Saturday, October 3, 2026
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गणगौर पर लीजिए रंगीले राजस्थान का अनोखा स्वाद का आनंद

राजस्थानी कढ़ी

 

सामग्री : 50 ग्राम बेसन, 250 मिली. छाछ, स्वादानुसार नमक, 1/2 लीटर पानी

कढ़ी में छोंक लगाने के लिए : 1 बड़ा चम्मच तेल (या घी), 1 छोटा चम्मच राई, 20 कढ़ी पत्ते, 1 छोटा चम्मच पिसी हुई लाल मिर्च, 4 साबुत सूखी लाल मिर्च

विधि – सबसे पहले एक भारी पैंदे वाले बर्तन में बेसन और छाछ डालकर अच्छी तरह मथ लीजिये ताकि बेसन के गुठले न रहें। अब इसमें पानी डालकर तेज आँच पर 1 उबाल आने तक लगातार चलाते रहिये। जब कढ़ी में 1 उबाल आ जाये तो इसे मध्यम आँच पर करीब 20 मिनट पकने दीजिये और बीच बीच में चलाते रहिये। इस दौरान इसमें स्वादानुसार नमक भी डाल दीजिये। 20 मिनट में कढ़ी पककर तैयार हो जायेगी. तब इसे छौंकिये। इसके लिए एक पैन में 1 बड़ा चम्मच तेल गर्म कीजिये। इसमें छोंकने की सभी सामग्री डालिये और तुरंत कढ़ी पर छौंक दीजिये। राजस्थान की स्वादिष्ट कढ़ी तैयार है। इसे प्रसिद्ध राजस्थानी व्यंजन चूरमा, दाल, बाटी के साथ गर्मागर्म परोसिये या फिर चावल, खिचड़ी, रोटी और परांठे के साथ परोसिये।

 

मावा कचौड़ी

सामग्री- मैदा – 1 कप घी, 2 टीस्‍पून काजू और बादाम, 2 चम्‍मच, दरदरे पिसे हुए मावा, 1/3 कप छोटी इलायची, 4, दरदरा पिसी पाउडर चीनी, 1/3 कप शक्‍क्‍र,1 कप गार्निश के लिये बादाम, 4 बारीक पतले कटे काजू, 2 छोटे छोटे कटे हुई छोटी इलायची, घी

विधि- सबसे पहले मैदा, घी और पानी की मददे से आटा गूथ लें। आटे को ज्‍यादा नरम ना करें। इसे 20 मिनट के लिये कपड़े से ढांक कर रख दें। भरावन बनाने के लिये मावा को हाथों से मसल कर पैन में डाल कर हल्‍का ब्राउन कर के भूनिये। फिर इसमें पिसा काजू और बादाम मिश्रण डाल कर चलाइये। अब इसे अलग निकाल कर इसे ठंडा हो जाने के बाद इसमें शक्‍कर और आधा इलायची पावडर मिलाइये। कचौड़ी बनाने की विधि – गूथे आटे में से छोटी छोटी लोइयां तोड़ कर उसे बेल कर उसके बीच में 1- 1 1/2 चम्‍मच भरावन रख लीजिये। फिर आटे को चारों ओर से कपड़ कर भरावन को बंद कर दें। अब कचौड़ी को हल्‍के से दोनों हथेलियों से दबा कर हल्‍का सा फैला दें। इसी तहर से सारी कचौडियां बनाएं और गरम घी में गोल्‍डन ब्राउन होने तक तल लीजिये। कचौडियों को धीमी और मध्‍यम आंच पर ही तलें। जब कचौडियां तल उठें तब इन्‍हें एक किनारे निकार कर चीनी की चाशनी तैयार कीजिये। गरम चाशनी में इलायची पावडर मिलाइये। फिर उसमें कचौडियों को डिप कीजिये और कुछ समय बाद निकाल कर प्‍लेट में सजाइये। ऊपर से सूखे कटे मेवे कचौडी पर गार्निश कीजिये और सर्व कीजिये।

 

नवरात्रि पर बनायें कुछ खास

साबूदाना लड्डू

 सामग्री – 1 कप साबूदाना, 1 कप कसा नारियल, 1 कप शक्कर,  1 कप घी, 4 छोटी इलायची,1 बड़ा चम्मच कसे काजू , 1 बड़े चम्मच बादाम

