Tuesday, October 6, 2026
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प्रलेस बेगूसराय और नीलांबर कोलकाता द्वारा कार्यक्रम ‘समाद’ का आयोजन

प्रलेस बेगूसराय एवं नीलांबर कोलकाता के संयुक्त तत्वावधान में हाल ही में चर्चित विप्लवी पुस्तकालय गोदरगावां,बेगूसराय में ‘गांधी की परिकल्पना का भारत’ विषय पर परिचर्चा एवं कविता पाठ का शानदार आयोजन किया गया।राजेंद्र राजन की अध्यक्षता में आयोजित परिचर्चा सत्र में प्रो. मणीन्द्र नाथ ठाकुर, प्रो. मनोज झा, प्रो. हितेंद्र पटेल और श्री अखिलेश प्रसाद सिंह ने वर्तमान समय की गांधी की विचारधारा के महत्व को रेखांकित किया। परिचर्चा सत्र का संचालन अनीश अंकुर ने किया। दूसरे सत्र में वरिष्ठ कवि आलोक धन्वा की अध्यक्षता में कविता पाठ का आयोजन किया गया।इसमें पूनम सिंह, यतीश कुमार, आनंद गुप्ता,रश्मि भारद्वाज, ऋतेश पांडेय, अरमान आनंद सिंह ,परितोष कुमार पीयूष ,विजय शर्मा और प्रभा देवी ने अपनी कविताओं का पाठ किया। संचालन रश्मि भारद्वाज ने किया।अंतिम सत्र में ममता पांडेय द्वारा निर्देशित नाटक ‘धुआँ-धुआँ रूह’ नाटक का मंचन किया गया। इसमें विशाल पांडेय और ऋतेश पांडेय ने अभिनय किया।इसके अलावा नीलांबर द्वारा तैयार कविता कोलाज की प्रस्तुति की गई, जिसमें ऋतेश पांडेय,स्मिता गोयल, ममता पांडेय,विजय शर्मा, पूनम सिंह,दीपक कुमार ठाकुर,विशाल पांडेय ने अष्टभुजा शुक्ल की कविताओं का कोलाज प्रस्तुत किया। इसके बाद नीलांबर द्वारा निर्मित नरेश सक्सेना की कविता ‘गिरना’ एवं मुक्तिबोध की कविता ‘भूल गलती’ पर वीडियो मोंताज दिखाया गया जिसमें क्रमशः स्मिता गोयल और ममता पांडेय ने कविताओं की आवृत्ति की है। कार्यक्रम के अंत में चंदन पांडेय की कहानी ‘जमीन अपनी तो थी’ का दृश्य श्रव्य माध्यम से पाठ किया गया, जिस पर आधारित दिखाई गई लघु फिल्म का निर्देशन ऋतेश पांडेय ने किया। कार्यक्रम के संयोजन में मनोज झा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में भारी संख्या में दर्शक और स्रोता कार्यक्रम स्थल पर मौजूद थे। यहाँ बता दें कि विप्लवी पुस्तकालय ने विगत वर्षों में अपने महत्वपूर्ण कार्यों के द्वारा देश भर में विशिष्ट पहचान बनाई है एवं अब इसने एक जन आन्दोलन का रूप ले लिया है।

प्लस साइज हैं, फैशनिस्ता बनिए बिन्दास

छरहरे शरीर वाली लड़कियों के लिए परिधान का चयन मुश्किल नहीं है। मुश्किल होती है प्लस साइज कही जाने वाली लड़कियों और महिलाओं के लिए। तो आइए जानते हैं कि प्लस साइज की महिलाएँ ऐसा क्या पहनें कि उन पर कपड़े अच्छे लगें और वे अलग दिखें –
जीन्स : अगर आपकी कमर मोटी और हिप्स हैवी हैं, तो आपके लिए लो टु मिड-वेस्ट जीन्स बेस्ट साबित होगी. इसमें आपकी कमर और हिप्स दोनों कम चौड़े नज़र आएंगे। अपने वॉर्डरोब में बूट-कट जीन्स और लो-वेस्ट जीन्स रखें। हैवी बॉडी के कारण यदि आप स्किनी जीन्स नहीं पहनना चाहतीं, तो स्ट्रेट लेग जीन्स ट्राई कर सकती हैं। स्किनी या स्लाउची जीन्स न पहनें। ये ख़ासकर स्लिम महिलाओं पर जंचती है.
टी-शर्ट : स्कूप नेक टी-शर्ट आपके लिए बेस्ट साबित होगी। इससे आपकी टमी (पेट) आसानी से छिप जाएगी। अगर आपका हिप पोर्शन हैवी है, तो आप रोल स्लीव टी-शर्ट भी ट्राई कर सकती हैं. इससे आपकी बॉडी बैलेंस्ड नज़र आएगी। प्लेन राउंड नेक टी-शर्ट न पहनें. ऐसी टी-शर्ट हैवी बॉडी वाली महिलाओं पर सूट नहीं करती।
बेल्ट : प्लस साइज़ महिलाओं के लिए स्किनी बेल्ट पहनें। इस तरह की बेल्ट आप शर्ट, जैकेट, टी-शर्ट आदि के साथ पहन सकती हैं। आप चौड़ी बेल्ट पहनने की भूल न करें। ये स़िर्फ पतली महिलाओं पर फबती है।

