Friday, March 27, 2026
खबर एवं विज्ञापन हेतु सम्पर्क करें - [email protected]
Home Blog Page 772

गंगोत्री ग्लेशियर में हो रहा ये बड़ा बदलाव

0

 

ग्लेशियरों के खिसकने के चिंताजनक तथ्यों के बीच एक अच्छी खबर है। वैज्ञानिकों के मुताबिक गंगोत्री ग्लेशियर के खिसकने की दर कम हुई है। एक दशक पहले तक यह ग्लेशियर हर वर्ष करीब 12 मीटर खिसक रहा था लेकिन इसके खिसकने की गति अब 10 मीटर पर आ गई है। गंगोत्री ग्लेशियर पर साल 1999 से अध्ययन कर रहे जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल के वैज्ञानिकों ने यह परिवर्तन पाया है।

संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक इंजीनियर किरीट कुमार ने बताया कि 2004-05 के दौरान गंगोत्री ग्लेशियर के पीछे खिसकने की दर करीब 12 मीटर प्रति वर्ष थी। लेकिन दस वर्षों के भीतर इस ग्लेशियर के पीछे जाने की दर में कमी आई है। अब यह हर साल करीब 10 मीटर पीछे खिसक रहा है। ऐसा इस सीजन में वहां हुई अधिक बर्फबारी और इंसानी गतिविधियों को नियंत्रित करने की वजह से हुआ है।
बता दें कि गंगोत्री ग्लेशियर, गोमुख का मूल स्वरूप पिघलने और टूटने के कारण खो गया है। जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान कोसी कटारमल के वैज्ञानिक 1999 से गंगोत्री ग्लेशियर पर अध्ययन कर रहे हैं।

वैज्ञानिक अगले तीन साल तक धौलीगंगा नदी के उद्गम क्षेत्र में स्थित बालिंग और नेवला ग्लेशियरों का अध्ययन करेंगे। अध्ययन के अंतर्गत ग्लेशियरों के पीछे खिसकने और पिघलने की दर, ग्लेशियरों से डिस्चार्ज होने वाले पानी की मात्रा, वेग आदि के बारे में आंकड़े जुटाए जाएंगे। वैज्ञानिकों ने इन दोनों ग्लेशियरों के सर्वेक्षण का कार्य शुरू कर दिया है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक कुमाऊं में स्थित पिंडारी, मिलम, कफनी, सुंदरढूंगा, रालम आदि ग्लेशियर भी हर साल पीछे खिसक रहे हैं। पिंडारी ग्लेशियर के सिकुड़ने की दर ज्यादा तेज है। भौगोलिक परिस्थितियों के कारण पिंडारी ग्लेशियर को बीते वर्षों में काफी नुकसान पहुंचा है और यह ग्लेशियर काफी टूट भी चुका है। यह हर साल औसतन 22-23 मीटर पीछे खिसक रहा है। पिथौरागढ़ जिले में स्थित मिलम ग्लेशियर के पीछे खिसकने की दर 17-18 मीटर प्रति वर्ष है। कुमाऊं में स्थित अन्य ग्लेशियर भी औसतन 10 से 15 मीटर पीछे खिसक रहे हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक ग्लेशियरों के पीछे खिसकने के कुछ कारण प्राकृतिक तो कई मानवजनित हैं। पृथ्वी का तापमान बढ़ना भी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने का एक कारण है। मानवजनित कारणों में प्रदूषण, ग्लेशियरों के निकट इंसानी गतिविधियों का बढ़ना है जिनपर रोकथाम से नुकसान को कम किया जा सकता है।

 

 

किदाम्बी श्रीकांत ने ऑस्ट्रेलिया ओपन सुपर सीरीज़ में रचा इतिहास

0

पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में छाए हुए भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी किदाम्बी श्रीकांत ने अपने शानदार फॉर्म को जारी रखते हुए रविवार को ऑस्ट्रेलिया ओपन सुपर सीरीज़ के पुरुष एकल वर्ग के फाइनल में भी उलटफेर कर डाला और मौजूदा ओलिम्पिक और विश्व चैम्पियन चीन के चेन लॉन्ग को 22-20, 21-16 से हराकर खिताब पर कब्ज़ा जमा लिया।

पुरुष एकल वर्ग के फाइनल में 11वीं वरीयता प्राप्त किदाम्बी श्रीकांत का यह लगातार दूसरा सुपर सीरीज़ खिताब है, और इसी के साथ वह लगातार दो सुपर सीरीज़ खिताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ी बन गए हैं। श्रीकांत ने कुछ ही दिन पहले इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज़ खिताब भी जीता था, जो उनके करियर का पहला सुपर सीरीज़ खिताब था, और पहली बार किसी भारतीय पुरुष खिलाड़ी ने उसे हासिल किया था।

किदाम्बी श्रीकांत ऑस्ट्रेलिया ओपन टूर्नामेंट से पहले इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज़ के अलावा सिंगापुर ओपन के फाइनल में भी पहुंचे थे, सो वह, ऑस्ट्रेलिया ओपन के फाइनल में पहुंचते ही दुनिया के पांचवें ऐसे खिलाड़ी बने, जिन्होंने लगातार तीन सुपर सीरीज़ फाइनल में प्रवेश किया।

जहां तक ऑस्ट्रेलिया ओपन सुपर सीरीज़ का सवाल है, किदाम्बी श्रीकांत इसे जीतने वाले भी पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी हैं। रविवार को खेले गए मैच में श्रीकांत ने शानदार खेल का मुज़ाहिरा किया, और दुनिया में छठे नंबर के खिलाड़ी, जो इस वर्ष के ऑल इंग्लैंड चैम्पियन भी हैं, को संभलने का कोई मौका दिए बिना शिकस्त दे डाली। 46 तक मिनट तक चले मैच की शुरुआत में किदाम्बी श्रीकांत और चेन लॉन्ग के बीच मुकाबला कांटे का लग रहा था, लेकिन जल्द ही भारतीय सितारे ने मैच पर पकड़ बना ली।