विधि : कढ़ाई में साबूदाना डाल के सूखा ही धीमी आंच पर भूनें। जब साबूदाना थोडा फूल के बड़ा और हल्का सुनहरा रंग का हो जाये और कुरकुरा हो जाये तब गैस बंद कर दे और साबूदाना को ठंडा होने दे। ठंडा होने के बाद मिक्सी में डाल के बारीक पाउडर बना लें। अब एक कढाई में कद्दूकस करा हुआ नारियल डाल के भूनें। जब नारियल हल्का सुनहरा हो जाये तो उसमे साबूदाना पाउडर, शक्कर मिला के गैस बंद कर दें। अब एक छोटे पैन में घी डाल के गरम करें। जब घी गरम हो जाये तो उसमें कटे हुए मेवे डाल दें। 1-2 मिनट भूनने के बाद साबूदाने के मिक्सचर को पैन में डाल दें। इसके बाद इलाइची पाउडर भी डाल दें और मिश्रण को अच्छे से मिला लें। जब मिक्चर हल्का गरम हो तभी उसके लड्डू बना लें। लड्डू ठन्डे होने के बाद उन्‍हें एक एयरटाइट डिब्बे में भर के रख लें और जब मन करे, यह व्रत का मीठा खाना इस्‍तेमाल करें।

 

केले का कवाब

सामग्री : 4 कच्चे केले, 1 कप कुट्टू का आटा, 1 छोटा टुकड़ा कसी अदरक, 2 चम्मच पिसी और भुनी हुई खड़ी धनिया, आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 3 पिसी हुई छोटी इलायची, आधा चम्मच नींबू का रस, 2 हरी मिर्च, 1 बड़ा चम्मच बारीक कटी हरी धनिया, घी, सेंधा नमक/नमक स्वादानुसार।

विधि : कच्चे केले के कबाब बनाने के लिए सबसे पहले केलों को पानी में डाल कर उबाल लें। उबले हुए केलों को छीलकर एक बर्तन में रख लें। उबले हुए केलों में अदरक, इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह से मैश कर लें। इसके बाद इसमें 1/4 कप कुट्टू का आटा, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर, हरी मिर्च, हरा धनिया, नींबू का रस और सेंधा नमक/नमक अच्छी तरह मिक्स करके गूंथ लें। अब इस मिश्रण के मनचाहे आकार के कबाब बना लें और उन्हें बचे हुए सूखे कुट्टू के आटे में लपेट लें।  अब गैस पर एक कड़ाही में घी गर्म करें। घी गर्म होने पर उसमें एक बार में तीन से चार केले के कबाब डालें और लाइट ब्राउन होने तक उलट-पुलट कर फ्राई कर लें। केले के कबाब तैयार हैं।

 

चैत्र नवरात्रि को कहते हैं  ‘राम नवरात्रि’ 

आज से (18 मार्च) चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो चुकी है। इसका समापन 26 मार्च को होगा। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के 9 रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्र साल में 4 बार आते हैं। इन चारों नवरात्रों में दो नवरात्र (चैत्र नवरात्र और शरद नवरात्रि) का ही धूमधाम से मनाया जाता है। शरद नवरात्रि को महा नवरात्रि कहा जाता है। यह नवरात्र सिंतबर-अक्टूबर में आते हैं। इस नवरात्रि के दशवें दशहरा मनाया जाता है। वहीं चैत्र नवरात्र मार्च-अप्रेल में मनाया जाता है।

शरद नवरात्रि के 10वें दिन को दशहरे के रूप में मनाया जाता है। माना जाता है इस दिन भगवान राम ने रावण पर जीत पाई थी। वहीं चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन को भगवान राम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। जिसे राम नवमी के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र नवरात्रि को राम नवरात्रि भी कहा जाता है। इस नवरात्र के बाद गर्मियों की शुरुआत मानी जाती है।