गाउन : प्लस साइज़ महिलाओं को डार्क सिंगल कलर का गाउन पहनना चाहिए। इसमें आप स्लिम नज़र आएंगी। जब भी आप गाउन पहनें, उसके साथ एम्बेलिश्ड क्लच या पर्स लें। गाउन और क्लच का कॉम्बिनेशन बहुत ख़ूबसूरत नज़र आता है। टाइट फिटिंग वाला गाउन न ख़रीदें. ये आप पर सूट नहीं होगा।

कुरती : एम्ब्रॉयडर्ड कुरती खरीदें, लेकिन पतली बॉर्डर वाली. ये आप पर ज़्यादा सूट होगी। प्रिंटेड कुरती भी आपके लिए एक अच्छा विकल्प है। प्रिंटेड कुरती का क्रेज़ कभी कम नहीं होता। शॉर्ट कुरती न पहनें. इसमें आप मोटी और हाइट में छोटी नज़र आ सकती हैं।


साड़ी : लाइट वेट या हल्की साड़ी पहनें, जैसे- जॉर्जेट, शिफॉन, क्रेप आदि. इसमें आप स्लिम नज़र आएंगी। गहरे रंग की साड़ी पहनें। गहरे रंग मोटापा छुपाने में मदद करते हैं। भारी काम वाली साड़ी न पहनें, इसमें आप ज़्यादा मोटी दिखेंगी।


लहंगा-चोली : कलीदार या फिश कट लहंगा ख़रीदें। लहंगे के लिए शिफॉन, जॉर्जेट या नेट फैब्रिक चुनें। ये आपको स्लिम लुक देगा। पारम्परिक चोली पहनें। नेक लाइन चौकोर रखें> ग्लैमरस लुक के लिए बैक नेक खुला रख सकती हैं। भारी दुपट्टा पहनने से बचें, वरना आप और भी मोटी नज़र आ सकती हैं। आपके लिए शिफॉन या नेट का दुपट्टा सही रहेगा।


ज़्यादातर प्लस साइज़ महिलाएं अपना मोटापा छुपाने के लिए या तो बहुत ढीले कपड़े पहनती हैं या बहुत टाइट। इससे मोटापा छुपता नहीं, बल्कि शरीर पर ध्यान ज़्यादा जाता है। अतः ऐसी महिलाओं को अच्छी फिटिंग वाले कपड़े पहनने चाहिए, जो उनके शरीर की कमियों को छुपा सकें। कफ्तान, एसिमेट्रिकल ड्रेस, अच्छी फिटिंग वाले कुर्ता-चूड़ीदार, एंपायर लाइन अनारकली, शिफॉन साड़ी आदि आपके लिए सबसे सही चुनाव हैं। ज़्यादातर प्लस साइज़ महिलाओं को लगता है कि काले या गहरे रंग के कपड़ों में वो दुबली नज़र आएंगी इसलिए वो हमेशा इसी तरह के कपड़े पहनती हैं, जबकि ऐसा करने की कोई ज़रूरत नहीं है। आप लाल, बरगंडी, इलेक्ट्रिक ब्लू जैसे ब्राइट कलर्स पहनकर आकर्षक बन सकती हैं. हां, बड़े प्रिंट वाले कपड़े न पहनें। आप पर छोटे प्रिंट वाले कपड़े ज़्यादा अच्छे लगेंगे।

