Sunday, July 5, 2026
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लाल बहादुर शास्त्री जयंती विशेष : जिनकी एक आवाज़ पर लाखों भारतीयों ने छोड़ दिया था एक वक़्त का खाना

रेहान फ़ज़ल
वाक़या 26 सितंबर, 1965 का है. भारत-पाकिस्तान युद्ध ख़त्म हुए अभी चार दिन ही हुए थे । जब प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हज़ारों लोगों के सामने बोलना शुरू किया तो वो कुछ ज्यादा ही अच्छे मूड में थे । तालियों की गड़गड़ाहट के बीच शास्त्री ने ऐलान किया, “सदर अयूब ने कहा था कि वो दिल्ली तक चहलक़दमी करते हुए पहुंच जाएंगे । वो इतने बड़े आदमी हैं. लहीम शहीम हैं । मैंने सोचा कि उन्हें दिल्ली तक चलने की तकलीफ़ क्यों दी जाए. हम ही लाहौर की तरफ़ बढ़ कर उनका इस्तक़बाल करें ।” ये वही शास्त्री थे जिनके पाँच फ़ीट दो इंच के क़द और आवाज़ का अयूब ने एक साल पहले मज़ाक उड़ाया था ।
अयूब अक्सर लोगों का आकलन उनके आचरण के बजाय उनके बाहरी स्वरूप से किया करते थे । पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त रहे शंकर बाजपेई ने मुझे बताया था, “अयूब ने सोचना शुरू कर दिया था कि भारत कमज़ोर है । वो नेहरू के निधन के बाद दिल्ली जाना चाहते थे लेकिन उन्होंने ये कह कर अपनी दिल्ली यात्रा रद्द कर दी थी कि अब किससे बात करें । शास्त्री ने कहा आप मत आइए, हम आ जाएंगे ।”
“वो गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में भाग लेने काहिरा गए हुए थे । लौटते वक्त वो कुछ घंटों के लिए कराची में रुके । मैं प्रत्यक्षदर्शी था जब शास्त्री को हवाईअड्डे छोड़ने आए अयूब ने अपने साथियों से इशारा करते हुए कहा था कि इनके साथ बात करने में कोई फ़ायदा नहीं है ।”
जब अमरीकी राष्ट्रपति का न्योता ठुकराया
शास्त्री के काहिरा जाने से पहले अमरीकी राजदूत चेस्टर बोल्स ने उनसे मिलकर अमरीकी राष्ट्रपति लिंडन जॉन्सन का अमरीका आने का न्योता उन्हें दिया था लेकिन इससे पहले कि शास्त्री इस बारे में कोई फ़ैसला ले पाते, जॉन्सन ने अपना न्योता वापस ले लिया था । इसका कारण फ़ील्ड मार्शल अयूब का अमरीका पर दबाव था । उनका कहना था ऐसे समय जब वो भारत के साथ नए समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं, अमरीका को तस्वीर में नहीं आना चाहिए । वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर लिखते हैं कि शास्त्री ने इस बेइज़्ज़ती के लिए जॉन्सन को कभी माफ़ नहीं किया । कुछ महीनों बाद जब वो कनाडा जा रहे थे तो जॉन्सन ने उन्हें बीच में वॉशिंगटन में रुकने का न्योता दिया लेकिन शास्त्री ने उसे अस्वीकार कर दिया ।
एक पुकार पर लाखों भारतीयों ने छोड़ा एक वक़्त का खाना
लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री याद करते हैं, “1965 की लड़ाई के दौरान अमरीकी राष्ट्रपति लिंडन जॉन्सन ने शास्त्री को धमकी दी थी कि अगर आपने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लड़ाई बंद नहीं की तो हम आपको पीएल 480 के तहत जो लाल गेहूँ भेजते हैं, उसे बंद कर देंगे ।”
उस समय भारत गेहूँ के उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं था । शास्त्री को ये बात बहुत चुभी क्योंकि वो स्वाभिमानी व्यक्ति थे । उन्होंने देशवासियों से कहा कि हम हफ़्ते में एक वक्त भोजन नहीं करेंगे । उसकी वजह से अमरीका से आने वाले गेहूँ की आपूर्ति हो जाएगी ।अनिल शास्त्री बताते हैं, “लेकिन इस अपील से पहले उन्होंने मेरी माँ ललिता शास्त्री से कहा कि क्या आप ऐसा कर सकती हैं कि आज शाम हमारे यहाँ खाना न बने । मैं कल देशवासियों से एक वक्त का खाना न खाने की अपील करने जा रहा हूँ ।” “मैं देखना चाहता हूँ कि मेरे बच्चे भूखे रह सकते हैं या नहीं । जब उन्होंने देख लिया कि हम लोग एक वक्त बिना खाने के रह सकते हैं तो उन्होंने देशवासियों से भी ऐसा करने के लिए कहा ।”