होना चाहिए पेड़ पौधों का स्थान

शास्त्रों के मुताबिक सबसे पहले भगवान रामचंद्र ने समुंद्र के किनारे नौ दिन तक दुर्गा मां का पूजन किया था और इसके बाद लंका की ओर बढ़े थे। जिसके बाद उन्होंने युद्ध में विजय भी प्राप्त की थी। पुराणों में नवरात्रों की महिमा का बहुत गुणगान मिलता है। स्वयं ब्रह्मदेव ने मां के नवरात्रों की महिमा बृहस्पति देव को बताते हुए उस ब्राह्मण पुत्री के बारे में कथा सुनाई जिसने सबसे पहले देवी दुर्गा के नवरात्र का उपवास रखा था। नवरात्रों में घर में पूजा से पहले सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। माना जाता है नवरात्र के दिनों में दुर्गा मां कैलाश छोड़कर धरती पर अपने भक्तों के साथ रहती हैं। साल 2018 में चैत्र नवरात्रि 18 मार्च को शुरू हो रहे हैं और यह 25 मार्च तक रहेंगे। 26 मार्च को नवरात्र का व्रत तोड़ा जाएगा।

 

इतिहास का साक्षी है हिन्दू नववर्ष

चैत्र नवरात्र की शुरुआत आध्यात्म का चरमोत्कर्ष होता है। देवी आराधना के इन दिनों में भक्त अपनी कामनापूर्ति के लिए कई जतन करते हैं, लेकिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का यह दिन कई ऐतिहासिक और पौराणिक घटनाओं का भी गवाह है। इन घटनाओं से कहीं नई शुरुआत हुई तो कभी युग परिवर्तनकारी घटना से इतिहास की धारा बदल गई। नजर डालते हैं कुछ ऐसी ही खास जानकारियों पर –

1 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन एक अरब 97 करोड़ 39 लाख 49 हजार 117 साल पहले सूर्योदय से ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी।

2 रावण वध के बाद अयोध्या लौटने पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का राज्याभिषेक इसी दिन हुआ था।

3 शक्ति और भक्ति के नौ दिन अर्थात नवरात्र का पहला दिन यही है।

4 सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।विक्रम संवत को राजा विक्रमादित्य ने शकों को पराजित करने के बाद 57 ईस्वी पूर्व प्रारंभ किया था।

5 यह सिखों के द्वितीय गुरु श्री अंगद देव जी का जन्म दिवस है।

6 स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन आर्य समाज की स्थापना की एवं ‘कृणवंतो विश्वमआर्यम‘ का संदेश दिया।

7 सिंध प्रान्त के प्रसिद्ध समाज रक्षक वरूणावतार संत झूलेलाल का प्रगटोत्सव इसी दिन हुआ था।

8 ज्येष्ठ पांडुपुत्र युधिष्ठिर का राज्याभिषेक आज के ही दिन हुआ था।

9 विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना था।

10 वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंध से भरी होती है।

11 शुभ मुहूर्त होने की वजह से किसी भी कार्य का आरंभ इस दिन किया जा सकता है।

12 आंध्र प्रदेश में इसको ‘उगादी‘ यानी युग का प्रारंभ के नाम से भव्यता के साथ मनाया जाता है।

13 महाराष्ट्र में इसको ‘गुड़ी पड़वा‘ के नाम से मनाया जाता है।

14 सिंध प्रांत में इस पर्व को ‘चेती चांद‘ यानी चैत्र का चांद के नाम से मनाते हैं इसलिए सिंध से विभाजन के बाद भारत आए लोग भी भारत में इस पर्व को इसी नाम से मनाते हैं।

15 जम्मू-कश्मीर में इसको ‘नवरेह‘ के नाम से मनाते हैं।

सरकार ने महिलाओं के लिए लॉन्च किया सैनिटरी नैपकिन, एक पैड की कीमत सिर्फ 2.50 रुपये

नयी दिल्ली :   अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने देश की महिलाओं के हितों का ख्याल रखते हुए बड़ा कदम उठाया। सरकार ने 2.50 रूपये के दर पर महिलाओं को सैनेटरी नैपकिन मुहैया कराने का ऐलान किया है।

केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्री अनंत कुमार ने सुविधा योजना का ऐलान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जनऔषधी परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत 100 प्रतिशत बॉयोडीग्रेब्ल सैनिटरी नैपकिन मुहैया कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि कम कीमत में देश के सभी जनऔषधि केंद्रों पर यह सैनेटरी नैपकिन बिक्री के लिए उपलब्ध रहेंगी।

