Sunday, July 5, 2026
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बलात्कार आखिर बलात्कार है, चाहे यह पति ने ही क्यों न किया हो: गुजरात उच्च न्यायालय

अहमदाबाद । गुजरात उच्च न्यायालय ने कहा है कि बलात्कार आखिर बलात्कार होता है, भले ही यह किसी पुरुष द्वारा अपनी पत्नी के साथ ही क्यों न किया गया हो। इसने कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ यौन हिंसा पर कायम चुप्पी को तोड़ने की जरूरत है। हाल में में दिए गए एक आदेश में, न्यायमूर्ति दिव्येश जोशी ने कहा कि भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वास्तविक घटनाएं सामने आने वाले आंकड़ों से संभवत: कहीं अधिक हैं। आदेश में कहा गया कि पीछा करने, छेड़छाड़, मौखिक और शारीरिक हमले जैसी कुछ चीजों को समाज में आम तौर पर ‘मामूली’ अपराध के रूप में चित्रित किया जाता है और साथ ही सिनेमा जैसे लोकप्रिय माध्यमों में इसे प्रचारित भी किया जाता है।
इसमें कहा गया कि जहां यौन अपराधों को ‘लड़के तो लड़के ही रहेंगे’ के चश्मे से देखा जाता है और अपराध को नज़रअंदाज़ किया जाता है, उसका ‘पीड़ित लोगों पर एक स्थायी और हानिकारक प्रभाव पड़ता है’। अदालत ने बहू के साथ क्रूरता और आपराधिक धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार एक महिला की नियमित जमानत याचिका खारिज करते हुए ये टिप्पणियां कीं। आरोप है कि महिला के पति और बेटे ने बहू के साथ बलात्कार किया तथा पैसे कमाने के लालच में अश्लील साइट पर पोस्ट करने के लिए निर्वस्त्र अवस्था में उसके वीडियो बनाए।
इसने कहा, ‘ज्यादातर (महिला पर हमला या बलात्कार) मामलों में, सामान्य प्रथा यह है कि यदि पुरुष पति है, लेकिन वह पर पुरुष के समान आचरण करता है, तो उसे छूट दी जाती है। मेरे विचार में, इस चीज को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। एक पुरुष आखिर एक पुरुष है; एक कृत्य आखिर एक कृत्य है; बलात्कार आखिर बलात्कार है, चाहे यह महिला, यानि के ‘पत्नी’ के साथ किसी पुरुष, यानि के ‘पति’ द्वारा किया गया हो।” आदेश में कहा गया कि संविधान महिलाओं को पुरुषों के साथ बराबरी का दर्जा देता और विवाह को समान लोगों का एक गठबंधन मानता है।
अदालत ने कहा, ‘भारत में, अपराधी अकसर महिला को जानते हैं; ऐसे अपराधों को उजागर करने से सामाजिक और आर्थिक दिक्कतों का भय रहता है। परिवार पर सामान्य आर्थिक निर्भरता और सामाजिक बहिष्कार का डर महिलाओं को किसी भी प्रकार की यौन हिंसा, दुर्व्यवहार या घृणित व्यवहार की जानकारी देने से रोकता है।” आदेश में कहा गया कि इसलिए, भारत में महिलाओं के खिलाफ हिंसा की वास्तविक घटनाएं सामने आने वाले आंकड़ों से संभवत: कहीं अधिक हैं।
अदालत ने कहा, ‘इस चुप्पी को तोड़ने की जरूरत है। ऐसा करने में, महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने और उसका मुकाबला करना पुरुषों, शायद महिलाओं से भी अधिक, का कर्तव्य और भूमिका होनी चाहिए।’ इसने कहा कि 50 अमेरिकी राज्यों, तीन ऑस्ट्रेलियाई राज्यों, न्यूजीलैंड, कनाडा, इज़राइल, फ्रांस, स्वीडन, डेनमार्क, नॉर्वे, सोवियत संघ, पोलैंड और चेकोस्लोवाकिया तथा कई अन्य देशों में वैवाहिक बलात्कार अवैध है।
आदेश में कहा गया कि यहां तक ​​कि ब्रिटेन ने भी पतियों को दी जाने वाली छूट को खत्म कर दिया है। पीड़िता के पति, ससुर और सास को राजकोट साइबर अपराध थाने में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर गिरफ्तार किया गया था। इस संबंध में भारतीय दंड संहिता की धाराओं-354 (ए) (अवांछनीय और स्पष्ट यौन उत्पीड़न, यौन संबंध की मांग, महिला की इच्छा के विपरीत अश्लील सामग्री दिखाना), 376 (बलात्कार), 376 (डी) (सामूहिक बलात्कार), 498 (पति या पति के रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता), 506 (आपराधिक धमकी), 508 (किसी व्यक्ति को यह विश्वास कराना कि यदि वह कोई विशेष कार्य नहीं करता है, तो उसे भगवान द्वारा दंडित किया जाएगा) और 509 (यौन उत्पीड़न) के तहत मामला दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, महिला के बेटे ने अपने मोबाइल फोन पर अपनी पत्नी के और अपने (पति-पत्नी) अंतरंग क्षणों के नग्न वीडियो बनाए तथा उन्हें अपने पिता को भेज दिया। इस बारे में लड़के की मां को पूरी जानकारी थी क्योंकि कृत्य उसी की मौजूदगी में किया गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, परिवार को अपने व्यावसायिक साझेदारों द्वारा अपने होटल की बिक्री को रोकने के लिए धन की आवश्यकता थी। जब पीड़िता अकेली थी तो उसके ससुर ने भी उसके साथ छेड़छाड़ की। अदालत ने कहा कि सास को गैरकानूनी और शर्मनाक कृत्य के बारे में पता था और उसने अपने पति तथा बेटे को ऐसा कृत्य करने से न रोककर अपराध में बराबर की भूमिका निभाई।

