Thursday, October 1, 2026
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गुलाबी गैंग के बाद अब बनीं लाल गैंग, महिलाओं की  कर रहीं है मदद

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सागर : शराबियों को सबक सिखाने एक साल पहले रहली क्षेत्र में बनी गुलाबी गैंग से प्रेरित होकर जिले में महिलाओं की मदद के लिए अब एक नई गैंग तैयार हुई है, नाम है लाल गैंग। इस गैंग की महिलाओं द्वारा गरीब, अनपढ़ महिलाओं की मदद के लिए कार्य किया जाता है। गैंग में फिलहाल 9 महिलाएं शामिल हैं, जो घरेलू कार्यों के साथ महिलाओं की मदद के लिए भी कार्य करती हैं।

अधिकारियों को आवेदन देकर बताती हैं समस्याएं

लाल गैंग की सदस्य सपना चौरसिया ने बताया कि हमारी गैंग में कोई अध्यक्ष, उपाध्यक्ष नहीं बल्कि सभी सदस्य हैं। हम लोग अपने-अपने क्षेत्र की महिलाओं की राशन, पेंशन, कुटीर, घरेलू हिंसा सहित अन्य कई समस्याओं का आवेदन तैयार करके अधिकारियों को अवगत कराते हैं ताकि घरों में चूल्हा फूंकने वाली इन गरीब महिलाओं को शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं पढ़ी लिखी नहीं होने के कारण हम लोग उनका आवेदन बनाकर उनकी मदद करते हैं।

दिल्ली की मैडम देती हैं प्रशिक्षण

दल की सदस्यों का कहना है कि दिल्ली की एक माइक्रोफाइनेंस कंपनी की मैडम हम लोगों को इस संबंध में ट्रेनिंग देती हैं कि कैसे कार्य करें और महिलाओं की समस्या कैसे दूर करें। इसमें एक कानूनी सलाहकार नरेंद्र अहिरवार भी हमारी मदद करते हैं, जिसके बाद हम लोग इन महिलाओं की मदद करते हैं। इसलिए इन महिलाओं की मदद के लिए मंगलवार को हम लोग यहां इन महिलाओं को लेकर आए हैं ताकि उनकी समस्याएं दूर हो सके। दल की सदस्यों का कहना है कि टीवी और अखबारों में जिले में एक गुलाबी गैंग की खबर पढ़ी थी, जो शराब के लिए अभियान चलाती है। इस गैंग की लंबे समय से कोई गतिविधि नहीं दिखी तो हम लोग महिलाओं की मदद के लिए यह कार्य कर रहे हैं।

 

कोई एक रिश्ता सारे रिश्तों की जगह नहीं ले सकता

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सुषमा त्रिपाठी

जिन्दगी में अच्छे दोस्तों की जरूरत सबको पड़ती है फिर भले ही आप सिंगल हों या मिंगल। दोस्त होते भी हैं मगर आमतौर पर उनका साथ शादी के बाद कम हो जाता है और अगर दोस्ती महिलाओं और पुरुषों के बीच हुई तो खत्म ही हो जाती है। यकीन नहीं होता मगर एक अजनबीपन रिश्ते में तो आ ही जाता है क्योंकि अपने जीवनसाथी के सामने किसी महिला या पुरुष दोस्त के कंधे पर हाथ रखकर, या धौल मारकर आप खिलखिला नहीं सकते और न ही उसकी खिंचाई कर सकते हैं। सच तो यह है कि हम चाहते ही नहीं हैं कि हमारा जीवनसाथी हमारे दोस्तों के करीब हो या हमारी जिन्दगी के उन अनछुए पहलुओं को जाने जो हम छिपाकर रखना चाहते हैं। एक बात तो तय है कि शादी के बाद आपकी प्राथमिकता बदल जाती है क्योंकि सहेलियों या दोस्तों के साथ रहते हुए भी आप उनके साथ नहीं होते। आपकी जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं। सच तो यह है कि दोस्ती और प्यार या फिर शादी में लोग अपनी शादी बचाते हैं या फिर प्यार बचाते हैं। ये लड़कियों के साथ भी होता है और लड़कों के साथ भी होता है। जिन्दगी का एक लम्बा अरसा किसी शख्स के साथ गुजारने के बाद आप एक शख्स को इसलिए धोखा देने और छोड़ने पर मजबूर होते हैं क्योंकि आपका जीवनसाथी या परिवार उसे पसन्द नहीं करता और आप दोनों पर शक किया जाता है। हमारे समाज का ढांचा ही विचित्र है जो स्मार्ट फोन चलाता है मगर अपनी सोच को अपडेट करने की जरूरत नहीं समझता। इसके बाद जिन्दगी भर या तो खुदगर्ज होकर जीने पर मजबूर होते हैं या फिर अपराधबोध के साथ घुटते रहते हैं क्योंकि आपकी स्थिति ऐसी हो जाती है कि आप सैंडविच बन चुके होते हैं और अनायास ही आप अपने दोस्त को खो चुके होते हैं जो आपके हर अच्छे – बुरे वक्त में आपके साथ रहा, आपके दुःख में रोया और आपकी सफलता पर नाचा…जिसके कँधे पर सिर रखकर आप रोये..आप जानते हैं कि यह आपकी निजी क्षति है और आप इसकी भरपाई कभी नहीं कर सकेंगे और न ही आपका जीवनसाथी कर सकेगा।

