Tuesday, October 6, 2026
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जब बच्चा हो जाये जिद्दी

बड़ो को देखकर भी उन्हें नज़रअंदाज़ करते हुए आगे निकल जाना, किसी की मदद न करना, बातचीत में असभ्य भाषा का इस्तेमाल और दूसरों की असुविधा का खयाल न रखना, आजकल कुछ बच्चों या टीनएजर्स में अकसर ऐसी आदतें नज़र आती हैं। यह देखकर आपको भी बहुत बुरा लगता होगा लेकिन खास उम्र के बाद उनके व्यवहार में बदलाव लाना मुश्किल है। अगर आप प्ले स्कूल जाने वाले नन्हे बच्चे की माँ हैं और भविष्य में उसे ऐसी आदतों से बचाना चाहती हैं तो उसकी परवरिश के प्रति सचेत रहें ताकि उसके व्यक्तित्व में अच्छे संस्कारों के बीज विकसित हों।

घर है पहला स्कूल
आमतौर पर दो-ढाई साल की उम्र में बच्चे बड़ों के निर्देशों को समझने लगते हैं और उनमें अच्छी आदतें विकसित करने के लिए इसी उम्र से अभिभावक को सचेत हो जाना चाहिए। भाई-बहनों या दोस्तों के साथ छीना-झपटी और मारपीट जैसी आदतों को ज्य़ादातर पेरेंट्स बाल सुलभ हरकतें समझकर अनदेखा कर देते हैं पर बाद में उन्हें बदलना मुश्किल हो जाता है। इस संबंध में सर गंगाराम हॉस्पिटल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ.आरती आनंद कहती हैं, ‘यही वह उम्र है, जब बच्चों को शेयरिंग सिखाने की ज़रूरत होती है।

साझा करना सिखायें
अगर आपके घर में एक से ज्य़ादा बच्चे हों तो उनके लिए अलग-अलग चीज़ें लाने के बजाय चॉकलेट या वेफर्स का एक बड़ा पैकेट लेकर आएं। फिर बड़े बच्चे को पैकेट सौंपते हुए उससे कहें कि इसे तुम सबके साथ शेयर करोगे। इससे उसमें साझा करने के साथ जि़म्मेदारी की भी भावना विकसित होगी। अगर घर में एक ही बच्चा हो तो उसे दोस्तों के साथ शेयरिंग सिखाना बहुत ज़रूरी है। छुट्टियों में आप उसे अपने वैसे दोस्तों या रिश्तेदारों के घर लेकर जाएं, जहाँ उसके हमउम्र बच्चे हों। कभी-कभी अभिभावक को जानबूझकर उनसे कुछ चीज़ें माँगनी चाहिए ताकि उनमें साझा करने की आदत बनी रहे।

मैदान में अनुशासन
रोज़ाना शाम को बच्चों को अपने साथ पार्क जैसे किसी सार्वजनिक स्थल पर ज़रूर ले जाएं। उनके समाजीकरण के लिए यह बहुत ज़रूरी है। वहां अगर वह किसी दोस्त को धक्का देकर गिराने या उसके साथ मारपीट जैसी हरकतें करे तो इसे बच्चे की मासूम शरारत समझकर इग्नोर न करें, बल्कि उसे प्यार से समझाएं कि अगर कोई तुम्हारे साथ भी ऐसा करे तो तुम्हें कैसा लगेगा? इससे बच्चों में इम्पैथी यानी दूसरों की तकलीफ समझने की भावना विकसित होगी। पार्क में कई बार बच्चे झूले पर सबसे पहले बैठने के लिए मचलने लगते हैं। ऐसे में आप उन्हें अपनी बारी का इन्तज़ार करना सिखाएं। साथ ही बच्चों को यह बताना भी बहुत ज़रूरी है कि सभी को खेलने का समान अवसर मिलना चाहिए। इस तरह खेल-खेल में बच्चे अनुशासन के नियम भी सीख जाएंगे।

