Thursday, March 26, 2026
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एमवे ने एटिट्यूड कलर्स का स्प्रिंग समर कलेक्शन लान्च किया

 

डायरेक्ट सेलिंग एफएमसीजी कंपनी एमवे इंडिया नेअपने कलर कॉस्मेटिक्स पोर्टफोलियो के तहत स्प्रिंग समर कलेक्शन लान्च किया है।
एटिट्यूड कलर कॉस्मेटिक्स के 12वें संस्करण में एटिट्यूड इन्टेन्स लिप कलर के छह नए शेड और एटिट्यूड नेल पेन्ट्स के चार नए रंग शामिल हैं।


इसके अलावा एटिट्यूड स्प्रिंग समर कलेक्शन में आई लाइनर, मस्कारा, काजल पेंसिल और कॉम्पैक्ट पाउडर भी शामिल हैं ।

एटिट्यूड इन्टेन्स कलर लिपस्टिक को
उपयोगकर्ता के होठों को सघन और चमकदार रंग वाली फिनिश देने के लिए खासतौरपर तैयार किया गया है।
अपनी पिघलने और फैलने की प्रवृत्ति के चलते एटिट्यूडकलर लिपस्टिक इस्तेमाल में काफी सुगम है।
यह शीरीन और क्रीमी लपिस्टिकें धूप के प्रभाव से भी बचाव करती हैं।
छह रंगोंमें रस्टी रेड, फ्लेमिंगो फयूशिया, मोव क्वीन, इन्टेंस पिंक, ऑरेंज पॉप और फ्लर्टी पिंक शामिल हैं। एटिट्यूड इन्टेन्स कलर लिपस्टिक आकर्षक प्रीमियम काले रंग की पैकिंग में आती हैं।एटिट्यूड नेल पेन्ट्स में चार जीवंत रंग शामिल हैं, जिनमें ब्राइडल मरून, पिंक वोल्टेज, रॉयल रेड और कोरल बर्स्ट शामिल हैं।एमवे इंडिया की ब्यूटी एंड पर्सनल केयर की कैटेगरी हेड अनिशा शर्मा नेकहा कि नया स्प्रिंग समर कलेक्शन गर्मी में भी ‘कूल’ दिखने में मददगार साबित होगा एटिट्यूड खासतौर पर भारतीय युवाओं के लिए तैयार किया गया एक शुरुआती स्तर का प्रीमियम ब्रांड है।

लिटिल थेस्पियन और नीलांबर द्वारा आयोजित कविता का अड्डा  

 

कविता जंक्शन का दूसरा पड़ाव लिटिल थेस्पियन के सौजन्य से कल संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में आरा से आये अरूण शीतांश मुख्य अतिथि कवि के तौर पर आमंत्रित थे। लिटिल थेस्पियन ने उन्हें सम्मानित भी किया। गीतेश शर्मा जी ने अंगवस्त्र तथा अजहर आलम एस एम ने पुष्प गुच्छ देकर उनका स्वागत किया l जीतेन्द्र धीर ने उनका परिचय दिया l कार्यक्रम में अरूण शीतांश जी ने कविताओं का भी पाठ किया। उनके अलावा उमा झुनझुनवाला, कुसुम जैन , जीतेंद्र धीर, आशा पांडे, आनन्द गुप्ता, प्रेम कपूर, कल्पना झा, रितेश पाण्डेय, धर्मेन्द्र राय ने भी कविताओं का पाठ किया। जीतेन्द्र धीर, विमलेश त्रिपाठी, शाहिद हुसैन, विजय शर्मा ने गजलें सुनाई। गीतेश शर्मा ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि हम दुविधा की राजनीति के दौर से गुजर रहे हैं और इस दौर में कविता ही हमारा अस्त्र होना चाहिए।