लव यू जिन्दगी में एक संवाद है….हम अपने एक रोमांटिक रिश्ते पर सारे रिश्तों का बोझ डाल देते हैं और उसी से सारी अपेक्षायें रखते हैं मगर ये नहीं समझ पाते कि ऐसा नहीं हो सकता। जब ये उम्मीदें पूरी नहीं होतीं तो विश्वास दरकने में समय नहीं लगता और जब आपका त्याग कुंठा में बदलता जाता है। आप न चाहते हुए भी अपने साथी को दोषी मानते हैं और आपकी तल्खी आपके व्यवहार में दिखती है। आप चाहे किसी एक को चुनें या किसी एक को छोड़ें, वह क्षति तो आपकी ही है। जिन्दगी में हर रिश्ते की अपनी एक जगह है और एक रिश्ता दूसरे रिश्ते की कमी पूरी नहीं कर सकता। अगर दोस्त आपके जीवनसाथी नहीं बन सकते तो आपका जीवनसाथी हर बार आपका अच्छा दोस्त साबित हो या आपका हमराज बन जाये, यह जरूरी नहीं है। बेहतर हो कि दोस्ती का दायरा भी ऐसा ही विस्तृत हो और आपका साथी उसका हिस्सा बने। आप भी अपने साथी को उसका स्पेस दें और उसके पुराने दोस्तों से मिलवायें या खुद दोस्ती करें…मुश्किल है..मगर नामुमकिन नहीं है।

