इस सूची में टिम कुक, ओप्राह विन्फ्रे, लॉरेंस पावेल जॉब्स, लााउडर परिवार, डोंटेला वर्सेस, माइकेल ब्लूमबर्ग, लियोनार्डो डि कैप्रियो जैसी नामचीन हस्तियों को भी शामिल किया गया है। टाउन एंड कंट्र्री अमेरिका की अग्रणी लाइफस्टाइल पत्रिका है। यह अमेरिका में लगातार प्रकाशित हो रही सबसे पुरानी पत्रिका है। इसका प्रकाशन 1846 से हो रहा है। हर साल इस पत्रिका का एक संपूर्ण अंक फिलांथ्रोपिस्ट्स के लिए समर्पित होता है। पत्रिका ने कहा कि इस साल का यह अंक थोड़ा ज्यादा महत्वपूर्ण है। ऐतिहासिक परिस्थितियों में ये लोग हमारा जीवन बचा रहे हैं। हमारे अंदर उम्मीद जगा रहे हैं।

फिलांथ्रोपी का क्या है मतलब
पत्रिका के मुताबिक फिलांथ्रोपी एक ग्रीक शब्द है। इसका मतलब होता है मानव जाति से प्यार। लेकिन यह एक विचार भी है। यह अंधेरे में प्रकाश लाती है। निराशा में उम्मीद जगाती है। संकट के समय यह राहत पहुंचाती है। इसका मतलब है सभी को न्याय देते हुए भी उदारता।

अंबानी व रिलायंस फाउंडेशन के योगदान की सराहना
अंबानी और रिलायंस फाउंडेशन के योगदान के बारे में पत्रिका में कहा गया है कि रिलायंस फाउंडेशन ने करोड़ों कामगारों और गरीबों को भोजन कराया और उन्हें मास्क बांटे, देश का पहला कोविड-19 अस्पताल बनवाया और एक आपात कोष में 7.2 करोड़ डॉलर का दान किया। रिलायंस फाउंडेशन रिलायंस इंडस्ट्रीज की फिलांथ्रोपिक इकाई है। नीता अंबानी इस फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरपर्सन हैं।

सरकार और समुदाय को मदद करने के लिए प्रतिबद्ध : अंबानी
इस अवसर पर नीता अंबानी ने कहा कि हमेशा संकट के समय तत्काल राहत और संसाधन पहुंचाना होता है। ऐसे में सरलता और सेवा की भावना की जरूरत होती है। समय के साथ हमने फाउंडेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज में संकट के समय तुरंत और बहुआयामी व सुव्यवस्थित तरीके से कार्य करने के लिए खुद को तैयार कर लिया है। हमें खुशी है कि हमारे कार्यों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है। हम अपनी फिलांथ्रोपी में जरूरत के समय सरकार और अपने समुदाय को मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

महज 2 सप्ताह में तैयार हो गया था कोविड-19 अस्पताल
रिलायंस फाउंडेशन ने मार्च में देश का पहला कोविड-19 अस्पताल स्थापित किया। मुंबई में स्थित इस अस्पताल की शुरुआत 100 बिस्तरों के साथ की गई थी। इसे महज दो सप्ताह में तैयार कर लिया गया था। मार्च के अंत से इस अस्पताल में कोविड मरीज भर्ती होने शुरू हो गए थे। अप्रैल में बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 220 कर दी गई। फाउंडेशन ने देशव्यापी फूड सेवा शुरू की, जिसका नाम है अन्न सेवा। इसके तहत अब तक 5 करोड़ भोजन कराए गए हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा कॉरपोरेट मील कार्यक्रम बन चुका है। फाउंडेशन ऑनलाइन मेडिकल सहायता, मुंबई में कोविड मरीजों को होम क्वारंटाइन सुविधा, ग्रामीण समुदायों को मदद, पालतू व आवारा पशुओं तथा मवेशियों को भोजन और स्वास्थ्य सेवा देने का काम भी करता है। रिलांयस इंडस्ट्रीज ने मास्क और पीपीई की मैन्यूफैक्चरिंग भी शु्रू कर दी है।