Saturday, April 11, 2026
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यूजीसी ने दिया विवि परिसरों में प्लास्टिक कप, बोतल पर रोक लगाने का निर्देश

नई दिल्ली : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने परिसरों में प्लास्टिक के कप, लंच पैकेट, पीने की नली, बोतल और बैग के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कहा है। यह निर्देश केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से एडवायजरी जारी होने के बाद दिया गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने कहा है कि भारत इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस समारोह का वैश्विक मेजबान है। पर्यावरण पर यूएन की अगुआई वाले उत्सव के इस संस्करण का थीम प्लास्टिक कचरा उन्मूलन है।

कुलपतियों को भेजे गए संदेश में यूजीसी ने कहा है, ‘कॉफी कप, डिस्पोजेबल प्लास्टिक पैकिंग लंच, प्लास्टिक बैग, डिस्पोजेबल फूड सर्विस कप, प्लेट्स, पॉलीस्टीरीन फोम के बने कंटेनर और प्लास्टिक की नलियों पर प्रतिबंध लगाएं। एकल इस्तेमाल प्लास्टिक के वाटर बोतल को प्रतिबंधित करें और उसकी जगह दोबारा इस्तेमाल में लाने वाले बोतलों के प्रयोग को प्रोत्साहित करें।’ आयोग ने विश्वविद्यालयों से प्लास्टिक के निस्तारण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कहा है। स्वच्छ भारत अभियान के तहत नगरपालिकाओं में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने संबंधी गतिविधियों का आयोजन करने को कहा है।

रोबोटिक प्रणाली से बना दुनिया का सबसे छोटा घर

लंदन : वैज्ञानिकों ने रोबोटिक प्रणाली का इस्तेमाल कर दुनिया के सबसे छोटे घर का निर्माण किया है। यह घरे 300 वर्ग माइक्रोमीटर क्षेत्र में बना है। एक माइक्रोमीटर एक मिलीमीटर का 1000 वां हिस्सा होता है । यह प्रणाली बिल्कुल सटीकता के साथ नैनोमेटेरियल को छोटे , वांछित ढांचों में सही ढंग से जोड़ सकती है। ‘जर्नल ऑफ वैक्युम साइंस एंड टेक्नोलॉजी ए’ में इस लघु आवास (माइक्रोहाउस)के निर्माण का जिक्र किया गया है। इसमें यह बताया गया है कि किस तरह से अनुसंधानकर्ता आयन गन्स, इलेक्ट्रॉन बीम एवं कुशलता से नियंत्रित रोबोटिक पायलटिंग में बदलाव कर ऑप्टिकल सेंसिंग टेक्नोलॉजी का विकास कर सकते हैं।फ्रांस में फेम्टो-एसटी इंस्टीट्यूट के अनुसंधानकर्ताओं ने नये माइक्रोबोटिक्स प्रणाली को साथ में जोड़ा जो ऑप्टिकल नैनोटेक्नोलॉजीज की सीमाएं तोड़ता है।

पीएनबी, गीतांजलि जेम्स के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर विचार करेगा सेबी

नयी दिल्ली : बाजार नियामक सेबी 14,000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी मामले में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और गीतांजलि जेम्स के खिलाफ संदिग्ध कारोबार तथा खुलासा संबंधित मुद्दों की जांच पूरी करने के बाद दंडात्मक कार्रवाई पर विचार करेगा।
वरिष्ठ अधिकारियों ने यह जानकारी दी। बाजार नियामक ने धोखाधड़ी वाले लेन-देन के बारे में शेयर बाजारों को जानकारी देने में देरी को लेकर पिछले सप्ताह पीएनबी को चेतावनी पत्र जारी किया। इस धोखाधड़ी को फरार चल रहे नीरव मोदी और गीतांजलि ग्रुप आफ कंपनीज ने अंजाम दिया।

