Monday, July 6, 2026
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एस बी पार्क सार्वजनिन दुर्गोत्सव की पूजा थीम “एलाम नोतुन देशे” जारी

कोलकाता । प्रत्येक वर्ष अपने आयोजन में एक नया सोच और अनोखी उत्सव शैली के लिए शहर के सबसे आकर्षक पूजाओं में से एक एस बी पार्क सार्वजनिन की ओर से शनिवार को कोलकाता प्रेस क्लब में इस बार ‘एलाम नोतुन देशे’ (हम एक नए देश में आये हैं) थीम को लॉन्च किया गया। शहर के ठाकुरपुकुर इलाके में स्थित स्टेट बैंक पार्क (एस बी पार्क) सार्वजनिन दुर्गोत्सव कमेटी ने दुर्गापूजा में इससे जुड़े गहन विचारों की छाप छोड़ी है। इस वर्ष एस बी पार्क सर्बोजनिन दुर्गोत्सव की ओर से 53वां वर्ष में पूजा का आयोजन किया जा रहा है।
इस संवाददाता सम्मेलन में संपूर्णा लाहिड़ी (अभिनेत्री और एसबी पार्क सर्बोजनिन दुर्गोत्सव 2023 की ब्रांड एंबेसडर), जॉय सरकार (संगीत निर्देशक) जिन्होंने इस वर्ष का थीम संगीत बनाया है। इसके अलावा रामानंद बंद्योपाध्याय (कलाकार) जिन्होंने इस वर्ष की मूर्ति डिजाइन की है, अरिघना साहा (सहायक कलाकार), शिवशंकर दास (मुख्य डिजाइनर और केंद्रीय विषय के कलाकार), बरुण कर (लाइट डिजाइनर, विजिटिंग फैकल्टी, एनएसडी, नई दिल्ली और थिएटर निर्देशक) के साथ मृणाल कांति मंडल (नेशनल सेल्स मैनेजर, सिका इंडिया प्राइवेट लिमिटेड) के साथ समाज की कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इस मौके पर मौजूद थे।
मीडिया से बात करते हुए क्लब के अध्यक्ष संजय मजूमदार ने कहा, “एस बी पार्क सर्बोजनिन” को अपने इस वर्ष के थीम – ‘एलाम नोतुन देशे’ (हम एक नए देश में आये हैं) के साथ 53 वें वर्ष के आयोजन करने पर बहुत गर्व है। इस कठिन घड़ी में, जब चारों ओर दुनिया में राजनीति, धर्म, पूंजीवाद और बड़े पैमाने पर उभरते जलवायु संकट के कारण हर पल जीवन संकीर्ण होती जा रही है, इनके बीच एस बी पार्क ने अपने पूजा मंडप में थीम के जरिए कलात्मक कल्पना के माध्यम से इसका समाधान दिखाने की कोशिश की है। इस आयोजन में देश के हर राज्य के लोग आते हैं। इसे देखते हुए यहां के हर बैनर को देश के हर राज्य में वहां के क्षेत्रीय भाषा में प्रदर्शित किया जाएगा। हमें विश्वास है कि लोग इस साल भी हमारा प्रयास यहां आनेवाले दर्शकों को पसंद आयेगा। उन्होंने इस राज्य के अलावा देश के हर कोने में रहनेवाले सभी लोगों को परिवार और दोस्तों के साथ यहां होनेवाली पूजा में आने के लिए आमंत्रित किया।

