कोलकाता : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. वसंत त्रिपाठी ने कहा कि प्रेमचंद के साहित्य में यथार्थवाद अपने युग की खौफनाक सच्चाइयाँ व्यक्त करता है। उन्हें हिन्दी भाषी जनता ने उस तरह अपना सांस्कृतिक नायक नहीं बनाया जिस तरह से बंगाल की जनता ने रवींद्रनाथ को बनाया है। दिल्ली से आए साहित्यकार डॉ.प्रेमपाल शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी को लोकप्रिय बनाया और उनके साहित्य ने इंसान को लड़ने की ताकत दी। यह अफसोस कि बात है कि किसी हिन्दी भाषी राज्य के विश्वविद्यालय का नाम प्रेमचंद के नाम पर नहीं है। भारतीय भाषा परिषद और सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित प्रेमचंद जयंती में विद्वानों ने ये बातें कहीं। प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय के प्रो.ॠषिभूषण चौबे ने कहा कि प्रेमचंद ने हिंदी और उर्दू मिजाज को समझ कर अपनी कथा भाषा की रचना की थी और अपने समाज की रूढ़ियों पर चोटें की थीं। खिदिरपुर कॉलेज की प्रो.इतु सिंह ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी जनता के हृदय सम्राट हैं। उनके कथा साहित्य में जो राजनीति है उसका उद्देश्य संकीर्ण न होकर संपूर्ण भारत को एक नई दिशा में बदलना था। कलकत्ता गर्ल्स कॉलेज की प्रिंसिपल प्रो सत्या उपाध्याय ने कहा कि प्रेेमचंद का समय सामाजिक सुधारों और स्वाधीनता आंदोलनों का भारत था और वे इस भारत के प्रतिनिधि साहित्यकार थे अध्यक्षीय भाषण देते हुए शंभुनाथ ने कहा कि प्रेमचंद का राष्ट्रवाद और अंतरराष्ट्रीयतावाद दोनों ही उच्च मानवीय मूल्यों को लेकर चलता है। उनके कथा साहित्य के केंद्र में दलित और स्त्री के साथ पूरा भारत भी था। वर्तमान भारत को बदलने की सबसे बड़ी दृष्टि प्रेमचंद से मिलती है। संगोष्ठी में विनोद यादव ने अपना आलेख पाठ किया। भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ.कुसुम खेमानी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की उपस्थिति प्रेमचंद की महानता को एक बड़ा नमन है। प्रो.संजय जायसवाल ने संगोष्ठी का संचालन किया और परिषद की मंत्री बिमला पोद्दार ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
प्रेमचंद का साहित्य़ मनुष्यता के विकास का साहित्य है
मिदनापुर : विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से “प्रेमचंद आज” विषय पर प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष (कला व वाणिज्य) प्रो. दामोदर मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य मनुष्यता के विकास का साहित्य है। प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि प्रेमचंद किसानों के अधिकारों के लिए निरंतर अपनी रचनाओं में संघर्ष करते हुए सामंतवाद और पूंजीवाद से टकराते हैं। डॉ. श्रीकांत द्विवेदी ने कहा कि प्रेमचंद समाज के हर वर्ग के हितार्थ लिखते हैं। गोप कॉलेज की हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रेणु गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद ने सबको जोड़ने का काम किया है। संस्कृत की प्रो. इला नंदा ने कहा कि प्रेमचंद समग्रता के लेखक हैं। प्रेमचंद पर आयोजित परिचर्चा में सोनाली कुमारी,बीना पाल, पूनम पाल, श्रद्धा उपाध्याय ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। शोधार्थी विनोद यादव ने कहा कि प्रेमचंद उपभोक्तावाद का विरोध करते हैं। दीपनारायण चौहान ने कहा कि प्रेमचंद ने कथा साहित्य को सामाजिक यथार्थ से जोड़ा। प्रियंका गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद को लेकर हिंदी समाज उदासीन रहा है। हमें प्रेमचंद को पूरे समाज का हिस्सा बनाना होगा। मधु