Tuesday, April 7, 2026
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बेहतरीन अभिनेता थे फारुख शेख – दीप्ति नवल

मुम्बई : बीते जमाने की अदाकारा दीप्ति नवल ने अपने सह- कलाकार फारुख शेख के70 वें जन्मदिन पर उन्हें याद किया और अभिनेता को एक‘ ज्ञानी’ इंसान और एक बेहतरीन कलाकार बताया। दीप्ति नवल और फारुख1980 के दशक में आईं‘ चश्मे बद्दूर’, ‘ किसी से न कहना’, ’ रंग बिरंगी’, साथ- साथ’ जैसी कई फिल्मों में एक साथ काम किया। अदाकारा ने फेसबुक पर फारुख की कुछ तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ‘‘ हमारे जमाने के बेहतरीन अभिनेता फारुख को प्रेम के साथ याद करते हुए… उन्हें कौन भूल सकता है।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘ आज फारुख के जन्मदिन पर, मेरे पास कहने को बहुत कुछ है… लेकिन उनके साथ बिताए कुछ पलों को साझा करते हुए। क्या बेहतरीन इंसान, क्या ज्ञानी व्यक्ति और क्या कलाकार… ।’’  शेख की65 वर्ष की आयु में दुबई में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी।

अवॉर्ड लेने से आईपीएस डी रूपा ने किया इंकार

बेंगलूरू : पुलिस महानिरीक्षक (होम गार्ड एंड सिविल डिफेन्स, बेंगलूरू) आईपीएस डी रूपा ने नम्मा बेंगलूरू अवॉर्ड को स्वीकार करने से मना कर दिया है क्योंकि इसके साथ बहुत बड़ा नकद पुरस्कार है। नम्मा बेंगलूरू फाउंडेशन जोकि बेंगलूरु बेस्ड एक गैर सरकारी संस्था है उसके अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में रूपा ने कहा कि उनका विवेक उन्हें इस इनाम को स्वीकार करने की इजाजत नहीं देता है।

रूपा ने अपने पत्र में लिखा है कि हर सरकारी कर्मचारी से अपेक्षा की जाती है कि वह अर्ध-राजनीतिक और संघों से जिनका थोड़ा सा भी राजनीति से ताल्लुक है उनसे समान दूरी बनाए रखने के साथ ही उनके प्रति तटस्थ रहे। केवल तभी लोक सेवक लोगों की नजरों में अपनी स्पष्ट और निष्पक्ष छवि को बनाए रख सकता है। आगामी चुनावों के मद्देनजर यह अब और अधिक प्रासंगिक हो गया है। रूपा को इस साल की सरकारी आधिकारिक श्रेणी के लिए नामांकित किया गया था।

रूपा के साथ आठ सरकारी अधिकारियों को इस अवॉर्ड के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था और विजेता के नाम की घोषणा बेंगलूरू के कार्यक्रम में होनी थी। बेंगलूरू अवॉर्ड्स- नम्मा बेंगलूरू अवॉर्ड्स फाउंडेशन द्वारा कई श्रेणियों में विभिन्न व्यक्तित्वों को दिया जाता है। यह फाउंडेशन बिजनेसमैन और भाजपा के राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर द्वारा वित्त पोषित है। यह इस फाउंडेशन के पुरस्कारों का नौवां संस्करण है। पिछले साल रूपा उस समय सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने डीआईजी जेल रहते हुए बेंगलूरू में प्रभावशाली कैदियों को जेल के अंदर मिलने वाले वीआईपी ट्रीटमेंट का पर्दाफाश किया था।

 

ओबामा ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री को दिए पेरेंटिंग टिप्स, बनने वाली हैं मां

ऑकलैंड  : न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंदा आर्डर्न ने हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की। इस दौरान ओबामा ने उन्हें पेरेंटिंग के कुछ टिप्स भी दिए। बता दें कि ऑर्डर्न इन दिनों गर्भवती हैं। जानकारी के मुताबिक, वह जून माह में एक शिशु को जन्म देने वाली हैं।
ओबामा से उनकी मुलाकात एक सरकारी हाउस में हुई। जहां उन्होंने ओबामा के साथ पेरेंटिंग यानी बच्चों के पालन-पोषण जैसे विषय पर चर्चा की। आर्डर्न ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘मैंने उनसे बच्चों के पालन-पोषण से जुड़ी बातें पूछी और उनकी बताई हुई बातें मुझे हमेशा याद रहेंगी।’