प्रेमचंद की रचनाओं में हृदय परिवर्तन ज्यादा है”– मुक्तेश्वरनाथ तिवारी

आसनसोल । काज़ी नज़रुल विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वाधान में 4 अगस्त को ‘वर्तमान समय और प्रेमचंद’ को केंद्र में रखकर प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया था। इस सभा में मुख्य अथिति के तौर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवाशीष बंदोपाध्याय,कला संकाध्यक्ष प्रो. सजल कुमार भट्टचार्य, अध्यक्ष प्रो. मुक्तेश्वरनाथ तिवारी एवं बीज वक्ता के रूप में प्रो. विजय कुमार भारती ने अपने महत्वपूर्ण भाषण से प्रेमचंद के रचनाशीलता और उनके जीवन शैली को सभा में उपस्थित शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के समक्ष उजागर किया। कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो. देवाशीष बंदोपाध्याय के भाषण से हुई,कुलपति महोदय ने कहा-“प्रेमचंद हमारे मानव हृदय के सबसे बड़े चितेरे है। प्रेमचंद,रवींद्रनाथ,काज़ी नजरुल इस्लाम जैसे मनीषी साहित्यकारों ने मनुष्य की मनुष्यता को बचाने की बात की है।प्रेमचंद सूरज की तरह है और उनका साहित्य उसके प्रकाश की तरह है।”
विशिष्ट वक्ता प्रो. सजल कुमार भट्टचार्य ने इतिहास का अर्थ प्रस्तुत करते हुए प्रेमचंद के साहित्य पर कहा-“रवींद्रनाथ के साथ उनका संबंध जोड़ते हैं और साहित्य में प्रेमचंद की प्रासंगिकता पर बात करते है; साथ ही वर्तमान संदर्भ में प्रेमचंद की जरूरत को रेखांकित करते हैं। बीज वक्तव्य के रूप में प्रो.विजय कुमार भारती ने प्रेमचंद के भाषा सम्बन्धी पहलुओं पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा-“प्रेमचंद जनता की आम-फ़हम भाषा की वकालत करते है।त्रैमासिक, त्रिमासिक की जगह तिमाही क्यों न कहा जाय ?जो भाषा आम व्यक्ति को आसानी से समझ में आ जाये,उसे ही साहित्य की भाषा होनी चाहिए।अध्यक्ष मुक्तेश्वरनाथ तिवारी ने कहा-“प्रेमचंद लोक अर्थात सामान्य व्यक्ति को साहित्य के केंद्र में रखते हैं।वे इतने सहज सरल सामान्य थे कि एकबार लखनऊ स्टेशन पर उन्हें लेने जाने व्यक्ति तक उन्हें पहचान नहीं पाए क्योंकि उनकी वेशभूषा सामान्य व्यक्ति की थी। तिवारी जी ने आगे बढ़कर महादेवी वर्मा और प्रेमचंद का वह ऐतिहासिक संस्मरण भी सुनाया जिसमें फर्श गंदे हो जाने की वजह से महादेवी वर्मा की परिचारिका भक्तिन उन्हें घर में घुसने तक नहीं देती।उसे लगता है कोई जरूरत मन्द किसान महीयसी महादेवी वर्मा जी से मिलने आ गया है। इतना ही नहीं प्रेमचंद सबकी तरफ से लिखे।उस समय के भारत के हर एक नागरिक की कहानी प्रेमचंद ने लिख दी है। कभी इतिहास मिट जाए तो प्रेमचंद के साहित्य से उसे फिर से प्राप्त किया जा सकता है।”धन्यवाद ज्ञापन विभाग की प्राध्यापिका डॉ.काजु कुमारी साव ने एव संचालन विभाग के संयोजक डॉ. बिजय कुमार साव ने किया। शोध छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार रखे।डॉ.एकता कुमारी एव डॉ. प्रतिमा प्रसाद ने भी प्रेमचंद को याद किया।

भारतीयता के लेखक हैं प्रेमचंद:प्रो.श्रीकांत द्विवेदी

मिदनापुर । राजा नरेंद्र लाल खान महिला महाविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से प्रेमचंद जयंती के अवसर पर ‘प्रेमचंद के साहित्य की प्रासंगिकता’ विषय पर संगोष्ठी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्वागत वक्तव्य देते हुए कॉलेज की प्राचार्या डॉ. जयश्री लाहा ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य हमें जन जीवन के करीब ले जाता है। मुख्य वक्ता के तौर पर विद्यासागर विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय जीवन की कथा है।प्रेमचंद ने जिन मानवीय और सामाजिक मूल्यों से सुंदर और लोकतांत्रिक समाज का सपना देखा था उसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
इस अवसर पर पंचम सत्र की छात्राओं ने प्रेमचंद की सद्गति कहानी का मंचन किया। रक्षा कुमारी, बिट्टो कौर, सिमरन पाल, अंजली शर्मा, कुमकुम कुमारी, निशा कुमारी, प्रिया मिश्रा ने अपने शानदार अभिनय से मंचन को प्रभावी बनाया।प्रोफेसर सुमिता भकत ने प्रेमचंद के साहित्य को वंचितों की पक्षधरता का साहित्य कहा। विभागाध्यक्ष डॉ. रेणु गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि प्रेमचंद हमारी पहचान हैं। ऐसे सांस्कृतिक और साहित्यिक आयोजनों से हम प्रेमचंद के लेखन और विचारों को व्यापकत्व प्रदान कर सकते हैं।

