Monday, July 6, 2026
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झारखंडी भाषा में श्रीमद्भागवत गीता, लोहरदगा के लेखक ने नागपुरी में किया अनुवाद

लोहरदगा । श्रीमद्भागवत गीता को हम सब ने पढ़ा होगा या फिर हम सब उसके बारे में जानते जरूर हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान दिया था । भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन का सत्य गीता के रूप में बताया है। श्रीमद्भागवत गीता को लोहरदगा के लेखक लाल राजेंद्र प्रताप देव ने नागपुरी भाषा में अनुवाद किया है। नागपुरी में अनुवादित श्रीमद्भागवत गीता लाल राजेंद्र प्रताप देव की मेहनत से गीता महात्मय के नाम से जल्द ही प्रकाशित होकर बाजार में उपलब्ध होगी।       लाल राजेंद्र प्रताप देव लोहरदगा के सेन्हा प्रखंड के आराहंसा गांव के रहने वाले हैं। 88 साल के लाल राजेंद्र प्रताप देव प्रारंभ से ही धार्मिक प्रवृत्ति के रहे हैं। गायत्री परिवार के साथ जुड़े रहे लाल राजेंद्र प्रताप देव का जीवन संत महात्माओं के साथ भी काफी समय तक गुजरा है। लाल राजेंद्र प्रताप देव का कहना है कि संत महात्माओं के संपर्क में रहने के दौरान ही उन्हें यह अहसास हुआ कि गीता काफी कठिन ग्रंथ है। इसे सरल रूप से आम लोगों के बीच लाने के लिए विशेष तौर पर दक्षिणी छोटानागपुर क्षेत्र में लोगों को गीता का महत्व बताने के लिए इसका नागपुरी अनुवाद करना चाहिए। कई साल यह सोचने में ही गुजर गए।

इसी बीच जनवरी 2023 में इसे प्रारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कई बार नागपुरी में लिखा लेकिन उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि इसे कैसे पूरा किया जाए। रात में भी उठ कर इसे लिखना शुरू कर देते थे। धीरे-धीरे 3 महीने में गीता के 18 अध्याय का नागपुरी अनुवाद 128 पन्नों में पूरा किया। अब नागपुरी में गीता का अनुवाद प्रकाशित हो रहा है, जो आगामी दिनों में आम लोगों के बीच उपलब्ध हो जाएगा। उन्होंने इसके अलावे भारत दर्शन, ठाकुर जगन्नाथ शाहदेव सहित कई पुस्तकें लिखी हैं। आगे भी वह इस तरह की पुस्तक लिखना चाहते हैं। लाल राजेंद्र प्रताप देव के इस पहल की सराहना हो रही है। पुस्तक के प्रकाशन में उन्हें लगभग एक लाख रुपये का खर्च हुआ है। इसकी दो हजार प्रतियां प्रकाशित हो रही हैं। प्रकाशन का कार्य अंतिम चरण में है।

दक्षिणी छोटानागपुर में आमतौर पर नागपुरी भाषा बोली जाती है। यह भाषा यहां के लोगों के रग-रग में बसी हुई है। नागपुरी भाषा में गीता को अनुवाद करने का काम लोहरदगा के लाल राजेंद्र प्रताप देव ने किया है। गायत्री परिवार और धार्मिक जीवन से जुड़े रहे लाल राजेंद्र प्रताप देव के इस पहल की सराहना की जा रही है। जल्द ही अनुवादित गीता बाजार में उपलब्ध होगी।

भारतीय मूल के वैभव तनेजा बने एलन मस्क की कंपनी टेस्ला के सीएफओ 

न्यूयॉर्क, अमेरिका । भारतीय मूल के वैभव तनेजा को अमेरिका की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला  का नया चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) बनाया गया है।। ऑटोमेकर टेस्ला ने सोमवार को एक एक्सचेंज फाइलिंग में शेयर बाजार को यह जानकारी दी । कंपनी के पिछले सीएफओ जॅचरी किरखोर्न के पद छोड़ने के बाद यह घोषणा की गई।

जानकारी के मुताबिक, वैभव तनेजा (45) को शुक्रवार को टेस्ला का सीएफओ बनाया गया । इसके साथ ही वह कंपनी के चीफ अकाउंटिंग ऑफिसर यानी सीएओ (CAO) की वर्तमान भूमिका भी निभाते रहेंगे। एलन मस्क के नेतृत्व वाली कंपनी के साथ किरखोर्न के 13 साल के कार्यकाल को कंपनी ने ‘जबर्दस्त विस्तार और विकास” का दौर बताया है। पिछले चार वर्षों से टेस्ला के मास्टर ऑफ कॉइन और सीएफओ किरहॉर्न ने अपने पद से ने इस्तीफा दे दिया।