अनंत कुमार के अनुसार इस नैपकिन की कीमत मात्र 2.50 रूपये तय किया गया है। यानी मात्र 2.50 रूपये में महिलायें जनऔषधि केंद्रों से सैनिटरी नैपकिन खरीद सकेंगी।  28 मई, 2018 को अंतर्राष्ट्रीय मासिक धर्म स्वच्छता दिवस से देश के सभी जन-औषधि केंद्रों पर सुविधा नैपकिन बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा। उन्होंने बताया स्वच्छ सैनिटरी नैपकिन के अभाव में देश की अधिकांश महिलाओं को तमाम बीमारियों के संक्रमण का शिकार होना पड़ता है।

नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) 2015-16 के रिपोर्ट के अनुसार 15 से 24 वर्ष के उम्र की 58 प्रतिशत महिलाएं लोकल एवं कामचलाऊ नैपकिन का इस्तेमाल करती हैं। जो कि बीमारी के संक्रमण से उनका बचाव कर पाने में सक्षम नहीं हैं। शहर में भी 74 प्रतिशत महिलाओं को ही हाइजेनिक नैपकिन उपलब्ध हो पाता है।

कुमार के अनुसार देहात में महज 48 प्रतिशत महिलाओं को ही स्वच्छ एवं शुद्ध नैपकिन नसीब हो पाता है। पॉपुलर ब्रांड न होने की वजह से ग्रामीण इलाकों में बेहतर नैपकिन उपलब्ध नहीं हैं। जिसकी वजह से महिलाओं को तमाम तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि वंचित महिलाओं के लिए भी सरकार उनकी स्वच्छत्ता, सुविधा और स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखेगी।

 

मशहूर अदाकार शम्मी का 89 साल की उम्र में निधन

मु्ंबई : 200 से अधिक फिल्मों और टेलीविजन पर प्रसारित होने वाली कुछ लोकप्रिय धारावाहिकों में काम करने वाली मशहूर अभिनेत्री शम्मी का लंबी बीमारी के बाद आज निधन हो गया। वह अपनr हास्य प्रतिभा के लिए भी जानी जाती थी। वह 89 साल की थीं।
एक पारसी परिवार में जन्मी शम्मी का नाम नरगिस रबादी था। उन्होंने‘ उस्ताद पेड्रो’ , ‘ भाई- बहन’, ‘ दिल अपना और प्रीत परायी’, ‘ हाफ टिकट’, ‘ जब जब फूल खिले’, ‘ इत्तेफाक’, ‘ द बर्निंग ट्रेन’, ‘ कुदरत’, ‘ आवारा बाप’, ‘ स्वर्ग’, ‘ शिरीन फरहाद की तो निकल पड़ी’ और अन्य फिल्मों में काम किया था।
उन्होंने‘ देख भाई देख’, ‘ जबान संभाल के’, ‘ श्रीमान श्रीमति’, ‘ कभी ये कभी वो’ और‘ फिल्मी चक्कर’ जैसे कुछ लोकप्रिय टीवी धारावाहिकों में भी काम किया था। शम्मी ने फिल्म निर्माता- निर्देशक सुल्तान अहमद से शादी की थी लेकिन सात साल साथ रहने के बाद उन्होंने तलाक ले लिया। अभिनेता अमिताभ बच्चन ने उनके निधन पर सोशल मीडिया में शोक व्यक्त किया है। बच्चन ने ट्वीटर पर लिखा है, ‘‘ प्रतिभाशाली अभिनेत्री शम्मी आंटी… का निधन हो गया। उन्होंने फिल्म जगत में कई साल का योगदान दिया और प्यारी परिवारिक दोस्त थीं। लंबे समय से बीमार और बुजुर्ग थीं। दुखद है… धीरे- धीरे सभी लोग छोड़ कर जा रहे हैं… ।’’ सुनील दत्त की बेटी और कांग्रेस की पूर्व सांसद प्रिया दत्त ने भी शम्मी के निधन पर दुख जताया।

भैय्याजी जोशी चौथी बार चुने गए आरएसएस के सरकार्यवाह

नागपुर :  अगले साल होने वाले चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने बदलाव के बदले स्थायित्व को तरजीह देते हुए अपने महामंत्री यानी सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी को ही अगले 3 साल के लिए फिर चुन लिया है। कार्यकारिणी के शेष सदस्यों का चुनाव रविवार को होगा।

संघ के सूत्रों ने पहले संकेत दिए थे कि 9 साल से लगातार सरकार्यवाह की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे भैयाजी ने अवकाश लेने की इच्छा जताई थी। उनकी जगह सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले लेने वाले थे। प्रतिनिधि सभा के 1500 में से अधिकतर सदस्यों ने यही राय दी कि चुनाव से ठीक पहले इतने महत्वपूर्ण पद पर बदलाव करना उचित नहीं होगा।

उनमें से कुछ की राय थी कि होसबोले की प्रधानमंत्री मोदी से नजदीकियां भी उनके निष्पक्ष काम करने में आड़े आ सकती हैं। हालांकि ‘संघ को जानें’ पुस्तक के लेखक अरुण आनंद का कहना है कि संघ एक गैर-राजनीतिक संगठन है और किसी राजनीतिक दल या चुनाव का उसके किसी नीतिगत फैसले पर असर नहीं पड़ता।
ऐसे होता है सरकार्यवाह का चयन
यह आरएसएस में सर्वोच्च निर्णय लेने वाली बॉडी होती है। इसकी मीटिंग हर साल मार्च के दूसरे और तीसरे सप्ताह में होती है। यह मीटिंग महीने के दूसरे और तीसरे रविवार को होती है। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में 1300 सदस्य होते हैं।  इनमें एक बड़ा हिस्सा अखिल भारतीय प्रतिनिधि का भी होता है। जो सक्रिय स्वयंसेवकों का है।

इसमें शामिल करीब 50 सक्रिय स्वयंसेवकों का प्रतिनिधित्व एक प्रान्त प्रतिनिधि (राज्य प्रतिनिधि) द्वारा किया जाता है। प्रत्येक अखिल भारतीय प्रतिनिधि 20 राज्य प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व करता है।

 

बालकृष्ण दोशी बने प्रित्जकर आर्किटेक्चर पाने वाले पहले भारतीय 

भारत के वरिष्ठ आर्किटेक्ट बालकृष्ण दोशी जिन्होंने केवल इमारते ही नहीं बल्कि संस्थान भी डिजायन किए हैं। उन्हें नोबल पुरस्कार के बराबर प्रित्जकर आर्किटेक्चर प्राइज से अपने क्षेत्र में महान कार्य करने की वजह से सम्मानित किया जाएगा। पुणे में जन्मे 90 साल के दोशी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय हैं। इससे पहले दुनिया के मशहूर आर्किटेक्ट जाहा हदीद, फ्रैंक गहरी, आईएम पेई और शिगेरू बान के नाम शामिल हैं।

प्रित्जकर की ज्यूरी का कहना है कि सालों से बालकृष्ण दोशी ने एक ऐसा आर्किटेक्ट बनाया है जो गंभीर, गैर-आकर्षक और ट्रेंड्स को फॉलो नहीं करते हैं। उनके अंदर अपने देश और लोगों के जीवन में योगदान देने की इच्छा होने के साथ ही जिम्मेदारी की गहरी समझ है। उच्च गुणवत्ता, प्रामाणिक वास्तुकला के जरिए उन्होंने सार्वजनिक प्रशासन और उपयोगिताओं, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संस्थान और रिहायशी और प्राइवेट क्लांइट्स और दूसरी इमारते बनाई हैं।

मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर से पढ़ाई करने वाले दोशी ने वरिष्ठ आर्किटेक्ट ले कॉर्ब्यूसर के साथ पेरिस में साल 1950 में काम किया था। उसके बाद वह भारत के प्रोजेक्ट्स का संचालन करने के लिए वापस देश लौट आए। उन्होंने साल 1955 में अपने स्टूडियो वास्तु-शिल्प की स्थापना की और लुईस काह्न और अनंत राजे के साथ मिलकर अहमदाबाद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के कैंपस को डिजायन किया। इसके बाद उन्होंने आईआईएम बंगलूरू और लखनऊ, द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी, टैगोर मेमोरियल हॉल, अहमदाबाद का द इंस्टिट्यूट ऑफ इंडोलॉजी के अलावा भारत भर में कई कैंपस सहित इमारतों को डिजायन किया है। जिसमें कुछ कम लागत वाली परियोजनाए भी शामिल हैं। पुरस्कार लेने के लिए दोशी मई में टोरोंटो जाएंगे और वहां वह एक लेक्चर भी देंगे।