डाटा लीक होने के लिए हम ही हैं जिम्मेदार

फेसबुक के करीब 5 करोड़ यूजर्स का डाटा लीक होने की रिपोर्ट सामने आने के बाद खलबली मची है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की मदद करने वाली कंपनी कैम्ब्रिज एनालिटिकल ने फेसबुक के पांच करोड़ से अधिक यूजर्स की निजी जानकारियां चुरा ली थीं। वहीं फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भी इसकी पुष्टि करते हुए गलती स्वीकार की है। अब सवाल यह है कि डाटा लीक होने के लिए क्या केवल फेसबुक ही जिम्मेदार है? नहीं, इसमें आपकी और हमारी भी उतनी ही गलती है जितनी फेसबुक की है। आइए जानते हैं कैसे?
आपका जुड़वां कौन है? आप किस सेलिब्रिटी की तरह दिखते है? आपका कौन सा दोस्त आपकी जासूसी करता है? कौन सा दोस्त आपके लिए जान दे सकता है? कौन आपको चूमने का सपना देख रहा है? आपकी इच्छा कब होगी पूरी? यदि आप भी फेसबुक पर इस तरह के ऐप को ट्राई करते हैं और शेयर करते हैं तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। क्योंकि ऐसा करके आप अपने डाटा को बिकने के लिए बाजार में भेज रहे हैं। आपके पर्सनल डाटा का इस्तेमाल मार्केटिंग और विज्ञापन के लिए हो रहा है और बार आपके लिए यह खतरा भी बन सकता है।

आपका बेशकीमती डाटा कई तरह से मार्केट में जाते हैं इनमें से प्रमुख तरीके ये दो हैं। पहला, जब आप किसी वेबसाइट पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट से लॉगिन करते हैं और दूसरा जब आप मौज-मस्ती के लिए फेसबुक पर दूसरी साइट्स की मदद से चेक करते हैं कि आपकी शक्ल किस सेलिब्रिटी से मिलती है या फिर कौन-सा दोस्त आपसे सबसे ज्यादा नफरत करता है।

इस तरह आपका बेशकीमती डाटा मार्केट में पहुंचता है। अब सवाल है कि यदि आपने ऐसा किया है तो अब आगे क्या करना है ताकि आपका डाटा सुरक्षित रहे। तो चलिए सबसे फेसबुक पर चलते हैं। फेसबुक लॉगिन करें और सेटिंग्स में जाएं। उसके बाद बाएं तरफ दिख रहे मीनू बार में ऐप्प (Apps) पर क्लिक करें।

अब आपको उन सभी ऐप की लिस्ट दिख जाएगी जिनके पास आपका डाटा है। ऐप के नाम पर क्लिक करके आप इन्हें हटा सकते हैं। हालांकि आपका डाटा तो पहले से ही इन ऐप के पास स्टोर हो चुका है तो अब उस ऐप वाली कंपनी पर निर्भर करता है कि आपका वह कंपनी किसी के साथ शेयर करती है या नहीं।

पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में दिव्यांगों के प्रवेश के नियमों में संशोधन को मंजूरी

नयी दिल्ली : स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में दिव्यांग अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिलाने के लिहाज से उनके प्रवेश के नियमों में संशोधन की मंजूरी प्रदान कर दी है।

सरकार के एक वक्तव्य के अनुसार विकलांग जन अधिकार कानून, 2016 के अनुरूप दिव्यांग अभ्यर्थियों द्वारा भरी जाने वाली सीटों की संख्या तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत कर दी गयी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए प्रधानमंत्री की‘ सबका साथ, सबका विकास’ की सोच की तर्ज पर दिव्यांग जनों के कल्याण वाला बताया।