आपको बता दें कि वैभव तनेजा मार्च, 2019 से टेस्ला के सीएओ और मई, 2018 से कॉरपोरेट कंट्रोलर के रूप में काम कर रहे हैं। उन्होंने फरवरी 2017 और मई 2018 के बीच असिसटेंट कॉर्पोरेट कंट्रोलर के रूप में काम किया और मार्च 2016 से, 2016 में टेस्ला द्वारा अधिग्रहित यूएस-बेस्ड सौर पैनल डेवलपर सोलरसिटी कॉर्पोरेशन में फाइनेंस और अकाउंटिंग रोल में काम किया है। कंपनी की फाइलिंग के अनुसार, इससे पहले वह  जुलाई 1999 और मार्च 2016 के बीच भारत और अमेरिका दोनों में प्राइसवाटर हाउसकूपर्स में कार्यरत थे।

नहीं रहे पेपरफ्राई के सह-संस्थापक अंबरीश मूर्ति

नयी दिल्ली । पेपरफ्राई के सह-संस्थापक अंबरीश मूर्ति का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके साथी सह-संस्थापक आशीष शाह ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। शाह ने ट्वीट किया, “यह बताते हुए बेहद दुख हो रहा है कि मेरे दोस्त, गुरु, भाई, आत्मीय अंबरीश मूर्ति अब नहीं रहे । कल रात लेह में दिल का दौरा पड़ने से उन्हें खो दिया। कृपया उनके लिए और उनके परिवार और प्रियजनों को शक्ति प्रदान करने के लिए प्रार्थना करें।” अंबरीश वेदांतम मूर्ति एक भारतीय उद्यमी और व्यवसाय कार्यकारी थे। वह ई-कॉमर्स फर्नीचर और घरेलू सामान कंपनी पेपरफ्राई के सह-संस्थापक और सीईओ थे, जिसकी उन्होंने 2012 में आशीष शाह के साथ सह-स्थापना की थी। पेपरफ्राई की स्थापना से पहले मूर्ति मार्च 2008 और जून 2011 के बीच ईबे, भारत, फिलीपींस और मलेशिया में कंट्री मैनेजर थे।

मूर्ति ने दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से बीई किया है और भारतीय प्रबंधन संस्थान, कलकत्ता से एमबीए किया है। मूर्ति का उद्यमिता से जुड़ाव उनके स्नातक स्तर की पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ जब उन्होंने ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के छात्रों को भौतिकी और गणित में घर पर पढ़ाया। उन्होंने ट्यूटर्स ब्यूरो नामक एक छोटा व्यवसाय स्थापित किया जो प्रतिभाशाली ट्यूटर्स को स्कूली छात्रों से जोड़ता था। उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में दो साल तक उद्यम चलाया। मूर्ति ने 1996 में कैडबरी इंडिया के साथ एक प्रबंधन प्रशिक्षु के रूप में अपना कॉर्पोरेट करियर शुरू किया। उन्होंने अगले पांच साल कंपनी के मार्केटिंग डिवीजन में बिताए और ब्रांड मैनेजर के पद तक पहुंचे और 2001 तक कैडबरी के दिल्ली, राजस्थान और मुंबई कार्यालयों में काम किया।

कुछ वर्षों में उन्होंने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी के साथ वीपी (मार्केटिंग) और लेवी स्ट्रॉस इंडिया में ब्रांड लीडर जैसे नेतृत्व पदों पर रहते हुए कई उद्योग क्षेत्रों में काम किया। 2012 में अंबरीश मूर्ति और आशीष शाह ने फर्नीचर और घरेलू सामानों के लिए भारत के अग्रणी ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस पेपरफ्राई को लॉन्च करने के लिए ओमनीचैनल रिटेल का नेतृत्व किया। पिछले दशक में पेपरफ्राई ने एक ऑनलाइन वर्चुअल कैटलॉग, एक व्यापक इन-हाउस आपूर्ति श्रृंखला और भारत के 100 से अधिक शहरों को कवर करने वाले एक बड़े ओमनीचैनल पदचिह्न को मिलाकर क्लासिकल रिटेल के सिद्धांतों को बाधित किया है।