साल 1963 में कामराज योजना के तहत शास्त्री को नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा देना पड़ा. उस समय वो भारत के गृहमंत्री थे । कुलदीप नैयर याद करते हैं, “उस शाम मैं शास्त्री के घर पर गया. पूरे घर में ड्राइंग रूम को छोड़ कर हर जगह अँधेरा छाया हुआ था । शास्त्री वहाँ अकेले बैठे अख़बार पढ़ रहे थे । मैंने उनसे पूछा कि बाहर बत्ती क्यों नहीं जल रही है?” “अब से मुझे इस घर का बिजली का बिल अपनी जेब से देना पड़ेगा. इसलिए मैं हर जगह बत्ती जलाना बर्दाश्त नहीं कर सकता ।”शास्त्री को सांसद की तनख्वाह के 500 रूपये के मासिक वेतन में अपने परिवार का ख़र्च चलाना मुश्किल पड़ रहा था । नैयर अपनी आत्मकथा में लिखते हैं, “मैंने उन्हें अख़बारों में लिखने के लिए मना लिया था । मैंने उनके लिए एक सिंडिकेट सेवा शुरू की जिसकी वजह से उनके लेख द हिंदू, अमृतबाज़ार पत्रिका, हिंदुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपने लगे. हर अख़बार उन्हें एक लेख के 500 रूपये देता था । “”इस तरह उनकी 2000 रूपये की अतिरिक्त कमाई होने लगी । मुझे याद है कि उन्होंने पहला लेख जवाहरलाल नेहरू और दूसरा लेख लाला लाजपत राय पर लिखा था ।”
जूनियर अफ़सरों को चाय सर्व करने वाले शास्त्री
शास्त्री के साथ काम करने वाले सभी अफ़सरों का कहना है कि उनका व्यवहार बहुत विनम्र रहता था । उनके निजी सचिव रहे सीपी श्रीवास्तव उनकी जीवनी ‘लाल बहादुर शास्त्री अ लाइफ़ ऑफ़ ट्रूथ इन पॉलिटिक्स’ में लिखते हैं, “शास्त्री की आदत थी कि वो अपने हाथ से पॉट से प्याली में हमारे लिए चाय सर्व करते थे । उनका कहना था कि चूँकि ये उनका कमरा है, इसलिए प्याली में चाय डालने का हक़ उनका बनता है ।”
“कभी-कभी वो बातें करते हुए अपनी कुर्सी से उठ खड़े होते थे और कमरे में चहलक़दमी करते हुए हमसे बातें करते थे । कभी-कभी कमरे में अधिक रोशनी की ज़रूरत नहीं होती थी । शास्त्री अक्सर ख़ुद जाकर बत्ती का स्विच ऑफ़ करते थे. उनको ये मंज़ूर नहीं था कि सार्वजनिक धन की किसी भी तरह बर्बादी हो ।”
रूसी प्रधानमंत्री ने शास्त्री को बताया ‘सुपर कम्युनिस्ट’
जब लालबहादुर शास्त्री ताशकंद सम्मेलन में भाग लेने रूस गए तो वो अपना खादी का ऊनी कोट पहन कर गए । रूस के प्रधानमंत्री एलेक्सी कोसिगिन फ़ौरन ताड़ गए कि इस कोट से ताशकंद की सर्दी का मुक़ाबला नहीं हो सकेगा । अगले दिन उन्होंने शास्त्री को ये सोच कर एक ओवरकोट भेंट किया कि वो इसे ताशकंद की सर्दी में पहनेंगे ।
अनिल शास्त्री बताते हैं कि अगले दिन कोसिगिन ने देखा कि शास्त्री फिर वही पुराना खादी का कोट पहने हुए हैं । उन्होंने बहुत झिझकते हुए शास्त्री से पूछा कि क्या आपको वो कोट पसंद नहीं आया? शास्त्री ने जवाब दिया वो कोट वाकई बहुत गर्म है लेकिन मैंने उसे अपने दल के एक सदस्य को कुछ दिनों के लिए पहनने के लिए दे दिया है क्योंकि वो अपने साथ इस मौसम में पहनने के लिए कोट नहीं ला पाया है । कोसिगिन ने भारतीय प्रधानमंत्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति के सम्मान में आयोजित किए गए सांस्कृतिक समारोह में इस घटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि हम लोग तो कम्युनिस्ट हैं लेकिन प्रधानमंत्री शास्त्री ‘सुपर कम्युनिस्ट’ हैं ।
सरकारी कार का किराया भरने का किस्सा
लाल बहादुर शास्त्री के दूसरे बेटे सुनील शास्त्री भी उनसे जुड़ी एक घटना बताते हैं. वो याद करते हैं, “जब शास्त्री प्रधानमंत्री बने तो उनके इस्तेमाल के लिए उन्हें एक सरकारी शेवरोले इंपाला कार दी गई । एक दिन मैंने बाबूजी के निजी सचिव से कहा कि वो ड्राइवर को इंपाला के साथ घर भेज दें । हमने ड्राइवर से कार की चाबी ली और दोस्तों के साथ ड्राइव पर निकल गए ।”