रसोई से निकला करोड़ों की कमाई का तरीका , 1 साल में कमा दिए 250 करोड़

नयी दिल्ली । आजकल लोग प्राकृतिक आहार  को लेकर काफी जागरूक हो गए हैं. इसी वजह से लोग आजकल ऑर्गेनिक फूड्स भी खूब तलाशते हैं। इसका असर सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में भी देखने को मिल रहा है. इसी बाजार में लाहौरी जीरा ने लोगों को कोक और पेप्सी जैसे ड्रिंक्स का विकल्प देकर सफलता की इबारत लिख दी।
हम आपको यहां लाहौरी ज़ीरा की सफलता की कहानी बताने जा रहे हैं. आखिर कैसे घर की रसोई से निकला टेस्ट लोगों की पसंद बन गया और कंपनी करोड़ों की बन गई। आमतौर बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स में केमिकल्स को मिलाया जाता है लेकिन, केमिकल्स न होना लाहौरी जीरा को लोकप्रिय बनाता है. इसकी मूल सामग्री सेंधा नमक है. लाहौरी जीरा का निर्माण घर पर मिलने वाली चीजों से होता है इसलिए लोग बाजार में उपलब्ध लोकप्रिय ड्रिंक्स की तुलना में इसे पीना पसंद करते हैं. क्योंकि, ये एक सेहतमंद विकल्प भी है।
कैसे हुई लाहौरी ज़ीरा की शुरुआत?
लाहौरी ज़ीरा की शुरुआत ऐसे हुई जिसे सुनकर शायद आप यकीन न करें. तीन  भाई घर की रसोई में गए और तैयार हो गया लाहौरी ज़ीरा फॉर्मूला। सौरभ मुंजाल ने अपने दो भाइयों सौरभ भूतना और निखिल डोडा के साथ मिलकर लाहौरी ज़ीरा ड्रिंक की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सौरभ मुंजाल के भाई निखिल डोडा और उनके परिवार को खाना बनाने में काफी दिलचस्पी है। निखिल हमेशा घर में मौजूद चीज़ों से ड्रिंक्स बनाते रहते हैं और उनके साथ प्रयोग करना भी पसंद करते हैं। ऐसे ही एक बार निखिल ने सौरभ मुंजाल और सौरभ भूताना को ज़ीरा ड्रिंक पिलाया। इसके बाद तीनों भाइयों ने मिलकर इस ड्रिंक को बाजार में उतारने की योजना बनायी और इसकी शुरुआत हुई। इस उत्पाद को बनाने वाली कंपनी आर्चियन फूड्स की स्थापना 2017 में की गई थी. ये कंपनी लाहौरी ज़ीरा के अलावा लाहौरी नींबू, लाहौरू कच्चा आम, लाहौरी शिकंजी भी बनाती है।
कंपनी के सीईओ सौरभ मुंजाल ने कहा कि उनकी कंपनी के उत्पाद भारतीय रसोई और स्ट्रीट फूड्स से निकले हुए हैं। इसलिए कंपनी के ड्रिंक्स के नाम भी पारंपरिक रखे गए हैं। प्रोडक्ट्स का मेन इंग्रेडिएंट भी रॉक सॉल्ट या लाहौरी ही है। आपको बता दें लाहौरी ज़ीरा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में काफ़ी पसंद किया जाता है।
लाहौरी ज़ीरा को पंजाब के रूपनगर में बनाया जाता है। शुरुआत में कंपनी एक दिन में 96,000 बोतलें तैयार करती थी। बाद में 2022 तक ये आंकड़ा बढ़कर 12,00,000 तक पहुंच गया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब कंपनी रोज़ाना 20,00,000 बोतलें तैयार करती है। जहां तक टर्नओवर की बात करें तो वित्त वर्ष 21 में कंपनी का टर्नओवर 80 करोड़ था. वहीं, वित्त वर्ष 22 में ये बढ़कर 250 करोड़ हो गया था ।

सृजन सारथी सम्मान -2023 से सम्मानित किये गये डॉ. एस. आनंद

कोलकाता । शुभ सृजन नेटवर्क एवं राजस्थान सूचना केंद्र, कोलकाता द्वारा आयोजित शुभ सृजन सारथी -2023 सम्मान समारोह एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में पत्रकारिता एवं साहित्य के क्षेत्र में गत 50 वर्षों से सक्रिय डॉ. एस. आनंद को सृजन सारथी सम्मान से सम्मानित किया गया। उनको स्मृति चिह्न राजस्थान सूचना केन्द्र के सहायक निदेशक हिंगलाज दान रतनू  ने प्रदान किया। वहीं शॉल कार्यक्रम अध्यक्ष दैनिक सूत्रकार के सम्पादक अशोक पांडेय एवं प्रधान अतिथि एवं भारतमित्र हिन्दी दैनिक के कार्यकारी सम्पादक वासुदेव ओझा ने पहनाय़ी। अभिनंदन पत्र दैनिक वर्तमान के प्रभारी लोकनाथ तिवारी एवं सलाम दुनिया के सम्पादक सन्तोष कुमार सिंह ने प्रदान की। अभिनंदन पत्र का पाठ डॉ. जयप्रकाश मिश्र ने किया। अपने वक्तव्य में डॉ. एस. आनंद ने हिन्दीभाषा समाज की साहित्य के प्रति उदासीनता और अपनी सृजन यात्रा पर चर्चा की।