अब सवाल उठता है कि ऐसा क्यों होता है.कि शादी के बाद आप बदलते हैं या आपकी प्राथमिकतायें बदलती हैं। खुद से सवाल कीजिये कि क्या आपने कभी अपनी पत्नी या अपने पति को उसका स्पेस दिया है या उसके दोस्तों के बीच में आये हैं? ..जरा अपनी आदतों और बातचीत के तरीके पर गौर फरमाइये…अधिकतर लड़के या लड़कियों की शब्दावली अपने जीवनसाथी को लेकर कुछ ऐसी होती है कि मैं रखूँगा..मैं करवाऊंगा….मेरा होगा…मेरी पसन्अद चलेगी। अच्छा लगता है यह सुनने में मगर आपके ये शब्द अनायास ही वह स्पेस छीन रहे हैं कि जो कि उसका है। शादी के बाद क्या किसी का व्यक्तित्व खत्म हो जाना चाहिए…? लड़कों की बात करें तो यह सोच ही क्यों रहे कि उसके फैसले आप लेंगे और यही बात लड़कियों पर भी लागू होती है। कई लोग अपने साथी का सोशल प्रोफाइल से लेकर मोबाइल तक चेक करते हैं तो कुछ ऐसे होते हैं कि चाहते ही नहीं कि उसकी पत्नी फेसबुक या व्हाट्सऐप इस्तेमाल करे। अगर वह इस्तेमाल करती या करता है तो उसके दोस्तों पर नजर रखते हैं और अगर लड़कों या लड़कियों की संख्या ज्यादा हुई तो कई बार अकाउंट बंद करवा देते हैं। उस पर दोहरापन ये कि खुद लड़कियों से दोस्ती करेंगे तो ऐसी स्थिति में घर में अगर झगड़े नहीं होंगे तो क्या होगा? दूसरी ओर लड़कियाँ ऐसी होती हैं कि हर आधे घंटे पर फोन बजाकर पति की जासूसी करती हैं….या फिर उन पर नजर रखती हैं। कई लड़कियाँ ऐसी भी हैं जो इस हद तक शक्की होती हैं कि पति के दफ्तर में जाकर उसकी सहकर्मी से लड़ बैठती हैं। अब सवाल यह है कि क्या आप ऐसा करके अपनी गरिमा नहीं गिरा रहीं और क्या आपका यह कदम आपके पति को आपसे क्या दूर नहीं करेगा क्या उसकी सहानुभूति उस सहकर्मी के प्रति नहीं होगी? ये तमाशा आपकी समस्या का समाधान तो कतई नहीं है, आपको तमाशा जरूर बना देगा। इससे ये होगा कि आपके स्वभाव के कारण अगर कोई रिश्ता न भी हुआ तो बन बैठेगा और फिर आपके पास बचाने के लिए कुछ नहीं बचेगा। बतौर पति अपनी पत्नी को सात परदों में रखने की जगह आप उसके सपनों को पूरा करने में मदद करेंगे तो आपके प्रति विश्वास और गहरा होगा। पजेसिव होना हर बार प्यार नहीं होता बल्कि एक घुटन भर देता है। शादी के बाद पति की दोस्त या सहकर्मी लड़कियों को इसलिए खटकने लगती है क्योंकि पति उस दोस्त की बहुत इज्जत करता है या मानता है या चाहता है। हर चाहत का मतलब सिर्फ दैहिक भूख नहीं होती और न हर बार  प्यार का मतलब रोमांस होता है। कुछ रिश्ते विशुद्ध संवेदनात्मक और भावनात्मक होते हैं और उनका एक ही नाम होता है…इंसानियत….। जो रिश्ता आपकी ढाल बन सकता है, अनजाने में आप उसे कटार बना देती हैं और वह अंततः आपके पति के सीने से होती हुई आपको ही चीरती है। यह सिर्फ आपकी असुरक्षा के कारण होता है। अगर आप सारे रिश्तों का बोझ और अपेक्षायें सिर्फ अपने कंधों पर उठाएँगे तो कन्धे टूटेंगे…इन सारी मुश्किलों का एक ही समाधान है कि अपने जीवनसाथी को अपने जीवन के हर मोड़ पर शामिल करिए…स्पष्टवादी बनना एक समय के लिए बुरा होता है मगर आगे चलकर इसके नतीजे अच्छे ही होते हैं। बेहतर है कि आप अपने उस खास दोस्त के बारे में पहले से ही अपने साथी को बताकर रखें…उनसे मिलवायें और उनकी दोस्ती करवायें…। आपके जीवनसाथी का दोस्त आपके लिए वरदान भी बन सकता है क्योंकि ये तो सच है कि वह आपके पति को आपसे ज्यादा समझता या समझती है…आप उसकी मदद से अपने जीवनसाथी को बेहतर समझ सकेंगे जब आप रिश्तों में स्पेस देंगे तो विश्वास का बंधन ही मजबूत होगा और एक नैतिक जिम्मेदारी बनेगी। एक रिश्ता निभाने के लिए दूसरा रिश्ता तोड़ लेना अक्लमंदी का काम नहीं है और न ही इसमें ईमानदारी है…जरूरी है कि आपके साथ इस तरह की स्थिति हो तो आप स्पष्ट तौर पर अपने साथी और अपने दोस्त से खुलकर बात करें और बतायें कि आप दोनों की जगह तय है और एक रिश्ता कभी दूसरे रिश्ते की जगह नहीं ले सकेगा…आपको दोनों चाहिए। लड़कियों के मामले में यह मुश्किल हो सकता है मगर बेहतर यही है कि आपका दोस्त आप दोनों का दोस्त बनें और इसके लिए माहौल बनाना तो आपको ही होगा। सच तो यह है कि आपको यह समझना होगा कि आपकी एक सीमा है और आप अपने साथी उन तमाम रिश्तों की जगह न तो ले सकते हैं और न ही वह कमी पूरी कर सकते हैं जो आपके आने के पहले थी तो फिर ऐसी जिद किस काम की जो पूरी हो ही न सके। इसके साथ ही अगर आप दोस्त हैं तो यह आपको समझना होगा कि शादी के बाद आपके दोस्त की प्राथमिकतायें और जिम्मेदारियाँ बदलनी स्वाभाविक है…आपने दोस्ती निभायी मगर आप अपने दोस्त के पति या पत्नी की जगह नहीं ले सकते और न ही ऐसी कोशिश करनी चाहिए। शर्तें मत लादिये और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहिए और जब लगे कि आप तमाम उलझनों का कारण हैं तो बेहतर है कि अपने कदम आगे बढ़ा लें क्योंकि कई बार हमारे चाहने से चीजें हमारे हिसाब से नहीं ढलतीं। हमें उनके हिसाब से ढलना पड़ता है….अगर आप अपने दोस्त को नहीं समझेंगे तो कौन समझेगा..दोस्ती भी समझने का ही नाम है तो बेहतर है कि समय रहते एक गरिमामय दूरी बनाकर रखी जाए कि ताकि आपके हिस्से की कुछ अच्छी यादें बची रहें…जरा सा संयम और समझदारी हर बिगड़े काम को बना सकती है क्योंकि कोई एक रिश्ता सारे रिश्तों की जगह नहीं ले सकता।

एप उपयोग गतिविधियों में 2017 में दिखी सिर्फ 6 प्रतिशत की वृद्धि: रपट

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नयी दिल्ली : मोबाइल एप नवोन्मेष और विकास में रुकावट के चलते 2017 में कुल एप उपयोग गतिविधियों में सुस्ती देखी गई। एप उपयोग गतिविधियों में 2016 की तुलना में सिर्फ 6 प्रतिशत की वृद्धि रही। एक रपट से इसकी जानकारी हुई। फ्लूरी एनालिटिक्स वार्षिक वैश्विक मोबाइल और एप उपयोग अध्ययन के अनुसार एप उपयोग गतिविधियों में 2017 में सिर्फ 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जो कि 2016 में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर से कम है। इस संदर्भ में फ्लूरी एनालिटिक्स ने एप उपयोग को उपयोगकर्ता द्वारा एक एप को खोलने को एक सत्र के रूप में दर्ज किया है। फ्लूरी एनालिटिक्स, याहू मोबाइल डेवलपर सुइट का हिस्सा है। रपट के मुताबिक, 2017 में उद्योग से जुड़ी बड़ी कंपनियों ने बाजार में अच्छी स्थिति बनाई, जबकि कुछ साल पुरानी कंपनियों को पैर जमाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। इसके कारण वृद्धि स्थिर रह सकती है। उपयोगकर्ताओं मोबाइल एप इस्तेमाल करते समय अपनी विविधता को बनाए रखा।

कंपनी ने वैश्विक स्तर पर 2.6 अरब उपकरणों के एक मिलियन से ज्यादा एप की निगरानी की और बताया कि शॉपिंग खंड के एप का इस्तेमाल 54 प्रतिशत बढ़ा हैं क्योंकि लोगों ने मोबाइल शॉपिंग एप के माध्यम से ई-कॉमर्स में अपने खर्च को बरकरार रखा है। संगीत, मीडिया और मनोरंजन एप दुसरे नंबर पर रहा। इसमें सालाना आधार पर 43 प्रतिशत की वृद्धि रही।

आयकर बचाने के लिए इन जरूरतों पर करें खर्च

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नयी दिल्ली : आयकर फाइल करते वक्त आपको अपने बचत और खर्चों की पूरी जानकारी देनी होती है, जिससे आपको जरुरी टैक्स छूट मिलती है।

टैक्स डिडक्शन की श्रेणी में आने वाले ज्यादातर खर्चे आयकर की धारा 80 सी के तहत आते हैं। इसके अलावा भी कुछ ऐसे खर्चे होते हैं जो आयकर की इस दायरे में नहीं बल्कि अन्य धाराओं के तहत आते हैं। अपनी इस रिपोर्ट में हम आपको ऐसे ही कुछ खर्चों के बारे में बताएंगे। जो इनकम टैक्स बचाने में आपकी मदद कर सकते हैं

एजुकेशन लोन से मिलेगी ये छूट-

अगर आपने अपने लिए, पत्नी या बच्चे के लिए एजुकेशन लोन लिया हुआ है या फिर आप किसी ऐसे स्टूडेंट के कानूनी रूप से अभिभावक हैं, तो सेक्शन 80ई के तहत लोन के लिए भुगतान की गई ब्याज राशि पर क्लेम कर सकते हैं। किसी भी वित्त वर्ष में भुगतान की गई कुल ब्याज राशि बिना किसी लिमिट के इस कटौती के लिए वैध है।

ट्यूशन फीस भी टैक्स छूट के दायरे में-

स्कूल की ट्यूशन फीस भी सेक्शन 80सी के टैक्स बेनिफिट्स के दायरे में आती है। टैक्स बेनिफिट की राशि डेढ लाख रुपये प्रति वर्ष की कुल सीमा के भीतर रहेगी।

मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम से होगा ये फायदा-

सेक्शन 80डी के तहत मेडिकल इंश्योरेंस के लिए भुगतान की गई प्रीमियम राशि कटौती के लिए योग्य होती है। इस सेक्शन के तहत क्लेम की जाने वाली अधिकतम राशि 60,000 रुपये है। लेकिन इसमें कई उप सीमाएं भी शामिल हैं। कोई भी व्यक्ति 25000 रुपये की प्रीमियम राशि पर अधिकतम कटौती क्लेम कर सकता है, जो उसने खुद के लिए, पत्नी या आश्रित बच्चों के लिए दी है।

साथ ही 25000 रुपये की अतिरिक्त कटौती भी वैध होती है अगर प्रीमियम माता-पिता के लिए भुगतान किया गया है। अगर पॉलिसी धारक वरिष्ठ नागरिक है तो कटौती की लिमिट 30,000 रुपये होती है।

होम लोन भी टैक्स छूट में करेगा मदद-

सेक्शन 80सी के तहत होम लोन रिपेमेंट की प्रिंसिपल राशि पर कर कटौती उपलब्ध है। इस सेक्शन के अंतर्गत लागू कटौती में यह बात मायने नहीं रखती है कि आपने किस साल में भुगतान किया है। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस की राशि भी इस सेक्शन के अंतर्गत कटौती योग्य होती है।

होम लोन के ब्याज भुगतान पर टैक्स ब्रेक की सुविधा आयकर की धारा 24 के अंतर्गत दी जाती है। सेल्फ ऑक्युपाइड प्रॉपर्टी पर अधिकतम टैक्स डिडक्शन की सीमा 2 लाख रुपए निर्धारित है।

फर्स्ट टाइम बायर्स के लिए होम लोन की ब्याज राशि पर सेक्सन 80ईई के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती का प्रावधान है। इस स्थिति में लोन राशि 35 लाख रुपये से कम और घर की कीमत 50 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।

सेविंग एकाउंट पर ब्याज-

सेविंग्स अकाउंट पर मिलने वाला ब्याज सेक्शन 80टीटीए के तहत कटौती के लिए योग्य है। क्लेम की जाने वाली अधिकतम राशि 10,000 रुपये है। इसका मतलब यह नहीं है कि 10,000 रुपये तक का ब्याज आयकर के दायरे से बाहर है।

 

(साभार – नयी दुनिया )

आईआईआईटी-दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में शुरू करेगा एम.टेक पाठ्यक्रम

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नयी दिल्ली : इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान-दिल्ली इस वर्ष जुलाई में शुरू हो रहे नये सत्र से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ में विशेषज्ञता का एम.टेक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में यह पाठ्यक्रम उपलब्ध कराने वाला पहला संस्थान होगा।

आईआईआईटी-दिल्ली के ‘इन्फोसिस सेंटर फोर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के प्रमुख मयंक वत्स ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘यह पाठ्यक्रम अनुसंधान-उन्मुख होगा और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ और ‘मशीन लर्निंग’ के आाधारभूत चीजों और विकास पर केंद्रित होगा।’’ वत्स ने बताया कि ऐसा दिल्ली में पहली बार होगा।

यह पाठ्यक्रम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) तकनीकों का उपयोग करके नवाचार और समस्या सुलझाने वाले उद्योग कैरियर के लिए स्नातक तैयार करेगा।

इस पाठ्यक्रम चार सेमेस्टर का होगा और इसमें 20 छात्र शामिल होंगे।

वत्स ने बताया, ‘‘इस पाठ्यक्रम के बाद, छात्र, वास्तविक समस्याओं को हल करने के लिए मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों लागू करने वाली मान्य पैटर्न को लागू कर ‘एआई एप्लिकेशंस’ से संबंधित समस्याओं को पहचान और विश्लेषण करने में सक्षम हो सकेंगे।

आईआईआईटी-दिल्ली में इस पाठ्यक्रम को दिल्ली सरकार आईआईआईटी-दिल्ली अधिनियम, 2007 के तहत शुरू करने जा रही है। इस संस्थान का चांसलर दिल्ली के उपराज्यपाल होते हैं।

 

अगले दो साल में सूचीबद्ध लघु,मझोली कंपनियों की संख्या 1,000 होने की संभावना

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नयी दिल्ली : बंबई शेयर बाजार और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध लघु एवं मध्यम उद्योग (एसएमई) कंपनियों की संख्या अगले दो साल में 1,000 होने की संभावना है। वर्तमान में यह संख्या करीब 350 है। यह अनुमान प्रमुख मर्चेंट बैंकर गिनीज कारपोरेट एडवाइजरी सर्विसेस का है।

