लंदन : मोबाइल फोन से निकलने वाले विकिरण के संपर्क में लंबे समय तक रहने पर किशोरों के मस्तिष्क के कुछ हिस्सों के याद्दाश्त संबंधी कामकाज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।‘ इन्वायरनमेंट हेल्थ पर्सपेक्टिव्स ’ में प्रकाशित हुए एक अध्ययन में यह जानकारी दी गयी है। अध्ययन में स्विट्जरलैंड के करीब 700 किशोरों को शामिल किया गया।
स्विस ट्रॉपिकल एंड पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट (स्विस टीपीएच) के वैज्ञानिकों ने संचार के बिना तार वाले उपकरणों के रेडियोफ्रीक्वेंसी विद्युतचुंबकीय क्षेत्र (आरएफ – ईएमएफ) में किशारों के रहने और उनकी याद्दाश्त के बीच संबंधों पर गौर किया। अध्ययन में पाया गया मोबाइल फोन के इस्तेमाल से साल भर में आरएफ – ईएमएफ के संपर्क से किशोरों की याद्दाश्त पर नकारात्मक अ सर पड़ सकता है। इससे 2015 में प्रकाशित हुए पूर्व के अध्ययनों की भी पुष्टि होती है।
किशोरों की याद्दाश्त बिगाड़ सकता है स्मार्टफोन से निकलने वाला विकिरण: अध्ययन
82 साल के बुजुर्ग ने भेड़ चराते-चराते खोद डाले 14 तालाब
मांड्या : कर्नाटक के मांड्या निवासी केरे कामेगौड़ा ने ऐसा काम करके दिखाया है, जो सबके लिए उदाहरण बन गया है। दरअसल, 82 वर्षीय कामेगौड़ा ने अपने हाथों से कुल 14 छोटे तालाब बना डाले हैं। चामराजनगर जिले में स्थित मंदिरों में दर्शन करने जानेवाले लोग जब बेंगलुरु-महावल्ली-कोल्लेगल रोड से गुजरते हैं तो रास्ते में उनको रास्ते में लोगों से कामेगौड़ा के बारे में सुनने को मिलता है। कामेगौड़ा का घर डासनाडोड्डी में है और आज भी उनका परिवार झोपड़ियों में ही रहता है। अकसर कामेगौड़ा अपने घर की बजाय कुंदिनीबेट्टा गांव के आसपास भेड़ चराते और पर्यावरण की चिंका करते पाए जाते हैं। कामेगौड़ा जानवर चराने के दौरान या तो पेड़ लगाते हैं या फिर गड्ढे खोदते हैं।
40 साल का सफर, बनाए 14 तालाब – अब तक कुल 14 गड्ढे/तालाब बना चुके कामेगौड़ा ने 2017 सिर्फ छह तालाब ही बनाए थे लेकिन पिछले एक साल में उनके काम में तेजी आई और आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया। एक स्थानीय निवासी कामेगौड़ा के बारे में बताते हैं, ‘कामेगौड़ा को उनके काम के लिए कई सारे इनाम और पैसे भफी मिले लेकिन उन्होंने पैसों का इस्तेमाल खुद के लिए न करके तालाब बनाने के लिए किया। उन्होंने इन पैसों से औजार खरीदे और मजदूर लगाकर तालाब बनवाए। उन्होंने पहाड़ी पर जानेवालों के लिए एक रास्ता भी बनवाया। उनके बच्चे आज भी झोपड़ी में रहते हैं और जानवर चराते हैं।’
पहाड़ी पर भेड़ चराते-चराते तालाब खोदना शुरू किया – 40 साल पहले यह काम शुरू करनेवाले कामेगौड़ा बताते हैं, ‘मैं पहाड़ियों पर जब जानवर चराने जाता था तो उनके लिए कहीं पर भी पानी नहीं मिलता था और जानवर प्यासे रह जाते थे। इसी के चलते ऊंचाई पर जानवर नहीं मिलते थे। यह देखकर मैंने गड्ढे बनाने शुरू कर दिए। जबतक जानवर चरते रहते मैं लकड़ी की मदद से गड्ढे खोदता था।’ गौरतलब है कि कामेगौड़ा को पहली बार खुदाई करते समय कुछ फीट खोदने के बाद ही पानी मिल गया था।
औजार खरीदने के लिए बेच दी थीं भेड़ – कामेगौड़ा आगे बताते हैं, ‘शुरुआत में मैं लकड़ी से गड्डे खोदता था, जोकि काफी कठिन काम था। मैंने कुछ औजार खरीदने का फैसला किया, इसके लिए मुझे कुछ भेड़ें बेचनी भी पड़ीं। पहले गड्ढे को झील में बदलने के बाद मुझे लगा कि इससे जानवरों को काफी मदद मिलता है। यह देखकर मैंने अपना काम जारी रखने का फैसला किया।’
