Tuesday, March 31, 2026
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ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रोफेसर ने छोड़ी अमेरिका की नौकरी

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केरल के पलक्कड़ इलाके में एक समय घर के बाहर काम करने में पुरुषों का वर्चस्व रहा करता था। लेकिन आज महिलाएं घर से बाहर निकलकर काम कर रही हैं और पैसे कमाकर घर भी चला रही हैं। इस बदलाव का सारा श्रेय डॉक्टर प्रभाकर को जाता है। डॉ. प्रभाकर ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने अमेरिका में प्रोफेसर की अच्छी खासी नौकरी छोड़ गांव की महिलाओं का उत्थान करने और उन्हें सशक्त बनाने का काम शुरू किया है। एक बार वह गांव आए थे तो उन्होंने देखा कि गांव की महिलाओं की हालत काफी दयनीय है और उन्हें अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने देखा कि गांव की लड़कियां स्कूली शिक्षा से वंचित रह जा रही हैं।

डॉ. प्रभाकर कहते हैं, ‘जब मैं केरल वापस आया तो देखा कि यहां बदलाव की सख्त की जरूरत है। मैं बांग्लादेश के माइक्रो फाइनैंस बैंकर यूनुस खान से काफी प्रभावित था। इसलिए मैं बांग्लादेश गया और उनके साथ 6 महीने रहकर माइक्रो क्रेडिट मॉडल को अच्छे से समझा। मैं उस मॉडल को केरल में भी लागू करना चाहता था। मुझे मालूम था कि इसे सफल तरीके से लागू करना एक चैलेंज था, लेकिन हर हाल में मैं इसे करना चाहता था।’ डॉ. प्रभाकर ने 1996 में गांव की गरीब महिलाओं को सपोर्ट करने के लिए सोसाइटी फॉर रूरल इम्प्रूवमेंट नाम से एक नॉन प्रोफिट ऑर्गनाइजेशन की शुरुआत की।

शुरु करने से पहले अपने गांव की महिलाओं को देखकर डॉ. प्रभाकर को लगा कि महिलाओं को केवल सशक्त ही नहीं बनाना है बल्कि उन्हें आर्थिक आजादी और स्थिरता भी प्रदान करनी है जिससे वे अपनी जिंदगी के स्वतंत्र निर्णय ले सकें। इस मॉडल के जरिए उन्होंने महिलाओं को मुफ्त में ऋण देना शुरू किया। उन्होंने शुरुआत में अपनी जेब से 2 लाख रुपये के ऋण बांट दिए। वह कहते हैं, ‘हम महिलाओं को सिर्फ ऋण देते हैं, उस ऋण का कैसे और किस काम में इस्तेमाल करना है इसकी उन्हें पूरी आजादी रहती है। वह जो व्यवसाय चाहे शुरू कर सकती हैं। इनमें से कुछ महिलाएं चाय की दुकान खोल लेती हैं, कुछ छोटा-मोटा काम शुरू कर देती हैं। हम मैनेजर बनने की कोशिश नहीं कर रहे हैं बल्कि हम सिर्फ एक सहायक बने रहना चाहते हैं।’

जब उनसे बिना किसी गारंटी के लोन देने में जोखिम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि ऋण वापस करने की दर 99 % है। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों की पहचान करना थोड़ा कठिन काम है और इसके बारे में लोगों की और उनकी आवश्यकताओ के बारे में रिसर्च करनी पड़ती है। डॉ प्रभाकर बताते हैं कहते हैं, ‘हम ऐसे लोगों की पहचान करते हैं जो रिमोट एरिया में रहते हैं और जहां अभी तक कोई सुविधाएं नहीं पहुंची हैं।’ डॉ प्रभाकर उन महिलाओं की खास तौर पर मदद करते हैं जिनके पति या जिनका परिवार उनका साथ नहीं देता है।

महिलाओं की जरूरत के मुताबिक सोसाइटी फॉर रूरल इम्प्रूवमेंट के लोन मॉडल को कस्टमाइज किया गया है। इसके अंतर्गत कम से कम 10,000 का लोन दिया जाता है जिसे साप्ताहिक रूप  से भरना होता है।

डॉ. प्रभाकर पर्सनली महिलाओं के संपर्क में रहते हैं और उनसे काम की प्रगति के बारे में जानकारी लेते रहते हैं और यही उनकी सफलता का मंत्र है। सोसाइटी फॉर रूरल इम्प्रूवमेंट मॉडल के जरिए महिलाओं को दिये जाने वाले लोन की ब्याज दर काफी कम है। इसके साथ ही वे महिलाओं को सामूहिक रूप से बचत करने के लिए प्रेरित भी करते हैं।