सिंह ने प्रेमचंद की कहानियों में व्यक्त प्रेम पर चर्चा करते हुए कहा कि प्रेम कहानियों में त्याग, समर्पण का भाव परिलक्षित होता है। इसके अलावा मिथिलेश साव, राधेश्याम सिंह, सलोनी शर्मा, सोनी कुमारी, श्रद्धा उपाध्याय, राहुल गौड़, बिना पाल, सोमा दे आदि ने अपने विचार रखें। इस अवसर पर प्रभाती मुंगराज, चंदना मंडल, मौसमी गोप, राजकुमार मिश्रा, धनंजय प्रसाद ने संवाद-सत्र में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन मधु सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन रूपल साव ने दिया।
न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी, न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति के एम जोसेफ ने ली शपथ
इन न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण समारोह में शीर्ष अदालत के सारे न्यायाधीश और विधि अधिकारी उपस्थित थे। इनके अलावा बड़ी संख्या में वकील भी प्रधान न्यायाधीश के न्यायालय में मौजूद थे।
हालांकि, इससे पहले न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी आधिकारिक अधिसूचना में उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश के एम जोसेफ का नाम वरिष्ठता क्रम में सबसे नीचे होने की वजह से कल तक कुछ विवाद की स्थिति बनी हुयी थी।
शीर्ष अदालत की कोलेजियम के सदस्यों में से न्यायमूर्ति मदन बी लोकूर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति ए के सीकरी सहित कुछ न्यायाधीशों ने सरकारी अधिसूचना में न्यायमूर्ति जोसेफ की वरिष्ठता कम करने के संबंध में प्रधान न्यायाधीश से मुलाकात करके इस पर अपनी नारजगी भी व्यक्त की थी।
न्यायालय के सूत्रों ने बताया था कि प्रधान न्यायाधीश ने आपत्ति व्यक्त करने वाले न्यायाधीशों को आश्वासन दिया था कि वह इस मामले को केन्द्र सरकार के समक्ष उठायेंगे।
न्यायालय के सूत्रों ने कल कहा था कि कुछ न्यायाधीशों द्वारा इसे लेकर व्यक्त की गयी चिंता पर इस समय कुछ भी नहीं हो सकता परंतु मंगलवार को तीनों न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के बाद इस पर चर्चा की जायेगी।
द्रमुक अध्यक्ष करूणानिधि का निधन
चेन्नई : द्रमुक अध्यक्ष एम. करूणानिधि का लंबी बीमारी के बाद आज शाम शहर के एक अस्पताल में निधन हो गया। कावेरी अस्पताल में भर्ती 94 वर्षीय नेता ने मंगलवार को शाम छह बजकर दस मिनट पर अंतिम सांस ली। अस्पताल के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर अरविन्दन सेल्वाराज की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘हमें बड़े दुख के साथ बताना पड़ रहा है कि हमारे प्रिय कलैनार एम. करूणानिधि का सात अगस्त, 2018 को शाम छह बजकर दस मिनट पर निधन हो गया। डॉक्टरों और नर्सों की हमारी टीम के सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।’’ विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘हम भारत के कद्दावर नेताओं में से एक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हैं और परिवार के सदस्यों तथा दुनिया भर में बसे तमिलवासियों का दुख साझा करते हैं।’’ करूणानिधि का रक्तचाप कम होने के बाद 28 जुलाई को उन्हें गोपालपुरम स्थित आवास से कावेरी अस्पताल भेजा गया था। पहले वह वार्ड में भर्ती थे, बाद में हालत बिगड़ने पर उन्हें आईसीयू में भर्ती किया गया।
कविता

कविता
कविता केवल
कविता नहीं होती
वो तो होती है
मन की अभिव्यक्ति
मन का सुख
मन का दुख
कविता केवल
कविता नहीं होती
वो तो होती है
दुख में बिल्कुल
आपसे चिपकी हुई
आंसू की तरह
बहती रहती है
कागजों पर
रचती रहती है
एक नया संसार
कविता केवल
कविता नहीं होती
वो तो होती है
अकेलेपन की साथी
हाथ थामे रहती है
रास्ता दिखाती रहती है
कदम बढ़ाती रहती है
कविता केवल कविता
नहीं होती
वह जख्म को
भरने का काम करती है
कभी खोलकर तो कभी
ढँक कर घाव ठीक करती है
कविता केवल
कविता नहीं होती
वो तो रोशनदान
होती है
चारों ओर से बंद कमरे में
भी हल्की रोशनी ला देती है
और उम्मीद की नयी किरण
जगा जाती है
कविता केवल कविता नहीं होती
वो तो पूरी जिंदगी होती है
सारे रंगों से भरी होती है
सारे ख्वाबों से भरी होती है
कविता केवल कविता नहीं होती है
व्यभिचार में पुरुष का साथ देने वाली महिला अपराध में बराबर की जिम्मेदारः सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में गत गुरुवार को व्यभिचार के लिए सिर्फ पुरुष को सज़ा देने वाली आईपीसी की धारा 497 पर सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने टिप्पणी किया कि शादी जैसी संस्था को बचाने और उसकी पवित्रता को बनाए रखने में दोनों पार्टनर बराबर जिम्मेदार होने चाहिए। अगर एक विवाहित महिला अपने पति के अलावा किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध बनाती है, तो ऐसे में केवल पुरुष को दंडित कैसे किया जा सकता है, जबकि महिला उस अपराध में बराबर की जिम्मेदार है।
कोर्ट ने आश्चर्य जताया कि कैसे संसद ने कानून में प्रावधान कर दिया कि अगर कोई विवाहित पुरुष किसी महिला के साथ उसके पति की मर्जी के बिना संबंध बनाता है, तो अपराध की श्रेणी में आएगा। कोर्ट ने कहा कि पति की इजाजत से महिला को दूसरे विवाहित पुरुष के साथ संबंध व्याभिचार को बढा़वा देता है। कोर्ट ने कहा कि कई मौकों पर देखा गया है कि महिला शादीशुदा होने के बावजूद पति से अलग रहती है। ऐसे में उसका किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध बनाना अपराध के दायरे में कैसे आ सकता है।
मामले में जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि धारा 497 के तहत पत्नी को पति की मर्जी से किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध बनाने को कानून छूट देना बकवास कानून है। क्या पत्नी के साथ एक संपत्ति की तरह बर्ताव किया जाना चाहिए। जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण ने याचिकाकर्ता के खिलाफ तर्क देते हुए कहा कि धारा 497 शादी की पवित्रता का बचाव करती है। फिर भी अगर एक विवाहित पुरुष शादी से बाहर जाकर एक अविवाहित महिला के साथ संबंध बनाता है, जो कि इस कानून के दायरे में नहीं आता है। यह भी शादी की पवित्रता को बनाए रखने का काम करती है।
जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि भारत की पहली महिला जज जस्टिस अन्ना चंडी ने विवाहेत्तर संबंध को अपराध के दायरे में लाए जाने को लेकर लॉ कमीशन की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई थी।जस्टिस अन्ना ने इस व्याभिचार की धारा को खत्म करने का प्रस्ताव दिया था। उन्होने बताया कि 42वें लॉ कमीशन की रिपोर्ट में पुरुष और महिला दोनों को दोषी बनाए जाने का प्रस्ताव दिया था।
पति की सहमति है तो अपराध नहीं, तो क्या पत्नी गुलाम है? व्यभिचार की धारा 497 पर मंथन
व्यभिचार के जुर्म में सिर्फ पुरुष को दोषी मानने की धारा 497 की वैधानिकता पर मंथन कर रहे सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को कहा कि ये प्रावधान मनमाना, भेदभावपूर्ण और समानता के अधिकार का उल्लंघन करने वाला लगता है। कोर्ट ने कहा कि कानून में ये कैसी विसंगति है पत्नी को गुलाम की तरह समझा गया है। अगर उसके पति की सहमति है तो उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने वाला अपराध का भागी नहीं है। ये भेदभाव और मनमाना प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा पहली निगाह मे धारा 497 भेदभाव पूर्ण और मनमानी लगती है