इस अवसर पर कोरोना काल, इंटरनेट एवं हिन्दी के पत्रकार विषय पर एक परिचर्चा भी आयोजित की गयी। परिचर्चा में अध्यक्षीय वक्तव्य रखते हुए दैनिक सूत्रकार के सम्पादक अशोक पांडेय ने कहा कि आज इंटरनेट पर सूचनाएं साझा की जा रही हैं, उसे खबर का दर्जा मिल सके इसलिए इंटरनेट पर प्रसारित होने वाली खबरों को लेकर भी प्रिंट मीडिया की तरह कानून बनना चाहिए। इस दिशा में सरकारों को काम करना होगा। भाषा, शैली और खबर पर पकड़ होनी चाहिए। इंटरनेट की पत्रकारिता पर भी अंकुश लगना चाहिए। सलाम दुनिया के सम्पादक सन्तोष कुमार सिंह ने हिन्दी पत्रकारों की चुनौतियों पर चर्चा की और कार्यस्थल के वातावरण को बेहतर बनाने पर जोर दिया। वर्तमान हिन्दी पत्रिका के प्रभारी लोकनाथ तिवारी ने इंटरनेट पर फैल रही फर्जी खबरों पर चिंता जतायी।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ पीहू पापिया ने कोरोनाकाल के सकारात्मक प्रभावों की चर्चा की। कोलकाता हिन्दी न्यूज ने कोरोनाकाल के दौरान पत्रकारों की चुनौतियों पर चर्चा की और अखबारों को विश्वसनीय माध्यम बताया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण राजस्थान सूचना केन्द्र के सहायक निदेशक हिंगलाज दान रतनू ने दिया। कार्यक्रम का संचालन विवेक तिवारी ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन शुभ सृजन नेटवर्क के संरक्षक श्रीमोहन तिवारी ने दिया। कार्यक्रम पर बात रखते हुए शुभ सृजन नेटवर्क की प्रमुख सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया ने कहा कि डॉ. एस. आनंद जैसे दिग्गज को सम्मानित करना अपना सम्मान करना है जो साहित्य और पत्रकारिता के महत्वपूर्ण सेतु हैं। हिन्दी के पत्रकारों की अपनी बहुत चुनौतियां रहती हैं और कोरोना काल ने पत्रकारिता और पत्रकारों को प्रभावित किया। यह परिचर्चा एक आवश्यक बातचीत का माध्यम रही।

हर दिल के चहेते थे अटल जी

वरिष्ठ पत्रकार सीताराम अग्रवाल की कलम से
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी का आज (25 दिसम्बर  2022 ) जन्मदिन है। भले ही आज वे सशरीर हमारे बीच मौजूद नहीं हैं, पर उनका व्यक्तित्व व कृतित्व सदैव हमे देदीप्यमान करता रहेगा। इसमें कोई दो राय नहीं कि सिर्फ भारत में ही नहीं विदेशों में भी वे काफी लोकप्रिय हैं। हर पार्टी  के नेता उनका सम्मान करते थे। एक बार कांग्रेस ने कहा था- वाजपेयी जी बहुत अच्छे नेता हैं, पर गलत पार्टी के साथ हैं। वे हर व्यक्ति के दिल में निवास करते थे और आज भी लोग उन्हें बड़ी श्रद्धा के साथ याद करते है। वे वास्तविक अर्थ में जननेता थे। पत्रकार से राजनेता बने भावुक ह्रदय कवि अटल जी के बारे में मैं नीचे एक बहुत पुराना संस्मरण दे रहा हूं, जो उनके महान व्यक्तित्व व सदाशयता की एक झलक है।
संस्मरण-
करीब 58 वर्ष पहले की बात है। तिथि मुझे ठीक से याद नहीं। मैं वाजपेयी जी के भाषणों की भाषा-शैली का कायल था। राजनीतिक समझ उतनी नहीं थी। उनका एक कार्यक्रम सेन्ट्रल एवेन्यू स्थित महाजाति सदन सभागार में धा। जब एक मित्र (उस समय वे जनसंघ के समर्थक थे ) ने मुझसे कार्यक्रम में चलने का आग्रह किया तो मैं तत्काल तैयार हो गया। पास ही में खड़े एक और मित्र ( वे कांग्रेस समर्थक थे ) ने भी जाने की उत्सुकता दिखाई। उनके पास गाड़ी भी थी। बस हम लोग कमरहट्टी (कोलकाता-58) स्थित अपने-अपने घरों से रवाना हो गए। इस बीच और एक मित्र साथ हो लिए। हम चारों करीब 11 किलोमीटर का फासला तय कर महाजाति सदन पहुंचे। हम चारों किशोरों ने रास्ते में ही तय कर लिया था कि कार्यक्रम के बाद यदि स॔भव हुआ तो वाजपेयी जी से मिला जायगा।
कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद हम बाहर उनके निकलने का इंतजार करते रहे। उन दिनों सुरक्षा का कोई खास ताम-झाम नहीं था। हमने अपनी कार उनकी गाड़ी के थोड़ा पीछे लगा दी। हालांकि श्री वाजपेयी जी महाजाति सदन के सामने ही श्री घनश्याम बेरीवाल के मकान में ही रुके थे। पर उस समय हमें इस बारे मे कोई जानकारी नहीं थी। ट्रैफिक के कारण हमारी कार थोड़ी पीछे रह गयी। खैर थोड़ी खोज-बीन के बाद हम श्री बेरीवाल जी के मकान के सामने पहुंचे। हमने अंदाजा लगाया कि वाजपेयी जी इसी मकान में ही रुके हैं। थोड़ी सी झिझक के बाद हम लोगों ने मकान में प्रवेश किया। दोपहर का समय था। आश्चर्य की बात धी कि कहीं कोई नहीं मिला, जिससे हम पूछते। पर वाजपेयी जी से मिलने के अपने इरादे पर हम अडिग थे। हिम्मत करके दूसरा तल्ला (फर्स्ट फ्लोर) पार कर तीसरे तल्ले पर पहुंचे। अभी हम लोग चौथे तल्ले पर जाने की सोच ही रहे थे कि ऊपर से एक सज्जन उतरते नजर आये। उन्होंने पूछा-कहां जायेंगे। एक मित्र ने कहा-वाजपेयी जी से मिलने। उन्होंने कहा- नही मिल सकते। अभी वे आराम कर रहे हैं। थोड़ी देर तक अनुनय-विनय होती रही। कहा गया- हम लोग बड़ी दूर से आये हैं। उन्हें परेशान नहीं करेंगे। सिर्फ़ दूर से देख कर चले जायेंगे। पर उनके  कानों पर जूं तक नहीं  रेंगी। लम्बे तथा अच्छी कद-काठी वाले ये सज्जन  किसी भी तरह हमें जाने नहीं दे रहे थे। अब तक मैं चुपचाप था। वैसे भी चारों में मैं सबसे छोटा था। जब मैंने देखा कि अब हमें वापस जाना ही होगा, तो एक आखिरी कोशिश की। भाषण देने की आदत स्कूल में वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के दौरान बन चुकी थी। मैंने ऊंची आवाज में कहना शुरू किया- आप जैसे लोग ही अनावश्यक रूप से लोकप्रिय नेताओं व जनता के बीच दीवार बन कर खड़े हो जाते हैं। इससे न सिर्फ नेता की छवि  खराब होती है, बल्कि पार्टी भी कमज़ोर होती है। और न जाने क्या-क्या। इस बीच ऊपर से आवाज आती है-इन बालकों को ऊपर आने दो। मैंने पीछे घूम कर देखा तो स्वयं वाजपेयी जी चौथे तल्ले के बरामदे में रेलिंग पर झुके हुए बोल रहे थे। और वे मेरी ओर ही देख रहे थे। शायद वे बहुत देर से हमारी बातें सुन रहे थे। मैं तो खुशी के मारे ऐसा उछला,  मानो कारू का खजाना मिल गया हो। सभी का एक ही हाल था।  अब उस सज्जन को हमें पहुंचाने के सिवा चारा नहीं  था। इसके बाद वाजपेयी जी ने पिता जैसा स्नेह देते हुए हमारा परिचय पूछा। प्यार भरी बातें की। बातों का सिलसिला चलता ही रहा। इस बीच एक डाक्टर साहब आये और उन्हें समय का ध्यान दिलाते हुए दवा  लेने का आग्रह किया। वाजपेयी जी ने एक तरह से झिड़कते हुये कहा-तुम्हे दवा की पड़ी है।  देखो ये बच्चे कितनी दूर से मुझसे मिलने आये है। वे बेचारे चले गये। कहां तो हम सिर्फ दो- तीन मिनट के लिए मिलने आये थे, वहां करीब आधा घंटा हो चला था। पता नहीं ये सिलसिला और कितनी देर चलता, पर कई बुलावा आने के बाद इच्छा न रहते हुए भी मैं उठ खड़ा हुआ और चरण स्पर्श करते हुए जाने की आज्ञा मांगी। और हम सभी चल पड़े। मुझे ऐसा आभास हो रहा था कि वे अभी और बतरस के मूड में थे। शायद राजनीतिक बातों से इतर हम लोगों के साथ वार्तालाप उन्हें आनन्दित कर रहा था। ऐसे हैं कवि  ह्रदय हमारे-आपके सबके वाजपेयी जी। वैसे बाद में पत्रकार के रूप में  मैंने उनकी अनगिनत सभाएं, कार्यक्रम वगैरह कवर किये हैं। प्रेस क्लब,कोलकाता में प्रधानमंत्री के रूप में उनकी प्रेस कांफ्रेंस भी कवर की है। ये सब स॔स्मरण फिर कभी।
 पुन: सादर नमन –
कोलकाता 25 दिसम्बर 2023