पूवनकोड गांव की रहने वाली 40 साल की वेलम्मा ने गाय पालने के लिए 5,000 का छोटा लोन लिया था। उन्होंने कुछ महीने में ही लोन चुकता कर दिया। उसके बाद उन्होंने बकरी पालने के लिए लोन लिया। धीरे-धीरे उनका बिजनेस बढ़ता गया और फिर उन्होंने 20,000 का लोन ले लिया। इन पैसों से उन्होंने सुपारी से बने उत्पादों को बनाने की मशीन खरीद ली। अब उनके साथ दो और महिलाएं भी काम करती हैं।

वेलम्मा सैकड़ों महिलाओं के बीच एक उदाहरण हैं। उनके जैसी तमाम महिलाएं डॉ. प्रभाकर के जरिए सशक्त हो रही हैं। डॉ, प्रभाकर कहते हैं कि इस पुरुषवादी समाज में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वह हमेशा काम करते रहेंगे।

(साभार – योर स्टोरी)

काशी के अखाड़े में पहली बार उतरीं महिला पहलवान

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बदलते दौर के साथ काशी में परंपराएं भी नया रूप ले रही हैं। हाल ही में नागपंचमी पर गोस्वामी तुलसीदास अखाड़े में महिला पहलवानों को लड़ाने की नई परंपरा की शुरुआत हुई। काशी समेत पूर्वांचल के विभिन्न जनपदों की 12 महिला पहलवानों को पहली बार दांव-पेच आजमाने का मौका मिला।

इसे महिला कुश्ती के क्षेत्र में बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है। शुक्रवार को अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास का नजारा कुछ हटकर था। नागपंचमी पर महिला पहलवानों ने इस अखाड़े में कदम रखे तो लोग देखते रह गए।

अखाड़े की पीली मिट्टी को नमन कर जब आस्था वर्मा और नंदिनी सरकार दांव लगाने उतरीं तो परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। दोनों पहलवानों ने एक-दूसरे पर कई दांव लगाए लेकिन दोनों का पलड़ा बराबर रहा।

इसी क्रम में संध्या ने निधि, मधु ने प्रीति, भावना ने संध्या, नंदनी ने भावना, अपेक्षा ने निधि और मधु ने अपेक्षा से जोर आजमाइश की। महिला मल्ल एक-दूसरे को चित करने के लिए दांव लगाती रहीं।

कभी धोबी पछाड़ तो कभी कांखी दाव, सांडी तोड़ से सभी ने विरोधियों को धूल चटाने का प्रयास किया। महिला खिलाड़ियों के दांव देखकर दर्शक दीर्घा में बैठे पुरुष पहलवान और अन्य लोग तालियों से उनका उत्साहवर्धन करते रहे।

सकंट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने कहा कि  महिलाएं हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान गढ़ रही हैं बावजूद इसके आज भी लड़कियों को अखाड़े में भेजना अच्छा नहीं माना जाता।

इस सोच से ऊपर उठकर अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास में पहली बार नागपंचमी पर महिला पहलवानों कोदांव-पेंच दिखाने का मौका दिया गया। यह नारी सशक्तीकरण की दिशा में हमारा एक प्रयास है। आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ के बाद कुश्ती में महिलाओं की रुचि बढ़ी है।

कुश्ती पर्यवेक्षक और ध्यानचंद अवार्डी कैप्टन राजेंद्र सिंह ने कहा कि अखाड़ों में लड़कियों का प्रवेश बेहद सराहनीय कदम है। कुश्ती में लड़कियों को आगे लाने के लिए साई प्रयासरत है। निवेदिता शिक्षा सदन इंटर कॉलेज में पूर्वांचल का पहला कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र खोला गया है। इसमें 16 बालिकाओं का चयन किया गया है।

 

 

इतिहास के पन्नों से रक्षाबंधन के किस्से

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चन्द्रशेखर आजाद का रक्षासूत्र

बात उन दिनों की है जब क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत थे और फ़िरंगी उनके पीछे लगे थे।  फिरंगियों से बचने के लिए शरण लेने हेतु आज़ाद एक तूफानी रात को एक घर में जा पहुंचे जहां एक विधवा अपनी बेटी के साथ रहती थी। हट्टे-कट्टे आज़ाद को डाकू समझ कर पहले तो वृद्धा ने शरण देने से इनकार कर दिया लेकिन जब आज़ाद ने अपना परिचय दिया तो उसने उन्हें ससम्मान अपने घर में शरण दे दी। बातचीत से आज़ाद को आभास हुआ कि गरीबी के कारण विधवा की बेटी की शादी में कठिनाई आ रही है। आज़ाद ने महिला को कहा, ‘मेरे सिर पर पाँच हजार रुपए का इनाम है, आप फिरंगियों को मेरी सूचना देकर मेरी गिरफ़्तारी पर पाँच हजार रुपए का इनाम पा सकती हैं जिससे आप अपनी बेटी का विवाह सम्पन्न करवा सकती हैं।

