Friday, July 10, 2026
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विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस : क्योंकि किताबों से बेहतर कुछ नहीं

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस हर साल 23 अप्रैल को मनाया जाता है। कहते हैं किताबों से अच्छा कोई दोस्त नहीं हैं, ये वो मित्र हैं, जो आपका साथ कभी नहीं छोड़ती हैं, एक बार आपका साया भी आपका साथ अंधेरे में छोड़ सकता है लेकिन किताबें सांसों की तरह आपके साथ रहती हैं।
जो लोग किताबों के जरिए अपने जीवन की पढाई आरंभ करते हैं, वो ही आज बढ़ती उम्र के साथ-साथ कम्प्यूटर और इंटरनेट के प्रति बढ़ती दिलचस्पी की वजह से किताबों से दूर हो रहे हैं मगर देखा जाए तो यह भी पुस्तकों का आधुनिकीकृत रूप ही है। फिर भी किताबों की खुशबू में जो सुकून है, वह कहीं नहीं है। ये अलग बात है कि डिजिटल तरीके से कई दुर्लभ पुस्तकों को संरक्षित करने में सहायता मिली है।
लोगों और किताबों के बीच की दूरी को पाटने के लिए यूनेस्को ने ’23 अप्रैल’ को ‘विश्व पुस्तक दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। जिससे लोगों का किताबों के प्रति रूझान कम ना हो। कुछ खास बातें विश्व पुस्तक तथा स्वामित्व (कॉपीराइट) दिवस का औपचारिक शुभारंभ 23 अप्रैल 1995 को हुई थी।
आपको बता दें कि 23 अप्रैल का दिन साहित्यिक क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है चूंकि यह तिथि साहित्य के क्षेत्र से जुड़ी अनेक विभूतियों का जन्म या निधन का दिन है। इसी कारण यूनेस्को ने ’23 अप्रैल’ को ‘विश्व पुस्तक दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया था।
23 अप्रैल ही क्यो?
उदाहरण के तौर पर 1616 में 23 अप्रैल को सरवेन्टीस, गारसिलआसो डी लाव्हेगा, मारिसे ड्रयन, के. लक्तनेस, ब्लेडीमीर नोबोकोव्ह, जोसेफ प्ला और मैन्युएल सेजीया के जन्म/ निधन के दिन के रूप में जाना जाता है। महान लेखक और नाटककार विलियम शेक्सपीयर के तो जन्म और निधन की तिथि भी 23 अप्रैल है।
विश्व पुस्तक और स्वामित्व (कॉपीराइट) दिवस 23 अप्रैल को विश्व के 100 देशों में मनाया जाता है। इंग्लैंड और आयरलैंड में विश्व पुस्तक और स्वामित्व (कॉपीराइट) दिवस 3 मार्च को होता है।
गीता में कहा गया है- ‘ज्ञानात ऋते न मुक्ति’ अ गीता में कहा गया है- ‘ज्ञानात ऋते न मुक्ति’ अर्थात् ज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं है और ज्ञान का महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं-पुस्तकें। जो बात आप किसी से पूछ नहीं सकते हैं उन सारी बातों का उत्तर किताबों के पन्नों में मिलता है, किताबों की जगह सूचना प्रौधोगिकी का कोई भी अंग ले नहीं सकता है।
पुस्तकें एकान्त की सहचारी हैं कहा गया है ना better alone than in a bad company . अर्थात् कुसंगति से एकान्त कहीं ज्यादा उत्तम है। पुस्तकें एकान्त की सहचरी हैं । वे हमारी मित्र हैं जो बदले में हम से कुछ नहीं चाहती । वे इस लोक का जीवन सुधारने और परलोक का जीवन संवारने की शिक्षा देती है और प्रेम से लेकर कटुता तक के सारे सवालों के जवाब वहां विस्तार से मौजूद हैं।
किताबें आपसे लेती कुछ नहीं मगर देती बहुत हैं और यह पाना आपके चयन पर निर्भर करता है इसलिए खूब पढ़ें और जब भी पढ़ें…अच्छा पढ़ें।

(साभार – अमर उजाला)

पोक्सो एक्ट : स्वाति मालीवाल ने 10 दिन की भूख हड़ताल के बाद तोड़ा अनशन

नई दिल्ली : दिल्ली के राजघाट पर दस दिनों से भूख हड़ताल पर बैठीं स्वाति मालीवाल ने अनशन तोड़ दिया है। बता दें कि पॉक्सो एक्ट में बदलाव लाने के लिए उन्होंने ये कदम उठाया था। उनका अनशन तुड़वाने उनकी दादी राजघाट पहुंची थीं। पोक्सो एक्ट में संशोधन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया था। एक्ट में संशोधन के लिए अध्यादेश लाने के फैसले पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया साथ ही जीत के लिए देश की जनता को बधाई दी थी।

इससे पहले स्वाति मालीवाल ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री देश की बेटियों की आवाज सुनेंगे और देश में महिलाओं को बच्चियों की सुरक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाएंगे।

उन्होंने पत्र में गुजारिश की जब तक उन्हें मांगों के पूरे होने का आश्वासन नहीं मिलता तब तक वह अनशन नहीं तोड़ेगी। पोक्सो एक्ट में बदलाव को लेकर लाए गए अध्यादेश को मंजूरी मिलने पर उन्होंने कहा था कि अभी सिर्फ आधी मांग पूरी हुई है, अभी भी 6 माह का प्रावधान नहीं जोड़ा गया है।

हालांकि देर शाम उन्होंने अनशन रविवार को तोड़ने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि बहुत कम आंदोलनों ने इतने कम समय में सफलता पाई है। अध्यादेश में हमारी ज्यादातर मांगों को जगह मिली है।

बच्चों के बलात्कारियों को फांसी, देश में फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना, जल्द मुकदमा खत्म करना, और बलात्कार के मामले की जांच के लिए अतिरिक्त संसाधन देना। यह सभी कदम तीन महीने में उठाए जाएंगे। यदि तीन माह में यह कदम नहीं उठाएं जाएंगे तो फिर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

बलात्कार के मामलों में सख्त सजा वाले अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी

नयी दिल्ली : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के मामलों में दोषी व्यक्तियों को मृत्युदंड तक की सजा देने संबंधी अध्यादेश को आज अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी।

केंद्रीय कैबिनेट ने उस अध्यादेश को अपनी स्वीकृति दी थी जिसके तहत 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार करने के दोषी ठहराये गये व्यक्ति के लिये मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने की अदालत को इजाजत दी गई है। गजट अधिसूचना में कहा गया है , ‘‘ संसद का सत्र अभी नहीं चल रहा है और राष्ट्रपति इस बात से संतुष्ट हैं कि जो परिस्थितियां हैं उनमें यह आवश्यक था कि वह तत्काल कदम उठाएं। ’’

इसके अनुसार संविधान के अनुच्छेद 123 के उपखंड (1) में दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए राष्ट्रपति ने इस अध्यादेश को मंजूरी दी है।

आपराधिक कानून ( संशोधन ) अध्यादेश 2018 के अनुसार ऐसे मामलों से निपटने के लिये नयी त्वरित अदालतें गठित की जायेंगी और सभी पुलिस थानों एवं अस्पतालों को बलात्कार मामलों की जांच के लिए विशेष फॉरेंसिक किट उपलब्ध करायी जायेगी।

अध्यादेश का हवाला देते हुए अधिकारियों ने बताया कि इसमें विशेषकर 16 एवं 12 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार के मामलों में दोषियों के लिये सख्त सजा की अनुमति है। 12 साल से कम उम्र की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों को मौत की सजा देने की बात इस अध्यादेश में कही गई है।

अध्यादेश के मुताबिक महिलाओं से बलात्कार मामले में न्यूनतम सजा सात साल से बढ़ा कर 10 साल सश्रम कारावास की गई । इ से अपराध की प्रवृत्ति को देखते हुए उम्रकैद तक भी बढ़ाया जा सकता है।

16 साल से कम उम्र की लड़कियों से सामूहिक बलात्कार के दोषी के लिये उम्रकैद की सजा का प्रावधान बरकरार रहेगा।

इस अध्यादेश के मुताबिक 16 साल से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के मामले में न्यूनतम सजा 10 साल से बढ़ाकर 20 साल की गई और अपराध की प्रवृत्ति के आधार पर इसे बढ़ाकर जीवनपर्यंत कारावास की सजा भी किया जा सकता है। यानी दोषी को मृत्यु होने तक जेल की सजा काटनी होगी।

अधिकारी ने बताया कि भारतीय दंड संहिता ( आईपीसी ), साक्ष्य अधिनियम , आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता ( सीआरपीसी ) और यौन अपराधों से बाल सुरक्षा ( पोक्सो ) अधिनियम को अब संशोधित माना जायेगा।

अध्यादेश में मामले की त्वरित जांच एवं सुनवाई की भी व्यवस्था है।

अधिकारियों ने बताया कि बलात्कार के सभी मामलों में सुनवाई पूरी करने की समय सीमा दो माह होगी।

साथ ही , 16 साल से कम उम्र की लड़कियों से बलात्कार या सामूहिक बलात्कार के आरोपी व्यक्ति को अंतरिम जमानत नहीं मिल सकेगी।

इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि 16 साल से कम उम्र की लड़की के साथ बलात्कार के मामलों में जमानत आवेदनों पर फैसला करने से पहले अदालत को सरकारी वकील और पीड़िता के प्रतिनिधि को 15 दिनों का नोटिस देना होगा।

एक अधिकारी के मुताबिक, बलात्कार के मामलों में सख्त सजा सुनिश्चित करने के लिए न्यायपालिका की शक्तियां बढ़ाने के साथ ही कैबिनेट ने कई दूसरे कदमों को भी मंजूरी दी है। इनमें राज्यों और संबंधित उच्च न्यायालय के साथ विचार – विमर्श करके त्वरित अदालतों की स्थापना शामिल हैं।

दलित सुहागिनों द्वारा पूजे जाने वाले इस मंदिर में पहली बार पुरुषों को मिलेगा प्रवेश

केंद्रपाड़ा : ओडिशा के सतभया मंदिर का मा पंछूबाराही मंदिर देश के दूसरे मंदिरों की तरह है लेकिन इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां स्थापित की गईं पांच मूर्तियों को पुरुषों का छूना वर्जित है। यहां केवल दलित समुदाय कि खासतौर से स्थानीय मछली पकड़ने वाले समुदाय की महिलाएं ही पूजा करती हैं। इन्हीं दलित महिलाओं के पास मंदिर में पूजा-अर्चना करने का विशेषाधिकार है। यह परंपरा पिछले 400 सालों से अनवरत जारी है। मगर जलवायु परिवर्तन की वजह से मंदिर के आस-पास समुद्र का पानी बढ़ रहा है जिसकी वजह से मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।
इसी वजह से पुरुषों को पहली बार मंदिर में रखी मूर्तियों को छूने का अवसर मिलेगा क्योंकि मंदिर को 12 किलोमीटर दूर शिफ्ट किया जा रहा है। इसी कारण मंदिर की पुजारिनों के पास पुरुषों को गर्भगृह में आने कि इजाजत देने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा है। मंदिर की सेवा पांच पुजारिनें बारी-बारी से करती हैं। एक पुजारिन सबिता दलेई का कहना है कि महिलाओं के लिए इन भारी मूर्तियों को उठाकर ले जाना संभव नहीं है। हमें मूर्तियों को ले जाने के लिए पुरुषों और मूर्तिकारों की जरूरत है। शुक्रवार को पुरुष अपनी पीठ पर लादकर इन मूर्तियों को बागापटिया लेकर जाएंगे। बागापटिया पहुंचने के बाद पुजारिनें इन्हें पूजा-अर्चना के बाद शुद्ध कर देंगी। कॉलेज की पूर्व प्रिंसिपल धरानिधार राउत ने कहा- ऐसे समय में जब देश के बहुत से मंदिर दलितों की पहुंच से दूर हैं और कई मंदिरों में महिलाओं को आने की अनुमति नहीं है जैसे कि केरला का सबरीमाला मंदिर, उस समय मा पंछूबाराही महिलाओं के लिए आशा की एक किरण है। उन्होंने बताया कि समुद्र के बढ़ते जलस्तर के कारण सतभया के लोग पिछले काफी समय से परेशान हैं। इसने बहुत से घरों और खेती की जमीन को निगल लिया है।

अब पुरुषों के लिए भी आएगी गर्भनिरोधक गोली

महिलाओं के लिए बाजार में मौजूद गर्भनिरोधक गोली की तरह अब पुरुषों के लिए भी गोली जल्द उपलब्ध होगी। शोधकर्ताओं ने ऐसे यौगिक की खोज की है जो शुक्राणु की गतिशीलता पर नियंत्रण रख सकता है। यह निषेचन की क्षमता को कम कर सकता है। इसका इस्तेमाल करके पुरुषों के लिए भी अब निरोध की गोली बनाई जा सकती है जो आबादी नियंत्रण के लिए कारगर उपाय साबित हो सकती है। ईपी055 नामक यह यौगिक शुक्राणु की गतिशीलता को शिथिल कर देता है और इससे हारमोन पर भी कोई असर नहीं होता है।

जर्नल पीएलओएस वन में प्रकाशित इस शोध में दावा किया गया है कि इस यौगिक से ‘पुरुष-गोली’ बनाई जा सकती है जो जन्म दर को नियंत्रित करने में कारगर साबित होगा और इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होगा। वर्तमान में पुरुषों के लिए कंडोम और नसबंदी के उपाय उपलब्ध हैं। परीक्षण के तौर पर इसका उपयोग नर बंदरों पर किया गया, जिसमें कोई दुष्प्रभाव नहीं पाया गया। इसकी शोधकर्ता अमेरिका के ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी स्थित ओरेगन नेशनल प्राइमेट रिसर्च सेंटर की मेरी जेलिंस्की ने कहा, “उपयोग के 18 दिन बाद सभी लंगूरों में पूरी तरह से सुधार के लक्षण पाए गए।”

100 शीर्ष प्रभावशाली शख्सियतों में शामिल हुईं दीपिका पादुकोण

मुम्बई : दीपिका  पादुकोण टाइम्स मैगजीन द्वारा जारी शीर्ष 100 प्रभावशाली शख्सियतों में शामिल की गयी हैं। अब रणवीर ने एक बार फिर खूबसूरत दीपिका को उनके काम और उनकी सफलता के लिए प्रोत्साहित किया है। रणवीर दीपिका की तारीफ करते हुए उन्हें क्वीन कहते हैं। दरअसल, दीपिका को टाइम्स मेगजीन द्वारा सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाले 100 लोगों में से एक चुना गया है। इसके चलते दीपिका ने अपनी एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें इस बात की जानकारी दी गई है। दीपिका ने इस तस्वीर के कैप्शन में लिखा है- क्या सम्मान मिला है। दीपिका के इस पोस्ट पर रणवीर कमेंट करते हैं। रणवीर लिखते हैं-‘क्वीन’। भारतीय फिल्म इंडस्‍ट्री में से केवल दीपिका ही इस लिस्ट मेंं शामिल हैं।

दीपिका के अलावा भारतीय क्रिकेट सनसनी विराट कोहली और ओला कैब के को-फाउंडर भावीश अग्रवाल ने भी इस लिस्ट में जगह बनाई है। मैगजीन की कलाकारों की लिस्‍ट में निकोल किडमैन, स्टर्लिंग के ब्राउन, रयान कुगलर और गेल गेडट भी हैं। इसके अलावा अलग-अलग क्षेत्रों से गायिका रिहाना, जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे, उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान, चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और आयरलैंड के भारतीय मूल के प्रधानमंत्री लियो वराडकर भी शुमार हैं।

भगोड़ों की संपत्ति होगी जब्त, अध्यादेश को मिली कैबिनेट की मंजूरी

मिली जानकारी के मुताबिक, इस अध्यादेश के जरिये भारत से बाहर की संपत्तियों को संबंधित देश के सहयोग से जब्त किया जा सकेगा। अपराध करके विदेश भागने वालों को अदालत में दोषी ठहराये बिना भी उनकी संपत्ति जब्त करने का प्रावधान है। विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे कई आर्थिक अपराधियों के देश से बाहर खिसक जाने के बीच यह कदम उठाया जा रहा है। इसके जरिए सरकार संदेश देना चाहती है कि देश को आर्थिक नुकसान पहुंचा कर विदेश भाग जाने वाले अब बच नहीं पाएंगे। इस अध्यादेश के प्रावधान उन आर्थिक अपराधियों पर लागू होंगे जो विदेश भाग गए और भारत लौटने से इनकार करते हैं। यह कानून उन लोगों के खिलाफ इस्तेमाल होगा जिन पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि बकाया हो और वे इसे वापस नहीं कर रहे हों। इसमें यह भी प्रावधान है कि ऐसे भगोड़े आर्थिक अपराधी की संपत्ति को उसके दोषी ठहराये जाने से पहले ही जब्त किया जा सकेगा और उसे बेचकर कर्ज देने वाले बैंक का कर्ज चुकाया जायेगा। इस तरह के आर्थिक अपराधियों के मामले की सुनवाई मनी लांड्रिंग कानून के तहत होगी।

टैक्सी, ऑटो चलाने के लिए कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस अब अनिवार्य नहीं

नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने कमर्शियल टैक्सी, ऑटो चलाने वाले करोड़ों लोगों को राहत देते हुए बड़ा फैसला किया है। अब ऐसे ड्राइवर्स अपने निजी ड्राइविंग लाइसेंस के जरिए भी कमर्शियल गाड़ियां जैसे कि ई-रिक्शा, बाइक, तिपहिया और छोटे लोडर वाहन चला सकेंगे।
इनको लेना होगा कमर्शियल लाइसेंस
हालांकि सरकार ने ट्रक,बस और अन्य हैवी कमर्शियल वाहनों को चलाने के लिए पहले की तरह कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस लेना होगा। सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है क्योंकि जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने के लिए आदेश दिया था।
लाखों लोगों को मिलेगा रोजगार
सरकार के इस कदम लाखों लोगों को रोजगार मिल सकेगा। अभी तक कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस न होने की वजह से लोग इस तरह के कारोबार में नहीं आ पाते थे। कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस पाने के लिए लोगों को कम से कम एक साल का इंतजार करना पड़ता था। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से आरटीओ ऑफिस में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।
सड़कों पर बढ़ जाएगी गाड़ियों की संख्या
हालांकि सरकार के इस कदम से पहले से बेहाल सड़कों पर गाड़ियों की संख्या काफी बढ़ जाएगी, क्योंकि ऐसी गाड़ियों को चलाने वाले लोग काफी संख्या में वाहन लेकर निकलेंगे। लेकिन सरकार को लगता है कि इससे सड़क पर निजी वाहन कम होंगे, जब टैक्सी व ऑटो की उपलब्धता काफी बढ़ जाएगी। अभी भी देश के छोटे-बड़े शहरों में ई-रिक्शा और ऑटो की काफी संख्या हो गई है, जिसके चलते कई बार जाम लग जाता है।

अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला बारबरा बुश का निधन

वॉशिंग्टन : अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला और एक अन्य पूर्व राष्ट्रपति की मां बारबरा पियर्स बुश का निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थी। ह्यूस्टन में अपने घर में जब उन्होंने अंतिम सांस ली तो उनके साथ उनके पति पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज हर्बर्ट वॉकर बुश और बेटा एवं पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज वॉकर बुश परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मौजूद थे। उनके पति के कार्यालय से जारी बयान में कहा गया है , ‘‘ अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला और पारिवारिक साक्षरता की पुरजोर समर्थक रहीं बारबरा पियर्स बुश का 92 वर्ष की आयु में  17 अप्रैल 2018 को निधन हो गया। ’’ बुश और बारबरा ने 73 साल पहले शादी की थी। वह 16 साल की उम्र में पहली बार बुश से मिली थीं और उस समय वह स्कूल में पढ़ती थी। उन्होंने वर्ष 1945 में शादी की जब नौसैन्य अधिकारी बुश छुट्टी लेकर आए।

जापान की मेयर ने की सूमो रेसलिंग में महिलाओं को बराबरी की माँग

टोक्यो : महिलाओं के साथ यूं तो हर देश में भेदभाव किया जाता है। फिर चाहे बात हो पढ़ाई की, नौकरी की या किसी खेल क्षेत्र की। कई नौकरियों में तो यह तक कह दिया जाता कि उसके लिए केवल पुरुष ही आवेदन कर सकते हैं। ऐसी ही एक परंपरा जापान की भी है। यहां 400 साल पहले शुरू हुआ खेल सूमो रेसलिंग जापान का सबसे पुराना और पवित्र खेल माना जाता है। इसमें शुरू से ही ये परंपरा रही है कि रिंग (दोह्यो) में महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकतीं। लेकिन इस परंपरा के खिलाफ अब जापान के तकाराजुका शहर की मेयर तमोको नाकागावा ने आवाज उठाई है मगर मेयर होने के बावजूद उनको अन्दर नहीं जाने दिया गया और उन्होंने रिंग के बाहर भाषण देकर अपनी बात रखी।
उनके मुताबिक वह इस पुरुष प्रधान परंपरा को नहीं मानती हैं, महिलाओं को आखिर क्यों इस रिंग से दूर रखा जाता है। उनहोंने कहा कि महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाने के लिए वह हर 6 महीने में याचिका दायर करती रहेंगी। तमोको ने आगे कहा कि वह चाहती हैं कि इस मामले पर स्थिति साफ हो जानी चाहिए। सूमो एसोसिएशन को अब महिलाओं की आवाज सुननी होगी और इस मामले में हर स्तर पर बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी ऐसी वजह नहीं है कि महिलाओं को रिंग में अभ्यास करने से रोका जाए।

तमोको के ऐसा कहने के बाद एसोसिएशन ने भी बयान दिया है। एसोसिएशन के मुताबिक यह परंपरा शुरू से रही है कि महिलाओं को रिंग में प्रवेश करने से रोका जाए। इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। इसके बाद एसोसिएशन ने मेयर को भरोसा दिलाते हुए कहा कि वह इस विषय पर कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे और इस समस्या का हल निकालेंगे। एसोसिएशन के जवाब को सुनने के बाद तमोको ने कहा कि अगर महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं दिया गया तो वह आंदोलन शुरू कर देंगी।
गौरतलब है कि करीब 15 दिनों पहले सूमो टूर्नामेंट के दौरान एक घटना घटी थी जिसके बाद तमोको ने महिलाओं के लिए आवाज उठाई। हुआ ये कि 6 अप्रैल को क्योटो में एक टूर्नामेंट चल रहा था। तब मायजुरु के मेयर रिंग में खड़े होकर भाषण देते वक्त बेहोश हो गए। तो उनकी मदद के लिए कुछ महिलाएं रिंग के अंदर पहुंच गईं। जिसके बाद एसोसिएशन ने माइक पर अनाउंसमेंट कर महलाओं को रिंग से बाहर जाने को कहा और इसे अपवित्र मानते हुए रिंग में बहुत सारे नमक का छिड़काव किया।
बता दें यह खेल जापान में 16वीं सदी में शुरू हुआ था। जिसका पहला मुकाबला 1684 में हुआ। तभी से वहां यह परंपरा चली आ रही है कि महिलाएं रिंग में प्रवेश नहीं कर सकतीं। इस रिंग का व्यास 4.55 मीटर का होता है और यह 6.7 मीटर के आयताकार प्लैटफॉर्म के अंदर ही रहता है।