“देर रात जब हम घर लौटे तो हमने कार गेट पर ही छोड़ दी और घर के पिछवाड़े किचन के रास्ते से घर में घुसे. मैं जाकर अपने कमरे में सो गया । अगले दिन सुबह साढ़े छह बजे मेरे कमरे के दरवाज़े पर दस्तक हुई. मैंने सोचा कि कोई नौकर दरवाज़ा खटखटा रहा है. मैंने चिल्लाकर कहा कि अभी मुझे तंग न करे क्योंकि मैं रात देर से सोया हूँ।””दरवाज़े पर फिर दस्तक हुई और मैंने देखा कि बाबूजी सामने खड़े हैं । उन्होंने मुझे मेज़ तक आने के लिए कहा, जहाँ सब लोग चाय पी रहे थे । वहाँ अम्मा ने मुझसे पूछा कि कल रात तुम कहाँ गए थे और इतनी देर में क्यों लौटे? बाबूजी ने पूछा कि तुम गए कैसे थे? जब मैं लौटा तो हमारी फ़िएट कार तो पेड़ के नीचे खड़ी थी ।” “मुझे सच बताना पड़ा कि हम उनकी सरकारी इंपाला कार से घूमने निकले थे । बाबूजी इस कार का तभी इस्तेमाल करते थे जब कोई विदेशी मेहमान दिल्ली आता था । चाय पीने के बाद उन्होंने मुझसे कार के ड्राइवर को बुलाने के लिए कहा । उन्होंने उससे पूछा क्या आप अपनी कार में कोई लॉग बुक रखते हैं? जब उसने हाँ में जवाब दिया तो उन्होंने पूछा कि कल इंपाला कार कुल कितने किलोमीटर चली है?””जब ड्राइवर ने कहा कि 14 किलोमीटर तो उन्होंने कहा कि इसे निजी इस्तेमाल की मद में लिखा जाए और अम्मा को निर्देश दिया कि प्रति किलोमीटर के हिसाब से 14 किलोमीटर के लिए जितना पैसा बनता है, उनके निजी सचिव को दे दें ताकि उसे सरकारी खाते में जमा कराया जा सके । तब से लेकर आज तक मैंने और मेरे भाई ने कभी भी निजी काम के लिए सरकारी कार का उपयोग नहीं किया ।”
बिहार के लोगों को लेने बस स्टॉप पहुँचे
एक बार प्रधानमंत्री शास्त्री ने बिहार के कुछ लोगों को अपने घर पर मिलने का समय दिया । उसी दिन इत्तेफ़ाक से एक विदेशी मेहमान के सम्मान में एक समारोह का आयोजन कर दिया गया जहाँ शास्त्रीजी का पहुंचना बहुत ज़रूरी था । वहाँ से लौटने में उन्हें देर हो गई. तब तक उनसे मिलने आए लोग निराश हो कर लौट चुके थे । अनिल शास्त्री बताते हैं, “जब शास्त्री जी को पता चला कि वो लोग बहुत इंतज़ार करने के बाद अभी-अभी निकले हैं तो उन्होंने अपने सचिव से पूछा कि क्या उन्हें पता है कि वो कहाँ गए होंगे? उन्होंने बताया कि वो प्रधानमंत्री आवास के बाहर बस स्टॉप से कहीं जाने की बात कर रहे थे । “”शास्त्रीजी तुरंत अपने निवास से निकलकर बस स्टॉप पहुंच गए । उनका सचिव कहता ही रह गया कि लोगों को जब पता चलेगा तो वो क्या कहेंगे? शास्त्री जी ने जवाब दिया, और तब क्या कहेंगे जब उन्हें पता चलेगा कि मैं लोगों को आमंत्रित करने के बाद भी उनसे नहीं मिला । “सचिव ने कहा कि मैं उन्हें लेने चला जाता हूँ लेकिन शास्त्रीजी ने कहा नहीं मैं उन्हें लेने ख़ुद जाउंगा और इस ग़लती के लिए माफ़ी माँगूगा । जब वो बस स्टॉप पर पहुंचे तो उन्होंने उन्हें बस का इंतज़ार करते पाया. शास्त्रीजी ने उनसे माफ़ी मांगी और उन्हें अपने साथ घर के अंदर लाए ।”
पाकिस्तानी राष्ट्रपति और सोवियत के प्रधानमंत्री ने दिया कंधा
11 जनवरी, 1966 को जब लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद में निधन हुआ तो उनके डाचा (घर) में सबसे पहले पहुंचने वाले शख़्स थे पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब ख़ाँ । उन्होंने शास्त्री के पार्थिव शरीर को देख कर कहा था, ‘हियर लाइज़ अ पर्सन हू कुड हैव ब्रॉट इंडिया एंड पाकिस्तान टुगेदर (यहाँ एक ऐसा आदमी लेटा हुआ है जो भारत और पाकिस्तान को साथ ला सकता था) । ‘जब शास्त्री के शव को दिल्ली लाने के लिए ताशकंद हवाईअड्डे पर ले जाया जा रहा था तो रास्ते में हर सोवियत, भारतीय और पाकिस्तानी झंडा झुका हुआ था ।
जब शास्त्री के ताबूत को वाहन से उतारकर विमान पर चढ़ाया जा रहा था तो उनको कंधा देनेवालों में सोवियत प्रधानमंत्री कोसिगिन के साथ-साथ कुछ ही दिन पहले शास्त्री का मखौल उड़ाने वाले राष्ट्रपति अयूब ख़ाँ भी थे । शास्त्री के जीवनीकार सीपी श्रीवास्तव लिखते हैं, “मानव इतिहास में ऐसे बहुत कम उदाहरण हैं जब एक दिन पहले एक दूसरे के घोर दुश्मन कहे जानेवाले प्रतिद्वंद्वी न सिर्फ़ एक दूसरे को दोस्त बन गए थे, बल्कि दूसरे की मौत पर अपने दुख का इज़हार करते हुए उसके ताबूत को कंधा दे रहे थे ।”शास्त्री की मौत के समय उनकी ज़िंदगी की क़िताब पूरी तरह से साफ़ थी. न तो वो पैसा छोड़ कर गए थे, न ही कोई घर या ज़मी ।.”
(साभार – बीबीसी हिन्दी)