रजिस्ट्रार की गलती से बंगाल में रद्द होंगे प्रमाणपत्र, 15 जोड़ों को फिर करनी होगी शादी

कोरोना के दौरान ऑनलाइन पंजीकरण में गलतियों की भरमार

कोलकाताः कोविड लॉकडाउन के दौरान शादी करने वाले कोलकाता और उसके आसपास के कम से कम 15 जोड़ों को फिर से शादी करनी होगी। हालांकि उनकी दूसरी बार शादी करने की राह आसान नहीं होगी। उन्हें कानूनी परेशानियों से बचने के लिए जिला अदालत का जाना होगा। यहां पर तमाम कानूनी पचड़ों में पड़कर अपनी शादी को रद्द करना होगा। शादी रद्द होने के बाद उन्हें फिर से शादी करनी होगी। यह सब उन्हें इसलिए करना होगा क्योंकि उनके विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र में त्रुटियां हैं। यह गलतियां ऐसी हैं जिन्हें ठीक नहीं किया जा सकता है। एक बार जारी किए गए विवाह प्रमाणपत्रों को केवल जिला अदालत ही रद्द कर सकता है। बंगाल विवाह पंजीयक के कार्यालय ने महामारी के दौरान जारी किए गए 8,000 से अधिक विवाह प्रमाणपत्रों में विसंगतियां पाई हैं, जिनमें से कम से कम 15 को नियमित नहीं किया जा सकता है ।
इन 15 जोड़ों को नए विवाह प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए कहा गया है। उनमें से बारह हिंदू जोड़े हैं जिन्होंने विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत शादी की थी और 30 दिनों की अवधि के बाद अपने प्रमाण पत्र प्राप्त किए थे।
आदेश में कहा गया है, ‘ये 15 विवाह प्रमाणपत्र कानूनी रूप से संदिग्ध हैं। उदाहरण के लिए, कुछ में, गवाहों के नाम ‘एबीसी’ के रूप में उल्लिखित हैं। अन्य में, गवाहों के पते गायब हैं या दिए गए टेलीफोन नंबर मौजूद नहीं हैं। प्रथम दृष्टया, ऐसा प्रतीत होता है कि जिन विवाह रजिस्ट्रारों ने इन व्यक्तिगत डेटा को अपलोड किया था, उन्होंने गलती की थी।’
अधिकारी ने कहा कि चूंकि इन त्रुटियों को ठीक नहीं किया जा सकता है, इसलिए इन जोड़ों को जिला अदालत में अपनी शादी को रद्द करने और नए प्रमाण पत्र जारी करने के लिए फिर से शादी करने की सलाह दी गई है।
विवाह पंजीयक कार्यालय की ओर से हुई जांच से पता चला है कि लॉकडाउन के दौरान कम से कम 15 शहर के जोड़ों को विवाह पंजीयकों ने उनकी शादी के समय गुमराह किया। इसके लिए डनलप स्थित एक रजिस्ट्रार की निंदा भी की गई है। कोविड लॉकडाउन का लाभ उठाते हुए, इस रजिस्ट्रार ने दंपति को आश्वासन दिया कि वह भौतिक सत्यापन के बिना कानूनी औपचारिकताओं का ध्यान रखेंगे।

एक विवाह पंजीयक को जोड़ों और गवाहों के विवरण का भौतिक रूप से सत्यापन करना पड़ता है, लेकिन इन मामलों में पंजीयक भौतिक सत्यापन करने में विफल रहा और गलत डेटा दिया। अधिकारी ने कहा कि जब इन 8,000-विषम जोड़ों को त्रुटियों के बारे में सूचित किया गया, तो उन्होंने मदद के लिए रजिस्ट्रार के कार्यालय से संपर्क किया। उन्होंने कहा, ‘हम दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर वर्तनी और तिथियों जैसी कुछ त्रुटियों को ठीक कर सकते हैं। ऑनलाइन पोर्टल में एक संपादन विकल्प विवाह पंजीयकों के लिए सुलभ है। लेकिन इन 15 मामलों में हम नए गवाहों या उनके पते का हवाला नहीं दे सकते हैं या फोन नंबर नहीं जोड़ सकते हैं। यह गैरकानूनी है। उनके लिए एकमात्र विकल्प पुनर्विवाह करना या अदालत से उचित निर्देश प्राप्त करना है।
1 जून, 2019 से बंगाल में विवाह अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है और हस्तचालित पंजीकरण को समाप्त कर दिया गया है। इस दौरान डेटा ट्रांसफर किया जा रहा था। राज्य ऑनलाइन पोर्टल के उपयोग करने को लेकर रजिस्ट्रारों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा था, इसी दौरान कोरोना आ गया और लॉकडाउन लग गया। अधिकारी ने दावा किया कि लेकिन महामारी ने प्रक्रिया को बाधित कर दिया और इससे कुछ रजिस्ट्रार गलतियां हुईं।