गिनीज कारपोरेट का मानना है कि कारोबारी विस्तार योजनाओं और कार्यशील पूंजी की जरुरतों को पूरा करने के लिए और अधिक कंपनियां आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के रास्ते को अपनाएंगी।

वर्ष 2017 की पूरी अवधि में 132 एसएमई कंपनियों ने आईपीओ से 1,785 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह 2016 में 66 कंपनियों द्वारा जुटाए गए 66 कंपनियों के 540 करोड़ रुपये से कई गुना अधिक है।

गिनीज ने एक बयान में कहा कि पिछले कुछ सालों में दोनों शेयर बाजारों पर करीब 350 एसएमई कंपनियां पंजीकृत हो चुकी हैं। अगले दो साल में हम निश्चित तौर पर इनकी 1,000 संख्या पर पहुंच जाएंगे।

 

20 जनवरी के बाद भी बैंकिंग सेवाएं नि:शुल्क रहेंगी : आईबीए

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नयी दिल्ली : 20 जनवरी से पैसा जमा करने और निकालने समेत सभी बैंकिंग सेवाओं के लिए शुल्क लगने की खबरों का इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) ने खंडन किया है। बैंकों के संगठन आईबीए ने इस संबंध में चल रही खबरों को पूरी तरह आधारहीन और झूठा बताया।

आईबीए ने बताया कि बैंकों ने ना इस तरह का कोई फैसला किया है, ना ही ऐसा कोई प्रस्ताव है। हालांकि, आईबीए ने कहा कि परिचालन एवं वाणिज्यिक वायबिलिटी को देखते हुए बैंक लेनदेन से जुड़े विभिन्न शुल्कों की समीक्षा करते रहेंगे।

सोशल मीडिया में इसको लेकर चल रही अफवाहों का पूरी तरह से खंडन करते हुए आईबीए ने बताया कि इस तरह से कभी भी नि:शुल्क सेवाओं को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है। साथ ही यह अपेक्षित भी नहीं है। आईबीए ने स्पष्ट किया है कि बैंकों की ओर से लगातार व्यावसायिक एवं परिचालन लागत की समीक्षा की जाती है। इसी के आधार पर शुल्क बी तय किए जाते हैं।

आईबीए ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को आधारहीन और गलत करार किया है। साथ ही यह भी कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से मौजूदा समय में शुल्क के संबंध में कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

20 जनवरी से इन सेवाओं के महंगी होने की खबर थी –

कुछ सुविधाओं के लिए शुल्क की समीक्षा होगी। इन सुविधाओं में पैसा निकालने, जमा करने, मोबाइल नंबर बदलवाने, केवाईसी, पता बदलवाने, नेट बैंकिंग और चेक बुक के लिए आवेदन करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। जिस शाखा में आपका खाता है, उससे इतर किसी दूसरी शाखा में जाकर बैंकिंग सेवा लेने पर भी अलग से शुल्क लिया जाएगा। शुल्क पर फीसद का जीएसटी भी लगेगा। यह शुल्क आपके खाते से काट लिया जाएगा।

 

कमला मिल आग हादसे में 150 लोगों को बचाने वाले ये दो बहादुर

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हाल ही में मुंबई के कमला मिल कंपाउंड में आग लगने की वजह से 15 लोगों की मौत हो गई जबकि कई अन्य घायल हो गए। इस हादसे में मरने वालों की संख्या और ज्यादा हो जाती लेकि न वहां पर तैनात दो सुरक्षाकर्मियों की बदौलत सैकड़ों लोगों की जानें बच गईं। महेश साबले और सूरज गिरी पास वाली बिल्डिंग में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर तैनात हैं। वे दोनों टाइम्स नाउ के सर्वर रूम में काम करते हैं। उन्होंने अपने ऑफिस से सामने वाली इमारत में रात को लगी आग को देखा।

गंभीर होती आग को देखते ही सूरज ने तुरंत फायर ब्रिगेड को कॉल किया वहीं महेश पाइप के सहारे चौथी मंजिल पर चढ़ गये क्योंकि ऊपर जाने के सारे रास्ते आग की लपटों की वजह से बंद हो गए थे। लेकिन महेश ने किसी तरह वहां पहुंचकर दरवाजे को तोड़ दिया। इतना ही नहीं वे थोड़ा और आगे गए और आग की लपटों से घायल हो चुके 12 लोगों को खींचकर सुरक्षित स्थान पर ले गए। बताया जा रहा है कि जिन रास्तों से लोगों को बाहर निकलना था, वहां सिर्फ धुआं ही धुआं था। कुछ भी साफ तौर पर नहीं नजर आ रहा था, इसकी वजह से लोग फंस गए। लाख कोशिशों के बाद भी वे लोग बाहर नहीं आ पाए।