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधानपीठ ने आइपीसी की धारा 497 की वैधानिकता पर सुनवाई के दौरान की। यह धारा कहती है कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे की पत्नी से उसकी सहमति के बगैर शारीरिक संबंध बनाता है तो वह अपराध करता है और इसके लिए उसे पांच साल तक की सजा हो सकती है। लेकिन इस धारा में विवाहित महिला को अपराधी नहीं माना गया। यहां तक कि उसे अपराध के लिए उकसाने का भी जिम्मेदार नहीं माना गया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील कालीश्वरन राज ने कानून को चुनौती देते हुए कहा कि ये धारा संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 यानी समानता और जीवन के अधिकार का उल्लंघन करती है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों को देखा जाए तो कानून की ये धारा समयानुकूल नहीं रह गई है। इसी दौरान पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा कि कानून में कैसी विसंगति है कि अगर पति की सहमति है तो अपराध नहीं है।
पाँच न्यायाधीशों की संविधान पीठ कर रही है सुनवाई
जस्टिस इंदू मल्होत्रा ने कहा कि इसमें पत्नी को गुलाम की तहत समझा गया है जो गलत है। हालांकि जस्टिस चंद्रचूड ने कहाकि इस प्रावधान से सिर्फ पति की सहमति का हिस्सा अलग से रद नहीं किया जा सकता क्योंकि उससे बाकी बचा हिस्सा ज्यादा गंभीर अपराध बन जाएगा। जस्टिस आरएफ नारिमन ने कहा कि कानून का उद्देश्य बहुत बुद्धिमत्तापूर्ण नहीं लगता क्योंकि इसमें पत्नी को वस्तु की तरह समझा गया है। उन्होंने कहा कि अगर शादीशुदा आदमी बाहर जाकर संबंध बनाता है तो अपराध नहीं है। ऐसे में ये कहा जाना कि ये कानून विवाह संस्था को संरक्षित करने के लिए बनाया गया है कहां तक ठीक होगा। क्योंकि उससे तो विवाह संस्था संरक्षित नहीं होती।
मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने भी कहा कि यह प्रावधान भ्रामक लगता है क्योंकि सहमति होना कानूनन स्वीकार करने लायक बात नहीं है। उन्होंने कहा कि ये ठीक है कि प्रावधान विवाह संस्था को संरक्षित करने के लिए है लेकिन जिस तरह से इसे ड्राफ्ट किया गया है उसमे तो ये पहली निगाह में समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन करता है।
पीठ ने कहा कि वे निजता के पहलू में नहीं जाएंगे और न ही इस बहस मे पड़ेगे कि शादी से इतर संबंध बनाने का अधिकार है कि नहीं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शादी एक ऐसी संस्था है जिसके स्त्री और पुरुष दो स्तंभ हैं। अगर वहां व्याभिचार की घटना होती है तो दोनों की जिम्मेदारी बनती है।
जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि एडल्टरी को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का मतलब ये नहीं है कि एडल्टरी के लिए कोई लाइसेंस मिल रहा है। चर्चा अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की यौन स्वतंत्रता और पसंद पर भी हुई। जस्टिस रोहिंग्टन ने कहा कि विवाह संबंध का आपसी भरोसा व्यक्ति की पसंद पर तर्कसंगत नियंत्रण लगाता है।
विश्व चैंपियनशिप में सिन्धू ने जीता रजत पदक
नानजिंग : पीवी सिंधू को एक बार फिर बड़े टूर्नामेंट में उप विजेता बनकर संतोष करना पड़ा जब वह विश्व चैंपियनिशप के महिला एकल फाइनल में आज यहां कैरोलिना मारिन के खिलाफ हार गई।
ओलंपिक रजत पदक विजेता सिंधू को स्पेन की ओलंपिक चैंपियन मारिन के खिलाफ 19-21 10-21 की हार के साथ रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
पिछले साल ग्लास्गो में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में जापान की नोजोमी ओकुहारा के खिलाफ शिकस्त झेलने वाली 23 साल की सिंधू के पास मारिन की तेजी का कोई जवाब नहीं थ जिन्होंने 45 मिनट में जीत दर्ज की।