प्रेमचंद ने जनसामान्य को प्रतिष्ठित किया : प्रो. दामोदर मिश्र

मिदनापुर। विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया।स्वागत गीत श्रेया और राया सरकार ने प्रस्तुत किया।इस अवसर पर ‘प्रेमचंद का साहित्य और वर्तमान भारत’ विषय पर चर्चा हुई।अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) दामोदर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद ने पहली बार ऐतिहासिक या पौराणिक चरित्रों की जगह लोक नायकों को अपनी रचना का केंद्र बनाया। सकारात्मक देशप्रेमपरक प्रवृत्ति को लेखक हवा देता है और प्रेमचंद ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से जनता में देशप्रेम का संदेश दिया, सोजेवतन इसका प्रमाण है। विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार प्रसाद ने कहा कि आज का समय प्रेमचंद का समय नहीं है फिर भी प्रेमचंद का साहित्य हमारे समाज की सच्ची तस्वीर बयां करता है। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि हमारा समाज जिस तरह से प्रेमचंद को भूल रहा है, यह चिंता का विषय है। बाजारवाद के प्रभाव में प्रेमचंद का हामिद खो गया है। प्रेमचंद का साहित्य हमें धर्मांधता, राष्ट्रान्धता और धनान्धता से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। शोधार्थी आदित्य गिरि ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मानव मूल्यों से संपृक्त है।वे महाजनी सभ्यता का पुरजोर विरोध करते हैं।इस अवसर पर नेहा शर्मा, मोनू,अपर्णा, संजना, कोमल साव,नेहा चटर्जी, मुस्कान, प्रिया चौधरी,तमन्ना, तराना, रोशन झा,कोमल सिंह, सिमरन गुप्ता, मीनाक्षी, राहुल, सूरज गुप्ता, प्रीति सिंह, पी.बेबी,बिट्टू कौर,सीता मोहता, अंजली तमांग, नेहा परवीन,निशा शर्मा और नाजिया ने अपना विचार रखा। कार्यक्रम का सफल संचालन उष्मिता गौड़ा और सुषमा कुमारी ने किया। धन्यवाद ज्ञापन देते हुए विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य हमें वैचारिक रूप से समृद्ध करता है।