वहां फंसे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। बचाव कार्य में शामिल एक फायरमैन ने बताया, ‘हमें सभी 15 शव एक बाथरूम में मिले जो कि तकरीबन 100 वर्ग फीट क्षेत्र में बना हुआ है। इसके साथ ही नीचे आने के लिए दो सीढ़ियां थीं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि लोगों ने यहीं से निकलने की कोशिश की होगी। हालांकि, आगे एक सीढ़ी पूरी तरह से आग की चपेट में आ चुकी थी और दूसरी में कुछ भी साफ तौर पर नजर नहीं आ रहा था। पूरे क्षेत्र में धुआं ही धुआं था।’

महेश ने एनडीटीवी से बात करते हुए बताया कि वहां पर इतनी भारी मात्रा में काला धुआं निकल रहा था कि सांस लेना मुश्किल हो रहा था। इसलिए महेश ने किसी तरह नाक बंद किया और लोगों को बाहर निकालने लगे। वहीं सूरज ग्राउंड फ्लोर पर ही खड़े होकर लोगों को बाहर निकलने का रास्ता बता रहे थे। दोनों सिक्योरिटी गार्डों ने लगभग 150 लोगों की जिंदगियां बचा लीं। इन दोनों की बहादुरी पर एक सलाम तो बनता है।

 

शाहरुख़ पर लगा चोरी का आरोप, उठाया ऐसा क़दम कि बन गए ‘ज़ीरो’ से हीरो

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मुंबई : शाहरुख़ ख़ान को बातों का बाज़ीगर यूं ही नहीं कहा जाता। अपनी वाकपटुता से विपरीत परिस्थियों में भी जीतकर बाहर आने का हुनर उनसे सीखना चाहिए। ज़ीरो कैसे हीरो बनता है, ये कहानी भी शाहरुख़ सिखाते हैं। हाल ही में किंग ख़ान पर साहित्यिक चोरी का इल्ज़ाम लगा, जिसको लेकर सोशल मीडिया में उनकी जमकर खिंचाई हुई, मगर सीनाज़ोरी दिखाने की बजाय उन्होंने उभरते हुए लेखक को उसकी पंक्तियों के लिए शुक्रिया अदा करके बाज़ी अपने नाम कर ली।

क़िस्सा पहली जनवरी को शुरू हुआ, जब शाहरुख़ ने अपनी नई फ़िल्म ज़ीरो का फ़र्स्ट लुक और टाइटल ट्विटर पर फ़ैंस के साथ साझा किया। फ़र्स्ट लुक आते ही छा गया और देखते ही देखते इसे 3.2 करोज़ व्यूज़ मिल गए। शाहरुख़ ने फैंस का शुक्रिया अदा करने में कोई देरी नहीं की और ट्विटर पर सबका धन्यवाद किया। मगर, इस शानदार उपलब्धि को आलोचनाओं का ग्रहण तब लगा, जब उन पर साहित्यिक चोरी का सनसनीखेज़ आरोप लगा। ज़ीरो में शाहरुख़ के बौने लुक को जितनी तारीफ़ें मिलीं, उतनी ही आलोचना इस चोरी करने के लिए भी की गयी। किंग ख़ान ने फ़र्स्ट लुक के साथ अपने स्टेटस में कुछ पंक्तियां हिंदी में लिखीं। ये लाइंस थीं- ”टिकटें लिए बैठें हैं लोग मेरी ज़िंदगी की, तमाशा भी पूरा होना चाहिए!”