बिना सोचे-समझे जो फैशन में है, उसे पहनने की ग़लती न करें। आप पर जो फबता यानि अच्छा लगता है और जो परिधान आरामदायक लगे, वही पहनें। मिनिमाइज़र, कॉर्सेट, वेस्ट बैंड, लो लेग निकर्स, हाई वेस्ट निकर्स जैसे स्मार्ट इनर वेयर्स मोटापा छुपाने में आपकी मदद कर सकते हैं, इसलिए इनका प्रयोग ज़रूर करें।
बैग, शूज़, ज्वेलरी आदि एक्सेसरीज़ भी आपके अच्छे साथी हो सकते हैं. यदि आप स्मार्ट एक्सेसरीज़ पहनती हैं, तो लोगों का ध्यान उन पर ज़्यादा और आपके मोटापे पर कम जाएगा। इसी तरह मेकअप व हेयरकट के साथ एक्सपेरिमेंट करके आप अलग दिख सकती हैं।

(साभार – मेरी सहेली)

‘अभी मेरे अंदर काफी ऊर्जा बची है, कुछ अलग करने की इच्छा’ : इंद्रा नूयी

न्यूयार्क : भारतीय मूल की पेप्सीको की मुख्य कार्यपालक अधिकारी इंद्रा नूयी ने कहा है कि उनके भीतर अभी काफी ‘ऊर्जा’ है और आने वाले समय में वह कुछ अलग करना तथा परिवार के साथ अधिक समय बिताना चाहती हैं। अमेरिका की पेय पदार्थ बनाने वाली इस कंपनी की बागडोर 12 साल संभाली। चेन्नई में जन्मीं नूयी जब 2006 में पेप्सीको की सीईओ बनी, उन्होंने कारपोरेट अमेरिका के लंबे समय से चल रहे बंधन को तोड़ा और लाखों युवा भारतीयों को अपने सपने को पूरा करने के लिये प्रेरित किया। पेप्सीको की 2018 की तीसरी तिमाही के वित्तीय परिणाम को लेकर आयोजित कान्फ्रेन्स काल में अपने समापन संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘आपको पता है सीईओ के रूप में 12 साल लंबा समय है और आज भी मेरे भीतर काफी ऊर्जा है। मैं अपने जीवन में कुछ अलग करना चाहती हूं। अपने परिवार के साथ अधिक समय व्यतीय करना चाहती हूं और पेप्सीको में अगली पीढ़ी को एक महान कंपनी की अगुवाई का मौका देना चाहती हूं।’ नूयी ने कहा कि पेप्सीको की अगुवाई करने का मौका और मौजूदा निदेशक मंडल, कार्यकारी और सहयोगी, शेयरधारकों एवं अन्य संबंधित पक्षों समेत बेहतरीन लोगों के साथ काम करना उनके लिये गर्व की बात रही है। वह 24 साल से कंपनी में काम करने के बाद पद से हट रही हैं। इस 24 साल के सेवा काल में वह 12 साल सीईओ रही। वह 2019 की शुरूआत तक कंपनी की चेयरपर्सन रहेंगी ताकि जिम्मेदारी का बिना किसी समस्या के हस्तांतरण हो सके। उल्लेखनीय है कि पेप्सीको के निदेशक मंडल ने इस साल अगस्त में नूयी के उत्तराधिकारी के रूप में रामोन लागुआर्ता का चयन किया। वह 62 साल की नूयी का स्थान लेंगे।

भारत की कीर्तना ने जीता आईबीएसएफ विश्व अंडर-16 स्नूकर खिताब

मुम्बई : भारत की कीर्तना पांडियन ने सेंट पीटर्सबर्ग में आईबीएसएफ विश्व अंडर-16 स्नूकर चैंपियनशिप में लड़कियों के वर्ग का खिताब जीता जो उनका पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब है। अंतरराष्ट्रीय बिलियर्ड्स एवं स्नूकर महासंघ (आईबीएसएफ) के अनुसार कीर्तना ने फाइनल में बेलारूस की अलबिना लेसचुक को 3-1 से पराजित किया। कीर्तना ने नाकआउट में जगह बनाने के बाद हमवतन मनस्विनी शेखर और रूस की एलिना कैरलिना को सीधे फ्रेम में 3-0 से शिकस्त दी और फिर सेमीफाइनल में मौजूदा चैंपियन और हमवतन अनुपमा रामचंद्रन को 3-1 हराया। लड़कों के वर्ग का खिताब बेल्जियम के बेन मार्टन्स ने जीता।

भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रमुख अर्थशास्त्री नियुक्त

नयी दिल्ली : भारतीय मूल की गीता गोपीनाथ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख अर्थशास्त्री नियुक्त की गईं। आईएमएफ की प्रबन्ध निदेशक क्रिस्टीन लगार्द ने इसका ऐलान किया। लगार्द ने कहा कि लीडरशिप में गोपीनाथ का रिकॉर्ड सर्वश्रेष्ठ है, उनका अकादमिक प्रदर्शन काफी अच्छा है। वे दुनिया की बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक हैं। गीता का जन्म भारत के मैसूर में हुआ। उन्होंने अपनी बैचलर ऑफ की डिग्री दिल्ली यूनिवर्सिटी, जबकि मास्टर ऑफ आर्ट्स की डिग्री दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और यूनिवर्सिटी और वॉशिंगटन से हासिल की। 2001 में प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के बाद उन्होंने शिकागो यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम शुरू किया। 2005 से वे हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय और आर्थिक मामलों की प्रोफेसर हैं।

देश के प्रधान न्यायाधीश बने रंजन गोगोई, इस पद पर पूर्वोत्तर के पहले व्यक्ति

नयी दिल्ली : न्यायिक प्रक्रिया और कार्यवाही के संदर्भ में एक सख्त न्यायाधीश के तौर पर पहचान रखने वाले न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने बुधवार को देश के 46वें प्रधान न्यायाधीश का पदभार संभाल लिया और वह पूर्वोत्तर से न्यायपालिका के इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाली पहली हस्ती हैं।
तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की कार्यशैली और मुकदमों के आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले न्यायाधीशों में शामिल रहे न्यायमूर्ति रंजन गोगोई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने बुधवार तीन अक्टूबर को राष्ट्रपति भवन में प्रधान न्यायाधीश पद की शपथ दिलायी। उन्होंने न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा का स्थान लिया है, जिनका कार्यकाल दो अक्टूबर को समाप्त हो गया।
असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी और लोकपाल कानून के तहत लोकपाल संस्था की स्थापना जैसे विषयों पर सख्त रूख अपनाने वाले न्यायमूर्ति गोगोई 17 नवंबर 2019 को सेवानिवृत्त होने तक करीब 13 महीने देश के प्रधान न्यायाधीश रहेंगे।
न्यायमूर्ति गोगोई तब सुर्खियों में आए थे जब निवर्तमान प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की कार्यशैली को लेकर 12 जनवरी को न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर के नेतृत्व में चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स की थी। इन चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति गोगोई भी शामिल थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेन्स में न्यायाधीशों ने तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश पर कई आरोप लगाये थे।

उन्होंने बाद में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कहा था, ‘‘स्वतंत्र न्यायाधीश और आवाज उठाने वाले पत्रकार लोकतंत्र की रक्षा की पहली पंक्ति हैं।’’ पिछले सप्ताह एक अन्य सार्वजनिक समरोह में उन्होंने कहा था कि देश के प्रधान न्यायाधीश के तौर पर उनकी प्राथमिकता मामलों के ‘‘बैकलॉग’’ से निपटना है।

केरल में फरवरी, 2011 में एक ट्रेन में हुये सनसनीखेज सौम्या बलात्कार और हत्या के मामले में शीर्ष अदालत के निर्णय से असहमति व्यक्त करते हुये पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने तब सोशल मीडिया पर तल्ख़ टिप्पणियां कीं थीं। इसे लेकर न्यायमूर्ति गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने 11 नवंबर, 2016 को पूर्व सहयोगी न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू को अवमानना का नोटिस जारी करके सनसनी पैदा कर दी थी। यह पहला मौका था जब शीर्ष अदालत ने अपने ही पूर्व सदस्य के खिलाफ स्वत: अवमानना का नोटिस जारी किया था। न्यायमूर्ति काटजू ने बाद में अपनी टिप्पणियों के लिये न्यायालय से क्षमा मांग ली थी जिसे स्वीकार करते हुये न्यायमूर्ति गोगोई की पीठ ने मामला खत्म कर दिया था।
इसी तरह, असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे के संबंध में मीडिया से बात करने पर इस काम से जुड़े अधिकारियों को आड़े हाथ लेते हुये न्यायमूर्ति गोगोई की पीठ ने उन्हें सख्त चेतावनी दी थी। शीर्ष अदालत के फैसले के बावजूद लोकपाल संस्था की स्थापना और लोकपाल की नियुक्ति में हो रहे विलंब को लेकर दायर अवमानना याचिका पर भी न्यायमूर्ति गोगोई की पीठ ने सख्त रूख अपना रखा है। न्यायमूर्ति गोगोई की 23 अप्रैल, 2012 को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर पदोन्नति हुई थी। असम के डिब्रूगढ़ में 18 नवंबर, 1954 को जन्मे रंजन गोगोई ने 1978 में वकालत शुरू की और 28 फरवरी, 2001 को उन्हें गौहाटी उच्च न्यायालय का स्थाई न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद नौ सितंबर, 2010 का उनका तबादला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में किया गया और 12 फरवरी, 2011 को उन्हें इसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के पुत्र न्यायमूर्ति गोगोई ने असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी, सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतों के गठन, राजीव गांधी हत्याकांड मामले के दोषियों को उम्र कैद की सजा से छूट तथा लोकपाल जैसे महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं।