गांधी जयंती विशेष : जानिए महात्मा गांधी के जीवन पर हिन्दुत्व का प्रभाव

महात्मा गांधी का जन्म 02 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था । उनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था । वे महात्मा गांधी, गांधी जी, बापू और राष्ट्रपिता कहे जाते हैं । हर साल 02 अक्टूबर के दिन को गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है और संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिन को विश्व अहिंसा दिवस घोषित किया है । भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बापू का महत्वपूर्ण योगदान रहा । सत्य और अहिंसा को इन्होंने माध्यम बनाया और ये दोनों बातें हिन्दू धर्म का अंग हैं । आइए जानते हैं, गांधी जी के जीवन पर हिन्दुत्व का प्रभाव
गांधी जी ने लोगों को हमेशा अहिंसा और सत्य के मार्ग के चलने के उपदेश दिए । कहा जाता है कि, धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से ही उन्हें ये उपदेश मिले । स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ने के साथ ही बापू हिंदू धर्म संस्कृति, परंपरा, धार्मिक पौराणिक ग्रंथ और लोकमान्यताओं से भी जुड़े । हिन्दुत्व के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा थी । यही कारण था कि, अंतकाल में उनके मुख से ‘हे राम’ निकला । राजघाट में बापू की समाधि में ‘हे राम’ लिखा हुआ है जो कि हिन्दुत्व के प्रति उनके अनन्य निष्ठा को दर्शाता है.
गांधी जी के जीवन पर धर्म का प्रभाव
गांधी जी अपनी आत्मकथा ‘सत्य के प्रयोग’ के दसवें अध्याय में ‘धर्म की झांकी’ में अपने धर्मपारायण श्रीरामचरितमानस, श्रीमद्भागवत गीता, रामायण सुनने, रामरक्षास्त्रोत का पाठ और मंदिर दर्शन आदि का वर्णन करते हैं । राम नाम की महिमा को लेकर गांधी जी लिखते हैं- ‘आज रामनाम मेरे लिए अमोघ शक्ति है । मैं मानता हूं कि उसके मूल में रम्भा बाई का बोया हुआ बीज है ।
पोरबंदर में रहने तक गांधी जी नित्य रामरक्षास्त्रोत का पाठ करने का उल्लेख करते हैं और साथ ही रामायण के परायण को लेकर कहते हैं कि- ‘जिस चीज का मेरे मन में गहरा प्रभाव पड़ा, वह था रामायण का परायण ।’ विलायत में रहते हुए जब उन्होंने गीता पाठ शुरू किया और इसके बाद उन्हें अनुभूति हुई । इसके संबंध में वे कहते हैं कि- श्रीमद्भागवत गीता के इन श्लोकों का मेरे मन में गहरा प्रभाव पड़ा है, जो मेरे कानों में गूंजती रही. तब मुझे अहसास हआ कि यह अमूल्य ग्रंथ है ।
महात्मा गांधी का मानना था कि, जो गीता को कंठस्थ कर उसके उपदेशों को अपने जीवन में उतार लेगा, तमाम परेशानियां के बावजूद भी उसका जीवन सफल हो जाएगा । गीता के उपदेशों के माध्यम से ही गांधी जी ने अहिंसा, कर्म, सद्भावना, निष्ठा और प्रेम आचरण को जीवन का महत्वपूर्ण अंग बनाया ।

संपूर्ण भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व करती है हिंदी -डॉ. सत्या उपाध्याय

कोलकाता ।  खादी और ग्रामोद्योग आयोग कोलकाता एवं कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज के संयुक्त तत्वाधान में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य पर हिंदी ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। गत 27 सि प्रतियोगिता में छात्रा आलिया परवीन (प्रथम पुरस्कार), सौम्याली बसु मल्लिक (द्वितीय पुरस्कार), टीसा शर्मा (तृतीय पुरस्कार) से सम्मानित हुई। तब्बू कुमारी सिंह, वंदना कुमारी साव, शाइस्ता एजाज, नेहा गुप्ता, एकता चौधरी और प्रगति सिंह को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर डॉ. सत्या उपाध्याय ने विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि हिंदी भाषा सम्पूर्ण भारतीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व करती है इसके उचित स्थान और राष्ट्रीय स्वरूप को विकसित करने में सभी भाषाओं का योगदान हैं। कार्यक्रम का संयोजन कर रहे बैरकपुर राष्ट्रगुरु सुरेंद्रनाथ कॉलेज के डॉ. बिक्रम कुमार साव ने कहा कि हिंदी भारत की सामासिक संस्कृति की भाषा है आयोग द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार में सराहनीय कार्य किए जा रहे हैं। आयोग से आए हिंदी अधिकारी श्री प्रभु प्रसाद यादव जी ने कहा कि विद्यार्थियों को प्रतियोगिता मूलक कार्यकर्मों में हिस्सा लेना चाहिए। आयोग का राज भाषा विभाग इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है जिससे राज भाषा का प्रचार-प्रसार हो। कार्यक्रम का संचालन कॉलेज के हिंदी विभाग के अध्यापक डॉ. ब्रज किशोर झा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभाग की अध्यापिका गुलशन खान ने किया

द हेरिटेज स्कूल, कोलकाता में सीआईएससीई राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता

कोलकाता । द हेरिटेज स्कूल, कोलकाता में सीआईएससीई राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता आयोजित की गयी । गत 27 से 29 सितंबर 2023 तक आयोजित सीआईएससीई राष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का उद्घाटन समारोह मुख्य अतिथि भारतीय खेल प्राधिकरण के क्षेत्रीय निदेशक विनीत कुमार ने किया। इस अवसर पर बंगाल ओलंपिक एसोसिएशन के सचिव जहर दास, पश्चिम बंगाल तीरंदाज एसोसिएशन की अध्यक्ष कृष्णा घटक की उपस्थिति रही । कार्यक्रम में द फ्यूचर फाउंडेशन स्कूल के प्रिंसिपल और सीआईएससीई स्पोर्ट्स एंड गेम्स (डब्ल्यूबी और एनई क्षेत्र) के प्रिंसिपल कोऑर्डिनेटर रंजन मित्तर, द हेरिटेज स्कूल, कोलकाता की प्रिंसिपल सीमा सप्रू, हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ प्रदीप अग्रवाल, केबीटी के निदेशक (उच्च शिक्षा) एवं हेरिटेज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्रिंसिपल प्रो. बासब चौधरी और द हेरिटेज स्कूल के खेल विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील सिंह उपस्थित थे । प्रतियोगिता में उत्तर भारत, कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, गोवा के विभिन्न सीआईएससीई स्कूलों और विदेश के कुछ स्कूलों के छात्रों ने भाग लिया । हेरिटेज ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के सीईओ प्रदीप अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं ।

सम्मानित की गयीं सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल की मेधावी छात्राएं

कोलकाता । सुशीला बिड़ला गर्ल्स स्कूल ने हाल ही में 77वां स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया गया । इसके साथ ही एआईएसएससीई की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सम्मानित किया गया । एआईएसएससीई 2023 की परीक्षा में कॉमर्स संकाय में नित्या मल ने 98.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया । नित्या ने सीयूईटी 800 में से 799.64 प्राप्त किया । वह श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में बीकॉम ऑनर्स की पढ़ाई कर रही है । इसके बाद कॉमर्स संकाय में दूसरे स्थान पर रहने वाली चेतना अग्रवाल को 98 प्रतिशत अंक मिले । अकाउंटेंसी और साइकोलॉजी में उसे शत – प्रतिशत अंक मिले । चेतना ने सामाजिक उद्यम शाखा स्वाभिमान और आविष्कार के साथ ही समाज सेवा शाखा स्नेह में योगदान दिया । वह सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से बीकॉम ऑनर्स पढ़ रही है । तीसरे स्थान पर मधुनिशा मजुमदार ने एआईएसएससीई 2023 की ह्यूमैनिटीज स्ट्रीम में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त किये । वाद – विवाद प्रतियोगिता में कई पुरस्कार प्राप्त कर चुकी मधुनिशा एल एन बिड़ला वाद – विवाद प्रतिय़ोगिता 2022 में उप विजेता वक्ता रही । सौम्या मेहता को साइंस स्ट्रीम में एआईएसएससीई 2023 में 96.4 प्रतिशत अंक मिले । वह कम्प्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग में बी.टेक कर रही है और डेटा साइंस में स्पेशिलाइजेशन प्राप्त कर रही है । इन सभी को अकादमिक उत्कृष्टता के लिए ताजा टीवी मेधा सम्मान, प्रभात खबर का प्रतिभा सम्मान, टाइम्स एडुशाइन और मारवाड़ी महिला समिति द्वारा सम्मानित किया गया । एआईएसएससीई 2023 की परीक्षा में नकियाह एफ कलकत्तावाला को 93.8 प्रतिशत अंक मिले । नेतृत्व क्षमता रखने वाली यह छात्रा अच्छी लेखिका है और फ्लेम यूनिवर्सिटी से डेटा साइंस और इकोनॉमिक्स लेकर पढ़ रही है । इन पाँचों मेधावी छात्राओं को विद्या मंदिर सभागार में आयोजित समारोह में पदक और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया । स्कूल की पूर्व छात्राओं ने गिफ्ट वाउचर दिए । इस अवसर पर कई गण्यमान्य़ अतिथि उपस्थित थे ।

एमसीसीआई में शिक्षा और अभिभावकों की भूमिका पर परिचर्चा

कोलकाता । मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एमसीसीआई) ने गत 23 सितंबर 2023 को “एम्पावरिंग टुमॉरो माइंड्स : पैरेंटिंग इन ए चेंजिंग एडुकेशनल लैंडस्केप पर जानकारीपूर्ण सत्र आयोजित किया । का आयोजन किया । परिचर्चा सत्र का उद्घाटन हैदराबाद पब्लिक स्कूल, बेगमपेट के प्रिंसिपल डॉ. स्कंद बाली ने किया । डॉ. स्कंद बाली ने सुझाव दिया कि एक सही शिक्षा बोर्ड चुनने से पहले, कुछ कारकों पर विचार करना जरूरी है, जैसे – शिक्षा बोर्ड के प्रकार’, ‘अपने बच्चे की जरूरतों और लक्ष्यों का आकलन करना’, “अन्य अभिभावकों और छात्रों से बात करके स्कूलों के बारे में शोध करना और स्कूलों का दौरा करना”, “पाठ्यक्रम की समीक्षा करना” और “दीर्घकालिक योजनाओं पर विचार करना” महत्वपूर्ण हैं। ” सत्र में “कॅरियर काउंसलिंग, अभिभावकों एवं शिक्षण संस्थानों के बीच आवश्यक सम्बन्ध, विद्यार्थियों के लिए विदेशी भाषा की भूमिका, और सही शैक्षणिक बोर्ड के चयन पर भी चर्चा हुई । सत्र को सम्बोधित करते हुए कॉग्निक्स नॉलेज ग्रुप के संस्थापक निर्मल अग्रवाल ने सही कॅरियर पथ चुनते समय चार कारकों अर्थात् ‘इच्छा’, ‘ज्ञान’ ‘समर्पण’ और ‘भावनात्मक शक्ति’ पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। मॉर्डन हाई स्कूल फॉर गर्ल्स की प्रिंसिपल दमयंती मुखर्जी ने कहा कि माता-पिता और बच्चे के बीच ईमानदार और समान स्तर के संचार पर जोर दिया । कलकत्ता इंटरनेशनल स्कूल की प्रमुख (स्टूडेंट डेवलपमेंट) संजुक्ता पोद्दार ने दूसरी भाषा सीखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला जो संज्ञानात्मक कौशल, सांस्कृतिक समझ, विस्तारित कैरियर के अवसरों आदि को बढ़ाएगी। बेलव्यू क्लिनिक की साइकोलॉजिस्ट स्मरणिका त्रिपाठी ने सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू पर जोर देते हुए माता-पिता को अपने बच्चे की दुनिया से जुड़ने और नेटवर्क वाले माता-पिता बनने का सुझाव दिया। जेआईएस ग्रुप के निदेशक सिमरप्रीत सिंह ने जेआईएस ग्रुप द्वारा शिक्षा में लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम शुरू करने की नवीनतम पहल के बारे में बात की। सत्र का समापन एमसीसीआई की एडुकेशन काउंसिल के को चेयरमैन आलोक शर्मा द्वारा प्रस्तावित हार्दिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ ।

राज्य में 65 हजार लोगों को मिल रहा है टेलिमेडीसिन केन्द्रों का लाभ

कोलकाता । मर्चेंट्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने सी के बिड़ला हॉस्पिटल्स (सीएमआरआई) के सहयोग से “हेल्थ केयर में उन्नति: ब्रिजिंग साइंस एंड प्रैक्टिस” विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया। एमसीसीआई और सीएमआरआई हॉस्पिटल्स चिकित्सा विज्ञान को आगे बढ़ाने में भी भागीदार बनेंगे। विज्ञान को अभ्यास के साथ लागू करने के तरीकों पर गौर करना । मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव नारायण स्वरूप निगम ने कहा कि “जनता की भलाई का उत्तर न केवल विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर निर्भर करता है, बल्कि इस पर भी निर्भर करता है।” वितरण तंत्र” उन्होंने पूरे पश्चिम बंगाल में टेलीमेडिसिन केंद्रों का जिक्र किया, जहां 8,000 टच प्वाइंट हैं और 65,000 लोग इसका लाभ उठा रहे हैं।
सीएमआरआई अस्पताल, कोलकाता के यूनिट प्रमुख सौम्ब्रत रॉय ने कहा, “हम नैदानिक ​​उत्कृष्टता और रोगी सेवा में रिकॉर्ड उपलब्धि के साथ, स्वास्थ्य सेवा में सर्वश्रेष्ठ होने के चौवन साल के करीब पहुंच रहे हैं । एमसीसीआई अध्यक्ष नमित बाजोरिया ने अपना स्वागत भाषण देते हुए कहा कि एमसीसीआई इस तरह की सिफारिश के कार्यान्वयन में सीएमआरआई के साथ साझेदारी करने को इच्छुक है और संभवतः इसके लिए एक योजना तैयार करेगा । सीएमआरआई अस्पताल ने सीएमआरआई में ऑर्थोपेडिक और रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी विभाग के निदेशक और एचओडी डॉ. राकेश राजपूत की सक्षम देखरेख में 500 सफल रोबोटिक प्रक्रियाएं पूरी की हैं । गैस्ट्रो साइंस के प्रति सीएमआरआई की प्रतिबद्धता के तहत, डॉ. सरफराज जे बेग (सीएमआरआई कोलकाता में जीआई और बेरिएट्रिक सर्जन) ने एक अनूठी और अभूतपूर्व एंडोस्कोपी बेरिएट्रिक सर्जरी विकसित की है । एमसीसीआई की हेल्थकेयर काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र खंडेलवाल ने कहा कि स्वास्थ्य देखभाल विनिर्माण इकाइयों में बुनियादी ढांचे का उन्नयन उन पहलों का समर्थन करने के लिए भी आवश्यक है जो वैज्ञानिक नवाचारों को उन लोगों के हाथों में स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान करते हैं जो उनका उपयोग रोगी परिणामों में सुधार के लिए कर सकते हैं। कार्यक्रम का समापन एमसीसीआई की मानव संसाधन एवं कौशल विकास परिषद के अध्यक्ष स्मरणित मित्रा के हार्दिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

श्री शिक्षायतन कालेज ने मनाया हिन्दी दिवस समारोह

कोलकाता ।  श्री शि‌क्षायतन कालेज के हिन्दी विभाग द्वारा गत 27 सितंबर को हिंदी दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का आरंभ सरस्वती वंदना के साथ हुआ। तत्पश्चात छात्राओं द्वारा निराला की बादल राग कविता पर भाव नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस नृत्य ने सभी को मुग्ध कर लिया। अपने स्वागत वक्तव्य में कालेज की प्राचार्या डॉ अदिति दे ने हिन्दी दिवस को कालेज के विशिष्ट आयोजन के रूप में रेखांकित किया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष सिन्धु मेहता ने हिन्दी के महत्व को बताते हुए कहा कि विश्व पटल पर अंग्रेजी भाषा के बाद हिंदी भी अब एक महत्वपूर्ण भाषा के रूप में उभर रही है।
इस अवसर पर आलेख-पाठ, काव्य-आवृत्ति तथा आशु-अभिनय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया जिसमें कोलकाता के विभिन्न कालेजों के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। आलेख पाठ का विषय था- “प्रेमचंद की वैचारिक यात्रा” जिनके निणार्यक के रूप में उपस्थित थे, डॉ संजय जायसवाल (सहायक प्रोफेसर, विद्यासागर विश्वविद्यालय) और डॉ विभा कुमारी (एसोसिएट प्रोफेसर, कल्याणी विश्वविद्यालय)। आलेख पाठ की तकनीकी पक्ष से डॉ विभा कुमारी ने विद्यार्थियों को अवगत कराया तथा डॉ संजय जायसवाल ने प्रेमचंद की विचारधारा पर बात रखते हुए कहा कि प्रेमचंद की वैचारिकी समतामूलक समाज तथा लोकतांत्रिक भारत के निर्माण के स्वप्न के साथ आगे बढ़ती है। काव्य आवृत्ति के निणार्यक थे- डॉक्टर रेशमी पांडा मुखर्जी (ऐसोसिएट प्रोफेसर, गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज) तथा मोहम्मद आसिफ आलम (असिस्टेंट प्रोफेसर, विद्यासागर कांलेज फार वुमेन)। आशु अभिनय के निणार्यक थे- श्री सुशील कांति (प्रसिद्ध नाट्य संस्था रंग शिल्पी के कलाकार) तथा डॉ इबरार खान (SACT बंगवासी कालेज)। आलेख पाठ में प्रथम पुरस्कार इशिका गुप्ता (श्री शिक्षायतन कालेज) द्वितीय पुरस्कार सन्ध्या राम (खिदिरपुर कालेज) तथा तृतीय पुरस्कार सौरभ कुमार सिंह (प्रेसीडेंसी विश्व विद्यालय) को दिया गया। काव्य आवृत्ति प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार अमृता कुमारी सिंह (खिदिरपुर कालेज) द्वितीय पुरस्कार संजना जायसवाल (बेथुन कालेज) तथा तृतीय पुरस्कार अमृता शुक्ला (श्री शिक्षायतन कालेज) को प्रदान किया गया। प्रोत्साहन पुरस्कार जैनब रज़ा (विद्यासागर कॉलेज फ़ॉर वुमेन) को दिया गया। आशु अभिनय प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ दल का पुरस्कार श्री शिक्षायतन कालेज (श्रीऋद्धा दत्ता, अमृता शुक्ला, कुमकुम भट्ठर और जयस्मिता चक्रवर्ती को मिला। सर्वश्रेष्ठ अभिनय का पुरस्कार श्री शिक्षा यतन कालेज की छा‌त्रा श्री ऋद्धा दत्ता को दिया गया। समारोह के विभिन्न सत्रों का संचालन छात्राओं (संचिता सिंह, शाहिस्ता परवीन, निधि दवे और राशि कोठारी) ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर अल्पना नायक ने किया ।

वाणिज्यिक जानकारी एवं सांख्यिकी महानिदेशालय में हिंदी पखवाड़ा

कोलकाता । जानकारी एवं सांख्यिकी महानिदेशालय में हिंदी पखवाड़ा का आयोजन किया गया। 14 सितंबर से 28 सितंबर 2023 के दौरान हिंदी कार्यशाला एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं में बड़ी संख्या में कार्मिकों ने हिस्सा लिया।29 सितंबर को समापन समारोह में हिंदी पखवाड़ा में आयोजित दस प्रतियोगिताओं के विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।इस अवसर पर विभाग के अध्यक्ष अजय बक्सी, (भारतीय सांख्यिकी सेवा) उप महानिदेशक द्वारा सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से अपना संपूर्ण कार्यालयी कार्य हिंदी में करने के लिए अपील किया।समापन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया। ओमप्रकाश प्रसाद एवं उनकी टीम द्वारा लघु नाटिका के साथ ही श्रुति दास द्वारा घूमर नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति की गई। कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए विभागाध्यक्ष अजय बक्सी द्वारा पूरे वर्ष भर अधिक से अधिक कार्य हिंदी में ही करने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव और कारगर उपाय किए जा रहे हैं। हिंदी शब्द सिंधु के विषय में चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा यह एक प्रशंसनीय पहल है जिसमें भारत की सभी मुख्य क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचलित शब्दों को शामिल किया गया है और उनके अधिक से अधिक प्रयोग की सरकारी कार्मिकों से अपेक्षा की जाती है ताकि इन शब्दों को जनता में लोकप्रिय बनाया जा सके। इससे हिंदी जहां एक ओर समृद्ध होगी वहीं दूसरी ओर भारत की सामासिक संस्कृति की अभिव्यक्ति का माध्यम बनेगी । कार्यक्रम में अतनु कुमार चौधुरी (भारतीय सांख्यिकी सेवा) उप महानिदेशक प्रशासन, श्यामसुंदर पारुई (भा. सां.से.), मंच पर उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन भरत सिंह राजपूत, वरिष्ठ अनुवाद अधिकारी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक समापन नगेन्द्र कुमार, कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। हिंदी पखवाड़ा के सफल आयोजन में राज शेखर साव, और कृष्णा चौधरी कनिष्ठ अनुवाद अधिकारी का प्रशंसनीय योगदान रहा।

अपनी बायोपिक का प्रचार करने सॉल्टलेक शिक्षा निकेतन पहुंचे मुरलीधरन

कोलकाता । सुप्रसिद्ध श्रीलंकाई क्रिकेटर मुथैया मुरलीधरन ने अभिनेता मधुर मित्तल के साथ अपनी जीवनी पर आधारित फिल्म 800 का प्रचार करने के गुरुवार को कोलकाता पहुंचे। इसके बाद वह कोलकाता के साल्टलेक में स्थित शिक्षा निकेतन स्कूल का दौरा कर मुथैया मुरलीधरन और मधुर मित्तल ने स्कूल के छात्रों के साथ बातचीत कर छात्रों के साथ यादगार पल गुजारे। इस दौरान उन्होंने स्कूल के छात्रों के साथ जमकर क्रिकेट खेला। तत्पश्चात उन्होंने बच्चों को ऑटोग्राफ देकर उनके चहरे पर खुशियां ला दी। इस दौरान कार्यक्रम में ललित बेरीवाला, वी.के. गोयल, जी.एस. खजांची, संजय अग्रवाल, रमेश बेरीवाल, जगदीश अग्रवाल, किशन के. गुप्ता के साथ बड़ी संख्या में सॉल्टलेक शिक्षा निकेतन स्कूल के अध्यापकगण मौजूद थे।

इस मौके पर साल्टलेक शिक्षा निकेतन की प्रिंसिपल नूपुर दत्ता ने कहा कि विश्व के मशहूर स्पिन गेंदबाजी के जादूगर को अपने सामने देखकर छात्रों की आँखें खुली रह गईं। बच्चे फिल्म में उनकी कहानियों और ज्ञान की बातों को जानकर काफी प्रेरित हुए। श्री मुरलीधरन ने इस दौरान बच्चों को स्कूल में क्रिकेट खेल के महत्व पर जोर दिया और छात्रों की युवा प्रतिभा को प्रेरित किया। इस श्रीलंकाई क्रिकेटर ने एक सफल क्रिकेटर बनने के लिए मूल रूप से जुनून, कड़ी मेहनत, अनुशासन और आत्म-विश्वास पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने प्रत्येक खिलाड़ी को उनके शानदार कॅरियर के लिए शुभकामनाएं देते हुए हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही एक अन्य कार्यक्रम में सौरभ गांगुली भी दिखे जहाँ उन्होंने मुरलीधरन की तारीफ की ।