इन पंक्तियों को पढ़ने वाले वाह-वाह कर उठे, मगर सोशल मीडिया के दौर में चोरी पकड़ने में देर नहीं लगती। इस ट्वीट के जवाब में कुछ फॉलोअर्स ने लिखा कि दरअसल ये पंक्तियां मिथिलेश बारिया नाम के लेखक की हैं, जो ट्विटर पर भी मौजूद हैं। बस फिर क्या था, यूज़र्स शाहरुख़ के पीछे पड़ गए और असली लेखक को क्रेडिट ना देने के लिए उन्हें ट्रोल करने लगे।

शाहरुख़ एक-दो दिन तक ख़ामोश रहे, मगर शनिवार 6 जनवरी को उन्होंने भूल सुधार किया। लेखक की पुस्तक का फोटो शेयर करके उन्होंने संदेश लिखा कि उनकी किताब उन्हें बहुत अच्छी लगी। साथ ही ये भी जता दिया कि वो इतना अच्छा लिखते हैं कि सोशल मीडिया में शेयर हो जाता है। शाह रुख़ ने टिकट वाली पंक्तियों के लिए मिथिलेश का शुक्रिया भी अदा किया। शाहरुख़ के संदेश को पढ़कर ऐसा महसूस होता है, जैसे लेखक ने अपनी किताब भेजकर उन्हें चोरी के बारे में आगाह किया हो, जिसके बाद शाहरुख़ ने लेखक को क्रेडिट दिया।

बहुत बहुत धन्यवाद। आपकी किताब मिली और पढ़कर बहुत अच्छा लगा। सोशल मीडिया पर आपने साबित कर दिया की हर जगह पर अच्छी बातें ही पसंद आती हैं। और “टिक्केटें लिये…” वाली पंक्तियों के लिए भी शुक्रिया ।

बता दें कि आनंद एल राय निर्देशित फ़िल्म इसी साल दिसंबर में रिलीज़ हो रही है। कटरीना कैफ़ और अनुष्का शर्मा फ़ीमेल लीड में हैं। शाह रुख़ मेरठ के बौने के रोल में हैं, जो बड़े-बड़े सपने देखता है। फ़िल्म के टाइटल को लेकर काफ़ी सस्पेंस रहा था, जिसे किंग ख़ान ने 1 जनवरी को खोला।

 

बाल कलाकारों से 5 घंटे से ज्यादा काम नहीं करा सकेंगे निर्माता-निर्देशक

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मप्र में अब फिल्म, सीरियल्स, नाटक या रियलिटी शो में बाल कलाकारों से निर्माता-निर्देशक दिन में 5 घंटे और महीने में 27 दिन से ज्यादा काम नहीं करा सकते हैं। इसके लिए निर्माता-निर्देशक और बाल कलाकार के पालकों को कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी। बाल कलाकारों को शोषण से बचाने राज्य बाल संरक्षण आयोग भी मॉनिटरिंग करेगा। दोषी पाए जाने पर 20 से 50 हजार रुपए का जुर्माना और 2 साल तक की सजा का प्रावधान है।

जानकारी के अनुसार अभी कुछ महीने पहले राजधानी का बाल कलाकार सक्षम शर्मा का चयन टीवी चैनल के रियालिटी शो के लिए हुआ था। इसमें मुंबई में रात ढ़ाई बजे सक्षम से ऑडिशन लिया जा रहा था। इस दौरान बच्चे को लगातार नींद आ रही थी, जिसका माता-पिता ने विरोध किया था। इसी तरह के कुछ अन्य मामले भी सामने आए हैं। इसके चलते केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने बाल श्रम (प्रतिशेष और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2017 में बाल श्रम और इसमें होने वाले शोषण को रोकने के लिए प्रावधान किए हैं। इसमें बाल कलाकारों को शोषण से बचाने विशेष नियम बनाए गए हैं। राजधानी में बाल कलाकारों की संख्या 2 हजार से ज्यादा है। इस अनिधियम के तहत निगरानी कलेक्टरों द्वारा की जाएगी।

कलेक्टर को देना होगा शपथ पत्र

किसी व्यावसायिक या आडियो-वीडियो कार्यकम जिसमें बाल कलाकार काम कर रहे हैं, उसके लिए निर्माता को जहां आयोजन होगा वहां के कलेक्टर से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद ही बाल कलाकार को शामिल किया जा सकेगा। अनुमति के लिए कलेक्टर को आवेदन के साथ पालक की सहमति, कार्यक्रम की जानकारी और बच्चों की सुरक्षा के लिए उत्तरदायी व्यक्ति की पूरी जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही बाल शोषण नहीं किए जाने का शपथ पत्र भी देना होगा।

आय का 20 फीसदी करना होगा बैंक में जमा

नए नियम के तहत बाल कलाकार जिस कार्यक्रम में काम कर रहे हैं उसकी अर्जित आय की 20 फीसदी राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में बच्चे के खाते में जमा की जाएगी। यह राशि बच्चे को वयस्क होने पर मिलेगी। इसके अलावा बाल कलाकारों के शिक्षा के लिए भी नियम बनाए गए हैं।