मनायें नवरात्रि का त्योहार, चटपटे स्वाद के साथ

चटपटी साबूदाना चाट

सामग्री : 200 ग्राम साबूदाना, 1/2 प्याला मूंगफली दाने, 3 बड़े आलू, 150 ग्राम पनीर, 2 हरी मिर्च, 1/3 छोटा चम्मच नमक, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पावडर, 1/2 छोटा चम्मच काली मिर्च पावडर, 1/2 छोटा चम्मच जीरा, 3 बड़े चम्मच तेल।
विधि : चाट बनाने से आधा घंटे पहले साबूदाना को पानी में भिगो दें। मूंगफली दाने साफ करके उन्हें तल कर रख लें। आलू छीलकर टुकड़े कर लें। पनीर के भी छोटे टुकड़े कर लें। आलू-पनीर दोनों को हल्का-हल्का तल लें। एक कड़ाही में तेल गरम करके इसमें जीरे का छौंक लगा दें। जीरा भून जाने पर साबूदाना डालें। धीमी आंच पर इसे थोड़ी देर भूनते रहें। अब भुने हुए साबूदाने में तले हुए आलू, पनीर व तले हुए मूंगफली दाने डालें। अब नमक, मिर्च व बारीक कटी हरी मिर्च डाल दें और अच्छी तरह से हिलाएं। आंच बंद कर दें और ऊपर से हरा धनिया बुरका कर नींबू के साथ साबूदाना चाट पेश करें।

साबूदाना-पनीर के चटपटे बड़े
सामग्री : 150 ग्राम पनीर, 1/2 कप बारीक साबूदाना, 1 छोटा चम्मच कुट्टू का आटा, 1 बड़ा चम्मच काजू, 2 साबुत लाल मिर्च, 2-3 हरी मिर्च, थोड़ा सा हरा धनिया, सैंधा नमक स्वादानुसार, तलने के लिए तेल।
विधि : साबूदाने को एक कप पानी में 1 घंटे के लिए भिगो दें। हरा धनिया, हरी मिर्च बारीक काट लें। लाल मिर्च, काजू के टुकड़े करें और पनीर मैश कर लें। भीगे साबूदाने का पानी छानकर इसमें सामग्री अच्छी तरह मिलाएं। मिश्रण को मनचाहा आकार देकर तल लें। हरी चटनी या रायते के साथ गरमा-गरम सर्व करें।

नवरात्रि 2018: इस वजह से वेश्यालय की मिट्टी से बनती है मां दुर्गा की प्रतिमाएं

नवरात्रि की शुरुआत 10 अक्टूबर 2018 से होने को है। जहां एक तरफ उत्तर भारत में इस त्यौहार की धूम पूरे नौ दिन तक रहती है। वहीं दूसरी तरफ नवरात्रि में दक्षिण भारत में दुर्गा पूजा का त्योहार 6 दिन तक मनाया जाता है। दुर्गा पूजा पूर्णरुप से मां दुर्गा की आराधना का पर्व है।
दुर्गा पूजा में मां की अर्चना के लिए विशेष तौर पर वेश्यालय की मिट्टी की मूर्ति बनाकर उसकी पूजा की जाती है। यह मूर्ति उतनी ही पवित्र मानी जाती है, जितनी पवित्र मां दुर्गा स्वयं है। लेकिन क्या आप यह जानते है कि ऐसा क्यों किया जाता है?
पूरी दुनिया में वेश्यों को नीचा समझा जाता है, तो मां की प्रतिमा के निर्माण में अपवित्र स्थान की मिट्टी का प्रयोग क्यों किया जाता है?
दुर्गा पूजा में आराधना के लिए बनने वाली विशेष प्रतिमा बनाने में चार वस्तुओं का प्रयोग किया जाता है। पहली गंगा तट की मिट्टी, गौमूत्र, गोबर और वेश्यालय की मिट्टी या किसी ऐसे स्थान की मिट्टी जहां जाना निषेध हो।
ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में एक वेश्या मां दुर्गा की अनन्य भक्त थी उसे तिरस्कार से बचाने के लिए माँ ने स्वयं आदेश देकर, उसके आंगन की मिट्टी से अपनी मूर्ति स्थापित करवाने की परंपरा शुरू करवाई। साथ ही उसे वरदान दिया कि बिना वेश्यालय की मिट्टी के उपयोग के दुर्गा प्रतिमाओं को पूरा नहीं माना जाएगा।
बताया जाता है कि वेश्याओं को सामाजिक रूप से काट दिया जाता है, लेकिन इस त्योहार के सबसे मुख्य काम में उनकी ये बड़ी भूमिका उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने का एक जरिया है।

यौन उत्पीड़न के खिलाफ लड़ने के लिए डेनिस मुक्वेगे-नादिया मुराद को शांति का नोबेल पुरस्कार

नोबेल के शांति पुरस्कार विजेताओं के नाम की घोषणा कर दी गई है। नॉर्वे की कमेटी ने इस साल दो लोगों को इस पुरस्कार के लिए चुना है। जिनके नाम डेनिस मुक्वेगे और उनकी साथी नादिया मुराद हैं। नोबेल समिति की अध्यक्ष बेरिट रेइस एंडरसन ने यहां नामों की घोषणा करते हुए कहा कि इन दोनों को यौन हिंसा को युद्ध के हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के इनके प्रयासों के लिए चुना गया है। दोनों वैश्विक अभिशाप के खिलाफ संघर्ष के उदाहरण हैं। शांति का नोबेल पुरस्कार देने वाली समिति के अनुसार इस बार 216 व्यक्तियों और 115 संगठनों को नामित किया गया था।
प्रति वर्ष यह पुरस्कार उस शख्स या व्यक्ति को दिया जाता है जिसने विश्व शांति में अपना योगदान दिया हो या शांति के लिए कोशिश की हो। इस साल इस पुरस्कार के लिए कुल 331 लोग नामित किए गए थे। जो नामांकित व्यक्तियों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या है जिसे शांति का नोबेल पुरस्कार दिया जाता है उसके नाम को गुप्त रखा जाता है। नामांकित किए व्यक्तियों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन और पोप फ्रांसिस जैसी शख्सियतों का भी नाम शामिल था।
शांति पुरस्कार देने वाली संस्था ने ट्वीट कर कहा, 2018 नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डेनिस मुक्वेगे ने युद्ध के समय यौन हिंसा के पीड़ितों की रक्षा करने के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। उनकी साथी नादिया मुराद को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जिसने खुद और दूसरों के खिलाफ दुर्व्यवहार के बारे में जिक्र किया है।’
जानें कौन हैं डेनिस मुक्वेगे
डेनिस का जन्म 1 मार्च 1955 को पेंटोकोस्टल मंत्री के घर हुआ था। पेशे से गायनोकोलोजिस्ट 9 भाई-बहनों में वह तीसरे नंबर के हैं। उन्होंने बुकावू के पनजी अस्पताल में काफी काम किया है। यहाँ वह उन महिलाओं का इलाज करते थे जिनके साथ सुरक्षाबलों ने बलात्कार या सामूहिक दुष्कर्म किया होता था। दूसरे कांगों युद्ध के बाद उन्होंने ऐसी हजारों पीड़िताओं का इलाज किया है। वह 18 घंटे के दौरान लगभग 10 पीड़िताओं की सर्जरी किया करते थे। द ग्लोब एंड मॉल के अनुसार मुक्वेगे बलात्कार की चोटों को ठीक करने के लिए दुनिया के अग्रणी विशेषज्ञ हैं।
जानें कौन है नादिया मुराद
नादिया मुराद बसी ताहा का जन्म इराक के कोजो में 1993 में हुआ था। वह इराक की यजीदी मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। उन्हें आईएसआईएस ने अगवा करके तीन सालों तक बंधक बनाकर रखा था। मुराद नादिया अभियान की संस्थापक हैं। यह संस्था उन महिलाओं और बच्चों की मदद करती है जो नरसंहार, सामूहिक अत्याचार और मानव तस्करी के पीड़ित होते हैं। संस्था उन्हें अपनी जिंदगी दोबारा जीने और उन बुरी यादों से उबरने में मदद करती है।

