Sunday, July 5, 2026
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महिला सशक्तीकरण की गतिविधियों में तेजी लायेंगी वीरांगनाएं

कोलकाता । अंतरराष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फाउंडेशन, पश्चिम बंगाल ने नववरष में महिला सशक्तीकरण की गतिविधियों को और तेज करने का संकल्प लिया। विक्टोरिया मेमोरियल परिसर में संस्था की वार्षिक गतिविधियों की समीक्षा की गयी और अगले वर्ष की योजनाओं की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया। प्रतिभा सिंह ने कहा कि महिलाओं ने अपनी साहिस और उद्यम के जरिए यह संकेत दिया है कि वे बहुत कुछ कर सकती हैं। विश्वास है कि यह सदी महिलाओं की होगी।
बैठक की अध्यक्षता वीरांगना की प्रदेश अध्यक्ष और विख्यात गायिका-अभिनेत्री प्रतिभा सिंह ने किया। कार्यक्रम में वीरांगना की प्रदेश महासचिव प्रतिमा सिंह, उपाध्यक्ष रीता सिंह, कोलकाता इकाई की अध्यक्ष मीनू सिंह, महासचिव इंदु संजय सिंह, कोषाध्यक्ष संचिता सिंह, उपाध्यक्ष ललिता सिंह, पदाधिकारी मीरा सिंह, गीता सिंह, प्रेमशीला सिंह, मीनाक्षी तिवारी,  सोदपुर इकाई की अध्यक्ष सुनिता सिंह,  पदाधिकारी जयश्री सिंह, मंजू सिंह उपस्थित थीं।

कलकत्ता विश्वविद्यालय में एकल व्याख्यान 

कोलकाता । ऐतिहासिक संस्थान कलकत्ता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में एकदिवसीय व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का विषय ‘हिंदी कविता और सांस्कृतिक प्रतिरोध’ था। इस कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता केरल विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका एस. आर. जयश्री जी थी। विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर रामप्रवेश रजक और श्रीमती राजश्री शुक्ला जी ने सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए एस. आर. जयश्री, उपस्थित समस्त सारस्वत शोधार्थियों एवं छात्रों का स्वागत किया। प्रोफ़ेसर राजश्री शुक्ला ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रति गौरव बोध प्रकट करते हुए कहा कि भारत की संस्कृति सर्वसमावेशी  है और प्रत्येक भारतीय भाषा का एक विशेष महत्व है। एस. आर. जयश्री जी ने “हिंदी कविता और सांस्कृतिक प्रतिरोध” के विषय में कहते हुए कहा कि साहित्य केवल दर्पण मात्र नहीं होता, वह अपने पाठकों को आलोचनात्मक अंतर्दृष्टि देता है। सांस्कृतिक प्रतिरोध तब शुरू होता है जब देश के सभी समुदाय अपने व्यक्तिगत अस्मिता को लेकर लड़ने लगते हैं, वर्चस्ववादी खतरा उत्पन्न होने पर कोई भी देश पूर्ण नहीं बन पाता। साहित्य कलात्मक सौंदर्य है जो ईमानदारी के साथ वैचारिक परिवर्तन से जुड़ता है और नई संभावनाओं को जन्म देता है।
स्वर्ण , पितृसत्ता , भाषा , कॉर्पोरेट, और सांप्रदायिक वर्चस्व जैसी शक्तियों ने देश में सांस्कृतिक प्रतिरोध को जन्म दिया है। वर्चस्व का प्रतिरोध करने की सृजनात्मक शैली ही साहित्य का प्रतिरोध है। अंत में एस. आर. जयश्री जी ने भारत की हर भाषा व संस्कृति को एक समान बतलाया, इस प्रकार के भाव से वर्चस्व का सूक्ष्म से सूक्ष्म कण भी नष्ट हो जाने की संभावना जतायी है। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने प्रश्न पूछा तथा विभागाध्यक्ष डॉ. राम प्रवेश रजक जी ने कार्यक्रम का समापन करते हुए सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

भवानीपुर कॉलेज  में मनाया गया सात दिवसीय  फिट इंडिया 

कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 9 दिसंबर से 15 दिसंबर 2023 तक फिट इंडिया सप्ताह आयोजित किया। इस अभियान का पहला दिन 9 दिसंबर 2023 को आयोजित किया गया था ताकि छात्रों को उनके व्यक्तिगत शरीर की फिटनेस के महत्व के बारे में अधिक जागरूक किया जा सके, जिसके लिए कॉलेज ने एक आहार विशेषज्ञ सौम्येंदु घोष, दैनिक ​​​​आहार विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ और जीवन शैली परामर्शदाता को अपना योगदान देने के लिए आमंत्रित किया था। में विशेषज्ञता फिटनेस और स्वास्थ्य.यह कार्यक्रम सुबह 9 बजे शुरू हुआ और एक घंटे तक चला, जिसमें कॉलेज के सोसाइटी हॉल में 120 से अधिक छात्र उपस्थित थे।
एक लंबा और स्वस्थ जीवन काल मुख्य रूप से व्यक्ति की फिटनेस के स्तर पर निर्भर करता है और इसी दृष्टिकोण के साथ भारत सरकार ने 2019 में “फिट इंडिया” के विचार की कल्पना स्कूलों और उच्च संस्थानों में बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों के बीच फिटनेस के बारे में जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से, संस्थानों को सप्ताह में 4 से 6 दिन दौड़/दौड़ जैसी विभिन्न गतिविधियों में साइकिल दौड़, लोकप्रिय खेल और मनोरंजक खेल, आदि शामिल रहे।
इस कार्यक्रम को आधिकारिक तौर पर रेक्टर और छात्र मामलों के डीन, प्रो. दिलीप शाह के स्वागत भाषण के साथ मनाया गया।  उद्घाटन समारोह में प्रबंधन के सदस्यों उमेश ठक्कर और  जितेंद्र शाह का स्वागत किया गया । इसके बाद उन्होंने कॉलेज के खेल अधिकारी  भाविन परमार और पूरे खेल विभाग को इस सप्ताह भर चलने वाली पहल की मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया गया । कार्यक्रम की आधिकारिक शुरुआत से पहले,  परमार ने इस अवसर की शोभा बढ़ाने के लिए मानद अतिथि को धन्यवाद दिया और उपस्थित लोगों से शारीरिक फिटनेस को अधिक महत्व देने और प्राथमिकता देने का आग्रह किया।  प्रो. शाह ने प्रबंधन प्रतिनिधियों के साथ सौम्येन्दु घोष का अभिनंदन किया जिन्होंने वर्तमान  में स्वस्थ रहने की उपेक्षा पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ”जीवनशैली रोग” शब्द व्यक्ति की मनगढ़ंत कहानी है। उन्होंने और उनकी टीम ने प्रत्येक आहार संबंधी दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए एक प्रस्तुति दी, जिससे विकसित होने वाली बीमारियों से निपटने के प्रयास में फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए अपनाया जाना आवश्यक है। उनकी टीम ने दैनिक आहार वाले कुछ चार्ट प्रदर्शित किए, जिनका हम पालन कर सकते हैं। हमारे स्वास्थ्य को रोकने के लिए विपत्तियों से.छात्रों को फिटनेस को अत्यंत महत्वपूर्ण चीज़ के रूप में देखने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए, कॉलेज ने 10 नवंबर 2023 को फिट इंडिया वीक के दूसरे दिन की मेजबानी की। छात्रों को सामान्य रूप से एथलेटिक्स में रुचि लेने के लिए कॉलेज में दो समानांतर गतिविधियाँ आयोजित की गईं। छात्रों की सामान्य भलाई में सुधार के लिए, द हिंदुस्तान क्लब में सुबह 3 किमी, 5 किमी और 10 किलोमीटर की मैराथन आयोजित की गई, जिसमें 190 से अधिक छात्रों और शिक्षकों ने भाग लिया। समानांतर, कॉलेज में छात्रों को खेल के नियमों और विनियमों की जानकारी प्राप्त करने के बाद कैंपस टर्फ पर वॉलीबॉल आज़माने के लिए प्रेरित किया गया। फिट इंडिया वीक के तीसरे दिन के हिस्से के रूप में, कॉलेज ने सोमवार, 11 दिसंबर, 2023 को एक फिटनेस मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की, ताकि छात्रों को उनकी शारीरिक क्षमता के संबंध में कमजोरी के क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल सके, जैसे मूल्यांकन के क्षेत्र में, पुश अप्स, सिट अप्स, फ्लेमिंगो बैलेंस, वी सिट एंड रीच टेस्ट। आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के शारीरिक फिटनेस के बारे में ज्ञान बढ़ाना और इसके महत्व पर जोर देना था। फिट इंडिया वीक के चौथे दिन सबसे पहले विद्यार्थियों को योग से परिचित कराया गया। नियमित योगाभ्यास मन को शांत करता है, शरीर की जागरूकता में सुधार करता है, एकाग्रता को तेज करता है, ध्यान बनाता है और पुराने तनाव पैटर्न को तोड़ता है। कॉलेज ने प्रशिक्षक, पश्चिम बंगाल योग और प्राकृतिक चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. तुषार सिल के साथ परिसर में एक योग सत्र आयोजित किया। कराटे शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने के लिए आदर्श कसरत है। छात्रों को मार्शल आर्ट में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के प्रयास में, कॉलेज ने फिट इंडिया वीक के पांचवें दिन कॉलेज टर्फ में कराटे कक्षा का आयोजन किया। छात्रों को कराटे के सिद्धांत सिखाने के लिए, कॉलेज ने फुल कॉन्टैक्ट कराटे में थर्ड डैन ब्लैक बेल्ट  श्यामंतक गांगुली का स्वागत किया। कक्षा का मुख्य ध्यान कई आत्मरक्षा तकनीकों पर था जो शिक्षार्थियों ने अपनी ताकत में सुधार करते हुए शारीरिक फिटनेस बनाए रखने के लिए हासिल कीं। कराटे आत्मरक्षा सिखाने के अलावा किसी के सामान्य स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार के लिए बहुत अच्छा है।
कबड्डी एक उच्च संपर्क वाला खेल है जिसमें ताकत और फुर्ती सहित कुछ निश्चित शारीरिक कौशल की आवश्यकता होती है। 14 दिसंबर, 2023 को, फिट इंडिया वीक के छठे दिन, कॉलेज ने छात्रों को स्वदेशी पारंपरिक खेल कबड्डी से परिचित कराने के लिए एक सत्र आयोजित किया। महाविद्यालय के कबड्डी टीम प्रशिक्षक स्वरूप घोष, जिन्होंने टीम को कई ट्रॉफियां जीतने में मदद की है, को छठे दिन प्रशिक्षण का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था। बैठक टर्फ परिसर में हुई। फिट इंडिया वीक के अंतिम दिन, कॉलेज ने कॉलेज के खेल क्षेत्र में एक टेबल टेनिस सत्र आयोजित किया।  सत्र के प्रशिक्षक अफनान असलम ने छात्रों को टेबल टेनिस का प्रशिक्षण दिया। कॉलेज के खेल अधिकारी  रूपेश गांधी ने छात्रों से फिटनेस को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने की आदत विकसित करने का आग्रह किया। कबड्डी का खेल खेलने से मानसिक निपुणता के साथ-साथ फोकस और चौकसता में भी सुधार होता है।
सात दिवसीय सत्र, जिसका उद्देश्य छात्रों को अपनी शारीरिक फिटनेस बनाए रखने में भाग लेने के लिए प्रेरित करना था, निश्चित रूप से एक बहुत बड़ी उपलब्धि थी। छात्रों को उद्योग के सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षकों से दैनिक निर्देश प्राप्त हुए, और इस प्रदर्शन ने निस्संदेह उन्हें उस फिटनेस व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया जो कॉलेज ने छात्रों के लिए शुरू की है। फिट इंडिया वीक के सभी 7 दिनों को पूरा करने वाले 80 से अधिक छात्रों के साथ, कॉलेज ने उन्हें प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर छात्रों की भागीदारी का जश्न मनाया।रिपोर्टर अब्जनी डी. हिंडोचा, फ़ोटोग्राफ़र पारस गुप्ता, निचाय आलोकित लाकड़ा, अग्रग घोष, वीडियोग्राफर आर्यन नसीम, ​​आयुष शुक्ला, दिशानु साहा रहे ।कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
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हर दिन नया नया ही होता : स्वरचित कविताओं से नव वर्ष का स्वागत