सिंधू इसके साथ ही विश्व चैंपियनशिप में चार बार पोडियम पर जगह बनाने वाली एकमात्र भारतीय खिलाड़ी बन गई। इससे पहले उन्होंने 2013 में ग्वांग्झू और 2014 में कोपेनहेगन में भी कांस्य पदक जीते थे।
साथ ही मारिन विश्व चैंपयनशिप खिताब तीन बार जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी। उन्होंने इससे पहले 2014 और 2015 में जकार्ता में विश्व खिताब जीते।
इस मैच से पहले सिंधू ने मारिन के खिलाफ छह मैचों में जीत दर्ज की थी जबकि पांच में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इन दोनों खिलाड़ियों के बीच जून में मलेशिया ओपन में हुए पिछले मुकाबले को सिंधू ने जीता था।
राष्ट्रीय राजमार्गो पर पैदल यात्रियों की अनदेखी से मानवाधिकार आयोग नाराज
नयी दिल्ली : केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गो पर पैदल यात्रियों, खासकर दिव्यांगों की अनदेखी पर राज्य सरकारों तथा सड़क निर्माण एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी है। केंद्र ने यह कदम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कहने पर उठाया है। आयोग ने इस संबंध में क्षोभ जताते हुए केन्द्र से निर्देश जारी कर रिपोर्ट तलब करने को कहा था।
आयोग की लगातार पूछताछ के बाद सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों तथा सड़क निर्माण से जुड़ी केन्द्रीय एजेंसियों को पत्र लिखकर पैदल यात्रियों के बारे में किए गए उपायों को लेकर आगाह किया है। इसी 30 जुलाई को लिखे पत्र में मंत्रालय ने उन्हें अपने 12 अप्रैल के पत्र की याद दिलाई है। जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गो पर पैदल यात्रियों तथा दिव्यांगों के लिए सुविधाएं सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया था।
पत्र में मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से बताया था कि सड़क पर पैदल यात्रियों के संदर्भ में सुविधाओं का इंतजाम आइआरसी : 103 की ‘पैदल यात्रियों के लिए दिशानिर्देश’ शीर्षक से जारी मानकों के अनुरूप होना चाहिए। इस सिलसिले में मंत्रालय ने 17 जून, 2015 को उसकी ओर से जारी परिपत्र का उल्लेख भी किया है।
बता दें कि आइआरसी :103 इंडियन रोड कांग्रेस द्वारा अनुमोदित वो नियमावली है जिसमें राष्ट्रीय राजमार्गो पर फुटपाथ और जेब्रा क्रासिंग बनाने के लिए अपनाए जाने वाले मानकों का ब्यौरा दिया गया है।
राजमार्गो पर पैदल यात्रियों की उपेक्षा को लेकर मानवाधिकार आयोग को नागरिकों की कई शिकायतें मिली थीं। जिसे लेकर उसने सड़क मंत्रालय से चिंता जताई थी और पीडब्लूडी, एनएचएआइ, एनएचआइडीसीएल तथा बीआरओ को निर्देश देने को कहा था। इस साल जून में उसने इस बाबत फिर से पूछताछ की थी और मंत्रालय से अधिकारियों को मौके पर भेजकर वस्तुस्थिति की पड़ताल करने को कहा था, लेकिन मंत्रालय के कई बार याद दिलाने बावजूद किसी ने भी पैदल यात्रियों की सुविधाओं के बाबत कोई रिपोर्ट उसे नहीं भेजी है।
अपने 17 जून, 2015 के परिपत्र में मंत्रालय ने कहा था कि पैदल यात्रियों व दिव्यांगों की सुविधाओं का प्रावधान सड़क की योजना और डिजाइन बनाते वक्त ही कर दिया जाना चाहिए। साथ ही निर्माण और रखरखाव के दौरान भी इस बाबत ध्यान रखा जाना चाहिए। यह भी स्पष्ट किया था कि इन सुविधाओं का बुनियादी मकसद सड़क पर वाहनों और पैदल यात्रियों के बीच टकराव की नौबत को यथासंभव कम करना है।
आइआरसी : 103 में पैदल यात्रियों के लिए दिशानिर्देश
-शहरी क्षेत्रों में राष्ट्रीय राजमार्गो पर दोनो ओर फुटपाथ होने चाहिए
-फुटपाथ की न्यूनतम चौड़ाई 1800 मिमी हो, ताकि ह्वीलचेयर चल सके।
