Monday, September 28, 2026
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निर्भया से लेकर बिलकिस….सजा से जुड़े सवाल और बँधी उम्मीद

सुषमा त्रिपाठी

16 दिसम्बर 2012, भारत के इतिहास का वह काला दिन जिसे हम कभी नहीं भूल सकेंगे। 17 दिसम्बर की हताशा भरी वह भयावह सुबह और इसके बाद एक आग….जो ऐसी फैली कि इस देश में कानून बदला मगर बलात्कार की घटनाएं नहीं रुकीं। दरिंदगी बदस्तूर जारी है और तब तक जारी रहेगी जब तक हम नहीं बदलते, हमारे घरों में परवरिश का तरीका नहीं बदलता। इस घटना के बाद 5 साल बीत गए मगर हमारे राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक पुरोधा औरतों को उनकी औकात बताने का एक भी मौका नहीं छोड़ते। पिछले साल 16 दिसम्बर को एक टीवी चैनल पर निर्भया की बरसी पर आयोजित एक कवरेज देख रही थी और कैमरा वह तमाम खाली जगहें दिखा रहा था जहाँ से उम्मीद की रोशनी निकली मगर बीच रास्ते में खो गयी। हमारी याददाश्त बहुत कमजोर है…..हमें बलात्कार और तेजाब से जले चेहरों के बीच रहने की आदत हो गयी है, जलती हुई औरतें अच्छी लगने लगी हैं और हम सभ्य होते जा रहे हैं। जब निर्भया कांड के आरोपी पवन गुप्ता की बहन अपने भाई की दरिंदगी को भुलाकर उसे एक मौका देने की बात कहती है और जब वह यह कहती है कि लड़के हमेशा गलत नहीं होती….लड़की हँसी तो फँसी तो लगता है कि लड़कियों को समाज की थोपी हुई सोच से निकालना कितना मुश्किल मगर जरूरी काम है। जब लेज्ली उडविन की इंडियाज डॉटर में मुकेश सिंह अच्छी लड़कियों की परिभाषा तय करता है और यह कहता है कि निर्भया को विरोध नहीं कर बलात्कार होने देना चाहिए था और अब बलात्कारी लड़कियों को मार ही डालेंगे तो उस सड़ांध का एहसास होता है और उस पर भी हैरत होती है जब ब्रिटेन की यह महिला एक बलात्कारी को हीरो बनाने की कोशिश करती है। हैरत होती है जब ए.पी. सिंह सा कथित तौर पर शिक्षित (?????) वकील लड़कियों को फार्म हाउस में जलाने की बात करता है और एक बलात्कारी के मानवाधिकारों की बात करता है। जिस बाल अपराधी ने सबसे अधिक क्रूरता दिखायी, उसे उम्र के कारण छोड़ दिया जाना भी सवाल उठाता है, जब अपराध करते समय उम्र नहीं देखी तो सजा के समय उम्र को बहाना क्यों बनाया जाना चाहिए? जो भी हो, निर्भया कांड के अपराधियों की फाँसी से बहुत कुछ न भी बदले मगर एक संदेश जाएगा और इसकी बहुत जरुरत है। अब ऐसे ही एक अन्य मामले में अपराधियों को उम्रकैद सुनायी गयी। बिलकिस बानो केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए 12 आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। 12 आरोपियों को ट्रायल कोर्ट की ओर से उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील की थी।

कोर्ट ने इस मामले में 5 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया। बता दें कि गोधरा दंगों के बाद बिलकिस बानो पर हमला किया गया था। हमले के दौरान अहमदाबाद के रंधिकपुर में रहनेवाली बिलकिस बानो के परिवार में 8 लोगों की हत्या कर दी गई थी। बिलकिस बानो उस समय मात्र 19 साल की थी, और 5 माह की गर्भवती थी। उनके साथ गैंगरेप किया गया था।
बिलकिस के साथ जब 2002 में बलात्कार हुआ तो उस समय वो गर्भवती थीं। उनकी तीन साल की बेटी सालेहा की भी बेहरमी से हत्या कर दी गई। आज बिलकिस के बच्चों में बड़ी बेटी हाजरा, दूसरी फातिमा और बेटा यासीन है। लेकीन उनकी सबसे छोटी बेटी उनके लिए खास है क्योंकि उसका नाम उन्होंने सालेहा रखा है, अपनी उस बेटी की याद में जिसकी हत्या उनकी नज़रों के सामने हुई थी। इस फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं मगर हमें याद ऱखना होगा कि ये फैसले अदालत के फैसले हैं। निर्भया कांड में भी फाँसी की सजा पर मुहर लगने में 2 साल गए और बिलकिस के सामने अब भी सर्वोच्च अदालत जाने का रास्ता खुला हुआ है। अच्छा होगा कि फिलहाल हम इस बात पर संतोष करें कि कम से कम फैसला हुआ मगर कोशिश करनी होगी कि इतने साल न लगें।

 

उच्चतम न्यायालय ने बलात्कार और हत्या मामले के चार दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखते हुये कहा कि इस अपराध ने चारों ओर सदमे की सुनामी ला दी थी और यह बिरले में बिरलतम अपराध की श्रेणी में आता है जिसमें बहुत ही निर्दयीता और बर्बरता के साथ 23 वर्षीय छात्रा पर हमला किया गया था।