82 की उम्र के बावजूद रोज चढ़ते हैं पहाड़ – इस प्रकार बिना पढ़े-लिखे और बिना किसी तकनीकी कौशल के भी कामेगौड़ा ने पानी के बहाव और अन्य चीजों के बारे में अपनी समझ विकसित की और लोगों को भी अपने काम से प्रभावित किया। वह आगे कहते हैं, ‘अभी तक मैं अकेले ही काम कर रहा था लेकिन पिछले साल मुझे किचा सुदीप ने इनाम के रूप में कुछ पैसे दिए। उन पैसों से मैंने पहाड़ी के लिए एक सड़क बनाई। इससे सभी तालाबों को सही आकार देने में मदद मिली। इस साल मैंने पहाड़ी पर 2,000 से ज्यादा बरगद के पेड़ लगाए हैं।’
82 साल के कामेगौड़ा आज भी हैं एकदम फिट – कामेगौड़ा ने पढ़ाई नहीं की है लेकिन उन्होंने तालाबों का नाम पौराणिक कथाओं के नाम पर रखा है। वह बताते हैं कि उन्होंने पहले तालाबा का नाम गोकर्ण और झीलों को जोड़ने वाली सड़क का नाम राम और लक्ष्मण के नाम पर रखा है। 82 साल के हो चुके कामेगौड़ा आज भी पूरी तरह स्वस्थ हैं। वह रोज पहाड़ी पर चढ़ते हैं और उतरते हैं। वह बताते हैं, ‘हाल ही में मेरी एक आंख का ऑपरेशन हुआ, इसमें मैसूर के एक सामाजिक कार्यकर्ता जयराम पाटिल ने मेरी मदद की। उन्होंने दूसरी आंख का इलाज कराने का वादा किया है।’ कामेगौड़ा के बेटे कृष्णा बताते हैं, ‘पिताजी सिर्फ रात में घर आते हैं, दिनभर वह पहाड़ी पर अपने पेड़ों और तालाबों की देखभाल करते हैं। मैंने भी उनके काम को अपना बना लिया है। वह इनाम में मिलने वाले सारे पैसे इसी काम में लगाते हैं, परिवार को भी उन्होंने इनाम का एक पैसा नहीं दिया।’ उनका इलाज कराने वाले जयराम पाटिल बताते हैं कि कामेगौड़ा अपनी कमाई के पैसे भी पेड़ों और तालाब के लिए खर्च कर देते हैं।
पुरुषों की तरह महिलाओं को भी मंदिर में जाने का हक : सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली : केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि देश में प्राइवेट मंदिर का कोई सिद्धांत नहीं है। मंदिर निजी नहीं बल्कि सार्वजनिक संपत्ति है, जिसमें कोई भी जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि पुरुषों की तरह महिलाओं को भी मंदिर में जाने का हक है।
बता दें कि सबरीमाला के प्रसिद्ध भगवान अयप्पा मंदिर में 10 वर्ष से 50 वर्ष तक के उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी है। दरअसल, महिलाओं के उस समूह को मंदिर में प्रवेश से रोका जाता है जिन्हें माहवारी होती है। ऐसा माना जाता है कि भगवान अयप्पा एक ‘नास्तिक ब्रह्मचारी’ थे और इस कारण रजस्वला महिलाओं का मंदिर में प्रवेश वर्जित है। मंदिर प्रबंधक के इस फैसले का सामाजिक संगठन और महिलाएं पुरजोर विरोध कर रही हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की ये टिप्पणी उन महिलाओं के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी जो मंदिर में पूजा करने की इच्छुक तो हैं लेकिन उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया जाता है।
लाल किले में मिला छुपा हुआ भूमिगत कक्ष
नयी दिल्ली : भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के कर्मी को लाल किले में छुपे हुआ भूमिगत कक्ष मिला है। कहा जा रहा है कि शायद इस कक्ष का इस्तेमाल गोला बारूद रखने के लिए किया जाता होगा। जब लाहौरी गेट जो कि लाल किले का मुख्य द्वार है की सफाई की जा रही थी तभी यह कक्ष मिला।
एएसआई अधिकारी ने पहचान न बताने की शर्त पर कहा कि तहखाना पूरी तरह से मिट्टी से भरा हुआ था। इसमें विस्फोटक और अग्नेय शस्त्र जैसी कोई चीज नहीं मिली है। अधिकारी ने यह भी बताया कि कक्ष (1658-1707) मुगल काल के दौरान औरंगजेब या फिर ब्रिटिश सेना ने बनाया होगा। यह कक्ष लाखौरी ईंटों से बनाया गया है और अंडाकार गुंबददार डिब्बे की आकृति में बनाया गया है। इसकी लंबाई 6 मीटर, चौड़ाई 2 मीटर और ऊंचाई 3 मीटर है। यह कक्ष पैडस्टल से कुछ दूरी पर स्थित है, जहां 15 अगस्त को झंडा लहराया जाता है।
अधिकारी ने बताया कि यह धरती के टीले के नीचे दबा हुआ था और विभाग में कोई भी अभी तक इसके अस्तित्व के बारे में नहीं जानता था। सफाई के बाद एएसआई ने इसे इसके मूल आकार में ढाल दिया है। इस कक्ष का इस्तेमाल गोला बारूद रखने के लिए किया जाता था क्योंकि उस समय (मुगल और ब्रिटिश काल) उन्हें मिट्टी के नीचे दबाकर रखा जाता है। यह तब एक आम प्रथा थी। क्योंकि मिट्टी एक इंसुलेटर के रूप में काम करती है। अधिकारी ने बताया कि कक्ष में कोई गोला बारूद नहीं मिला। वह केवल मिट्टी से भरा था। इससे पहले एएसआई को लाल किला परिसर में विस्फोटक और कारतूस भी मिल चुके हैं।
भारत में एचआईवी संक्रमण के मामलों में भारी कमी : यूएन रिपोर्ट
नयी दिल्ली : भारत में एचआईवी संक्रमण के नए मामले, एड्स के कारण मौत और एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या वर्ष 2010 से 2017 के बीच घटी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इसका श्रेय सतत एवं केंद्रित प्रयास को दिया गया है।
एड्स पर संयुक्त राष्ट्र की संयुक्त एजेंसी (यूएनएड्स) की ‘माइल्स टू गो- क्लोजिंग गैप्स, ब्रेकिंग बैरियर्स, राइटिंग इन्जस्टिसेज’ नाम की इस रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। इसमें कहा गया है कि एशिया और प्रशांत क्षेत्रों ने एचआईवी के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं। वर्ष 2010 से 2017 के बीच आबादी तक पहुंच के सतत और केंद्रित प्रयासों के कारण कंबोडिया, भारत, म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम में एचआईवी संक्रमण के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर एचआईवी के नए संक्रमण में उतनी तेजी से कमी नहीं आ रही। इसके अतिरिक्त पाकिस्तान और फिलीपींस में यह संक्रमण फैल रहा है।
सात साल में 32 हजार मामले हुए कम – भारत में वर्ष 2010 में एचआईवी संक्रमण के 1,20,000 मामले थे जो वर्ष 2017 में घटकर 88,000 रह गए। इसी अवधि में एड्स के कारण होने वाली मौत 1,60,000 से घटकर 69,000 रह गई। जबकि एचआईवी संक्रमित लोगों की संख्या 23,00,000 से घटकर 21,00,000 रह गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने विशेष सुरक्षा रणनीति, नीति या रूपरेखा बनाई और इसे लागू किया।
88 वस्तुओं पर जीएसटी घटा,सेनेटरी नैपकिन जीएसटी से बाहर
नयी दिल्ली : केंद्र सरकार ने जनता को बड़ी राहत देते हुए सेनेटरी नैपकिन सहित करीब 88 वस्तुओं पर जीएसटी की दरें घटा दी हैं। दिल्ली के विज्ञान भवन में शनिवार को हुई जीएसटी परिषद की बैठक के दौरान कर की दरों में संशोधन का फैसला लिया गया। वित्त मंत्री पीयूष गोयल की अगुवाई में बैठक के दौरान जीएसटी परिषद का पूरा जोर महिलाओं और घरेलू इस्तेमाल वाली चीजों को सस्ता करने पर रहा। पहले 30-40 सामानों पर ही जीएसटी की दरों को कम करने पर विचार हो रहा था, लेकिन बैठक के दौरान अचानक 80 से भी अधिक वस्तुओं पर कर की दरें घटा दी गईं। बैठक के बाद जब वित्त मंत्री से पूछा गया कि इस कदम से सरकार को आमदनी में कितना घाटा होगा तो उन्होंने साफ कहा कि सरकार को उम्मीद है कि दरें घटने से जो बिक्री बढ़ेगी, उससे होने वाले घाटे की भरपाई की जा सकेगी। इसके बाद भी अगर घाटा होता है तो वो बेहद मामूली या न के बराबर होगा।