यह सुन विधवा रो पड़ी व कहा- “भैया! तुम देश की आज़ादी हेतु अपनी जान हथेली पर रखे घूमते हो और न जाने कितनी बहू-बेटियों की इज्जत तुम्हारे भरोसे है। मैं ऐसा हरगिज़ नहीं कर सकती।” यह कहते हुए उसने एक रक्षा-सूत्र आज़ाद के हाथों में बाँध कर देश-सेवा का वचन लिया। सुबह जब विधवा की आँखें खुली तो आज़ाद जा चुके थे और तकिए के नीचे 5000 रुपये पड़े थे। उसके साथ एक पर्ची पर लिखा था- “अपनी प्यारी बहन हेतु एक छोटी सी भेंट- आज़ाद।”

 

महादेवी का वह अनोखा भाई

महादेवी वर्मा को जब ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, तो एक साक्षात्कार के दौरान उनसे पूछा गया था, ‘आप इस एक लाख रुपये का क्या करेंगी? ‘

कहने लगी, ‘न तो मैं अब कोई कीमती साड़ियाँ पहनती हूँ , न कोई सिंगार-पटार कर सकती हूँ, ये लाख रुपये पहले मिल गए होते तो भाई को चिकित्सा और दवा के अभाव में यूँ न जाने देती.’ कहते-कहते उनका दिल भर आया. कौन था उनका वो ‘भाई’? हिंदी के युग-प्रवर्तक औघड़-फक्कड़-महाकवि पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, महादेवी के मुंहबोले भाई थे।

एक बार वे रक्षा-बंधन के दिन सुबह-सुबह जा पहुंचे अपनी लाडली बहन के घर और रिक्शा रुकवाकर चिल्लाकर द्वार से बोले, ‘दीदी, जरा बारह रुपये तो लेकर आना।’ महादेवी रुपये तो तत्काल ले आई, पर पूछा, ‘यह तो बताओ भैय्या, यह सुबह-सुबह आज बारह रुपये की क्या जरूरत आन पड़ी?

हालाँकि, ‘दीदी’ जानती थी कि उनका यह दानवीर भाई रोजाना ही किसी न किसी को अपना सर्वस्व दान कर आ जाता है, पर आज तो रक्षा-बंधन है, आज क्यों?

निरालाजी सरलता से बोले, “ये दुई रुपया तो इस रिक्शा वाले के लिए और दस रुपये तुम्हें देना है। आज राखी है ना! तुम्हें भी तो राखी बँधवाई के पैसे देने होंगे।”

ऐसे थे फक्कड़ निराला और ऐसी थी उनकी वह स्नेहमयी ‘दीदी’।

(साभार –  भारत दर्शन)

रक्षाबंधन का त्योहार है तो पहनना तो कुछ खास है

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रक्षाबंधन बड़ा खूबसूरत त्योहार है जिसमें शरारतें भी हैं और मस्ती भी। भाई बहन के रिश्ते को मजबूत बनाने वाले इस दिन पर चटकीले रंग वाले परिधान पहने जा सकते हैं। कोई जरूरी नहीं है कि आप भड़कीली बनारसी पहनें मगर खुशनुमा रंग आपका मूड अच्छा जरूर करेंगे। राखी के दिन आप चटक व भड़कीले रंग जैसे रॉयल ब्लू, पैरट ग्रीन, गहरे मरून, लाल और गहरे गुलाबी रंग के परिधान पहन सकती हैं।

ब्लिंग या चमकीले कुर्ती के साथ आप चूड़ीदार पहन सकती हैं और बांधनी दुपट्टा ले सकती हैं, हल्के मेकअप के साथ कानों में बड़े झुमके पहन सकती हैं।

फ्यूजन (भारतीय-पश्चिमी) लुक के लिए ब्लिंग टॉप के साथ आप प्रिंटेड सिल्क स्कर्ट पहन सकती हैं, या चाहें तो दुपट्टा भी ले सकती हैं।

परंपरागत परिधान के साथ वेस्टर्न लुक के लिए आप इकत का लंबा गाउन और मंगलापुरी ड्रेस आजमा सकती हैं, इसके साथ झुमका और रस्टिक सिल्वर नेकपीस पहनें।

 