कविता जंक्शन में इस बार विशेष कविता के तौर पर उपासना झा की कविता उदास औरतेंको चुना गया था। इस कविता का पाठ ममता पांडेय ने किया। कविता जंक्शन नीलांबर की हर माह होने वाली कविता गोष्ठी है जो अलग अलग स्थानों पर विशिष्ट सहयोग के साथ आयोजित किया जाता है। प्रसिद्ध नाटकरेंगती परछाईयाँ की लेखिका और लिटिल थेस्पियन की प्रमुख प्रतिनिधि उमा झुनझुनवाला ने आगामी कार्यक्रमों के बारे में भी बताया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन दिया लिटिल थेस्पियन के संस्थापक और प्रख्यात निर्देशक अजहर आलम ने।

लिटिल थेस्पियन व भारतीय भाषा परिषद द्वारा  कहानी तथा कविता का नाटकीय पाठ आयोजित

भारतीय भाषा परिषद् सभागार में हाल ही में कहानी और कविता के अभिनयात्मक पाठ का आयोजन किया गया। कहानी और कविता का अभिनयात्मक पाठ उनके गूढ़ अर्थों को और अच्छी तरह प्रेषित करने में एक महत्वपूर्ण कारक बन सकता है l इस तरह के पाठ से श्रोता नई ध्वनियों और नए बिम्बों से स्वतः जुड़ने लगता है क्योंकि हर अभिनेता अपने वाचन से उसके कई मर्म खोलता है और इसलिए कई अलग अलग बिम्बों की सृष्टि होती हैl

इसलिए लिटिल थेस्पियन ने कहानी और कविता की पाठ प्रस्तुति में अभिनय पक्ष की महत्ता को एक आवश्यक अंग मानते हुए भारतीय भाषा परिषद् के साथ मिलकर इसके प्रशिक्षण के लिए पिछले अगस्त 2016 से तीन महीने का एक सर्टिफिकेट कोर्स प्रारम्भ किया है जिसकी कक्षा प्रति शनिवार लिटिल थेस्पियन की निर्देशिका श्रीमती उमा झुनझुनवाला की निगरानी में होती है l दूसरे सत्र में कुल 15 प्रशिक्षार्थी थे। परीक्षार्थियों ने अमृता प्रीतम की बू, हरिशंकर परसाई की एक सुलझा आदमी, प्रेमचंद की मोटर के छींटे, रवींद्रनाथ टैगोर की छुट्टी और असगर वजाहत की गिरफ्त का पाठ किया। कविताओं में अयोध्यासिंहउपाध्यायहरिऔध – आँख का आँसू , भगवतीचरणवर्मा – मैं कब से ढूँढ़ रहा हूँ, महादेवी वर्मा – शून्य मंदिर में, नागार्जुन – मेरी भी आभा है इसमें, भवानीप्रसादमिश्र – आँखें बोलेंगी, केसरीनाथत्रिपाठी – अनजानी राह, विश्वनाथप्रसादतिवारी – कैसे लोग थे हम, अमृताप्रीतम – साल मुबारक, रघुवीरसहाय – गुलामी, सर्वेश्वरदयालसक्सेना – उठ मेरी बेटी सुबह हो गई, सर्वेश्वरदयाल सक्सेना – फसल, शमशेरबहादुरसिंह – घिर गया है समय का रथ,  कुमारअंबुज – मुश्किल तो मेरी है, और निर्मलातोदी – इस तरह मैं पढ़ी गयीं। इस सत्र के निर्णयाक सुप्रसिद्ध रंगकर्मी श्री एस. एम्. अज़हर आलम, मंजू श्रीवास्तव तथा उमा झुनझुनवाला थे l कार्यक्रम के अंत में भारतीय भाषा परिषद् के उपाध्यक्ष श्री जे. पी. टाटिया ने अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर उनका धन्यवाद ज्ञापन किया तथा परिषद् की सचिव श्रीमती बिमला पोद्दार ने सभी प्रशिक्षार्थियों का अभिनन्दन किया l श्री अजहर आलम तथा श्रीमती मंजू श्रीवास्तव ने प्रशिक्षार्थियों को सर्टिफिकेट बाँटे l अगला सत्र मई के आख़िर सप्ताह से आरम्भ होंगे l अगले सत्र के लिए प्रवेश चालू है l

 

 

 

फेसबुक पर गेम रिक्वेस्ट से हैं परेशान तो अपनाएं ये ट्रिक

फेसबुक पर आने वाले गेम रिक्वेस्ट से कई यूजर्स परेशान हैं, आप भी होंगे। कई बार तो ये गेम रिक्वेस्ट अच्छे लगते हैं लेकिन कई बार इन्हें देखकर गुस्सा भी आता है। तो चलिए आज आपको बताते हैं फेसबुक पर गेम रिक्वेस्ट बंद करने के तमाम तरीके।

फेसबुक लॉगिन करें। राइट साइड में दिख रहे त्रिकोण आइकन पर क्लिक करके ‘Settings’ में जाएं और सामने खुले टैब में बाईं तरह दिख रहे ‘Blocking’ पर क्लिक करें। अब आपके सामने ‘Manage Blocking‘ का पेज खुलेगा जिसके सबसे नीचे ‘Block Apps’ का ऑप्शन दिखेगा। इसमें जिस गेम का रिक्वेस्ट बंद करना चाहते हैं उस गेम का नाम लिखें। अब सामने आए नाम पर क्लिक करते ही वह गेम ब्लॉक हो जाएगा।

किसी खास दोस्त के गेम रिक्वेस्ट को ब्लॉक करें

यदि आप अपने किसी दोस्त के द्वारा भेजे जा रहे गेम रिक्वेस्ट से परेशान हैं तो ऊपर वाले स्टेप को फॉलो करें और Manage Blocking पेज पर जाएं। इस पेज के नीचे ‘Block Invites From’ का विकल्प दिखेगा। अब सामने दिख रहे सर्च बार में फ्रेंड का नाम लिखें और क्लिक करें। इसके बाद वह दोस्त आपको गेम रिक्वेस्ट नहीं भेज पाएगा।

बाल विवाह रोकने के लिए राज्य सरकारें आयु प्रमाणपत्र की अनिवार्यता सुनिश्चित करें: एनसीपीसीआर

नयी दिल्ली: देश में कई स्थानों पर बाल विवाह निरोधक कानून-2006 का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाने पर चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग :एनसीपीसीआर: ने राज्य सरकारों से कहा है कि वे 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी रोकने के लिए समाज के विभिन्न स्तरों पर आयु प्रमाणपत्र की अनिवार्यता सुनिश्चित करें।

एनसीपीसीआर के सदस्य यशवंत जैन ने ‘भाषा’ से कहा, ‘‘बाल विवाह विरोधी कानून का इतने वषरें बाद भी प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाना चिंता का विषय है। ऐसे में हमने राज्यों से कहा है कि शादी होने की स्थिति में आयु प्रमाणपत्र की अनिवार्यता सुनिश्चित की जाए। ऐसी व्यवस्था की जाए कि पंडित, मौलाना, पादरी या बारात घर के जिम्मेदार लोग शादी की स्थिति में लड़के और लड़की के आयु प्रमाणपत्र मांगे। इससे बाल विवाह पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।’’ बीते 25 अप्रैल को एनसीपीसीआर ने बाल विवाह निरोधक कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों की पहचान के लिए एक कानूनी विचार-विमर्श बैठक का आयोजन किया था जिसमें विधि एवं न्याय मंत्रालय, विधि आयोग और कुछ विधि संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए।
आयोग ने इस संबंध में विचार-विमर्श के लिए फरवरी में तेलंगाना के हैदराबाद और आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में बैठकों का आयोजन किया था।
जैन ने कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश में हमने देखा कि पंचायतों के स्तर पर शादी का पंजीकरण हो रहा है और बाल विवाह रोकने में इसका सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है। इसमें मुख्य कारण आयु प्रमाणपत्र की अनिवार्यता है।

 

बदल गई गांधी की खादी की किस्मत, 1 साल में 50,000 करोड़ का मुनाफा

आमतौर पर ग्राम उद्योग को खादी से बहुत ज्यादा मुनाफा नहीं मिलता। लेकिन ये काफी आश्चर्यजनक बात है कि पिछले साल खादी और ग्रामोद्योग द्वारा उत्पादित वस्तुओं ने 50 हजार करोड़ से ज्यादा की बिक्री की। सरकार भी खादी उद्योग को बढ़ावा दे रही है। ये आश्चर्य की बात है कि ग्राम उद्योगों द्वारा उत्पादित चीजों जैसे शहद, साबुन, सौंदर्य प्रसाधन, फर्नीचर और जैविक खाद्य पदार्थ जैसे उत्पादों की बाजार में भारी मांग है। इसमें से अधिकतर के उत्पादन में महिलाएं लगी हुई हैं।

खादी विकास और ग्रामोद्योग आयोग(केवीआईसी) के आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्त वर्ष के दौरान ग्रामोद्योग के वस्तुओं की बिक्री 24 प्रतिशत बढ़ गई है। अकेले खादी उत्पादों ने 2015-16 में 1,635 करोड़ रुपये से 33 फीसदी की बढ़त के साथ 2,005 करोड़ रुपये की बिक्री की।

संयुक्त केवीआईसी टर्नओवर के साथ खादी उद्योग कई उपभोक्ता कंपनियों के मुकाबले बड़ा बनता जा रहा है। 2018-19 में सरकार का लक्ष्य खादी उद्योग की बिक्री को बढ़ाकर 5 हजार करोड़ रुपए करने का है। हालांकि सरकार खादी और गांव द्वारा उत्पादित वस्तुओं को बढ़ावा देकर सरकार इसकी बिक्री को बढ़ा सकती है।

ब्रांड एक्सपर्ट हरीश बिजूर बताते हैं कि पहले खादी केवल राजनीतिक वर्ग की पसंद थी लेकिन आम उपभोक्ता भी आजकल प्राकृतिक उत्पादों की ओर ज्यादा तवज्जोे दे रहे हैं जिससे ये उद्योग विकास की ओर  तेजी से बढ़ रहा है।

खुशी की बात ये है कि खादी अंतररष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना रहा है। 21 विदेशी बाजारों में किए गए सर्वेक्षण के अनुसार खादी योग के साथ भारत के सबसे लोकप्रिय ब्रांड में से एक है। सरकारी संगठन अब इसके निर्यात पर विचार कर रहे हैं।  केवीआईसी के अध्यक्ष विनई कुमार सक्सेना ने बताया कि अभी हम प्रत्यक्ष निर्यात नहीं कर रहे हैं। लेकिन हम जल्द ही इसे बंद कर देंगे जिससे खादी को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड बनाने में मदद मिलेगी।

 

बच्चा गोद लेने का बदला नियम, नहीं होगी चुनने की आजादी

बच्चा गोद लेने की नीति में बदलाव के बाद अब भारतीय माता-पिता अपनी इच्छा के मुताबिक बच्चे को गोद नहीं लेे सकेंगे। ये नया नियम सोमवार से देशभर में लागू हो गया।

इस नियम के बाद होने वाले माता-पिता को नेशनल अडॉप्शन बॉडी के जरिए दिए गए विकल्प को ही चुनना होगा, उनके पास बच्चे के चुनाव की आजादी नहीं होगी। ऐसे में दंपति के पास एक ही विकल्प मौजूद होगा कि वो बच्चे को गोद लें या फिर नहीं।

अब तक माता-पिता सरकार के अडॉप्शन पोर्टल पर एक रजिस्ट्रेशन करते थे, जिसके बाद उन्हें तीन बच्चों की प्रोफाइल विकल्प के रूप में दी जाती थी। इन विकल्पों में से वो एक बच्चा चुन सकते थे,लेकिन अब इस प्रक्रिया का अंत हो चुका है।

क्यों हुआ इस नियम में बड़ा बदलाव

चाइल्ड अडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी (CARA) के सीईओ दीपक कुमार कहते हैं कि बच्चा गोद लेने की दर अब तक बहुत धीमी थी। कई बार विकल्प देने की स्थिति में कई बच्चे काफी वक्त तक अपने होने वाले मां-बाप से वंचित रह जाते थे।

बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया में अब बदलाव के बाद रजिस्ट्रेशन करने वाले मां-बाप को एक बच्चे की प्रोफाइल भेजी जाएगी, जिसे स्वीकार करने के लिए उन्हें 48 घंटे का समय दिया जाएगा। इस वक्त में या तो वो बच्चा गोद ले सकते हैं, या फिर इस विकल्प को छोड़ सकते हैं।

बच्चे को गोद करने के लिए अब होने वाले मां-बाप को 20 दिन के अंदर सारी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

 

पहली नजर का प्यार है या ये कुछ और है

क्या आपको लगता है कि पहली नजर में वाकई किसी को प्यार होता है, या हो सकता है कि वो सिर्फ लालसा हो? इसी को लेकर एक सर्वे किया गया जिसमें बताया गया है कि चार में तीन लोग पहली नजर में हुए प्यार पर विश्वास करते हैं। सर्वे में ये भी सामने आया कि 61% महिलाएं पहली नजर के प्यार पर विश्वास करती हैं लेकिन 30-40 साल की उम्र के लोग इस बात पर विश्वास नहीं रखते।

डेटिंग साइट ‘EliteSingles’ के द्वारा किए गए इस सर्वे के अनुसार, 84% नौजवान जिनकी उम्र 18-29 के बीच है उनका मानना है कि पहली नजर में प्यार संभव है लेकिन 30 से ज्यादा उम्र के 65% लोग इस बात को नहीं मानते।

‘जब आपको इसका अनुभव होता है तो आपको पता चलता है कि ये सच्चा है और जब प्यार हो जाता है तो आपको लगेगा कि ये फीलिंग आपको दोबारा नहीं आ सकती।’

उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसा तब होता है जब आप अपने काम में व्यस्त होते हैं और इस बात की अपेक्षा भी नहीं करते।

मैच डॉट कॉम की एक अलग अध्ययन के अनुसार, 41% मर्द और 29% महिलाओं ने बताया कि उन्हें पहली नजर में प्यार हो गया था।

रिलेशनशिप विशेषज्ञ निकोल का मानना है कि पहली नजर में किसी को प्यार नहीं होता बल्कि वो सिर्फ एक लालसा होती है। उन्होंने कहा, ‘पहली नजर में लोगों को शारीरिक आकर्षण हो सकता है और उसे प्यार का नाम देना गलत होगा।’

उनके अनुसार, प्यार एक गहरा संबंध है इसमें आपको उस व्यक्ति की चिंता होने लगती है जो सिर्फ किसी को देखते ही संभव नहीं है। हालांकि आपकी लालसा बाद में जरूर प्यार का रूप ले सकती है।

 

नहीं चलेगी बिल्डरों की मनमानी, लागू हुआ रियल एस्टेट कानून

देश भर में सपनों का घर खरीदने वालों के लिए खुशखबरी है। रियल एस्टेट रेग्युलेशन एक्ट (रेरा) सोमवार से लागू हो रहा है। केंद्र सरकार का दावा है कि इसके बाद देश का रियल एस्टेट सेक्टर नए दौर में पहुंचेगा। इससे फ्लैट के खरीददारों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि कानून लागू होने के बाद बिल्डर किसी भी हालत में खरीददार से धोखाधड़ी नहीं कर सकेगा। नियम तोड़ने पर बिल्डर को तीन साल तक की जेल हो सकती है।

दरअसल, बीते साल मार्च में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रेरा पर मुहर लगा दी थी। इसके बाद एक्ट के 59 प्रावधान एक मई 2016 को लागू भी हो गए थे। इस बीच, एक्ट के अधीन कानूनों का निर्माण होने के साथ रियल एस्टेट अथारिटी के गठन समेत दूसरी जरूरी औपचारिकताओं को पूरा किया गया। बचे 32 प्रावधानों के एक मई 2017 से लागू होने के साथ पूरा एक्ट व्यवहार में आ गया है। मंत्रालय ने नए मॉडल कानून को सभी राज्यों को भेज दिया गया है।

नए प्रावधानों के अनुसार सभी बिल्डरों को जुलाई आखिर तक पहले से चल रहे और नए आवासीय प्रोजेक्ट को रियल एस्टेट अथॉरिटी में पंजीकरण कराना होगा। वहीं, हर प्रोजेक्ट का अथॉरिटी से सेक्शन प्लान और लेआउट प्लान अपनी वेबसाइट के साथ सभी कार्यालयों की साइट्स पर छह वर्ग फीट के बोर्ड पर लगाना होगा।

इसके बाद ही बिल्डर फ्लैट की बुकिंग शुरू कर सकेगा। केंद्रीय आवास और शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि इस प्रावधान से फ्लैट या प्लॉट की बुकिंग करने से पहले ही बायर्स को प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी मिल जाएगी। बाद में बिल्डर इसमें कोई हेराफेरी नहीं कर सकता।

समझौते के वक्त ही कब्जा देने की तारीख भी बतानी होगी
एक्ट में प्रावधान है कि बिल्डर खरीददार से समझौता करते वक्त ही यह बता देगा कि फ्लैट कब तक उसे सौंप देगा। इससे बिल्डर व खरीददार के बीच किसी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश नहीं बचेगी। पजेशन देने या लेने में देरी होने पर बिल्डर या खरीददार को स्टेट बैंक के रेट ऑफ इंटरेस्ट से दो फीसदी अधिक ब्याज देना होगा। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि अगर शर्तों का उल्लंघन किया गया तो बिल्डर को तीन साल तक की जेल भी हो सकती है।
एक्ट की खास बातें…

76 हजार से अधिक कंपनियां होंगी पंजीकृत
मंत्रालय का मानना है कि रीयल एस्टेट सेक्टर में फिलहाल 76 हजार से ज्यादा कंपनियां काम कर रही है। 31 जुलाई तक इनको रीयल एस्टेट रेग्युलेटर के पास अपना पंजीकरण कराना होगा। बीते साल मार्च में राज्यसभा में बिल को मंजूरी मिलने पर इनकी संख्या 76,044 थी।
इसमें से दिल्ली में 17,431, पश्चिम बंगाल में 17,010, महाराष्ट्र में 11,160, उत्तर प्रदेश में 71,36, राजस्थान में 3,054, तमिलनाडु में 3,004, कर्नाटक में 2,261, तेलंगाना में 2,211, हरियाणा में 2,121, मध्य प्रदेश में 1,956, केरल में 1,270, पंजाब में 1,202 और ओडिशा में 1,006 कंपनियां हैं। वेंकैया नायडू ने बताया कि नौ साल के इंतजार के बाद रीयल एस्टेट एक्ट लागू हो गया है। आवासीय सेक्टर के लिए यह नए युग की शुरुआत है। कानून से यह क्षेत्र उत्तरदायी होने के साथ पारदर्शी होगा। वहीं, इसमें प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