पृथ्वी शॉ : 22 गज जमीन पर कौंधती बिजली

नयी दिल्ली : राजकोट के बड़े से स्टेडियम में हजारों दर्शकों के सामने वेस्टइंडीज की टीम के खिलाफ सफेद पोशाक में पहली बार टेस्ट क्रिकेट में अपने देश का प्रतिनिधित्व करने उतरा 18 बरस का एक सांवला सा लड़का आगे बढ़कर पहली गेंद खुद खेलने का हौसला दिखाए और मैदान के हर ओर बेहतरीन शॉट लगाकर शतक बनाए, तो लगता है कि भारतीय क्रिकेट को सचिन तेंदुलकर का उत्तराधिकारी मिल गया है।
पृथ्वी शॉ का नाम पिछले करीब आठ बरस से क्रिकेट के गलियारों में सुनाई दे रहा है। हालांकि उसने तीन बरस की उम्र में ही बल्ला थाम लिया था, जब उसका कद उन स्टंप्स से भी छोटा था, जिनके सामने खड़े होकर वह बल्लेबाजी किया करता था। आज यह आलम है कि उसके कद की तुलना दुनिया के बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ियों से की जा रही है।
पृथ्वी को करीब दस बरस पहले सचिन तेंदुलकर ने बल्लेबाजी करते हुए देखा था और आठ बरस के बच्चे का, गेंद को समझने और सही तकनीक के साथ पूरी ताकत से शॉट लगाने का अंदाज उन्हें इतना पसंद आया था कि उन्होंने उसी समय उसके भारत के लिए खेलने की भविष्यवाणी कर दी थी।
पृथ्वी के बेहतरीन खेल का ही चमत्कार है कि वह रिजवी स्प्रिंगफील्ड के लिए खेलता है, जो मुंबई की सर्वश्रेष्ठ स्कूल टीम है और वह शहर के प्रसिद्ध एमआईजी क्रिकेट क्लब में क्रिकेट की बारीकियां सीखता है। इस क्लब की प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सचिन तेंदुलकर के पुत्र अर्जुन को भी इसी क्लब में कोचिंग दी जा रही है।
शॉ को इस बात का एहसास है कि उनके खेल में कुछ ऐसी बात है कि लोग उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से करते हैं। हाल ही में साव ने एक अखबार के साथ मुलाकात में कहा, ‘‘लोग मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि उन्हें मुझमें सचिन तेंदुलकर का अक्स नजर आता है। वह क्रिकेट के भगवान से मेरी तुलना करते हैं। मेरे लिए यही ठीक है कि मैं इन बातों पर ध्यान दिए बिना अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान दूं।’’
पृथ्वी शॉ का परिवार मूलतः बिहार के गया का रहने वाला है। उनके पिता पंकज शॉ बहुत पहले मुंबई के नजदीक विरार में आकर बस गए और छोटे से पृथ्वी की क्रिकेट में दिलचस्पी देखकर मात्र तीन बरस की उम्र में विरार की क्रिकेट अकादमी में उनका दाखिला करा दिया। पृथ्वी शॉ बहुत छुटपन में अपने दोस्तों और पिता के साथ जेडब्ल्यू मैरिएट के नजदीक बीच पर क्रिकेट खेलते थे। बाद में पृथ्वी को एक कंपनी के रूप में प्रायोजक मिला तो परिवार मुंबई चला आया।
महज चार बरस की उम्र में अपनी मां को खो देने वाले पृथ्वी के जीवन पर उनके पिता का बहुत गहरा असर है। उन्हें एक अच्छा इनसान बनाने के साथ ही एक बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी बनाने का सपना देखने वाले अपने पिता को पृथ्वी ने चार अक्टूबर को एक बेहतरीन तोहफा दिया जब उन्होंने अपने पहले ही मैच में सैकड़ा लगाकर खुद को सचिन तेंदुलकर की श्रेणी में खड़ा कर दिया। दरअसल वह सचिन के बाद टेस्ट क्रिकेट में सैकड़ा बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं।