लंदन : सोशल मीडिया के बच्चों पर पड़ते नकारात्मक प्रभाव से फिक्रमंद ब्रिटेन सरकार बच्चों के लिए इन साइटों और एपों के इस्तेमाल के घंटे मुकर्रर करने के लिए दिशा-निर्देश बनाने पर काम कर रही है।
ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री मैट हेनकोक ने कहा कि उन्होंने योजना बनाने के निर्देश दिए हैं और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया कंपनियों पर हमला बोलते हुए कहा कि वे उपयोगकर्ताओं की आयु सीमा पर अपने स्वयं के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘ एक पिता के तौर पर मैं बच्चों के मानिसक स्वास्थ्य पर सोशल मीडिया के प्रभाव के बढ़ते साक्ष्यों को लेकर बहुत फिक्रमंद हूं। बच्चों द्वारा (सोशल मीडिया के) बेलगाम इस्तेमाल से उनके मानसिक स्वास्थ्य के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है।’’
ब्रिटेन के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डेम सेली डेविस को दिशा-निर्देश का प्रारूप तैयार करने का प्रभारी नियुक्त किया गया है जो दिशा-निर्देश तय करेगा कि सोशल मीडिया पर कितना वक्त बिताने को सेहतमंद समझा जाना चाहिए। हेनकोक ने ‘ऑब्जर्वर’ अखबार से कहा, ‘‘ माता-पिता यह कह सकते हैं कि ‘नियम कहते हैं कि निश्चत वक्त से ज्यादा आपको सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’ इसलिए हमारे पास समाज के लिए नियम बनाने, समाज की तरफ से फैसला लेने के लिए एक मुख्य चिकित्सा अधिकारी हैं ताकि स्कूलों और माता-पिता को निर्णय नहीं करना पड़े।’ मंत्री ने सुझाव दिया कि सोने से पहले फोन को ऑफ करना नुकसान को सीमित करने का एक तरीका हो सकता है।
डेविस से सोशल मीडिया के इस्तेमाल की न्यूनतम उम्र के बारे में भी सलाह देने को कहा गया है। हेनकोक ने कहा,‘‘ फेसबुक और इंस्टाग्राम की शर्तें कहती हैं कि अगर आप 13 साल से कम उम्र के हैं तो आपको इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, लेकिन इसे लागू करने के लिए कुछ नहीं करते हैं। व्हाट्सएप के दिशा-निर्देश कहते हैं कि 16 साल से कम उम्र होने पर इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।’’
ब्रिटेन बना रहा है बच्चों के लिए सोशल मीडिया इस्तेमाल के दिशा-निर्देश
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- प्रमोशन में आरक्षण दे सकते हैं राज्य
नयी दिल्ली : अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कर्मियों के पदोन्नति में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में सीधे-सीधे पदोन्नति में आरक्षण को खारिज नहीं किया है। कोर्ट ने इस मामले को राज्यों पर छोड़ दिया है। राज्य सरकार अगर चाहे तो वे प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में एससी/एसटी आरक्षण के लिए कोई डेटा जमा करने की जरूरत नहीं है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने नागराज मामले में 2006 में दिए गए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने से भी इनकार कर दिया है यानि इस मामले को दोबारा 7 जजों की पीठ के पास भेजना जरूरी नहीं है।
बता दें कि 2006 में नागराज से संबंधित वाद में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने कहा था कि सरकार एससी/एसटी को प्रमोशन में आरक्षण दे सकती है, लेकिन शर्त लगाई थी कि प्रमोशन में आरक्षण से पहले यह देखना होगा कि अपर्याप्त प्रतिनिधित्व है या नहीं। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकारी नौकरियों में प्रमोशन में एससी/एसटी आरक्षण के लिए किसी भी तरह का डाटा जमा करने की भी जरूरत नहीं है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों की दलील स्वीकार की हैं। फैसला सुनाते हुए जस्टिस नरीमन ने कहा कि नागराज मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही था, इसलिए इस पर फिर से विचार करना जरूरी नहीं है।
गौरतलब है कि सरकार और आरक्षण समर्थकों ने 2006 के एम नागराज के फैसले को पुनर्विचार के लिए सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ को भेजे जाने की मांग की थी। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मांग पर सभी पक्षों की बहस सुनकर गत 30 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सरकार और आरक्षण समर्थकों का कहना है कि एम नागराज फैसले में दी गई व्यवस्था सही नहीं है। एससी एसटी अपने आप में पिछड़े माने जाते हैं। राष्ट्रपति द्वारा जारी सूची में शामिल होने के बाद उनके पिछड़ेपन के अलग से आंकड़े जुटाने की जरूरत नहीं है। जबकि आरक्षण विरोधियों ने एम नागराज फैसले को सही ठहराते हुए कहा था कि उस फैसले में पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी गई व्यवस्था सही कानून है। फैसले के एक भाग पर नहीं बल्कि फैसला आने की पूरी परिस्थितियों पर विचार होना चाहिए। उनका कहना था कि आरक्षण हमेशा के लिए नहीं है ऐसे में पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाए बगैर यह कैसे पता चलेगा कि सरकारी नौकरियों में एससी एसटी का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है और इसलिए इन्हें प्रोन्नति में आरक्षण देने की जरूरत है।
एयर इंडिया त्योहारी मांग की पूर्ति के लिए उतारेगी 423 सीटों वाला ‘जंबो जेट’
मुम्बई : एयर इंडिया 423 सीटों वाले डबल डेकर जंबो जेट बोइंग-747 की सेवा शुरू करने जा रही है। सरकारी विमानन कंपनी ने फेस्टिवल सीजन को ध्यान में रखकर 16 अक्टूबर से इस सेवा को शुरू करने का निर्णय लिया है। एयर इंडिया ने बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी है। कंपनी ने बताया कि 16 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच नई दिल्ली से कोलकाता और मुंबई के लिए जंबो जेट की रोज एक उड़ान होगी।
एयर इंडिया के डबल डेकर विमान में प्रथम श्रेणी में 12 सीट, बिजनेस श्रेणी में 26 सीट, जबकि इकोनॉमी श्रेणी में 385 सीट हैं। सामान्य तौर पर चार इंजनों वाले इस विमान का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय परिचालन या अति महत्वपूर्ण व्यक्तियों के आने-जाने में किया जाता है। सरकारी विमानन कंपनी ने बताया कि 1 नवंबर से 11 नवंबर के बीच प्रतिदिन जंबो जेट की दो उड़ान दिल्ली-मुंबई-दिल्ली में शुरू की जाएंगी। दिवाली के त्योहार को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है, क्योंकि इस सीजन में मांग बेहद बढ़ जाती है।
तीन दिन तक समुद्र में फंसे नौसेना कमांडर, ऐसे बचाये गये
नयी दिल्ली : तीन दिन से घायल अवस्था में अपनी नाव में समुद्र में फंसे भारतीय नौसेना के कीर्ति चक्र विजेता कमांडर अभिलाष टॉमी (39) को सोमवार को दक्षिणी हिंद महासागर से सुरक्षित बचा लिया गया। नौसेना में पायलट कमांडर अभिलाष ‘गोल्डन ग्लोब रेस-2018’ में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। 2013 में समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया का बिना रुके चक्कर लगाने वाले वह पहले भारतीय हैं।
कमांडर अभिलाष की स्वदेशी नौका ‘एसवी थुराया’ के शुक्रवार को तूफान में फंसने की वजह से उसके मस्तूल क्षतिग्रस्त हो गए थे। समुद्र में तेज लहरें उठने से उनकी नाव का स्तंभ टूट गया था। इस वजह से उनकी पीठ में गंभीर चोट लग गई थी। शनिवार को उन्होंने अपनी वाईबी3 टेक्सटिंग यूनिट से फ्रांस स्थित रेस आयोजकों को खुद के घायल होने का संदेश भेजा था, लेकिन समुद्र में उनकी लोकेशन पता नहीं चली थी।
रविवार को भारतीय नौसेना के निगरानी और टोही विमान पी8आइ ने उनकी नाव का पता लगा लिया था। नौसेना प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने बताया कि फ्रांस के मछली पकड़ने वाले जहाज ‘ओसिरिस’ ने सोमवार सुबह करीब 11.30 बजे बचाव अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इस दौरान भारतीय विमान पी-8आइ ने भी सहायता की। संडे टाइम्स की गोल्डन ग्लोब रेस की 5वीं वर्षगांठ पर आयोजित गोल्डन ग्लोब रेस बहुत मेहनत वाली प्रतियोगिता है। इसमें बिना किसी आधुनिक तकनीक की मदद लिए एक छोटी नाव में बैठकर दुनिया का चक्कर लगाना होता है। भारतीय नौसेना के कमांडर अभिलाष टॉमी को सुरक्षित बचा लेने पर उनके पिता वीसी टॉमी ने खुशी जताई है। मीडिया से बात करते हुए अभिलाष के पिता ने कहा कि अब हमें 75 फीसद राहत मिली है। हम सभी पिछले तीन दिनों से तनाव में थे। नौसेना अफसर के पिता भी नेवी में कमांडर थे। बता दें कि गोल्डन ग्लोब रेस के दौरान नौका के दक्षिण हिंद महासागर में तेज तूफान में फंसने से अभिलाष (39) घायल हो गए थे। उन्होंने कहा, ‘हां, उन्हें बचा लिया गया है, फिलहाल हम यही कह सकते हैं कि वह मानसिक रूप से स्थिर हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं में दुर्घटनाओं की संभावना होती है। इससे हम सभी वाकिफ थे। मुझे पूरी उम्मीद है कि वह जल्द ही इससे बाहर आ जाएगा। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने खुशी जताते हुए कहा कि यह जानकर राहत मिली की नौसेना अधिकारी अभिलाष टॉमी को बचा लिया गया है। वह होश में हैं और ठीक हैं। आइएनएस सतपुड़ा उन्हें चिकित्सा के लिए मॉरीशस लेकर जाएगा।
व्यभिचार अब अपराध नहीं, महिला पति की संपत्ति नहीं : सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली : व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए उच्चतम न्यायालय ने इससे संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त कर दिया और कहा कि यह महिलाओं की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाता है और इस प्रावधान ने महिलाओं को ‘‘पतियों की संपत्ति’’ बना दिया था। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक करार हुए इस दंडात्मक प्रावधान को निरस्त कर दिया। शीर्ष अदालत ने इस धारा को स्पष्ट रूप से मनमाना, पुरातनकालीन और समानता के अधिकार तथा महिलाओं के लिए समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन करने वाला बताया। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति आर. एफ. नरिमन, न्यायमूर्ति ए. एम.खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई. चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा ने एकमत से कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 497 असंवैधानिक है।
संविधान पीठ ने जोसेफ शाइन की याचिका पर यह फैसला सुनाया। यह याचिका किसी विवाहित महिला से विवाहेत्तर यौन संबंध को अपराध मानने और सिर्फ पुरूष को ही दंडित करने के प्रावधान के खिलाफ दायर की गयी थी। व्यभिचार को प्राचीन अवशेष करार देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि मानव जीवन के सम्मानजनक अस्तित्व के लिए स्वायत्ता स्वभाविक है और धारा 497 महिलाओं को अपनी पसंद से वंचित करती है।
प्रधान न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि व्यभिचार आपराधिक कृत्य नहीं होना चाहिए लेकिन इसे अभी भी नैतिक रूप से गलत माना जाएगा और इसे विवाह खत्म करने तथा तलाक लेने का आधार माना जाएगा। घरों को तोड़ने के लिये कोई सामाजिक लाइसेंस नहीं मिल सकता। भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के अनुसार यदि कोई पुरूष यह जानते हुये भी कि महिला किसी अन्य व्यक्ति की पत्नी है और उस व्यक्ति की सहमति या मिलीभगत के बगैर ही महिला के साथ यौनाचार करता है तो वह परस्त्रीगमन के अपराध का दोषी होगा। यह बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आयेगा। इस अपराध के लिये पुरूष को पांच साल की कैद या जुर्माना अथवा दोनों की सजा का प्रावधान था।
शाइन की ओर से दायर याचिका में तर्क दिया गया था कि कानून तो लैंगिक दृष्टि से तटस्थ होता है लेकिन धारा 497 का प्रावधान पुरूषों के साथ भेदभाव करता है और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 :समता के अधिकारः , 15 : धर्म, जाति, लिंग, भाषा अथवा जन्म स्थल के आधार पर विभेद नहींः और अनुच्छेद 21:दैहिक स्वतंत्रता का अधिकारः का उल्लंघन होता है।
न्यायमूर्ति मिश्रा और न्यायमूर्ति खानविलकर ने अपने फैसले में कहा, ‘‘विवाह के खिलाफ अपराध से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 198 को हम असंवैधानिक घोषित करते हैं।’’
न्यायमूर्ति नरिमन ने धारा 497 को पुरातनकालीन बताते हुए प्रधान न्यायाधीश और न्यायमूर्ति खानविलकर के फैसले से सहमति जतायी। उन्होंने कहा कि दंडात्मक प्रावधान समानता का अधिकार और महिलाओं के लिए समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन है।
वहीं न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा कि धारा 497 महिला के सम्मान को नष्ट करती है और महिलाओं को गरिमा से वंचित करती है। पीठ में शामिल एकमात्र महिला न्यायाधीश न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा ने अपने फैसले में कहा कि धारा 497 संविधान प्रदत्त मूल अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है और इस प्रावधान को बनाए रखने के पक्ष में कोई तर्क नहीं है।
अपनी और न्यायमूर्ति खानविलकर की ओर से फैसला लिखने वाले प्रधान न्यायाधीश मिश्रा ने कहा कि व्यभिचार महिला की व्यक्तिकता को ठेस पहुंचाती है और व्यभिचार चीन, जापान तथा ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में अपराध नहीं है। उन्होंने कहा, संभव है कि व्यभिचार खराब शादी का कारण नहीं हो, बल्कि संभव है कि शादी में असंतोष होने का नतीजा हो।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि महिला के साथ असमान व्यवहार संविधान के कोप को आमंत्रित करता है। उन्होंने कहा कि समानता संविधान का शासकीय मानदंड है।
संविधान पीठ ने कहा कि संविधान की खूबसूरती यह है कि उसमें ‘‘मैं, मेरा और तुम’’ शामिल हैं।शीर्ष अदालत ने कहा कि महिलाओं के साथ असमानता पूर्ण व्यवहार करने वाला कोई भी प्रावधान संवैधानिक नहीं है और अब यह कहने का वक्त आ गया है कि ‘पति महिला का स्वामी नहीं है।’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि धारा 497 जिस प्रकार महिलाओं के साथ व्यवहार करता है, यह स्पष्ट रूप से मनमाना है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई सामाजिक लाइसेंस नहीं हो सकता है जो घर को बर्बाद करे परंतु व्यभिचार आपराधिक कृत्य नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़ ने कहा कि धारा 497 को असंवैधानिक घोषित किया जाये क्योंकि व्यभिचार स्पष्ट रूप से मनमाना है। पीठ ने कहा कि व्यभिचार को विवाह विच्छेद के लिये दीवानी स्वरूप का गलत कृत्य माना जा सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन की पश्चिम बंगाल कार्यकारिणी का गठन
हावड़ाः अंतर्राष्ट्रीय क्षत्रिय वीरांगना फ़ाउंडेशन की पश्चिम बंगाल प्रदेश कार्यसमिति की एक बैठक प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में हावड़ा के लिलुआ स्थित अग्रसेन स्ट्रीट में सम्पन्न हुई। बैठक में सर्वसम्मति से वीरांगना की प.बंगाल प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया गया। इसमें प्रतिभा सिंह अध्यक्ष, इंदु सिंह उपाध्यक्ष, प्रतिमा सिंह महासचिव, पूजा सिंह कोषाध्यक्ष तथा किरण सिंह, सुमन सिंह, मीनू सिंह, रीता सिंह व ज्योति सिंह सदस्य बनाये गये। यह भी निर्णय लिया गया कि वीरांगना की प्रदेश भर में आंचलिक इकाइयां गठित होंगी जिसमें कोलकाता महानगर अंचल की अध्यक्ष मीनू सिंह, सोदपुर अंचल की अध्यक्ष ज्योति सिंह, उपाध्यक्ष सुनीता सिंह व सचिव ललिता सिंह, हावड़ा जिला अंचल की अध्यक्ष रीता सिंह, उपाध्यक्ष ऋचा सिंह, कार्यकारिणी की सदस्य किरण प्रकाश सिंह व रागिनी सिंह, टालीगंज अंचल की अध्यक्ष सुमन सिंह, कांचरापाड़ा की अध्यक्ष किरण सिंह बनायी गयीं। आंचलिक समितियों की पूरी कार्यकारिणी का गठन और विस्तार जल्द होगा।
महिलाओं के व्यापक हितों के लिए काम करेंगी वीरांगनाएं-प्रतिभा सिंह
वीरांगना प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने बताया कि जल्द ही एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की रूपरेखा तैयारी की जा रही है। उसके बाद महिला सशक्तीकरण और जागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम प्रदेश के विभिन्न जिलों में होंगे। उन्होंने कहा कि भले ही ये कार्यक्रम क्षत्रिय वीरांगनाओं द्वारा संचालित होंगे लेकिन वे जाति, धर्म और राजनीतिक खेमे से उठकर महिलाओं के व्यापक हितों से जुड़े होंगे। साल में एक अंतर्राष्ट्रीय समारोह भी बंगाल में होगा।
खिदिरपुर कॉलेज में हिन्दी दिवस समारोह का आयोजन
कोलकाता : खिदिरपुर कॉलेज की ओर से कॉलेज परिसर में हिंदी दिवस पालन किया गया । कार्यक्रम में जहां एक ओर कॉलेज के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं सहायक शिक्षक तथा शिक्षिकाओं ने मातृभाषा हिंदी पर अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए । वहीं 14 भिन्न-भिन्न भाषाओं को लेकर विद्यार्थियों ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं । विभागाध्यक्ष डॉ इतु सिंह ने स्वागत भाषण और अतिथि का स्वागत किया तथा यह बताया कि हिंदी केवल राजभाषा नहीं बल्कि समन्वय की भाषा है । वहीं विभाग की शिक्षिका डॉ अर्चना पांडे ने गोपाल सिंह नेपाली की कविता का पाठ किया। राजनीति विज्ञान की शिक्षिका डॉक्टर सुदक्षिणा सरकार राय , बांग्ला विभागाध्यक्ष डॉक्टर रूमा बनर्जी , अंग्रेजी विभाग के शिक्षिका डॉक्टर सुनंदा मुखर्जी , कॉमर्स विभाग की शिक्षिका डॉक्टर सुहाग जोरदार , अर्थशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ स्वाति पाल, फिजिकल एजुकेशन के विभागाध्यक्ष डॉ दिब्येंदु राय ने हिंदी के संबंध में अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए । दर्शन विभाग की शिक्षिका डॉक्टर प्रभावती दास मल्लिक ने मीरा की कविता का गायन किया । कार्यक्रम का संचालन हाजरा खातून, निष्ठा कुमारी, कंचन चौधरी और मुबीना खातून ने किया । स्वागत गीत सूबी सिंह ने प्रस्तुत किया । शाहीन परवीन ने हिंदी दिवस पर विशेष भाषण प्रस्तुत किया । शिवमंगल सिंह सुमन की कविता ‘ वरदान नहीं माँगूगा ‘ – स्मिता ने , निराला की ‘ जागो फिर एक बार ‘ कविता – पार्वती साव , केदारनाथ सिंह की कविता ‘ मेरी भाषा के लोग ‘ अंकिता कुमारी , रामप्रसाद बिस्मिल की गजल शिखा सिंह , विद्यापति के गीत का गायन – प्रभास कुमार झा , हिंदीतर भाषा की कविताएँ पंजाबी की कविता अवतार सिंह संधू ‘पाश’ (सलाम) – मुबीना खातून , मराठी की नारायण सर्वे की कविता ‘ सावधान ‘ – ज्योति साव , बांग्ला की कविता जीवनानंद दास (मैंने देखा है बंगाल का चेहरा) – असमिया की कविता हीरेन भट्टाचार्य (पृथ्वी मेरी कविता) – सचिन बिंद , उड़िया की कविता सीताकांत महापात्र (धान कटाई) – किशन कुमार , कन्नड़ की कविता ‘ बादल ‘ विनायक कृष्ण गोकाक – नेहा कुमारी , कश्मीरी की कविता मोतीलाल ‘साकी’ (बाँसुरी वादक) – कांतेश्वर कुमार , गीत – हरिवंश राय बच्चन – कंचन , गुजराती की कविता संस्कृति रानी देसाई (ढोल) – स्वीटी सोनी , तमिल की कविता सुब्रमण्यम भारती (स्वतंत्रता) – पूजा चौधरी , तेलुगु की कविता डॉ सी. नारायण रेड्डी (पेड़) – शाहीन परवीन , मलयालम की कविता के सचिदानंदन (पहला प्यार) – नेहा कुमारी भास्कर , मणिपुरी की कविता लेनचेनबा मीतै (तुझे नहीं खेया नाव) – विनीता कुमारी , सिंधी की कविता कृष्ण राही (वोट) – रीमा यादव , डोंगरी की कविता पद्मा सचदेव (डोगरी) – पार्वती साव , महादेवी की कविता (वे मुस्काते फूल) – कंचन साव , समूह गान शाहीन परवीन …. नृत्य संजना शर्मा , सोना सिंह , नाजिया परवीन ने प्रस्तुत किया । धन्यवाद ज्ञापन हिंदी विभाग विभाग की शिक्षिका डॉ रमा मिश्रा ने प्रस्तुत किया। कॉलेज के सभी सहायक शिक्षक तथा शिक्षिकाओं ने साथ ही साथ प्रथम द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्र छात्राओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई ।
सुषमा कनुप्रिया को लाडली मीडिया ज्यूरी एप्रिशिएशन सर्टिफिकेट
लाडली मीडिया एंड एडवर्टाइजिंग अवार्ड्स के 9वें संस्करण में सलाम दुनिया की पत्रकार तथा अपराजिता की संस्थापक व सम्पादक सुषमा त्रिपाठी कनुप्रिया को लाडली मीडिया अवार्ड 2017 का ज्यूरी एप्रिशियेशन सर्टिफिकेट मिला है। उनको यह प्रमाणपत्र सलाम दुनिया में प्रकाशित ‘जान को दाँव पर लगाकर बन्ध्याकरण करवाती महिलायें’ रपट के लिए दिया गया जो परिवार नियोजन के तरीकों और उसकी भागीदारी पर आधारित है।

लैंगिक समानता के लिए काम कर रहे पॉपुलेशन फर्स्ट द्वारा आयोजित लाडली मीडिया अवार्ड के लिए देश भर से विभिन्न श्रेणियों में 1500 प्रविष्टियाँ भेजी गयी थीं जिसमें से 90 विजेताओं का चयन किया गया। इनमें से 82 प्रतिभागियों को अवार्ड तथा 14 प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र दिया गया। विभिन्न क्षेत्रों के 60 निर्णायक थे। हाल ही में इसका पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया जिसमें रैमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता पी. साईनाथ उपस्थित थे। इस अवसर पर पद्मश्री शोभना नारायण ने प्रस्तुति की।
मनुष्य और उसकी संभावनाओं के कवि हैं प्रियंकर पालीवाल” – प्रो0 अरुण होता
कोलकाता : बंगीय हिंदी परिषद् की ओर से हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि, आलोचक और संस्कृति चिंतक प्रियंकर पालीवाल की कविता पुस्तक “वृष्टि-छाया प्रदेश का कवि” पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया।परिचर्चा गिष्ठी की अध्यक्षता करते हुए हिंदी के सुप्रसिद्ध आलोचक प्रो0 अरुण होता ने कहा कि यह कविता संग्रह प्रियंकर जी के पिछले 53-54 सालों की सबसे समृद्ध कमाई है। लगभग 34 साल पहले उन्होंने कविता-लेखन को गंभीर रूप से देखना शुरू किया था और इतने दिनों में 53 कविताओं का जो संग्रह हिंदी जगत को सौंपा है, वह बताता है कि कितने धैर्य के साथ, बिना किसी हड़बड़ी के कवि ने कैसे अपने समाज, संस्कृति , परम्परा और वर्तमान को समझने की कोशिश की है।यथार्थ के चित्रण में कवि की जो व्यापक भविष्य दृष्टि समाहित है वह सबसे खराब दौर से गुजर रहे मनुष्य में भी संभावनाओं की खिड़की खोल देती है। वे धैर्य और स्थैर्य के कवि हैं। विद्यासागर कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ आशुतोष ने कहा कि प्रियंकर पालीवाल के व्यक्तित्व में जो धैर्य, गंभीरता,सरलता और शालीनता है उसे उनकी कविताओं में भी देखा जा सकता है।शहर और गाँव दोनों की विसंगतियों, सौंदर्य, परंपरा और संस्कृति को जितनी बारीकी से कवि ने चित्रित किया है वही कवि को विशिष्ट बनाती हैं। परंपरा और हमारा सांस्कृतिक इतिहास उनके लिए बड़े महत्व के हैं परंतु वे कहीं भी कवि के पैर की बेड़ी नहीं बनने पाए हैं। युवा आलोचक डॉ मृत्युंजय पांडेय ने कहा कि पालीवाल जी संभावनाओं से अधिक यथार्थ के कवि हैं। उनके अंदर एक गाँव बसता है, उसकी परम्परा और संस्कृति इनकी काव्य ऊर्जा और शक्ति के रूप में प्रतिबिंबित होते हैं। पालीवाल जी गम्भीरता पूर्वक पढ़े जाने की माँग करते हैं। उन्हें हल्के ढंग से नहीं पढ़ा जा सकता है। यथार्थ के साथ -साथ वे उम्मीद यकीन और भरोसे के कवि हैं। युवा साहित्य चिंतक पीयूषकांत राय ने कहा कि ‘वृष्टि-छाया प्रदेश का कवि’ संकलन की कविताएँ शिल्प और भाषा की दृष्टि से इतनी सुगठित हैं कि एक भी शब्द को आप हिला नहीं सकते।किसी भी शब्द को अगर उसके स्थान से हटा दिया जाय तो कविता का सौंदर्य नष्ट हो जाएगा।किसी भी कवि में यह क्षमता वर्षों की काव्य-यात्रा के पश्चात ही आ पाती है। पिछले 34 सालों की इनकी काव्य यात्रा को इस रूप में देखना चाहिए।कवि के अचार और विचार में जो निकटता है वही युवा पीढ़ी को उनके नजदीक ले जाता है।आज के युग में नयी पीढ़ी को सत्य और मूल्य से जोड़ने में तमाम बड़े आचार्य इसलिए विफल हैं क्योंकि उनका अचार तुच्छ है। उनके विचार बड़े हैं किन्तु अचार बौने हैं।हमें गर्व है कि हमारे शहर में एक ऐसा कवि है जिसके अचार और विचार में दूरी नहीं है और वही सत्य इनकी कविताओं की सबसे बड़ी शक्ति है।वे हमारे शहर के बौद्धिक संपदा हैं। गोष्ठी में स्वयं कवि ने अपनी रचना प्रक्रिया के अनुभवों को साझा किया और अपने आत्म-संघर्ष से साक्षात्कार कराते हुए कहा मेरी कविताएँ समय समय पर अपने समय के साथ की गईं मुठभेड़ हैं, वे मेरी आत्म-समीक्षा का परिणाम हैं।कविता मेरे लिए जीवन को समझने का उपक्रम है।मैं खुद को एक सचेत नागरिक – कवि के रूप में देखता हूँ। मंच के संचालक युवा आलोचक डॉ कुमार संकल्प ने कहा कि प्रियंकर पालीवाल जी की कविताएँ अपने समय और उसकी दिशा पर गहरे सोच-विचार की माँग करती हैं।उन्हें पढ़ते हुए आप अपने युग की हलचलों को पढ़ सकते हैं और तमाम तरह के संकटों से लड़ने का नैतिक सामर्थ्य जुटा सकते हैं। दाम्पत्य प्रेम की कविताओं की दृष्टि से वे केदारनाथ अग्रवाल और नागार्जुन की परंपरा के कवि हैं । निराला ने पुत्री पर कविता लिखी थी ‘सरोज-स्मृति’।हिंदी साहित्य में बहन पर गिनी चुनी ही कविताएँ लिखीं गयीं हैं । कवि के इस संग्रह से यह शिकायत हिंदी जगत को नहीं रह जाएगी। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए परिषद् की अध्यक्ष और कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्या (प्रिंसिपल) प्रो0 सत्या उपाध्याय ने कहा कि प्रियंकर पालीवाल की कविताएँ हिंदी जगत को समृद्ध करती हैं। इसमें राजस्थान की धड़कन के साथ – साथ हिंदी प्रदेश का स्पंदन है।परिचर्चा में परिषद् के उपाध्यक्ष डॉ सत्यप्रकाश तिवारी, सदीनामा के संपादक जितेंद्र जितांशु, प्रसिद्ध कहानी लेखक कुशेश्वरजी, सेराज खान बातिश, प्रो0 शुभ्रा उपाध्याय,शहर के प्रसिद्ध ग़ज़लकार ज्ञान प्रकाश पांडेय,श्रीमोहन तिवारी, अनिल उपाध्याय,सर्वेश राय,कवि रमाकांत सिन्हा, कवि रामनारायण झा,स्कॉटिश चर्च कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ बीरेंद्र सिंह,उमेश पांडेय,आनंद प्रकाशन के नीलू त्रिपाठी,प्रेसिडेंसी विवि से गोपाल, अनूप, अंजली, शनि,बंगबासी कॉलेज से प्रियंका, सुलेखा,ज्योति,श्रीकांत,साहिल,कोलकाता विवि से राजकुमार गुप्ता ,डॉ कमल आदि ने भाग लिया।
फाइलों में आज भी जिंदा है राम पथ विकास योजना

संस्कृति विभाग के बजट में आवंटित है राशिएक हजार रुपये का टोकन बजट शामिलदो सालों से दिया जा रहा है टोकन बजट
योजना के तहत काफी काम हुआ हैराम वन गमन पथ विकास योजना के तहत संस्कृति विभाग को शोध और सर्वेक्षण का काम करना था, वह काम काफी पहले पूरा करके रिपोर्ट सरकार को दे दी गई है। वैसे योजना के तहत काफी काम हुआ है। पर्यटन विभाग ने इसके तहत चित्रकूट, मैहर, उज्जैन, अमरकंटक जैसे कई स्थानों पर काफी काम किया है। संस्कृति विभाग ने टोकन बजट का प्रावधान इसलिए किया गया है कि कभी कई और शोध कार्य होना है तो किया जा सकेगा। -मनोज श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव, संस्कृति विभाग, मप्र शासन