-जहां पूरे फुटपाथ की इतनी चौड़ाई संभव न हो वहां बीच-बीच में 1800 गुणा 2500 मिमी के पासिंग स्थान बनाए जाने चाहिए।
-फुटपाथ से 2200 मिमी ऊपर तक किसी प्रकार का अवरोध नहीं होना चाहिए।
-फुटपाथ की सड़क से ऊंचाई 150 मिमी से अधिक नहीं होनी चाहिए।
-फुटपाथ के दोनो छोर ढलानदार होने चाहिए। ढलान 1200 मिमी चौड़ी हो।
-दृष्टिहीनो की सुविधा के लिए फुटपाथ के किनारे से 600 मिमी जगह छोड़कर उभारदार टाइलें लगाई जाएं।
-शहरी क्षेत्रों में पैदल यात्रियों को सड़क पार करने के लिए जेब्रा क्रासिंग जरूरी।
-दृष्टिहीनो की सुविधा के लिए जेब्रा क्रासिंग को थर्मोप्लास्टिक से बनाया जाए ताकि यह टटोलने में उभारदार हो।
-दृष्टिहीनो की सहूलियत के लिए जेब्रा क्रासिंग पर ध्वनिकारक ट्रैफिक सिगनल भी लगाए जाने चाहिए।
-जेब्रा क्रासिंग की चौड़ाई सामान्यतया 2 से 4 मीटर होनी चाहिए।
(साभार – दैनिक जागरण)
आठ साल की बच्ची ने दर्ज कराया ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड’ में नाम
बैकुंठपुर : प्रतिभाएं मां के गर्भ में पलती हैं। माता-पिता के विशिष्ठ गुण अक्सर बच्चों में भी दिखते हैं, लेकिन कई बार बच्चे और भी आगे निकल जाते हैं। कोरिया जिले के छोटे से सुविधा विहीन कस्बे चर्चा में कोयले की खदानें हैं। यहां रहने वाली अंजली सिंह ने साल 2011 में रोलर स्केटिंग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड कायम कर क्षेत्र को गौरवान्वित किया था। बात सात साल पुरानी हो गई। अब अंजली के नक्शेकदम पर उनकी आठ साल की बेटी श्रेया चल रही हैं। दो महीने पहले श्रेया ने लगातार 72 घंटे तक रोलर स्केटिंग की। इसे एक रिकॉर्ड के रूप में दर्ज कराने के लिए उनकी तरफ से दावा पेश किया और ‘लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में श्रेया का नाम दर्ज हो गया। श्रेया की इस उपलब्धि ने एक बार फिर चर्चा के लोगों का नाम राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।
श्रेया की मां अंजली भी सात 2011 में रोलर स्केटिंग में राष्ट्रीय रिकॉर्ड होल्डर रहीं हैं। इसके साथ-साथ जुलाई 2010 में सबसे लंबी आउटडोर ऑनलाइन हॉकी गेम के प्लेयर के रूप में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। वो ही श्रेया की गुरु भी हैं। उन्हीं ने श्रेया को नियमित कोचिंग दी और इस सुविधाविहीन क्षेत्र में बच्ची को खेल के इस हुनर में आगे बढ़ाया। अंजली को पूरी उम्मीद है कि उनकी बेटी आगे चलकर इस क्षेत्र में और भी बड़े कीर्तिमान स्थापित करेगी।
रोलर स्केटिंग की राष्ट्रीय स्पर्धा इस साल कर्नाटक के बेलगाम में आयोजित की गई थी। यहीं पर श्रेया ने यह कीर्तिमान बनाया। इस दौरान लगातार 72 घंटे तक रोलर स्केटिंग करते हुए श्रेया के चेहरे पर कोई भी थकान नजर नहीं आ रही थी। वहां मौजूद लोग उनका स्टैमिना देखकर अचंभित थे।
श्रेया के पिता मुकेश सिंह और उनकी मां अंजली का कहना है कि क्षेत्र में कई प्रतिभाशाली बच्चे हैं जो इस दिशा में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं, यदि प्रशासन द्वारा स्केटिंग हेतु एक छोटा सा कोर्ट बनवा दिया जाए तो वे और भी बच्चों को प्रशिक्षण दे सकते हैं। बच्चे आगे बढ़ेंगे तो क्षेत्र का नाम रोशन होगा।
(साभार – दैनिक जागरण पर अशोक सिंह की खबर)
रांची के रंजीत ने बनाया रश्मि रोबोट, हिन्दी-भोजपुरी में करती हैं बातें
रांची : रांची के रंजीत श्रीवास्तव ने दुबई की नागरिकता हासिल करने वाली रोबोट सोफिया का भारतीय संस्करण रश्मि विकसित किया है। जो महज दो साल के रिकॉर्ड समय और सिर्फ 50 हजार रुपये खर्च कर बना है। रश्मि को हांगकांग की कंपनी द्वारा विकसित एक मानव सदृश रोबोट सोफिया की अगली पीढ़ी बताया जा रहा है, जो अंग्रेजी के साथ हिंदी, भोजपुरी और मराठी में आपसे बात कर सकती है। यह हावभाव बदलने और भावनात्मक बातें करने में भी निपुण है।