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पं. विजयशंकर मेहता “डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान’ से समादृत

डॉ. हेडगेवार का स्वप्न था श्रेष्ठ एवं संगठित भारत : रामदत्त चक्रधर
कोलकाता । “आत्म विस्मृत हिन्दू समाज को आत्मबोध कराना एवं राष्ट्रीयता के भाव से संगठन का निर्माण करना डॉ. हेडगेवार की सबसे बड़ी देन है। भारत शक्तिशाली बनेगा तभी विश्व का भला होगा एवं यह तभी हो सकता है जब हिन्दू संगठित होगा। डॉ. हेडगेवार का स्वप्न था श्रेष्ठ. संगठित एवं आत्म निर्भर भारत का निर्माण। उनके द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में समाज को जागृत करने की असीम शक्ति है।’ – ये उद्गार हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह श्री रामदत्त चक्रधर के, जो श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा स्थानीय जी. डी. बिड़ला सभागार में आज 17 दिसम्बर को आयोजित 34वें डॉ. हेडगेवार प्रज्ञा सम्मान 2023 के समारोह में जीवन प्रबंधन गुरु पंडित विजयशंकर मेहता को सम्मानित करने के उपरांत बतौर प्रधान वक्ता बोल रहे थे। पंडित विजयशंकर मेहता को सम्मान स्वरूप 1 लाख रुपये का चेक एवं मानपत्र प्रदान किया गया।
श्री चक्रधर ने कहा कि बुद्धि, मेधा एवं ज्ञान से ऊपर है प्रज्ञा। इस दृष्टि से प्रज्ञा सम्मान के लिए पंडित मेहता का चयन सर्वथा श्रेयस्कर है। उन्होंने डॉ. हेडगेवार का जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि श्रेष्ठ विरासत के जीवन मूल्यों को स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है। श्री चक्रधर ने बताया कि परिवार व्यवस्था, सामाजिक समरसता, पर्यावरणपूरक जीवन, स्वदेशी की व्याप्ति तथा नागरिक शिष्टाचार आदि पांच मंत्र भारत को समृद्ध बनाने में सहायक होंगे।
सम्मान से समादृत होने के उपरांत पंडित विजयशंकर मेहता ने पुस्तकालय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत को “राष्ट्रीयता’ शब्द का उपहार डॉ. हेडगेवार की सबसे बड़ी देन है। उन्होंने समाज में व्याप्त चार विसंगतियों यथा राष्ट्र के प्रति भ्रष्टाचार, समाज के प्रति अपराध, व्यवस्था के प्रति निक्कमापन एवं परिवार के प्रति उदासिनता को वर्तमान समस्याओं का मूल बताया। नुमान जी के जीवन प्रसंगों के साथ संघ के क्रियाकलापों की समानता का जिक्र करते हुए उन्होंने समाज में चेतना और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधान अतिथि एवं उद्योगपति श्री सजन कुमार बंसल ने कहा कि संघ के विचारों से प्रेरित होकर ही हमने कोलकाता पिंजरापोल सोसाइटी, वननवंधु परिषद जैसी अनेक संस्थाओं का सफलतापूर्वक संचालन कर पा रहे हैं।
आचार्य श्री राकेश कुमार पाण्डेय ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. हेडगेवार के स्वतंत्रता प्राप्ति के उपरांत भारत की दशा एवं दिशा चिंतन को रेखांकित करते हुए कहा कि हिन्दुत्व ही राष्ट्र की मूल आत्मा है। उन्होंने हनुमान जी को निर्भिकता एवं सदैव प्रयासरत रहने का प्रेरणारुाोत बताया।
पुस्तकालय के अध्यक्ष श्री महावीर बजाज ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि डॉ. हेडगेवार व्यक्ति नहीं, एक विचार है। कार्यक्रम का कुशल संचालन किया डॉ. तारा दूगड़ ने तथा धन्यवाद ज्ञापन किया कुमारसभा के उपाध्यक्ष श्री भागीरथ चांडक ने। प्रारंभ में श्री शिबेन्द्र त्रिपाठी ने “राष्ट्र मंत्रे जागाइलो देश…’ बांग्ला गीत की प्रस्तुति की। सर्वश्री  महावीर प्रसाद रावत, नन्दकुमार लढ़ा, अरुण प्रकाश मल्लावत, अजेन्द्रनाथ त्रिवेदी, अजय चौबे, मोहनलाल पारीक, सत्यप्रकाश राय, संजय मंडल एवं राजेश अग्रवाल “लाला’ ने अतिथियों का माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया। श्री योगेशराज उपाध्याय के वैदिक मंत्रों के साथ पंडित विजयशंकर मेहता का मंत्री श्री बंशीधर शर्मा ने माला, आचार्य राकेश पाण्डेय ने शॉल, श्री सजन बंसल ने श्रीफल एवं श्री रामदत्त चक्रधर ने मानपत्र एवं चेक देकर सम्मान किया। मंच पर संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री गुरुशरण जी एवं श्री बंशीधर शर्मा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में आचार्य राकेश पाण्डेय द्वारा रचित कालगणना की लघु पुस्तिका का पंडित मेहता जी के हाथों विमोचन भी किया गया।
समारोह में सर्वश्री जयंतराय चौधरी, प्रशांत भट्ट, ब्राहृानंद बंग, राधेश्याम बजाज, तेजबहादुर सिंह, महावीर प्रसाद मनकसिया, वास्तुमित्र शिवनारायण मूंधड़ा, गोविन्द सारडा, बुलाकीदास मीमानी, दयाशंकर मिश्र, डॉ. बिन्दे•ारी प्रसाद सिंह, श्रीराम सोनी, राधेश्याम सोनी, चंपालाल पारीक, राजेन्द्र कानूनगो, दुर्गा व्यास, सुदेश अग्रवाल, स्नेहलता बैद, अजय शाह, शंकरलाल अग्रवाल, महेश मोदी, प्रदीप तुल्स्यान, रजत चतुर्वेदी, सीताराम तिवारी, किसनगोपाल सूंठवाल, गंगासागर प्रजापति, ऋषिराज गर्ग, बसंत सेठिया, कमल कुमार गुप्ता, गुरुदत्त शर्मा, बालकिसन आसोपा, नरेश दारुका, संदीप तुल्स्यान, सूर्यकांत अग्रवाल, शशी नारसरिया, नन्दलाल सिंघानिया, डॉ. श्रीबल्लभ नागौरी, घनश्याम सुगला, राजकमल बांगड, जसवंत सिंह, सुरेन्द्र प्रसाद पटवारी, महेन्द्र दूगड़, डॉ. प्रभात सिंह, रविप्रताप सिंह, रामचंद्र अग्रवाल, रामगोपाल सूंघा, मनोज पराशर, सागरमल गुप्त, अरुण सोनी, महेश केड़िया, संजय रस्तोगी, शैलेश बागड़ी प्रभृति कोलकाता एवं हावड़ा के सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
समारोह को सफल बनाने में सर्वश्री मनोज काकड़ा, भागीरथ सारस्वत, गुड्डन सिंह, श्रीमोहन तिवारी, रमाकांत सिन्हा, रोशन शर्मा, नीतिश सिंह, गायत्री बजाज एवं अरुण सिंह प्रभृति सक्रिय थे।

भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज में मनाया गया 75वां एनसीसी दिवस समारोह