एसिडिटी से परेशान है बंगाल की 31 प्रतिशत आबादी

हर 10 में से 7 शहरी भारतीय को पाचन समस्याओं से परेशान
कोलकाता। अगर आप कोलकाता में हैं और आप एसिडिटी से परेशान हैं तो हम आपको बता दें कि आप अकेले नहीं हैं । बंगाल में एसिडिटी तेजी से बढ़ती जा रही स्वास्थ्य समस्या बन रही है और राज्य की 31 प्रतिशत आबादी एसिडिटी से परेशान है । एसिडिटी यानी गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिसीज़ (जीईआरडी) से संबंधित इस तथ्या का खुलासा एक शोध में हुआ है । यह शोध दिल्ली स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल के मेडिसिन विभाग, द्वारा किया गया है और इंटरनेशनल जर्नल ऑफ रिसर्च इन मेडिकल साइंसेज में प्रकाशित हुआ है ।
कोलकाता में हील फाउंडेशन द्वारा “एसिडिटी – करोडो लोगों की समस्या के सुरक्षित समाधान” विषय पर आयोजित एक मीडिया जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गयी । इस कार्यशाला में डॉ. (प्रो.) अरूप दास विश्वास और डॉ. (प्रो.) अपूर्व कुमार मुखर्जी ने इसके कारणों, स्वास्थ्य पर प्रभाव और इससे निपटने के सुरक्षित तरीकों पर चर्चा की।
डॉ. अरूप दास विश्वास, ने क्षेत्रीय आंकड़ों का खुलासा करते हुए कहा, “ पश्चिम बंगाल इस मामले में सबसे ज्यादा परेशान राज्य है जहाँ प्रत्येक तीन में से एक निवासी इस बीमारी से प्रभावित है। गलत जीवनशैली, आहार की अस्वास्थ्यकर आदतें इसे और गंभीर बना देती हैं।” उन्होंने दवाओं के चयन में सावधानी बरतने की सलाह दी क्योंकि उनमें से कुछ पेट में महत्वपूर्ण एसिड उत्पादन को पूरी तरह से अवरुद्ध कर सकती हैं । एसिडिटी से संबंधित विकारों के लिए रेनिटिडिन खाने की सलाह दी जाती है। एसिड के संतुलित स्तर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. (प्रो.) अपूर्व कुमार मुखर्जी ने कहा, “भोजन के उचित पाचन के लिए पेट में एसिड के अधिकतम स्तर की जरूरत होती है। हालांकि, हाइपरएसिडिटी पाचन और समग्र स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। बंगाल में, मछली, तले हुए और मसालेदार खाद्य पदार्थों, चाय, कॉफी, कार्बोनेटेड पेय पदार्थों और शराब का अत्यधिक सेवन किया जाता है। ये अक्सर एसिडिटी से संबंधित समस्याओं का कारण बनते हैं।” उन्होंने बताया, “पर्याप्त नींद न लेना, कार्य का समय नियत न होना और खान-पान की गलत आदतों के कारण समस्या बढ़ रही है। एसिडिटी से बचने के लिए, नियमित रूप से व्यायाम करें, जंक फूड्स और मसालेदार भोजन से परहेज करें, खूब पानी पीयें। कोई भी दवा लेने से पहले हमेशा डॉक्टर से परामर्श लें ।”
गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिसीज़ (जीईआरडी) तब होती है जब पेट का एसिड गले और पेट (आहारनाल) को जोड़ने वाली नली में वापस प्रवाहित होता है। इससे हार्ट बर्न या सीने में जलन जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह काफी तकलीफदेह हो सकता है और अगर ठीक से प्रबंधित न किया जाए तो अधिक गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। पाचन के शुरूआती स्तर में और आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन बी12 जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के अवशोषण में पेट के एसिड की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए, विशेषज्ञ एसिडिटी से संबंधित विकारों की बढ़ती वृद्धि को संबोधित करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। स्वस्थ जीवनशैली विकल्पों को अपनाने और उचित व सुरक्षित उपचार विकल्पों के लिए पेशेवर मार्गदर्शन लेने जैसे कदम उठाए जाने चाहिए।

बचत खातों से डाक विभाग ने कमाये 450 करोड़

कोलकाता । मर्चेन्ट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई) ने निर्यातकों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित किया । इस सत्र में पश्चिम बंगाल सर्कल के पोस्ट मास्टर जनरल (एम एंड बी डी) अनिल कुमार ने डाकघर की विभिन्न योजनाओं पर प्रकाश डाला । उन्होंने कहा कि डाक विभाग ने बचत खातों से 450 करोड़ रुपये अर्जित किए जबकि पार्सल डिलिवरी से 299 करोड़ रुपये और आधार जारी कर 9.21 करोड़ रुपये की आय की । 2.11 लाख रुपये की पासपोर्ट सेवा प्रदान कर की गयी । उन्होंने कहा कि भारत में 60 हजार डाकघर हैं जिनमें से बंगाल में 12 हजार डाकघर हैं। इससे वस्तुओं की डिलिवरी में सुविधा हुई, साथ ही निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए डाकघर निर्यात केन्द्र योजना भी आरम्भ की गयी है । इससे भारत के किसी भी कोने से गंगाजल तक का निर्यात किया जा रहा है । निर्यातकों के लिए जीएसटी रिफंड की भी सुविधा है । कुमार ने कहा कि डाकघर सेवा इस समय 213 देशों में है जबकि एशिया – पैसिफिक के 38 देशों ई कॉमर्स की सुविधा है । एमसीसीआई की फॉरेन ट्रेड काउंसिल के चेयरमैन महेश केयाल ने डाकघर निर्यात केन्द्र योजना की सराहना की । धन्यवाद ज्ञापन फॉरेन ट्रेड काउंसिल के फॉरेन ट्रेड काउंसिल के सदस्य बी डी अग्रवाल ने दिया ।

