Thursday, September 24, 2026
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दीये बनाकर अपनी कलात्मकता से रोशन करें दिवाली

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दीवाली और दीयों का गहरा रिश्ता है। बगैर दीयों के दिवाली की कल्पना नहीं की जा सकती। यह अपने हुनर को निखारने का मौका भी है।

घर में ही अपनी कल्पना को साकार रूप देते हुए आप बहुरंगी दीए बना सकती हैं।आप दीए कई तरीकों से बना सकती हैं, यह आप पर निर्भर करता हैं।

हम यहाँ जो दीए दे रहे हैं, वह चौथी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची संदलीश्री ने बनाए हैं जो मुम्बई के राएन इंटरनेशनल स्कूल की छात्रा है। इन दीयों की कलात्मकता ऐसी है कि बड़े भी तारीफ किए बगैर नहीं रहेंगे। कई प्रकार के दीए और संदलीश्री के कलात्मक दीयों की एक झलक –

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सिरेमिक दीपक – सिरेमिक एक प्रकार की मिट्टी होती है, जिसे फेविकॉल या गोंद के साथ गूंथकर आप मनचाहे आकार में दीपक बना सकते हैं। दीये बनाने के बाद इन्हें छाया में ही सुखाएं और अपने अनुसार कलर और डेकोरेशन कर लें।

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क्ले पाउडर – क्ले पाउडर भी सिरेमिक की तरह ही होता है, बाजार में यह आटे की तरह गूथा हुआ भी आपको मिल सकता है। पुराने दीपक और छोटी कटोरियों की सहायता से आकार देकर आप इसके दीपक बना सकते हैं।

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मोम के दीपक – दीपक या अलग-अलग आकर वाली छोटी कटोरियों में कलरफुल मोमबत्त‍ियों को पिघलाकर आप उन्हें दीयों का आकार दे सकते हैं। इसके बाद इन्हें अपने अनुसार सजा सकते हैं। ये फ्लोटिंग दीपक का काम भी… ये फ्लोटिंग दीपक का काम भी करेंगे।

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 आटे के दीपक – आटे के दीपक कई बार पूजा में बनाए जाते हैं, इस बार मैदे या आटे में कलर मिलाकर डो बनाएं और इनसे मनचाहे आकार में दीपक तैयार करें। इन्हें सुखाकर या बेक करें ।

स्टाइलिश बनाइए इस बार अपनी दिवाली

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रोशनी का त्योहार बस अब आ चुका है. बाज़ारों की रौनक बढ़ गई है, लोग एक-दूसरे के लिए तोहफे ढूंढ रहे हैं. ये दिवाली का त्योहार ही ऐसा है, हर जगह रौशनी से भर गई है. अब इनते अच्छे टाइम में खुद के स्टाइल को आप फीका न कर लें, इसीलिए आपको दिखा रहा है कुछ शानदार विकल्प, जिन्हें देखिए और अपनी दिवाली खुशियों वाली ही नहीं बल्कि स्टाइलिश भी बनाइए –

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कुर्ता – जब बात इंडियन फेस्टिवल सेलिब्रेट करने की हो तो कुर्ते से बेहतर और कुछ नही है. लेकिन प्लीज़, इस बार भी बोरिंग कुर्ता लेने की गलती न करें। इस बार अपने लुक में प्रिंट्स लाएं। ऐसिमिट्रिकल ट्रेंड्स भी आजकल मेन्सवेयर में आ चुका है, आप इसे भी ट्राय कर सकते हैं. वहीं, जब बात इसे पेयर करने की हो तो आप चूड़ीदार या सलवार में से कुछ चुनें। जहां, चूड़ीदार आपके लुक को और भी स्मार्ट बना देगी वहीं, सलवार आपको कैज़ुअल टच देगी।

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 बंदगला – दिवाली पार्टी में रॉक करना है तो एक अच्छा बंदगला खरीदें लेकिन ध्यान रखें कि ये बंदगला जैकेट सिंथेटिक और वेलवेट में न हो। इसके बजाय कॉटन और लाइटवेट वुलन खरीदें तो एम्ब्रॉयडरी वाला भी खरीद सकते हैं और इसे अच्छे फिट वाले फिटेड ट्राउज़र के साथ पेयर करें।