अधिकारियों के अनुसार जांच अभी जारी है और दंडात्मक कार्रवाई जांच पर निर्भर करेगा। हीरा कारोबारी नीरव मोदी तथा उसके सहयोगियों ने कुछ बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर गारंटी पत्र (एलओयू) तथा विदेशी साख पत्र (एलओसी) का गलत उपयोग कर पीएनबी के साथ धोखाधड़ी की।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और शेयर बाजार नीरव तथा गीतांजलित जेम्स के मुख्य प्रवर्तक मेहुल चोकसी से संबद्ध सभी इकाइयों के शेयर बाजार कारोबार का विश्लेषण कर रहे हैं। चोकसी ब्रोकरेज चूक समेत विभिन्न मामलों में पहले से जांच के घेरे में हैं। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2013 में नेशनल स्टाक एक्सचेंज ने सेबी के साथ मिलकर गीतांजलि जेम्स तथा चोकसी समेत अन्य को अपनी कंपनी में कारोबार को लेकर नियमों के उल्लंघन को लेकर प्रतिभूति बाजार में कारोबार से प्रतिबंधित कर दिया था।

दोनों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय तथा सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) जांच कर रही है। सेबी के चेतावनी पत्र के तहत पीएनबी ने रिजर्व बैंक तथा सीबीआई के पास की गयी शिकायत के बारे में शेयर बाजारों को जानकारी देने में 1 से 6 दिन की देरी की। शेयर बाजारों को सूचना देने में देरी सूचीबद्धता नियमन का उल्लंघन है।

इन नियमों के तहत कंपनियों को कीमत से जुड़ी संवेदनशील सूचनाओं के बारे में शेयर बाजारों को सूचित करने की जरूरत होती है।

गांव वालों की प्यास बुझाने के लिए 70 साल के व्यक्ति ने अकेले खोदा 33 फीट कुआं

बुन्देलखंड : बुंदेलखंड इलाके में आने वाला छतरपुर जिला सूखा प्रभावित जिला माना जाता है। यहां के लोग पानी की कमी की वजह से ही पलायन कर जाते हैं। जिले के प्रतापपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले हदुआ गांव के रहने वाले सीताराम ने 2015 में कुआं खोदने का काम शुरू किया था और 2017 में उन्होंने इस काम को पूरा भी कर लिया।
सीताराम की कहानी बड़ी दिलचस्प है। उन्होंने शादी नहीं की और आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया। वह अपने छोटे भाई के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। उनके भाई हलके लोधी की उम्र 60 साल है और उनके पास 20 एकड़ की खेती भी है।
इंसान अगर चाह ले तो क्या नहीं कर सकता। बिहार के दशरथ मांझी का नाम तो आपने सुना ही होगा, जिन्होंने अपनी जिंदगी के 22 साल मेहनत में खपाकर पहाड़ को काट 55 किलोमीटर के रास्ते को सिर्फ 15 किलोमीटर का कर दिया था। दशरथ मांझी की कहानी कुछ ऐसी थी कि लंबे रास्ते की वजह से उनकी पत्नी की मौत हो गई थी और वे चाहते थे कि गांव के लोगों को इस पहाड़ की वजह से लंबा रास्ता न तय करना पड़े। उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती, लेकिन वैसी ही लगन और मेहनत का परिचय दिखाते हुए मध्य प्रदेश के 70 वर्षीय सीताराम ने 33 फीट कुआं खोद दिया, ताकि गांव वालों को पीने के पानी के लिए दूर न जाना पड़े।

बुंदेलखंड इलाके में आने वाला छतरपुर जिला सूखा प्रभावित जिला माना जाता है। यहां के लोग पानी की कमी की वजह से ही पलायन कर जाते हैं। जिले के प्रतापपुर ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले हदुआ गांव के रहने वाले सीताराम ने 2015 में कुआं खोदने का काम शुरू किया था और 2017 में उन्होंने इस काम को पूरा भी कर लिया। लेकिन किसी की मदद न मिल पाने के कारण उसे पक्का नहीं किया जा सका और मॉनसून में वह भरभरा गया। सरकार ने भी उनकी कोई मदद नहीं की।