ब्राइडल ड्रेस में कुछ आसान से बदलाव के साथ आप इसे फिर से पहन सकती हैं। साड़ी भारी है तो ब्लाइज और जेवर सादगी भरे हों मगर बहुत भारी – भरकम साड़ी या गहनों से परहेज करें। आप राखी बाँधने जा रही हैं, वहाँ अपना लेटेस्ट कलेक्शन नहीं दिखाएंगी तो भी चलेगा।

प्लेन जॉर्जेट या शिफॉन साड़ी के साथ कंट्रास्ट कलर का ब्लाउज पहनें। यह भारी काम वाले ब्लाउज पहनने पर आपके लुक को बैलेंस करेगा। अगर आप चोली पहन रही हैं तो उसके साथ दिन या शाम के फंक्शन के लिए साथ जॉर्जेट या शिफॉन की चौड़े बॉर्डर वाली साड़ी पहनें।

लॉन्ग कुरता और प्लाजो आपका बेहतर करेंगे और एक क्लासिक लुक देंगे। सिम्पल अनारकली पहनें जिसमें बहुत ज्यादा काम न हो।

 

क्या आपके पास भी हैं ऐसी सहेलियाँ और दोस्त

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महिलाएँ दोस्ती करने में और दोस्तों से गप लड़ाने में माहिर होती हैं। बचपन से ही सहेलियों के साथ कहीं भी बैठ जाती हैं तो विंडो शॉपिंग करने के लिए सहेलियों का झुंड लेकर निकल जाती हैं और सहेलियाँ भी कई तरह की होती हैं – कोई खर्च करवाने वाली तो कोई शो ऑफ करने वाली, किसी की बात सितारों से निकलकर सितारों पर ही खत्म होती है तो कोई छोले – भटूरे पर अटक जाती है, कोई महापढ़ाकू, तो कोई एकदम लड़ाकू…जाने कितनी सहेलियाँ और सबका साथ ही जिन्दगी को खूबसूरत बनाता है। कुछ को लड़कों पर भरोसा ज्यादा होता है और आज की दुनिया में सहेलियों के साथ सखा भी होते हैं मगर किसी लड़के से दोस्ती निभाना आज भी थोड़ा मुश्किल है।

हाल ही में हुए एक सर्वे में पता चला है कि महिलाओं के कुल 10 प्रकार के दोस्‍त होते है। इस सर्वे को प्रमोशनलकोड्स.आर्गेनाइजेशन.यूके के द्वारा करवाया गया था। यहां महिलाओं के दस प्रकार के दोस्‍तों के बारे में बताया जा रहा है :

भरोसेमंद दोस्‍त : महिलाओं के ग्रुप में कुछ दोस्‍त बहुत भरोसेमंद होते है। महिलाएं अपने इन दोस्‍तों पर आंख मूंदकर भरोसा करती है। अपनी हर बात को इनके साथ शेयर कर लेती है, ऐसे दोस्‍तों के साथ महिलाएं इतनी खुली होती है कि वह ठीक वैसे ही बात बताती है जैसा वह खुद मानती है। आप देखिए कि इसमें किस प्रकार की सहेलियाँ और दोस्त आपके ग्रुप में है –

शॉपिंग कराने वाली : महिलाओं के गैंग में शॉपिंग के शौकीन जरूर होते है। जब भी शॉपिंग करने का मन होता है, ये सभी दोस्‍त इक्‍ट्ठा होकर खूब मस्‍ती करते है और शॉपिंग करते है। ऐसे दोस्‍त अक्‍सर साथ मिलकर विंडो शॉपिंग ही करते है।

व्‍यथा सुनाने वाले दोस्‍त : महिलाओं की कुछ सहेलियाँ या दोस्त ऐसे होते हैं जो उनसे उम्र में बड़ी होती है, ऐसी दोस्‍त को महिलाएं वह सभी बातें बताती है जो वह अपनी मां से नहीं बताना चाहती है। उनकी ऐसी दोस्‍त, जिंदगी में कई उतार – चढ़ाव देख चुकी होती है। इसीकारण, वह उन्‍हे अच्‍छी तरह हर बात समझा देती है।

करीबी दोस्‍त : महिलाओं के कुछ दोस्‍त बहुत करीबी होते है। ऐसे दोस्‍तों के कंधे पर महिलाएं सिर रखकर रो सकती हैं। ऐसे दोस्‍तों के साथ महिलाएं जब भी बात करना शुरू कर देती है तो उन्‍हे वक्‍त का पता ही नहीं चलता है। कई बार इस तरह के दोस्‍तों के बीच घंटों तक इमोशनल बातें होती है। दो सहेलियों के बीच ऐसा अक्सर होता है।

बोल्ड और बेबाक – आपके पास ऐसी बेबाक सहेली भी होती है जो किसी से नहीं डरती और जो दिल में आता है, बोल देती है। वह कुछ भी नहीं छिपाती और आप सोच में पड़ जाती हैं कि ये इतना बोल कैसी लेती हैं।

घरेलू सहेली – क्‍या आप हमेशा अपने दोस्‍तों को पार्टी पर बुलाती है, या फिर सिर्फ अपने घर की नई सजावट दिखाने के लिए उन्‍हे बुला लेती है। कोई न कोई ऐसी दोस्‍त जरूर होती है जो सभी घरेलू कामों में निपुण होती है और आपको लगता है कि आपकी जगह इसे मम्मी के पास होना था।

दोस्‍तों की दोस्‍त : महिलाएं किसी से भी दोस्‍ती कर लेती है। अगर उनकी दोस्‍त की रूममेट या क्‍लासमेट से वो दो – चार बार मिल लेती है तो उनकी दोस्‍ती हो जाती है। ऐसी दोस्‍ती अक्‍सर फेसबुक पर ज्‍यादा परवान चढ़ती है। ऐसी दोस्‍ती सिर्फ हाय हैलो के लिए होती है। राह चलते, मॉल में, पार्टी में ऐसी जगहों पर ऐसे दोस्‍तों से मिलना होता है। इस प्रकार के दोस्‍तों से बातचीत बहुत लिमिटेड होती है और कई बार तो उनके नाम भी याद नहीं रहते है।

बचकाने दोस्‍त : महिलाओं के कुछ दोस्‍त ऐसे भी होते है जो बचपने से भरे होते है। उनकी शादी नहीं हुई होती है, जल्‍दी ही वह किसी के साथ रिश्ते में बंधने वाले होते है। ऐसे दोस्‍त एनर्जी से भरे होते है। गैजेट से उन्‍हे प्‍यार होता है और धींगा – मस्ती अच्छी लगती है। ऐसे दोस्‍त शादी करने की तैयारी में होते है लेकिन अपने पुराने दोस्‍तों को कभी नहीं भूलते।

खम्भे की तरह अटल दोस्‍त : हर किसी के पास कोई न कोई ऐसा दोस्‍त होता है जो आपके खास दोस्‍त न होने पर आपका साथ निभाता है। अगर आप उनसे कभी बात नहीं करती है तो भी वह बुरा नहीं मानते है लेकिन आप जब भी उनसे बात करें, वो हमेशा उतने ही प्‍यार से जबाब देते है। ऐसे लोगों के साथ आप बेहद महसूस करती है।

आंखों का तारा वाली दोस्‍त : हर महिला की कुछ दोस्‍तें ऐसी होती है जिनसे वह मस्‍त होकर गपशप मारती है। वह उन लोगों के साथ बैठकर चुगली करती है, नौकरी में पैसे कट जाने के बारे में बताती है, पति की शिकायत करती है, सास की चुगली करती है। ऐसे दोस्‍त, महिलाओं के फर्स्‍ट सर्कल में आते है। ऐसे दोस्‍तों के साथ महिला का सबसे ज्‍यादा समय बीतता है।

 

सहेलियाना हमारा रहे सदा सलामत

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अगर आप चाहती हैं कि अपनी सहेलियों से आपकी दोस्ती हमेशा बनी रहे, इसमें कभी मनमुटाव न हो, दरार न पड़े, तो इसके लिए आपको अपनी कुछ आदतें बदलनी होंगी। जानिए, दोस्ती बनाए रखने के लिए आपको किस-किस बातों का ध्यान रखना होगा।  दोस्ती का रिश्ता हमारी जिंदगी में बहुत खास होता है। लेकिन कई बार हम इस रिश्ते पर इतने निर्भर हो जाते हैं कि अपनी सहेली या फ्रेंड को लेकर पोजेसिव हो जाते हैं, उस पर अपनी मर्जी थोपने लगते हैं। हम सोचते हैं कि हमारी सहेली है, इसलिए हम जैसा चाहते हैं, जैसा सोचते हैं, वह भी वैसा ही करेगी। अगर वह नहीं करती, तो उससे नाराज हो जाते हैं, उस पर कमेंट करने लगते हैं। जिसकी वजह से हमारी अच्छी खासी दोस्ती में दरार पड़ जाती है। ऐसा न हो, इसके लिए आपको कुछ बातों को अमल में लाना होगा।

फायदे के लिए इस्तेमाल  न करें – कई महिलाएं अपने फायदे के लिए दोस्ती का इस्तेमाल करती हैं। जब उनके फायदे की बात होती है, तब फटाफट तैयार हो जाती हैं। जिस बात में उनका फायदा नहीं होता है, उसमें कमी निकालने लगती हैं। माना वह आपकी सहेली है, इसका यह मतलब नहीं है कि आप उसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेंगी। अगर आप ऐसा करती हैं, तो इस आदत को बदलें। वरना एक दिन ऐसा आएगा, जब आप अपनी सहेली को खो देंगी।

खर्च करना भी सीखें – कई बार पैसों से रिश्तों में कड़वाहट आती है। इसलिए अपनी दोस्ती में इसे न आने दें। ऐसा न करें कि हमेशा अपनी सहेली से पैसे उधार मांगती रहें या कहीं बाहर घूमने जाएं, तो सिर्फ आपकी सहेली ही खर्च करे। भले ही आपके पास पैसे कम हों, लेकिन खर्च करने में पीछे न रहें। बार-बार सहेलियों की चीजें भी इस्तेमाल करना ठीक नहीं है।

गुस्सा न करें – अगर आपकी सहेली आपकी बात नहीं मानती है या आपकी मर्जी के अनुसार काम नहीं करती, तो उस पर गुस्सा होने की जरूरत नहीं है। अगर आप गुस्सा हो भी जाएं, तो उसकी सही वजह उसको बताएं। अगर आपके बीच कोई अनबन हुई है, तो मिल बैठकर उसे सुलझा लिया करें। इससे आपके बीच मनमुटाव नहीं होगा।

जासूसी न करें  – ऐसा न सोचें कि आपकी सहेली आपसे ज्यादातर बातें शेयर करती है, तो आपको अपनी पर्सनल लाइफ से जुड़ी हर बात बताएगी। अगर आपसे वह कोई निजी बात शेयर नहीं करना चाहती है, तो उसके फैसले की इज्जत करें। यह मानकर चलें कि हर किसी को अपनी जीवन में स्पेस पसंद होता है। सहेली की जासूसी की बात तो बिलकुल भी न सोचें। अगर आपकी सहेली आपके अलावा भी दूसरे दोस्तों के साथ रहना पसंद करती है, तो उससे नाराज न हों।

दबाव न डालें  – हर बार अपनी मर्जी सहेली पर न थोपें। बार-बार ऐसा करने पर उसको बुरा लग सकता है। किसी बात के लिए उस पर दबाव न डालें। जब कभी ऐसा हो कि वह अपनी राय रखे, तो उसे भी मानें। इससे आपकी दोस्ती हमेशा बनी रहेगी।

विद्यासागर विवि में मनाई गई तुलसी और प्रेमचंद जयंती

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विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से तुलसी और प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर ‘तुलसी एवं प्रेमचंद की प्रासंगिकता’विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूर्व पी.जी. सेक्रेटरी डॉ. अब्दुर रहीम ने प्रेमचंद को भारतीयता का लेखक माना। डॉ. पंकज साहा ने कहा कि प्रेमचंद की अचर्चित कहानियां प्रासंगिक हैं, उनका नाटक ‘कर्बला’ सांप्रदायिक सद्भाव के लिए प्रासंगिक है। शिक्षक रणजीत सिन्हा ने कहा कि प्रेमचंद गांधी और तुलसी से ज्यादा प्रभावित हैं।  प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रेमचंद भारतीय समाज के प्रतिनिधि रचनाकार हैं, जिनकी रचनाओं में जीवन की समग्रता है। विभागीय अध्यक्ष प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि तुलसी और प्रेमचंद अपने युग के उच्च मूल्यों के वाहक हैं। इस अवसर पर रूकसार परवीन, प्रिया शर्मा, के. अनुषा, मो. अनुवर ने आलेख एवं शारदा महतो, सोनी कुमारी, मिथिलेश, पकंज सिंह, सुषमा सिंह, राहुल शर्मा, पुष्पा मल्ल, मधु सिंह, रूपल साव, मौसमी गोप, गायत्री रथो, सुनील आदि ने स्वरचित कविताओं का पाठ किया। प्रेमचंद पर आयोजित ज्ञान प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पुष्पा मल्ल, रूपल साव एवं मधु सिंह तथा द्वितीय स्थान के. अनुषा, प्रिया शर्मा एवं रोशनी जायसवाल ने प्राप्त किया। इसके साथ ही रोमा मांडेय, श्रावणी और नवोनीता दास ने काव्य संगीत एवं सोनाली, रेशमी कुमारी ने भाव नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का सफल संचालन विभाग के शोधार्थी विनोद कुमार यादव ने किया।

कविताओं पर परिचर्चा और साहित्यिकी पत्रिका के नये अंक का लोकार्पण

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कोलकाता – भारतीय भाषा परिषद के सभाकक्ष में नगर की सुपरिचित संस्था साहित्यिकी द्वारा आयोजित संगोष्ठी में साहित्यिकी पत्रिका के नये अंक “साझा करते हुए’ का लोकार्पण श्रीमती सरोजिनी शाह ने किया। सुषमा त्रिपाठी के काव्यसंग्रह ‘अब वह आसमान तोड़ रही है’ और मीना चतुर्वेदी के काव्यसंग्रह ‘स्नेह स्मृति’ पर आयोजित इस परिचर्चा में श्रीमती रेणु गौरीसरिया ने सावन पर कविता पढ़कर अतिथियों का स्वागत किया। सुषमा त्रिपाठी और मीना चतुर्वेदी ने न केवल अपने अनुभवों को श्रोताओं से साझा किया बल्कि अपनी चुनिंदा कविताओं का भावपूर्ण पाठ भी किया। सुषमा त्रिपाठी के काव्यसंग्रह का विश्लेषण करते हुए इतु सिंह ने कहा सुषमा एक संवेदनशील और संभावनाशील कवयित्री हैं। उनकी आरंभिक कविताओं में  अभिव्यक्ति की तीव्रता के साथ कच्चापन भी है। क्रमशः वह वृहद समाज से संवाद करती हैं। अपनी संवेदनाओं को संतुलित कर सुषमा अपने सृजन को परिपक्व बना सकती हैं। उनकी कविताओं में उम्मीद और आस्था का स्वर मुखरित होता है जहां वह खुद की रोशनी में खुद को देखती हैं । कवि का तटस्थ होना भी जरूरी है तभी वह स्वयं से पर तक की यात्रा करने में सफल होता है।

मीना जी की कविताओं पर अपनी बात रखते हुए वाणी श्री बाजोरिया ने कहा कि मीना जी की कविताओं में व्यक्ति परकता तो है  ही पर सामाजिक समस्याएं भी उनकी निगाह से ओझल नहीं हुई हैं।। उनकी कविताओं में प्रिय के प्रति अनूठा समर्पण है। अपने सैनिक पति को याद करते हुए वह देशभक्ति की सुंदर बानगी पेश करती हैं। वहां दर्द तो है पर हताशा बिल्कुल नहीं है।

अध्यक्षीय वक्तव्य में किरण सिपानी ने दोनों कवयित्रियों को बधाई देते हुए कहा कि  दोनों कवयित्रियां दो  पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व करती हैं और निसंदेह उनकी कविताओं से समाज को एक दिशा मिलेगी। इन कविताओं में स्त्री मन की पीड़ा के साथ उनका आक्रोश भी मुखरित हुआ है। मानसी चतुर्वेदी ने भी अपनी सास को बधाई देते हुए अपनी बात रखी। कार्यक्रम का सफल संचालन श्रीमती विद्या भंडारी और धन्यवाद ज्ञापन गीता दूबे ने किया।

 

तुलसीदास के शब्द असीम शक्ति और प्रेरणा देते हैं: मनोज श्रीवास्तव

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कोलकाता – गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस और सुन्दर काण्ड में राम और सीता के जिस रूप को प्रस्तुत किया है वह अतुलनीय है । उन्होंने कहा सुन्दर काण्ड हमारी संवेदना और संभावना को स्फूर्ति प्रदान करता है । हमारे जीवन में सघन अँधेरा क्यों न हो सुन्दर काण्ड का एक पाठ ही जीवन में प्रकाश पैदा कर देता है । कई शताब्दियों बाद भी तुलसीदास के शब्द असीम शक्ति और प्रेरणा देते हैं । सुन्दर काण्ड ऊर्जा का श्रोत है । ये उद्गार हैं मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के मुख्य सचिव मनोज कुमार श्रीवास्तव के जो सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय के तत्वाधान में आयोजित तुलसी जयंती समारोह में बतौर विशिष्ठ अतिथि बोल रहे थे । समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कृष्णाबिहारी मिश्र ने कहा कि तुलसीदास का साहित्य आज हो रहे पाखण्ड में भी हमें रास्ता दिखा सकता है । भारतीय संस्कृति को समझना हो तो तुलसी साहित्य पढ़ना चाहिए क्योंकि उनके साहित्य में हमें संस्कृति की रक्षा का आश्वासन मिलता है ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ । पुस्तकालय के उपाध्यक्ष भरत कुमार जालान ने स्वागत भाषण देते हुए पुस्तकालय की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रेमशंकर त्रिपाठी ने किया । पुस्तकालय अध्यक्ष तुलाराम जालान ने धन्यवाद ज्ञापित किया ।

इस अवसर पर कलकत्ता विश्वविद्यालय की हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजश्री शुक्ला, सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय की टीचर इंचार्ज इन्दरपाल कौर, मनीषा त्रिपाठी, हेमन्त कुमार जालान, अनुराधा जालान, दिव्या जालान, ईशान जालान, , कमलेश कृष्ण मिश्र, जयप्रकाश सिंह सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे ।  कार्यक्रम को सफल बनाने में श्रीराम तिवारी, श्रीमोहन तिवारी, आदि का सक्रिय योगदान रहा।

 

भारतीय भाषा परिषद और खिदिरपुर कॉलेज ने मनायी प्रेमचन्द जयंती

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भारतीय भाषा परिषद और खिदिरपुर कॉलेज के सह आयोजन में हाल ही में प्रेमचंद जयंती मनायी गयी। इस अवसर पर प्रेमचंद के संबंध में विचार व्यक्त करते हुए कहा गया कि प्रेमचंद भारत में एक बनते हुए महान राष्ट्र के साक्षी थे जबकि आज हर तरफ पुल की जगह खाइयां पैदा की जा रही हैं। उनकी रचनाएं ‘ईदगाह’, ‘रंगभूमि’ और ‘गोदान’ में आज भी प्रेरित करती हैं। वे हिंदी और उर्दू के बीच हमारे समय के सबसे बड़े पुल हैं। प्रेमचंद और आज के सवाल पर हुई चर्चा में लगभग बीस कॉलेजों और विभिन्न विश्‍वविद्यालयों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों और शिक्षकों ने अपने वक्तव्य रखे। उनमें स्त्रियों की संख्या का ज्यादा होना यह साबित करने के लिए काफी था कि इस समय वे कितनी मुखर और स्वंतत्रता के लिए कितनी बेचैन हैं। रांची विश्‍वविद्यालय के प्रोफेसर अरुण कुमार ने इसे प्रेमचंद के साहित्य की विजय के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रेम और वैचारिक स्वतंत्रता के बीच गहरा संबंध है जिसे आज मिटाने की कोशिश की जा रही है। सेठ सूरजमल जालान गर्ल्स कॉलेज की प्रो. मधुलता गुप्त ने कहा कि प्रेमचंद एक मानवतावादी कथाकार थे और आज राष्ट्रवाद और मानवतावाद को जोड़ने की बहुत जरूरत है। प्रो. शहनाज नबी ने प्रेमचंद को एक महान कथाकार बताते हुए कहा कि प्रेमचंद उर्दू और हिंदी की एकता के प्रतीक हैं। प्रेसिडेंसी विश्‍वविद्यालय के प्रो. वेदरमण ने कहा कि प्रेमचंद ने किसानों का जो प्रश्‍न अपने कथा साहित्य उठाया था वह आज फिर महत्वपूर्ण हो गया है। खिदिरपुर कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. इतु सिंह ने प्रेमचंद के पुनर्मूल्यांकन की जरूरत बताते हुए कहा कि  आज हम जिन समस्याओं से घिरे हुए हैं प्रेमचंद का कथा साहित्य उनसे बाहर निकलने का मार्ग दिखाता है। बिहार केंद्रीय विश्‍वविद्यालय के प्रो. कफील अहमद नसीम ने बताया कि प्रेमचंद के कथा साहित्य के केंद्र में स्त्री और दलित हैं जो आज के विमर्शों के लिए रोशनी का काम करते हैं।  इस अवसर पर अपना अध्यक्षीय वक्तव्य देते प्रो. शंभुनाथ ने कहा कि प्रेमचंद की कहानी ‘ईदगाह’ बाजारवाद के विरुद्ध विद्रोह है। यह बनावटी वस्तुओं की जगह हामिद के चिमटा की तरह की जरूरी वस्तुओं को चुनने की शिक्षा देती है। हमारा युग जब ‘सादा जीवन उच्च विचार’ से कृत्रिम जीवन निम्न विचार की ओर बढ़ रहा है प्रेमचंद का कथा साहित्य सादगी, सहिष्णुता और मानवता के आलोक स्तंभ की तरह दिखाई देता है। परिषद की अध्यक्ष डॉ. कुसुम खेमानी, खिदिरपुर कॉलेज की डॉ. दीबा हाशमी और परिषद के मंत्री नंदलाल शाह ने अतिथियों का स्वागत किया। दो सत्रों के आयोजन का संचालन किया ज़ोहेब आलम और डॉ. अर्चना पांडेय ने। भाषण प्रतियोगिता में सगुफ्ता जहां (आलिया यूनिवर्सिटी), गायत्री कुमारी (बंगवासी कॉलेज), रुखसाना परवीन (मटियाबुर्ज कॉलेज) ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया।