Thursday, July 9, 2026
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पत्रकार के लिए जुड़ना और जोड़ना आवश्यक है : जगदीश उपासने

कोलकाता :  माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के कुलपति जगदीश उपासने ने कहा कि है कि पत्रकारिता की मूल भावना किसी भी सूरत में नहीं बदलती। पत्रकार के लिए जुड़ना और जोड़ना आवश्यक है और सोशल मीडिया भी यही कर रहा है। पत्रकारों को इंडिया पर ही नहीं, भारत की भी बात करनी होगी। कोलकाता प्रेस क्लब द्वारा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय, भोपाल तथा सन्मार्ग के सहयोग से हिन्दी में पत्रकारिता लेखन के कौशल विकास पर तीन दिवसीय कार्यशाला के समापन सत्र को सम्बोधित करते हुए उपासने ने कहा कि जनहित पत्रकारिता की पहली शर्त है।

मीडिया के सामने विश्‍वसनीनयता और पूँजी का संकट है मगर मैन्यूफक्चर्ड की गयी खबरें या ऐसे मीडिया संस्थान अधिक समय तक नहीं टिकते इसलिए तथ्यपूर्ण सत्य पत्रकारों का हथियार होता है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय की रीवां परिसर के प्रभारी जयराम शुक्ल ने कार्यशाला के संचालक के रूप में उनके अनुभव साझा किये। उन्होंने कहा कि अक्षर स्थायी हैं इसलिए प्रिंट मीडिया के भविष्य को लेकर चिन्ता करने की जरूरत नहीं है। स्वागत भाषण प्रेस क्लब के अध्यक्ष स्नेहाशीष सूर ने दिया। इस अवसर पर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष राज मिठौलिया भी उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन प्रेस क्लब के सचिव किंशुक प्रामाणिक ने दिया। इस कार्यशाला में महानगर के हिन्दी मीडिया समूहों के 40 से अधिक कार्यरत अनुभवी और युवा पत्रकारों ने हिस्सा लिया और सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिये गये।

‘सलाम दुनिया सुपर स्टार’ में दिखे बच्चों की बहुरंगी प्रतिभा के अनोखे रंग

कोलकाता : सलाम दुनिया द्वारा आयोजित चित्रांकन प्रतियोगिता में ‘सलाम दुनिया सुपर स्टार’ में बच्चों की प्रतिभा निखरकर सामने आयी। ‘सलाम दुनिया स्टार’ के विजेता बच्चे इस प्रतियोगिता में शामिल हुए और उन्होंने कागज पर कल्पना के रंग बिखेरे। प्रतियोगिता दो समूहों में विभाजित की गयी थी। इसमें प्रथम वर्ग के बच्चों में पहली व दूसरी कक्षा के बच्चों ने भाग लिया। इन बच्चों के लिए विषय का कोई बंधन नहीं रखा गया था। इन बच्चों ने रथयात्रा, छोटा भीम, बारिश, धान के खेत और प्रकृति के मनोरम रंग कागज पर बिखेरे। दूसरे समूह में तीसरी और चौथी कक्षा के बच्चे शामिल थे और इन बच्चों ने स्वच्छ भारत और हरित भारत की कल्पना साकार की।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एयर इंडिया के पूर्व अधिकारी तथा लेखक नन्द किशोर प्रसाद उपस्थित थे। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्द्धन करते हुए कहा कि बच्चों की कला देखकर एक बार फिर उनका बचपन लौट आया। उन्होंने कहा कि बच्चों की कल्पना में घृणा के लिए कोई जगह नहीं होती और यही इन चित्रों में दिख रहा है। बच्चों को प्रोत्साहित करने की दिशा में सलाम दुनिया की यह पहल सराहनीय है।

भारतीय भाषा परिषद के निदेशक सह वागर्थ के सम्पादक व कार्यक्रम के प्रधान अतिथि वरिष्ठ आलोचक डॉ. शम्भुनाथ ने बच्चों का उत्साहवर्द्धन करते हुए कहा कि शिक्षकों के साथ अभिभावक और इस कार्यक्रम में अभिभावकों और शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ मीडिया की बड़ी भूमिका है और सलाम दुनिया इस तरह के आयोजन कर यह महत्वपूर्ण काम कर रहा है।

प्रतियोगिता में वर्ग ‘अ’ में डीपीएस मेगासिटी के अन्तरीप मुखर्जी को प्रथम, नेशनल इंग्लिश स्कूल की तनीषा मजुमदार को द्वितीय, डीपीएस मेगासिटी के देवांश नन्दी को तृतीय पुरस्कार मिला।

प्रतियोगिता वर्ग ‘बी’ में अभिनव भारती हाई स्कूल के ऋतोब्रोतो चक्रवर्ती को प्रथम, अभिनव भारती के अर्घ्य पोल्ले को द्वितीय और इसी स्कूल के सौम्यदित्य पाल को तृतीय पुरस्कार मिला।

‘सलाम दुनिया सुपर स्टार’ प्रतियोगिता में अभिनव भारती हाई स्कूल, दिल्ली पब्लिक हाई स्कूल, नेशनल इंग्लिश स्कूल और हरियाणा विद्या मन्दिर के बच्चों ने भाग लिया।

नशा और अवैध तस्करी के विरोध में उतरीं सावित्री गर्ल्स कॉलेज की छात्रायें

कोलकाता : 26 जून को संयुक्त राष्ट्र के नशीले पदाथों के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर सावित्री गर्ल्स कॉलेज की एनएसएस यूनिट, स्टूडेंट्स वेलफेयर कमेटीऔर मेडिकल सेल द्वारा नशीले पदाथों के दुरुपयोग और इसके अवैध तस्करी के खिलाफ धावा बोला गया। इसमें इनका साथ नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो और एक्साइज कॉलेक्टोरेट ने भी दिया। इस कार्यक्रम की शुरुआत कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. अमृता दत्ता के स्वागत भाषण के साथ हुआ। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के इंटेलिजेंस अधिकारी मनोज मिश्र और एक्साइज कॉलेजक्टरेट की डेप्यूटी एक्साइज कलेक्टर अमृतापर्णा घोष ने नशीलें पदार्थो के सेवन से होने वाले हानिकारक पक्षों के बारे में बताया। कार्यक्रम के दौरान बेथुन कॉलेज, टी. एच. के. जैन कॉलेज, सेठ सूरजमल जालान गर्ल्स कॉलेज, एमीनेंट कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, सावित्री गर्ल्स कॉलेज के विद्यार्थियों के बीच इस विषय को लेकर पावर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

प्रतियोगिता में पैनल जज के रुप में एनएसओयू एंड स्टेट एनएसएस एडवाइजर, स्कूल ऑफ एडुकेशन के निदेशक डॉ. ए. एन, दे, सरकारी नर्सिंग कॉलेज, आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज के डॉ. सुब्रत सरकार, मनोज मिश्र, टैगोर रिसर्च इंस्टीट्यूट के शिक्षक सुशांत नाग, आशुतोष कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. चंद्रीमा भर उपस्थित थीं। इसके बाद निकाले गये जुलूस में इन कॉलेजों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के अलावा विभिन्न सेवा समितियों के सदस्यों और बस्तियों में रहने वाले लोगों ने भी हिस्सा लिया। यह जुलूस सावित्री गर्ल्स कॉलेज के सामने से शुरू होकर हेदुआ स्थित बेथुन कॉलेज के सामने खत्म हुआ। विजेताओं को प्रमाणपत्र कलकत्ता विश्‍वविद्यालय के एनएसएस सेल के पूर्व सुपरिटेंडेंट कुणाल चटर्जी ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन सावित्री गर्ल्स कॉलेज के एनएसएस की प्रोग्राम अधिकारी डॉ. अलेफ्या टंडावाला ने दिया।

जब नुक्कड़ नाटक बने बच्चों का हथियार

हावड़ा : सड़कें क्षमता से अधिक सह रही हैं। वाहनों की भीड़ तेजी से बढ़ रही है। साथ बढ़ राह है हादसों का आँकड़े। अब सड़कें तो हादसों से निपटने से रहीं, सुधरना तो हम राहियों को ही पड़ेगा। सरकारें और प्रशासन नियम बना सकते हैं, सेफ ड्राइव सेव लाइफ जैसे अभियान चला सकते हैं। लेकिन इनका पालन करना तो आम लोगों को ही पड़ेगा। समय की मांग समझते हुए अब हावड़ा नवज्योति के छोटे-छोटे बच्चे गत रविवार को सड़क पर उतरे। सड़क हादसों से बचाव के लिए बने नियम और अभियान के प्रति लोगों को जागरूक करने को। मार्गदर्शन मिला हावड़ा ट्रैफिक पुलिस का। हावड़ा ट्रैफिक पुलिस के एसीपी अशोक चटर्जी व एसीपी सीबीआइ दिलीप चौबे स्वयं उपस्थित थे।
हावड़ा के रामकृष्णपुर घाट पर भव्य गंगा आरती के बाद बच्चों ने सेफ ड्राइव सेव लाइफ की थीम पर नुक्कड़ नाटक पेश किया। सराहने व संदेश स्वीकारने के लिए उपस्थित थे सैकड़ों स्थानीय लोग। कार्यक्रम की सफलता के लिए संस्था के अध्यक्ष डॉ सिपाही सिंह, उपाध्यक्ष संजीत सिंह, सचिव प्रभात मिश्रा, कोषाध्यक्ष अशोक कुमार के साथ संस्था से जुड़े डॉ अरविंद मिश्रा, राजू रंजन पांडेय, संतोष साव, राजू सिंह, राजू पासवान, संतोष राय, सूरज शर्मा, मोहित कोठारी, नवीन दास, कन्हैया झा, जग्गा राव व विकास राम का विशेष सहयोग था।

अफवाहों, फर्जी खबरों को रोकने के लिए संदेश भेजने की सीमा तय करेगी व्हॉट्सएप

नयी दिल्ली : देश में फर्जी खबरें और अफवाहें फैलने के बाद सामने आईं हत्या की घटनाओं के कारण आलोचना झेल रहे व्हॉट्सएप ने बड़ा कदम उठाने का निर्णय किया है। व्हॉट्सएप ने आज संदेश भेजने (फॉरवर्ड) की सीमा को एक बार में पांच चैट के लिये सीमित करने समेत देश में अपनी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। व्हॉट्सएप ने बयान में कहा कि वह एप पर संदेश भेजने की सीमा को निर्धारित करने के लिये परीक्षण शुरू कर रही है।
इसके अलावा उसने कहा कि वह मीडिया संदेशों के बगल में दिखाई देने पर वाले क्विक फारवर्ड बटन को भी हटायेगा।
व्हॉट्सएप ने ब्लॉग पोस्ट में कहा कि भारत में उसके उपयोगकर्ता अन्य देशों के उपयोगकर्ताओं की तुलना में अधिक संदेश , तस्वीर और वीडियो भेजते हैं। आज हम संदेश भेजने की सीमा को निर्धारित करने के लिये एक परीक्षण शुरू कर रहे हैं। यह व्हॉट्सएप के हर उपयोगकर्ता पर लागू होगा। भारत में … हम संदेश को एक बार में पांच चैट के लिये सीमित करने का भी परीक्षण करेंगे और मीडिया संदेश के बगल में दिखाई देने पर वाले बटन को भी हटाएंगे।
मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर भ्रामक और फर्जी खबरें प्रसारित होने के बाद व्हॉट्सएप को भारत सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा था। सरकार ने इस तरह की खबरों को रोकने के लिये जरूरी कदम उठाने को कहा था।
कल ही सरकार ने व्हॉट्सएप को दूसरा नोटिस भेजकर फर्जी और भ्रामक संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी समाधान करने को कहा है। सरकार ने कंपनी को चेतावनी दी है कि अफवाहों के प्रसार में माध्यम बनने वाले भी दोषी माने जाएंगे और मूक दर्शक बने रहने पर उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि , कंपनी ने इस नोटिस पर अब तक जवाब नहीं दिया है। व्हॉट्सएप ने ब्लॉग में कहा कि कंपनी का मानना है ये बदलाव उसे एक निजी संदेशवाहक (मैसेजिंग) एप के रूप में बनाये रखने में मदद करेंगे। जिस काम के लिये इसे डिजाइन किया गया था। उसने कहा , ” हमने व्हॉट्सएप को निजी संदेशवाहक के तौर पर बनाया है , जो कि अपने परिवार और दोस्तों के साथ जुड़ने का सरल , सुरक्षित और विश्वसनीय तरीका है। इसलिये हमने नये फीचर्स को जोड़ा है। हम आपकी सुरक्षा और निजता को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और हम अपने एप को बेहतर बनाए रखने का कार्य जारी रखेंगे।

बेटियों ने दिखायी राजस्थान के विधायक को शिक्षा की राह

उदयपुर : वह दूसरों को पढ़ने के फायदे बताया करते थे, लेकिन खुद के कम पढ़े होने का एहसास मन को सदा कचोटता था। अपनी बेटियों को पढ़ता देखकर तसल्ली कर लेते थे, लेकिन फिर उन्हीं बेटियों की प्रेरणा से भाजपा के एक विधायक ने बचपन में छूटी अपनी पढ़ाई की डोर को पचपन साल की उम्र में फिर से थाम लिया। राजस्थान के उदयपुर ग्रामीण से भाजपा विधायक फूल सिंह मीणा ने क्षेत्र की बालिकाओं को शिक्षित करने की मुहिम चलाई और फिर अपनी पांच शिक्षित बेटियों के कहने पर खुद भी दसवीं और बारहवीं की पढ़ाई पूरी की। अब वह स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं।
55 वर्षीय मीणा ने को बताया कि सेना में कार्यरत पिता की मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी ​के बोझ के चलते उन्होंने मजबूरी में पढ़ाई छोड कर खेती बाडी की और परिवार का पालन पोषण किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में राजनीति में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ मुहिम के तहत आदिवासी क्षेत्र की बालिकाओं को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया और एससी वर्ग की बालिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिये माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक परीक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक लाने पर विधायक कोष से उदयपुर से जयपुर की हवाई यात्रा करवाने की घोषणा की।
साथ ही उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में दो छात्राओं के 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने पर उन्हें निशुल्क हवाई यात्रा कराई गई, जबकि 2017 में छह छात्राओं को निशुल्क हवाई यात्रा के साथ साथ मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों से मुलाकात और विधानसभा भवन का भ्रमण करवाया गया।
मीणा का कहना है कि इस योजना के शुरूआती परिणाम बहुत उत्साहवर्द्धक हैं और अब इलाके में लड़कियों की शिक्षा के स्तर में सुधार आने लगा है। अब उन्होंने इस योजना का दायरा एससी वर्ग की बालिकाओं से बढा कर सामान्य वर्ग कर दिया है और घोषणा की है कि इस वर्ष उनके विधानसभा क्षेत्र से किसी भी वर्ग की बालिका यदि 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करेगी तो उसे निशुल्क हवाई यात्रा करवाई जायेगी। उन्होंने बताया कि दूसरों को शिक्षा की ओर प्रेरित करते समय उन्हें खुद का शिक्षित न होना बहुत कचोटता था। बचपन में वह सिर्फ सातवीं कक्षा तक पढ़ाई कर पाए थे। उनकी इस दुविधा के बीच उनकी बेटियों ने उन्हें फिर से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया और वह इस भूले बिसरे रास्ते पर फिर से निकल पड़े। वह बताते हैं कि बेटियों ने वर्ष 2013 में ओपन स्कूल से 10वीं कक्षा के लिये फार्म भरवा दिया, लेकिन विधायक बनने के बाद व्यस्तता के कारण वह 2014 में परीक्षा नहीं दे पाए, बेटियों ने 2015 में फिर से फार्म भर दिया और उन्होंने 10वीं की परीक्षा पास कर ली। 2016-2017 में वह 12 वीं पास कर गए और अब वह स्नातक स्तर की शिक्षा के पहले वर्ष की परीक्षा दे चुके हैं। बच्चों की तरह उत्साह से भरे मीणा बताते हैं कि अब वह पूरे उत्साह से अपने विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिये प्रयास कर रहे हैं और बालिकाओं को शिक्षा के लिये प्रो​त्साहित करने के दौरान यह बताना नहीं भूलते कि इस उम्र में वह शिक्षा हासिल करने के अपने सपने को साकार कर रहे हैं। हाल ही में समाजशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान और हिन्दी साहित्य विषयों के साथ बी ए प्रथम वर्ष कला की परीक्षा देने वाले मीणा का मानना है कि अगर जनप्रतिनिधि शिक्षित होगा तभी वह पूरी ईमानदारी से अन्य लोगों को शिक्षित होने के लिये प्रेरित कर सकेगा।

अदाकारा रीता भादुड़ी का निधन

मुम्बई : जानी मानी अदाकारा रीता भादुड़ी का निधन हो गया है। उनकी उम्र 62 वर्ष थी। ‘ हीरो नंबर 1’ और ‘ बेटा ’ जैसी फिल्मों में अपने किरदारों से उन्होंने बॉलीवुड में एक अलग पहचान हासिल की थी। भादुड़ी पिछले दो सप्ताह से जुहू के सुजय अस्पताल में भर्ती थी।
अदाकारा की भतीजी मिनी भादुड़ी ने कहा , ‘‘ उन्हें किडनी की बीमारी थी और उनके कई अंग कमजोर हो गए थे।
अभिनेता शिशिर शर्मा ने फेसबुक पर भादुड़ी के निधन की पुष्टि की। उन्होंने लिखा , ‘‘ बेहद दुख के साथ यह बताना चाहूंगा कि रीता भादुड़ी हमें छोड़कर चली गईं हैं। भादुड़ी आखिरी बार टीवी धारावाहिक ‘‘ निमकी मुखिया ’’ में नजर आई थीं।

एम्स पास किया तो राहुल गांधी ने आशाराम को लिखा खत

भोपाल : संसद में आंख मारने को लेकर भले ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का मजाक उड़ रहा हो या फिर वो विरोधियों के निशाने पर हों लेकिन इन सबके बीच उनका एक दूसरा पहलू भी सामने आया है। राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के एक युवक को खत लिखा हैराहुल गांधी ने एमपी के देवास शहर में रहने वाले आशाराम नाम के युवक को खत लिखकर उसे एम्स (AIIMS) एंट्रेंस एग्जाम क्लीयर करने पर बधाई दी है। आपको बता दें कि आशाराम चौधरी के पिता देवास के विजयागंज मंडी में ही पन्नी बीनने का काम करते हैं। इन सब चुनौतियों के बावजूद आशाराम चौधरी ने मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट के लिए जमकर मेहनत की और पहली ही बार में एम्स एंट्रेंस जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली।
आशाराम का दाखिला जोधपुर एम्स में हुआ है। एक छोटे से शहर में पन्नी बीनने वाले पिता के बेटे की सफलता की कहानी जब राहुल गांधी तक पहुंची तो उन्होंने आशाराम को खत लिखकर न केवल बधाई दी बल्कि उससे कहा कि वो आगे चलकर और भी बच्चों को मेडिकल पेशा चुनने के लिए प्रेरित करें। राहल गांधी ने अपने खत में लिखा कि प्रिय आशाराम, मैं आपको एम्स एंट्रेंस टेस्ट क्लीयर करने और अच्छी रैंक लाकर एम्स जोधपुर में एडमीशन के लिए बधाई देता हूं। मैं जानता हूं आपके सामने बहुत चुनौतियां थीं, इसके बावजूद आप ना केवल कामयाब हुए बल्कि अच्छी रैंकिंग भी लाए।
राहुल ने लिखा कि ये तुम्हारी निष्ठा और आपके परिश्रम की परीक्षा थी। मुझे ये जानकर बहुत खुशी हुई कि कैसे आपके गांव के डॉक्टर, आपके माता-पिता और एक संस्था ने आर्थिक मदद कर आपको प्रेरित किया। मुझे उम्मीद है कि एक दिन आप दूसरे बच्चों को भी डॉक्टर का पेशा चुनकर भारत के लोगों की सेवा करने के लिए प्रेरित करेंगे. इसके अलावा राहुल गांधी ने खत में महात्मा गांधी का भी जिक्र किया है। राहुल गांधी ने आगे लिखा कि आपको देखकर मुझे महात्मा गांधी की याद आती है जो कहा करते थे ताकत शारीरिक बल से नहीं बल्कि दृढ़ इच्छा शक्ति से आती है।
आशाराम की कहानी – मध्य प्रदेश के देवास नाम के छोटे से शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर विजयागंज मंडी में रहने वाले आशाराम चौधरी का नाम इन दिनों हर किसी की जुबान पर है। दरअसल, कचरा और पन्नी बीनने वाले के बेटे आशाराम ने एम्स एंट्रेंस एग्जाम में ऑल इंडिया 707 रैंक हासिल की है। इस प्रवेश परीक्षा में देशभर से लाखों छात्रों ने भाग लिया था। आशाराम का एम्स जोधपुर में दाखिला हो गया है जहां जल्द ही उनकी क्लास भी शुरू हो जाएगी।

आईआईटी में लड़कियाँ कम, इसे बढ़ाने की जरूरत: राष्ट्रपति

खड़गपुर : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज कहा कि लड़कियां बोर्ड परीक्षाओं , कालेजों और विश्वविद्यालयों में लड़कों को अक्सर पछाड़ देती हैं लेकिन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में उनकी संख्या ‘‘ दुखद रूप से कम ’’ है और इसे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर के 64 वें दीक्षांत समारेाह को संबोधित करते हुए कहा कि 2017 में आईआईटी संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों की संख्या एक लाख 60 हजार थी जिसमें से लड़कियां केवल 30 हजार थी। उस वर्ष आईआईटी की स्नातक कक्षाओं में 10878 छात्र भर्ती हुये थे जिसमें केवल 995 लड़कियां थीं।
कोविंद ने कहा , ‘‘ यह विषय मुझे लगातार परेशान करता है … यह नहीं चल सकता , हमें इन संख्याओं के बारे में कुछ करना चाहिए। ’उन्होंने कहा , ‘‘ जब कोई बोर्ड परीक्षाओं के बारे में सोचता है तो लड़कियां अच्छा परिणाम लाती हैं। वे अक्सर लड़कों को पछ़ाड़ देती हैं। मैं देशभर में जिन कालेजों और विश्वविद्यालयों में जाता हूं , मैं छात्रों के मुकाबले छात्राओं द्वारा ज्यादा पदक जीतने की प्रवृत्ति देखता हूं। (लेकिन आईआईटी में) छात्राओं की संख्या दुखद रूप से कम है। ’’
राष्ट्रपति ने कहा कि आईआईटी खड़गपुर में प्रवेश पाने वाले 11653 छात्रों में से 1925 लड़कियां हैं। देश में उच्चतर शिक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में महिलाओं की भागीदारी ‘‘ आगामी दशक में उचित एवं स्वीकार्य स्तर तक बढनी चाहिए और यह राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए और आईआईटी समिति को इस दिशा में आगे कदम बढाना चाहिए। ’’
कोविंद ने कहा कि इस लक्ष्य को पूरा किये बिना और लड़कियों तथा युवतियों के लिए कामकाज के अवसर पैदा किये बिना समाज का विकास कभी पूरा नहीं हो सकता। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के एन त्रिपाठी इस समारोह में सम्मानित अतिथि थे।

गोपाल दास नीरज : मौन हुई ‘हिंदी की वीणा’

नयी दिल्ली : कवि और गीतकार गोपाल दास नीरज शब्दों के ऐसे चितेरे कि उनके व्यक्तित्व को शब्दों में बांधना मुश्किल, वाचिक परंपरा के ऐसे सशक्त हस्ताक्षर कि मंच पर उनकी मौजूदगी लोगों को गीत और कविता सुनने का शऊर सिखा दे, जिंदादिली ऐसी कि शोखियों में फूलों का शबाब घोल दें और मिजाज ऐसा मस्तमौला कि कारवां गुजर जाने के बाद लोग गुबार देखते रहें।उनके जाने से हिंदी साहित्य का एक भरा भरा सा कोना यकायक खाली हो गया। वह अपने चाहने वालों के ऐसे लोकप्रिय और लाड़ले कवि थे जिन्होंने अपनी मर्मस्पर्शी काव्यानुभूति तथा सरल भाषा से हिन्दी कविता को एक नया मोड़ दिया और उनके बाद उभरे बहुत से गीतकारों में जैसे उनके ही शब्दों का अक्स नजर आता है।
गोपालदास सक्सेना ‘नीरज’ का जन्म 4 जनवरी 1924 को इटावा जिले के पुरावली गांव में हुआ। मात्र छह साल की उम्र में पिता ब्रजकिशोर सक्सेना नहीं रहे और उन्हें एटा में उनके फूफा के यहां भेज दिया गया। नीरज ने 1942 में एटा से हाई स्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और परिवार की जिम्मेदारी संभालने इटावा वापस चले आए। गोपाल दास रोजी रोटी की तलाश में निकले तो शुरुआत में इटावा की कचहरी में कुछ समय टाइपिस्ट का काम किया उसके बाद सिनेमाघर की एक दुकान पर भी नौकरी की। कुछ समय बाद वह भी जाती रही तो छोटे मोटे काम करके जैसे तैसे मां और तीन भाइयों के लिए दो रोटी का जुगाड़ किया।
कुछ समय बाद नीरज को दिल्ली के सप्लाई विभाग में टाइपिस्ट की नौकरी मिली तो कुछ राहत हो गई। नौकरी के दौरान पढ़ने लिखने का सिलसिला चलता रहा और इसी दौरान कलकत्ता में एक कवि सम्मेलन में शामिल होने का मौका मिला। उनके गीतों की खूश्बू अब फैलने लगी थी और इसी के चलते ब्रिटिश शासन में सरकारी कार्यक्रमों का प्रचार प्रसार करने वाले एक महकमे में नौकरी पा गए। नीरज को जब यह लगने लगा था कि जिंदगी पटरी पर लौट रही है तभी उनके लिखे एक गीत के कारण उन्हें नौकरी गंवानी पड़ी और वह कानपुर वापस लौट आए। बाल्कट ब्रदर्स नाम की एक प्राइवेट कम्पनी में पाँच वर्ष तक टाइपिस्ट की नौकरी करने के साथ प्राइवेट परीक्षाएँ देकर उन्होंने 1949 में इण्टरमीडिएट, 1951 में बीए और 1953 में प्रथम श्रेणी में हिन्दी साहित्य से एमए किया।
1955 में उन्होंने मेरठ कॉलेज में हिन्दी प्रवक्ता के पद पर कुछ समय तक अध्यापन कार्य किया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने यह नौकरी छोड़ दी और अलीगढ़ के धर्म समाज कॉलेज में हिन्दी विभाग के प्राध्यापक नियुक्त हो गये । कवि सम्मेलनों में अपार लोकप्रियता के चलते नीरज को फिल्मी दुनिया ने गीतकार के रूप में ‘नई उमर की नई फसल’ के गीत लिखने का न्यौता दिया और वह खुशी खुशी अपने सपनों में रंग भरने के लिए बम्बई रवाना हो गए। उनका लिखा एक गीत ‘कारवाँ गुजर गया गुबार देखते रहे’ जैसे उनके नाम का पर्याय बन गया और जीवनपर्यंत देश विदेश का ऐसा कोई कवि सम्मेलन नहीं था, जिसमें उनके चाहने वालों ने उनसे वह गीत सुनाने की फरमाइश न की हो।
उनके गीतों की चमक ऐसी बिखरी कि लगातार तीन बरस तक उन्हें सर्वश्रेष्ठ गीतकार का अवार्ड मिला। 60 और 70 के दशक में उन्होंने फिल्मी दुनिया के गीतों को नये मायने दिए और फिर बंबई से मन ऊब गया तो 1973 में अलीगढ़ वापस चले आए। बाद में बहुत इसरार पर फिल्मों के लिए कुछ गीत लिखे । गोपालदास नीरज के व्यक्तित्व और उनकी लेखनी के जादू को युवा कवि कुमार विश्वास कुछ इन शब्दों में ब्यां करते हैं, ‘‘जैसे किसी सात्विक उलाहने के कारण स्वर्ग से धरा पर उतरा कोई यक्ष हो। यूनानी गठन का बेहद आकर्षक गठा हुआ किंतु लावण्यपूर्ण चेहरा, पनीली आंखें, गुलाबी अधर, सुडौल गर्दन, छह फुटा डील डौल, सरगम को कंठ में स्थायी विश्राम देने वाला मंद-स्वर, ये सब अगर भाषा के खांचे में डालकर सम्मोहन की चांदनी में भू पर उतरें तो जैसे नीरज जी कहलाएं।’’