शीर्ष अदालत ने कहा कि दोषियों ने पीड़ित की अस्मिता लूटने के इरादे से उसे सिर्फ मनोरंजन का साधन समझा और यही सच भी है कि इस देश में औरत अब भी उपभोग, मनोरंजन और परिवार चलाने की मशीन से अलग एक अदद इंसान अब भी नहीं समझी जा रही है।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खडपीठ ने दो अलग अलग लेकिन परस्पर सहमति व्यक्त करते हुये सर्वसम्मति के निर्णय में दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला बरकरार रखा जिसने चारों दोषियों को मौत की सजा देने के निचली अदालत के निर्णय की पुष्टि की थी। इस निर्णय के बाद अब मुकेश, पवन, विनय शर्मा आरै अक्षय कुमार सिंह को मौत की सजा दी जायेगी।

इस सनसनीखेज वारदात के छह अभियुक्तों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में कथित रूप से आत्महत्या कर ली थी जबकि छठा अभियुक्त किशोर था। उसे तीन साल तक सुधार गृह में रखने की सजा सुनायी गयी थी।

पीठ ने अपने फैसले में दोषियों के हाथों सामूहिक बलात्कार की शिकार हुयी इस छात्रा के साथ इस अपराध के बाद उसके गुप्तांग में लोहे की राड डालने, चलती बस से उसे और उसके पुरूष मित्र को फेंकने और फिर उन पर बस चढाने का प्रयास करने जैसे दिल दहलाने वाले अत्याचारों के विवरण का जिक्र किया है।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की तीन सदस्यीय खंडापीठ ने 27 मार्च को इस मामले में दोषियों की अपील पर सुनवाई पूरी की थी। इस मामले में न्यायमूर्ति मिश्रा और न्यायमूर्ति भानुमति ने अलग अलग परंतु सहमति के फैसले सुनाये।

न्यायालय ने कहा कि इस अपराध की किस्म और इसके तरीके ने सामाजिक भरोसे को नष्ट कर दिया और यह बिरले में विरलतम की श्रेणी में आता है जिसमें मौत की सजा दी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि पीड़ित ने संकेतों के सहारे मृत्यु से पूर्व अपना बयान दिया क्योंकि उसकी हालत बहुत ही खराब थी परंतु उसके इस बयान में तारतम्यता थी जो संदेह से परे सिद्ध हुयी। पीठ ने यह भी कहा कि पीडित और दोषियों की डीएनए प्रोफाइलिंग जैसे वैज्ञानिक साक्ष्य भी घटना स्थल पर उनके मौजूद होने के तथ्य को सिद्ध करते हैं।

पीठ ने कहा कि चारों दोषियों, राम सिंह और किशोर की आपराधिक साजिश साबित हो चुकी है। इस वारदात के बाद उन्होंने पीडित और उसके दोस्त को बस से बाहर फेंकने के बाद उनपर बस चढा कर सबूत नष्ट करने का प्रयास किया।।

न्यायालय ने यह भी कहा कि पीडित के साथ बस में यात्रा करने वाले उसके मित्र और अभियोजन के पहले गवाह की गवाही अकाट्य और भरोसेमंद रही। चारों दोषियों ने अपनी अपील में दिल्ली उच्च न्यायालय के 13 मार्च, 2014 के फैसले को चुनौती दी थी। इस फैसले में उच्च न्यायालय ने चारों दोषियों को मौत की सजा सुनाने के निचली अदालत के निर्णय की पुष्टि की थी।

एक नजर निर्भया कांड के पूरे घटनाक्रम पर

16 दिसंबर, 2012: पैरामेडिकल छात्रा के साथ एक निजी बस में छह लोगों ने सामूहिक बलात्कार किया और उसके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की। इसके बाद उसे एवं उसके दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया। उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।

17 दिसंबर: आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। 17 दिसंबर: पुलिस ने चार आरोपियों की पहचान की – बस चालक राम सिंह, उसका भाई मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता।

18 दिसंबर: राम सिंह और तीन अन्य गिरफ्तार।

20 दिसंबर: पीड़िता के दोस्त ने बयान दिया।

21 दिसंबर: मामले में आरोपी किशोर को दिल्ली के आनंद विहार बस टर्मिनल से पकड़ा गया। पीड़िता के दोस्त ने मुकेश नाम के एक दोषी की पहचान की। पुलिस ने छठे आरोपी अक्षय ठाकुर को पकड़ने के लिए हरियाणा एवं बिहार में छापे मारे।

21-22 दिसंबर: ठाकुर को बिहार के औरंगाबाद से गिरफ्तार किया गया और दिल्ली लाया गया। पीड़िता ने अस्पताल में एसडीएम के सामने बयान दिया।

23 दिसंबर: विरोध प्रदर्शनकारियों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया, सड़कों पर उतरे। विरोध प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए ड्यूटी पर तैनात दिल्ली पुलिस कांस्टेबल सुभाष तोमर को गंभीर रूप से घायल होने के बाद अस्पताल ले जाया गया।