 केदारनाथ सिंह को याद करते हुए

 निशांत
 पहली बार
कहाँ देखा था केदारनाथ सिंह को
कोलकाता के ठनठनियों काली मंदिर के पास
एक गोरा-गारा ठिगना आदमी
चला जा रहा था दो-चार लोगों के साथ
“यही केदारनाथ सिंह हैं।
हिंदी के सबसे बड़े कवि।”
मित्र प्रकाश ने कहा था
“नहीं, एशिया के सबसे बड़े कवि।”
पत्रकार कृपाशंकर चौबे ने कहा था
हम
अभिभूत थे
क़िताबों से निकलकर
एक सच्ची-मुच्ची आदमी खड़ा था
हमारे बीच
थोड़ा सा छूकर
देखना चाहते थे उन्हें हम
चाहते थे
हो जाए एक फ़ोटो
उनके साथ
बड़े होने के बाद
एक बार बचपन फिर आ गया था हमारे अंदर
तुम्हारे कारण
धन्यवाद,केदारनाथ सिंह!
धन्यवाद!

 बड़ी बात को साधारण ढंग से कहने वाले कवि थे केदारनाथ सिंह 

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से भारतीय भाषा परिषद में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रो अरुण कुमार ने कहा कि केदारनाथ सिंह अच्छे कवि के साथ एक अच्छे अध्यापक भी थे। विमलेश त्रिपाठी ने कहा कि वे आमजन के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि थे। राज्यवर्द्धन ने कहा कि वे सहजता और आत्मीय के कवि थे। रितेश पांडे ने कहा कि हिंदी कविता के बड़े सेलिब्रिटी थे केदारनाथ जी। गीता दुबे ने कहा कि समकालीन हिंदी साहित्य के अमिताभ बच्चन थे केदारनाथ जी। इसके अलावा सुमिता गुप्ता, आनंद गुप्ता, श्री निवास सिंह यादव, पंकज सिंह, राजेश मिश्र, श्रद्धांजलि सिंह, श्रीरामनिवास द्विवेदी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। संजना जायसवाल, राहुल गौड़ और सुषमा त्रिपाठी ने केदारनाथ सिंह की कविताओं की आवृत्ति की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. ٰशंभुनाथ कहा कि केदारनाथ सिंह हिंदी के सबसे ज्यादा लोकप्रिय, सहज और पठनीय कवि हैं। आलोचक रविभूषण ने कहा कि उनका देह भले ही दिल्ली में था पर मन ग्रामीण संस्कारों से संपृक्त था। उनका जाना कविता की बड़ी क्षति है। कार्यक्रम का सफल संचालन संजय जायसवाल ने किया।

 कवि केदारनाथ सिंह की याद में हुई शोकसभा

मिदनापुर : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से हिंदी के लोकप्रिय और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि केदारनाथ सिंह के आकस्मिक निधन पर एक शोकसभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखा गया। विभागाध्यक्ष प्रो दामोदर मिश्र ने कहा कि हिंदी काव्य परम्परा के सबसे ज्यादा समादृत कवि थे केदारनाथ सिंह। उन्होंने हिंदी कविता लोकप्रिय बनाया। डॉ. संजय जायसवाल ने उनके साथ बिताए गए क्षणों को याद करते हुए कहा कि केदारनाथ सिंह हिंदी कविता के मानक हैं। वे बहुत सौम्य और आत्मीयता के भाव से भरे थे। दीपनारायण ने कहा कि हिंदी साहित्य ने एक हीरा खो दिया। पुष्पा मल्ल ने कहा कि वे जन के कवि थे। शोधार्थी मधु सिंह ने कहा कि उनकी कविताओं में जीवन जीने की प्रेरणा है। बहुत सम्प्रेषणीय कवि हैं। उनका जाना एक युग का अवसान है।

अदिति साहा को मिला सुकन्या सम्मान

महिला दिवस पर फोटो पत्रकार अदिति साहा को सुकन्या सम्मान से सम्मानित किया गया। अदिति हर क्षेत्र में अपने कैमरे का हुनर दिखाती रही हैं। कई मीडिया संस्थानों को अपनी सेवायें दे चुकी अदिति की कहानी दिल्ली की पत्रकार सर्वेश की महिला फोटो पत्रकारों पर आधारित किताब में भी पढ़ने को मिलेगी। अपराजिता की ओर से अदिति साहा को हार्दिक बधाई..।

24 साल की एमबीबीएस छात्रा शहनाज बनीं राजस्थान की सबसे युवा सरपंच

भरतपुर : एमबीबीएस सरपंच शहनाज़  राजस्थान के भरतपुर की सबसे युवा महिला सरपंच चुनी गई हैं। 24 साल की शहनाज पेशे से डॉक्टर हैं और उन्होंने इसी साल एमबीबीएस के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा दी है।

शहनाज़ हमेशा से डॉक्टर ही बनना चाहती थीं और कभी इस ओर आने का ख्याल उनके मन में नहीं था पर नियति को कुछ मंजूर था। शहनाज़ को विरासत में राजनीति मिली है. उनके दादा पिछले पचपन सालों से भरतपुर की कामां पंचायत के सरपंच थे और अब उनकी जगह उनकी पोती ने ले ली है। शहनाज के दादा का फर्जी सर्टिफिकेट इश्यू करने का आरोप था जिस कारण सरपंच चुनाव रद्द कर दिया गया था. फिर शहनाज के दादा के बाद उस सीट को लेकर घर में बात शुरू हो गई थी कि कौन चुनाव लड़ेगा इस बात पर काफी देर बाद फैसला हुआ कि शहनाज ही इस सीट पर सरपंच का चुनाव लड़ेंगी। शहनाज का पूरा परिवार राजनीति में ही है। पिता गांव के प्रधान, मां विधायक, संसदीय सचिव भी रह चुकी हैं। शहनाज अपने इलाके में लड़कियों की शिक्षा पर जोर देना चाहती हैं और साथ ही साथ स्वच्छ भारत के मिशन पर भी काम करना चाहती हैं। वे अगले महीने से अपनी इंटर्नशिप गुड़गांव में करेंगी साथ ही साथ लगातार अपने गांव के संपर्क में भी रहेंगी।

शहनाज़ ने पांचवी तक पढ़ाई गुरुग्राम के श्री राम स्कूल से की और छठवीं से बारहवीं की पढ़ाई मारुति कुंज से की है। उसके बाद शहनाज उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद से MBBS कर रही हैं।

शहनाज़ अपनी तरह और लड़कियों को भी आगे लाना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ”मैं बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही है हूं कि लोगों की सेवा करने का मौका मिला है।” बतौर सरपंच उनकी प्राथमिकता होगी कि गांव में बच्चियों के लिए शिक्षा और स्वच्छता की बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि मैं यह भी चाहती हूं कि मैं बेटियों के सामने यह उदाहरण दे सकूं कि शिक्षा से समाज में बदलाव हो सकता है।

लिटिल थेस्पियन का नाटक रूहें

नाटक ‘रूहें’ एक राज्य की अस्थिरता और उसके गौरव की कहानी है। इसमें कई परतें हैं जो संघर्ष के विभिन्न रंगों को दर्शाती हैं – अतीत और वर्तमान के बीच संघर्ष,  सही और गलत का संघर्ष,  अभिजात वर्ग के खिलाफ लोकतंत्र का संघर्ष। यह नाटक विभिन्न भावनाओं और मानवीय संघर्षों का एक ऐसा कोलाज है जिसमें केंद्र में एक शाही कब्रिस्तान है जहां लंबे समय से गुमशुदा अतीत की कई आत्माएं बाहर आने के लिए संघर्ष कर रही हैं और वहीँ दूसरी ओर वर्तमान मौजूदा हालातों से निपटने की कोशिश में लगातार संघर्षरत है क्योंकि वो जानता है “नफ़रत से कभी भी ख़ुशी हासिल नहीं हो सकती” । नाटक का लेखन और निर्देशन एस.एम अजहर आलम ने किया है।  आपके लिए नाटक की एक झलक…

https://youtu.be/Hp4OzmaZ2iI