कोलकाता । अर्चना संस्था की ओर से कविताओं के माध्यम से नये वर्ष 23 की अग्रिम शुभकामनाएँ दी गई।  इंदू चांडक ने माँ शारदे की स्तुति से संचालन का शुभारंभ किया। 22 दिसम्बर को 4.30 बजे जूम पर हुए इस संगोष्ठी में अर्चना संस्था के 10 से अधिक कवियों ने स्वरचित कविताएँ पढ़ीं। बनेचंद मालू,  शशि कंकानी, विद्या भंडारी, नौरतनमल भंडारी, हिम्मत चौरडिया, उषा श्राफ, इंदू चांडक, वसुंधरा मिश्र, मृदुला कोठारी ने नये वर्ष और पुराने वर्ष की संधि स्थल से संबंधित विभिन्न विचारों को अपनी कविताओं, रचनाओं और गीतों की प्रस्तुति दी। मृदुला कोठारी ने टुकड़े-टुकड़े धूप लेकर दिवस चला है रात की ओर गीत और पुराना साल जा रहा/नव वर्ष आ रहा प्रस्तुति दी। पुरातन की विदाई/ नव वर्ष का आगमन/शिकायत है हमें अवसर ही नहीं मिला बनेचंद मालू की सकारात्मक ऊर्जा से भरी कविताओं को सुना गया। उषा श्राफ ने कविता में अपनी इच्छा व्यक्त  – फिर ज़िन्दगी को एक बार फिर पलट कर जीना चाहती हूं। नौरतनमल भंडारी ने गजल और कविता हरा भरा मेरा मन/हो गया है रेगिस्थान।/मेघो के गरजने/या बादलों के बरसने से/एक हूक सी उठती है ।  ग़ज़ल उठ गया लोगों से /ऐतबार,क्या करे /जहर उग्लते बैरी संसार, पसंद की गई ।पंच चामर छंद आधारित गीतिका सुनाते हुए हिम्मत चौरडिया ने लोगों को महत्वपूर्ण संदेश देते हुए छंदों के साथ कहा कि राम कहो रहमान कहो तुम, बंद करो नित ये झगड़े।विद्या भंडारी ने दो कविताओं में भविष्य में मनुष्यता पर होने वाले खतरे पर ध्यान दिलाया हर दिन एक नया  सूरज उगाना चाहती हूँ / इससे  पहले कि शहर  जंगल में बदल जाए /आओ कुछ करें ।शशि कंकानी ने नए वर्ष का अभिनंदन करते हुए कहा कि नये वर्ष की नयी सुबह काश/आओ हम सब करें अभिनन्दन ।/ हम सब पक्षी डाल – डाल के/कब उड़ जायें कौन दिशा में।। इंदू चांडक ने स्मृतियों के खजाने में एक वर्ष फिर समाया /लक्ष्य हमारा आसमान है बढ़े चलें बढ़े चलें सुनाया। वसुंधरा मिश्र ने  हर दिन नया और शरद कविता सुनाते हुए कहा कि क्या ही अच्छा होता हर दिन नया नया ही होता /मन का त्योहार बन आ जाता /अणु अणु में उष्मा भर जाता। संगीता चौधरी, मीना दूगड़, भारती मेहता, सुशीला चनानी, गुलाब वैद, प्रसन्न चोपड़ा, निशा कोठारी, देवी चितलांगिया, सुधीर पाटोदिया आदि सदस्यों ने नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएँ दी। सूचना दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

अभिज्ञात के काव्य संग्रह जरा सा नॉस्टेल्जिया पर संगोष्ठी

कोलकाता । साहित्यिकी की ओर से अभिज्ञात के दसवीं कविता संग्रह जरा सा नॉस्टेल्जिया ‘पर संगोष्ठी का आयोजन भारतीय भाषा परिषद पुस्तकालय हाल में किया गया ।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉक्टर वसुंधरा मिश्र ने कहा कि अभिज्ञात की कविताएं ग्राम्य जीवन व नगरीय जीवन के बीच सेतु हैं ।उनकी कविताओं में उदात्त सकारात्मक संदेश है। संवेदना, हालात के बदलने की बेचैनी और गांव के विछोह की असीम व्यथा है ।वे 20वीं और 21वीं सदी के बड़े रचनाकार हैं ।
नीता अनामिका ने कहा कि अभिज्ञात की कविता में विचार और संवेदना अनूठे ढंग से पिरोई गई हैं। कविताओं में न केवल स्मृतियों का आस्वाद है ,बल्कि वर्तमान और भविष्य के धागे भी उससे जुड़े हैं। विमलेश त्रिपाठी का कहना था कि जो लोग गांव से प्रवासी होकर शहरों में अरसे से रह रहे हैं उन सबमें स्वाभाविक तौर पर अपनी जड़ों को लेकर नॉस्टेल्जिया है
अभिज्ञात ने अपने पहले ही कविता संग्रह का नाम एक अदहन हमारे अंदर रखकर यह इंगित कर दिया था कि आधहन जैसे शब्दों से शुरू उनकी साहित्यिक यात्रा जड़ों की चिंता की भी यात्रा है। उन्होंने अभिज्ञात की स्त्री जब खुश होती कविता को विशेष तौर पर उल्लेखनीय बताया। फिल्म कार आशुतोष पाठक नेअभिज्ञात की इस बात से सहमति जताई कि कविता हथियार उठाने के लिए ही नहीं प्रेरित करती बल्कि वह हथियार छोड़ने में भी मददगार हो सकती है। डॉक्टर गीता दूबे ने अभिज्ञात की तीन कविताओं की आवृत्ति की । संस्था की अध्यक्ष विद्या भंडारी ने कहा कि अभिज्ञात छोटी कविताओं में भी बड़ी बात कहने का हुनर जानते हैं। उनकी कविता गागर में सागर है। अभिज्ञात
ने कहा कि आप जो भी कहें, जो भी करें उसमें थोड़ी सी कविता भी हो तो बहुत सी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। कविता जीने की पद्धति है जिसे अपनाकर तनाव व हताशा से मुक्ति पाई जा सकती है कार्यक्रम का संचालन करते हुए संजना तिवारी ने कहा कि अभिज्ञात की कविता की हर आवृत्ति के साथ नए अर्थ खुलते हैं ।संस्था का परिचय साहित्यिकी की सचिव डॉक्टर मंजू रानी गुप्ता ने किया।

भवानीपुर कॉलेज में उमंग 23 में चला मोहित चौहान के गीतों का जादू

कोलकाता । भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज का उमंग 23 का उद्घाटन समारोह 26.दिसम्बर को आरम्भ हुआ ।कॉलेज के वरिष्ठ छात्राओं के समूह ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी जो अर्द्धनारीश्वर पर आधारित थी जहां स्त्री पुरुष दोनों को सृष्टि का प्रमुख कारण माना गया है । भारतीय संस्कृति की खुशबू से सभी के मन को उमंग से भर दिया।कॉलेज के अध्यक्ष रजनीकांत दानी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और उमंग23 को आरंभ करने का ऐलान किया। प्रमुख अतिथि जीओसी बंगाल सब एरिया मेजर जनरल एच धर्मराजन का कॉलेज ने मंच को डिजिटल रूप से बटन दबा कर गतिशील किया साथ में मेजर अर्जुन लांबा रहे। उद्घाटन में विशेष रूप से झरना, धर्म, चक्र और घड़ी गतिशील हुए । कॉलेज के रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह द्वारा इस वर्ष की थीम मेज और अमेज के विषय में बताया।यह थीम कुछ पाने कुछ खोने की ओर संकेत करती है। इस भूलभुलैया भरे जीवन में जैसे कुछ पाने का सुख है वैसे ही कुछ खोने का भी योगदान है। बढ़ते प्रदूषण ने हमारी संस्कृति को नष्ट भी किया है और हमें फिर से हरे – भरे जंगल और पर्यावरण को संरक्षित करने की आवश्यकता है जो हमारी खोई मनुष्यता और संवेदनाओं को लौटा सकता है। प्रकृति में अद्भुत पाने की संभावनाएं छिपी हैं।
प्रमुख अतिथि जीओसी मेजर जनरल धर्म राजन ने कॉलेज के आर्ट एन मी के विद्यार्थियों, वोलिंटियर्स और अन्य कॉलेज से आए सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शिक्षा के साथ कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए कॉलेज के रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह और मैनेजमेंट के पदाधिकारियों को शुभकामनाएँ दीं। खेल शिक्षा साहित्य संस्कृति सभी क्षेत्रों में बढ़ावा देने पर बल दिया। अपने वक्तव्य से विद्यार्थियों के जोश को दुगना किया।
65 कॉलेज और 3000 प्रतिभाशाली प्रतिभागियों का सक्रिय रूप से भाग है उमंग।इन प्रतिभागियों को भवानीपुर कॉलेज का उमंग मंच अपनी साहित्यिकी और सांस्कृतिक प्रतिभा को कॉलेज के प्रमुख प्रवेशद्वार से लेकर सजावट और वहां से मंच तक आने का मार्ग पारंपरिक और आधुनिकता के विभिन्न विकास को दर्शाया किया गया है जिसमें मिट्टी की मूर्तियों और फिर धातुओं के युग का समय आया। एक ओर लेटर बॉक्स और दूसरी ओर डिजिटल युग। वर्तमान में आदिम युग से आधुनिकता की यात्रा में हमने क्या पाया और क्या खोया इसे लेकर प्रतिभाएं अपना- अपना प्रदर्शन कर रहे हैं। वार ऑफ डीजेस, अन्त्याक्षरी, डिवेट आदि कई प्रतियोगिताओं के प्राथमिक आयोजन हुए। उमंग के उद्घाटन समारोह में  भवानीपुर डिजाइन एकेडमी ने सभी को प्रतिभागियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर कॉलेज के डायरेक्टर जनरल डॉ सुमन मुखर्जी, रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह, टीआईसी डॉ सुभब्रत गंगोपाध्याय,बीडीए की डायरेक्टर रेणुका भट्ट, मैनेजमेंट के पदाधिकारियों में नलिनी पारेख, प्रदीप सेठ, उमेद ठक्कर, राजू भाई और शिक्षक शिक्षिकाओं आदि की उपस्थिति रही।
द्वितीय दिन 27 दिसंबर बाहर से आए सभी प्रतिभागियों के लिए एक नया अनुभव था। हिंदी अंग्रेजी और बांग्ला भाषा में सृजनात्मक प्रतियोगिता, सटायर, फोटो स्टोरी, ग्रुप फोक डांस, वार अॉफ रेपर्स, बैंकर्स पैराडाइस, इंडीपॉप, पृथ्वी से कला आदि 20 इवेंट्स किए गए। अंत में अतिथि कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी गई।
तृतीय दिन 28 दिसंबर भी बहुत ही रोमांचक भरा रहा ।16 से अधिक इवेंट्स संपन्न किए गए। मॉक अ कैरेक्टर, वेस्टर्न बैंड, कैटलॉग, सॉल्व द मेज, पोइट्री, मार्केटिंग मावेरिक मिशन, आर्ट ओ मैटिक, मोबाइल फिल्म मेकिंग, फैशन शो, बॉलीवुड ग्रुप डांस आदि बहुत सी प्रतियोगिताएं हुईं जिसमें विभिन्न प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
चतुर्थ दिन उमंग का आखिरी दिन 29 दिसंबर को 20 इवेंट्स की भागीदारी रही जिसमें स्ट्रीट प्ले, ग्रुप फोक डांस, स्कील, चेसपोली, स्नूकर, रॉकेट लीग, उमंग आइडल, नॉन गैस कूकिंग, वेस्टर्न ग्रुप डांस, क्लोजिंग सेरेमनी आदि कई इवेंट्स हुए।
तारों से भरे आकाश की छत्रछाया में, नॉर्दर्न पार्क का विद्युतीकरण वातावरण की शाम जादुई से कम नहीं थी । मशहूर संगीत सनसनी मोहित चौहान बहुप्रतीक्षित भवानीपुर उमंग कार्यक्रम में मंच पर आए और माहौल उत्साह से भर गया। 11,000 से अधिक उत्सुक प्रशंसक एकत्र हुए, प्रत्येक व्यक्ति की प्रत्याशा सामूहिक उत्साह के चरम में योगदान दे रही थी जिसे जमीन पर स्पंदित होते हुए महसूस किया जा सकता था।
भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के समापन समारोह में भारतीय सेना के पूर्वी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल श्रीकांत कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में थे जो कॉलेज के लिए गौरव की बात थी। लेफ्टिनेंट जनरल श्रीकांत ने बॉलीवुड के मशहूर गायक मोहित चौहान को सम्मानित किया। इस अवसर पर भवानीपुर कॉलेज के उपाध्यक्ष मिराज डी शाह और रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने साथ दिया। भवानीपुर के नार्दन पार्क में बड़े आयोजन में मोहित चौहान ने जब वी मेट आदि विभिन्न फिल्मों के प्रसिद्ध गीतों के द्वारा छात्र छात्राओं और प्रमुख पदाधिकारियों, अतिथियों और बहुत संख्या में लोगों में अपनी आवाज के जादू को बिखेरा।राहों की दूरियाँ,पी लूं, तेरे नीले नीले शबनम तुम से ही दिन होता है सुरमई शाम आती है तुमसे ही आदि युवा के लिए रोमांटिक गानों की झड़ी लगा दी। डूबा डूबा रहता हूं पहला एल्बम बूंदे के ंहिट गीत से प्रसिद्धि प्राप्त मोहित चौहान के कार्यक्रम का आयोजन और संयोजन मैनेजमेंट  के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
उमंग23 के सभी कार्यक्रम का आयोजन कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा किया गया ।स्टार इवेंट्स, मैनेजमेंट इवेंट्स, फाइन आर्ट्स, स्पोर्ट्स आदि की कई प्रतियोगिताएं हुईं। डीन अॉफिस के संयोजन में सभी विद्यार्थी वोलिंटियर्स एनसीसी की टीम ने अपने-अपने कार्यों को पूरे दायित्व से निभाया। प्रो मीनाक्षी चतुर्वेदी, प्रो दिलीप शाह, प्रो दिव्या उदेशी, प्रो समीक्षा खंडूरी के समवेत सहभागिता से उमंग ने फिर से नई प्रतिभाओं को सम्मानित किया।
उमंग23 के पूर्ण रूपेण प्रतिभागी सेंट जेवियर्स प्रथम स्थान पर एवं द्वितीय स्थान पर भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज रहा। विजेता कॉलेज को बरगद वृक्ष की ट्राफी देकर सम्मानित किया गया। सभी इवेंट्स के निर्णायकों को सम्मानित किया गया। उमंग के स्पांसर्स, फूड स्टाल और सभी सहयोगियों को धन्यवाद दिया गया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
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भवानीपुर कॉलेज के एन एस एस द्वारा वंचित बच्चों के लिए जगाई आशा की किरण
 भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज के एन एस एस की विद्यार्थियों की टीम ने ‘रे ऑफ़ होप’ नामक एक कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसने ‘हम’ संगठन के साथ आए कुछ वंचित बच्चों के चेहरों पर मुस्कान ला दी। ह्यूमैनिटी फॉर यू एंड मी (एचयूएम) एक युवा आधारित गैर-लाभकारी संगठन है जो 2014 से काम कर रहा है और यह समाज के वंचित वर्गों को भोजन, शिक्षा (जुगनू) और रोजगार (किरण) प्रदान करने पर केंद्रित है। अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से उन्होंने एक ढही हुई इमारत का पुनर्निर्माण किया और वर्तमान में नर्सरी से मिडिल स्कूल तक के छात्रों को पढ़ा रहे हैं। इस कार्यक्रम में साल्ट लेक और वीआईपी बाज़ार के पास की मलिन बस्तियों के 100 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। एचयूएम का लक्ष्य इन बच्चों के लिए एक सुरक्षित और पोषणपूर्ण वातावरण प्रदान करना है। इन बच्चों के जीवन में बदलाव लाने के लिए उनका समर्पण और प्रतिबद्धता वास्तव में प्रेरणादायक है।
आर्ट इन मी कलेक्टिव द्वारा कॉलेज के प्रवेश द्वार और उसके आसपास को दोषरहित सजावट से सजाने में प्रदर्शित विस्तार और कलात्मक कौशल पर ध्यान वास्तव में विस्मयकारी था। टीम ने मेहमानों के लिए अनोखे सेल्फी बूथ के साथ-साथ कार्टून की हूबहू हाथ से बनाई गई प्रतिकृतियां बनाईं। एनएसएस टीम ने विभिन्न प्रकार की आकर्षक गतिविधियों और खेलों की योजना बनाई और उन्हें क्रियान्वित किया, जो बच्चों की रुचियों को पूरा करते थे और उन्हें मंत्रमुग्ध और व्यस्त रखते थे। बच्चों के बीच कपड़े, सहायक उपकरण, स्टेशनरी, बेक्ड आइटम, खिलौने और अन्य उपहार वितरित करने के लिए कई स्टॉल लगाए गए थे, जिन्हें उन्हें कॉलेज द्वारा प्रदान किए गए मुद्रा टोकन का उपयोग करके खरीदना था, जिससे बच्चों को उन वस्तुओं को चुनने का मौका मिला जो उन्हें पसंद थीं। उन्होंने गुब्बारे मारना, पिंग पोंग गेंदों पर निशाना लगाना, कप व्यवस्थित करना और अपने हाथों का उपयोग किए बिना भोजन करना जैसे खेल खेले, जो छात्रों के लिए एक मजेदार और रोमांचक अनुभव था। कॉलेज के छात्रों द्वारा बच्चों के लिए “बुद्धू सा मन है,” “बम बम बोले,” और “आशियान” जैसे लोकप्रिय गीतों पर मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति देखने लायक थी। बदले में, दर्शकों को उन बच्चों के शानदार प्रदर्शन का आनंद मिला जो उस दिन के मेहमान थे। सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और विविध गीत जैसे “गणेश वंदना,” “ढोली तारो,” और कुछ खूबसूरत बंगाली लोक गीत भी प्रदर्शन का हिस्सा थेबच्चों द्वारा प्रदर्शित प्रदर्शन की गहराई और समृद्धि उनकी जन्मजात प्रतिभा और उनके प्रशिक्षकों के समर्पण का प्रमाण थी। आइसक्रीम और जूस के रूप में प्रदान किया गया जलपान एक सामान्य धूप वाले मौसम के दिन एक ताज़ा राहत थी। खुशी का माहौल स्पष्ट था क्योंकि सभी स्वयंसेवक और छोटे बच्चे दिल खोलकर नाच रहे थे।
हमारे जीवन में “आशा की किरण” (आशार अलॉय) का प्रतिनिधित्व करने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को एक मोमबत्ती प्रदान करने का प्रतीकात्मक इशारा, इस आयोजन में एक मार्मिक और शक्तिशाली क्षण था। जब उन्होंने प्रेरणादायक गीत “मन में है विश्वास” गाया और अपनी मोमबत्तियाँ जलाईं, तो यह न केवल उनके लिए बल्कि समुदाय के लिए भी एक उज्जवल और सकारात्मक भविष्य की उनकी आशा का प्रकटीकरण था। पूरा वालिया हॉल एक सकारात्मक माहौल से गूंज उठा। सामूहिक आशा के रूप में साहसी ऊर्जाऔर पूरे क्षेत्र में सकारात्मक तरंगें गूंज उठीं।पेंट के साथ खेलने और कॉलेज की दीवारों पर हाथ के निशान छोड़ने की बाद की गतिविधि प्रतिभागियों के लिए स्थायी यादें बनाने का एक रचनात्मक और अभिनव तरीका था। गतिविधि ने न केवल छात्रों को रचनात्मक रूप से खुद को अभिव्यक्त करने की अनुमति दी बल्कि कार्यक्रम में एक व्यक्तिगत स्पर्श भी जोड़ा। अंतिम परिणाम हाथ के निशानों का एक सुंदर और रंगीन प्रदर्शन था जो प्रतिभागियों की एकता और विविधता का प्रतीक था। रचनात्मकता, आनंद और एकता का यह एक आदर्श मिश्रण रहा । यह आयोजन इस बात का एक आदर्श उदाहरण था कि कैसे छोटे-छोटे प्रयास बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं। आयोजन के सफल आयोजन में छात्र मामलों के डीन,प्रो दिलीप शाह, प्रो.मीनाक्षी चतुर्वेदी के साथ-साथ सुश्री गार्गी और उनकी पूरी एनएसएस टीम का निस्वार्थ प्रयास और जीवन में बदलाव लाने के लिए उनकी अटूट प्रतिबद्धता रही । भवानीपुर कॉलेज के  स्वयंसेवकों इस आयोजन को सफल बनाने में प्रमुख भूमिका रही। रिपोर्टर तनीषा हीरावत फ़ोटोग्राफ़र पापोन दास रहे। जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।
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मैक्स लाइफ और पॉलीस्टील प्लेसमेंट अभियान में भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों का चयन 
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने 9 दिसंबर, 2023 को सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक कॉलेज की लाइब्रेरी में एक प्लेसमेंट ड्राइव की मेजबानी की। इस कार्यक्रम ने छात्रों के लिए आशाजनक करियर पथ पर आगे बढ़ने के लिए एक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य किया। इस बार, दो प्रतिष्ठित कंपनियों, मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और बीडीजी पॉलीस्टील लिमिटेड ने इस अभियान में भाग लिया, प्रत्येक ने अलग-अलग भूमिकाओं की तलाश की – मैक्स लाइफ इंश्योरेंस ने वित्तीय विश्लेषक प्रशिक्षुओं की तलाश की, जबकि बीडीजी पॉलीस्टील लिमिटेड ने मार्केटिंग, डिजिटल मार्केटिंग और अकाउंट्स के लिए उम्मीदवारों के चयन हेतु इंटरव्यू लिए गए ।
मैक्स लाइफ इंश्योरेंस द्वारा कुल 42 छात्रों को शॉर्टलिस्ट किया गया , जिनमें से 3 का सफलतापूर्वक चयन किया गया। बीडीजी पॉलीस्टील लिमिटेड ने 57 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया, अंततः 6 का चयन कियाचयन प्रक्रिया को साक्षात्कार के दो दौरों के माध्यम से सावधानीपूर्वक पूरा किया गया, पहला साक्षात्कार कॉलेज की लाइब्रेरी में आयोजित किया गया। विशेष रूप से, कोई समूह चर्चा आयोजित नहीं की गई, जिससे प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया और व्यक्तिगत उम्मीदवार के आकलन पर सीधा ध्यान केंद्रित किया गया। इस अभियान में छात्रों की सक्रिय भागीदारी देखी गई, जिससे एक आकर्षक माहौल बना। कार्यक्रम का सफल समापन हुआ, क्योंकि छात्रों को वित्त, विपणन, डिजिटल मार्केटिंग और खातों के संबंधित क्षेत्रों में अपने कौशल का योगदान करने का अवसर मिला। यह सत्र शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग के खिलाड़ियों के बीच एक और उपयोगी सहयोग का प्रतीक है। रिपोर्टर तनीषा हीरावत रहीं । कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

तीन आपराधिक विधेयक बने कानून और पीछे छूटी ब्रिटिश औपनिवेशिक गुलामी

शुभजिता फीचर डेस्क

लोकसभा एवं राज्यसभा में को तीन नए आपराधिक विधेयक पारित हो गए और राष्ट्रपति ने भी इसे मंजूरी दे चुकी है। इससे जल्द न्याय मिलने की आस जगी है। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम में कई जरुरी प्रावधान किए गए हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक तरीके से लिए गए बयान और रिकॉर्ड को साक्ष्य और दस्तावेज के रूप में शामिल किया गया है। इससे साक्ष्य के तौर पर टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। भविष्य के लिए, मोबाइल, कैमरा, सर्वर, आईएमआई, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आदि का भरपूर इस्तेमाल होगा। साथ ही हिरासत की सूची सभी पुलिस थानों पर रखनी होगी। इसको हर 24 घंटे में अपडेट किया जाएगा। अब जानकारी छुपाने पर थानेदार पर कार्रवाई और पदोन्नति रुक जाएगी। 4 साल पहले ही कानून में सुधार की पटकथा लिख दी गई थी, जानते हैं इन परिवर्तनों के बारे में –
7 साल से ज्यादा सजा के सभी मामलों में फोरेंसिक अनिवार्य – वहीं फोरेंसिक साइंस 7 साल से ज्यादा सजा के सभी केस में अनिवार्य होगा। जमानत, बॉन्ड और आतंकवाद की कानूनी परिभाषा पहली बार दी गयी। अब राजद्रोह की जगह देशद्रोह होगा। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ बोलना, लिखना या कहना राजद्रोह की श्रेणी में नहीं आएगा। इसके अलावा पहली बार मॉब लिंचिंग पर अधिकतम फांसी की सजा का प्रवधान किया गया है। मॉब लिंचिग को पारिभाषित करते हुए कहा गया है कि अगर 5 से ज्यादा लोग गुनाह में शामिल हैं.
45 दिन अंदर निचली अदालत को देना होगा फैसला – अब देश द्रोह कर विदेश भागे हुए अब्सकॉन्डर के लिए ट्रायल हो सकेगा। सजायाफ्ता होने के बाद इससे समझौते के जरिए विदेशों से देश में वापस ला पाना आसान होगा। पॉक्सो Pocso में 15 को 18 कर दिया गया था मगर सीआरपीसी में फांसी नहीं थी। डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन, अब पीपी मनमानी कर पायेगा। वहीं कानून से फिलहाल अवैध सम्बन्धों यानी विवाहेतर सम्बन्धों को हटा दिया गया है। आईपीसी के धारा 304 के तहत गैर इरादतन मौत पर डॉक्टर को महज 2 साल की सजा होगी बाकि सबको 10 साल की सजा का प्रावधान है। अब मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 45 दिन अंदर निचली अदालत को फैसला सुनाना होगा उसके 7 दिन के अंदर सजा देनी होगी। अब निचली अदालत के वकील को सिर्फ दो ही तारीखें मिलेंगी।
नए कानून में बदलाव की प्रमुख बातें
परामर्श की प्रक्रिया – आपराधिक न्याय प्रणाली के कानूनों में सुधार की यह प्रक्रिया 2019 में प्रारंभ की गई थी। विभिन्न हितधारकों से इस संदर्भ में सुझाव मांगे गए। 2019 को यह गृह मंत्रालय ने इस सुधार प्रक्रिया की शुरुवात की। गृहमंत्री ने सितम्बर 2019 में सभी राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों/प्रशासकों को पत्र लिखा। जनवरी 2020 में भारत के मुख्य न्यायाधीश, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों, बार काउंसिलों और विधि विश्वविद्यालयों और दिसम्बर 2021 में माननीय संसद सदस्यों से भी सुझाव मांगे गए। बीपीआरडी ने सभी IPS अधिकारियों को सुझाव मांगे। मार्च 2020 को नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, दिल्ली के कुलपति की अध्यक्षता में एक समिति भी गठित की गई। इसमें कुल 3200 सुझाव प्राप्त हुए । 18 राज्यों, 06 संघ राज्य क्षेत्रों, भारत के सुप्रीम कोर्ट, 16 उच्च न्यायालयों, 27 न्यायिक अकादमियों- विधि विश्वविद्यालयों, संसद सदस्यों, आईपीएस अधिकारियों, पुलिस बलों ने भी सुझाव भेजे। गृह मंत्री ने 150 से ज्यादा बैठकें की. इन सुझावों पर गृह मंत्रालय में गहन विचार-विमर्श किया गया.
परिवर्तन यात्रा
भारतीय न्याय संहिता- इसमें 358 धाराएं होंगी (आईपीसी की 511 धाराओं के स्थान पर)। 20 नए अपराधों को जोड़ा गया है। 33 अपराधों में कारावास की सजा को बढ़ाया गया है। 83 अपराधों में जुर्माने की सजा राशि को बढ़ाया गया है। 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा शुरु की गई है। 6 अपराधों में सामुदायिक सेवा का दंड शुरु किया गया है। 19 धाराएं निरस्त/हटा दी गई हैं.
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता – इसमें 531 धाराएं होंगी। (सीआरपीसी की 484 धाराओं के स्थान पर) कुल 177 प्रावधानों में बदलाव हुआ है। 9 नए सेक्शन, 39 नए सब-सेक्शन जोड़े गए हैं तथा 44 नए प्रोविजन तथा स्पष्टीकरण जोड़े गए हैं। 35 सेक्शन में समयसीमा जोड़ी गई है। 35 जगह पर ऑडियो-विडियो का प्रावधान जोड़ा गया है। 14 धाराएं निरस्त/हटा दी गई हैं.
भारतीय साक्ष्य अधिनियम- इसमें 170 धाराएं होंगी (मूल 167 धाराओं के स्थान पर)। कुल 24 धाराओं में बदलाव किया गया है। 2 नई धारा, 6 उप-धाराएं जोड़ी गई हैं तथा 6 धाराएं निरस्त/हटा दी गई हैं।

भारतीय न्याय संहिता की प्रमुख बातें
भारतीय जरूरतों के अनुसार प्राथमिकता – ब्रिटिश शासन को मानव-वध या महिलाओं पर अत्याचार से महत्त्वपूर्ण राजद्रोह और खजाने की रक्षा थी। इन तीन कानूनों में महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराधों, हत्या और राष्ट्र के विरुद्ध अपराधों को प्रमुखता दी गई है। इन कानूनों की प्राथमिकता भारतीयों को न्याय देने का है। उनके मानवाधिकारों के रक्षा की है।
महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध – भारतीय न्याय संहिता ने यौन अपराधों से निपटने के लिए ‘महिलाओं और बच्चों के प्रति अपराध’ नामक एक नया अध्याय पेश किया है। विधेयक में 18 वर्ष से कम उम्र की महिलाओं के बलात्कार से संबंधित प्रोविजन में बदलाव का प्रस्ताव कर रहा है.
नाबालिग महिलाओं के सामूहिक बलात्कार को पॉक्सो के साथ सुसंगत बनाता है। 18 वर्ष से कम आयु की बच्चियों के मामले में आजीवन कारावास या मृत्यु दण्ड का प्रावधान किया गया है। सामूहिक दुष्कर्म के सभी मामलों में 20 साल की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान है। 18 वर्ष से कम उम्र की स्त्री के साथ सामूहिक बलात्कार का एक नयी अपराध श्रेणा होगी। धोखे से यौन संबंध बनाने या विवाह करने के सच्चे इरादे के बिना विवाह करने का वादा करने वाले व्यक्तियों के लिए लक्षित दंड का प्रावधान करता है।
आतंकवाद – भारतीय न्याय संहिता में पहली बार आतंकवाद की व्याख्या की गई है. इसे दंडनीय अपराध बना दिया गया है। व्याख्या के अनुसार भारतीय न्याय संहिता खंड 113. (1) – जो कोई, भारत की एकता, अखंडता, संप्रभूता, सुरक्षा या आर्थिक सुरक्षा या प्रभुता को संकट में डालने या संकट में डालने की संभावना के आशय से या भारत में या किसी विदेश में जनता अथवा जनता के किसी वर्ग में आतंक फैलाने या आतंक फैलाने की संभावना के आशय से बमों, डाइनामाइट, विस्फोटक पदार्थों, अपायकर गैसों, न्यूक्लीयर का उपयोग करके ऐसा कार्य करता है, जिससे, किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की मृत्यु होती है। संपत्ति की हानि होता है, या करेंसी के निर्माण या उसकी तस्करी या परिचालन तो वह आतंकवादी कार्य करता है।
आतंकी कृत्य मृत्युदंड या आजीवन कारावास के साथ दंडनीय है, जिसमें पैरोल नहीं होगा। आतंकी अपराधों की एक श्रृंखला भी पेश की गई है। सार्वजनिक सुविधाओं या निजी संपत्ति को नष्ट करना अपराध है। ऐसे कृत्यों को भी इस खंड के तहत शामिल किया गया है, जिनसे ‘महत्वपूर्ण अवसंरचना की क्षति या विनाश के कारण व्यापक हानि’ होती है.
संगठित अपराध (ऑर्गनाइज्ड क्राइम) – संगठित अपराध से संबंधित एक नई दांडिक धारा जोड़ी गयी है। भारतीय न्याय संहिता 111. (1) में पहली बार संगठित अपराध की व्याख्या की गयी है। सिंडिकेट से की गई विधिविरुद्ध गतिविधि को दंडनीय बनाया है। नए प्रावधानों में सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधियां, अलगाववादी गतिविधियां अथवा भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्य को जोड़ा गया है। संगठित अपराधों को भी अपराध घोषित किया गया है, जिसके लिए 7 साल तक की कैद हो सकती है. इससे संबंधित प्रावधान खंड 112 में हैं। आर्थिक अपराध की व्याख्या भी की गई है : करेंसी नोट, बैंक नोट और सरकारी स्टापों का हेरफेर, कोई स्कीम चलाना या किसी बैंक/वित्तीय संस्था में गड़बड़ ऐसे कृत्य शामिल हैं। संगठित अपराध में, किसी व्यक्ति की मृत्यु हो गई है, तो आरोपी को मृत्यु दंड या आजीवन कारावास की सजा होगी। जुर्माना भी लगाया जाएगा, जो 10 लाख रुपये से कम नहीं होगा। संगठित अपराध में सहायता करने वालों के लिए भी सजा का प्रावधान किया गया है।


अन्य महत्त्वपूर्ण प्रावधान
मॉब लिंचिंग का नया प्रावधान – नस्ल, जाति, समुदाय आदि के आधार पर की गई हत्या से संबंधित अपराध का एक नया प्रावधान सम्मिलित किया गया है जिसके लिये आजीवन कारावास अथवा मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया गया है।
स्नैचिंग का भी एक नया प्रावधान – गंभीर चोट के कारण लगभग निष्क्रिय स्थिति में जाने अथवा स्थाई रूप से विकलांग होने पर अब और अधिक कठोर दंड दिये जाएंगे.
पीड़ित पर केन्द्रित- क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में विक्टिम-सेंट्रिक यानी पीड़ित पर केंद्रित सुधारों के 3 प्रमुख फीचर्स होते हैं। भागीदारी का अधिकार (विक्टिम को अपनी बात रखने का मौका, बीएनएसएस 360), सूचना का अधिकार (BNSS खंड 173, 193 और 230), नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति का अधिकार
यह तीनों विशेषताएं नए कानूनों में सुनिश्चित की गयी हैं। इसके अलावा जीरो एफआईआर दर्ज करने की प्रथा को संस्थागत बना दिया गया है ( बीएनएनएस 173). वहींFIR कहीं भी दर्ज कर सकते हैं, भले ही अपराध किसी भी इलाके में हुआ हो।
पीड़ित को सूचना का अधिकार – पीड़ित को एफआईआर की एक प्रति निःशुल्क प्राप्त करने का अधिकार होगा। पीड़ित को 90 दिनों के भीतर जांच में प्रगति के बारे में सूचित करना होगा। पीड़ितों को पुलिस रिपोर्ट, एफआईआर, गवाह के बयान आदि के अनिवार्य प्रावधान के माध्यम से उनके मुकदमे के ब्योरे की जानकारी का एक महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करता है। जांच और मुकदमे के विभिन्न चरणों में पीड़ितों को जानकारी प्रदान करने के लिए उपबंध शामिल किए गए हैं.
देशद्रोह – राजद्रोह – सेडीशन को पूर्णतः हटा दिया गया है। भारतीय न्याय संहिता धारा 152 में अपराध : अलगाववादी गतिविधियों की भावनाओं को प्रोत्साहित करना है. भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालता है। आईपीसी धारा 124क में सरकार के खिलाफ की बात की गयी है, मगर भारतीय न्याय संहिता धारा 152 भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता के बारे में हैं। आईपीसी में आशय या प्रयोजन की बात नहीं थी, लेकिन नए कानून में देशद्रोह की परिभाषा में आशय की बात है, जिसमें अभिव्यक्ति स्वतंत्रता हेतु सुरक्षा प्रदान करता है। अब घृणा, अवमानना जैसे शब्दों को हटाकर सशस्त्र विद्रोह, विध्वंसक गतिविधियां, अलगाववादी गतिविधियां जैसे शब्द सम्मिलित किये गए हैं.
भारतीय न्याय संहिता धारा 152 – जो कोई, जानबूझकर या प्रयोजन पूर्वक, बोले गए या लिखे गए शब्दों से, या संकेतों द्वारा, या दृश्य प्रतिनिधित्व द्वारा, या इलेक्ट्रॉनिक संचार द्वारा या वित्तीय साधनों के उपयोग से, या अन्यथा, अलगाव या सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक गतिविधियों को उत्तेजित करता है या उत्तेजित करने का प्रयास करता है, या अलगाववादी गतिविधियों की भावनाओं को प्रोत्साहित करता है या भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालता है; या ऐसे किसी भी कार्य में शामिल होता है या करता है तो उसे आजीवन कारावास या कारावास जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, से दंडित किया जाएगा और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की प्रमुख समय सीमा – आपराधिक कार्यवाही शुरू करने, गिरफ्तारी, जांच, आरोप पत्र, मजिस्ट्रेट के समक्ष कार्यवाही, कोग्निज़ंस, चार्जेज, प्ली बारगेनिंग, सहायक लोक अभियोजक की नियुक्ति, ट्रायल, जमानत, जजमेंट और सजा, दया याचिका आदि के लिए एक समय-सीमा निर्धारित की गई है।
35 सेक्शन में समय सीमा जोड़ी गई है, जिससे त्वरित न्याय प्राप्त हो सके। बीएनएसएस में, इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन के माध्यम से शिकायत देने वाले व्यक्ति द्वारा तीन दिनों के भीतर एफआईआर को रिकॉर्ड पर लिया जाना होगा। यौन उत्पीड़न के पीड़ित की चिकित्सा जांच रिपोर्ट मेडिकल एग्जामिनर द्वारा 7 दिनों के भीतर जांच अधिकारी को फॉरवर्ड की जाएगी.
पीड़ितों/मुखबिरों को जांच की स्थिति के बारे में सूचना 90 दिनों के भीतर दी जाएगी। आरोप तय करने का काम सक्षम मजिस्ट्रेट द्वारा आरोप की पहली सुनवाई से 60 दिनों के भीतर किया जाना होगा। मुकदमे में तेजी लाने के लिए, अदालत द्वारा घोषित अपराधियों के खिलाफ अनुपस्थिति में मुकदमा शुरू करना आरोप तय होने से 90 दिनों के भीतर होगा।
किसी भी आपराधिक न्यायालय में मुकदमे की समाप्ति के बाद निर्णय की घोषणा 45 दिनों से अधिक नहीं होगी। सत्र न्यायालय द्वारा बरी करने या दोषसिद्धि का निर्णय बहस पूरी होने से 30 दिनों के भीतर होगा, जिसे लिखित में मेंशनड कारणों के लिए 45 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है.
महिलाओं के प्रति अपराध – ई – एफआईआर के माध्यम से महिलाओं के प्रति अपराधों की रिपोर्टिंग के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण पेश किया गया है। संवेदनशील अपराधों की त्वरित रिपोर्टिंग में सहायता करता है। नए विधेयक उन संज्ञेय अपराधों के लिए e-FIR की भी अनुमति देते हैं जहां आरोपी अज्ञात होता है। इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पीड़ितों को अपराध की रिपोर्ट करने के लिए एक विवेकशील अवसर प्रदान करता है.
जांच की प्रगति: शिकायतकर्ता को सूचना और इलेक्ट्रॉनिक पारदर्शिता – पारंपरिक प्रचलन से हटकर पुलिस के लिए सख्ती से 90 दिनों के भीतर जांच की प्रगति के संबंध में शिकायतकर्ता बताना जरूरी है।
समय पर ट्रायल: स्थगन और समयसीमा का मार्गदर्शन – न्यायिक क्षेत्र में दो चीज़ों पर बल दिया जा रहा है. सुनवाई में तेजी लाना और अनुचित स्थगन पर अंकुश लगाना। धारा 392 (1) में 45 दिनों के भीतर निर्णय की बात करते हुए मुकदमे को खत्म करने के लिए बेहतर ढंग से एक समयसीमा निर्धारित की गई है। न्याय में विलंब का अर्थ न्याय से वंचित होना है।
तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाना – दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रक्रिया बनाने पर जोर दिया गया है। क्राइम सीन – इन्वेस्टीगेशन – ट्रायल तक सभी चरणों में टेक्नोलॉजी का उपयोग हो सकेगा। पुलिस जांच में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। सबूतों की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा विक्टिम और आरोपियों दोनों के अधिकारों की रक्षा होगी। यह क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। एफआईआर से केस डायरी, केस डायरी से चार्जशीट तथा जजमेंट सभी डिजिटाइज्ड हो जायेंगे। सभी पुलिस थानों और न्यायालयों द्वारा एक रजिस्टर द्वारा ई-मेल एड्रेस, फोन नंबर अथवा ऐसा कोई अन्य विवरण रखा जाएगा। प्रमाण, तलाशी व जब्ती में रिकॉर्डिंग होगी। ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी। ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग ‘अविलंब’ मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत की जाए। फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी की आवश्यकता होगी। पुलिस जांच के दौरान दिए गए किसी भी बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का विकल्प होगा।
फोरेंसिक – 7 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले सभी अपराधों में ‘फोरेंसिक एक्सपर्ट’ द्वारा क्राइम सीन पर फोरेंसिक प्रमाण संग्रह अनिवार्य होंगे। इससे जांच की गुणवत्ता में सुधार होगा और जांच वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित होगी। 100% कन्विक्शन रेट का लक्ष्य रखा गया है। सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में फोरेंसिक के इस्तेमाल को जरूरी बताया गया है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में जरुरी संरचना 5 वर्ष के भीतर तैयार की जानी है।
पहल – नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) की स्थापना पर फोकस। एनएफएसयू के कुल 7 परिसर और 2 ट्रेनिंग अकादमी (गांधीनगर, दिल्ली, गोवा, त्रिपुरा, गुवाहाटी, भोपाल, धारवाड़), सीएफएसएल पुणे एवं भोपाल में नेशनल फोरेंसिक साइंस अकादमी की शुरुआत। चंडीगढ़ में अत्याधुनिक डीएनए विश्लेषण सुविधा का उद्घाटन.
सर्च और जब्ती – पुलिस द्वारा सर्च और जब्ती की कार्यवाही करने के लिए भी तकनीक का उपयोग किया जाएगा। । पुलिस द्वारा सर्च करने की पूरी प्रक्रिया अथवा किसी संपत्ति का अधिगृहण करने में इलेक्ट्रानिक डिवाइस के माध्यम से वीडियोग्राफी होगी। पुलिस द्वारा ऐसी रिकार्डिंग बिना किसी विलंब के संबंधित मजिस्ट्रेट को भेजी जाएगी.
पुलिस की जवाबदेही – गिरफ्तार व्यक्तियों की सूचना प्रदर्शित करना: राज्य सरकार को एक पुलिस अधिकारी को नामित करने के लिए अतिरिक्त दायित्व दिया है जो सभी गिरफ्तारियों और गिरफ्तार लोगों के संबंध में जानकारी एकत्र करने के लिए जिम्मेदार होगा। ऐसी जानकारी को प्रत्येक पुलिस स्टेशन और जिला मुख्यालय में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाना भी आवश्यक हैॉ।
प्रक्रियाओं को सरल बनाना – अब छोटे-मोटे मामलों में समरी ट्रायल द्वारा तेजी लाई जाएगी। कम गंभीर मामलों, चोरी, चोरी की गई संपत्ति प्राप्त करना अथवा रखना, घर में अनधिकृत प्रवेश, शांति भंग करने, आपराधिक धमकी आदि जैसे मामलों, के लिए समरी ट्रायल को अनिवार्य बनाया गया है। उन मामलों में जहां सजा 3 वर्ष (पूर्व में 2 वर्ष) तक है, मजिस्ट्रेट लिखित रूप में दर्ज कारणों के अंतर्गत ऐसे मामलों में समरी ट्रायल कर सकता है। सिविल सर्वेन्ट्स के विरुद्ध प्रॉसिक्यूशन चलाने के लिए सहमति या असहमति पर सक्षम अधिकारी 120 दिनों के अंदर निर्णय लेगा, यदि ऐसा न हो, तो यह मान लिया जाएगा कि अनुमति प्रदान हो गई है। सिविल सर्वेन्ट्स, एक्सपर्ट्स, पुलिस अधिकारियों के साक्ष्य उसका प्रभार धारण करने वाला व्यक्ति ऐसे दस्तावेज या रिपोर्ट पर टेस्टीमनी दे सकेगा.
विचाराधीन कैदी – कोई व्यक्ति पहली बार अपराधी है, और एक तिहाई कारवास काट चूका है, तो उसे अदालत द्वारा जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा। जहां विचाराधीन कैदी आधी या एक तिहाई अवधि पूरी कर लेता है, जेल अधीक्षक अदालत को तुरंत लिखित में आवेदन दे। विचाराधीन कैदी को आजीवन कारावास या मौत की सजा में रिहाई उपलब्ध नहीं होगी.
गवाहों की सुरक्षा को लेकर योजना – राज्य सरकार राज्य हेतु एक एविडेंस प्रोटेक्शन स्कीम तैयार करेगी और नोटिफाईड भी की जाएगी । घोषित अपराधियों की संपत्ति की कुर्की – 10 वर्ष अथवा अधिक की सजा अथवा आजीवन कारावास अथवा मृत्युदंड की सजा वाले मामलों में दोषी को घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्डल ऑफेंडर) घोषित किया जा सकता है। घोषित अपराधियों के मामलों में, भारत से बाहर की संपत्ति की कुर्की और जब्ती के लिए एक नया प्रावधान किया गया है।
पहले केवल 19 अपराधों में ही प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित हो सकते थे, अब इसमें 120 अपराधों को दायरे में लाया गया है. जिसमें बलात्कार के अपराध को शामिल किया गया है, जो पहले शामिल नहीं था।
संपत्तियों का निपटान – देश के पुलिस स्टेशनों में बड़ी संख्या में केस संपत्तियां पड़ी रहती हैं। जांच के दौरान, अदालत या मजिस्ट्रेट द्वारा संपत्ति का विवरण तैयार करने और फोटोग्राफ/वीडियोग्राफी के बाद भी ऐसी संपत्तियों के त्वरित निपटान का प्रावधान किया गया है।
फोटो या वीडियोग्राफी – किसी भी जांच, परीक्षण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। फोटो खींचने/वीडियोग्राफी करने के 30 दिनों के भीतर, संपत्ति के निपटान, डिस्ट्रक्शन, जब्ती या वितरण का आदेश देगा।
भारतीय साक्ष्य अधिनियम- प्रमुख परिवर्तन – भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 में दस्तावेजों की परिभाषा का विस्तार करते हुए इसमें इलेक्ट्रानिक या डिजिटल रिकार्ड, ईमेल, सर्वर लॉग्स, कंप्यूटर पर उपलब्ध दस्तावेज, स्मार्टफोन या लैपटॉप के मैसेजेज, वेबसाइट, लोकेशनल साक्ष्य. इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड ‘दस्तावेज’ की परिभाषा में शामिल हैं। वहीं इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त बयान ‘साक्ष्य’ की परिभाषा में शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में मानने के लिए और अधिक मानक जोड़े गए जिसमें इसकी उचित कस्टडी-स्टोरेज-ट्रांसमिशन-ब्रॉडकास्ट पर जोर दिया गया है।
दस्तावेजों की जांच करने के लिए मौखिक और लिखित स्वीकारोक्ति और एक कुशल व्यक्ति के साक्ष्य को शामिल करने के लिए और अधिक प्रकार के माध्यमिक साक्ष्य जोड़े गए जिनकी जांच अदालत द्वारा आसानी से नहीं की जा सकती है। साक्ष्य के रूप में इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड की कानूनी स्वीकार्यता, वैधता और प्रवर्तनीयता स्थापित की गई।

औषधीय गुणों से भरपूर होता है गेंदे का फूल

आमतौर पर लोग फूलों का इस्तेमाल सजावट के लिए करते हैं। लेकिन कई फूल ऐसे भी हैं जो अपने औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं। जिसके बारे में आमतौर पर लोग नहीं जानते. आपको बता दें कि प्राचीन काल में चिकित्सा का विकास नहीं हुआ था। तब इन फूलों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता था। जो लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ. आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि गेंदे की सुगंध बहुत अच्छी होती है और इसका उपयोग कई औषधीय प्रयोजनों में भी किया जाता है जो हमें कई बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।
आयुर्वेदिक चिकित्सा अस्मिता श्रीवास्तव के अनुसार गेंदे के फूल में कई औषधीय गुण होते हैं और इसका उपयोग कई बीमारियों में किया जाता है। गेंदे के फूल में कई औषधीय गुण होते हैं। इसी कारण आयुर्वेद में इसका प्रयोग कई औषधियों में किया जाता है। गेंदे के फूल में विटामिन ए, विटामिन बी, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो विभिन्न बीमारियों से लड़ने में कारगर होते हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से बालों के झड़ने, रूसी, सिर की त्वचा में फंगस, दाद, खाज और खुजली के लिए किया जाता है।
इसे ऐसे इस्तेमाल करें – गेंदे के फूल में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसीलिए इसका प्रयोग कई रोगों में औषधि के रूप में किया जाता है। यह दाद, खाज और खुजली में सबसे ज्यादा असरदार है। इसके लिए कैलमस के फूलों को अच्छी तरह से पीस लें और इसका पेस्ट दाद, खाज और खुजली वाली जगह पर लगाएं। ऐसा करने से आपको इन बीमारियों से राहत मिलेगी. चोट लगने पर खून रोकने के लिए इसके पत्तों के रस का उपयोग किया जाता है।

बनाएं अपने आप को भावनात्मक रूप से मजबूत

जीवन की यात्रा में चुनौतियों का सामना करने और उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए केवल शारीरिक सहनशक्ति से कहीं अधिक की आवश्यकता होती है। भावनात्मक मजबूती हमारी भलाई का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जो हमें प्रतिकूल परिस्थितियों से निपटने, तनाव को मैनेज करने और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने के लिए सशक्त बनाती है।
खुद को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आत्म-जागरूकता, लचीलापन और जानबूझकर अभ्यास शामिल है। आइये जानते हैं खुद को भावनात्मक रूप से मजबूत  कैसे बनाएं-
आत्म जागरुकता विकसित करें – भावनात्मक मजबूत  बनने की नींव आत्म-जागरूकता में निहित है। अपनी भावनाओं को समझना, ट्रिगर्स को पहचानना और अपनी ताकत और कमजोरियों को स्वीकार करना फ्लैक्सिबिलिटी विकसित करने में प्रमुख तत्व हैं। बिना किसी निर्णय के नियमित रूप से अपने विचारों और भावनाओं पर विचार करें और अपने अनुभवों के बारे में स्वयं के प्रति ईमानदार रहें। जर्नलिंग आत्म-प्रतिबिंब के लिए एक शक्तिशाली उपकरण हो सकता है, जो आपकी भावनाओं को व्यक्त करने और उनका विश्लेष करने के लिए स्थान प्रदान करता है। परिवर्तन और अनुकूलन क्षमता को अपनाएं । जीवन स्वाभाविक रूप से गतिशील है और परिवर्तन अपरिहार्य है।
भावनात्मक शक्ति – विकसित करने में नई परिस्थितियों और चुनौतियों के अनुकूल ढलने की क्षमता विकसित करना शामिल है। परिवर्तन का विरोध करने के बजाय इसे विकास के अवसर के रूप में स्वीकार करें। जिस पर आप नियंत्रण कर सकते हैं उस पर ध्यान केंद्रित करें और जिसे आप नियंत्रित नहीं कर सकते उसे छोड़ दें। फ्लैक्सिबल मेंटालिटी अपनाकर, आप जीवन की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए बेहतर ढंग से सुसज्जित होंगे।
लचीलापन रखें – विपरीत परिस्थितियों से पहले से अधिक मजबूत होकर वापसी करने की क्षमता है। इसमें असफलताओं से सीखना शामिल है, न कि उन्हें आपको परिभाषित करने देना। फ्लैक्सिबल बनने के लिए, नकारात्मक विचारों को अधिक सकारात्मक और रचनात्मक विचारों में बदलें। चुनौतियों को व्यक्तिगत विकास के अवसर के रूप में देखें और समस्याओं के बजाय समाधान पर ध्यान केंद्रित करें।
माइंडफुलनेस और मेडिटेशन – शक्तिशाली उपकरण हैं। ये चीजें आपको इस समय उपस्थित रहने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जिससे तनाव और चिंता को कम करने में मदद मिलती है। नियमित ध्यान सत्र विश्राम, विचारों की स्पष्टता और भावनात्मक संतुलन को बढ़ावा देकर भावनात्मक कल्याण को बढ़ा सकते हैं। माइंडफुलनेस आपको अधिक जागरूकता और कम प्रतिक्रियाशीलता के साथ स्थितियों पर प्रतिक्रिया करने में भी सक्षम बनाती है।
स्वस्थ रिश्ते विकसित करें – भावनात्मक मजबूती का निर्माण आपके रिश्तों की गुणवत्ता से गहराई से जुड़ा हुआ है। अपने आप को सकारात्मक और सहायक व्यक्तियों से घेरें जो आपका उत्थान करते हैं और प्रेरित करते हैं। सही कम्युनिकेशन को बढ़ावा दें और विश्वसनीय मित्रों या परिवार के सदस्यों के साथ अपनी भावनाओं को शेयर करने के लिए तैयार रहें। स्वस्थ रिश्ते एक मजबूत सहायता प्रणाली प्रदान करते हैं, जो आपके भावनात्मक कल्याण में योगदान करते हैं।
स्व-देखभाल को प्राथमिकता दें – भावनात्मक मजबूती के लिए अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत का ख्याल रखना जरूरी है। सुनिश्चित करें कि आप पर्याप्त नींद लें, संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें। शारीरिक स्वास्थ्य भावनात्मक भलाई से निकटता से जुड़ा हुआ है और स्व-देखभाल गतिविधियों को प्राथमिकता देने से आपके मूड और फ्लैक्सिबिलिटी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
अनुभव से सीखें – प्रत्येक अनुभव, चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक, विकास का अवसर प्रदान करता है। पिछली गलतियों या असफलताओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, उन्हें मूल्यवान सबक के रूप में देखें। विश्लेषण करें कि आप प्रत्येक अनुभव से क्या सीख सकते हैं और भविष्य में सूचित निर्णय लेने के लिए उस ज्ञान का उपयोग करें। विकास की मानसिकता अपनाने से लचीलापन बढ़ता है और भावनात्मक मजबूती में योगदान मिलता है।
(स्त्रोत – शी द पीपल)

हीरा व्यापारी ने बनाया राम मंदिर थीम पर नेकलेस

जड़े 5 हजार हीरे और 2 किलो चांदी

सूरत । 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन किया गया है। राम मंदिर को लेकर पूरे देश में उत्साह का महौल है। इस दौरान गूजरात के सूरत में रहने वाले एक हीरा व्यापारी ने हीरे और चांदी से राम मंदिर थीम पर एक डिजाइनर नेकलेस बनवाया है।

राम मंदिर की थीम पर बने इस डिजाइनर नेकलेस में हीरों से साथ ही चांदी का इस्तेमाल भी किया गया है। राम मंदिर की थीम पर बनाया गया हीरों से जड़ित यह डिजाइन काफी सुंदर लग रहा है। नेकलेस का वीडियो सामने आया है। आइये वीडियो में देखते हैं इस नेकलेस की खासियत…

5 हजार हीरे और 2 किलो चांदी

सूरत के रहने वाले एक हीरा व्यापारी ने राम मंदिर को लेकर अपनी श्रद्धा प्रकट की है। श्रद्धा प्रकट करते हुए व्यापारी ने हीरों और चांदी से एक डिजाइन बनवाया है। राम मंदिर थीम के इस डिजाइन को बनाने के लिए 5 हजार हीरों और 2 किलो चांदी का इस्तेमाल किया गया है। हीरा व्यापारी ने बताया कि इस डिजाइन को 40 कारीगरों ने मिलकर 35 दिनों में पूरा किया है। इस नेकलेस का एक वीडियो भी सामने आया है।

भगवान राम, लक्ष्मण और सीता की मूर्तियां भी
इस नेकलेस को राम मंदिर की थीम पर बनाया गया है। नकेलेस में भगवान राम के साथ लक्ष्मण और सीता की भी मूर्ति बनवाई गई है। हीरा व्यापारी ने इन तीनों मूर्तियों के साथ ही भगवान हनुमान की मूर्ति भी लगवा दी है। इन चार मूर्तियों के साथ ही राम मंदिर थीम के नेकलेस के आसपास बारहसिंघा की आकृति भी बनाई गई है। अयोध्या में राम मंदिर का काम बीते कई महीनों से जारी है। इस दौरान मंदिर परिसर में तेजी से काम किया जा रहा है। 22 जनवरी को एक भव्य आयोजन किया गया है। इस दिन राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा होने वाली है। जिसे लेकर पूरे देश में उत्साह देखने को मिल रहा है। प्राण प्रतिष्ठा को लेकर तैयारियां भी काफी जोरों पर चल रही हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रेलवे ने स्पेशल व्यवस्थाएं की हुई हैं। प्राण प्रतिष्ठा से पहले अयोध्या के लिए देशभर से ट्रेनें चलाई जाएंगी।