25 दिसंबर: लड़की की हालत नाजुक। कांस्टेबल तोमर ने दम तोड़ा।

26 दिसंबर: दिल का दौरा पड़ने के बाद पीड़िता को सरकार ने एयर एंबुलेंस से सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल भेजा।

29 दिसंबर: पीड़िता ने देर रात दो बजकर 15 मिनट पर दम तोड़ा। पुलिस ने प्राथमिकी में हत्या का मामला जोड़ा।

दो जनवरी, 2013: तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने यौन अपराध मामले में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक अदालत :एफटीसी: का उद्घाटन किया।

तीन जनवरी: पुलिस ने हत्या, सामूहिक बलात्कार, हत्या की कोशिश, अपहरण, अप्राकृतिक अपराध एवं डकैती सहित कई आरोपों को लेकर पांच वयस्क आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया।

पांच जनवरी: अदालत ने आरोपपत्र का संज्ञान किया।

सात जनवरी: अदालत ने बंद कमरे में कार्यवाही का आदेश दिया।

17 जनवरी: एफटीसी ने पांच वयस्क आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू की।

निर्भया कांड पर सुप्रीम कोर्ट की तल्‍ख टिप्पणी

1. जजों ने 2 बजकर 3 म‌िनट पर फैसला पढ़ना शुरु क‌िया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चारों आरोपियों ने निर्भया के साथ जिस तरह का बर्बरता पूर्ण व्यवहार किया उससे ये साबित होता है कि अपने तरह का अनोखी घटना है।

2. यह मामला रेयरेस्ट आफ रेयर है। केस की मांग थी कि न्यायपालिका समाज के सामने एक मिसाल पेश करे।

3. निर्भया कांड में कोर्ट का फैसला आते ही अदालत कक्ष में तालियां बजीं।

4. अदालत ने कहा इस मामले में कोई रियायत नहीं दी जा सकती।

5. निर्भया कांड सदमे की सुनामी थी। जिस तरह से अपराध हुआ है वह एक अलग दुनिया की कहानी लगती है।

6.दोषियों ने हिंसा, सेक्स की भूख की वजह से अपराध किया।

7. वारदात को क्रूर और राक्षसी तरीके से अंजाम दिया गया।

8. उम्र, बच्चे, बूढ़े मां-बाप ये कारक राहत की कसौटी नहीं।

9. इस अपराध ने समाज की सामूहिक चेतना को हिला दिया।
10. पीडि़ता का मृत्यु पूर्व बयान संदेह से परे

अदालत ने विवेकानंद का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विकास को मापने का सबसे अच्छा थर्मामीटर है कि हम महिलाओं के साथ कैसे पेश आते हैं।

तीन जजों की बेंच में से एक जज भानुमति का फैसला शेष दो जजों से अलग है। जस्ट‌िस भानुमत‌ि ज‌िनका फैसला अन्य जजों से अलग रहा उन्होंने कहा क‌ि हमारे यहां एजुकेशन स‌िस्टम ऐसा होना चाह‌िए ज‌िससे क‌ि बच्चे मह‌िलाओं के साथ कैसा व्यवहार करना है ये सीख सकें। जस्ट‌िस भानुमत‌ि ने स्वामी व‌िवेकानंद के एक कोट को रेफर करते हुए कहा क‌ि कैसे परंपराएं ज्ञान और श‌िक्षा के साथ म‌िलकर समाज में मह‌‌िलाओं के न्याय द‌िलाने का काम करती हैं।

निर्भया की मां बोलीं, ‘मेरी बेटी को ही नहीं देश को भी मिला इंसाफ‘

ऐतिहासिक फैसले पर निर्भया के परिजन काफी खुश हैं। पीड़िता की मां ने कहा कि ये मेरी बेटी निर्भया को ही नहीं, पूरे देश को इंसाफ मिला है। उन्होंने कहा कि भले ही फैसला आने में देरी हुई है, लेकिन हमारी बेटी को फैसला मिला है। निर्भया की मां ने मीडिया और लोगों का धन्यवाद किया और कहा कि ऐसी उम्मीद की जाती है कि देश की बाकी बच्चियों को भी ऐसे ही इंसाफ मिलेगा।
ये फैसला सिर्फ हमारा नहीं, पूरे देश का है, समाज का है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट, समाज और मीडिया का धन्यवाद देती हूं। हम सबको इंसाफ मिला। जो हादसा मेरी बेटी के साथ हुआ उसका मन में मलाल रहेगा, जब तक जीएंगे, तब तक रहेगा। कानूनी प्रक्रिया लचर जरूर है, लेकिन उसमें देर हैं, पर अंधेर नहीं। निर्भया के पिता ने भी कहा कि वे कोर्ट के फैसले से बेहद खुश हैं मगर सवाल यह भी है कि  कितने परिवारों और कितनी माँओं में अपनी बेटी को न्याय दिलाने का हौसला सालों बरकरार रहे। क्या हमारा परिवेश इतना संवेदनशील है कि ऐसी लड़कियों, परिवारों की लड़ाई का साथ दे। बंगाल के मध्यमग्राम में वातावरण और प्रताड़ना के कारण एक किशोरी को दोबारा बलात्कार की पीड़ा से गुजरना पड़ा, अंततः उसने खुद को आग लगा ली मगर हमारा राज्य मामले को रफा – दफा करने में जुटा रहा। किशोरी का टैैक्सी चालक पिता राज्य को हताशा के साथ छोड़ चुुका है और ऐसे कई अपराधी घूम रहे हैं।