जानिए ईद-उल-फितर से जुड़ी ये रोचक बातें

0

रमजान के पवित्र महीने में मनाया जाता है ईद-उल-फितर का त्योहार। यह दुनिया भर के मुसलमानों का एक बहद ही अहम त्योहार है। ईद-उल-फितर या ईद मुसलमानों के लिए उनके धर्म का सबसे बड़ा त्योहर है। इस त्योहार को दुनिया भर के मुसलमान मनाते हैं। यह त्योहार नेकियों के महीने रमजान में मनाया जाता है। कहते हैं कि रमजान का महीना इस्लामिक कैलेण्डर हिजरी कैलेण्डर का सबसे पाक महीना है। इस महीने में किए गए पुण्य का फल कई गुना ज्यादा होकर मिलता है। इस महीने में हर मुसमलान को अल्लाह का शुक्र अदा करना, रोज रखना, जकात देना, दान करना आदि का फर्ज है. एक नजर ड़ालते हैं ईद और रमजान से जुड़ी उन रोचक बातों पर…

रमजान के महीने के आखि‍री दिन जब आसमान में चांद नजर आता है, तो उसके दूसरे दिन ईद मनाई जाती है।

मुसलमान समुदाय पूरे रमजान माह में रोजा रखते हैं. इस्लामिक कैलेण्डर के मुताबिक रमजान का महीना 30 दिन का होता है. ऐसे में मुसलमान पूर 30 दिन रोजा रखते हैं।

रमजान के दिनों में रोजा रखने वाला मुसलमान सहरी और इफ्तार के दौरान ही कुछ ग्रहण करता है। इसके अलावा वह पानी तक नहीं पीता।

हिजरी कैलेण्डर के अनुसार ईद साल में दो बार आती है। एक ईद होती है ईद-उल-फितर और दूसरी को कहा जाता है ईद-उल-जुहा। ईद-उल-फितर को ईद भी कहा जाता है। इसके अलावा इसे मीठी ईद भी कहा जाता है। जबकि ईद-उल-जुहा को बकरीद के नाम से भी जाना जाता है।

माना जाता है‍ कि रमजान के महीने की 27वीं रात, जिसे शब-ए-क़द्र को कहा जाता है, को क़ुरान का नुज़ूल यानी अवतरण हुआ था। रमजान के महीने में ही कुरान का अवतरण माना जाता है. यही वजह है कि इस महीने में ज्यादा कुरान पढ़ने का फर्ज है।

ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है, तो इस ईद पर सेवइयाँ बनाना बहुत जरूरी है।

 

ये है जगन्नाथ मंदिर में 56 भोग बनाने वाले 500 रसोइयों की रसोई के रहस्य

0

ओडिशा के पुरी में हर साल होने वाली भगवान जगन्नाथ की यात्रा अपना का अपना महत्व है। इस बार यह यात्रा 25 जून रविवार के दिन है।

जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस विशाल रसोई में भगवान को चढ़ाने वाले महाप्रसाद तैयार करने के लिए लगभग 500 रसोइए तथा उनके 300 सहयोगी काम करते हैं।

मान्यता है कि इस रसोई में जो भी भोग बनाया जाता है, उसका निर्माण माता लक्ष्मी की देखरेख में ही होता है। यह रसोई विश्व की सबसे बड़ी रसोई के रूप में जानी जाती है। यह मंदिर के दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित है।

यहां बनाया जाने वाला हर पकवान हिंदू धर्म पुस्तकों के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही बनाया जाता है। भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है। उसमें किसी भी रूप में प्याज व लहसुन का प्रयोग नहीं किया जाता।

भोग मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया जाता है। यहां रसोई के पास ही दो कुएं हैं जिन्हें गंगा व यमुना कहा जाता है। केवल इनसे निकले पानी से ही भोग का निर्माण किया जाता है। इस रसोई में 56 प्रकार के भोगों का निर्माण किया जाता है।

रसोई में पकाने के लिए भोजन की मात्रा पूरे वर्ष के लिए रहती है। प्रसाद की एक भी मात्रा कभी भी यह व्यर्थ नहीं जाएगी, चाहे कुछ हजार लोगों से 20 लाख लोगों को खिला सकते हैं।

मंदिर में भोग पकाने के लिए 7 मिट्टी के बर्तन एक दूसरे पर रखे जाते हैं और लकड़ी पर पकाया जाता है। इस प्रक्रिया में सबसे ऊपर रखे बर्तन की भोग सामग्री पहले पकती है फिर क्रमश: नीचे की तरफ एक के बाद भोग तैयार होता जाता है।

विश्वनाथ मंदिर के पांच सीढ़ियां चढ़ने पर आता है आनंदबाजार। यह वही जगह है जहां महाप्रसाद मिलता है। कहते हैं इस महाप्रसाद की देख-रेख स्वयं माता लक्ष्मी करती हैं।

जगन्नाथ मंदिर की चार खास बातें

  1. जगन्नाथ मंदिर की ऊंचाई 65 मीटर यानी 214 फीट और 8 इंच है। मंदिर के चारों दिशाओं में बड़े-बड़े द्वार हैं। मान्यता है कि इसकी परिक्रमा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
  2. अरुणस्तंभ से 22 सीढ़ियां चढ़ने पर ऊपर की ओर विश्वनाथ मंदिर है। मान्यता है कि विश्वनाथ के दर्शन के बाद ही भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए जाते हैं तभी पुण्य प्राप्त होता है।
  3. पांच मीटर लंबी और एक मीटर चौड़ी वेदी पर भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम की लकड़ी की मूर्तियां हैं, जिनकी पूजा होती है।
  4. मान्यता है कि रथ यात्रा के माध्यम से भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी गुंदेचा के यहां जाते हैं और पूरे नौ दिन वहां रहते हैं।

 

