नयी दिल्ली : न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने आज भारत के 45वें प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ग्रहण की। वह उस पीठ का हिस्सा थे जिसने 16 दिसंबर को हुए सामूहिक बलात्कार मामले में चार दोषियों को मौत की सजा की पुष्टि की थी और सिनेमा हॉलों में राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाने का आदेश पारित किया था।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में एक सादे समारोह में न्यायमूर्ति मिश्रा को पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति मिश्रा ने ईश्वर के नाम शपथ अंग्रेजी में ली।
न्यायमूर्ति जे एस खेहर के कल सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति मिश्रा (64) ने यह पद संभाला है।
न्यायमूर्ति मिश्रा दो अक्तूबर 2018 तक इस पद पर अपनी सेवाएं देंगे।
स्थापित परिपाटी के अनुसार न्यायमूर्ति खेहर ने पिछले महीने मिश्रा को देश का आगामी प्रधान न्यायाधीश नामित किया था।
वह पटना उच्च न्यायालय और दिल्ली उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। अक्तूबर 2011 में वह शीर्ष अदालत में आ गए थे।
वर्ष 1977 में वकालत शुरू करने वाले न्यायमूर्ति मिश्रा ने उड़ीसा उच्च न्यायालय में संवैधानिक, दीवानी, फौजदारी, राजस्व, सेवा और बिक्री कर मामलों में प्रैक्टिस शुरू की।
उन्हें 17 जनवरी, 1996 को उड़ीसा उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति मिली। उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में भी सेवाएं दी। वह 19 दिसंबर 1997 में स्थायी न्यायाधीश बने।
न्यायमूर्ति मिश्रा वर्तमान में उस पीठ की अध्यक्षता कर रहे हैं जो कावेरी तथा कृष्णा नदी जल विवाद, बीसीसीआई सुधार और सहारा मामले समेत कई अन्य मामलों की सुनवाई कर रही है। उनकी ही अध्यक्षता में एक पीठ ने देशभर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान को अनिवार्य बनाने का आदेश दिया था।
वह उस पीठ का भी हिस्सा थे जिसने 16 दिसंबर 2012 सामूहिक बलात्कार मामले में दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी थी।
न्यायमूर्ति मिश्रा और न्यायमूर्ति पीसी पंत ने मई माह में मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि अभिव्यक्ति के अधिकार का यह मतलब नहीं है कि कोई भी किसी की भी मानहानि कर सकता है। इस अपराध में दो वर्ष के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
शपथ ग्रहण समारोह में उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्री मौजूद थे।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद भी इस समारोह में शामिल हुए।
नयी दिल्ली : एक अध्ययन में दावा किया गया है कि बलात्कार पीड़िताओं की चिकित्सा जांच स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं की जाती है। अध्ययन में इस प्रकार की चिकित्सा जांच करने के लिये स्वास्थ्य कर्मियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करने की मांग की गयी है।
यह अध्ययन कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की सहायता से गैर सरकारी संगठन ‘पार्टनर्स फॉर लॉ इन डेवलपमेंट’ ने किया है।
इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि कुछ बलात्कार पीड़िताओं को प्राथमिकी दर्ज कराने में पुलिस के हाथों उत्पीड़न और अवरोध का अनुभव भी करना पड़ा।
अध्ययन के मुताबिक प्राथिमिकी की प्रति तुरंत उपलब्ध नहीं करायी जाती है और अक्सर पीड़िताओं को इसकी प्रति हासिल करने के लिये पुलिस का चक्कर लगाना पड़ता है। हालांकि बाद में प्राथिमिकी की एक प्रति पीड़ितों को भेज दी जाती है।
अध्ययन में कहा गया है कि ये स्वास्थ्य जांच स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों में अनुरूप नहीं की जाती हैं।
इसमें कहा गया है कि औपचारिक तौर पर बलात्कार पीड़िताओं से स्वास्थ्य जांच की सहमति नहीं ली जाती है और अक्सर ही इसके लिये बाद में उनके हस्ताक्षर अथवा अंगूठे के निशान ले लिए जाते हैं।
अध्ययन रिपोर्ट में बलात्कार पीड़िता के केवल उन्हीं कपड़ों को फोरेंसिक जांच के लिये भेजने की अनुशंसा की गयी है, जोकि उस अपराध से जुड़े हों।
इसके अलावा बलात्कार पीड़िता अथवा उसके गवाह एवं उसके रिश्तेदारों को सुरक्षा प्रदान करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
मुकदमे के दौरान अदालत में लगे कैमरा के माध्यम सेअभियोजन पक्ष को अदालत में आरोपी की धमकी से बचाया जाता है। रिपोर्ट में दिल्ली में चार त्वरित अदालतों में चल रहे 16 मामले को शामिल किया गया था। अध्ययन में जिन मामलों को शामिल किया गया है, वे परिचितों द्वारा बलात्कार से संबंधित हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत और दुनिया भर में होने वाले बलात्कार के अधिकतर मामले इसी श्रेणी में आते हैं।
नयी दिल्ली : केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बैंकों का कर्ज लेकर उसे नहीं लौटा पाने वाली निजी कंपनियों के मालिकों से कहा है कि वह अपना बकाया चुकायें या फिर कारोबार छोड़कर उसका नियंत्रण किसी दूसरे के हवाले कर दें।
भारतीय रिजर्व बैंक ने दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून के तहत हाल ही में ऐसी 12 बड़ी कर्जदार कंपनियों के खिलाफ दिवाला कारवाई शुरू करने का बैंकों को निर्देश दिया है। इन कंपनियों में दो लाख करोड़ रुपये का कर्ज फंसा हुआ है। यह राशि बैंकों के कुल फंसे कर्ज का एक चौथाई के करीब है।
बैंकों से कर्ज लेकर उसे नहीं लौटा पा रहे कुछ और कर्जदारों के खिलाफ भी कारवाई को अधिसूचित किया जा रहा है।
जेटली ने कहा कि सरकार बैंकों को और पूंजी उपलब्ध कराने के लिये तैयार है लेकिन फंसे कर्ज का समाधान सरकार के लिये बड़ी प्राथमिकता है।