आखिरकार निर्भया को न्याय मिला : सोशल मीडिया

पोस्ट और ट्वीट में आम तौर पर कहा गया, ‘‘आखिरकार निर्भया को न्याय मिला।’’ एक उपयोगकर्ता ने इस ट्वीट के साथ एक तस्वीर साझा करते हुए कहा, ‘‘करीब चार वषर्, चार माह, 18 दिन, विरोध, दर्द और संघर्ष के बाद अब भारत की बेटी और भारतीयों की बहन की आत्मा को शांति मिलेगी।’’ एक अन्य उपयोगकर्ता ने लिखा, ‘‘यह निर्भया के लिए न्याय है लेकिन असल मायने में ऐसा तभी हो पाएगा जब समाज दूसरी निर्भया नहीं होने दे। जय हो।’’ आज फैसला सुनाए जाने के दौरान खचाखच भरे न्यायालय कक्ष में तालियों की गड़गड़ाहट सुनी जा सकती थी और न्यायाधीशों ने घटना को विरले से विरलतम करार दिया। सोशल मीडिया पर भी कमोबेश इसी तरह की भावनात्मक टिप्पणी देखने को मिली और लोगों ने ट्विटर और फेसबुक पर निर्णय की सराहना की।
इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले कुछ लोगों ने पीड़िता को उसके असली नाम से पुकारने की मांग की, जिस बात की चाह उसके माता-पिता जता चुके हैं। दूसरी ओर उपयोगकर्ताओं के एक धड़े ने पूछा कि वर्ष 2002 में गुजरात में हुए मुस्लिम विरोधी हिंसा के पीड़ितों बिलकिस बानो और एहसान जाफरी के मामले में भी ऐसा क्यों ना किया जाए। यह जीत जरूरी थी मगर हमारी लड़ाई लम्बी हैै और रास्ता पथरीला हैै….इस पथरीले समाज को सड़ांध भरी मानसिकता से निकालना ही आज युवाओं की जिम्मेदारी हैै, या यूँ कहें कि हम सबकी जिम्मेदारी है।

(इनपुट – विभिन्न समाचार पत्र तथा पीटीआई)

 

 

 

बाहुबली 2′ ने रचा इतिहास, 1000 करोड़ कमाने वाली बनी पहली भारतीय फिल्म

एसएस राजामौली की फिल्म ‘बाहुबली 2’ ने इतिहास रच दिया है। ये पहली भारतीय फिल्म बन गई है जिसने दुनिया भर में 1000 करोड़ की कमाई की है। ‘बाहुबली 2’ ने मात्र नौ दिनों में ये आंकड़ा पार कर लिया है।

रमेश बाला ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। ‘बाहुबली 2’ ने भारत में 800 करोड़ से ज्यादा की कमाई की वहीं विदेश की बात की जाए तो फिल्म ने 200 करोड़ की कमाए हैं। फिल्म के शो अभी भी हाउसफुल जा रहे हैं जिसके बाद लग रहा है कि फिल्म 1500 करोड़ का आंकड़ा भी पार कर सकती है।
हिंदी में ‘बाहुबली 2’ ने सभी फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। एक हफ्ते में ‘दंगल’ ने 197.54 करोड़ रुपये और ‘सुल्तान’ ने 229.16 करोड़ की कमाए थे। वहीं ‘बाहुबली 2’ ने अपने पहले दस दिनों में हिंदी भाषा में 300 करोड़ की कमाई की है।
अमेरिका में भी फिल्म की धुंआधार कमाई जारी है। अभी तक ‘दंगल’ अमेरिका में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी लेकिन एसएस राजामौली की ‘बाहुबली 2’ ने उसे भी पीछे छोड़ दिया है। अमेरिका में ‘बाहुबली 2’ 100 करोड़ कमाने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई है।
 

 

 

 प्लेन में बदतमीजी की तो सालों तक नहीं कर पाएंगे सफर

शिवसेना सांसद रवींद्र गायकवाड़ द्वारा एयर इंडिया में की गई बदसलूकी और अभद्र व्यवहार के बाद भारत सरकार ‘नो-फ्लाइ लिस्ट’ के लिए नए नियम जारी किए। ​नागरिक उड्डयन सचिव आर एन चौबे ने इन नियमों काड्राफ्ट पेश किया। इसके साथ ही लोगों को उनके खराब आचरण और अभद्र व्यवहार के लिए फ्लाइट में बोर्ड करने से रोका जाएगा।

नए नियमों के अनुसार बदमिजाज लोगों के रवैये को 3 कैटेगरी में बांटा गया है। पहले लेवल में शारीरिक हाव-भाव से रोक पैदान करने पर सजा दी जाएगी। लेवल-2 में शारीरिक स्तर पर हिंसा, धक्का-मुक्की, हाथ-पांव चलाना और यौन शोषण जैसे अपराध शामिल होंगे।

तीसरे और अंतिम लेवल पर जानलेवा हिंसा, जान से मारने की धमकी जैसा बर्ताव शामिल किया जाएगा। पहले लेवल के दोषी होने पर 3 महीने, दूसरे लेवल पर 6 महीने से 2 साल और तीसरे लेवल में 2 से ज्यादा की सजा का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा बुरे बर्ताव के लिए फ्लाइट में उड़ने पर रोक भी लगाई जा सकती है।

हालांकि, डोमेस्टिक फ्लाइट में लगी पाबंदी को अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के लिए मानना अनिवार्य नहीं हैं। वो इस मामले में फैसला लेने पर स्वतंत्र हैं। इंडियन एयरलांइस के मांग पर उड्डयन मंत्रालय द्वारा सिविल एवियेशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) ड्राफ्ट तैयार किया गया है। भारत में पहली बार इस तरह का ड्राफट लाया गया है।

विमान में सफर करने के लिए बनाए गए नियमों की घोषणा नागरिक उड्डयन मंत्री गजपति और जयंत सिन्हा करेंगे। इस ड्राफ्ट के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने वालों की हवाई यात्रा पर रोक भी लगाई जा सकती है।

बता दें कि 23 मार्च को रवींद्र गायकवाड़ ने एयर इंडिया के विमान में एक कर्मचारी से मारपीट की। इसके बाद एयर इंडिया ने उनपर बैन लगा दिया था। हालांकि मंत्रालय में माफीनामा देने के बाद एयरलाइन्स ने उनपर से बैन हटा लिया। नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए घरेलू विमान की बुकिंग में भी आधार या पासपोर्ट नंबर अनिवार्य किया जा सकता है।

इस ड्राफ्ट पर आम जनता से भी राय ली जाएगी। आम जनता को अपने सुझाव एक महीने के भीतर देने होंगे। इसके बाद मंत्रालय सुझावों पर विचार करेगा और फिर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस काम में लगभग 3 महीने का वक्त लगेगा।

इस ड्राफ्ट को पेश किए जाने के बाद सांसद रविंद्र गायकवाड़ ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इससे भी ज्यादा सख्त नियम बनाए जाने चाहिए।

 

महिलाओं को मिलेगी टैक्स में छूट, फ्री हेल्थ चेकअप और कैशलेस मेडिकल सर्विस

देश में करीब आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं को लैंगिंग असमानता का आज भी सामना करना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा प्लान ला आ रही है। इस प्लान के मुताबिक महिलाओं को टैक्स में छूट और उनको हेल्थ चेकअप दिया जाएगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, अकेली रहने वाली महिलाओं के लिए मोदी सरकार एक टैक्स पॉलिसी लेकर के आ रही है। इस पॉलिसी के तहत महिलाओं को टैक्स में छूट मिलेगी। इतना ही नहीं आधार से जुड़े हेल्थ कार्ड्स बनाए जाएंगे, जिनकी मदद से महिलाएं चेकअप करा सकेंगी और प्रेग्नेंट महिलाएं कैशलेस मेडिकल सर्विस पा सकेंगी।   बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज की अध्यक्षता में मंत्रियों की टीम इस पर काम कर रही है और इसकी जल्द ही घोषणा की जाएगी।  इसमें महिलाओं के लिए स्वच्छ खाने की चीजों और उनके लिए पब्लिक टॉयलेट्स की संख्या बढ़ाने का भी ध्यान रखा जा रहा है। लिंग-आधारित हिंसा के चलते उन्हें मुफ्त चिकित्सा और कानूनी समर्थन, परामर्श और आश्रय प्रदान किया जाएगा।

 

 

अक्षय को रुस्तम और सोनम को नीरजा के लिए मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को इस साल के सर्वश्रेष्ठ अभिनेता अक्षय कुमार सहित विभिन्न राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं को 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक राजेश मापुस्कर और के विश्वनाथ को प्रतिष्ठित दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया।
अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता : 

सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले और सर्वश्रेष्ठ मराठी फिल्म – दशाक्रिया
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता – मनोज जोशी (दशाक्रिया)
सर्वश्रेष्ठ ओरिजिनल स्क्रीनप्ले – महेशिंते प्रथिकूरम (मलयालम फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ डायलॉग – पेली चुप्लु (तेलुगु फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक गायक – सुंधराय्यर (तमिल फिल्म जोकर)
सर्वश्रेष्ठ फिमेल प्लेबैक गायिका – इमान चक्रवर्ती (प्रकटन)
नरगिस दत्त पुरस्कार – दिक्चो बनात पलाक्स
सर्वश्रेष्ठ पॉपुलर फिल्म – सतमनाम भावती
सर्वश्रेष्ठ डेब्यूट फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार – अलिफा (बंगाली फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिजाइन – 24 (तमिल फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ म्यूजिक डायरेक्शन पुरस्कार – बाबू पद्मनाभा ( कन्नड़ फिल्म अल्लामा)
सर्वश्रेष्ठ लिरिक्स – वैरामुथु (धर्म दुराई) और अनुपम रॉय (प्रकटन)
सर्वश्रेष्ठ मेकअप – अल्लामा
सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार – अधीश प्रवीण, नूर इस्लाम, सैमुल आलम और मनोहर के.
सर्वश्रेष्ठ स्टंट कोरियाग्राफर – पीटर हेन (पुलीमुरुगन)
सर्वश्रेष्ठ साउंड डिजाइनर – जयदेवन (मलयालम फिल्म, काडु पूकुन्न नेरम)
सर्वश्रेेष्ठ कोरियोग्राफी – राजू सुंदरम (जनता गैराज)
सर्वश्रेष्ठ कॉस्ट्यूम डिजाइनर – साइकल (मराठी फिल्म)
सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म अवार्ड – महायोद्धा रामा
सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण संरक्षण – लोकताक लैरेंबी
विशेष पुरस्कार – कड़वी हवा (हिंदी फिल्म) और मुक्ति भवन (हिंदी फिल्म)