मीठे अन्दाज में कहिए ईद मुबारक

0

बादाम फिरनी

सामग्री- 4 चम्‍मच पीसा गुड़, 10-15 बादाम, 3 कप दूध, 1/4 कप (पानी में भिगोया हुआ) चावल, 1/2 चम्‍मच हरी इलायची पाउडर, 1 चम्‍मच गुलाब जल।

विधि- सबसे पहले एक गहरे पैन में दूध डाल कर गाढ़ा होने तक उबाल लें। अब चावल से पानी को छान लें और उसे मिक्‍सी में बारीक पीस लें। चावल के साथ हल्‍का सा दूध मिक्‍स करें। अब इस चावल को दूध में डाल कर चलाएं। मिश्रण को हल्‍की आंच पर पकाएं और खूब गाढा कर लें। इसके बाद इसमें इलायची पावडर और पिसा हुआ गुड डालें। मिक्‍स करें। मिश्रण को उबालें और फिर इसमें कटे हुए बादाम डालें। एक बार हो जाने के बाद आंच बंद कर दें और मिश्रण को ठंडा होने दें। अब इसे मिट्टी के कटोरे में भर कर फ्रिज में रखें। आपकी बादाम फिरनी तैयार है, इसे ठंडा-ठंडा सर्व करें।

 

 

मीठी सेवइयाँ

सामग्री एक कप टूटी सेवइयाँ, 2 कप दूध, आधा चम्मच इलायची पाउडर, 1/4 कप मिल्क पाउडर (चाहें तो), 5 से 6 कटे बादाम, 5 से 6 कतरा हुआ पिस्ता, 5 से 6 कटे कतरा काजू, 10 से 12 किशमिश, स्वादानुसार चीनी, एक बड़ा चम्मच घी।

विधि – पैन में घी डालें इसे गैस पर गर्म होने के लिए रखें।  घी गर्म हो जाए तो आंच मध्यम करके घी में सेवइयाँ डालकर चलाएं। इन्हें सुनहरा होने तक भूनें। इसके बाद सेवइयों में सभी काजू, बादाम, पिस्ता और किशमिश डालकर मिलाएं। अब आंच धीमी करके पैन में दूध डालकर चलाएं। दूध में सेवइयां लगातार चलाएं और 3 से 4 मिनट पकाएं। इसके बाद इसमें चीनी डालकर मिला लें। फिर सेवइयों में इलायची पाउडर डालकर मिलाएं।  अब सेवइयाँ को गाढ़ा होने तक पकाएं इसे बीच-बीच में चलाते रहें. जब सेवैयां पूरी तरह दूध सोख लें तो गैस बंद कर दें। तैयार हैं मीठी सेवइयाँ। इन्हें ड्राई फ्रूट्स से गार्निश करके गर्मागर्म या ठंडा सर्व करें।

 

भगवान जगन्नाथ का स्वागत मधुर स्वाद से

0

चावल के पापड़

सामग्री – 250 ग्राम चावल का आटा,  500 मिलीलीटर पानी, 1 चम्मच जीरा, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, नमक स्वादानुसार

विधि – सबसे पहले गैस चूल्हा जलाकर एक बड़ा भगोना चढ़ाइए।अब इस बरतन में पानी, चावल का आटा, जीरा, नमक और मिर्च डालकर कर लगातार चलाते रहें।इसे गाढ़ा होने तक पकाएं जब यह खूब बुलबुलें के रूप में पकने लगें तब यह घोल पापड़ बनाने के लिए तैयार है।ध्यान रहे इसे जितने अच्छे से धीमी धीमी आंच पर इसे पकाएंगे। पापड़ उतने ही स्वादिष्ट बनेंगे।यह भी ध्यान रहे घोल न अधिक गाढ़ा हो और न अधिक पतला।जब घोल तैयार हो जाए तब धूप में किसी प्लास्टिक पर गोल कटोरी की सहायता से इसे छोटे छोटे गोल गोल पापड़ फैलायें।जब ये पापड़ धूप में सूख जाएं तब इन्हें तेल में तल लें।

 

पनीर की जलेबी

सामग्री – – 200 ग्राम (1 कप) पनीर, – 25 से 30 केसर के धागे, – ¼ कप मैदा, – 1.5 कप (300 ग्राम) चीनी, – जलेबी तलने के लिए घी