वित्त मंत्री ने यहां इकोनोमिस्ट सम्मेलन को संबोधित करते हुये कहा, ‘‘दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता कानून के जरिये, मैं समझता हूं कि देश में पहली बार फंसे कर्ज के मामले में सक्रिय कारवाई की जा रही है।’’ उन्होंने कहा कि फंसे कर्ज का समाधान करने में समय लगेगा। ‘‘आप इस मामले में एक झटके में सर्जिकल कारवाई नहीं कर सकते हैं।’’ वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने बैंकों को पहले ही 70,000 करोड़ रुपये तक पूंजी उपलब्ध करा दी है और उन्हें और पूंजी देने के लिये भी तैयार है। कुछ बैंक बाजार से भी पूंजी जुटा सकते हैं। ‘‘हम बैंकिंग क्षेत्र में एकीकरण की कारवाई आगे बढ़ाने के लिये भी सक्रियता से काम कर रहे हैं। हमें ज्यादा बैंक नहीं चाहिये, हमें कम लेकिन मजबूत बैंक चाहिये।’’ केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सप्ताह ही देश के सार्वजनिक क्षेत्र के 21 बैंकों के बीच विलय प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया ताकि इन बैंकों की कार्यक्षमता और उनमें संचालन को बेहतर बनाया जा सके।
लखनऊ, 30 अगस्त (भाषा ) उत्तर प्रदेश के सैफई स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज का नामकरण ‘हॉकी के जादूगर’ मेजर ध्यानचन्द के नाम पर किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी घोषणा की है।
मुख्यमंत्री ने कल ध्यानचन्द की जयन्ती ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ‘हॉकी के जादूगर’ को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि मेजर ध्यानचन्द ने उत्कृष्ट खेल से पूरी दुनिया में देश को पहचान दिलायी है । उन्होंने एलान किया कि सैफई स्थित स्पोर्ट्स कॉलेज का नामकरण मेजर ध्यानचन्द के नाम पर किया जाएगा।
योगी ने कहा कि केन्द्र सरकार की तर्ज पर राज्य सरकार भी ओलम्पिक खेलों में प्रदेश के स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को छह करोड़, रजत पदक विजेता खिलाड़ी को चार करोड़ तथा कांस्य पदक विजेता खिलाड़ी को दो करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि देगी।
इसी प्रकार, एशियाई एवं राष्ट्रमण्डल खेलों में भी केन्द्र सरकार की पुरस्कार राशि की तर्ज पर ही प्रदेश के पदक विजेता खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर 14 खिलाड़ियों को लक्ष्मण पुरस्कार एवं रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार तथा आठ अन्य खिलाड़ियों को विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में उम्दा प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया।
योगी ने कहा कि प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उनको उचित अवसर मुहैया कराये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए वर्तमान राज्य सरकार खेल के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का काम कर रही है।
मियामी : ( एएफपी ) टेनिस सुपरस्टार सेरेना विलियम्स ने बेटी को जन्म दिया जिससे उनके साथी खिलाड़ियों और प्रशंसकों की ओर से उन्हें बधाइयों का तांता लग गया है । सेरेना की बड़ी बहन वीनस जब अमेरिकी ओपन तीसरे दौर के मैच के लिये कोर्ट पर आई तो कहा कि वह बहुत उत्साहित है । उसने कहा ,‘‘ मैं टेनिस के बारे में सवालों का जवाब दूंगी ।’’ स्पेन के रफेल नडाल ने ट्विटर पर लिखा ,‘‘ बधाई हो सेरेना । इस खुशी के लिये ।’’ अमेरिका की महान टेनिस खिलाड़ी क्रिस एवर्ट ने कहा ,‘‘ मैं उसके लिये बहुत खुश हूं । वह अपनी बेटी के लिये आदर्श रोलमाडल होगी।
दोनों एक दूसरे के आग़ोश में थे, ओम् की साँसे जैसे ठहर गयी थीं सिया के होंठों पर । खो दिया था ख़ुद को एक दूसरे में । जैसे उनके होंठों पर रुकी हुई प्यास, सदियों से बंजर में रही हो। थोड़ी देर बाद अलग हुए । साँसें नॉर्मल हो रही थीं और बेक़ाबू पर क़ाबू । शर्म से सिया की आँखें झुक गयी थीं । ओम् सिया को घर छोड़ कर अपने घर चला गया । ऑफ़िस में दिन भर बात करने के बहाने ढूंढ़ता रहता। एक दिन इसी चक्कर में बॉस ने ओम् की टेबल ही अलग करवा दी। पर इश्क़ तो अपना रास्ता बना चुका था। दोनों बेपरवाह जी रहे थे एक साथ। जल्दी आकर ऑफ़िस के नीचे मिलना और रात को सिया के घर उसे ड्रॉप करना, ओम् की ज़िंदगी का हिस्सा हो गया था । सिया के साथ बिताए हर एक लम्हे को वो एक लाख के बराबर जीता था । उसे लाइफ से और कुछ नहीं चाहिए था । सिया ही उसके सब कुछ थी।
कुछ समय के बाद ओम् को सिया से एक अलग तरह का इग्नॉरेंस फील हुआ। सिया फ़ोन पर अक्सर किसी से बात करती रहती और पूछने पर भड़क जाती । सिया को खोने के डर से कभी खुल के नहीं पूछता था । एक दिन दोनों मूवी देखने गए। मूवी स्टार्ट होने में थोड़ा समय बचा हुआ था कि सिया अपना फ़ोन ओम् को देकर वॉशरूम चली गयी । सिया का फ़ोन बजा एक मेसैज के साथ।
– एंड व्हाट अबाउट हनीमून ?????
ओम् फट गया ग़ुस्से से । सिया के बाहर निकलते ही बरस पड़ा….
– हाँ मैं कर रही हूँ शादी, क्यूँकि मैं करना चाहती हूँ । वो तुमसे पाँच गुना ज़्यादा कमाता है
और हमारा रिश्ता?
सी….. तुम कुछ ज़्यादा ही सीरियस हो गए हो
और तड़ाक से एक तमाचे के साथ सब कुछ साइलेंट हो गया।
रूम में आते ही किसी हारे हुए खिलाड़ी की तरह गिर गया । एक झटके में उसके शरीर से आत्मा निकल गयी ।
समय ने करवट बदली धीरे – धीरे अपने आप को सम्हाल लिया ओम् ने । अब बॉस को उसका काम अच्छा लगने लगा था पर ओम् को अब ग़ालिब अच्छा लगा था। कुछ न कुछ खरोंचता रोज़ रात को।
एक दिन बॉस ने कहा – ओम् तुम्हारा प्रमोशन हो गया है
ओम् – सर आज मैं ये नौकरी छोड़ रहा हूँ ।………और पाँच साल बाद –
सिया एक कवि सम्मेलन को होस्ट कर रही थी कि तभी ऑर्गनाइजर ने पीछे से आकर कहा “आतिश ” साहब आ गए हैं पहले उन्हें इन्वाइट करो । ऑडियेंस उनका इंतज़ार कर रही है । सिया मजबूरन आतिश साहब का नाम लेकर नीचे बैठ गयी – तालियों की गड़गड़ाहट के बाद
अर्ज़ किया है –
“तेरे इश्क़ के चढ़ाव का उतार आ गया
इतना रोए कि हुनर पे निखार आ गया”
(सिया – ये ओम्……………)
उठ गयी ग़ुस्से में जाने के लिए कि अगला शेर –
“जो मेरी मुफ़लिसी पर कभी मुझे छोड़ गया था
आज मेरी शोहरत देख कर उसे बुखार आ गया…..”
अब दोनों की नज़रें मिल चुकी थीं और ऑडिएंस – जनाब एक बार फिर पढ़ दीजिए…..
(लेखक युवा कहानीकार और कवि हैं। पत्रकारिता भी कर चुके हैं। फिलहाल मुम्बई में हैं और एक प्रोडक्शन हाउस के लिए काम कर रहे हैं)
नई दिल्ली : आजादी के 70 साल बाद निर्मला सीतारमण के रूप में देश को पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री मिली हैं। रविवार को राष्ट्रपति भवन में कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद उन्हें ये जिम्मा सौंपा गया। सीतारमण ने कहा, “ये बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मुझे उम्मीदों पर खरा उतरना है।” इससे पहले 1975 और 1980 में प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी डिफेंस मंत्रालय संभाल चुकी हैं। 2019 लोकसभा चुनाव से 20 महीने पहले हुए कैबिनेट फेरबदल में पीयूष गोयल को रेलवे का जिम्मा सौंपा गया है। सुरेश प्रभु कॉमर्स और इंडस्ट्री की जिम्मेदारी संभालेंगे। जेटली के पास अब वित्त कॉरपोरेट अफेयर्स मन्त्रालय है। कैबिनेट में 9 नए चेहरे शामिल गए गए। इनमें तीन चुनावी राज्यों के नेताओं के अलावा पूर्व आईएएस तथा आईपीएस अधिकारी हैं। जेडीयू के सरकार में शामिल होने और बड़ा फेरबदल किए जाने की चर्चाएं थीं। लेकिन, इससे उलट ये बदलाव छोटा ही रहा।
मोदी कैबिनेट में फेरबदल
1) किसको, कौन सा मंत्रालय मिला?
रक्षा – निर्मला सीतारमण
रेलवे- पीयूष गोयल
क्रीड़ा तथा युुवा मामले – राज्यवर्धन राठौर (स्वतंत्र प्रभार)
क्रीड़ा तथा युुवा मामले- विजय गोयल (राज्यमंत्री)
उर्जा – आरके सिंह (स्वतंत्र प्रभार)
पर्यटन/इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी- अल्फाेन्स कन्ननथानम (राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार)
कौशल विकास मंत्रालय- धर्मेंद्र प्रधान
पेयजल तथा निकासी- उमा भारती
जल संसाधन तथा गंगा संरक्षण – नितिन गडकरी
शहरी विकास – हरदीप पुरी (राज्यमंत्री)
खनन- नरेंद्र सिंह तोमर
संसदीय मामले- विजय गोयल (राज्यमंत्री)
स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण – अश्विनी कुमार चौबे (राज्यमंत्री)
स्किल डेवलपमेंट मंत्री- अनंत कुमार हेगड़े (स्वतंत्र प्रभार)
वाणिज्य तथा उद्योग- सुरेश प्रभु 2) फेरबदल क्यों?
4 P और न्यू इंडिया विजन
– मोदी ने नए नामों के चयन में 4 P को तरजीह दी, ताकि उनके न्यू इंडिया विजन पर काम हो।
पैशन: काम करने का जुनून
प्रोफिशिएंसी: काबिलियत
पॉलिटिकल अंडरस्टैंडिंग: राजनीतिक समझ
प्रोफेशनल एक्युमेन: पेशेवर महारत 3) किनका प्रमोशन?
पीयूष गोयल (53), धर्मेंद्र प्रधान (48), निर्मला सीतारमण (58), मुख्तार अब्बास नकवी (59) को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है। ये सभी पहले स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री थे। 4) नए चेहरे कौन?
विशेषज्ञ
– सत्यपाल सिंह (62): वे 34 साल IPS रहे हैं। मुंबई के पुलिस कमिश्नर रहे।
– अल्फाेन्स कन्ननथानम (64): वे 27 साल तक IAS रहे। केरल में बीजेपी का चेहरा।
– आरके सिंह (64): 38 साल तक IAS रहे। देश के गृह सचिव भी रह चुके हैं।
हरदीप सिंह पुरी (65): 39 साल तक IFS रहे। 2009-13 तक यूएन में भारत के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव रहे। अनुभवी
अश्विनी कुमार चौबे (64), बिहार
शिव प्रताप शुक्ल (65), यूपी
डॉ. वीरेंद्र कुमार (63), मध्यप्रदेश
एनर्जेटिक
अनंत कुमार हेगड़े (49), कर्नाटक
गजेंद्र सिंह शेखावत (49), राजस्थान 5) फेरबदल के मायने?
एक्सपर्टाइज पर जोर:नौ नए चेहरों में चार पूर्व ब्यूरोक्रेट्स हैं। तीन चुनावी राज्यों से हैं।
कैबिनेट में कितनी जगह बाकी: कॉन्स्टिट्यूशन के मुताबिक, मंत्रिमंडल में मंत्रियों की लिमिट लोकसभा की कुल स्ट्रैंथ (545) से 15% ज्यादा नहीं हो सकती। ये स्ट्रैंथ 81 है। मौजूदा फेरबदल में 4 को प्रमोशन मिला, 9 नए मंत्री बने और 6 ने इस्तीफा दिया। अब कुल मंत्रियों की संख्या 76 है। यानी 5 और मंत्री बनाए जा सकते हैं।
फिर हो सकता है बदलाव: माना जा रहा था कि 2019 चुनाव से पहले ये आखिरी फेरबदल होगा। लेकिन, 5 और मंत्री बनाए जा सकते हैं। जेडीयू और एआईएडीएमके को इस बार सरकार में जगह नहीं मिली। संभव है कि चुनाव से पहले समीकरण साधने के लिए दोनों को कैबिनेट में हिस्सेदारी दी जाए। 6) फेरबदल पर क्या बोले मोदी?
– नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया- जिन लोगों ने आज शपथ ली है, उनका अनुभव और ज्ञान कैबिनेट की ताकत में इजाफा करेगा। 7) रेल मंत्री ने क्या संकेत दिए?
– शपथ ग्रहण के तुरंत बाद सुरेश प्रभु ने संकेत दे दिए थे कि वे अब रेल मंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने ट्वीट कर प्रमोशन पाने वाले पीयूष गोयल, नकवी, प्रधान और सीतारमण को बधाई दी। इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया- रेलवे के 13 लाख इम्प्लॉइज का उनके प्यार और सहयोग के लिए शुक्रिया। ये खूबसूरत यादें जीवन भर मेरे साथ रहेंगी। आपको भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं। 8) शपथ ग्रहण का नजारा
– शपथ ग्रहण समारोह में मोदी के दाहिनी तरफ अमित शाह, राजनाथ सिंह, अरुण जेटली, थावरचंद गहलोत, कलराज मिश्र, अनंत कुमार और जेपी नड्डा बैठे थे। स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर साथ बैठे थे। उनकी पीछे की कतार में राज्यवर्धन सिंह राठौर, मनोज सिन्हा बैठे थे। एक अलग कतार में रामविलास पासवान, मेनका गांधी, रविशंकर प्रसाद, अशोक गजपति राजू, हरसिमरत कौर और चौधरी बीरेंद्र सिंह बैठे थे।
– शपथ लेने वाले मंत्रियों की पहली कतार में मुख्तार अब्बास, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और धर्मेंद्र प्रधान बैठे थे। इन्हें राज्यमंत्री से प्रमोट करके कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। 9) अटक गए धर्मेंद्र प्रधान
– कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने के लिए धर्मेंद्र प्रधान को बुलाया गया। प्रधान ने हिंदी में शपथ ली। जब उन्हें ‘प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से संसूचित’ बोलना था तो वे अटक गए। कोविंद ने ये शब्द दोबारा पढ़े। इसके बाद प्रधान ने शपथ पूरी की। प्रधान अब तक राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे। उन्हें प्रमोट किया गया है। वे पेट्रोलियम मिनिस्टर हैं। गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी छोड़ने के लिए गिव अप स्कीम और गरीब महिलाओं को फ्री रसोई गैस कनेक्शन देने वाली ‘उज्ज्वला स्कीम’ की कामयाबी के बाद वे प्रमोट हुए हैं। 10) कितने मंत्रियों ने दिया था इस्तीफा?
कलराज मिश्र
बंडारू दत्तात्रेय
राजीव प्रताप रूडी
फग्गन सिंह कुलस्ते
संजीव कुमार बाल्यान
महेंद्र नाथ पांडेय
बच्चे इस देश का भविष्य हैं मगर जिस देश में बच्चों को जीने के लिए ऑक्सीजन न मिल रहा हो, उस देश का भविष्य क्या होने वाला है, सोचने वाली बात है। अगस्त महीने में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 250 बच्चों की मौत बेहतरी के सपनों को मारने वाला हादसा है। इस देश में हादसों के बाद हादसे हो रहे हैं मगर इन तमाम हादसों के पीछे कहीं न कहीं बगैर सोच के पीछे चल देने वाली सोच है। गोरखपुर में कमिशन पाने की सोच और ख्वाहिश ने लोगों को बेईमान बना दिया और हाल ही में खुद को ईश्वर बताने वाले गुरमीत राम रहीम की अंधभक्ति ने उसके अनुयायियों को हैवान बना दिया। इस हैवान की कहानियाँ इंसानियत को शर्मसार करने वाली हैं मगर ऐसे तो न जाने कितने धर्मगुरु शोषण कर रहे हैं और जाने कितनी बार हमारा विश्वास हिल जाता है। अनचाहा जबरन स्पर्श किसी दंश से ज्यादा भयावह होता है और जब आप किसी को गुरु या शिक्षक मानकर सिर झुकाते हैं और हद से ज्यादा किसी पर भरोसा करते हैं और वह आपको सिर्फ सेक्स के खिलौने की तरह इस्तेमाल करे तो यह अन्दर से तोड़कर रख देता है। शिक्षकों पर शोषण के आरोप लगते हैं और बाबाओं और धर्मगुरुओं के इस देश में पीड़ित को ही मुजरिम बनाकर शोषण की ओर धकेल दिया जाना आम बात है। ये कैसी अंधश्रद्धा है जो सही और गलत का फर्क नहीं जानती, एक बलात्कारी जिसे अदालत ने भी 15 साल की लम्बी कार्रवाई के बाद दोषी पाया, एक हत्यारा जिसने न जाने कितनों की हत्या करवा दी, अगर उसे पूजने वाले इस देश में हैं तो भूल जाइए कि हम आगे बढ़ने वाले हैं। जीवन का सबक सिखाने वाला गुरु ही होता है जो एक समाज तैयार करता है, यकीनन समाज में बुराई है तो यकीन भी है। हाल ही में इस देश की न्यायपालिका ने आम लोगों के इस यकीन को जिन्दा रखा। पहले एक बार में तीन तलाक को अंसवैधानिक घोषित किया, फिर निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना और इसके बाद राम रहीम को 20 साल की सजा मिलना इस बात का सबूत है कि इस देश में उम्मीदों को जिन्दा रखने के लिए जमीन बाकी है। इस तरह की घटनाओं ने एक बार फिर मजहब और सिसायत के रिश्ते को बेपर्दा कर दिया। पंचकुला में इतनी जानें जाना इस रिश्ते की हैवानियत को सामने रख दिया। बड़े शर्म की बात है कि जिन चीजों को विधायिका को बचाना था, जिनके खिलाफ सरकारों को कार्रवाई करनी थी, अब उसके लिए न्यायपालिका को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है। इस देश की सरकारों को अब खुद को लेकर सोचना चाहिए मगर इससे भी जरूरी यह है कि बगैर विवेक के और बगैर किसी सोच के अंधभक्ति से इस देश की जनता दूर रहना सीखे क्योंकि गलत हर हाल में गलत है, अपराध हर हाल में अपराध है, फिर भले ही वह ईश्वर ही क्यों न करे। आपका जमीर आपकी गवाही खुद देगा, आप हर चीज से भाग सकते हैं मगर खुद से नहीं भाग सकते। आपको खुद को जवाब देना है इसलिए अपनी समझ और जमीर को जिन्दा रखिए क्योंकि बगैर सोच के आप इन्सान नहीं झुंड में चलने वाली भेड़ें हैं। आज मजहब और सियासत दोनों आपको भेड़ बनाए रखना चाहते हैं, यह आपको तय करना है कि आप भेड़ बनना पसन्द करते हैं या फिर एक आजाद और समझ वाली सोच के साथ समाज को दिशा देने की पहल करते हैं। बहरहाल इस महीने से ही देश भर में उत्सवों की शुरुआत होने जा रही है। हिन्दी दिवस भी मनाया जा रहा है, आप सभी को बहुत – बहुत अग्रिम शुभकामनाएँ। साथ देते रहिए….साथ चलकर हम बहुत कुछ बेहतर कर सकते हैं।
शिक्षा प्रगति का मार्ग खोलती है और शिक्षा ही समाज में बदलाव ला सकती है। दरअसल मानसिकता को बदलने में शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है और इसके प्रति जागरुकता लाना आसान काम नहीं है। शिक्षा के प्रसार के मामले में मुस्लिम समुदाय की स्थिति अच्छी नहीं है और इस समाज के पिछड़े वर्ग में बहुत सी समस्याओं की जड़ अशिक्षा में है। ऐसे में कोई महिला पिछले 40 साल से लगातार शिक्षा की रोशनी जरूरतमंद बच्चों तक ले जाने के लिए काम करती रहे तो यह सफर आसान तो कतई नहीं है मगर रक्षंदा जबीन पिछले 40 साल से जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा का प्रसार करने की मुहिम में जुटी हैं। शिक्षा ही नहीं उनका जुनैद एडुकेशन फाउंडेशन बहुत सी सामाजिक बुराईयों के खिलाफ भी काम कर रहा है। अपराजिता की मुलाकात इस बार रक्षंदा जबीन से, पेश हैं प्रमुख अंश –
प्र. आप क्या हमेशा से शिक्षिका बनना चाहती थीं?
उ. मुझे पढ़ाने का शौक बचपन से था। तब छोटे बच्चों को पढ़ाया करती थी। उस समय हम पार्क सर्कस इलाके में रहा करते थे। मुझे इन बच्चों से हमदर्दी थी और अच्छी बात यह थी कि परिवार ने भी तब मुझे आगे बढ़ने का मौका दिया। मेरे वालिद जानते थे कि मुझे पढ़ाना अच्छा लगता था इसलिए उन्होंने मुझे रोका नहीं और बस सिलसिला शुरू हो गया।
प्र. किसी तरह की मुश्किलें तब आयीं?
उ. मुश्किलें तो थीं और बच्चों को पढ़ाना आसान नहीं था क्योंकि आज से 40 साल पहले लोगों में जागरुकता नहीं थी। वे यह नहीं समझते थे कि पढ़ाई उनके लिए कितनी जरूरी है। ऐसे में मुझे समझाना प़ड़ता था. माहौल तैयार करना पड़ता था। शादी हुई तो पति ने भी इस नेक काम में मेरा पूरा साथ दिया। मुश्किलें तो अब भी हैं क्योंकि शिक्षा के लिहाज से मुस्लिम समाज आज भी बहुत पीछे है। माता – पिता आज भी अपने बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते। जाहिर सी बात है कि अब भी इस दिशा में बहुत काम करने की जरूरत है।
प्र. तब से लेकर आज तक क्या फर्क आप देखती हैं?
उ. लोग अब शिक्षा का महत्व समझ रहे हैं और आज के बच्चे भी सवाल करते हैं, समझना चाहते हैं। आज के माता – पिता भी अपने बच्चों को तालीम देना चाहते हैं। बच्चे अब सवाल करने से डरते नहीं हैं मगर लड़कियाँ अपनी तालीम को लेकर ज्यादा संजीदा हैं। अपने माता – पिता का सम्मान करती हैं और पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान देती हैं।
प्र. कौन सी ऐसी चीज है जिसने इस उम्र में भी आपको सक्रिय कर रखा है?
उ. बैठना मुझे पसन्द नहीं है। सालों से काम करती आ रही हूँ। कुछ न कुछ करती रहती हूँ। मेरी कोशिश रहती है कि जरूरतमंद बच्चों की मदद कर सकूँ। मैं इन बच्चों को शिक्षित बनाने और एक अच्छा भविष्य देने के मकसद से पढ़ाती हूँ और यही वजह है कि अब तक लगातार पढ़ाती चली आ रही हूँ। शिक्षा को लोगों तक पहुँचाने की कोशिश में जुटी हूँ।
प्र. आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
उ. शिक्षा हासिल करना का मकसद और मतलब महज डिग्री हासिल करना नहीं होता। कुछ ऐसा कीजिए जो दूसरों के काम आ सके। खुद को इस लायक बनाइए कि दूसरों के काम आ सकें।
बाबा राम रहीम इन दिनों जेल में है और उसके अनुयायी अभी भी उसके समर्थन में हैं। डेरे से 6 साल से 18 साल की 20 लड़कियाँ छुड़वाई गयी हैं। राम रहीम को 2 अलग मामलों में 10 -10 साल की सजा हो गयी हैै। आसाराम की तरह उसने भी मुँह खोलने वालों की हत्याएँ करवायी हैं, यह बस एक झलक है, हमारा देश न जाने ऐसे कितने बाबाओं के चंगुल में फँसा है, जिसका कोई समाधान अभी नजर नहीं आ रहा। तमाम सितारों से लेकर नेता, प्रशासन सब ऐसे बाबाओं को धार्मिक गुरुओं के आगे नतमस्तक हैं। मार्क्स ने एक कहा था कि धर्म अफीम है और भारत में धर्म का नशा सिर पर चढ़कर बोलता है। इस कदर बोलता है कि नशे में डूबे लोग एक अपराधी को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, हिंसा, लूट और आगजनी कर सकते हैं। एक बात तो तय है कि भारत में धर्म कोई भी हो मगर सबसे सुलभ और सबसे सस्ता कुछ है तो वह स्त्री का शरीर है। धर्म, पैगम्बर और मजहब के नाम पर हमेशा से औरतों का शोषण होता आया है और वह मुँह नहीं खोल सकतीं क्योंकि अफीम के नशे में डूबे लोग उसे जीने नहीं देंगे और इन रहनुमाओं की ताकत का आलम यह है कि सरकारें बर्बादी का तमाशा देखती हैं और हाथ जोड़े, सिर झुकाए अपनी सियासत के खेल को जिन्दा रखती हैं। कोई मौलाना हो, कोई धर्मगुरु हो, कोई पादरी हो, उस पर आरोप लगते हैं मगर उसके खिलाफ जाने का साहस कोई नहीं करता, 99 प्रतिशत मामले तो बाहर ही नहीं जाते और जो बाहर जाते हैं, उनमें भी इन्साफ मिलते – मिलते बहुत देर हो जाती है। इन सबका का जिम्मेदार कोई और नहीं बल्कि वे लोग हैं जो अपनी मुश्किलों से हारकर ऐसे बाबाओं के चक्कर में पड़ते हैं और इस कदर खूँखार होते हैं कि नवजात की जान लेने में नहीं हिचकते। पिछले सप्ताह न्यायपालिका ने जिस तरह की सक्रियता दिखायी है, वह एक उम्मीद पैदा करती है मगर क्या इन फैसलों का लागू होना आसान है, खासकर तब जब प्रशासन और समाज पीड़ितों को दबाने के लिए खड़ा हो। जिस प्रदेश का मुख्यमंत्री एक बलात्कारी को अपराधी नहीं मानता हो, जहाँ के डीआईजी एक सजायाफ्ता बलात्कारी का बैग उठा रहा हो, जिस प्रदेश का शिक्षामंत्री उपद्रवियों को शांत श्रद्धालु करार दे रहा हो, हम अगर वहाँ जागरुकता की उम्मीद कर रहे हैं तो खुद को बेवकूफ ही बना रहे हैं।
राम रहीम और हनीप्रीत के रिश्ते पर भी काफी कुछ कहा जा रहा है। इस मुँहबोली बेटी को डेरे का नम्बर दो माना जा रहा है
हम मानें या न मानें मगर हिन्दूओं में एक खूबी तो यह है कि वे देर से ही सही मगर गलत को गलत कहना सीख रहे हैं मगर अन्य धर्मों में ऐसा न के बराबर है। आप इसे पूरी तरह अशिक्षा से भी नहीं जोड़ सकते क्योंकि राम रहीम का प्रभाव पंजाब, हरियाणा राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में है जहाँ शिक्षा की कमी नहीं है, कम से कम बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से तो बहुत ज्यादा है। हिन्दू धर्म ही नहीं मुस्लिम में भी तीन तलाक के बाद हलाला के दौरान औरतों का जो दैहिक शोषण होता है, वह ऐसे ही मौलाना और मौलवियों द्वारा ही होता है और वे इसके लिए मोटी रकम वसूलते हैं। शिक्षा और जागरुकता के अभाव में औरतों के लिए उनका घर उनकी इज्जत पर भारी पड़ता है और नतीजा यह है कि ऐसे घटिया लोगों का काला धंधा चला आ रहा है जिसके खत्म होने के आसार तो फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं। हिन्दी में मधु कांकरिया का उपन्यास संस्कृति सेज पर जैन समाज में साध्वियों के शोषण का खुलासा करता है।
इन लड़कियों को इस नर्क में कोई और नहीं धकेलता बल्कि उनके अपने धकेलते हैं जिन पर भरोसा करके वो आती हैं और जब वे अपने शोषण की कहानी सुनाती हैं तो उन पर यकीन करने वाला कोई नहीं होता। इतना ही नहीं इन लड़कियों को इस नर्क में जिन्दगी गुजारने की सलाह देने वाले भी उनके घरवाले ही होते हैं क्योंकि उनको दैवी प्रकोप और धमकियों के साथ बदनामी का डर इतना ज्यादा रहता है कि वे एक बेटी का जीवन तबाह होते देख ज्यादा श्रेयकर समझते हैं। राम रहीम के मामले में भी पीड़िता को गुमनाम होकर खत लिखना पड़ा। गनीमत मानिए कि चिट्ठी पर कार्रवाई हई मगर ऐसा नहीं होता तो और यह तो सिर्फ एक परदा उठा तो 30 जानें गयीं और शहर के शहर जल उठे, अभी तो न जाने ऐसे कितने मामले बाकी हैं और कल्पना कीजिए कि तमाशा देखने वाली सरकारें अगर हालात पर काबू नहीं करतीं तो नजारा क्या और कितना भयावह है।
अभी तो बस ये चन्द मामले हैं
राम रहीम के पहले भी बहुत से ऐसे मामले हैं जिनमें गिरफ्तारियाँ हुई हैं और मामले विचाराधीन हैं मगर जब भी ऐसे बाबाओं को अदालतों में पेश किया जाता है तो प्रशासन का सिरदर्द बढ़ जाता है और कई बार प्रशासन हुकुम बजाता अधिक नजर आता है, जैसा कि खट्टर सरकार कर रही है। पहले तो जानते हैं ऐसे मामलों में जिनमें धार्मिक रंग हैं और वोटबैंक के चक्कर में सरकारें कठपुतली बनी नजर आ रही हैं। इनमें से एक चर्चित गिरफ्तारी उत्तर प्रदेश में हुई थी।
विश्वास के नाम पर ढोंगी चलाते हैं कारोबार
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में एक बाबा था परमानंद। असली नाम है राम शंकर तिवारी। उस पर आरोप है कि वो बच्चे पैदा करने के नाम पर महिलाओं से बलात्कार करता था और उनके वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करता था। पुलिस ने उसे 24 मई 2016 को गिरफ्तार कर लिया था। उस पर 12 मुकदमे दर्ज हैं और वो अब भी जेल में है। बाराबंकी आश्रम में छापेमारी के दौरान उसके आश्रम से अश्लील सीडी और अश्लील साहित्य बरामद किया गया था। उसे मध्यप्रदेश के सतना से गिरफ्तार किया गया था। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब उनके आश्रम में बनाया गया एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। बताया जा रहा था कि आश्रम का कम्प्यूटर खराब हो गया था। बनवाने के लिए उसे एक दुकान पर भेजा गया था. यहां से दुकानदार ने उस वीडियो को वायरल कर दिया। अब भी परमानंद लखनऊ की जेल में बंद है।
ऐसी अंधी भक्ति ही तमाम समस्याओं की जड़ है। आसाराम पर यौन शोषण के साथ गवाहों की हत्याएँ करवाने का भी आरोप है और इसके भक्तों की कतार बहुत लम्बी हैै। फिलहाल जेल में हैै
अपने ही आश्रम की एक नाबालिग से बलात्कार के मामले में आरोपी आसाराम 1 सितंबर 2013 से जोधपुर में बंद है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से उसकी जमानत खारिज हो चुकी है। आसाराम के अलावा उसका बेटा नारायण साईं भी महिला श्रद्धालुओं के उत्पीड़न के आरोप में जेल में बंद है। इस साल जनवरी में ही सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दस्तावेज को जाली करार दिया। इस फर्जी दस्तावेज का संज्ञान लेते हुए चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस एनवी रामन्ना की पीठ ने 1 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। जाली दस्तावेज के लिए कोर्ट ने नया मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश दिया था। अब तक इस मामले से जुड़े तीन लोगों की हत्या हो चुकी है, जबकि सात लोगों पर जानलेवा हमले हो चुके हैं। आसाराम पर हजारों करोड़ों की जमीन हथियाने के अलावा हत्या जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
डेली ओ वेबसाइट के मुताबिक एक तरफ तो भीमानंद खुद को भगवान का अवतार बताता था, दूसरी तरफ सेक्स रैकेट चलाता था। फरवरी 2010 में जब दो एयरहोस्टेस समेत आठ लोगों को सेक्स रैकेट चलाने के मामले में गिरफ्तार किया गया तो मामले का खुलासा हुआ। जब इन लोगों से पूछताछ की गई तो पता चला कि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड 39 साल का शिवमूरत द्विवेदी है। इसे दुनिया इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज चित्रकूट वाले के नाम से जानती है। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट का रहने वाला शिवमूरत 1988 में दिल्ली आ गया था और नेहरू प्लेस के एक 5 स्टार होटल में गार्ड बन गया था। 1997 में लाजपत नगर में मसाज पार्लर में काम करने लगा। 1997 और 1998 में उसे वेश्यावृत्ति करवानने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जेल से बाहर आने के बाद उसने अपना नाम बदल लिया और वह खुद को इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद जी महाराज बताने लगा। एक साईं मंदिर में काम करने के दौरान ही वो सेक्स रैकेट चलाने लगा। 2010 से ही भीमानंद जेल में है और उसकी संपत्ति को ईडी जब्त कर चुका है।
पीड़ित महिलाओं पर परिवार और समाज का दबाव इतना रहता है कि वे मुँह नहीं खोलतीं
नवंबर 2014. रेप, यौन शोषण जैसे कई आरोपों को लेकर कथित संत रामपाल की गिरफ्तारी हुई। रिपोर्ट्स की मानें तो रामपाल तमाम लड़कियों को अपने एक किले में बंधक बनाकर रखता था। वो इन्हें साधिकाएं बुलाता था। इनमें से कुछ को वो अपने कमरे में बुलाता और कथित तौर पर शारीरिक संबंध बनाता था। 27 साल की बबिता कुमारी रामपाल की सबसे खास साधिका थीं। सूत्रों का कहना है कि बबिता के रामपाल के लड़के के साथ भी संबंध थे। कहा जाता है कि बाप-बेटे के साथ रिश्ते के कारण बबिता का रामपाल पर पूरा नियन्त्रण हो गया था। सूत्रों का कहना है कि रामपाल ने बबिता के नाम पर बैंक में 10 लाख का फिक्स डिपॉजिट भी कर रखा था। कहते हैं कि बबिता जब कमरे में होती थी तो रामपाल किसी को अंदर नहीं आने देते थे। पुलिस ने जब पड़ताल की थी तो रामपाल के कमरे से प्रेग्नेंसी किट और सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवाइयां मिली थीं।
जून 2012. बंगलुरु के बिदारी में स्थित अधीनम मठ के 293वें प्रधान नित्यानंद को बलात्कार और यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाबा के अड्डे पर जब पुलिस ने जांच की तो वहां कई इस्तेमाल किए हुए कंडोम और गांजा मिला था। कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने नित्यानंद की गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। वो भी तब जब नित्यानंद से पीड़ित उनके कई चेलों ने एक प्राइवेट चैनल पर शोषण का आरोप लगाया था। नित्यानंद की एक शिष्या ने उनका पूरा काला चिट्ठा खोल दिया था। उसने बताया था कि उसके साथ नित्यानंद ने कई बार बलात्कार किया। किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। उसका ये भी दावा था कि नित्यानंद के जो एक तमिल हिरोइन के साथ सेक्स टेप सामने आए थे, वो उसी ने शूट किए थे।
कथित महिला धर्मगुरुओं की तो यह एक झाँकी है। राधे माँ सुर्खियों में रहने केे लिए ऐसे कई हथकंडे अपनाती रहती है
डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां पर 2002 में अपने सिरसा डेरे में साध्वियों के बलात्कार का आरोप साबित हो चुका है। यह तो इस खुलासे की महज शुरुआत है, ऐसे न जाने कितने यौन शोषण इस अपराधी ने किए होंगे, इसकी तो बस कल्पना ही की जा सकती है। इस बारे में एक साध्वी ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक गुमनाम खत लिखा था। इस खत की एक कॉपी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट को भी भेजी गई थी। इस चिट्ठी के आधार पर हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच करने के आदेश दिए। सीबीआई की जांच में लड़की की शिकायत को सही पाया गया। दो साध्वियों ने सीबीआई की जांच में उनका साथ भी दिया। डेरा सच्चा सौदा पर आरोप लगा कि इस केस को दबाने की नीयत से उसने एक शिकायतकर्ता साध्वी के भाई की हत्या करवा दी। इसके बाद इस केस की रिपोर्टिंग कर रहे एक पूरा सच अखबार के संपादक रामचंदर छत्रपति की भी हत्या हो गई। इस मामले में भी मुख्य आरोपी डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम ही है। मामले में सुनवाई 17 अगस्त 2017 तक चल। 25 अगस्त 2017 को इस मामले में पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने राम रहीम को दोषी मान लिया। राम रहीम को दो मामलों में 20 साल की सजा हो गयी मगर छत्रपति की हत्या और 400 साधुओं को नपुंसक बनाने जैसे कई मामलों पर फैसला होना बाकी है।
दूसरे धर्मों के ठेकेदार भी कुछ कम नहीं हैं
साल भर पहले बिजनौर में एक इमाम, मौलाना अनवरुल हक़ एक औरत का बलात्कार करते हुए पकड़ाया। 40 साल का मौलाना, 30 साल की औरत का बलात्ककार रहा था। मौलाना ने औरत को ये झांसा देकर अपने कमरे पर बुलाया था कि ऐसी कुछ पूजा है, जो उसे अकेले करनी होगी। वहां उसका बलात्कार कर धमकी दी, पति को बताया तो ठीक नहीं होगा।
फादर रॉबिन, जिस पर यौन शोषण का आरोप लगाया और पीड़ित पर ही सवाल उठते रहे
कुछ महीनों पहले केरल से एक 16 साल की लड़की के रेप होने की खबर आई. लड़की गर्भवती हुई, उसे बच्चा भी हुआ। बलात्कार करने वाला एक पादरी था। फादर रॉबिन, जिसपर रेप का आरोप था, कथित तौर पर बच्चों की बेहतरी के लिए काम करता था। साल केरल में पादरी के हाथों लड़की का बलात्कार हो जाने के बाद वहां की एक धार्मिक पत्रिका ने छापा था – ‘पादरी भी इंसान ही है. उस समय उसके शरीर की इच्छाओं ने उसको काबू कर लिया होगा मगर वो लड़की भी तो धर्म से ईसाई थी। क्या ये उसका धर्म नहीं था कि वो पादरी को किसी तरह रोक ले।’बहुत सालों पर ऐसे ही एक मसले पर फिल्म आई थी हंगामा जमकर हुआ था मगर हंगामे हकीकत नहीं बदलते।
निकाह हलाला या हवस मिटाने की साजिश
हाल ही में एक बार में तीन तलाक देने को असंवैधानिक करार दिया गया मगर शोषण की कहानी इसके बाद शुरू होती है जिस पर बात फिलहाल नहीं हुई। इसे निकाह हलाला कहते हैं। बीते दिनों इंडिया टुडे के हुए स्टिंग ऑपरेशन में मुरादाबाद में इमाम नदीम को पैसे लेकर निकाह हलाला करते हुए पाया गया यानी तलाकशुदा औरत अपने पिछले पति के पास फिर से जा सके, इसके लिए उसे फिर से शादी करना ज़रूरी होता है। इमाम उनके साथ सोकर दूसरी शादी की कमी पूरी करते हैं। ज़ाहिर सी बात है, इसके बाद औरत को अपने पिछले पति से फिर से शादी करने की इजाज़त मिल जाती है।
इंडिया टुडे के स्टिंग ऑपरेशन में कई इमाम पकड़े गए थे
पता पड़ा कि इमाम एक औरत के साथ सोने के लिए 25 हजार से 1 लाख लेता था। बता दें कि झांसा देकर औरत के साथ सेक्स करना भी संविधान के मुताबिक बलात्कार के दायरे में आता है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली में मिलकर ऐसे कई इमाम स्टिंग में पकड़े गए।
बौद्ध भिक्षुओं में लगी ये बीमारी
बीते दिनों असम में एक 12 साल की लड़की का रेप हुआ, मीडिया में जिसकी खबर सुनने को नहीं आई। ये रेप एक बौद्ध भिक्षु ने बच्ची के हाथों पूजा करवाने के बहाने किया. घर से दूर एक मंदिर में उसे पूजा के लिए बुलाया और उसके भाई को सामान लेने भेज दिया। फिर अपने कमरे में उसका रेप कर उसे धमकी दी कि इस बारे में किसी से कहा तो परिवार का भविष्य बिगड़ जाएगा।
वोटबैंक, ग्लैमर, सियासत का खेल और बाबाओं को बर्बादी की छूट
राम रहीम रेप का दोषी है। सीबीआई कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा हिंसा में जल उठा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक हिंसा में 31 लोग मर चुके हैं। पंचकुला में 29 और सिरसा में दो लोगों की मौत हुई है. कम से कम 250 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 60 पुलिसकर्मी भी हैं मगर सियासी और ग्लैमर के चमकते गलियारों में कोई चूँ तक नहीं कर रहा। ऐसा लगता है मगर सारे नेताओं और अभिनेता व अभिनेत्रियों को साँप सूँघ गया है। बहुत कम लोग हैं जो सामने आकर कोर्ट की तारीफों के पुल बाँध रहे हैं या राम रहीम को बलात्कारी कहने का साहस कर रहे हैं। सिर्फ कोर्ट है, जो इस हिंसा पर पूरी नज़र बनाए हुए है।
हरियाणा जलता रहा और खट्टर सरकार तमाशा देखती रही
तभी तो कोर्ट ने नुकसान की भरपाई के लिए गुरमीत की संपत्ति ज़ब्त करने का आदेश दे दिया और खट्टर से लेकर मोदी सरकार को आईना दिखा दिया। हैरत की बात यह है कि हर बात पर ट्विट करके कोसने वाले सुरजेवाला और केजरीवाल से लेकर मायावती जैसे नेता भी खामोश बैठे हैं। कोर्ट ने तो पहले ही कह दिया है कि राजनीतिक फायदे के लिए हिंसा को होने दिया गया और सच भी यही है। जाट आन्दोलन के दौरान हिंसा अत्प्रत्याशित हो सकती है मगर इस मामले में ऐसा कतई नहीं था मगर सरकार ने इसके बावजूद कोई सख्त कदम नहीं उठाया। पुलिस को हथियार दिए गए, सेना तैनात की गयी मगर बल प्रयोग की इजाजत सही समय पर नहीं मिली।
राम रहीम केे भक्तों में कई सेलिब्रिटी हैं और बहुत कम लोग हैं जिन्होंने जुबान खोली है
दरअसल,हरियाणा और पंजाब विधानसभा चुनाव के वक़्त गुरमीत राम रहीम सिंह ने भाजपा और अकाली दल का खुलकर समर्थन किया था। 7 अक्टूबर 2014 को इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट है कि हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा के 90 उम्मीदवारों में से 44 उम्मीदवार सिरसा राम रहीम से मिलाने के लिए ले जाए गए थे। उम्मीदवारों के मिलने से 6 दिन पहले अमित शाह ने भी राम रहीम से मुलाकात थी और ये पहली बार था जब राम रहीम ने खुलकर किसी राजनीतिक दल का समर्थन किया था। खुद पीएम मोदी भी इस शख्स की तारीफ कर चुके हैं।
विराट कोहली और आशीष नेहरा भी इस सूची में शामिल हैं
सिर्फ नेता ही नहीं, बल्कि एक बार राम रहीम ने एक इंटरव्यू में खुद कहा था कि शिखर धवन, आशीष नेहरा, ज़हीर खान, युसूफ पठान हमसे मिलने आते थे, वो चाहे मेरा नाम ले, न लें। ये उनकी मर्ज़ी. मैंने उन्हें ट्रेंड किया है। अकाली दल और कांग्रेस के नेता भी राम रहीम की शरण में जाते रहे हैं. 15 अक्टूबर 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला भी आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इस कतार में अनिल कपूर, जावेद अख्तर, जॉन अब्राहम, शिल्पा शेट्टी, ऋत्विक रोशन जैसे कई सितारे भी हैं और ऐसे अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले भी उतने ही दोषी हैं फिर वह सीनियर बच्चन हों या कोई और, हमाम में सब नंगे हैं साहब…..कितनों को पकड़ोगे, जब तक तुम होश में नहीं आओगे, जब तक औरतें इस मायाजाल को तोड़कर नहीं उतरतीं, कुछ नहीं हो सकता।