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में अभिनेता अक्षय कुमार को फिल्म रुस्तम में एक देशभक्त नौसैनिक अधिकारी की भूमिका निभाने के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के खिताब से सम्मानित किया गया। यह फिल्म 1959 के नानावती हत्याकांड पर आधारित थी। उन्हें रजत कमल पुरस्कार के साथ 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। वहीं मलयालम फिल्म ‘मिन्नामिनुंगी-दि फायरफ्लाई’ में मुख्य भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री सीएम सुरभी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताब से नवाजा गया। उन्हें भी रजत कमल पुरस्कार और 50 हजार रुपये की पुरस्कार राशि मिली। उन्होंने अपने कैरियर के शुरूआती दौर में मिले इस पुरस्कार के लिए सभी का शुक्रिया अदा किया।

बॉलीवुड फिल्म ‘नीरजा’ के निर्देशक राम माधवानी को सर्वश्रेष्ठ हिंदी भाषी फिल्म के सम्मानित किया गया। वहीं महिलाओं पर आधारित अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म ‘पिंक’ को सामाजिक मुद्दे पर आधारित सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार दिया गया। इस मौके पर पिंक बनाने वाले बंगाली फिल्मों के निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी ने कहा कि वह अब और अधिक हिंदी फिल्में बनाना चाहते हैं।

राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में मराठी फिल्म ‘कसाव’ को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के खिताब से नवाजा गया। इस फिल्म को स्वर्ण कमल और निर्माता व निर्देशक दोनों को ढाई-ढाई लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। इस फिल्म का निर्देशन सुनील सुख्तांकर और सुमित्रा भावे ने किया था। यह फिल्म अवसाद और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित थी। वहीं कश्मीरी अभिनेत्री जायरा वसीम को आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘दंगल’ में भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जबकि नागेश कुकुनुर कि फिल्म ‘धनक’ को सर्वश्रेष्ठ बाल फिल्म का पुरस्कार मिला।

अभिनेता अजय देवगन की फिल्म ‘शिवाय’ ने स्पेशल इफेक्ट की श्रेणी की में पुरस्कार हासिल किया। वहीं मापुस्कर को फिल्म ‘वेंटीलेटर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिया गया। उन्हें स्वर्म कमल और ढाई लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई। अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और उनकी मां मधु चोपड़ा द्वारा निर्मिंत इस फिल्म ने तीन पुरस्कार प्राप्त किए। वेंटीलेटर ने सर्वश्रेष्ठ संपादन और सर्वश्रेष्ठ फाइनल मिक्स्ड ट्रैक का पुरस्कार भी अपने नाम किया। अभिनेता मोहनलाल को पुलीमुरुगन, जनता गैराज और मुंथीरिवल्लीकल थलीरक्कुंबोल जैसी फिल्मों के लिए स्पेशल ज्यूरी पुरस्कार दिया गया।

 

शिव कपूर ने 12 साल बाद जीता एशियाई टूर खिताब

मियोली : भारतीय गोल्फर शिव कपूर ने अंतिम दौर में आठ अंडर 64 का बेहतरीन स्कोर बनाकर आज यहां पहला यींगडर हैरिटेज गोल्फ टूर्नामेंट जीतकर एशियाई टूर खिताब के लिये पिछले 12 वषरें से चला आ रहा इंतजार खत्म किया। कपूर ने पहले नौ होल में तीन अंडर का स्कोर बनाया। उन्होंने अंतिम सात होल में से पांच में स्कोर किया और आखिर में कुल 16 अंडर 272 के स्कोर के साथ शीर्ष पर रहे। उन्होंने खिताब जीतने के बाद कहा, ‘‘मैं आखिरकार फिर से खिताब जीतने में सफल रहा और यह बहुत अच्छा अहसास है। 2015 में अपना यूरोपियन टूर कार्ड गंवाने और 2016 में यकृत की बीमारी से जूझने के बाद यह बड़ी राहत है। ’’ गेविन ग्रीन : 67 : और यिकुएन चांग : 68 : दोनों 14 अंडर के साथ संयुक्त दूसरे स्थान पर रहे। कपूर ने कहा, ‘‘यह इंतजार बहुत लंबा खिंच गया था और इससे मेरा आत्मविश्वास काफी बढ़ेगा। मैं जानता था कि अंतिम दौर में स्कोर कम होगा। ’’ पैंतीस वर्षीय कपूर ने 2005 में वोल्वो मास्टर्स के रूप में अपना पहला एशियाई टूर खिताब जीता था। इसके बाद वह चार अवसरों पर दूसरे और तीन बार तीसरे स्थान पर रहे। इसके अलावा वह अन्य 21 अवसरों पर चौथे और दसवें स्थान के बीच रहे थे। अन्य भारतीयों में सुजान सिंह : 67 : ने लगातार तीसरे दौर में 70 से कम का स्कोर बनाया। उन्होंने अंतिम पांच होल में से चार में बर्डी बनायी। वह और हिम्मत राय : 71 : दोनों पांच अंडर के स्कोर के साथ संयुक्त 22वें स्थान पर रहे। पहले दौर के बाद दूसरे स्थान पर रहे एस चिक्कारंगप्पा इसके बाद दूसरे और तीसरे दौर में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाये और संयुक्त 27वें स्थान पर रहे। खालिन जोशी : 70 : संयुक्त 37वें, राहिल गंगजी : 70 : संयुक्त 52वें और चिराग कुमार : 77 : संयुक्त 60वें स्थान पर रहे।

 

न्यायमूर्ति लीला सेठ का निधन

नयी दिल्ली : देश के किसी उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश और प्रसिद्ध लेखक विक्रम सेठ की मां न्यायमूर्ति :सेवानिवृत्त: लीला सेठ का निधन हो गया।

वह 86 साल थीं और कल रात दिल का दौरा पड़ने से नोएडा स्थित निवास पर उनका निधन हो गया।
उनके बेटे शांतुम सेठ ने कहा कि दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। मेरे भाई विक्रम, बहन और हमारे परिवार के दूसरे सदस्य यहां हैं।’’ शांतुम ने कहा, ‘‘करीब तीन हफ्ते पहले वह गिर गयी थीं और उनकी कूल्हे की हड्डी टूट गयी थी। अपोलो अस्पताल में उनका ऑपरेशन किया गया था और एक हफ्ते पहले ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी। हमने पीसीआर को फोन किया, एंबुलेंस आयी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।’’ लीला सेठ ने कानून के क्षेत्र में कई इतिहास रचे थे। वह लंदन बार परीक्षा में प्रथम स्थान हासिल करने वाली पहली महिला थीं, दिल्ली उच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश थीं और साथ ही किसी उच्च न्यायालय :हिमाचल प्रदेश: की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश थीं।

वह 16 दिसंबर के सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद 2012 में गठित की गयी न्यायमूर्ति वर्मा समिति के तीन सदस्यों में भी शामिल थीं।

‘ए सूटेबल ब्यॉय’ उपन्यास के रचनाकार की मां लीला खुद एक लेखिका थीं और उनकी आत्मकथा ‘ऑन बैलेंस’ एक बेस्टसेलर रही है। उन्होंने 2014 में प्रकाशित हुई किताब ‘टॉकिंग ऑफ जस्टिस: पीपुल्स राइट्स इन मॉडर्न इंडिया’ भी लिखी है जिसमें उन्होंने 50 साल से ज्यादा लंबे अपने कानूनी करियर में अपने सामने आए महत्वपूर्ण मुद्दों की बात की है।

 

सूट पहनें या शर्ट, टाई हो परफेक्ट

बात जब सूट पर टाई पहनने की हो या फिर नॉर्मल शर्ट पर, मैचिंग और अच्छा दिखने का प्रेशर बहुत बढ़ जाता है। आप शादीशुदा हैं तो आपकी पत्नी हैं और किसी से इश्क फरमा रहे हैं तो गर्लफ्रेंड हैं या बहन की बातों की कद्र करते हैं तो बहन भी है मगर इन सबके होते हुए भी अगर आप कहीं और नौकरी कर रहे हैं तो आपकी नैया आपको खुद पार लगानी होगी, आपके कपड़ों पर भी यही बात लागू होती हैं। भले ही आपने शर्ट से लेकर पैंट और सूट तक सारी ही चीज़ें ब्रांडेड पहन रखी हो लेकिन मैचिंग टाई की कमी आपका पूरा लुक बिगाड़ सकती है।

टाई में भी मार्केट में कई सारी वैराइटी देखने को मिल जाती है लेकिन कौन सा जरूरी है और किस कलर की टाई नहीं है आपके पास, इन सबके बारे में सोचने के बाद ही इन्हें खरीदें। प्रिंटेड, वूलन और प्लेन टाई को कैसे शर्ट के साथ पेयर करके आप हैंडसम और स्टाइलिश नज़र आ सकते हैं, ये भी जानना जरूरी है।

पैटर्न्ड शर्ट के साथ आपकी टाई बिल्कुल मैचिंग होनी चाहिए। बुनी हुई टाई के साथ टेक्सचर और गहराई का ध्यान रखते हुए आप इसमें आकर्षक नजर आ सकते हैं। चेक शर्ट के साथ उसके कलर का भी ध्यान रखना जरूरी है। चेक्ड शर्ट के साथ वूलन टाई अच्छी लगेगी।

ज्यादातर कलर्स और प्रिंट्स सॉलिड शर्ट्स के साथ मैच करते हैं। फॉर्मल मौकों के लिए कॉन्ट्रास्टिंग कलर्स चुनें. जैसे लाइट ब्लू शर्ट के साथ डॉर्क ब्लू या रेड टाई, गुलाबी शर्ट के साथ नेवी ब्लू टाई. हल्के रंग की शर्ट के साथ गहरे रंग की टाई पहनें।

अपनी शर्ट के पैटर्न से अलग टाई सिलेक्ट करें। अगर आप स्ट्राइप्स के साथ स्ट्राइप्स पहन रहे हैं, तो उन्हें कॉन्ट्रास्ट करें, बड़ी स्ट्राइप्स शर्ट के साथ छोटी स्ट्राइप्स टाई या इसका उलटा भी कर सकते हैं। स्ट्राइप्स शर्ट के साथ कॉन्ट्रास्ट रंग की टाई पहनें।

व्हाइट कलर की शर्टनें के साथ ब्लैक टाई हमेशा से ही एवरग्रीन मैचिंग रहा है। इसमें पर्सनैलिटी उभर कर आती है साथ ही ये कॉम्बिनेशन ज़्यादातर पुरूषों के वॉडरोब में मौजूद होता है।

(साभार – फैशन 101)

गर्मियों में फैशन को न होने दें पस्त

गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है। इसके लिए आपको अपने वॉर्डरोब में भी कुछ गर्मियों के लिए कुछ चीज़ें शामिल करनी होगी। अब हल्के और ईज़ी-ब्रिज़ी कपड़े, फुटवेयर और एक्सेसरीज़ आपको समर डीवा बना देंगे. फ्रेंड्स के साथ हैंगआउट हो या कॉलेज और डे-आउटिंग, ये समर एसेंशियल्स आपको गर्मी से बचाने के साथ-साथ परफेक्ट लुक देंगे।

कंफी फ्लैट्स – हील्स को हटाकर अब आप आराम से अपने कंफर्टेबल फ्लैट्स कैरी कर सकती हैं।. ये शॉर्ट्स, जींस सबके साथ अच्छी लगेगी।

मैक्सी ड्रेस – अगर आपको शॉर्ट कपड़े पहनना पसंद नहीं है तो गर्मियों में मैक्सी ड्रेसेज़ कैरी करें। ये लॉन्ग होने के साथ ही गर्मियों के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।

सनग्लासेज़ – सनग्लासेज़ ना सिर्फ आपको धूप से बचाएंगे, बल्कि आपको स्टाइलिश लुक भी देंगे।

कॉटन कुर्ता – अब आप आराम से अपने वॉर्डरोब में रखें कुर्ते को पहन सकती हैं। गर्मियों में कॉटन फैब्रिक आपकी त्वचा के लिए अच्छा होता है। तो आप भी समर में कॉटन कुर्ता कैरी करें।

हैट या स्कार्फ – धूप से बचने के लिए एक ट्रेंडी हैट अच्छा ऑप्शन है। अगर आपको हैट कैरी करना नहीं पसंद तो आप स्कार्फ भी कैरी कर सकती हैं।

गमिर्यों को बनाएं सुपर कूल

ऑरेंज मिंट ड्रिंक

सामग्री – 1 लीटर गरम पानी, 4 बैग्‍स मिंट ग्रीन टी बैग, 10- 12 ऑरेंज स्‍लाइस, 3 से 4 इंच अदरक, – 25 एमएल ऑरेंज जूस,पुदीने की पत्‍ती आवश्यकतानुसार 2 चम्‍मच शक्‍कर, आइस क्‍यूब्‍स आवश्यकतानुसार

गार्निशिंग के लिये – ऑरेंज स्‍लाइस, पुदीना

 विधि –4 कप उबला पानी लें और उसमें टी बैग्‍स और संतरे के स्‍लाइस डाल कर 7 मिनट तक ढंक दें। फिर इसमें घिसा अदरक और शक्‍कर डालें। अब इस ड्रिंक को ठंडा होने दें। इसे छान कर इसमें ऑरेंज जूस डाल कर चलाएं। इस ड्रिंक से टी बैग निकाल लें और इसमें आइस क्‍यूब्‍स डाल दें। इसे पुदीना और ऑरेंज स्‍लाइस से गार्निश करें। आपका ऑरेंज मिंट ड्रिंक सर्व करने के लिये तैयार है।

 

 

पाइनएपल बनाना स्मूदी

सामग्री – टुकड़ों में कटी हुई 1 कप पाइनएपल, स्लाइस में कटा हुआ 1 केला
टुकड़ों में कटा हुआ 1 सेब,2 कप पालक, 1 कप पानी।

विधि  ब्लेंडर में पाइनएपल, केला, सेब, पालक और पानी डालें।  इसे तब तक ब्लेंड करें तक एक गाढ़ा पेस्ट नहीं बन जाता।  तैयार स्मूदी को गिलास में डालकर पीएं और सर्व करें।