विधि –  केसर में थोड़ा से पानी डालकर रख दीजिए ताकि ये पानी में घुल जाए।  मैदा में थोड़ा सा पानी डालकर गुठलियां खत्म होने तक इसे घोल लीजिए. फिर, इसमें थोड़ा और पानी डालकर अच्छे से 4 से 5 मिनिट फैंटकर पतला कर लीजिए. घोल इस कन्सिस्टेन्सी का बनना चाहिए कि चम्मच से गिराएं तो धार की तरह गिरे. इस घोल को ढककर किसी गरम जगह पर 1 घंटे के लिए रख दीजिए ताकि मैदा फूलकर सैट हो जाए. एक बर्तन में चीनी और 1 कप से थोड़ा ज्यादा (2 टेबल स्पून पानी) डाल दीजिए. चाशनी को चीनी घुलने के 2 से 3 मिनिट बाद तक पकने दीजिए। इसी बीच, पनीर को मसल लीजिए। इसके लिए, एक थाली में थोड़ा सा पनीर डालिए और इसे हथेली से दबाव देते हुए मसल लीजिए। फिर, इसमें 1 टेबल स्पून दूध और डालकर और अच्‍छे से घोलकर इसे चिकना कर लीजिए। चाशनी चैक करने के लिए 2 से 3 बूंदे प्याली में गिरा लीजिए और ठंडा होने के बाद चाशनी को उंगली और अंगूठे में चिपकाकर देखिए, यह शहद की तरह चिपकनी चाहिए, चाशनी में तार बनने की आवश्यकता नही है।  चाशनी तैयार है। तैयार चाशनी में केसर का पानी डालकर मिक्स कर दीजिए। एक प्याले में मैश्ड पनीर डाल लीजिए। साथ ही तैयार मैदा के घोल को अच्छे से फैंट लीजिए।  फिर, इस घोल को पनीर में डाल दीजिए और मैदा तथा पनीर के एकसार होने तक अच्छे से मिलाते करते हुए फैंटते रहिए। जलेबी का घोल तैयार है।  जलेबियां बनाने के लिए एक कोन लीजिए और इसे एक गिलास पर रख लीजिए। इस कोन में जलेबी का घोल डाल लीजिए।  कोन को ऊपर से बांधकर पकड़ लीजिए और नीचे की साइड कैंची से छोटा सा छेद कर दीजिए।  कढ़ाही में घी गरम कर लीजिए। घी गरम होने के बाद, इसमें जरा सा घोल डालकर देख लीजिए कि घी ठीक से गरम हुआ या नही। अगर घोल सिककर ऊपर आ रहा है, तो घी पर्याप्त गरम है। गरम घी में कोन को दबाते हुए सादा जलेबियों की तरह ही गोल-गोल जलेबियां बनाते जाइए और जलेबियों को धीमी व मध्यम आंच पर तल लीजिए। जैसे ही ये नीचे से ब्राउन हो जाए, वैसे ही इन्हें पलट दीजिए और जलेबियों को दोनों ओर गोल्डन ब्राउन होने तक तल लीजिए।सारी जलेबियां इसी तरह तल लीजिए। तली जलेबियों को एक प्लेट में निकाल लीजिए। इसके बाद, जलेबियों को चाशनी में डाल दीजिए और 2 मिनट चाशनी में ही डूबे रहने दीजिए। 2 मिनट बाद, चाशनी से जलेबियां निकालकर प्लेट में रख लीजिए और जैसे-जैसे जलेबियां तलती जाएं, उन्हें प्लेट में निकालिए और फिर चाशनी में 2 मिनट डुबोकर दूसरी प्लेट में निकालकर रखते जाइए।

समाज स्त्री मुक्ति के प्रति सहज और उदार नहीं हुआ है

0

सुप्रसिद्ध लेखिका श्रीमती सुधा अरोड़ा के सानिध्य में कोलकाता की संस्था ‘साहित्यिकी’ की मासिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। अध्यक्ष किरण सिपानी ने हिन्दी की प्रतिष्ठित लेखिका,कवियत्री सुधा अरोड़ा का परिचय दिया।पर्यावरण प्रदूषण के प्रति चिंता प्रकट करते हुए सुधाजी ने  पर्यावरण प्रदूषण से बचने के कुई उपाय भी सुझाए।  हर स्त्री अपने स्तर पर जागरूक होकर कुछ कदम उठाए जिससे यह धरती स्वच्छ और खूबसूरत  बनी रहे ,ऐसी उम्मीद भी उन्होंने जाहिर की।

सुधा जी ने पर्यावरण, स्त्री और  सामाजिक मुद्दों पर रचित अपनी कई गंभीर और भावप्रवण कविताओं​ क्या पाठ किया,जैसे- ताकि बची रहे यह धरती’,’कम से कम एक दरवाजा खुला रहे’,’यहीं कहीं था मेरा घर’,’राखी बाँधकर लौटती हुई बहन’,’अकेली औरत का रोना’,’ अकेली औरत का हंसना’ , ‘रहोगी तुम वही’,’लीव मी अलोन’ आदि। सुधा जी ने स्त्री संघर्ष विषयक प्रश्नों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि अभी भी स्त्री को अपनी आजादी के लिए लंबी लड़ाई लड़नी है। ऊपर ऊपर बहुत कुछ बदला है पर अभी भी समाज स्त्री मुक्ति के प्रति सहज और उदार नहीं हुआ है। । इस साहित्यिक परिसंवाद में किरण सिपानी,गीता दूबे,सुषमा हंस,आशा जयसवाल,रेवा जाजोदिया,वाणीश्री बाजोरिया,रेणु गौरिसरिया,माया गरानी , मीना चतुर्वेदी ,पूनम आदि ने अंश ग्रहण किया।

भारत में हिंदी की जनप्रियता बढ़ी है – -केदारनाथ सिंह

0

कोलकाता -भारतीय भाषा परिषद में आयोजित युवा कवि सम्मेलन को संबोधित करते हुए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह ने कहा है कि विश्‍व की नई स्थितियों में अपने दुर्भाग्य से लड़ते हुए हिंदी की जनप्रियता बढ़ी है। कवि का काम है कि वे अपनी भाषा को समृद्ध करे। युवा कवियों से बड़ी आशाएँ हैं। उन्होंने अपनी कविताओं के पाठ से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ‘कुंभनदास के प्रति’ कविता में कहा कि एक दिल्ली में कई सीकरी हैं, जबकि ‘संतन को कहा सीकरी सो काम’। मैं दिल्ली में रहता हूँ, पर मेरा मन गाँव में बसता है। सभा की अध्यक्षता करते हुए डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि कवि मानवता के सांस्कृतिक विश्‍वदूत हैं, वे संकीर्णताओं से मुक्त होते हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर में परिषद कवि केदारनाथ सिंह के सान्निध्य में युवा कवियों के लिए कविता कार्यशाला आयोजित करेगी जैसा 1984 में नागार्जुन के सान्निध्य में आयोजित की गई थी।  कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि मानिक बच्छावत और आलोक शर्मा के अलावा सेराज खान बातिश, निर्मला तोदी, विमलेश त्रिपाठी, निशांत, आनंद गुप्ता, डॉ.शुभ्रा उपाध्याय, राहुल शर्मा, रितेश पांडेय, विजय शर्मा, सुषमा त्रिपाठी, धर्मेन्द्र राय ने अपनी कविताओं का पाठ किया।

 