सिखाएं गुस्से को नियंत्रित करना
छोटी-छोटी बातों के लिए बच्चों का रूठना या जि़द करना स्वाभाविक है। उनके ऐसे किसी व्यवहार पर ओवर रिएक्ट करने के बजाय धीरे-धीरे उन्हें यह समझाना बहुत ज़रूरी है कि तुम्हारी हर बात नहीं मानी जाएगी। कई बार बच्चे गुस्से में तोडफ़ोड़ या मारपीट जैसे हिंसक व्यवहार करने लगते हैं। अगर कभी आपका बच्चा रो-चिल्लाकर किसी चीज़ के लिए जि़द करे तो उस वक्त उसकी कोई भी माँग पूरी न करें। इससे उस तक यह गलत संदेश जाएगा कि जि़द करके मम्मी-पापा से अपनी हर बात मनवाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में पहले उससे शांत रहने को कहें। फिर जब वह शालीनतापूर्वक आपके सामने अपनी कोई माँग रखता है तभी उसकी बात मानें।
बड़ों का सम्मान
बच्चों की शरारतें और प्यारी-प्यारी बातें सभी को अच्छी लगती हैं पर कई बार बातचीत के दौरान वे अपशब्दों का भी प्रयोग करते हैं। किसी बात पर नाराज़ होकर बड़ों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं। ज्य़ादातर परिवारों में लोग बच्चों को मना करने के बजाय उनकी ऐसी हरकतों पर हंसते हैं। इससे उन्हें ऐसा लगता है कि मेरा यह व्यवहार लोगों को अच्छा लगता है। इसलिए जब भी आपका बच्चा कोई ऐसी हरकत करे तो उसे रोकना बहुत ज़रूरी है। अगर बच्चों के दादा-दादी साथ रहते हैं तो अभिभावकों की यह जि़म्मेदारी बनती है कि वे इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे भी उनके प्रति संवेदनशील रवैया अपनाएं। बुज़ुर्गों की मदद करना और उनकी बातें ध्यान से सुनना जैसी आदतें बच्चों में छोटी उम्र से ही विकसित होनी चाहिए।

सिखाएं विनम्रता का पाठ
केवल परिवार के साथ ही नहीं बल्कि आसपास के उन सभी लोगों के प्रति विनम्र व्यवहार अपनाना चाहिए, जो किसी न किसी भी रूप में हमारे मददगार होते हैं। मसलन घरेलू सहायक, ड्राइवर, सफाई कर्मचारी और सिक्युरिटी गार्ड आदि। बच्चे को समझाएं कि ये सभी लोग हमारी मदद करते हैं, इसलिए हमें इनके साथ प्यार से पेश आना चाहिए। उसमें ऐसी आदत विकसित करें कि वह ऐसे लोगों के लिए अंकल-आंटी या भैया-दीदी जैसे सम्मान सूचक सम्बोधनों का प्रयोग करे। अगर आप रोज़मर्रा के सामान खरीदने बाज़ार जाती हैं तो अपने बच्चे को भी अपने साथ लेकर जाएं। उसे सिखाएं कि अगर रास्ते में कोई परिचित अंकल-आंटी मिलें तो उन्हें नमस्ते ज़रूर करना चाहिए। इससे उसे सामाजिक व्यवहार सीखने में मदद मिलेगी।