दुनिया का पहला हिंदीभाषी रोबोट
लखनऊ के मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से एमबीए करने वाले रंजीत का दावा है कि रश्मि दुनिया की पहली हिंदी भाषी, सच्चा अहसास देने वाली और महिला की तरह व्यवहार करने वाली रोबोट है, जो बातचीत के क्रम में होंठ भी हिलाती है। इस रोबोट में लिंग्यूस्टिक इंटरप्रेटर (एलआई), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), विजुअल डेटा और फेशियल रिकोगनिशन तकनीक का उपयोग किया गया है।
राजधानी के पहाड़ी मंदिर इलाके के रहने वाले 38 वर्षीय रंजीत कहते हैं कि यह रोबोट मेरे द्वारा विकसित विशेष सॉफ्टवेयर और लिंग्यूस्टिक इंटरप्रेटर प्रणाली पर काम करता है। एलआइ प्रोग्रामिंग बातचीत में भावना का विश्लेषण करता है जबकि एआइ प्रोग्राम डिवाइस से प्रतिक्रिया देने का काम करता है।
देश-विदेश की कई कंपनियां संपर्क में
उन्होंने ट्राई चेयरमैन आरएस शर्मा से मदद मिलने का जिक्र किया। कहा कि शर्माजी ने हमेशा से उन्हें विशिष्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके सॉफ्टवेयर को लेकर देश-विदेश की कई नामी-गिरामी कंपनियां अलग-अलग प्रोजेक्ट में जुड़ने के लिए संपर्क साध रही है।
दो माह में पूरा हो जाएगा निर्माण
रश्मि रोबोट को एक अविश्वसनीय और असाधारण उपलब्धि बताते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि भारत में किसी भी हिंदी भाषी रोबोट का बनाना सुखद है। आइएसएम, धनबाद के डॉ. सोमनाथ ने इसे सोफिया के अपडेट वर्जन के रूप में उदृत किया। करीब 15 वर्षों से सॉफ्टवेयर डेवलप कर रहे रंजीत ने अगले दो माह में इसे पूरी तरह मानव आकृति देने का दावा किया। अभी रोबोट के सिर और शरीर सहित 80 फीसद तक विकसित किए गए हैं और वे ठीक से काम कर रहे हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि हाथों और पैरों को जोड़ने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
संवदेनशील दोस्त बनने की है क्षमता
पूर्व में लोट्स सॉफ्टवेयर कंपनी चलाने वाले रंजीत ने कहा कि रश्मि चेहरे, आंख, होंठ और भौं के जरिये अपनी अभिव्यक्ति करती है। जरूरत के अनुसार यह रोबोट अपनी गर्दन को घूमा-फिरा भी सकता है। भारत जैसे आबादी बहुल देश में रोबोट की उपयोगिता के बारे में रंजीत ने कहा कि यह भविष्य की पीढ़ी की जरूरत है। यह रिसेप्शनिस्ट, सहायक, एकाकी लोगों और जरूरतमंदों के संवेदनशील मित्र के रूप में काम कर सकती है।
बदसूरत बोला तो रोबोट ने कहा-भाड़ में जाओ…
उन्होंने रश्मि रोबोट का प्रदर्शन कर दिखाया कि यह कुछ पूछने पर आखिर कैसे प्रतिक्रिया करती है और कैसा जवाब देती है। मसलन, रोबोट को कहा गया कि तुम बदसूरत हो तो रश्मि ने तपाक से जवाब दिया…नहीं, तुम भाड़ में जाओ। कहा गया कि आप सुंदर हैं, यह कहती है धन्यवाद। अपने पसंदीदा अभिनेता के बारे में पूछे जाने पर रश्मि रोबोट ने शाहरुख खान का नाम लिया। श्रीवास्तव ने कहा कि अपनी आंखों में लगे कैमरों के कारण यह व्यक्ति विशेष को एकाध मुलाकात के बाद जानने-पहचानने भी लगती है।
सोफिया से प्रेरित होकर बोलनेवाले रोबोट बनाने की जिद ठानने वाले रंजीत ने कहा कि मैंने झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों के लिए कई सॉफ्टवेयर विकसित किए हैं, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। निबंधन, सूचना-जनसंपर्क और पर्यटन विभाग के लिए रंजीत ने पोर्टल बनाए हैं। टूरिज्म पोर्टल ने राष्ट्रीय पर्यटन पुरस्कार भी जीता। उनके पिता टीपी श्रीवास्तव बीएसएनएल में एजीएम हैं।