कोलकाता । एक एनसीसी कैडेट के चरित्र के स्तंभ अनुशासन, समर्पण और कर्तव्य होते हैं । भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज एनसीसी के तीनों अंग थल सेना, नौसेना और वायु सेना से संबद्ध हैं। कॉलेज के एन सी सी कलेक्टिव ने गत 5 दिसंबर, 2023 को 75वें एनसीसी दिवस का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कमांडिंग ऑफिसर 31 बंगाल बीएन एनसीसी, कर्नल रोहित शर्मा, कमांडिंग ऑफिसर नंबर 1 बंगाल एयर स्क्वाड्रन एनसीसी, विंग कमांडर एस. सेल्वा कुमार वीएम, कमांडिंग ऑफिसर नंबर 2 बंगाल नेवल यूनिट एनसीसी, लेफ्टिनेंट कमांडर नज़ीर ए अजीज उपस्थित थे। कॉलेज से एनसीसी अधिकारी लेफ्टिनेंट आदित्य राज, अरित्रिका दुबे, अभिषेक कुमार सिंह के साथ-साथ बीईएससी से जुड़ी सभी तीन इकाइयों के रक्षा कर्मचारी इस कार्यक्रम में विशेष अतिथि थे।
राष्ट्रीय कैडेट कोर भारतीय सशस्त्र बलों की युवा शाखा है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली, भारत में है। यह संगठन रक्षा मंत्रालय के तहत 16 जुलाई, 1948 को बुनियादी सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया था जो कामरेडशिप, साहस, अनुशासन, ईमानदारी और सबसे ऊपर, देशभक्ति की भावना पैदा करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत रेक्टर और छात्र मामलों के डीन, प्रो दिलीप शाह के उद्घाटन भाषण से हुआ। दिलीप शाह ने हमारे कैडेटों की उपलब्धियों के विषय में बाताया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम आरम्भ हुआ। बीईएससी एनसीसी गतिविधियों का एक परिचयात्मक वीडियो था जिसमें – सीओवीआईडी ​​​​-19 प्रकोप के दौरान रीच आउट प्रोजेक्ट, स्वच्छ भारत, प्रोजेक्ट कर्तव्य और कई अन्य परियोजनाएं और अभियान शामिल थे, इसमें कॉलेज में एनसीसी की संबद्धता के बाद से हमारे एनसीसी सीडीटीएस की उपलब्धियां भी शामिल थीं।
एनसीसी दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर हमने सीओ 31 बंगाल और सीओ 2 नेवल एनसीसी का भी स्वागत किया क्योंकि वे हाल ही में बंगाल में तैनात हुए हैं और पहली बार कॉलेज में आए । कर्नल रोहित शर्मा ने कैडट को संबोधित करते हुए अपना वक्तव्य रखते हुए एक एनसीसी कैडेट के जीवन के बारे में बताया कि वह स्वयं एक एनसीसी सीडीटी थे। वह स्वयं इस बात का प्रतीक हैं कि कैसे एक कैडेट भी हमारे देश का भविष्य बन सकता है। भवानीपुर कॉलेज के कैडेटों ने “अनेकता में एकता” थीम पर शानदार नृत्य प्रदर्शन किया। इससे हम सभी एनसीसी शिविरों में राष्ट्रीय एकता की एक मजबूत भावना विकसित होती है।
कैडेटों को प्रोत्साहित करने के लिए मंच पर विंग कमांडर एस. सेल्वा कुमार (वीएम)ने अपने वक्तव्य से प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति के जीवन को नियंत्रित करने वाले चार स्तंभ हैं: आत्म-अनुशासन, योग्यता, कड़ी मेहनत और आशा। यदि जीवन एक कार है, तो कार के ये चार पहिए हैं, और इनमें से किसी एक गुण की कमी कार को असंतुलित बना देती है।’ कर्नल रोहित शर्मा की तरह, सेल्वा सर भी एक एनसीसी कैडेट थे और उन्होंने एनसीसी विशेष प्रवेश योजनाओं के बारे में भी बात की, जिसमें 03 साल का एनसीसी कोर्स पूरा करने वाले और अल्फा या ब्रावो ग्रेडिंग के साथ सी सर्टिफिकेट रखने वाले को एसएसबी के लिए उपस्थित होने की अनुमति है। उन्होंने सीधे साक्षात्कार का भी उल्लेख किया। वह एनसीसी विशेष प्रवेश योजना के माध्यम से भारतीय वायु सेना – उड़ान शाखा में शामिल हुए थे।उनके शब्द वास्तव में प्रेरक थे और कैडेटों ने सशस्त्र बलों की विभिन्न प्रविष्टियों के बारे में और अधिक जानने में रुचि दिखाई और बताया कि एनसीसी प्रमाणपत्र इसके लिए कैसे उपयोगी हो सकते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम को कॉर्पोरल प्रिंस मिश्रा ने “एनसीसी – ए हीरो इन मेकिंग” पर एक स्व-रचित कविता की प्रस्तुति दी । बीईएससी कैडेटों द्वारा एक समूह गीत प्रस्तुत किया गया। सुखदायक धुन के बाद, हमने लेफ्टिनेंट कमांडर नासिर ए अजीज को आमंत्रित किया जिन्होंने अपने भाषण में इस सच्चाई को उजागर किया कि ‘एक अधिकारी का जीवन पैसे के बजाय सम्मान का चुनाव है’। उन्होंने समय के मूल्य पर भी बात की और समय के साथ हमारी बेहतरी को सर्वोत्तम कार्यों में कैसे बदला जा सकता है। उन्होंने एक नाविक और एक अधिकारी के रूप में भारतीय नौसेना में अपने अनुभव को भी साझा किया। उनके उत्साहवर्धक शब्दों के बाद, हमारे कैडेटों ने अपनी ऊर्जा दिखाने के लिए बैकफ्लिप और सोमरसॉल्ट के साथ जोश-प्रकार के प्रदर्शन किए जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। इसके बाद सम्मान समारोह आयोजित किया गया। जिन कैडेटों ने अखिल भारतीय वायु सैनिक शिविर – बेंगलुरु, अखिल भारतीय नौ सैनिक शिविर – आईएनएस शिवाजी, लोनावला, महाराष्ट्र, नौकायन अभियान – कोलकाता से फरक्का और वापसी के अलावा कई अन्य शिविरों और प्रतियोगिताओं में भाग लिया, उन सभी को रेक्टर और डीन प्रो दिलीप शाह ने द्वारा सम्मानित किया गया। कमांडिंग ऑफिसर और हमारे एनसीसी अधिकारियों ने केक काट कर और एनसीसी गीत गाकर जश्न मनाया। एनसीसी एयर विंग अधिकारीअरित्रिका दुबे ने इस कार्यक्रम के विषय में बताया। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

भवानीपुर एजूकेशन सोसाइटी कॉलेज के विद्यार्थियों में मास्टरक्लास

इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट कोलकाता के साथ हुआ आयोजन
गोबिंदा रॉय और रितुपर्णा बसु ने दिया प्रशिक्षण
कोलकाता । भवानीपुर एजुकेशन सोसाइटी कॉलेज ने आईएमआई (इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट) कोलकाता के सहयोग से आईएमआई के दो प्रसिद्ध वक्ताओं के साथ दो मास्टरक्लास का आयोजन किया। प्रतिभाशाली युवा दिमागों को विश्व स्तरीय प्रबंधन तक पहुंच प्राप्त करने में सक्षम बनाने के लिए 2010 में आरपी-संजीव गोयनका द्वारा स्थापित और स्थापित, आईएमआई युवा दिमागों को प्रबंधन की दुनिया के लिए तैयार करने में सहायक रहा है। यह कार्यक्रम24 नवंबर 2023 को, प्लेसमेंट हॉल में आयोजित यह कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे दिन के प्रथम विषय ‘रणनीतिक व्यवधान: डिजिटल युग में व्यापार परिवर्तन को नेविगेट करना ‘के साथ शुरू हुआ, जिसे अतिथि व्याख्याता आईएमआई कोलकाता में प्रोफेसर और सोशल मीडिया और ब्रांडिंग वेबसाइट के अध्यक्ष डॉ गोबिंदा राय ने दिया । उनके साथ प्रवेश विभाग की प्रमुख कराबी और आईएमआई के सहायक प्रवेश प्रमुख इंद्रनील भी थे। पहला एक घंटे का सत्र विचित्र प्रश्नोत्तरी दौरों से भरा था जहां हर सही उत्तर को चॉकलेट से पुरस्कृत किया गया । सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार की वायरल सामग्री और आज की सबसे चर्चित तकनीक चैट जीपीटी पर भी चर्चा हुई।
द्वितीय विषय ‘विपणन, ग्राहक संबंध प्रबंधन और ब्रांड प्रबंधन पर आज की अंतर्दृष्टि’ की अतिथि व्याख्याता डॉ ऋतुपर्णा बसु, आईएमआई कोलकाता में फैकल्टी और मार्केटिंग में एरिया चेयर रहीं । यह वक्तव्य दोपहर 12.30 बजे से शुरू हुआ । व्याख्यान में कई ब्रांडों की विभिन्न मार्केटिंग रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया और एक मजेदार रिकॉल गेम के साथ समाप्त हुआ। मास्टरक्लास में भाग लेने के लिए 50 से अधिक उपस्थित लोगों को ई-प्रमाणपत्र प्राप्त हुए, कार्यक्रम का समापन बी.कॉम (मॉर्निंग) समन्वयक प्रोफेसर मीनाक्षी चतुर्वेदी द्वारा अतिथियों के अभिनंदन के साथ हुआ। रिपोर्टर सृष्टि झुनझुनवाला और फ़ोटोग्राफ़र पापन दास और अग्रग घोष रहे। कार्यक्रम की जानकारी दी डॉ वसुंधरा मिश्र ने ।

नेफ्रोकेयर इंडिया का ‘ए वॉक फॉर योर किडनी’ अभियान

कोलकाता । नेफ्रोकेयर कीऔर से ‘ए वॉक फॉर योर किडनी’ नामक वॉकथॉन का आयोजन किया गया। एक ऐसा वॉकथॉन, जिसमें लगभग 400 प्रतिभागियों के साथ-साथ मशहूर हस्तियां इसमें शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने इस स्वस्थ अभ्यास के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अपने कदम से कदम मिलाया। यह वॉकथॉन नेफ्रोकेयर से शुरू होकर होटल गोल्डन ट्यूलिप पर खत्म हुई। इस कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित हस्तियों ने भाग लिया। जिसमे नेफ्रो केयर के संस्थापक और निदेशक डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता, नंदिता रॉय (फिल्म निर्माता), शिवप्रसाद मुखर्जी (निदेशक), देबाशीष दत्ता (सचिव मोहन बागान क्लब), गोल्डन ट्यूलिप होटल के निदेशक आशीष मित्तल के अलावा कई अन्य प्रतिष्ठित हस्तियां इसमें शामिल हुए। नेफ्रो केयर के संस्थापक और निदेशक, नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता ने कहा कि हमारा दृढ़ विश्वास है कि प्रतिदिन 30 मिनट की तेज सैर हमारी कई स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कर सकती है। नेफ्रोकेयर इंडिया की इस दूसरी वर्षगांठ पर हम देश भर में अपनी उपस्थिति का विस्तार करके और आने वाले वर्षों में करीब दस लाख लोगों तक पहुंचने के लिए 300 व्यापक और समग्र किडनी देखभाल इकाइयों की स्थापना करके किडनी को स्वास्थ्य और सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को उजागर करना चाहते हैं। “नेफ्रो केयर इंडिया में हम बीमारी के इन सभी पहलुओं का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण करते हैं और रोगी को समग्र चिकित्सा देखभाल प्रदान करते हैं। एडवांस्ड रीनल केयर इंस्टीट्यूट, जिसकी स्थापना प्रसिद्ध नेफ्रोलॉजिस्ट और अवार्डी, डॉ. प्रतीम सेनगुप्ता ने की थी। स्वास्थ्य किडनी की देखभाल पर ध्यान देने की आवश्यकता और इससे जुड़ी विसंगतियों का शीघ्र पता लगाने के लिए नियमित परीक्षण करने का महत्व और किडनी से संबंधित किसी भी समस्या के समाधान के लिए समग्र उपचार करने का के बारे में लोगों को जागरूक किया गया।

पत्नी को सांस की हुई तकलीफ तो पति ने लगा दिए 500 पौधे

 अब ‘ऑक्सीजन मैन’ बुलाते हैं लोग
पटना । राजधानी पटना से करीब 20 किलोमीटर दूर पुनपुन स्टेशन से अकौना गांव की दूरी करीब तीन से चार किलोमीटर है. यहां के रहने वाले 70 साल के अशोक सिंह उर्फ बंगाली बाबा अपनी पत्नी को स्वस्थ्य रखने के लिए पिछले 13 साल से पौधे लगा रहे हैं। ये सभी पौधे अब पेड़ में तब्दील हो गए हैं. इस इलाके में बंगाली बाबा की तरफ से लगाए गए पेड़ों की संख्या 500 तक पहुंच चुकी है.बंगाली बाबा का कहना है कि जब से उन्होंने ने पेड़ लगाना शुरू किया है. उसके बाद से उनकी पत्नी मनोरमा देवी को सांस लेने के दौरान आने वाली दिक्कत पूरी तरह से ठीक हो चुकी है. साथ ही गांव में पेड़ पौधों की संख्या भी काफी बढ़ गई है. दो दशक पहले पेड़ लगाने के लिए अपने को समर्पित करने वाले बंगाली बाबा आज भी अनवरत नेक कार्य में लगे हुए हैं.
बंगाली बाबा के चलते पूरा गांव ले रहा शुद्ध ऑक्सीजन – किसान तक के मुताबिक मौसम बदलते रहते हैं, लेकिन अशोक सिंह के द्वारा पेड़ लगाने का काम खत्म नहीं हुआ है. वे आज भी सुबह और शाम पेड़ों की देख भाल करते हैं. लोगों को अधिक से अधिक ऑक्सीजन मिले. इसके लिए वे पाकड़, पीपल, बरगद, बेल, कदम व जामुन के पेड़ लगाते हैं. आज इनकी बदौलत पूरा गांव शुद्ध ऑक्सीजन ले रहा है।
पेड़ों की संख्या बढ़ाने से सही हुई मनोरमा देवी की तबीयत – बंगाली बाबा बताते हुए कहा कि साल 2011 में उनकी पत्नी मनोरमा देवी की तबीयत खराब हो गई. गांव में पेड़ों की संख्या बढ़नी शुरू हुई, वैसे- वैसे उनकी पत्नी की सांस से जुड़ी बीमारी खत्म होती चली गई। आगे बंगाली बाबा कहते हैं कि वह बरसात के समय हर साल करीब पचास आस-पास के लोग करते हैं मदद – अकौना गांव के बंगाली बाबा कहते हैं कि पेड़ लगाने का काम तो अकेले शुरू किया था लेकिन आज इस बूढ़े हाथ के साथ मेरा गांव खड़ा है. वहीं पुनपुन बाजार के कई ऐसे लोग हैं जो पेड़ लगवाने के साथ कई तरह से मदद भी करते हैं। वहीं उन लोगों के द्वारा ही बंगाली बाबा के नाम से टी-शर्ट भी दिया गया है, जिससे लोगों को उन्हें पहचाने में दिक्कत नहीं हो सके। वहीं वे बंगाली बाबा के नाम को लेकर बताते है कि आज से 25 साल पहले लोग मुझे अशोक सिंह के नाम से ही जानते थे. लेकिन जब जीविकोपार्जन के लिए बंगाल गया और वहां से आया तो लोगों ने प्यार से बंगाली बाबा कहना शुरू कर दिया। उसके बाद से बंगाली बाबा के नाम से मशहूर हो गया। अब बंगाली बाबा के अलावा लोग उन्हें ऑक्सीजन मैन के नाम से भी पुकारते हैं।से साठ पेड़ लगाते है। पूरे साल उन पेड़ों की देखभाल सुबह- शाम करते हैं। करीब 500 से अधिक पेड़ इनके द्वारा अभी तक लगाया जा चुका है।

हड़प्पा सभ्यता के लोगों का कारोबार फैला था अफगानिस्तान तक

फतेहाबाद । करीब छह हजार साल पहले हरियाणा के फतेहाबाद के गांव कुनाल में पनपी पूर्व हड़प्पाकालीन सभ्यता से संबंधित परतें खुलने वाली हैं। यहां पर पुरातत्व विभाग को इस सभ्यता से संबंधित भट्ठियां मिली हैं। इनमें मनके और मिट्टी के बर्तन बनाने का काम किया जाता था। इन मनकों व अन्य आभूषणों का व्यापार फारस की खाड़ी तक होता था। इनके व्यापार का प्रमुख केंद्र अफगानिस्तान व बलूचिस्तचान था।
फतेहाबाद के गांव कुनाल में मिली पूर्व हड़प्पाकालीन सभ्यता की पहचान पूरे विश्व में है। यहां पर बने एक टीले पर जब पुरातात्विक महत्व के सामान मिलने लगे, तो पुरातत्व विभाग की नजर इस टीले पर पड़ी। पहली बार यहां पर पुरातत्व विभाग ने वर्ष 1986 में खोदाई का काम आरंभ किया था। यहां पर पूर्व हड़प्पा काल से संबंधित अनेक औजार व मनके मिले थे। इसके बाद यहां पर वर्ष 1987, 1989, 1990, 2016, 2017, 2018, 2020 व अब 2023 में खुदाई का काम आरंभ हुआ है।
सरस्वती नदी के किनारे बसा था शहर – सरस्वती नदी के किनारे बसा यह शहर 6 हजार साल पुराना है। पुरातत्व विभाग के अनुसार विश्व में जितनी भी पौराणिक सभ्यताएं हैं वह नदियों के किनारे पर ही बसी थी। मेसोपोटामिया सभ्यता से लेकर हड़प्पा सभ्यता के साथ विश्व में चार सभ्यताएं एक साथ उपजी थी। इनमें एक मिस्त्र व एक चीन में शामिल है। फतेहाबाद के कुनाल में हड़प्पा सभ्यता के जो अवशेष मिले हैं, वह उस समय की बेहतर कारीगरी का प्रतीक है। कुनाल में जो बस्ती बसाई गई थी, वहां पर एक ओर बस्ती में गड्ढ़ा खोदकर उसके घर का रूप देकर लोग रहते थे। यहां पर एक और बात सामने आई है कि इस सभ्यता के लोगों ने अपने घरों के साथ बांस लगाकर पोस्ट होल बनाए हुए थे। यहां पर मिले मृद भांडों पर अलग से कारीगरी की गई है। पहले की खोदाई में यहां पर शिकार के लिए तीरों के ब्लेड, बाट, मनकों को बनाने के लिए प्रयोग किए जाने के लिए प्रयोग होने वाले पत्थर भी मिले हैं। साथ ही यहां पर चांदी का मुकुट व सोने के आभूषणों के साथ-साथ सील व टेरोकोटा के अवशेष भी मिले हैं।
फारस देशों तक होता था कारोबार
कुनाल में सरस्वती नदी के होने का यह महत्व था कि यहां के लोगों की फारस देशों में भी व्यापार था। वह मनके आदि बनाने के लिए फारस देशों से कच्चा माल मंगवाते थे और मनके तैयार करके उनको वापस फारस देशों में भेजते थे। इनके व्यापार का प्रमुख केंद्र अफगानिस्तान व बलूचिस्तचान था।
शाकाहार के साथ करते थे मांसाहार का सेवन
कुनाल में मिले अवशेषों से यह भी ज्ञात हुआ है कि इस सभ्यता के लोग मांसाहारी थे। वह बड़े पशुओं को आग में पकाकर खाते थे। साथ ही यहां पर दालों के दाने व फलों के बीज भी मिले हैं, जिससे साफ है कि यह लोग उस समय से ही खेती में दालों व फलों को उगाते थे।