योग द्वारा टाइप-2 मधुमेह पर कारगर नियंत्रण

0

*योगाचार्य डॉ. आनंद बालयोगी भवनानी

योग का आमूल विज्ञान एक बेहतरीन जीवनशैली है, जिसे इस प्रकार तैयार किया गया है कि उसके द्वारा तनाव से उत्‍पन्‍न विकारों और जीवनशैली से उत्‍पन्‍न होने वाले मधुमेह जैसे विकारों को प्रभावशाली तरीके से दुरूस्‍त किया जा सकता है। आधुनिक अनुसंधानों से पता लगा है कि योग द्वारा मनोवैज्ञानिक और शारीरिक लाभ प्राप्‍त होते है। योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है (इन्‍स और विन्‍सेंट, 2007)।

बताया गया है कि योग आधारित जीवनशैली में थोड़े से बदलाव और तनाव कम करने के प्रयासों के जरिये हृदय रोग तथा मधुमेह के जोखिमों को 9 दिनों में ही कम किया जा सकता है (बिजलानी, 2005)। इसके अलावा 1980 और 2007 के बीच प्रकाशित होने वाले 32 आलेखों की समीक्षा से पता लगा है कि योग द्वारा वजन, रक्‍तचाप, शर्करा के स्‍तर और बढ़े हुये कोलेस्‍ट्रॉल को कम किया जा सकता है (यांग, 2007)।

अध्‍ययनों से पता लगा है कि मधुमेह के कारण शरीर की केन्‍द्रीय स्‍नायु तंत्र प्रणाली प्रभावित होती है। 6 सप्‍ताह की योग थेरेपी कार्यक्रम के जरिये मधुमेह के मरीजों में श्रवण प्रतिक्रिया समय में अभूतपूर्व कमी देखी गई है (मदनमोहन, 1984 : मदनमोहन, 2012)। यह भी प‍ता लगा है कि योग से स्‍नायु तंत्र में और मधुमेह के मरीजों के बायो-कैमिकल प्रोफाइल में सुधार होता है।

योगाभ्‍यास से मधुमेह के रखरखाव और उसकी रोकथाम में सहायता होती है तथा उच्‍च रक्‍तचाप और डिसलिपिडेमिया जैसी परिस्थितियों से बचाव होता है। लंबे समय तक योगाभ्‍यास करने से इन्‍सुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ती है और शरीर के वजन या कमर के घेरे तथा इन्‍सुलिन संवेदनशीलता के बीच का नकारात्‍मक संबंध घट जाता है (छाया, 2008)।

योग का कोई साइफ इफेक्ट नहीं है। इसके कई संपार्श्विक लाभ हैं। यह इतना सुरक्षित और आसान है कि इसे बीमार, बुजुर्ग और दिव्यांग भी कर सकते हैं। सुरक्षित, साधारण और आर्थिक रूप से किफायती थेरेपी होने के चलते इसे मधुमेह रोगियों के लिए काफी सहायक माना गया है।

इन्स और विन्सेन्ट (2007) की एक व्यापक समीक्षा ने इससे कई जोखिम सूचकों में लाभदायक बदलाव पाए जैसे ग्लूकोस सहिष्णुता, इंसुलिन संवेदनशीलता, लिपिड प्रोफाइल, एन्थ्रोपोमेट्रिक विशेषताओं, रक्तचाप, ऑक्सीडेटिव तनाव, कोग्यूलेशन प्रोफाइल, सिम्पेथेटिक एक्टिवेशन और पलमोनरी फंक्शन में इसे काफी फायदेमंद पाया गया। उन्होंने सुझाव दिया है कि योग व्यस्कों में टाइफ 2 डीएम के साथ जोखिम कर करता है। इसके अलावा हृदय संबंधी जटिलताओं की रोकथाम और प्रबंधन के लिए भी यह काफी फायदेमंद है।

इस तरह से योग टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस और इससे जुड़ी जटिलताओं की स्थिति में जोखिम कम करने में मदद कर सकता है

पुरानी बीमारियों को रोकने और उसे नियंत्रित करने में भी योग काफी मददगार साबित हो सकता है। जनसमूह के स्वास्थ्य में सुधार के लिए योग एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। योग में बीमारी को बढ़ने से रोकने की क्षमता है और यदि इसे जल्द शुरू किया जाए तो ये इलाज को भी प्रभावित करता है (भवनानी, 2013)।

डीएएम के प्रबंधन में उपयोग किए जाने वाले बुनियादी योग सिद्धांतों में शामिल हैं:

मनोवैज्ञानिक पुनर्स्थापन और यम-नियम, चुतर्भावना, प्रतिपक्ष भावानाम आदि दृष्टिकोणों के विकास।
काउंसलिंग, जाथी, आसन, क्रिया, प्रणायाम से तनाव प्रबंधन
सूर्य नमस्कार, आसन, क्रिया और प्रणायाम जैसी शारीरिक गतिविधि के माध्यम से ग्लूकोज को बेहतर बनाने में मदद करना
मधुमेह के लिए योग थेरेपीः मधुमेह की रोकथाम और इसे नियंत्रित करने में योग एक महत्तवपूर्ण भूमिका निभाता है। योग का महत्त्व उन लोगों के लिए और महत्त्वपूर्ण हैं जो द्वितीय प्रकार या गैर इनसोलिन मधुमेह से पीड़ित है। यह एसे लोगो को अधिक प्रभावी ढंग से उपचार करने में मदद करता है। योग को अगर नियमित रुप से दिनचर्या में शामिल किया जाए तो इससे बीमारियों पर रोकथाम के साथ-साथ वजन कम करने में मदद मिलती है।

नियमित रुप से व्यायामः नियमित रूप से व्यायाम करने से अतिरिक्त ब्लड शुगर का उपयोग करने में मदद मिलता है। जितना संभव हो सके पैदल चलना चाहिएं या और योग थेरेपी के लिए तराकी भी एक बेहतर उपाय है।

खान-पान पर नियंत्रणः नियमित रुप से कार्बोहाइड्रेट के साथ हल्का भोजन, रिफाइंड से बने खाद्य पदार्थों और जंक फूड से बचें, हरी सब्जी सलाद, करेला और नीम का सेवन करें,पानी की भरपूर मात्रा लें।
सूर्यनमस्कारः तीन या छः बार सूर्य नमस्कार करने से शर्करा का स्तर कम हो जाता है। और इससे वजन को कम करने में भी मदद मिलती है।

योगा आसनः कमर का आसनः
खड़े होकरः त्रिकोण आसन, अर्ध कटी चक्रासन
बैठकरः वक्रासन, अर्ध मत्सयेंद्र, भारतवाजा आसन, शशांग आसन
झुककरः जात्र परिवर्तन आसन
पेट के बल आसनः
बैठ करः उत्कट आसन, जानु सिरासा आसन, पश्चिमोत्तन आसन, नवा आसन, योग मुद्रा आसन, स्तम्बम आसन और मयूर आसन
झुककरः पवन मुक्त आसन, धनुर आसन, भुजंग आसन, शलभ आसन, नौका आसन

पीठ के बल लेट कर किए जाने वाले आसनः सर्वांग आसन, जानो सिरसा इन सर्वांग आसन, कर्णपीडी आसन, और हाला आसन
प्रणायामः एडम प्रणायाम और एएए ध्वनि के साथ विभागा और प्रणव प्रणायाम।
भाषत्रिका प्रणायाम रक्त शर्करा को बेहतर करने में मदद करता है।
तनाव में कमी के लिए सावित्री प्रणायाम, चन्द्र अनुलोम प्रणायाम, नाडी शुद्धि प्रणायाम।
मुद्रा और बंधनः विपारिता कारिणी और महामुद्रा।
उद्यियना, मूल और जालंधरा बंध।
आसनः शैव आसन, मकरा आसन, काया क्रिया और योगनिद्रा

ध्यानः ओम जाप, अजाप जाप, प्राण दर्शन और प्रणव ध्यान।

***

लेखक अंतर्राष्ट्रीय योग शिक्षा और अनुसंधान केन्द्र, पुदुचेरी के अध्यक्ष हैं।

(साभार – पत्र सूचना कार्यालय)

शांति व आनंद के लिए राजयोग

0
  • बी.के सुशांत

आपाधापी भरे इस युग में जन-सामान्‍य बहुत कुछ हासिल करने की चाह में
मानसिक अशांति और शारीरिक व्‍याधियों को आमंत्रण दे रहा है। लेकिन विकास की
प्रक्रिया में साझीदार होना वक्‍त की आवश्‍यकता है पर अंधाधुंध दौड़ना शरीर और मन
को देने वाली यंत्रणा है। 21 जून को विश्‍व अन्‍तर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के अवसर पर
जन-मानस में योग के प्रति जो सकारात्‍मक भावनाएं उत्‍पन्‍न हो रही है वह वास्‍तव
में एक सुखद अनुभव है। भारत भूमि में वर्षों से योग प्रचालित रहा है और आज
विश्‍व भी इसे मान्‍यता प्रदान कर रहा है। राजयोग एक ऐसी मानसिक अवस्‍था है जिसे
शांत चित्‍त से कोई भी कर सकता है।

राजयोग अन्तर जगत की ओर एक यात्रा है। यह स्वयं को जानने या यूँ कहें
कि पुन: पहचानने की यात्रा है। राजयोग अर्थात् अपनी भागदौड़ भरी जिन्दगी से थोड़ा
समय निकालकर शान्ति से बैठकर आत्म निरीक्षण करना। इस तरह के समय
निकालने से हम अपने चेतना के मर्म की ओर लौट आते हैं। इस आधुनिक दुनिया में,
हम अपनी जिन्दगी से इतने दूर निकल आये हैं कि हम अपनी सच्ची मन की शान्ति
और शक्ति को भूल गये हैं। फिर जब हमारी जड़े कमजोर होने लगती हैं तो हम
इधर-उधर के आकर्षणों में फँसने लग जाते हैं और यही से हम तनाव महसूस करने
लग जाते हैं। आहिस्ते-आहिस्ते ये तनाव हमारी मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक
स्वास्थ्य को असन्तुलित कर हमें बीमारियों में भी जकड़ सकता है।

राजयोग एक ऐसा योग है जिसे हर कोई कर सकता हैं। इसे कहीं भी और
किसी भी समय किया जा सकता है। राज योग को आँखे खोलकर किया जाता है
इसलिए ये अभ्यास सरल और आसान है। योग एक ऐसी स्‍थिति है जिसमे हम
अपनी रोजमर्रा की चिन्ताओ से परे जाते है ओर हम अपने आध्यात्मिक सशक्तिकरण
का आरंभ करते है। आध्यात्मिक जागृति हमें व्यर्थ और नकारात्मक भावों से दूर कर
अच्छे और सकारात्मक विचार चुनने की शक्ति देता है। हम परिस्थितियों का जवाब
जल्दबाज़ी मे देने के बजाए सोच समझ के करेंगे । हम समरसता में जीने लगते हैं ।
बेहतर, खुशनुम: और मज़बूत रिश्ते बना ;अपने जीवन मे सकारात्मक परिवर्तन कर
पाते हैं।

योगाभ्यास कैसे किया जाये?