सीताराम की कहानी बड़ी दिलचस्प है। उन्होंने शादी नहीं की और आजीवन अविवाहित रहने का फैसला किया। वह अपने छोटे भाई के साथ एक संयुक्त परिवार में रहते हैं। उनके भाई हलके लोधी की उम्र 60 साल है औप उनके पास 20 एकड़ की खेती भी है। सीताराम ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, ‘सूखे के मौसम में पीने के लिए पानी का कोई साधन नहीं था। हमारे पास पैसे भी नहीं थे कि कुएं या नल का इंतजाम कर सकें। इसलिए मैंने अकेले ही कुआं खोदने का फैसला किया।’ हालांकि परिवार वालों ने उन्हें इस काम से मना किया क्योंकि ये बहुत मुश्किल काम था, लेकिन सीताराम कुआं खोदने के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थे।

सीताराम हर रोज सुबह यह काम शुरू करते और दोपहर की धूप में काम बंद कर आराम करते। इसके बाद धूप कम होते ही वे फिर से काम पर लगते और सूरज ढलने तक फावड़ा और कुदाल चलाते रहते। इस काम को उन्होंने लगातार 18 महीनों तक नियमित तौर पर किया। सीताराम के भाई हलके बताते हैं, ‘हम कुआं खोदने के खिलाफ नहीं थे, लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं थी कि कुआं खोदने पर पानी मिलेगा भी या नहीं। एक वक्त हम सबने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने।’ सीताराम की मेहनत रंग लाई और उन्हें 33 फीट की गहराई पर पानी मिल ही गया। लेकिन यह खुशी कुछ ही दिनों में गुम हो गई।

बारिश के मौसम में पानी का स्तर बढ़ा और कुआं ढह गया। सीताराम कहते हैं कि अगर उन्हें सरकार की तरफ से मदद मिलती तो वे कुएं को पक्का करवा देते। मध्य प्रदेश सरकार किसानों को कुआं खोदने के लिए कपिल धारा योजना के तहत आर्थिक मदद देती है। जिला पंचायत सीईओ लवकुश नागर ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि सीताराम ने कपिल धारा योजना के तहत मदद के लिए आवेदन किया है या नहीं। इस योजना के तहत सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की मदद की जाती है।

नहीं रहे 5 लाख साल पुराने ‘नर्मदा मानव’ की खोज करने वाले भू-वैज्ञानिक

भोपाल/होशंगाबाद : पांच लाख साल पुराने ‘नर्मदा मानव’ की खोज करने वाले वरिष्ठ भू-वैज्ञानिक डॉ. अरुण सोनकिया का शनिवार को एक सड़क हादसे में निधन हो गया। सोनकिया ने 1982 में नर्मदा घाटी में मानव सभ्यता के पांच लाख साल पुराने सबूतों की खोज की थी। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक अध्ययन दल के साथ मिलकर मप्र के सीहोर जिले के हथनौरा गांव में पांच लाख साल पुरानी मानव खोपड़ी की खोज की थी।जिसे ‘नर्मदा मानव” नाम दिया गया था।

दरअसल, सोनकिया की यह खोज नर्मदा घाटी में पांच लाख साल पहले से मानव सभ्यता का पहला सबूत थी। उनकी इस खोज ने नर्मदा घाटी और उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई थी। नर्मदा घाटी में मिली यह लाखों साल पुरानी मानव खोपड़ी अब कोलकाता के एक संग्रहालय में रखी हुई है।

डॉ. सोनकिया (61) शनिवार को कार से अपने पैतृक गांव हिरणखेड़ा से अपने बेटे से मिलने भोपाल जा रहे थे, तभी होशंगाबाद स्थित टोल नाके के करीब सामने से आ रहे ट्रक ने उनकी कार को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि डॉ. सोनकिया की मौके पर ही मौत हो गई। ट्रक का ड्राइवर घटना के बाद से फरार है, लेकिन क्लीनर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। टक्कर में मारुति कार क्रमांक एमएच 31 एजी 8961 पूरी तरह पिचक गई है। बताया जा रहा है कि ड्राइविंग सीट पर बैठे सोनकिया इस बुरी तरह फंसे थे कि पुलिस और ग्रामीणों को शव निकालने में एक घंटे से ज्यादा समय तक मशक्कत करनी पड़ी।

परिजनों के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद से अरूण सोनकिया और उनकी पत्नी अपने बड़े बेटे सिद्धार्थ के पास रहते थे। बेटा भोपाल के त्रिलंगा क्षेत्र में रहता है। कभी-कभार वे अपने पैतृक गांव हिरणखेड़ा, आते रहते थे। यहां वे खेती करते थे।

म्यूचुअल फंडों में निवेशकों की रुचि बढ़ी, फोलियो की संख्या 8 लाख बढ़ी

नयी दिल्ली : म्युचुअल फंड के प्रति निवेशकों का आकर्षण बढ़ रहा है और ऐसे निवेशक खातों (फोलियो) की संख्या एक महीने में ही आठ लाख से अधिक बढ़कर अप्रैल 2018 के अंत में 7.22 करोड़ हो गई। वित्त वर्ष 2017-18 में 1.6 करोड़ निवेशक खाते तथा 2016-17 में 67 लाख खाते खुले।

फोलियो संख्या है जो व्यक्तिगत तौर पर निवेश करने वाले निवेशकों के खातों को आवंटित की जाती है। एक निवेशक के कई खाते हो सकते हैं लेकिन उसका फोलियो एक होता है। एसोसिएशन आफ म्यूचुअल फंड इन इंडिया के आंकड़े के अनुसार देश में 42 फंड हाउस है जहां निवेशकों के खाते हैं। इस साल अप्रैल के अंत में फोलियो की संख्या 8.38 लाख बढ़कर रिकार्ड 7,21,85,970 पर पहुंच गयी जो मार्च 2018 के अंत में 7,13,47,301 थी।

म्यूचुअल फंड को लेकर खुदरा निवेशकों की रूचि बढ़ी है। इससे पिछले कुछ साल से निवेशक खातों की संख्या बढ़ी है। ऑनलाइन निवेश सुविधा उपलब्ध कराने वाली ग्रो के मुख्य परिचालन अधिकारी हरीश जैन ने कहा, ‘‘लगभग दो महीने के उतार-चढ़ाव के बाद बाजार में अप्रैल महीने में मजबूती देखने को मिली। नये वित्त वर्ष की शुरूआत सकारात्मक धारणा के साथ हुई जो नये निवेशकों का भरोसा बढ़ने से प्रतिबिंबित होता है। दूसरा फरवरी और मार्च महीने में नरमी का कारण दीर्घकालीन पूंजी लाभ कर है।’’

मिशिगन यूनिवर्सिटी यौन शोषण पीड़ितों को देगी 3400 करोड़ का मुआवजा

लांसिंग : अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी यौन शोषण मामलों के निपटारे के लिए भारी भरकम मुआवजा देने को तैयार हो गई है। वह 300 से ज्यादा पीड़ित महिलाओं और लड़कियों को मुआवजे के तौर पर 50 करोड़ डॉलर (करीब 3400 करोड़ रुपए) का भुगतान करेगी। इन पीड़ितों ने यूनिवर्सिटी और अमेरिकी जिमनास्टिक टीम के डॉक्टर लैरी नासर पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे।

यौन शोषण मामलों के निपटारे के लिए समझौते की घोषणा बुधवार को की गई। इसके तहत जो धनराशि दी जाएगी, उसने इस तरह के पिछले सभी मामलों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। इसके पहले पेन स्टेट यूनिवर्सिटी ने फुटबॉल के सहायक कोच जेरी सैंडस्की के यौन शोषण मामलों के निपटारे के लिए दस करोड़ डॉलर का भुगतान किया था। करीब 35 पीड़ितों ने जेरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था।

पीड़ितों ने मिशिगन यूनिवर्सिटी पर नासर से जुड़ी शिकायतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया था। इनमें से कई मामले करीब तीन दशक पुराने हैं। यूनिवर्सिटी के संचालन मंडल के अध्यक्ष ब्रायन ब्रेसलिन ने कहा, “हम सभी पीड़ितों व उनके परिवारों से माफी मांगते हैं। अपनी दास्तान सुनाने के लिए मैं उनके साहस की प्रशंसा करता हूं।”

लुईसविले की रशेल डेनहोल्डर पहली महिला थीं जिन्होंने साल 2016 में आपबीती जाहिर की थी। इसके बाद 250 से ज्यादा पीड़ितों ने कोर्ट में बयान दर्ज कराए थे।

अंतरजातीय विवाह का साक्षी बना महिला आयोग

जयपुर : राजस्थान के महिला आयोग की मदद से जयपुर निवासी 19 वर्षीय युवती का विवाह उसके प्रेमी के साथ सम्पन्न हुआ। राजस्थान महिला आयोग इस विवाह का साक्षी बना जिसमें जयपुर की ज्योति (19) और मनीष (23) पूरे हिन्दू रीति-रिवाजों से जीवन साथी बने। यह दावा भी किया गया कि आयोग कार्यालय में विवाह का यह पहला मामला है। आयोग की अध्यक्ष सुमन शर्मा ने पीटीआई—भाषा से बातचीत में आशंका जताई कि ज्योति ऑनर किलिंग की शिकार हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतराजातीय युवक से प्रेम होने के कारण युवती को बिजली के झटके देकर यातनाएं दी गईं और उसके बाल काटकर घर में बंद रखा गया।
उन्होंने बताया कि आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर दोनों के परिजनों को बुलाया। दोनों परिवारों के साथ काउंसलिंग के बाद आयोग कार्यालय में पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीशों की मौजूदगी में पूरे हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ दोनों का विवाह सम्पन्न कराया गया।
शर्मा ने कहा कि संभवतया इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि महिला आयोग के कार्यालय में इस तरह का विवाह सम्पन्न किया गया। आयोग ने विवाह प्रमाणपत्र और विवाह की न्यायायिक प्रक्रिया की कार्यवाही की। महिला आयोग और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन से उत्साहित नवविवाहिता ज्योति ने कहा कि उसने परिवारों वालों के खिलाफ​ अतंराजातीय युवक से विवाह करने के लिये बहुत यातनाएं सही हैं। उसने कहा कि अब वह बहुत खुश है कि दोनों परिवारों की रजामंदी से विवाह हुआ है।

जब खरीदना हो लैपटॉप

लैपटॉप आज लक्जरी नहीं बल्कि जरूरत है और जब एक बड़ी राशि हम इस पर खर्च कर रहे होते हैं तो जरूरी है कि जल्दबाजी न कर जरूरी बातों का ध्यान रखा जाए। इससे सही लैपटॉप आप खरीद सकते हैं। अब जब आप लैपटॉप खरीदने जा रहे हैं तो इन बातों का ध्यान रखना न भूलें –
आजकल बाजार में प्री-इन्स्टॉल्ड ऑपरेटिंग सिस्टम वाले कई ब्रांड्स के लैपटाप मौजूद हैं। ऐसे में अगर हम सही ऑपरेटिंग सिस्टम वाले लैपटॉप नहीं खरीदते हैं तो हमें उसमें फिर से नया ऑपरेटिंग सिस्टम डलवाना पड़ता है। सबसे ज्यादा लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम में माइक्रोसॉफ्ट के विंडोज 7, विंडोज 8, विंडोज 10 के अलावा, एप्पल के आइओएस 10 एवं 11, गूगल क्रोम ओएस, उबन्तु हैं। आप जिस ऑपरेटिंग सिस्टम पर आसानी से काम कर सकते हैं उस लैपटॉप को चुनना आपके लिए बेहतर होगा।
अगर आप लैपटॉप पर ज्यादा काम करते हैं तो आप हमेशा सॉलिड की-बोर्ड वाले लैपटॉप लें, ऐसा इसलिए कि इससे आपके की-बोर्ड के की जल्दी खराब होने की संभावना रहती है। वहीं अगर आप बिजनेस लैपटॉप खरीदना चाहते हैं तो की-बोर्ड में जी और एच की के बीच में नब जरूर चेक कर लें। इस नब की मदद से आप अपनी उंगली आसानी से की-बोर्ड पर रख पाएंगे।
कई लोग छोटे स्क्रीन साइज वाले लैपटॉप खरीदना पसंद करते हैं, वहीं कुछ लोगों को बड़ी स्क्रीन वाले लैपटॉप पसंद होते हैं। ऐसे में आप अपने सुविधा के मुताबिक अपने लैपटॉप स्क्रीन का चुनाव कर सकते हैं। 15 इंच का स्क्रीन साइज लोगों के बीच में काफी प्रचलित है और काम करने में आसानी होती है।
लैपटॉप खरीदने से पहले इसके प्रोसेसर और रैम के अलावा आंतरिक स्पेसिफिकेशन के बारे में जरूर जानकारी हासिल कर लें। इंटेल आई3, इटेल आई5 या इंटेल आई7 में से किसी एक प्रोसेसर का चुनाव कर सकते हैं। लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो 4जीबी रैम वाले लैपटॉप का चुनाव करना बेहतर विकल्प हो सकता है।
लैपटॉप को पावर देने के लिए बैटरी की जरुरत होती है, इसलिए हमेशा बैटरी बैकअप के बारे में पता कर लेना चाहिए। आमतौर पर लैपटॉप में लिथियम ऑयन बैटरी लगी होती है जो काफी लंबा बैटरी बैकअप देती है। लिथियम-ऑयन बैटरी द्वारा संचालित होने वाले लैपटॉप में इस्तेमाल होने वाले बैटरी की एमएएच जांच लें। जितनी ज्यादा एमएएच होगी उतना ही लंबा बैटरी बैकअप होगा।

खेलो इंडिया योजना के तहत इस साल होंगे पहले पैरा राष्ट्रीय खेल

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय खेलों की तर्ज पर पहले राष्ट्रीय पैरा खेल इस साल जून जुलाई में खेलो इंडिया योजना के तहत आयोजित किये जायेंगे । खेल मंत्रालय द्वारा जारी तकनीकी हैंडबुक के अनुसार ये खेल 28 जून से सात जुलाई तक आयोजित किये जायेंगे । भारतीय पैरालम्पिक समिति खेलों का आयोजन करेगी और इसका पूरा खर्च खेल मंत्रालय उठायेगा । खेल दस विधाओं में 16 से 40 आयुवर्ग में आयोजित किये जायेंगे जिसमें पैरा एथलेटिक्स, बैडमिंटन, शतरंज, नेत्रहीन जूडो, पैरा पावरलिफ्टिंग, निशानेबाजी पैरा खेल, पैरा तैराकी, टेबल टेनिस, व्हीलचेयर बास्केटबाल और व्हीलचेयर तलवारबाजी शामिल है । इसमें कुल 416 पदक दाव पर होंगे जिनमें 220 पुरूषों, 180 महिलाओं और 16 मिश्रित वर्ग में होंगे । कुल प्रतियोगी 2192 ( 1311 पुरूष, 837 महिला और 44 मिश्रित ) होंगे । पीसीआई के उपाध्यक्ष गुरशरण सिंह ने कहा कि खेल दो साल में एक बार होंगे और पहले खेल जकार्ता में अक्तूबर में होने वाले पैरा एशियाई खेलों के लिये क्वालीफायर रहेंगे । उन्होंने कहा ,‘‘ यह बेहतरीन फैसला है कि इस साल पहले पैरा राष्ट्रीय खेलों का आयोजन किया जा रहा है । इससे साबित होता है कि पैरा एथलीटों को भी पूरी तवज्जो दी जा रही है ।’’ स्पर्द्धा चार स्थानों कांतिरावा स्टेडियम, साइ सेंटर बेंगलूरू, कर्नाटक बैडमिंटन संघ स्टेडियम , कांतिरावा इंडोर स्टेडियम पर आयोजित की जायेंगी ।