‘मूक कला बिभंग’ कोलकाता अनुभव का सांस्कृतिक आयोजन संपन्न

कोलकाता । संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से मूक कला बिभंग कोलकाता अनुभव के तत्वावधान से सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया गया । तपन थियेटर ऑडिटोरियम में गत तीन जुलाई को यह कार्यक्रम बच्चों और युवाओं के बीच प्रदर्शन कला को बढ़ावा देने के लिए ‘कोलकाता अनुभव’ का एक महत्वपूर्ण प्रयास है जहां बच्चे और युवा कला के विभिन्न रूपों से परिचित होकर एक बेहतर समाज बना सकते हैं। डॉ विनोद नारायण इंदुरकर, माननीय अध्यक्ष, सांस्कृतिक संसाधन और प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली ने मुख्य अतिथि के रूप उपस्थित हुए।
कार्यक्रम का आरंभ एक ‘ओपनिंग सॉन्ग’ से हुई जिसे प्रख्यात गायक संजीब घोष ने गा कर सभी श्रोताओं को आनंदित कर दिया। उद्घाटन समारोह में थिएटर, माइम और नृत्यांगना बिजोया दत्त और कोलकाता अनुभव की वरिष्ठ संकाय मीनाक्षी चतुर्वेदी द्वारा एक ‘ओपनिंग डांस’ शानदार ढंग से प्रस्तुत किया गया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित किया और मुख्य सम्मानीय अतिथियों का स्वागत किया गया। सम्मानित अतिथियों में ध्रुब मित्रा, पूर्व निर्माता, दूरदर्शन केंद्र, कोलकाता, और माइम प्रतिपादक, प्रो.तारक सेनगुप्त, (सेवानिवृत्त), नाटक और रंगमंच कला, संगीत-भवन, विश्व-भारती, शांतिनिकेतन, प्रो अविजित संतरा, निदेशक और प्राचार्य , आयुष्मी फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान, कोलकाता और कोलकाता के प्रतिष्ठित ज्वाइंट-रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ संतोष कुमार, सेंट जेवियर्स बिजनेस स्कूल, के डीन प्रोफेसर डॉ. सितांगशु खाटुआ का अभिनंदन किया गया। जेवियर्स यूनिवर्सिटी, कोलकाता और वित्त में प्रोफेसर, थिएटर व्यक्तित्व, नाटक निर्देशक, लेखक और अभिनेता देबोलीना साहा, प्रख्यात चित्रकार आदि को सम्मानित किया गया । इसके बाद विशिष्ट अतिथि, प्रख्यात पत्रकार और प्रसिद्ध टेलीफिल्म निर्देशक,  नौशाद मलिक का अभिनंदन किया गया जिन्होंने अपनी एक कविता सुनाई। इसके बाद ध्रुब मित्रा, पूर्व-निर्माता, दूरदर्शन केंद्र, कोलकाता और माइम प्रतिपादक द्वारा पैंटोमाइम, नाट्य कला, लोक और स्वदेशी कला और दृश्य कला पर आधारित एक व्यापक, व्यावहारिक संरचित कार्यशाला का आयोजन किया गया।सभी प्रमुख अतिथियों ने अपना वक्तव्य रखा। सांस्कृतिक कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘पॉन पदार्थ शिकार’, की प्रस्तुति से हुई जो माइम नाटक है जिसका निर्देशन और प्रदर्शन थिएटर और माइम प्रतिपादक कृष्णा दत्त ने किया था। दहेज प्रथा के पीड़ितों के विषय पर केंद्रित माइम नाटक के रूप में बहुत शक्तिशाली रूप से चित्रित किया गया । अवधारणा, स्क्रिप्ट और संकलन कृष्णा दत्त और विजया दत्त का रहा जो नाट्य कला और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं, उनकी टीम द्वारा बहुत अच्छी तरह से तैयार और संरचित किया गया । इसमें ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ की अवधारणा पर अधिक जोर दिया गया। माइम ड्रामा की इस थीम ने राष्ट्र के सांस्कृतिक ढांचे में महिलाओं द्वारा निभाई गई भूमिका के साथ-साथ व्यक्तिगत स्थान पर संस्कृति के पोषण और संरक्षण में उनके योगदान के बारे में जागरूकता को बढ़ावा दिया और प्रचारित किया। इस प्रदर्शन ने जिसमें सुंदर हावभाव, चाल और जीवंत अभिव्यक्तियाँ शामिल थीं, दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद विचारोत्तेजक माइम एक्ट, ‘स्वच्छ भारत अभियान’ आया। अगली प्रस्तुति एक प्रसिद्ध लघु नाटक, ‘जिबोंटा रंगमंच’ थी, जिसे थिएटर, माइम और नृत्य व्यक्तित्व बिजोया दत्त द्वारा प्रस्तुत किया गया। सुब्रत बर्मन, कोलकाता अनुभव के वरिष्ठ नाटक कलाकार, सबिता घोष, कोलकाता अनुभव के वरिष्ठ सदस्य छात्र, सायन दत्ता और  कोलकाता अनुभव के सबसे कम उम्र के छात्र मास्टर उद्भव दास,  शीला चटर्जी और तापस मुखर्जी, वरिष्ठ कोलकाता अनुभव के नाट्य कलाकार हैं। नाटक के नायक की भूमिका बिजोया दत्त ने निभाई, जिनके यथार्थवादी और ठोस प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अन्य पात्रों द्वारा संवादों की भावपूर्ण और भावुक प्रस्तुति वास्तव में प्रभावशाली थी। इसके बाद मास्टर उद्भव दास, कोलकाता के सबसे कम उम्र के छात्र अनुभव ने एक कविता सुनाई जिसका दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया। इसके बाद बैद्यनाथ चक्रवर्ती, रानेन चक्रवर्ती, रतन चक्रवर्ती और दिलीप भट्टाचार्य (श्रवण-बाधित और वरिष्ठ सदस्य कलाकार, कोलकाता) द्वारा अभिव्यंजक और आकर्षक माइम अधिनियमों की एक श्रृंखला के साथ कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जिसने कार्यक्रम में एक अलग ही रंग जोड़ा।
अगली प्रस्तुति एक मनोरंजक लघु नाटक, ‘कान नीये केलेंगकारी’ की प्रस्तुति दी गई , जिसे कोलकाता अनुभव की सदस्य छात्रा सबिता घोष ने शानदार ढंग से किया। समापन प्रदर्शन में, एक लघु नाटक – ‘अदाय कांचकोलाय’ का शानदार मंचन ‘कोलकाता अनुभव’ के सदस्य छात्रों, शिला चटर्जी और तापस मुखर्जी द्वारा किया गया। यह थिएटर और माइम प्रतिपादक, कृष्णा दत्त द्वारा निर्देशित त्रुटियों की एक कॉमेडी , सबिता घोष, कोलकाता की छात्रा अनुभव और थिएटर, माइम और नृत्य कलाकार बिजोया दत्त ने किया । शाम के संगीतकार सिंथसाइज़र पर दिब्येंदु मालाकार थे। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन राजलक्ष्मी श्रीधर द्वारा किया गया। पूरे प्रोडक्शन की समग्र प्रस्तुति बेहद ही महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर कॉलेज में नव्या नवेली नंदा ने किया युवा स्त्री सशक्तीकरण का आह्वान 

कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के जुबली सभागार में आयोजित कार्यक्रम’यू ग्रो गर्ल अ युवा रोड शो’ विषय पर फिल्म इंडस्ट्री के प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन की दोहित्री नव्या नवेली नंदा नवेली ने युवा वर्ग की लड़कियों और लड़कों के साथ अपनी कंपनी के उद्देश्यों और सुरक्षा पर अपनी बातें साझा की।’युवा’ से जुड़े निखिल तनेजा और यश पिसा नव्या नंदा के साथ युवा पीढ़ी के सभी विद्यार्थियों के साथ इसमें शामिल हुए और बहुत सी रोज घटने वाली समस्याओं पर बातचीत की।
इस अवसर पर ‘मै हूँ युवा’ लघु वृत्त चित्र भी दिखाया गया जो विशेष रूप से लड़कियों को परेशान करना, उनको बस में, ट्रेन में गलत तरीके से तंग करना आदि पर था साथ ही किस प्रकार देखने और सुनने वाले लोग उन्हें बचा सकते हैं इस पर भी फिल्म द्वारा दिखाया गया। यश पिसा ने बताया कि यह 25वां रोडशो है जिसे भवानीपुर कॉलेज में किया गया है। इसके पूर्व अभी तक 150 कॉलेज में युवा स्त्री सशक्तीकरण के लिए नवेली की पहुंच रही।
नव्या नवेली ने बताया कि कंपनी बनाने का काम कोरोना काल में हुआ तब वह भी 21 वर्ष की युवती थी। इसके द्वारा हम युवाओं की वास्तविक स्टोरीज को लेते हैं उनकी समस्याओं और समाधान का प्रयास करते हैं। नव्या ने अपने अनुभवों को सुनाया और छात्र- छात्राओं के प्रश्नों के उत्तर भी दिए। निखिल तनेजा ने पॉडकास्ट की भी चर्चा की जिस पर युवा वर्ग की विभिन्न कहानियां प्रसारित हो रही हैं।
असफलता जीवन में कई प्रकार से आ सकती है लेकिन हम उससे कैसे उबरें इसे सकारात्मक ढंग से सोचना चाहिए। मेंटल हैल्थ, शिक्षा आदि क्षेत्रों में यह कंपनी युवाओं के साथ जुड़ी हुई है। इस अवसर पर लॉरियर पेरिस की ओर से ओपन माइक में छात्र छात्राओं ने अपनी अपनी स्टोरी को साझा किया जिसका चुनाव कर इंस्टाग्राम पर दिया जाएगा। यह कार्यक्रम डीन अॉफिस द्वारा संपन्न हुआ। संयोजन प्रातःकालीन सत्र कॉमर्स की कोआर्डिनेटर प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिव्या उदेशी और प्रो समीक्षा खंडूरी ने किया । डीन प्रो दिलीप शाह ने इस कार्यक्रम को संभव बनाया। डॉ वसुंधरा मिश्र ने इस कार्यक्रम की जानकारी दी ।