पहले भी घटाई दरें – जीएसटी परिषद ने इससे पहले भी दो बार कर की दरों में बड़ा बदलाव किया था। परिषद ने नवंबर 2017 को हुई बैठक में 213 सामानों पर जीएसटी स्लैब में संशोधन का फैसला किया था, जबकि जनवरी 2018 में 54 सेवाओं और 29 वस्तुओं पर टैक्स घटाते हुए उसे सस्ता किया था। सरकार ने वॉशिंग मशीन, फ्रिज, एसी, वॉटर कूलर सहित कई इलेक्ट्रॉनिक और घरेलू इस्तेमाल में आने वाली वस्तुओं पर जीएसटी की दरें घटा दी हैं। इसमें एक हजार रुपये तक के जूते-चप्पल, सेंट-परफ्यूम, लीथियम बैटरी, पेंट आदि वस्तुएं भी शामिल हैं।
गीता मित्तल बनीं जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस
श्रीनगर : दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की नई चीफ जस्टिस बनाई गई हैं। वह जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस होंगी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इस बाबत गत शुक्रवार को आदेश जारी कर दिया।
पांच मार्च 2018 को जस्टिस बदर दुरेज अहमद के सेवानिवृत्त होने के बाद से यह पद खाली था। जस्टिस गीता दिल्ली हाईकोर्ट के सीनियर जजों में से एक हैं। वह अप्रैल 2017 से दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, रंजन गोगोई और जस्टिस मदन बी लोकुर ने गीता के नाम को मंजूरी दी।
नौ दिसंबर 1958 को जन्मीं गीता मित्तल महिला इरविन हायर सेकेंडरी स्कूल की 1975 (साइंस) बैच की छात्रा रही हैं। 1978 में गीता ने श्रीराम महिला कालेज में बीए किया। 1981 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस ला सेंटर से एलएलबी की। 16 जुलाई 2004 को वह दिल्ली हाईकोर्ट की अतिरिक्त जज नियुक्त हुईं। इससे पहले वह विभिन्न कोर्ट में वकालत कर चुकी हैं। 20 फरवरी 2006 को वह स्थायी जज बनाई गईं। जज रहते उन्होंने कई खंडपीठ को हेड किया। वह मृत्युदंड, सहकारिता, आर्म्ड फोर्स, कंपनी अपील, रिट याचिका, एलपीए आदि विभिन्न मामलों की भी सुनवाई कर चुकी हैं। 2008 से वह नेशनल ला यूनिवर्सिटी दिल्ली की गवर्निंग काउंसिल की सदस्य हैं। 2013 में वह इंडियन ला संस्थान की सदस्य बनाई गईं।
उनके नेतृत्व में ही दिल्ली में पहली बार ट्रायल कोर्ट में कमजोर गवाह कोर्ट (वर्नेबुल बिजनेस कोर्ट प्रोजेक्ट) शुरू हुआ। उन्होंने 16 सितंबर 2012 और 11 सितंबर 2013 को इस तरह के कोर्ट रूम का उद्घाटन किया। कार्यालयों में महिलाओं से यौन उत्पीड़न को लेकर बनाई जाने वाली कमेटी, न्यायिक अधिकारियों के वेलफेयर को बनी कमेटी में भी वह सेवाएं दे चुकी हैं। न्यायिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने में उनका अनुभव शानदार है।
कोल्डड्रिंक की खाली प्लास्टिक की बोतलें खरीदेंगी कंपनियाँ
मुम्बई : राज्यों द्वारा प्लास्टिक पर बैन लगाने के बाद अब कोल्डड्रिंक और बोतलबंद पानी बेचने वाली कंपनियां भी इसके द्वारा फैलने वाले कूड़े की रोकथाम के लिए आगे आ गई हैं। खासबात यह है कि इसके जरिए आप भी कमाई कर सकते हैं। देश की कई कंपनियों जैसे कि कोका कोला, पेप्सीको और बिसलेरी ने फिलहाल महाराष्ट्र में अपनी बायबैक पॉलिसी शुरू की है। इस पॉलिसी के तहत एक किलोग्राम बोतलों पर 15 रुपये मिलेंगे।
इसके लिए कंपनियां प्रत्येक बोतल पर इस कीमत को लिखेंगी। बिस्लरी के चेयरमैन रमेश चौहान ने बताया कि प्लास्टिक को रीसाइकिल करने की व्यवस्था पहले से ही है। अब हमें जरूरत इस बात की है कि इसे ज्यादा प्रभावी और संबंधित पक्षों के लिए लाभदायी बनाने की है।’ पेप्सी के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने अब अपनी प्लास्टिक बोतलों की रीसाइकल कीमत 15 रुपये तय की है।