जलवायु परिवर्तन से देश में 280 प्रजातियों के जीव व पौधे विलुप्त

‘मुझे प्रकृति के अतिरिक्त किसी प्रेरणा की आवश्यकता नहीं है। उसने मुझे कभी हारने नहीं दिया। किसी प्रकार की गंदगी फैलाना प्रकृति के साथ की जाने वाली हिंसा का ही एक रूप है।’ करीब 100 साल पहले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कही यह बातें अब सच साबित हो रही हैं। प्रकृति के प्रति क्रूरता का ही परिणाम है कि आज देश में 148 प्रजाति के जीव व 132 प्रजाति के पौधे विलुप्त हो गए हैं या विलुप्त होने की कगार पर हैं। इनमें कुछ इतने महत्वपूर्ण पौधे हैं कि उनका इस्तेमाल औषधि बनाने के लिए हो रहा था। यह जानकारी पर्यावरणविद व नोएडा के सेक्टर 132 में रहने वाले रंजन तोमर की ओर से लगाई गई आरटीआइ के तहत केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले जैव विविधता प्राधिकरण से मिली है।
जैव विविधता प्राधिकरण ने ऐसे सभी पौधों व जीवों को संरक्षित श्रेणी में डालते हुए सूची को वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया है। साथ ही केंद्रीय जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से सभी प्रदेश सरकारों को बचे हुए जीवों व पशुओं को संरक्षित करने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश भी दे दिए गए हैं। पर्यावरणविद रंजन तोमर का कहना है कि हरियाली का दायरा घटने से जलवायु परिवर्तन हुआ। 280 प्रजाति में तमाम ऐसे जीव व पौधे थे, जो पर्यावरण को संतुलित रखने में मददगार थे। उन्होंने कहा कि संभवत: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे समझा है। इसी कारण वह स्वच्छता पर लगातार जोर दे रहे हैं। हम गांधीजी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं। अगर हम स्वच्छता का संकल्प लेकर विभिन्न जीव व पौधों को विलुप्त होने से बचा सकने में योगदान करें तो यही गांधीजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

सरकार ने स्थापित किए रिसर्च सेंटर
केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ महेश शर्मा के अनुसार विलुप्त हो रही प्रजातियों को बचाने के लिए केंद्र सरकार बेहद गंभीर है। हम लोग मिशन बनाकर इसे रोकने में लगे हैं। जैसे सेव टाइगर नाम से अभियान चला रहे हैं। विभिन्न रिसर्च सेंटरों को स्थापित किया जा रहा है। इससे विलुप्त होते पौधों व जीवों को बचाने पर काम हो रहा है। प्रधानमंत्री स्वच्छता पर आंदोलन चला रहे हैं, जिससे वायुमंडल को स्वच्छ किया जा सके व जीव तथा पौधों को विलुप्त होने से बचाया जा सके। पौधे व जीव विलुप्त होने के मामले में तमिलनाडु की स्थिति सबसे खराब है। वहां सबसे अधिक 23 पौधों की प्रजाति विलुप्त हो चुकी है। 6 प्रजाति के पशु भी विलुप्त हो चुके हैं। इसमें पेंथरा टाइगर भी है।

(साभार – दैनिक जागरण)

मोहम्मद मुश्ताक अहमद बने हाकी इंडिया के नये अध्यक्ष

नयी दिल्ली : मोहम्मद मुश्ताक अहमद को हाकी इंडिया के आठवें सम्मेलन और चुनाव के दौरान हाकी इंडिया का नया अध्यक्ष चुना गया । हाकी इंडिया के पूर्व महासचिव अहमद निवृतमान अध्यक्ष राजिंदर सिंह की जगह लेंगे । उनका चुनाव सर्वसम्मति से हुआ है ।
मणिपुर के ज्ञानेंद्रो निंगोमबाम सीनियर उपाध्यक्ष होंगे जबकि जम्मू कश्मीर हाकी की असिमा अली और हाकी झारखंड के भोलानाथ सिंह उपाध्यक्ष होंगे । हाकी जम्मू कश्मीर के राजिंदर सिंह ने मरियम्मा कोशि के रिटायर होने के बाद पद संभाला था । उन्हें नया महासचिव और हाकी असम के तपन कुमार दास को कोषाध्यक्ष चुना गया है । भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान असुंथा लाकड़ा और छत्तीसगढ हाकी के फिरोज अंसारी संयुक्त सचिव होंगे। हाकी राजस्थान की आरती सिंह, हाकी तमिलनाडु की एम रेणुका लक्ष्मी और एसवीएस सुब्रमण्यम गुप्ता कार्यकारी सदस्य चुने गए । आर पी सिंह और जायदीप कौर खिलाड़ियों के प्रतिनिधि बने रहेंगे ।

आईसीसी महिला विश्व टी20 में भारत की अगुवाई करेंगी हरमनप्रीत

नयी दिल्ली : आक्रामक बल्लेबाज हरमनप्रीत कौर नौ से 24 नवंबर के बीच वेस्टइंडीज में होने वाले छठे आईसीसी महिला विश्व ट्वेंटी20 में भारत की 15 सदस्यीय टीम की अगुवाई करेगी। अखिल भारतीय महिला चयन समिति ने टीम का चयन किया जिसमें स्मृति मंदाना को उप कप्तान बनाया गया है। स्मृति इस साल शानदार फार्म में हैं। मिताली राज, वेदा कृष्णमूर्ति, दीप्ति शर्मा, जेमिमा रोड्रिग्स, अनुजा पाटिल, एकता बिष्ट और पूनम यादव आदि को भी टीम में जगह मिली है। भारत को दस टीमों की इस प्रतियोगिता में आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, पाकिस्तान और आयरलैंड के साथ ग्रुप बी में रखा गया है।
भारत अपने अभियान की शुरुआत नौ नवंबर को न्यूजीर्लैड के खिलाफ गुयाना में करेगा। इसके बाद वह चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान (11 नवंबर), आयरलैंड (15 नवंबर) और आस्ट्रेलिया (17 नवंबर) से मैच खेलेगा।
भारतीय महिला टीम इस प्रकार है : हरमनप्रीत कौर (कप्तान), स्मृति मंदाना (उप-कप्तान), मिताली राज, जेमिमा रॉड्रिग्स, वेदा कृष्णमूर्ति, दीप्ति शर्मा, तान्या भाटिया (विकेटकीपर), पूनम यादव, राधा यादव, अनुजा पाटिल, एकता बिष्ट, डी हेमलता, मानसी जोशी, पूजा वस्त्राकर, अरुंधती रेड्डी।

नहीं रहे कमेंटेटर जसदेव सिंह

नयी दिल्ली : प्रसिद्ध खेल कमेंटेटर जसदेव सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 87 वर्ष के थे। दूरदर्शन और रेडियो पर जसदेव सिंह की कमेंट्री के लाखों प्रशंसक रहे हैं। जसदेव सिंह ने अपनी जानदार आवाज से करोड़ों लोगों को सालों-साल मैच का हाल सुनाया। 70 और 80 के दशक में जसदेव सिंह खेल प्रेमियों की जानी पहचानी आवाज थी।
जसदेव सिंह के निधन पर खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ समेत कई हस्तियों ने शोक जताया। राठौड़ ने ट्वीट करते हुए लिखा, ‘आकाशवाणी और दूरदर्शन के बेहतरीन कमेंटेटर्स में से एक जसदेव सिंह का निधन हो गया है। उन्होंने ओलंपिक, एशियन गेम्स, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस समेत अनगिनत कार्यक्रमों में आवाज का जादू बिखेरा।
जसदेव सिंह ने करीब 6 एशियन गेम्स और इतने ही हॉकी वर्ल्ड कप में कमेंटरी की। जसदेव सिंह ने साल 1963 से लगातार 48 वर्षों तक गणतंत्र दिवस की कमेंटरी की। भारत सरकार ने साल 1985 में उन्हें पद्म श्री और साल 2008 में पद्म भूषण से नवाजा।

सुप्रीम कोर्ट ने दी सबरीमाला मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति

नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के हक मे एक और अहम फैसला सुनाते हुए केरल के सबरीमाला मंदिर के द्वार सभी महिलाओं के लिए खोल दिये हैं। अब इस मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश मिलेगा। कोर्ट ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर रोक का नियम रद करते हुए कहा है कि यह नियम महिलाओं के साथ भेदभाव है और उनके सम्मान व पूजा अर्चना के मौलिक अधिकार का हनन करता है। शारीरिक कारणों पर महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकना गलत है। केरल के सबरीमाला मंदिर मे 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। इसके पीछे मान्यता थी कि इस उम्र की महिलाओं को मासिक धर्म होता है और उस दौरान महिलाएं शुद्ध नहीं होतीं। मंदिर के भगवान अयैप्पा बृम्हचारी स्वरूप में हैं और इस उम्र की महिलाएं वहां नहीं जा सकतीं। इस रोक को सुप्रीम कोर्ट मे चुनौती दी गई थी।यह फैसला पांच न्यायाधीशों की संविधानपीठ ने चार- एक के बहुमत से सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर, आरएफ नारिमन, और डीवाई चंद्रचूड़ ने बहुमत से फैसला देते हुए रोक के नियम को असंवैधानिक ठहराया है।
हालांकि पीठ की पांचवी सदस्य न्यायाधीश इंदू मल्होत्रा ने असहमति जताते हुए रोक के नियम को सही ठहराया है। कहा है कि अयैप्पा भगवान के सबरीमाला मंदिर को एक अलग धार्मिक पंथ माना जाएगा और उसे संविधान के अनुच्छेद 26 में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में संरक्षण मिला हुआ है। वह अपने नियम लागू कर सकता है।मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने स्वयं और जस्टिस खानविल्कर की ओर से दिए गए फैसले में पुराने समय से महिलाओं के साथ चले आ रहे भेदभाव का जिक्र करते हुए कहा है कि उनके प्रति दोहरा मानदंड अपनाया जाता है। एक तरफ तो उन्हें देवी माना जाता है और दूसरी तरफ धार्मिक आस्था के मामले में उन पर कठोर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इस घिसीपिटी सोच को त्यागना होगा। समाज को महिलाओं से ही ज्यादा पवित्रता और शुद्धता की चाहत रखने की पुरुषवादी धारणा से बराबरी के सिद्धांत की ओर स्थानांतरित होना होगा जो कि महिलाओं को किसी भी तरह से पुरुष से कमतर नहीं समझता। धर्म में पुरुषवादी धारणा को किसी की धार्मिक आस्था और पूजा के अधिकार के ऊपर मान्यता नहीं दी जा सकती। शारीरिक और जैविक बदलाव की आड़ में महिलाओं के दमन को सही नहीं ठहराया जा सकता। जैविक बदलाव के आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव करने वाला कोई भी नियम संवैधानिक नहीं हो सकता।

राजकपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर का निधन

मुम्बई : दिवंगत अभिनेता राज कपूर की पत्नी कृष्णा राज कपूर का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 87 वर्ष की थी। उनके बेटे रणधीर कपूर ने बताया, “ दिल का दौरा पड़ने से मेरी मां का निधन हो गया। वृद्धावस्था भी इसमें एक बड़ा कारण रहा। उनके निधन से हम बहुत दुखी हैं।’ राज कपूर और कृष्णा मल्होत्रा की शादी 1946 में हुई थी। उनकी पांच संतानों में दो बेटियां – रितु और रीमा हैं, जबकि तीन बेटे रणधीर, ऋषि और राजीव हैं। कृष्णा राज कपूर मशहूर अभिनेता राजेंद्र नाथ, प्रेम नाथ और नरेंद्र नाथ की बहन थीं। उनकी बहन उमा अभिनेता प्रेम चोपड़ा की पत्नी हैं। रिद्धीमा कपूर साहनी ने इंस्टाग्राम पर अपनी दादी को श्रद्धांजलि दी। साहनी ने अपनी दादी की तस्वीर लगाते हुए लिखा, “ मैं आपसे प्यार करती हूं और हमेशा ही करती रहूंगी। भगवान आपकी आत्मा को शांति दे, दादी।’

वाराणसी का वह घर, जहाँ रहे देश के पूर्व प्रधानमंत्री शास्त्री जी

घर की रसोई में मिट्टी का चूल्हा हो और बेडरूम में पटुआ की सुतली से बिनी खाट तो एक बार आंखों पर यकीन नहीं होगा कि यह जगह देश के प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री की है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि अब मंत्री-विधायक तो दूर सत्ताधारी नेताओं के करीबी रिश्तेदार और कारिंदे भी मौका पाकर चंद दिनों में ही ऊंची हवेलियों के मालिक और कंगाल से करोड़पति बन बैठते हैं। पांच साल तक प्रधानमंत्री रहे शास्त्री जी का घर आज भी पुराना वाराणसी के रामनगर में उस दौर की स्वच्छ और ईमानदार राजनीति की गवाही दे रहा है।

संस्कृति मंत्रालय ने देश के दूसरे प्रधानमंत्री के मिट्टी के घर को म्यूजियम के रूप में तब्दील कर दिया है। बीते हफ्ते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल राम नाइक ने इसका उद्घाटन किया था। जय जवान, जय किसान का नारा देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री के पैतृक आवास पर तैयार स्मृति भवन उनके जीवन का परिचय देगा। संग्रहालय के पहले कमरे में तैयार वॉर रूम में चीन और पाकिस्तान के युद्ध की दुर्लभ तस्वीरें लगाई गई हैं। शास्त्रीजी के रसोईघर और बैठक को भी उसी समय का लुक दिया गया है।

इसमें दो अक्टूबर 1904 को पूर्व पीएम के जन्म से लेकर 12 जनवरी 1966 को नई दिल्ली में विजय घाट पर अंत्येष्टि तक के बारे में जानकारी दी गई है। पूर्व पीएम की स्मृतियों से जुड़े 150 से अधिक चित्र लगाए गए हैं। काशी के लाल शास्त्री जी की दो अक्टूबर को 14वीं जयंती है। तो आइए, आज जानते हैं सादगी कर्मठता और आदर्श राजनीति के उस चेहरे के बारे में, जो इस दौर की सियासत के लिए सीख भी है और आइना भी।

शास्त्री जी! अब तो अपना मकान बनवा लीजिए

शास्त्री जी के घर की पिछले साल की तस्वीर – फोटो : अमर उजाला
काशी नरेश के किले से महज डेढ़ सौ मीटर के फासले पर घुमावदार गली के दूसरे मोड़ पर महज सवा विस्वा जमीन पर पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कमरे में अभी वह लालटेन सहेज कर रखी गई है, जिसकी रोशनी में उन्होंने पढ़ाई की थी। तीन चूल्हे भी उन दिनों के संघर्ष की आंच दबाए वहीं गड़े हैं, जहां उनकी मां राम दुलारी देवी बेटे के लिए उम्मीदों की भाप में खुद तपा करती थीं। पड़ोस में रहने वाले शास्त्री जी के फुफेरे भाई श्याम मोहन उन दिनों के उनके संघर्ष और सत्ता शीर्ष पर पहुंचने के बाद की ईमानदारी को याद कर भावुक हो उठे। आंखें भर आईं। 1965 के उस दिन की यादों में खो गए जिस रोज पीएम के रूप में शास्त्री जी घर आए थे। वो बताते हैं कि तब उनकी उम्र 14 साल की थी। दोपहर का वक्त था। सुबह से ही पुलिस का पहरा रामनगर में लग गया था। भैया की कार के आगे पीछे दर्जनों गाड़ियां थीं। चौक पर काफिला रुका और भैया अंगरक्षकों को रोक कर सीधे सबसे पहले किले में काशीनरेश डॉ. विभूति नारायण सिंह से मिलने पहुंचे। वहां से पैदल ही गली से होकर घर आए थे। उनके चाचा काली प्रसाद और किशोरी लाल ने दरवाजे पर अगवानी की थी। घर आते ही उन्होंने सत्यनारायण भगवान की कथा सुनी।

पंडित जी प्रसाद देने बढ़े तो जांच के लिए सुरक्षा कर्मियों ने लपक लिया। भैया मुस्कुराते हुए बोले- यह मेरा घर है यहां चिंता की कोई बात नहीं। उन्होंने प्रसाद माथे लगा लिया था। उस दिन भैया को देखने के लिए समूचा रामनगर ही नहीं, बनारस और मिर्जापुर से लेकर मुगलसराय तक उमड़ पड़ा था। भैया ने अंगरक्षकों को दूर खड़ा करा दिया। सबका हाल पूछते मिलते-जुलते रहे। तभी पड़ोस के राजनारायण लाल मुलाकात के लिए आ गए। बोले- शास्त्री जी! अब तो अपना मकान बनवा लीजिए। उन्होंने जो जवाब दिया उसे सुनकर वो सहम गए। शास्त्री जी का कहना था कि मेरा तो अभी बहुत अच्छा है। मेरे देश की बहुतायत जनता के पास तो झोपड़ियां ही हैं। चिंता है कि पहले उनके मकान बन जाएं फिर अपने मकान के बारे में सोचूंगा। उस दिन भैया ढाई घंटे घर में रहे। फिर कभी नहीं आ सके। 11 जनवरी 1969 को हम लोग हिल गए, जब उनके हमेशा के लिए इस दुनिया से चले जाने की खबर आई।
 शास्त्री संग्रहालय में आधुनिक तकनीक और पुरातन का संगम
पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री स्मृति भवन संग्रहालय में कुल 14 कमरे हैं। इन कमरों में आधुनिक तकनीक और पुरातन का संगम दिखाया गया है। उनका जीवन परिचय महत्वपूर्ण तिथियों के साथ एक कमरे में लगाया गया है। इसमें दो अक्टूबर 1904 को पूर्व पीएम के जन्म से लेकर 12 जनवरी 1966 को नई दिल्ली में विजय घाट पर अंत्येष्टि तक के बारे में जानकारी दी गई है। पूर्व पीएम की स्मृतियों से जुड़ी 150 से अधिक चित्र लगाए गए हैं। एक कमरे में उनके पिता शारदा प्रसाद और माता रामदुलारी देवी का ब्लैक एंड व्हाइट फोटो लगाई गई है। इसमें पूर्व पीएम के वंश वृक्ष का जिक्र किया गया है। एक कमरे में खटिया पर सफेद चादर और तकिया, बल्ब जलता हुआ लालटेन, बेना रखा गया है, जिसमें पूर्व पीएम विश्राम करते थे। इसी कमरे में छत पर जाने के लिए सीढ़ी बनाई गई है। एक कमरे में उनका बैठका था। जहां बैठकर बातचीत करते थे। उनके भाषण और कहे वाक्य को स्लोगन बनाकर लगाया गया है। ललिता शास्त्री की प्रतिमा के पास जवान और किसान को दिखाया गया है।
रसोई घर में सिल बट्टा, ओखली, मूसर, पत्थर की चक्की, चौका, बेलन, मिट्टी का चूल्हा, केतली, मथनी, गिलास, लोटा, थाली, पानी भरने का पीतल का गगरा सहित आदि सामान रखे गए हैं। खटिया, मचिया सहित कई जरूरी सामान रखे हैं। दो कमरों के बीच में आंगननुमा जगह पर जय जवान और जय किसान के नारे बंदूक और हल के जरिए दिखा गया है।

स्मृति भवन में लाल की स्वाभिमानी ललिता की कहानी

स्मृति भवन में लाल की स्वाभिमानी ललिता की कहानी दर्शाई गई है। बच्चों के आग्रह पर पूर्व पीएम ने बतौर प्रधानमंत्री एक फिएट बैंक लोन से खरीदा था। किस्तों की अदायगी के पूर्व वे गोलोकवासी हो गए। बैंक अधिकारियों ने ललिता शास्त्री से किस्त माफ करने का आग्रह किया लेकिन उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया। भारत के लाल की ललिता ने सच्ची अर्धांगिनी के रूप में न केवल लौकिक जीवन में उनका ख्याल रखा बल्कि पारलौकिक जीवन में शास्त्री जी के स्वाभिमानी आत्मा पर आंच नहीं आने दी। अपने पारिवारिक पेंशन से कार के बची किस्तों का भुगतान किया।
(साभार – अमर उजाला)

महात्मा गांधी के दिल की धड़कनें सुनायेगा यह सँग्रहालय

2 अक्टूबर यानि महात्मा गांधी के जन्मदिवस के अवसर पर दिल्ली का नेशनल गांधी म्यूजियम  में गांधी जी के बारे में जानने वाले लोगों को गांधी जी की कृत्रिम दिल की धड़कने भी सुनने को मिलेंगी। इन धड़कनों को गांधी जी की विभिन्न ईसीजी डिटेल से तैयार किया गया है।
ईसीजी डिटेल से बनाई धड़कन
गांधी जी की कृत्रिम दिल की धड़कन को उनकी अलग-अलग अवस्थाओं में ईसीजी डिटेल के आधार पर बनाया गया है। अपने आप में इस तरह का प्रयोग पहली बार किया गया है।
खास डिजिटल किट भी होगी 
महात्मा गांधी के जन्मदिवस के मौके पर नैशनल म्यूजियम एक खास डिजिटल किट भी लाया है जिसे कोई भी 300 रुपए में खरीद सकेगा। इस किट में एक पेनड्राइव दी जाएगी जिसमें 20 गांधी जी के द्वारा और 10 उनपर लिखी गई किताबें शामिल हैं। इसके अलावा इसमें 100 तस्वीरें और महात्मा गांधी की असली आवाज भी हैं। इसमें महात्मा गांधी के पसंदीदा भजन का संग्रह भी मिलेगा।
आजादी से जुड़ी प्रमुख फुटेज है पेन ड्राइव में
पेन ड्राइव में महात्मा गांधी से जुड़ी विडियो और फोटो के अलावा भारत छोड़ों अंदोलन के समय जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस और महात्मा गांधी के भाषण भी शामिल है। इसके अलावा 1931 में महात्मा गांधी के लंदन में दिए गए भाषण को भी इसमें शामिल किया गया है।

पता- राजघाट, दिल्ली
समय – सुबह 9.30 बजे से शाम 5.30 बजे तक

फर्जी खबरों पर लगेगी रोक, गूगल, फेसबुक, ट्विटर करेंगे चुनाव आयोग की मदद

नयी दिल्ली : मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने बताया है कि उन्हें इंटरनेट पर बादशाहत रखने वाली गूगल और सोशल मीडिया मुगल ट्विटर और फेसबुक (एफबी) ने आश्वासन दिया है कि वह चुनाव प्रचार के दौरान अपने प्लेटफार्म से चुनाव को प्रभावित नहीं होने देंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त रावत ने रविवार को बताया कि इन कंपनियों ने कर्नाटक चुनाव के दौरान रोकथाम की अपनी तकनीकों का परीक्षण किया था। यह छोटा सा पायलट प्रोजेक्ट एक शुरुआत थी। लोकसभा चुनाव से पहले चार राज्यों (मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) में होने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान अपेक्षाकृत बड़े पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत होगी। इन राज्यों में विधानसभा चुनाव इसी साल के अंत में होने हैं।
कम्पनी प्रमुखों से चुनावों में मदद के लिए पूछताछ
रावत ने बताया कि वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त उमेश सिन्हा के नेतृत्व वाली कमेटी ने गूगल, फेसबुक और ट्विटर के क्षेत्रीय और स्थानीय प्रमुखों को बुलाकर पूछा था कि वह भारतीय चुनावों की शुद्धता को बरकरार रखने के लिए क्या कर सकते हैं। वह नहीं चाहते कि फेक न्यूज और मतदाताओं को प्रभावित करने वाली सामग्री सोशल मीडिया के इन मंचों पर प्रसारित हो।
गड़बड़ सामग्री को नहीं होने देंगे प्रसारित
मुख्य चुनाव आयुक्त रावत ने बताया कि सभी कंपनियों ने चुनाव प्रचार अभियान के दौरान इंटरनेट और सोशल मीडिया मंचों पर मतदाताओं को भ्रमित या प्रभावित करने वाली विषय सामग्री को प्रसारित न होने देने के प्रति प्रतिबद्धता जताई है। विशेषकर मतदान से पहले के 48 घंटे अहम होते हैं जब मतदाता को बाहरी किसी व्यक्ति या सामग्री से प्रभावित हुए बगैर खुद से मंथन का समय मिलना चाहिए।
अपने आप आयोग के पास चला जाएगा खर्च का ब्‍योरा
गूगल का कहना है कि वह अपने यहां एक ऐसी प्रणाली स्थापित करेगा जिससे उनके मंचों या कंपनियों में किए गए अतिरिक्त खर्च का ब्योरा खुद ब खुद चुनाव आयोग के पास चला जाएगा। यानी लाइक्स खरीदने या एकाएक लाखों फालोवर्स बढ़ाने जैसे आरोपों को गहराई से समझा जा सकेगा।
धारा 126 में होंगे बदलाव
सिन्हा के अधीन कमेटी इस बात पर भी विचार करेगी कि जनप्रतिनिधि कानून, 1951 की धारा 126 में क्या संभावित बदलाव किए जा सकते हैं। इस धारा के तहत टेलीविजन या अन्य ऐसे उपकरण पर चुनाव क्षेत्र में मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव से संबंधित कोई विषय सामग्री प्रसारित करने पर रोक है।