राजयोग करना वास्तव मे बहुत सरल है, इसलिए इस योग को दूसरे शब्दों में
‘सहज राजयोग’ भी कहा जाता है। परन्तु कभी कभार शुरुआत मे इसकी थोड़ी सी
जानकारी की जरूरत पड़ती है। इस अभ्यास के लिए नीचए 5 सरल कदम बताए गये
हैं। अभीयास करते करते बहुत जलद ही आपको एन 5 क़दमो की भी आवश्‍यकता नहीं
रहेगी – केवल एक है विचार से आप एक शान्त स्थिति में पहुंच जायेंगे।

पहला कदम – विश्रान्ति
विश्रान्ति अर्थात्‍ अपने तनाव और उलझनों को परे रखते हुए अपने मन और शरीर
को शान्त और स्थिर करना ।

दूसरा चरण – एकाग्रता
विश्रांत होने के बाद वर्त्तमान पे अपना ध्यान केन्द्रित करना।

तीसरा चरण – मनन करना
स्वयं की आन्तरिक दुनिया और अपने मूल्यों की गहराई में जाना…

चौथा चरण – अनुभूति
जब मेरी समझ और मेरे अहसासो का मेल होता हैं तो और ही गहरी और सार्थक
वास्तविकता की अनुभूति होती है

पांचवा चरण – योगाभ्यास
एक ही संकल्प में एकाग्र रहके अपने मूल अस्तित्व को याद करते हुए सुस्वस्थ
स्थिति को पुन: जागृत करना।

राजयोग के बारे में और जानिए ये क्या है? इसे क्यों, कैसे, कहाँ और कब किया जाये
और किस प्रकार के लोग इसका अभ्यास कर सकते हैं।

योगाभ्यास कहाँ कर सकते है ?

जीवन पहले से ही विविधताओं से भरा हुआ है, बहुत सारी गतिविधियाँ और
जिम्मेदारियाँ होती हैं। ऐसे में हम राजयोग अभ्यास के लिए समय कैसे निकाल सकते
हैं? यही तो राजयोग की सुन्दरता है कि इसे कहीं भी और कभी भी किया जा सकता
है।

घर में

राजयोग अभ्यास के लिए खास रूम अथवा जगह की आवश्यकता नहीं है। कोई
भी एकान्त और शान्त स्थान या आरामदायक कुर्सी भी चल सकती है। अपनी
आन्तरिक गहराई को समझने के लिए लगातार और नियमित समय निश्चित करें।
कुछ ही समय में आपको ऐसी जगह मिलेगी जिसकी तरफ आप आकर्षित होने लगेंगे
जहाँ पर आपने अपनी शान्ति की स्थिति से और आत्म चिन्तन के अभ्यास से शान्ति
का वातावरण बनाया होगा। ऐसी नियुक्त जगह पर आप जब ओर जितनी बार बी
जाना चाहे तो जा सकते है ।

आपके कार्य स्थल पर

जहां भी आप कामकाज करते है, यदि आप थोड़ा सा असामान्य/ रचनात्म‍क
तरीके से सोचेंगे तो ज़रूर आप को अपना मैडिटेशन कहा और कैसे करना है, उस के
लिए कोई अच्छा सुजाव निकलेगा | मिसाल के तोर पे पानी पीने के समय कुछ क्षणों
के लिए अपने भीतर की शान्ति को सुनने का अभ्यास करें। या फिर किसी कार्य-वश
एक जगह से दूसरी जगह जाते वक्त कुछ मिनटों के लिए शान्ति का अनुभव कर
सकते हैं । आपके सहकर्मियों को पता भी नहीं चलेगा कि आप मेडिटेशन कर रहे हैं
लेकिन वो आपकी स्थिरतम शान्ति को ज़रूर महसूस करेंगे।

सफर के दौरान

एक जगह से दूसरी जगह जाने में जो समय आपको लगता है, चाहे पैदल, बस या ट्रेन
का सफर हो, इसे हम इस्तेमाल कर सकते हैं, अपनी भीतरी निशब्दता और मौन की
यात्रा कर सकते हैं। आंखे खुली रखकर राजयोग अभ्यास की पद्धति इस भीतरी यात्रा
को सम्भव और व्यावहारिक बना देता है।
अन्दर या बाहर?

आप किसी भी स्थान पे स्वात्मानुभति और परमशक्‍ति के साथ जुड़ सकते हो।
सम्परूण पृथ्वी योग करने के लिये उपयुक्त है। चाहे घर के अंदर या बाहिर – सूरज की
रोशनी से भरा हुआ समुद्री किनारा हो या फिर किसी अस्पताल का प्रतिक्षा कक्ष हो ।
कहीं भी शान्ति और स्थिरता का अभ्यास कर सकते है। अपने पसन्द की कोई भी
जगह चुन सकते हैं।

भीड़ में भी शान्ति का अनुभव

जैसे ही आप अपने भीतर की शांति को बनाना सीख लेते हैं, आपको महसूस होगा
कि आप किसी बी वक्त बहुत ही सरलता से उस अवस्था को पा सकते हैं। जब
आपके आस-पास बहुत सारे लोग हों या फिर आपके आस-पास बहुत शोर शराब हों या
फिर उपद्रव हो तो भी आप आराम से आपने अंदर की शान्ततम जगह में जा सकते
हैं – जो आपकी आत्मा की मौलिक स्थिति है ।

अकेले में या किसी के साथ

योग का सर्वश्रेष्ठ और सुन्दर अनुभव तब हो सकता है जब आप अकेले परमशक्‍ति के
साथ हों। आप चाहो तो ये अभ्यास स्वयं बैठकर कर सकते हैं , या फिर औरो के
साथ मिलकर भी कर सकते हैं । विश्व भर में ब्रह्माकुमारीज़ के सेन्टर्स हैं जहाँ पर
मैडिटेशन हॉल / रूम बने हुए हैं जहाँ आप कभी भी जाकर शान्ति के उन क्षणों को
अनुभव कर सकते हैं। कुछ ब्रह्माकुमारीज़ सेन्टर्स को इनर स्पेश भी कहा जाता है।

विश्व भर में एक विचारधारा के लोग कभी-कभी एकसाथ मिलकर मेडिटेशन करना
चाहते हैं। इस समझ के साथ कि सभी मिलजुल कर एक ही समय पर किये गये
सकारात्मक विचारों के योगदान से उनके शुभकामनाओं की शक्ति और पहुंच ओर भी
अधिक हो सकती हैं।

सम्पूर्ण विश्व के लिए एक घण्टा योग

1978 में विश्व भर में हर जगह पर एक घण्टे तक शान्ति से बैठकर योगाभ्यास करने
की यह प्रथा शुरू हुई जो महीने के हर तीसरे रविवार को होती है। अगर हम यह
याद रखें कि विश्व हमारा अपना घर है तो हम सभी मिलजुलकर विश्व के घाव भरके
एक आशा की किरण फैला सकते हैं।

रिट्रीट – शान्ति देने वाले स्थान

पूरे दिन में शान्ति और सुकून का वातावरण खुद बनाने के अलावा कभी-कभी हम
अपनी नियमित दिनचर्या से समय निकालकर एक आध्यात्मिक रिट्रीट के स्थान पर
भी जासकते हैं।

किसी भी प्रकार की रिट्रीट में जाना पुनः अपने भीतर से जुड़ने की दिशा में रखा
गया पहला कदम हो सकता है। कभी कभी अपने आपको परिस्थिति से अलग करने
का विचार आता है । विशेष समय निकालकर बाहरी तौर पर भौतिक रूप से कुछ
परिवर्तन करने का ख्याल आता है। लेकिन वास्तविक रिट्रीट का, क्या जिसमें हम
अपने भीतर की गहराईयों तक उतर जायें? जब हम अपने ऊपर काम करते हैं तब हम
अपनी भीतर की शान्त जगह पर लौटते हैं जहाँ हम अपने वास्तविक स्व के साथ पुन:
जुड़ सकते हैं। यह हमारा आध्यात्मिक स्व है जो हमारे अन्तर में है। वो हिस्सा जो
कभी भी बदलता नहीं है।

स्वयं के लिए विशेष समय निकालना यह मेडिटेशन के सफर की प्रक्रिया है। मेडिटेशन
हमें अपने आन्तरिक स्व के सन्तुलन की तरफ लौटाता है, जहाँ हमारे विचार,
भावनायें, ऊर्जा और समय का उत्कृष्ट और बहुमूल्य उपयोग होता है। अपने
वास्तविक पहचान की सही समझ और मन की जागृति की स्थिति पर सबकुछ निर्भर
करता है। यहाँ से हम अपने जीवन के अत्यधिक सकारात्मक अनुभवों के दरवाजे को
खोलने की शुरुआत करते हैं। हम अपने जीवन में भौतिक चीजों के बजाए आध्यात्मिक
बातों को महत्व देना शुरु करते हैं। हम मूल्याधारित गुणवत्तापूर्ण जीवन के रचना की
नींव डालते हैं, जहाँ हम उदारता और प्रेम को अपने जीवन में लाने में समर्थ होते हैं।
हमारे विचार स्पष्ट होते हैं और निर्णय क्षमता बढ़ती है।

यह सच्ची रिट्रीट की सहायता से हम उस अवस्था को पूर्व पासकते है जहाँ हम पुनः
अपनी सत्यता से जुड़कर सदियों पुराने प्रश्न, “मैं कौन हूँ” का उत्तर, समाज ओर
अनुभव से पा लेते हैं। और तब ही हम आदि और अन्त के संगम पर पोहंचते हैं।
जहाँ पर इस प्रश्न की समाप्ति होती हैं वहीं पर अनुभवों की शुरुआत होती है, इस
सफर का आनन्द लें….

राजयोग के लिए समय बनाना

बहुत से लोग कहते हैं कि वे योग करना चाहते हैं। बहुत से लोग ये भी कहते हैं कि
वे योग नहीं करते, और क्यों?

क्योंकि वे कहते हैं उन्हें फुर्सत नहीं। तो कैसे और कहाँ वे व्यस्त लोग योग करने के
लिए समय निकालते हैं?

पहले पहल सुबह

जिस पल आप अपनी आँख खोलते हैं – जागृत हो जाते हैं ,वहीं योग के लिए सबसे
सुन्दर समय है। खुद का अभिवादन करें, कितनी शक्तिशाली सकारात्मक आत्मा हैं
आप।

भोजन के समय

भोजन करने से पहले, कुछ पल के लिए यह विचार करें कि भोजन मिलना भी
सौभाग्य है और इस समझ से विचार करें कि किस तरह हमारे विचार भोजन को
प्रभावित करते हैं। हम जो सोचते हैं, कर्म करते हैं और वही बनते हैं। इस तरह अपने
भोजन को सकारात्मक विचारों से भरना, कृतज्ञता और करुणा से भरा अर्थात्‍ हम खुद
भी इन अच्छी बातों को ग्रहण करते हैं।

रात्रि में

रात्रि का समय सोने से पूर्व अन्तिम योगाभ्यास के लिये बहुत अच्छा समय है। सोने
के समय अपने लिए कुछ वक्त निश्चित करें, शान्त होकर खुद के साथ बैठें, सारे दिन
का पुनरावलोकन करें कि आज क्या अच्छा किया और कल के दिन में क्या सुधार ला
सकते हैं। सारे दिन की बातें बन्द करते हुए उसे मन से बाहर निकाल दें। इस तरह
अपने दिन का समापन करते हुए, आप बिना परेशानी के, शान्तिपूर्वक सो सकें।

कभी भी

जब कभी भी आप अपने को चिन्तित अवस्था में पाये वा निर्णय न ले पाने की
स्थिति में पायें, उसी समय आप अपने अन्दर जायें और प्रति उत्तर का इन्तजार करें।

वास्‍तव में राजयोग एक ऐसी प्रक्रिया है जो किसी भी व्‍यक्‍ति को मन की
शांति प्रदान करने में सहायक होती है। जीवन में आशा-निराशा, संघर्ष, अवरोध और
कठिनाइयां सामान्‍य स्‍थितियां है लेकिन आवश्‍यकता इस बात की है कि मानव इन से
ऊपर उठकर सहज जीवन किस तरह जीए राजयोग सांसों की ऐसी ही शक्‍ति है
अंतर्राष्‍ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भारत की इस पुरातन परंपरा को हम फिर से
जीवन में उतारे और जीवन को सही अर्थ दें।

लेखक बह्रमाकुमारी संस्‍था के राष्‍ट्रीय मीडिया संयोजक है।

(साभार – पत्र सूचना कार्यालय)