देहरादून : धर्म की आड़ लेकर मानवता को कलंकित करने वालों को देहरादून के आरिफ ने करारा जवाब दिया है। मैक्स अस्पताल में जीवन की जंग लड़ रहे एक युवक को खून देने में जब रोजा आड़े आया तो आरिफ ने खुशी खुशी रोजा तोड़ा और युवक की जान बचा ली। आरिफ खान देहरादून के नालापानी चौक सहस्रधारा रोड में रहते हैं। वे नेशनल एसोसिएशन फॉर पेरेंट्स एंड स्टूडेंट्स (एनएपीएसआर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। आरिफ ने बताया कि हर रोज की तरह शनिवार सुबह, उन्होंने व्हाट्सएप चेक किया। इस दौरान ग्रुप में एक मैसेज आया, जिसमें लिखा था कि उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ निवासी अजय बिजल्वाण पुत्र खीमानंद मैक्स अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है। वायरल फीवर के कारण उनकी प्लेटलेट्स पांच हजार से नीचे पहुंच गई। दस दिन पहले भी खून चढ़ाया गया था। बाद में दिक्कत बढ़ने के कारण मैक्स में भर्ती करा दिया गया। अजय का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है। उसे तत्काल खून नहीं मिला तो जान को खतरा हो सकता है। बकौल आरिफ, मैसेज पढ़कर उन्होंने अस्पताल से संपर्क कर खून देने की इच्छा जताई। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि खून देने के बाद उन्हें रोजा तोड़कर नाश्ता करना होगा। इसके बाद आरिफ खान रोजे की परवाह किए बिना अस्पताल पहुंचे और खून देकर अजय बिजल्वाण की जान बचा ली। आरिफ खान का मानव सेवा का यह भाव उन लोगों के सबसे बड़ा सबक है जो धर्म के नाम पर मानवता को पीछे धकेल देना चाहते हैं। सभी वर्गों के लोग आरिफ की सराहना कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि रक्तदान सबसे बड़ा दान होता है। आरिफ से और लोगों को भी सीख लेनी चाहिए। आरिफ खान ने बताया कि सबसे बड़ा मानव धर्म होता है। यदि मेरे एक रोजा तोड़ने से एक व्यक्ति की जान बच सकती है तो यह मेरा सौभाग्य है। यही मेरे लिए सबसे बड़ा पुण्य होगा।
गुरसोच कौर बनीं न्यूयॉर्क पुलिस की पहली पगड़ीधारी सिख महिला अफसर
न्यूयॉर्क : भारतवंशी गुरसोच कौर न्यूयॉर्क पुलिस विभाग (एनवाईपीडी) में सहायक पुलिस अफसर के पद पर नियुक्त होने वाली पहली पगड़ीधारी सिख महिला बन गई हैं। न्यूयॉर्क पुलिस अकादमी से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद कौर को यह नियुक्ति मिली है। उम्मीद जताई जा रही है कि गुरसोच की नियुक्ति से अन्य महिलाओं को भी एनवाईपीडी में शामिल होने की प्रेरणा मिलेगी और देश में सिख धर्म के बारे में जागरूकता बढ़ेगी।
फिलहाल न्यूयॉर्क पुलिस में करीब 160 सिख अफसर हैं। एनवाईपीडी ने 2016 में सिख पुलिस कर्मियों को दाढ़ी रखने और पगड़ी पहनने की छूट दे दी थी ताकि ज्यादा से ज्यादा संख्या में सिख पुलिस बल की ओर आकर्षित हों। इस कामयाबी के लिए सिख ऑफिसर एसोसिएशन और भारत के शहरी विकास राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कौर को बधाई दी है।
पाकिस्तान में सरकार ने कृष्ण मंदिर के लिए दिए दो करोड़ रुपये
रावलपिंडी : पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने रावलपिंडी में स्थित कृष्ण मंदिर के सौंदर्यीकरण एवं इसके विस्तार के लिए दो करोड़ रुपये की राशि जारी की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रावलपिंडी और इस्लामाबाद शहरों में केवल कृष्ण मंदिर ही ऐसा है जो श्रद्धालुओं के लिए खुला है। मंदिर में हर दिन सुबह और शाम दो बार आरती की जाती है जिसमें बहुत कम लोग उपस्थित रहते हैं। डॉन ने इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) उप प्रशासक मोहम्मद आसिफ के हवाले से बताया है कि प्रांतीय एसेंबली के एक सदस्य के आग्रह पर सरकार ने दो करोड़ रुपये जारी किए हैं।

अखबार के अनुसार, आसिफ ने बताया कि मंदिर का सौंदर्यीकरण कार्य शीघ्र शुरू होगा। एक टीम ने स्थल का दौरा किया है और कार्य शुरू करने की योजना बताई. जहां पर प्रतिमाएं रखी गयी हैं उस मुख्य कक्ष को सौंदर्यीकरण की समाप्ति तक बंद रखा जाएगा।
आसिफ के हवाले से बताया गया है कि एक बार सौंदर्यीकरण का काम पूरा हो जाएगा तो यहां और लोगों के एकत्र होने के लिए जगह हो जाएगी। अधिकारी ने बताया कि मंदिर में जगह होने से आसपास के दोनों शहरों और नजदीकी इलाकों के श्रद्धालुओं को सुविधा हो जाएगी। कांजी मल और उजागर मल राचपाल ने 1897 में इस मंदिर का निर्माण करवाया था।
सोनम वांगचुक सैनिकों के लिए बना रहे मिट्टी के टेंट, ठंड में खुद से होंगे गर्म
इंजीनियर, खोजी और शिक्षा व्यवस्था में कई सारे काम करने वाले सोनम भारतीय सेना के जवानों को सर्दी से बचाने के लिए काम कर रहे हैं। कश्मीर के लेह और लद्दाख इलाके में काफी ठंड रहती है। सैनिकों को सीमा के पास बंकर बनाने और उन्हें सर्दी से बचाने पर काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। सोनम ने मिट्टी की सहायता से कुछ ऐसे प्री-फैब्रिकेटिड सोलर हीटेड टेंट बनाने के बारे में सोचा जिसमें सैनिकों को ठंड न लगे। सोनम ने अपने प्रॉजेक्ट का प्रोटोटाइप भी तैयार कर लिया है।
सोनम वांगचुक को तो आप जानते ही होंगे। वही, जिनसे प्रेरणा लेकर 3 इडियट फिल्म बनाई गई थी और आमिर खान का किरदार उनसे काफी हद तक प्रभावित था। इंजीनियर, खोजी और शिक्षा व्यवस्था में कई सारे काम करने वाले सोनम ने भारतीय सेना के जवानों को सर्दी से बचाने के लिए काम कर रहे हैं। कश्मीर के लेह और लद्दाख इलाके में काफी ठंड रहती है। सैनिकों को सीमा के पास बंकर बनाने और उन्हें सर्दी से बचाने पर काफी पैसे खर्च करने पड़ते हैं। फिर भी सैनिकों को पूरी तरह से सर्दी से राहत नहीं मिलती। सोनम वांगचुक ने एक प्रॉजेक्ट पर काम करना शुरू किया था, जिसे अब भारतीय सेना की फंडिंग मिल रही है।
इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक सोनम ने मिट्टी की सहायता से कुछ ऐसे प्री-फैब्रिकेटिड सोलर हीटेड टेंट बनाने के बारे में सोचा जिसमें सैनिकों को ठंडी न लगे। सोनम ने अपने प्रॉजेक्ट का प्रोटोटाइप भी तैयार कर लिया है। अगर उनका यह मिशन सफल हुआ तो इस क्षेत्र में लगभग 10,000 टेंट बनाने होंगे। इन्हें बनाने के लिए लद्दाख में फैक्ट्री स्थापित की जाएगी और इससे वहां के लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
लेह-लद्दाख क्षेत्र समुद्र तल से 12,000 फीट की ऊंचाई पर पड़ता है। जहां अत्यधिक ठंड पड़ती है। सर्दियों में यहां का तापमान माइनस बीस डिग्री तक पहुंच जाता है। मार्च अप्रैल में भी यहां माइनस पांच तापमान रहता है। लद्दाख क्षेत्र नेशनल पावर ग्रिड से भी नहीं जुड़ा है इसलिए बिजली की सप्लाई छोटे हाइड्रो पावर प्रॉजेक्ट से होती है। इतनी बिजली यहां के लिए नाकाफी होती है। गर्मी पाने के लिए यहां के लोग मिट्टी का तेल या लकड़ियां जलाते हैं। जो कि खर्चीला होने के साथ ही पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है।
जम्मू कश्मीर सरकार के स्टेट स्किल डिपार्टमेंट मिशन के एक समारोह के दौरान वांगचुक ने बताया कि ये सोलर पैसिव स्ट्रक्चर होंगे। यह कोई नई बात नहीं है। नई बात यह है कि इन्हें एक से दूसरी जगह ले जाया जा सकेगा और ये प्री-फैब्रिकेटिड होंगे। इन्हें जरूरत की जगह पर तेजी से असेंबल किया जा सकेगा। इससे आर्मी की शेल्टर से जुड़ी समस्या का हल निकलेगा।
इनकी हीटिंग में कोई खर्च नहीं होगा। माइनस 20 डिग्री तापमान में भी बिना किसी हीट सोर्स के इनके भीतर तापमान 20 डिग्री पर चला जाएगा। वांगचुक ने कहा कि ठंडी जगहों पर बिल्डिंग कॉस्ट 15 साल की हीटिंग के बराबर होती है। उन्होंने कहा कि सेना जवानों को गर्म रखने के लिए कितना तेल जलाती है और इससे कितना प्रदूषण होता है। यह स्थिति बदलने जा रही है। उन्होंने बताया, ‘हम कई प्रोटोटाइप्स पर काम कर रहे हैं। मुझे नहीं पता कि सेना की क्या नीति है, लेकिन उन्होंने इसमें रुचि दिखाई है और उन्होंने प्रोटोटाइप के लिए भुगतान भई किया है।’ सेना वांगचुक के हर प्रोटोटाइप का खर्च उठा रही है।
सोनम ने लद्दाख में माउंटेन विश्वविद्यालय बनाने की घोषणा भी की है। अगर उनका प्रोटोटाइप को हरी झंडी मिलेगी तो वे अपनी यूनिवर्सिटी में ही टेंट बनाने की फैक्ट्री लगाएंगे और बच्चों को लाइव उदाहरण देकर सिखाएंगे। उनका कहना है कि बच्चों को वास्तविक जिंदगी के अनुभवों से सिखाना चाहिए। उनकी यूनिवर्सिटी में बच्चों को ऐसे ही पढ़ाया जाएगा। वांगचुक ने अपनी यूनिवर्सिटी बनाने के लिए पैसे जुटाने का अभियान भी शुरू कर दिया है। उन्हें उनके आईस-स्तूप के लिए रोलैक्स अवॉर्ड मिला। इस अवॉर्ड के तहत उन्हें एक करोड़ रुपये भी मिले। उन्होंने बताया कि कई कॉर्पोरेट फर्म से संपर्क करने पर उन्होंने 1.5 करोड़ रुपये इकट्ठा कर लिए हैं।
यूजीसी ने दिया विवि परिसरों में प्लास्टिक कप, बोतल पर रोक लगाने का निर्देश
नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने परिसरों में प्लास्टिक के कप, लंच पैकेट, पीने की नली, बोतल और बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कहा है। यह निर्देश केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से एडवायजरी जारी होने के बाद दिया गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि भारत इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस समारोह का वैश्विक मेजबान है। पर्यावरण पर यूएन की अगुआई वाले उत्सव के इस संस्करण का थीम प्लास्टिक कचरा उन्मूलन है।
कुलपतियों को भेजे गए संदेश में यूजीसी ने कहा है, ‘कॉफी कप, डिस्पोजेबल प्लास्टिक पैकिंग लंच, प्लास्टिक बैग, डिस्पोजेबल फूड सर्विस कप, प्लेट्स, पॉलीस्टीरीन फोम के बने कंटेनर और प्लास्टिक की नलियों पर प्रतिबंध लगाएं। एकल इस्तेमाल प्लास्टिक के वाटर बोतल को प्रतिबंधित करें और उसकी जगह दोबारा इस्तेमाल में लाने वाले बोतलों के प्रयोग को प्रोत्साहित करें।’ आयोग ने विश्वविद्यालयों से प्लास्टिक के निस्तारण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कहा है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगरपालिकाओं में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने संबंधी गतिविधियों का आयोजन करने को कहा है।
रोबोटिक प्रणाली से बना दुनिया का सबसे छोटा घर
लंदन : वैज्ञानिकों ने रोबोटिक प्रणाली का इस्तेमाल कर दुनिया के सबसे छोटे घर का निर्माण किया है। यह घरे 300 वर्ग माइक्रोमीटर क्षेत्र में बना है। एक माइक्रोमीटर एक मिलीमीटर का 1000 वां हिस्सा होता है । यह प्रणाली बिल्कुल सटीकता के साथ नैनोमेटेरियल को छोटे , वांछित ढांचों में सही ढंग से जोड़ सकती है। ‘जर्नल ऑफ वैक्युम साइंस एंड टेक्नोलॉजी ए’ में इस लघु आवास (माइक्रोहाउस)के निर्माण का जिक्र किया गया है। इसमें यह बताया गया है कि किस तरह से अनुसंधानकर्ता आयन गन्स, इलेक्ट्रॉन बीम एवं कुशलता से नियंत्रित रोबोटिक पायलटिंग में बदलाव कर ऑप्टिकल सेंसिंग टेक्नोलॉजी का विकास कर सकते हैं।फ्रांस में फेम्टो-एसटी इंस्टीट्यूट के अनुसंधानकर्ताओं ने नये माइक्रोबोटिक्स प्रणाली को साथ में जोड़ा जो ऑप्टिकल नैनोटेक्नोलॉजीज की सीमाएं तोड़ता है।
पीएनबी, गीतांजलि जेम्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर विचार करेगा सेबी
नयी दिल्ली : बाजार नियामक सेबी 14,000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी मामले में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और गीतांजलि जेम्स के खिलाफ संदिग्ध कारोबार तथा खुलासा संबंधित मुद्दों की जांच पूरी करने के बाद दंडात्मक कार्रवाई पर विचार करेगा।
वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बाजार नियामक ने धोखाधड़ी वाले लेन-देन के बारे में शेयर बाजारों को जानकारी देने में देरी को लेकर पिछले सप्ताह पीएनबी को चेतावनी पत्र जारी किया। इस धोखाधड़ी को फरार चल रहे नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप आफ कंपनीज ने अंजाम दिया।
अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है और दंडात्मक कार्रवाई जांच पर निर्भर करेगा। हीरा कारोबारी नीरव मोदी तथा उसके सहयोगियों ने कुछ बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर गारंटी पत्र (एलओयू) तथा विदेशी साख पत्र (एलओसी) का गलत उपयोग कर पीएनबी के साथ धोखाधड़ी की।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और शेयर बाजार नीरव तथा गीतांजलित जेम्स के मुख्य प्रवर्तक मेहुल चोकसी से संबद्ध सभी इकाइयों के शेयर बाजार कारोबार का विश्लेषण कर रहे हैं। चोकसी ब्रोकरेज चूक समेत विभिन्न मामलों में पहले से जांच के घेरे में हैं। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2013 में नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने सेबी के साथ मिलकर गीतांजलि जेम्स तथा चोकसी समेत अन्य को अपनी कंपनी में कारोबार को लेकर नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रतिभूति बाजार में कारोबार से प्रतिबंधित कर दिया था।
दोनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय तथा सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) जांच कर रही है। सेबी के चेतावनी पत्र के तहत पीएनबी ने रिजर्व बैंक तथा सीबीआई के पास की गयी शिकायत के बारे में शेयर बाजारों को जानकारी देने में 1 से 6 दिन की देरी की। शेयर बाजारों को सूचना देने में देरी सूचीबद्धता नियमन का उल्लंघन है।
इन नियमों के तहत कंपनियों को कीमत से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के बारे में शेयर बाजारों को सूचित करने की जरूरत होती है।
गांव वालों की प्यास बुझाने के लिए 70 साल के व्यक्ति ने अकेले खोदा 33 फीट कुआं
बुन्देलखंड : बुंदेलखंड इलाके में आने वाला छतरपुर जिला सूखा प्रभावित जिला माना जाता है। यहां के लोग पानी की कमी की वजह से ही पलायन कर जाते हैं। जिले के प्रतापपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले हदुआ गांव के रहने वाले सीताराम ने 2015 में कुआं खोदने का काम शुरू किया था और 2017 में उन्होंने इस काम को पूरा भी कर लिया।
सीताराम की कहानी बड़ी दिलचस्प है। उन्होंने शादी नहीं की और आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया। वह अपने छोटे भाई के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। उनके भाई हलके लोधी की उम्र 60 साल है और उनके पास 20 एकड़ की खेती भी है।
इंसान अगर चाह ले तो क्या नहीं कर सकता। बिहार के दशरथ मांझी का नाम तो आपने सुना ही होगा, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 22 साल मेहनत में खपाकर पहाड़ को काट 55 किलोमीटर के रास्ते को सिर्फ 15 किलोमीटर का कर दिया था। दशरथ मांझी की कहानी कुछ ऐसी थी कि लंबे रास्ते की वजह से उनकी पत्नी की मौत हो गई थी और वे चाहते थे कि गांव के लोगों को इस पहाड़ की वजह से लंबा रास्ता न तय करना पड़े। उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती, लेकिन वैसी ही लगन और मेहनत का परिचय दिखाते हुए मध्य प्रदेश के 70 वर्षीय सीताराम ने 33 फीट कुआं खोद दिया, ताकि गांव वालों को पीने के पानी के लिए दूर न जाना पड़े।
बुंदेलखंड इलाके में आने वाला छतरपुर जिला सूखा प्रभावित जिला माना जाता है। यहां के लोग पानी की कमी की वजह से ही पलायन कर जाते हैं। जिले के प्रतापपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले हदुआ गांव के रहने वाले सीताराम ने 2015 में कुआं खोदने का काम शुरू किया था और 2017 में उन्होंने इस काम को पूरा भी कर लिया। लेकिन किसी की मदद न मिल पाने के कारण उसे पक्का नहीं किया जा सका और मॉनसून में वह भरभरा गया। सरकार ने भी उनकी कोई मदद नहीं की।
सीताराम की कहानी बड़ी दिलचस्प है। उन्होंने शादी नहीं की और आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया। वह अपने छोटे भाई के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। उनके भाई हलके लोधी की उम्र 60 साल है औप उनके पास 20 एकड़ की खेती भी है। सीताराम ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, ‘सूखे के मौसम में पीने के लिए पानी का कोई साधन नहीं था। हमारे पास पैसे भी नहीं थे कि कुएं या नल का इंतजाम कर सकें। इसलिए मैंने अकेले ही कुआं खोदने का फैसला किया।’ हालांकि परिवार वालों ने उन्हें इस काम से मना किया क्योंकि ये बहुत मुश्किल काम था, लेकिन सीताराम कुआं खोदने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थे।
सीताराम हर रोज सुबह यह काम शुरू करते और दोपहर की धूप में काम बंद कर आराम करते। इसके बाद धूप कम होते ही वे फिर से काम पर लगते और सूरज ढलने तक फावड़ा और कुदाल चलाते रहते। इस काम को उन्होंने लगातार 18 महीनों तक नियमित तौर पर किया। सीताराम के भाई हलके बताते हैं, ‘हम कुआं खोदने के खिलाफ नहीं थे, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि कुआं खोदने पर पानी मिलेगा भी या नहीं। एक वक्त हम सबने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने।’ सीताराम की मेहनत रंग लाई और उन्हें 33 फीट की गहराई पर पानी मिल ही गया। लेकिन यह खुशी कुछ ही दिनों में गुम हो गई।
बारिश के मौसम में पानी का स्तर बढ़ा और कुआं ढह गया। सीताराम कहते हैं कि अगर उन्हें सरकार की तरफ से मदद मिलती तो वे कुएं को पक्का करवा देते। मध्य प्रदेश सरकार किसानों को कुआं खोदने के लिए कपिल धारा योजना के तहत आर्थिक मदद देती है। जिला पंचायत सीईओ लवकुश नागर ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि सीताराम ने कपिल धारा योजना के तहत मदद के लिए आवेदन किया है या नहीं। इस योजना के तहत सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की मदद की जाती है।
नहीं रहे 5 लाख साल पुराने ‘नर्मदा मानव’ की खोज करने वाले भू-वैज्ञानिक
भोपाल/होशंगाबाद : पांच लाख साल पुराने ‘नर्मदा मानव’ की खोज करने वाले वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डॉ. अरुण सोनकिया का शनिवार को एक सड़क हादसे में निधन हो गया। सोनकिया ने 1982 में नर्मदा घाटी में मानव सभ्यता के पांच लाख साल पुराने सबूतों की खोज की थी। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक अध्ययन दल के साथ मिलकर मप्र के सीहोर जिले के हथनौरा गांव में पांच लाख साल पुरानी मानव खोपड़ी की खोज की थी।जिसे ‘नर्मदा मानव” नाम दिया गया था।
दरअसल, सोनकिया की यह खोज नर्मदा घाटी में पांच लाख साल पहले से मानव सभ्यता का पहला सबूत थी। उनकी इस खोज ने नर्मदा घाटी और उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई थी। नर्मदा घाटी में मिली यह लाखों साल पुरानी मानव खोपड़ी अब कोलकाता के एक संग्रहालय में रखी हुई है।
डॉ. सोनकिया (61) शनिवार को कार से अपने पैतृक गांव हिरणखेड़ा से अपने बेटे से मिलने भोपाल जा रहे थे, तभी होशंगाबाद स्थित टोल नाके के करीब सामने से आ रहे ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि डॉ. सोनकिया की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रक का ड्राइवर घटना के बाद से फरार है, लेकिन क्लीनर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। टक्कर में मारुति कार क्रमांक एमएच 31 एजी 8961 पूरी तरह पिचक गई है। बताया जा रहा है कि ड्राइविंग सीट पर बैठे सोनकिया इस बुरी तरह फंसे थे कि पुलिस और ग्रामीणों को शव निकालने में एक घंटे से ज्यादा समय तक मशक्कत करनी पड़ी।
परिजनों के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद से अरूण सोनकिया और उनकी पत्नी अपने बड़े बेटे सिद्धार्थ के पास रहते थे। बेटा भोपाल के त्रिलंगा क्षेत्र में रहता है। कभी-कभार वे अपने पैतृक गांव हिरणखेड़ा, आते रहते थे। यहां वे खेती करते थे।
म्यूचुअल फंडों में निवेशकों की रुचि बढ़ी, फोलियो की संख्या 8 लाख बढ़ी
नयी दिल्ली : म्युचुअल फंड के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ रहा है और ऐसे निवेशक खातों (फोलियो) की संख्या एक महीने में ही आठ लाख से अधिक बढ़कर अप्रैल 2018 के अंत में 7.22 करोड़ हो गई। वित्त वर्ष 2017-18 में 1.6 करोड़ निवेशक खाते तथा 2016-17 में 67 लाख खाते खुले।
फोलियो संख्या है जो व्यक्तिगत तौर पर निवेश करने वाले निवेशकों के खातों को आवंटित की जाती है। एक निवेशक के कई खाते हो सकते हैं लेकिन उसका फोलियो एक होता है। एसोसिएशन आफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया के आंकड़े के अनुसार देश में 42 फंड हाउस है जहां निवेशकों के खाते हैं। इस साल अप्रैल के अंत में फोलियो की संख्या 8.38 लाख बढ़कर रिकार्ड 7,21,85,970 पर पहुंच गयी जो मार्च 2018 के अंत में 7,13,47,301 थी।
म्यूचुअल फंड को लेकर खुदरा निवेशकों की रूचि बढ़ी है। इससे पिछले कुछ साल से निवेशक खातों की संख्या बढ़ी है। ऑनलाइन निवेश सुविधा उपलब्ध कराने वाली ग्रो के मुख्य परिचालन अधिकारी हरीश जैन ने कहा, ‘‘लगभग दो महीने के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार में अप्रैल महीने में मजबूती देखने को मिली। नये वित्त वर्ष की शुरूआत सकारात्मक धारणा के साथ हुई जो नये निवेशकों का भरोसा बढ़ने से प्रतिबिंबित होता है। दूसरा फरवरी और मार्च महीने में नरमी का कारण दीर्घकालीन पूंजी लाभ कर है।’’