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 जोधपुरी पैंट्स – कैज़ुअल ड्रेसिंग को स्टाइलिश जोधपुरी पैंट से आप और भी स्टाइलिश बना सकते हैं। इसे पेयर करें मोनोक्रोम शर्ट के साथ और हां कॉलर कोई भी ट्राय कर सकते हैं। वैसे, मैंडरीन-कॉलर शर्ट जोधपुरी के साथ बहुत स्मार्ट लुक देगी. फॉर्मल टच के लिए, बंदी जैकेट या ट्रेडिशनल नेहरू जैकेट कैरी करें।

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धोती – ये नया ट्रेंड दिवाली के लिए परफेक्ट है क्योंकि अगर सच में कुछ ट्रेडिशनल पहनना चाह रहे हैं तो ये धोती स्टाइल बेस्ट है. यहां धोती का मतलब धोती पैंट नहीं है, हम यहां ट्रेडिशनल धोती की बात कर रहे हैं. इसे शॉर्ट अचकन के साथ पेयर करें।

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ऐ दिल…विवाद: आर्मी अफसर बोले-नहीं चाहिए 5 करोड़ की मदद, राजनीति में न घसीटें

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नई दिल्ली. फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ पर उठे विवाद को लेकर एमएनएस की शर्तों पर आर्मी ने नाराजगी जताई है। कहा जा रहा है कि एमएनएस चीफ राज ठाकरे ने बॉलीवुड के फिल्म प्रोड्यूसर्स से कहा है कि अगर वह पाक कलाकारों को किसी फिल्म में लेते हैं तो उन्हें आर्मी वेलफेयर फंड में 5 करोड़ रुपए जमा करवाने होंगे। अब आर्मी अफसरों ने कहा है- ‘सेना को राजनीति में न घसीटा जाए, हम स्वेच्छा से दिया गया फंड ही लेते हैं, न कि इस तरह की जबरदस्ती से।’ आर्मी अफसरों ने और क्या कहा…

– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आर्मी अफसरों का कहना है- ‘सेना गैर राजनीतिक और धर्मनिरपेक्ष है, इसे राजनीतिक फायदे के लिए नहीं घसीटा जाना चाहिए।’

– पूर्व नॉर्दर्न आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जायसवाल ने कहा- ‘आर्मी भीख में दिया गया फंड नहीं लेती है, अगर फिल्म प्रोड्यूसर कुछ दान देना ही चाहते हैं तो उन्हें बाकी भारतीयों की तरह ही इसे देना चाहिए, न कि इस तरीके से।’

– जायसवाल ने यह भी कहा कि अगर यह मामला इतना ही सेंसिटिव है तो सरकार को ही इस बारे में कोई आखिरी फैसला करना चाहिए।
– कारगिल वॉर हीरो ब्रिगेडियर कौशल ठाकुर (रिटायर्ड) ने कहा- ‘नेशनल सेंटिमेंट्स का शोषण नहीं किया जाना चाहिए, अगर कुछ गलत है, तो वह गलत है, दबाव बनाकर 5 करोड़ रुपए के डोनेशन को आखिर सही कैसे ठहराया जा सकता है? राजनीतिक फायदे के लिए आर्मी का मिसयूज नहीं किया जाना चाहिए।’

आर्मी की मदद के लिए किसी पर दबाव न बनाएं
– आर्मी हेडक्वार्टर्स के एक सीनियर अफसर ने कहा- ‘कोई भी रिलीफ फंड में अपना योगदान दे सकता है, लेकिन यह स्वैच्छिक होना चाहिए। आप किसी पर इसके लिए दबाव नहीं डाल सकते, आर्मी ऐसी मदद को एक्सेप्ट करना पसंद नहीं करेगी।’

– एक दूसरे आर्मी अफसर ने कहा- ‘फिल्में हर शुक्रवार को रिलीज होती हैं। सेना का सपोर्ट करने के बहाने इनका विरोध करना सबसे अच्छा राजनीतिक हथकंडा है। फंड देने के लिए अगर प्रोड्यूसर्स पर दबाव बनाया जा रहा है तो आर्मी इस तरह की मदद नहीं लेगी।’

क्या हैं राज ठाकरे की शर्तें?
– महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़णवीस के घर बीते शनिवार को एक अहम मीटिंग हुई। इसमें मूवी के प्रोड्यूसर करन जौहर, प्रोड्यूसर्स गिल्ड के प्रेसिडेंट मुकेश भट्ट और फिल्म में पाक एक्टर्स का विरोध कर रही मनसे के चीफ राज ठाकरे मौजूद थे।
– माना जा रहा है कि राज ठाकरे ने विरोध वापस लेने के एवज में 3 शर्तें रखीं जो मान ली गईं।
– पहली शर्त थी- ‘ऐ दिल…’ की शुरुआत में शहीदों के सम्मान में एक मैसेज दिखाया जाए। दूसरी- प्रोड्यूसर्स अब पाक आर्टिस्ट्स के साथ काम न करें और तीसरी- जिन प्रोड्यूसर्स की फिल्मों में पहले से पाक एक्टर्स हैं, उन्हें 5 करोड़ आर्मी वेलफेयर फंड में देने होंगे।
– तीसरी शर्त में यह भी शामिल है कि प्रोड्यूसर्स को यह लिखकर देना होगा कि वे फिल्मों में आगे से पाक कलाकारों से काम नहीं कराएंगे। जो भी प्रोड्यूसर पाक आर्टिस्ट्स को कास्ट करेगा, उसे आर्मी वेलफेयर फंड में 5 करोड़ रुपए देने होंगे।
– बता दें कि ‘ऐ दिल…’ 28 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है। इसमें दो पाक एक्टर्स फवाद खान और इमरान अब्बास नकवी ने काम किया है। उड़ी हमले के बाद भारत-पाक के बीच चल रहे तनाव को देखते हुए फिल्म में पाक कलाकारों के काम करने को लेकर विवाद हो गया।
– एमएनएस फिल्म का विरोध कर रही थी। सिनेमा ओनर्स एग्जीबिटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COEAI) ने भी कहा था कि 4 राज्यों की सिंगल स्क्रीन में यह मूवी नहीं दिखाई जाएगी। हालांकि एसोसिएशन अब भी अपने रुख पर अड़ी है। इसके प्रेसिडेंट नितिन दातार ने कहा कि उनके विरोध का एमएनएस से कोई लेना-देना नहीं है।

नहीं हुई 5 करोड़ जमा कराने की बात : मुकेश भट्ट

– इस बीच, प्रोड्यूसर्स गिल्ड के प्रेसिडेंट मुकेश भट्ट ने कहा है- ‘सीएम फड़णवीस के घर हुई मीटिंग में किसी भी फिगर (पैसे) पर कोई बात नहीं हुई। करन जौहर ने सीएम बताया कि मेरी पिक्चर चले या न चले। मैं पैसे पहले ही दे चुका हूं।’
– ‘हमारी ओर से भी फिल्म की पहले या दूसरे दिन का कलेक्शन देने की भी कोई बात नहीं हुई।’
– भट्ट ने कहा- ‘सीएम ने सिर्फ एक ही बात कही कि अगर आप की बिरादरी (फिल्म इंडस्ट्री) का कोई आदमी आर्मी वेलफेयर फंड में कुछ देना चाहे, तो वह दे सकता है।’

किसने मांगे 5 करोड़, मुझे नहीं पता: सीएम
– उधर, सीएम फड़णवीस ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा- ‘किसने मांगे 5 करोड़ मुझे नहीं पता? सोशल मीडिया पर कुछ भी चलता है। उसकी बात न करें।’
– ‘यह कोई सेटेलमेंट का विषय नहीं है। प्रोड्यूसर्स गिल्ड ने खुद कहा कि हम लोग योगदान देना चाहते हैं, इस पर मैंने कहा कि अपनी श्रद्धा से आप लोग जो करना चाहते हो, वह करो।’

 

नहीं रहीं एवरेस्ट फतह करने वाली पहली महिला पर्वतारोही

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दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली महिला जुन्को ताबेई का निधन हो गया है। जुन्को ताबेई के परिवार ने इसकी जानकारी दी है. वो 77 साल की थीं। उन्हें चार साल पहले कैंसर से पीड़ित होने की जानकारी मिली थी. उन्होंने सैटामा के अस्पताल में आखिरी सांस ली। वो साल 1975 में एवरेस्ट पर पहुंची थीं. तब उनकी उम्र 35 साल थी. उसके बाद साल 1992 तक वो दुनिया की सात सबसे ऊंची चोटियों पर पहुंचने में कामयाब रहीं। माउंट एवरेस्ट पर पहुंचने के 12 दिन पहले वो बर्फीले तूफान की चपेट में आ गई थीं. उनके एक गाइड ने उन्हें बर्फ से बाहर निकाला। इसके बाद भी उन्होंने चढ़ाई जारी रखी। साल 2012 में जुन्को ताबेई ने ‘जापान टाइम्स’ से कहा था कि उनकी उपलब्धियों को जिस तरह देखा जाता है, उन्हें उस पर गर्व है। उन्होंने कहा था, “1970 के दौर में जापान में आम तौर पर माना जाता था कि पुरुष बाहर काम करेंगे और महिलाएं घर पर रहेंगी. जो महिलाएं काम करती भी थीं, उन्हें भी सिर्फ चाय परोसने को कहा जाता था. इसलिए उन्हें बढ़ावा देने की बात सोचना भी मुश्किल था।”

 

इस महिला ने तोड़े रिवाज, बेटी की शादी में निभाई पिता वाली हर रस्म…

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कहने को तो महिला सशक्तिकरण की बात हमारे देश में सभी करते हैं लेकिन आज भी भारतीय संस्कृति में कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें करने का हक सिर्फ मर्दों को ही है। शादियों में कुछ रस्म ऐसे होते हैं, जिन्हें सिर्फ लड़की के पिता ही पूरा करते हैं लेकिन इस प्रथा को तोड़ते हुए लंदन की एक मां ने अपनी बेटी की शादी में पिता के रस्मों को भी निभाया।

यह कहानी है लंदन में रहने वाली हरनूर गरेवाल की. हरनूर ने ‘पिंक लड्डू’ वेबसाइट पर अपनी शादी का अनुभव शेयर करते हुए लिखा, ‘हम पांच बहनें हैं। हमारा कोई भाई नहीं है। कुछ साल पहने हमारे पिता हमें छोड़ के चले गए, तब से मेरी मां ने हमें अकेले पाला है। उन्हें जिंदगी में बहुत कठिनाइयां झेलनी पड़ीं। उन्होंने हमें ऐसे पाला जिससे हमें जिंदगी में कभी भी किसी मर्द पर निर्भर ना रहना पड़े। उन्होंने हमें अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाया। इसलिए हमने उनसे कहा कि पापा की गैरमौजूदगी में रस्में आप ही निभाएंगी ना कि परिवार का कोई दूसरा मर्द.’

हरनूर ने ये भी लिखा है कि अकेली औरत का रहना आज भी मुश्किल है। उसे परिवार वाले चैन से रहने नहीं देते। मेरे पिता के जाने का जिम्मेदार भी सब मेरी मां को ही मानते थे लेकिन मां ने कभी हार नहीं मानी और चुनौतियों का सामना करते हुए हमें पाला।

आज सबको हरनूर की मां से सबक लेने की जरूरत है। पुरुष के ना रहने से महिलाएं कमजोर नहीं होती बल्कि और मजबूत हो जाती हैं और दुनिया में कोई भी ऐसा काम नहीं है, जिसे करने का हक सिर्फ पुरुषों को है।

आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी प्रेस ने हिन्दी ऑनलाइन शब्दकोश शुरू किया

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बेंगलुरू  : आक्सफोर्ड यूनीवर्सिटी प्रेस :ओयूपी: ने आज हिन्दी आनलाइन शब्दकोश शुरू करने की घोषणा की। ओयूपी ने कहा कि आक्सफोर्ड वैश्विक भाषा कार्यक्रम में शामिल होने वाली हिन्दी नौवीं भाषा है । रांची विश्वविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डाक्टर पूनम निगम सहाय ने कहा कि हिन्दी साइट को एक ‘लैंगएज चैंपियन’ से मदद मिलेगी जो इस पहल को रणनीतिक परामर्श देगा और जागरूकता बढाने में मदद देगा।

 

स्टार्ट अप के लिए बिजनेस प्लान के साथ समर्पण देखते हैं रतन टाटा

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ग्वालियर।रतन टाटा सिंधिया स्कूल की स्थापना दिवस के मौके पर स्टूडेंट्स से रुबरू थे। स्टूडेंट्स ने अपने कैरियर से लेकर बिजनेस आइडिया से जुड़े कई सवाल पूछे। टाटा ने भी बेझिझक होकर कहा कि जैसे लड़की के गुण देखकर प्रेम करो, वैसे ही स्टार्टअप में छिपी हुई संभावनाओं और उसे शुरू करने वाले व्यक्ति की गंभीरता को पहचानकर इनवेस्ट करो।

रतन टाटा जब सिंधिया स्कूल पहुंचे तो उन्होंने परंपरागत भाषण देने की बजाय स्टूडेंट्स से बातचीत शुरू कर दी। स्टूडेंट्स ने भी अपने फ्यूचर और बिजनेस के मंत्र पूछे। टाटा ने कहा कि किसी भी स्टार्टअप में इनवेस्ट करने से पहले उनका बिजनेस प्लान और उसे शुरू करने वाले का समर्पण देखता हूं।

-यह ठीक लड़की के प्रेम करने जैसा है, जिसमें उसके सभी गुण देखे जाते हैं। एक स्टूडेंट ने पूछा कि पेरेंट्स कहते हैं ज्यादा नंबर लाओ, तभी टिक पाओगे। इस पर टाटा का जबाव था मार्क्स से टेलेंट का आंकलन नहीं हो सकता। टाटा ने बताया कि बिल गेट्स और स्टीव जॉब ऐसे लोग हैं, जिन्होंने कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की, लेकिन बहुत सफल हुए। भारत के भ्रष्टाचार के बारे में टाटा ने कहा कि उनकी कंपनियों ने काम के लिए कभी रिश्वत नहीं दी। हालांकि इससे नुकसान भी उठाना पड़ा। इस मामले मे कभी भी मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए।

रतन टाटा ने स्टूडेंट्स से कहा कि आने वाला समय ऐसा होगा, जब देश में सभी बराबर होंगे। सब काम मेरिट के आधार पर होंगे। खासतौर से देश में अभिव्यक्ति की पूरी आजादी होनी चाहिए। स्टूडेंट्स को उन्होंने सलाह दी कि एजूकेशन को केवल नंबर लाने का जरिया नहीं समझे, बल्कि अपने अंदर लीडरशिप और स्किल डेवलप करें। सफलता आपके कदमों में होगी। टाटा ने बताया कि उनकी कंपनी हमेशा ऐसा प्रोडक्ट लेकर मार्केट में आई, जिस पर लोग भरोसा कर सकें। यही सफलता का राज है।

 

‘डाबर घराने’ की 16 साल की दीया ने लॉन्च किया सफाई से जुड़ा स्टार्ट अप

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आज के समय में जहां स्कूल जाने वाले ज्यादातर बच्चे सेल्फी और नए ब्रांड्स के चक्कर में बिजी हैं, वहीं दीया बरमन ने एक मिसाल पेश की है। दीया ने महज 16 साल की उम्र में अपना स्टार्टअप शुरू किया है। उनकी यह उपलब्ध‍ि इसलिए खास हो जाती है क्योंकि उनके नाम के साथ डाबर इंडिया का नाम जुड़ा है। बता दें कि दीया डाबर ग्रुप के वाइस चेयरमैन अमित बर्मन की बेटी हैं। उन्होंने अपने पापा के नक्शेकदम पर चलते हुए इस बिजनेस को स्टार्ट किया है। बरमन परिवार की 16 साल की इस होनहार बेटी ने FMCG के अंदर वाले अपने स्टार्टअप को रोग फ्री RogFree नाम दिया है। इस स्टार्टअप का मकसद ग्रामीण भारत के ऐसे लोगों के स्वास्थ्य और हाइजीन में सुधार लाने का है खासकर गरीब बच्चों के लिए.

दीया ने अपने काम की शुरुआत में दिल्ली के सभी मेजर हॉस्पिटलिटी चेन्स जैसे ओबरॉय, जेडब्ल्यू मेरियट, रेडिसन ब्लू  आदि से इस्तेमाल में लाने के बाद बचे हुए साबुन जमा करना शुरू किया। इसके बाद इन साबुनों को एक ऐसी यूनिट में भेजा गया जहां इन्हें गर्म करके दोबारा पिघलाया गया और फिर इन्हें फ्रेश सोप का रूप देकर रोग फ्री यानि RogFree ब्रांड का नाम दिया गया। इन साबुनों को गांव के बच्चों और लोगों में मुफ्त बंटवाया जा रहा है.

दीया का कहना है कि उनके दिमाग में ये आइडिया तब आया जब वह एक होटल में हाथ धो रही थीं। उसी समय हाउसकीपिंग स्टाफ ने वो सारे साबुन वहां से हटा दिए जबकि ये सिर्फ एक ही बार यूज हुए थे। तभी उनको लगा कि ऐसे कितने ही लोग हैं जिन्हें ये बेसिक चीजें नहीं मिलतीं और इस वजह से वो लोग बीमारियों का शिकार होते हैं। बस यहीं से उन्होंने बेकार समझ लिए जाने वाले साबुनों को नए तरीके से इस्तेमाल में लाने की प्लानिंग कर ली।

दिल्ली में इस काम की शुरुआत करने के बाद दीया RogFree को मुंबई भी ले जाना चाहती हैं। वाकई दीया की सोच और उनका काम काबिले तारीफ है।

 

आलोक पर्व पर बिखेरिए स्वाद का जादू

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केसर इलायची श्रीखंड

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सामग्री- दही- 3 कप पाउडर वाली चीनी- 1\2 कप इलायची पाउडर- 1 चम्‍मच केसर- चुटकीभर दूध- 2 चम्‍मच (गरम) गार्निशिंग के लिये- सूखे मेवे

विधि- दही को मलमल के कपड़े में बांध कर टांग दीजिये। करीबन 4 घंटों के लिये। फिर इसे निकाल लें और एक बडे़ कटोरे में रखें। अब इसमें चीनी, इलायची पाउडर और केसर वाला दूध मिलाएं। श्रीखंड को सर्विंग बाउल में डालें। सूखे मेवे से गार्निश करें। फिर फ्रिज में रख दें जिससे यह ठंडा हो जाए।

 

पनीर मक्‍खनवाला

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सामग्री- 1 बड़ी प्‍याज 3 से 4 टमाटर ½ इंच अदरक 3 से 5 लहसुन की कलियां 2 जावित्री 2 से 3 हरी इलायची 1 इंच दालचीनी 2 से 3 लौंग 2 चम्‍मच काजू 1 कप पानी बाकी की सामग्री- 250 से 300 ग्राम पनीर 1 चम्‍मच कश्‍मीरी लाल मिर्च पावडर या देगी मिर्च ¼ कप लो कैलोरी क्रीम 1 तेज पत्‍ता 1 हरी मिर्च 1.5 कप पानी ¾ चम्‍मच कस्‍तूरी मेथी ¼ गरम मसाला पावडर 1 चम्‍मच शहद या ½ चम्‍मच चीनी 2 से 2.5 चम्‍मच बटर 1 चम्‍मच क्रीम गार्निश करने के लिये 1 चमच घिसी पनीर गार्निष करने के लिये ½ इंच बारीक घिसी अदरक नमक- स्‍वदाअनुसार थोड़ी धनिया पत्‍ती

विधि- सबसे पहले कटी प्‍याज, टमाटर, अदरक, लहसुन, काजू, दालचीनी, लौंग और इलायची को 1 कप पानी डाल कर पैन में पका लें। इसे तब तक पकाएं जब तक की यह गल न जाए। फिर 15 मिनट के बाद इसे ठंडा होने के लिये किनारे रखें। जब यह ठंडी हो जाए तब इसे मिक्‍सर में पीस लें। काजू तक अच्‍छी तरह से पिस जाना चाहिये। अब उसी पैन में बटर डालें। फिर उसमें तेज पत्‍ता डाल कर चलाएं। इसके बाद उसमें मखनी पेस्‍ट डाल कर चलाएं। ऊपर से लाल मिर्च पावडर डाल कर धीमी आंच पर पकाएं। मसाले को अच्‍छी तरह से पका लें। जब मसाला बटर को छोड़ने लगे तब उसमें बीच से कटी हरी मिर्च, नमक और पानी डालें। अब इसे फिर चलाएं। 2 से 3 मिनट तक पकाएं। अब इसमें शहद या चीनी डालें। उसके बाद इसमें क्रीम, कसूरी मेथी और गरम मसाला डाल कर चलाएं और आंच को बंद कर दें। अब पनीर मक्‍खनवाला को क्रीम, घिसी पनीर, बारीक घिसी अदरक और धनिया पत्‍ती से सजा कर सर्व करें।

भारत-पकिस्तान सीमा पर बसे तीन बच्चो की दोस्ती की कहानी!

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कहते है बच्चे भगवान् का रूप होते है। और भगवान् की कभी किसीसे कोई दुश्मनी नहीं होती; उनके लिए सब एक जैसे होते है। भारत- पकिस्तान की दुश्मनी की खबरों के बीच ऐसे ही कुछ बच्चो की कही कुछ बाते हर किसी के दिलों को छु रही है।

इन बच्चो की ये मासूम बातें फेसबुक पर ‘ह्युमंस ऑफ़ पकिस्तान‘ नामक एक पेज ने साझा की है। फेसबुक के इस पोस्ट में दो स्कूल जाने वाले बच्चो ने सीमा पार रह रहे अपने हिन्दुस्तानी दोस्त का ज़िक्र किया है।

ये बच्चे आपस में कभी नहीं मिले। पर स्कूल से घर वापस जाते हुए ये तीनो, रोज़ साथ मिलकर एक खेल खेलते है। ये खेल उस नदी में पत्थर फेंकने का है, जो दोनों देशो के बीच बहती है। खेल के नियम बिलकुल सरल है; जिसका पत्थर जितनी दूर फेंका जायेगा, जीत उसी की होगी।

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“हमारा एक दोस्त है, जो नदी के उस पार रहता है। वो भी हर रोज़ इसी वक़्त स्कूल से वापस आता है। वो वहां खड़े होकर नदी में पत्थर फेंकता है। हम भी इस तरफ से पत्थर फेंकते है। जिसका पत्थर सबसे दूर पहुंचता है वो जीत जाता है। हम ये खेल रोज़ खेलते है।”

-“तुम्हारे दोस्त का नाम क्या है?”

“हमे नहीं पता। नदी के पानी के शोर की वजह से एक दुसरे से बात करना मुश्किल होता है। बस हम इतना जानते है कि वो हिन्दुस्तानी- कश्मीरी है, क्यूंकि वो नदी के उस पार रहता है।”

इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर करीब 19,000 लोगो ने साझा किया है। ये बात शायद इस बात का सबूत है कि शायद अब भी हम सभी इन बच्चो की तरह अमन ही चाहते है।

(साभार – द बेटर इंडिया)