भवानीपुर कॉलेज ने मनाया दो दिवसीय कारगिल विजय दिवस – 2023

कोलकाता । जब वीरता और प्रतिबद्धता वाले लोग हमारे देश की सीमाओं को सुरक्षित करते हैं,हम शांति से सोते हैं। 1999 की गर्मियों में, कारगिल की सबसे ठंडी चोटियों पर, देश के वीर सपूतों ने पाकिस्तानी सैनिकों के खिलाफ कड़ी लड़ाई लड़ते हुए अपने देश की अखंडता की रक्षा के लिए लगातार लड़ाई लड़ी। इस यात्रा में कई शहीद हुए, कई घायल हुए लेकिन किसी ने हार नहीं मानी।इन बहादुरों को सम्मानित करने के लिए, भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज में एनसीसी कलेक्टिव ने दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया। 26 जुलाई 2023 को, कैडेटों ने देशभक्ति गीत और एक स्व-रचित कविता के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद हमारे वरिष्ठ कैडेटों और डीन सर प्रो दिलीप शाह के नेतृत्व में पुष्पांजलि समारोह आयोजित किया गया। इसके बाद अंतर-विंग वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। ईगल स्क्वाड्रन का प्रतिनिधित्व एयर विंग कैडेटों द्वारा किया गया और चीता स्क्वाड्रन का प्रतिनिधित्व आर्मी विंग कैडेटों द्वारा किया गया, जिसका मूल्यांकन छात्र मामलों के डीन प्रो. दिलीप शाह और एनसीसी अधिकारी सुश्री अरित्रिका दूबे ने किया, सर्वश्रेष्ठ वक्ता, प्रथम और द्वितीय उपविजेता को चुना गया । बहस के बाद एक खुली प्रश्नोत्तरी हुई जिसमें एनसीसी कैडेटों ने दर्शकों के सामने प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर दिए गए। प्रश्नों की संख्या के अनुसार प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों को पुरस्कृत किए जाने के साथ दिन के कार्यक्रम संपन्न हुए।
28 जुलाई 2023 को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद कारगिल युद्ध के दिग्गजों के साथ इंटरैक्टिव सत्र निर्धारित किया गया था।इस अवसर पर सम्माननीय अतिथि, कारगिल युद्ध के दिग्गज कैप्टन अखिलेश सक्सेना और कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कैप्टन अखिलेश की पत्नी लेखिका, इंस्पायरिंग मंत्रा की संस्थापक और सीईओ शिखा अखिलेश सक्सेना शामिल हुईं। कमांडिंग ऑफिसर नंबर 1 बंगाल एयर स्क्वाड्रन एनसीसी, विंग कमांडर एस. सेल्वा कुमार और बीईएससी एनसीसी से जुड़ी सेना और नौसेना इकाइयों के कर्मचारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत प्रोफेसर दिलीप शाह के उद्घाटन भाषण से हुई, जिन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान सैनिकों के साहस के बारे में बात की, जिसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया। मुख्य अतिथियों को कारगिल में उनकी जीवन-घातक लड़ाई के दौरान कैप्टन अखिलेश सक्सेना के संघर्ष पर एक परिचयात्मक वीडियो के साथ पेश किया गया, जिसके बाद मुख्य अतिथियों ने स्वयं अपनी कहानियाँ साझा कीं। जैसा कि कैप्टन अखिलेश सक्सेना ने बताया कि कैसे युद्ध में उन पर हमला किया गया था, उन्होंने प्रबंधन क्षेत्र में आगे बढ़ने की अपनी योजना के बाद अपनी तत्काल प्रतिक्रिया पर भी चर्चा की। हमने श्रीमती शिखा की भावनात्मक दुर्दशा भी देखी। शिखा अखिलेश सक्सेना ने घर पर अपनी लड़ाई खुद लड़ने और अपने पति के लौटने का इंतजार करने की बात कही। इस भावनात्मक सत्र के बाद डीन सर प्रो दिलीप शाह ने शिखा सक्सेना द्वारा लिखी पुस्तक ‘नेशन फर्स्ट का अनावरण किया गया, इस पुस्तक में कारगिल युद्ध’99 का विस्तृत विवरण है और एक सैनिक और उसके परिवार को दूर रहते हुए युद्ध करते समय जो गर्व और दर्द का अनुभव होता है, उसका वर्णन है। युद्ध क्षेत्र, इस बात से अनभिज्ञ कि भविष्य उसका क्या इंतजार कर रहा है।
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत एसजीटी गैब्रिएला आर्य गुप्ता के नेतृत्व में एक उद्घाटन नृत्य के साथ हुई, जिसमें एक सैनिक की कहानी को जीवंत किया गया, यह प्रदर्शन उन लोगों को समर्पित था जो कभी घर वापस नहीं आए। कैडट प्रिंस मिश्रा और सीपीएल पी द्वारा एक देशभक्ति युगलपवित्रा ने शुरुआती प्रदर्शन के बाद दिन का माहौल तैयार किया। युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर किए गए भारतीय सशस्त्र बलों – ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन सफीद सागर, ऑपरेशन तलवार के हमलों का विवरण देने वाली एक बहुत ही जानकारीपूर्ण वृत्तचित्र आगे प्रस्तुत किया गया था। इसके बाद सीडीटी अलीश तमांग, सीपीएल पी. पवित्रा और एसजीटी संघमित्रा बनर्जी द्वारा समूह गीत के साथ एक और मधुर प्रस्तुति दी गई, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सीडीटी सृजन पायने ने माउथ ऑर्गन बजाया, जिन्होंने अपने प्रदर्शन की विशिष्टता के लिए प्रशंसा प्राप्त की। नर्तकों ने भारत की अदम्य भावना को प्रदर्शित करते हुए एक ऊर्जावान प्रदर्शन के साथ फिर से मंच को प्रोत्साहन से भर दिया। अंत में, सीडीटी प्रिंस मिश्रा ने “दर्द और गौरव” पर एक स्व-रचित कविता के माध्यम से अपने दिल की बात कही। डीन सर प्रो शाह संबोधित किया और उन्हें पृथ्वी को बचाने के लिए पेड़ लगाने का मिशन दिया, एक पहल जिसने वास्तव में संस्थान के आदर्शों को चित्रित किया।
यह आयोजन 26 जुलाई 2023 के सम्मान समारोह के साथ समाप्त हुआ। सीडीटी/एसजीटी अदिति ए संजय को बहस के लिए सर्वश्रेष्ठ वक्ता का पुरस्कार दिया गया, उनके बाद सीडीटी ट्विंकल जैन और सीडीटी संयम अग्रवाल क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता रहे। एलसीपीएल आदित्य सिंह को क्विज़ प्रतियोगिता के लिए विजेता के रूप में सम्मानित किया गया, उनके बाद क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता के रूप में सीडीटी आरव तुलस्यान और सीडीटी स्नेहा पांडे रहे। सभी विजेताओं को पदक और प्रमाण पत्र के साथ लेखिका श्रीमती शिखा अखिलेश सक्सेना द्वारा सौंपी गई नेशन फर्स्ट की हस्ताक्षरित प्रतियाँ देकर सम्मानित किया गया। प्रत्येक सहभागी ने जोश से भरकर राष्ट्र के तिरंगे को सदैव ऊंचा रखने का संकल्प लिया। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

श्रावण मास सेवा में दूध बिस्कुट वितरण

कोलकाता । कोलकाता में भारत रिलीफ़ सोसायटी द्वारा आयोजित 500 बच्चों को दूध बिस्कुट वितरण किया गया। वाहिद मेमोरियल स्कूल के सभी बच्चे दूध बिस्कुट पाकर खुश दिखाई दे रहे थे। इस अवसर पर ताजा टीवी के निदेशक विश्वम्भर नेवर,पार्षद निवेदिता शर्मा, सुशील शर्मा, आईपीएस अधिकारी संजीव राठी, चंदा गोलछा ,कंचन नाहटा, रुमा दास , समाजसेवी अंजू सेठिया आदि । यह जानकारी अंजू सेठिया द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति से मिली ।

अब बिना नर के बच्चों को जन्म देगी ये खास मक्खी

वैज्ञानिकों ने की सफल जेनेटिक इंजीनियरिंग

लंदन । ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने एक खास तरह की मक्खी में सफल जेनेटिक इंजीनियरिंग करने का दावा किया है। इसे वर्जिन बर्थ का नाम दिया गया है। इस इंजीनियरिंग के बाद अब ये मादा मक्खिया बिना नर की आवश्यकता के संतान पैदा कर सकती हैं। इन मक्खियों की पहचान फ्रूज फ्लाइज (फल मक्खी) ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर के तौर पर की गई है। यह किसी भी जानवर में बिना नर के बच्चों को जन्म देने का पहला उदाहरण भी है। इस वैज्ञानिक प्रयोग को बहुत बड़ी सफलता बताया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल भविष्य में इंसानों के ऊपर रिसर्च के लिए किया जा सकता है।
साइंस जर्नल करंट बायोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि इन आनुवंशिक रूप से संशोधित मक्खियों से उत्पन्न संतान भी संभोग के बिना प्रजनन करने में सक्षम हैं। यह पीढ़ियों में विशेषज्ञता की विरासत को प्रदर्शित करती है। वर्जिन बर्थ को वैज्ञानिक भाषा में पार्थेनोजेनेसिस के रूप में जाना जाता है। एक ऐसी घटना है जो शायद ही कभी होती है लेकिन पशुओं की दुनिया में पूरी तरह से अनसुनी नहीं है। कुछ अंडे देने वाले जानवर, जैसे छिपकली और पक्षी बिना संभोग के बच्चे को जन्म देने की क्षमता रखते हैं, आमतौर पर बाद में जब कोई नर उपलब्ध नहीं होता है।
पहली बार वैज्ञानिकों को मिली ऐसी कामयाबी
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने कहा कि “पहली बार, वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीव में वर्जिन बर्थ को पाने में कामयाबी हासिल की है, जो आमतौर पर यौन प्रजनन करता है। इसका नाम फल मक्खी ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर है। आमतौर पर, यौन प्रजनन में नर के शुक्राणु द्वारा महिला के अंडे का निषेचन शामिल होता है। हालांकि, पार्थेनोजेनेसिस के मामलों में, मादा पूरी तरह से अपने दम पर अंडे को भ्रूण में विकसित करने में सक्षम होती है। नए अध्ययन की मुख्य लेखक और यूके के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक शोधकर्ता एलेक्सिस स्पर्लिंग ने बताया कि वर्जिन बर्थ के प्रति उनका आकर्षण तब हुआ जब उन्होंने अपने पालतू जानवर को लेकर ऐसा अनुभव किया।
लैंगिक रूप से प्रजनन करती है यह मक्खी
इस असाधारण घटना के पीछे आनुवंशिक कारण की पहचान करने की खोज में एलेक्सिस स्पर्लिंग और अमेरिका में स्थित शोधकर्ताओं की एक टीम ने फल मक्खी ड्रोसोफिला मेलानोगास्टर के साथ प्रयोग किया। फल मक्खी एक लैंगिक रूप से प्रजनन करने वाली प्रजाति है और लंबे समय से आनुवंशिक रिसर्च में प्रमुखता से इस्तेमाल होती रही है। इस प्रयोग से इस टीम को एक सदी से भी अधिक समय से कठिन माने जाने वाली पहेली को सुलझा लिया है। पिछले महीने, वैज्ञानिकों ने कोस्टा रिकन चिड़ियाघर से एक मादा मगरमच्छ ने अंडा दिया था, जो कभी नर के संपर्क में नहीं आई थी।

41 साल बगैर तबादला सेवा दी, शिक्षक सेवानिवृत्त हुआ तो रो पड़ा पूरा गांव

छिंदवाड़ा । मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक शिक्षक की सेवानिवृत्ति से पूरा गांव भावुक हो गया । 41 साल 1 महीने तक सेवा देने के बाद जब शिक्षक का विदाई समारोह हुआ तो विदाई देने के लिए पूरा गांव पहुंच गया। हर किसी के आंखों में आंसू आ गए। ऐसी विदाई देखकर शिक्षक भी भावुक हो गए। ये शिक्षक गांव के स्कूल की पहचान बन चुके थे। इस स्कूल को लोग शिक्षक के पढ़ाने की शैली के कारण जानते थे। दरअसल, छिंदवाड़ा विकासखंड के नेर गांव के प्राथमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षक श्रीकांत असराठी एक ही स्कूल में 41 साल तक रहे। कभी उनका तबादला नहीं हुआ। शिक्षक रहते हुए उन्होंने 41 साल 1 महीने का कार्यकाल पूरा किया। सोमवार को जब उनका रिटायरमेंट हुआ तो उन्हें विदाई देने के लिए पूरा गांव मौजूद था। लोगों का कहना था कि ये अपने आप में एक रिकॉर्ड है कि किसी टीचर ने जिस स्कूल से अपनी ड्यूटी ज्वाइन की हो उसी स्कूल से रिटायर हो रहा हो बिना किसी ट्रांसफर के।
2 जुलाई 1982 को हुई थी ज्वाइनिंग
श्रीकांत ने आज से 41 साल पहले 2 जुलाई 1982 को नेर गांव के प्राथमिक स्कूल में शिक्षक की नौकरी ज्वाइन की थी। उस समय बच्चे स्कूल नहीं आते थे तब वो घर-घर जाकर बच्चों को पढ़ाते थे। धीरे-धीरे उनका व्यवहार देखकर परिजनों ने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया। स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ती गई। अपने पढ़ाने के अलग तरीके और सरल व्यवहार के कारण वह सभी बच्चों के लिए पसंदीदा शिक्षक बन गए।
समय के थे पाबंद
उनको विदाई देने के लिए पहुंचे उनके पूर्व छात्र जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष अश्वनी रघुवंशी ने बताया कि हमारे सर, श्रीकांत असराठी समय के बहुत पाबंद रहे हैं। चाहे बारिश के समय हो या सर्दी का सुबह 7 बजे सबसे पहले वही स्कूल पहुंचते थे। कोई बच्चा स्कूल नहीं आता तो उसे घर जाकर स्कूल लेकर आते थे। उनकी इस कर्तव्य निष्ठा का परिणाम था कि उनके पढ़ाए हुए कई बच्चे आज राजनीति, सामाजिक विभिन्न क्षेत्रों में अपना नाम रोशन कर रहे हैं।
विदाई देने पहुंचे 25 स्कूलों के शिक्षक
श्रीकांत असराठी की विदाई की जानकारी लगते ही सिर्फ गांव के लोग ही नहीं बल्कि जन शिक्षा केंद्र के अंतर्गत आने वाले 25 स्कूलों के शिक्षक भी पहुंचे। गांव के लोगों ने शिक्षक का सम्मान किया। वहीं, विभाग ने भी रिटायरमेंट पर शिक्षक का सम्मान किया।

 

प्रेमी युगल में से कोई भी नाबालिग तो लिव इन रिलेशनशिप मान्य नहीं

 हाईकोर्ट ने कहा- संरक्षण भी नहीं मिलेगा
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल बालिग युगल ही लिव इन रिलेशनशिप में रह सकते हैं। यह अपराध नहीं माना जाएगा। युगल में से कोई भी नाबालिग हो तो लिव इन रिलेशनशिप मान्य नहीं है और ऐसे मामले में संरक्षण नहीं दिया जा सकता। ऐसे मामले में यदि संरक्षण दिया गया तो यह कानून और समाज के खिलाफ होगा।
कोर्ट ने कहा कि चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट के तहत नाबालिग का लिव इन में रहना अपराध है । चाहे पुरुष हो या स्त्री। बालिग महिला का नाबालिग पुरुष द्वारा अपहरण का आरोप अपराध है या नहीं, यह विवेचना से ही तय होगा। केवल लिव इन में रहने के कारण राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप के लिए फिट केस नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला एवं न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की खंडपीठ ने सलोनी यादव व अली अब्बास की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि वह 19 साल की बालिग है और अपनी मर्जी से घर छोड़कर आई है तथा अली अब्बास के साथ लिव इन में रह रही है। इसलिए अपहरण का केस रद्द किया जाए और याचियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने एक याची के नाबालिग होने के कारण राहत देने से इनकार कर दिया और कहा कि अनुमति दी गई तो अवैध क्रियाकलापों को बढ़ावा मिलेगा। 18 वर्ष से कम आयु का याची चाइल्ड होगा, जिसे कानूनी संरक्षण प्राप्त है। कानून के खिलाफ संबंध बनाना पाक्सो एक्ट काअपराध होगा, जो समाज के हित में नहीं है।
सरकारी वकील का कहना था कि दोनों पुलिस विवेचना में सहयोग नहीं कर रहे हैं। सीआरपीसी की धारा 161 या 164 का बयान दर्ज नहीं कराया। पहली बार महिला ने हाईकोर्ट में पूरक हलफनामा दाखिल करने आई है। दोनों ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका भी की है। याची के भाई पर दूसरे नाबालिग याची को बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए पेशी की मांग की गई है। हलफनामा दाखिल कर कहा जा रहा कि दोनों लिव इन में हैं इसलिए संरक्षण दिया जाए। एक याची के खिलाफ कौशाम्बी के पिपरी थाने में अपहरण के आरोप में एफआईआर दर्ज है। एफआईआर में प्रयागराज से अपहरण कर जलालपुर घोसी ले जाने का आरोप है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि मुस्लिम कानून में लिव इन की मान्यता नहीं है। इसे जिना माना गया है। बिना धर्म बदले संबंध बनाने को अवैध माना गया है।
कोर्ट ने कहा कि कानून की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता तलाकशुदा को ही मांगने का हक है। लिव इन रिलेशनशिप शादी नहीं है इसलिए पीड़िता धारा 125 का लाभ नहीं पा सकती। बालिग महिला का नाबालिग से लिव इन में रहना अनैतिक व अवैध है। यह अपराध है। ऐसे लिव इन को कोई संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

10वीं पास, कम उम्र में शादी, फिर खड़ी की 36,000 करोड़ की कंपनी

250 रुपये में खरीद 800 में बेचा सामान
आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके आगे कई परेशानियां आई । न ठीक से पढ़ाई लिखाई हो पाई और न कुछ करने का समय मिल पाया, कम उम्र में ही शादी के बंधन में बध गए । एक समय तो ऐसा आया जब इन्हें रेलवे स्टेशन पर रात गुजारनी पड़ी । कहते हैं ना हार न मानने वाले की हमेशा जीत होती है. हम बात कर रहे हैं भारतीय उद्योगपति सत्यनारायण नुवाल की ।
सत्यनारायण नुवाल का नाम बहुत कम लोगों ने ही सुना होगा लेकिन इनकी सादगी के किस्से जान हर कोई हैरान हो जाता है । सत्यनारायण नुवाल एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से अपना बिज़नेस एम्पायर खड़ा किया है. वे आमतौर पर हिंदी में बोलना पसंद करते हैं । उन्होंने घर की जिम्मेदारियों के चलते 10वीं कक्षा के बाद स्कूल छोड़ दिया था पर आज नुवाल 36 हजार करोड़ की कंपनी के मालिक हैं ।
1000 रुपये से बने 36,000 करोड़ की कंपनी के मालिक
राजस्थान के भीलवाड़ा में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे सत्यनारायण नुवाल ने सिर्फ दसवीं तक पढ़ाई की है । 10वीं से आगे वो पढ़ाई नहीं कर पाए । पिता पटवारी थे और 1971 में उनके रिटायर होने के बाद परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करने लगे । उनके दादाजी छोटी सी परचून की दुकान चलाते थे । नुवाल के दादाजी छोटी सी परचून की दुकान चलाते थे । स्कूल के बाद वो दादाजी की मदद किया करते थे. लेकिन इससे घर चलाना संभव नहीं था । वहीं मात्र 19 साल की उम्र में ही उनकी शादी हो गई जिसके कारण उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गयी ।
पहले व्यवसाय में नहीं मिली सफलता
घर की स्थिति देखते सत्यनारायण नुवाल ने फाउंटेन पेन की स्याही बेचने का काम शुरू किया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली. साल 1977 में वो महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के बल्हारशाह आ गए । यहां उनकी मुलाकात अब्दुल सत्तार अल्लाहभाई से हुई जो कुएं खोदने, सड़कें बनाने और खदानों की खुदाई में काम आने वाले विस्फोटकों के व्यापारी थे. यहीं से उनके जीवन में नया मोड़ आया.
250 रुपये में खरीद 800 में बेचते थे सामान
सत्यनारायण नुवाल 1,000 रुपये महीना देकर अल्लाहभाई के विस्फोटकों के गोदाम के साथ विस्फोटकों को बेचने के उनके लाइसेंस का उपयोग करते हुए धंधा करने लगे । जल्द ही ब्रिटेन की एक फर्म इंपीरियल केमिकल इंडस्ट्रीज के अधिकारियों की उन पर नजर पड़ी और धीरे धीरे उनकी गाड़ी पटरी पर आने लगी । शुरुआत में वो 250 रुपये में 25 किलो विस्फोटक खरीदकर बाजार में 800 रुपये में बेचते थे । 1995 में, उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक से 60 लाख रुपये का कर्ज लेकर विस्फोटक निर्माण की छोटी इकाई शुरू की ।
ऐसे मिली सफलता
सन 1996 में उन्हें 6,000 टन विस्फोटक सालाना बनाने का लाइसेंस मिला । शुरुआत के दिनों में नुवाल कोयला खदानों में विस्फोटक की आपूर्ति करने लगे । वर्ष 2010 में सोलर देश की पहली निजी कंपनी थी जिसे भारत सरकार से भारत के रक्षा बलों के लिए हथियार बनाने के लिए विस्फोटक बनाने का लाइसेंस मिला था । साल 2021-22 में चार लाख टन सालाना की क्षमता के साथ वे दुनिया के चौथे सबसे बड़े विस्फोटक निर्माता और पैकेज्ड विस्फोटकों के सबसे बड़े निर्माता बन गए । कंपनी वर्तमान में मेक इन इंडिया मिशन के हिस्से के रूप में विस्फोटक और प्रोपेलेंट से लेकर ग्रेनेड, ड्रोन और वॉरहेड तक सब कुछ बनाती है । सौर उद्योग के लिए बाजार मूल्य एक दशक में 1,700% बढ़ गया. 2012 में 1,765 करोड़ से नवंबर 2022 तक 35,000 करोड़ से अधिक हो बाजार हो गया. सत्यनारायण नुवाल की कुल संपत्ति 2023 में 190 करोड़ डॉलर है. सोलर इंडस्ट्रीज में 73% हिस्सेदारी नुवाल की है. नुवाल की संपत्ति करीब 3 बिलियन डॉलर आंकी गई है ।

सेना के अधिकारियों को मिली नयी वर्दी, समानता लाने की कोशिश

नयी दिल्ली । सेना ने सीनियर लीड के पदों पर तैनात अधिकारियों में एक समान पहचान और दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए ब्रिगेडियर और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों के लिए सामान्य वर्दी अपनाई है। ब्रिगेडियर और उससे ऊपर के रैंक के अधिकारियों के लिए सामान्य वर्दी का निर्णय अप्रैल में सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे की अध्यक्षता में सेना कमांडरों के सम्मेलन के दौरान व्यापक विचार-विमर्श के बाद लिया गया था, जिसे गत मंगलवार को लागू कर दिया गया। नए नियम लागू होने के साथ वरिष्ठ अधिकारी अब अपने से संबंधित हथियारों और सेवाओं के लिए विशिष्ट साज-सामान नहीं रखेंगे। कंधे के चारों ओर लटकने वाली डोरी को भी हटा दिया गया है। ये अधिकारी अब गहरे हरे रंग की बेरी पहनेगे हैं। वे सभी पीतल के रैंक पहनेंगे। इन अधिकारियों में प्रमुख जनरल, लेफ्टिनेंट जनरल और सेना प्रमुख शामिल हैं।
पहले, वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पहनी जाने वाली वर्दी उनके हथियारों के आधार पर भिन्न होती थी। उदाहरण के लिए, गोरखा राइफल्स के जनरलों ने अपनी ट्रेडमार्क टोपी पहना करते थे। विशिष्ट बख्तरबंद रेजिमेंटों के उनके समकक्ष भूरे रंग के जूते पहनते थे, और विशेष बल के जवान प्रसिद्ध मैरून बेरेट पहना करते थे। सभी वरिष्ठ अधिकारी अब से केवल काले जूते पहनेंगे। बेल्ट अब रेजमेंट या सेवा विशिष्ट नहीं है बल्कि बकल पर भारतीय सेना की कलगी है। सभी वरिष्ठ अधिकारियों के लिए शोल्डर रैंक बैज सुनहरे रंग के होंगे। अब तक, गोरखा राइफल्स, गढ़वाल राइफल्स और राजपूताना राइफल्स जैसी राइफल रेजिमेंट के अधिकारी काले रैंक बैज पहनते थे।
साल 2022 में सेना ने एक नई फाइटर वर्दी पेश की जिसे अगले दो वर्षों में सभी सैनिक इसे अपना लेंगे। सेना ने उस समय कहा था कि नई वर्दी सैनिकों को बेहतर केमोफ्लाज, अधिक आराम और डिजाइन में एकरूपता प्रदान करती है।