 

पूर्व सांसदों को पेंशन क्यों नहीं मिलनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सांसद अपना पूरा जीवन राजनीति में खर्च कर देते हैं। ऐसे में पूर्व सांसदों को पेंशन और अन्य सुविधाएं देने का नौतिक आधार पर विरोध नहीं किया जा सकता। कोर्ट का कहना है कि समय के साथ चीजें बदलती हैं। जब संविधान में इस पर कोई प्रतिबंध नहीं है तो हमें इसमें क्यों दखल देना चाहिए।

न्यायमूर्ति जे चेलमेश्र्वर की अध्यक्षता वाली दो सदसीय पीठ का कहना है कि हम ये जानना चाहते हैं कि क्या पूर्व सांसदों को पेंशन सहित अन्य सुविधाएं देना कानून के खिलाफ है। पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन लोकप्रहरी की ओर से पेश एसएन शुक्ला की दलील को खारिज कर दिया। पीठ का कहना है कि पहले संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं था, लेकिन वर्षों बाद संविधान में संशोधन कर यह कानून बनाया गया। पीठ ने कहा कि समय के साथ चीजें बदलती हैं। शुरू में सुप्रीम कोर्ट में भी सात जज थे मगर अब उनकी संख्या भी बढ़ाई गई है।

पीठ ने आगे कहा कि सांसद या विधायक अपना पूरा जीवन राजनीति में खर्च कर देते हैं। तो ऐसे में उन्हें सुविधाएं क्यों नहीं मिलनी चाहिए? पीठ का कहना है कि नैतिक आधार पर इस तरह की सुविधाएं देने में कोई दिक्कत नहीं है। राजनीतिक रूप से यह सही है या गलत, हम यह तय नहीं कर सकते। बुधवार को केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखेंगे।

 

न्यूयार्क टाइम्स ने मधुबाला की खूबसूरती को किया सलाम

न्यूयार्क : अमेरिका के एक प्रमुख अखबार ने अपने एक खंड में बॉलीवुड की अब तक की सबसे खूबसूरत अभिनेत्रियों में से एक मधुबाला को दुनियाभर की15 असाधारण महिलाओं के साथ जगह दी है। गुजरे जमाने की इन महिलाओं को अपने अंदाज में श्रद्धांजलि देते हुए‘ न्यूयार्क टाइम्स’ ने अपने नये खंड‘ ओवरलुक्ड’ में इनके योगदान का जिक्र किया है।

अखबार ने लिखा, वर्ष1851 से‘ न्यूयार्क टाइम्स’ में प्रकाशित जीवन परिचय खंड में श्वेत व्यक्तियों को प्रमुखता दी जाती थी लेकिन अब हमने15 असाधारण महिलाओं की कहानियां शामिल की है।
अखबार ने लिखा कि जीवन परिचय में किसी शख्स की मृत्यु से अधिक उसके जीवन के बारे में लिखा जाता है। उनके आखिरी शब्द, उनकी यादें और अपने अपने क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया जाता है।
अखबार में मधुबाला का जीवन परिचय आयशा खान ने लिखा है। इस खूबसूरत अभिनेत्री की तुलना अक्सर मर्लिन मुनरो से की जाती है।
अखबार उन्हें याद करते हुए लिखता है कि महज16 साल की उम्र में अशोक कुमार के साथ वह फिल्म‘‘ महल’’ में दिखीं और इसके ठीक20 साल बाद उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। बेपनाह खूबसूरती की मलिका और अपने अंदर अथाह दर्द समेटने वाली मधुबाला का जीवन किसी फिल्म से कम नहीं था, जिसमें सबकुछ था– शानदार कॅरियर, असफल प्रेम कहानी और आखिरकार गंभीर बीमारी से मौत।