  एक्ट की खास बातें:  
– तीन महीने के भीतर नए और पुराने का अथारिटी में पंजीकरण होगा।
– तयशुदा नियमों के अनुसार प्रोजेक्ट पर होगा काम, खरीददार व बिल्डर के बीच गलतफहमी नहीं होगी।
– नया प्रोजेक्ट शुरू करते वक्त खरीददारों से इकट्ठा की गई राशि का 70 फीसदी अलग बैंक अकाउंट में रखना होगा। वहीं, पुराने प्रोजेक्ट की बची राशि के 70 फीसदी का कोष बनेगा।
– पांच साल तक फ्लैट के रख-रखाव का जिम्मा डेवलपर के पास होगा।
– रेगुलरिटी अथॉरिटी या अपीलीय प्राधिकरण को आदेश का उल्लंघन करने पर डेवलपर को तीन साल और एजेंट या खरीददार को एक साल जेल की सजा हो सकती है।
– बिल्डर व खरीददार की ब्याज दर एबीआई के सीमांत लागत पर देय होगी। किसी भी हालत में देरी होने पर 2 फीसदी अतिरिक्त देना होगा।

 

दिग्गज अभिनेता-नेता विनोद खन्ना नहीं रहे

मुंबई : अपने जमाने के दिग्गज फिल्म अभिनेता और सांसद विनोद खन्ना का एक अस्पताल में कैंसर से निधन हो गया। वह 70 साल के थे। विनोद को शरीर में पानी की कमी के चलते 31 मार्च को सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल के एक आधिकारिक बयान के अनुसार अभिनेता ब्लैडर कैंसर से पीड़ित थे। उनके परिवार में पत्नी कविता खन्ना और चार संतानें राहुल, अक्षय, साक्षी और श्रद्धा हैं।
विनोद खन्ना के दो बेटे राहुल और अक्षय भी अभिनेता हैं और वे उनकी पहली पत्नी गीतांजलि के पुत्र हैं। हिंदी फिल्म जगत के सबसे आकषर्क और खूबसूरत अभिनेताओं में गिने जाने वाले इस अभिनेता ने वर्ष 1968 में ‘मन का मीत’ फिल्म के साथ अभिनय की दुनिया में कदम रखा था।

पहली बार 1971 में गुलजार की फिल्म ‘मेरे अपने’ में उनके अभिनय पर लोगों की नजर गयी।

इसके बाद 70 और 80 के दशक में ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘रेशमा और शेरा’, ‘ऐलान’, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘हेरा फेरी’, ‘कुर्बानी’, ‘दयावान’ और ‘जुर्म’ जैसी फिल्मों में उनकी भूमिकाएं यादगार बन गयीं।

जब वह अपनी लोकप्रियता के चरम पर थे, उस दौर में उन्होंने अभिनय छोड़कर पुणे में आचार्य रजनीश :ओशो: के आश्रम में जाकर आध्यात्मिक जीवन शुरू कर दिया। वह साल 1982 था।

हालांकि अस्सी के दशक के आखिर में वह फिर सिनेमा की ओर लौटे और ‘इंसाफ’ तथा ‘सत्यमेव जयते’ जैसी फिल्मों से सफलता हासिल की। अंतिम बार वह वर्ष 2015 में शाहरूख खान अभिनीत ‘दिलवाले’ में नजर आए थे।

विनोद खन्ना के प्रति सम्मान जताते हुए ‘बाहुबली’ के निर्माताओं ने फिल्म के बहुप्रतीक्षित प्रीमियर को रद्द कर दिया। फिल्म निर्देशक एस एस राजामौलि और उसके हिंदी संस्करण को लाने वाले फिल्मकार करण जौहर ने एक बयान जारी कर यह घोषणा की।

बयान में कहा गया, ‘‘हम अपने प्यारे, दिग्गज अभिनेता विनोद खन्ना के निधन से बहुत दुखी हैं। उनके निधन से हम सभी को बहुत धक्का लगा है। दिवंगत आत्मा के सम्मान में ‘बाहुबली : द कनक्लूजन’ का प्रीमियर समारोह रद्द किया जाता है