बात्स की ‘द प्लेजर ट्रंक’ के पहले संस्करण का आयोजन

कोलकाता । बात्स की ओर से कोलकाता में प्रमुख शॉपिंग फेस्टिवल ‘द प्लेजर ट्रंक’ के पहले संस्करण का आयोजन कोलकाता के सॉल्टलेक में स्थित गोल्डन ट्यूलिप होटल में किया गया है। 4 एवं 5 अगस्त को दो दिनों तक यह प्रदर्शनी चली । इस दो दिवसीय प्रतिभागी उत्सव के आगामी सीज़न के लिए एक ही छत के नीचे कम बजट से लेकर उच्च बजट तक के डिजाइनर उत्पादों का प्रदर्शन किया गया । इस कार्यक्रम का प्रबंधन मैप5 इवेंट्स की ओर से किया गया था। बात्स – ‘द प्लेज़र ट्रंक’ प्रदर्शनी का उद्घाटन अभिनेत्री जया सील घोष और सीएस सलाहकार और एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम डब्ल्यूबी चैप्टर की अध्यक्ष डॉक्टर ममता बिनानी ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर नरेन सराफ के साथ ए वी स्टूडियो के मालिक गौरव और नितेश, काव्या कश्यप (अभिनेत्री), एकता बागरिया, (फिटनेस कोच), आशीष मित्तल (गोल्डन ट्यूलिप होटल के निदेशक) और कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इस मौके पर मौजूद थे। बात्स की संस्थापक और क्यूरेटर शालिनी मित्तल ने कहा, एक ही छत के नीचे विभिन्न उत्पादों की ऐसी श्रृंखला और वैराइटी की खोज करना एक चुनौतीपूर्ण एवं रोमांचित अवसर है।
इस मौके पर बात्स की क्यूरेटर बबीता एन अग्रवाल, अंजू बेरिया और तृप्ति अग्रवाल ने कहा, इस प्रतिष्ठित प्रदर्शनी का उद्देश्य कुशल और महत्वाकांक्षी प्रेफेशनल के साथ व्यापार संवर्धित मंच को बढ़ावा देना है। ए वी स्टूडियो, द पिंक कॉलर, शिवांशी अपैरल्स, दीथ्या जैन, फ्लाइंग बर्ड बाय सोनू, एनकेएस बुटीक, लविष्का, केतन अनावी, जयपोर वीवर्स, बेड बाथ और मोर, कालाकारी, ड्रामा क्वीन, एसआर 2 कोलकाता, रुचि खेरिया, रेनी ग्लोरिया, मैजिक इन जार, थ्रेडवर्क्स, रेनबो क्रिएशन्स, बोज़ एंड ब्लिंग्स, एस एस क्रिएशन्स, स्पंदन क्रिएशन्स, ए स्टिच इन टाइम, तिरुमाला आर्ट्स, लव, गिफ्ट एंड मोर, हर्षिता क्रिएट्स, कान्हा क्रिएशन्स, कैंडी क्राफ्ट्स, पेंडोरा गर्ल्स, रेनू का कलेक्शन, डिवाइन थ्रेड्स, मिराया क्रिएशन्स, विनर, निकिता द्वारा जुवेलेन, ज्वेल गैलेरिया, सबिता द्वारा सावी और नुबू ज्वेल्स प्रमुख है।