पूरे प्रदेश में लगेंगी वेंडिंग मशीन – इसके लिए सभी कंपनियां पूरे प्रदेश में वेंडिंग मशीन लगाने के प्रस्ताव पर काम कर रही है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र ने 200 एमएल से छोटी प्लास्टिक की डिस्पोजबल बोतलों पर प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि कंपनियों को तीन महीने का वक्त दिया गया कि वो एक प्लान लेकर के आएं, जिससे इस तरह के कूड़े पर रोकथाम लग सके।
लड़कों के साथ यौन अपराध करने पर सजा होगी और सख्त, तैयार हुआ प्रस्ताव
नयी दिल्ली : महिला एवं बाल विकास मंत्रालय लड़कों के यौन हमले के मामलों में सजा बढ़ाने का प्रस्ताव इस सप्ताह मंत्रिमण्डल के सामने रख सकता है। अधिकारियों ने बताया कि कानून मंत्रालय ने लड़कों के यौन हमले के मामलों में सजा बढ़ाने को लेकर यौन अपराध से बालकों के संरक्षण अधिनियम , 2012 (पॉक्सो) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे चुका है।
पॉक्सो कानून 18 साल से कम उम्र के लोगों के विरुद्ध यौन अपराधों से निपटने का काम करता है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, लड़कों पर यौन हमले के संदर्भ में सजा बढ़ाने के लिए पॉक्सो कानून में संशोधन को कानून मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। उसे दो – तीन दिनों में मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा। सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय 12 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे के साथ बलात्कार के मामले में मृत्युदंड का प्रावधान करने के लिए इस कानून में संशोधन के प्रस्ताव पर काम कर रहा है। इस कदम को यौन हमले के मामलों से निपटने के संदर्भ लैंगिक तटस्थ कानून लाने के रूप में देखा जा रहा है। इससे पहले महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने चेंज डॉट ओआरजी पर फिल्मकार – कार्यकर्ता इंसिया दारीवाला की एक याचिका का समर्थन किया। उन्होंने कहा लड़कों पर यौन हमला भारत में उपेक्षित वास्तविकता है।
राज्यसभा में 22 भाषाओं में अपनी बात कहेंगे सांसद, जोड़ी गईं 5 नई भाषाएं
नयी दिल्ली : राज्य सभा में अब पांच और स्थानीय भाषाओं में अपनी बात कहने का मौका सांसदों को मिलने लगा है। राज्यसभा सभापति वैंकया नायडू ने सदन को सूचित किया कि अब सांसद पांच और भाषाओं में अपनी बात कह सकेंगे। यह भाषाएं हैं डोगरी, कश्मीरी, कोंकणी, संथाली और सिंधी। सभापति ने बताया कि सदस्यों को इसके लिए सदन को पूर्व में सूचित करना होगा।
राज्यसभा में अब तक ऊपरी सदन में सदस्यों को 17 भाषाओं में दुभाषियों की सुविधा थी। सदस्य असमिया, मलयालम, बंगाली, मराठी, हिंदी, पंजाबी, तमिल, तेलुगू,गुजराती, असमिया, कन्नड़, मराठी में अपनी बात रख सकते थे। लेकिन अब वह अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में अपनी बात रख सकेंगे। इसके लिए राज्यसभा में 22 भाषाओं के दुभाषियों की सेवाएं गत बुधवार से शुरु हो गई हैं।
सभापति ने इस मौके पर कहा कि कोई सांसद भाषा की समस्या के चलते अगर अपनी बात सदन के पटल पर नहीं रख पाता तो यह चिंता की बात है। इसलिए पांच नई भाषाओं को जोड़कर सासदों को अपनी मातृभाषा में बोलने की सुविधा दी गई है। ताकि सांसद अपनी भाषा के चलते अपनी बात कहने से वंचित न रह जाएं।
इसके अलावा लोकसभा में भी पांच भाषाओं के लिए बोडो मैथिली मणिपुरी मराठी और नेपाली भाषा के दुभाषियों को तैनात किया जा रहा है। इस सदन में इस मौकेपर सभापति ने कहा कि मानसून सत्र में इस शुरुआत से उन्हें काफी हर्ष हो रहा है।




