नयी दिल्ली : भारत की 102 साल की महिला एथलीट मन कौर ने इस महीने के शुरू में स्पेन में हुई विश्व मास्टर्स में ट्रैक एवं फील्ड में स्वर्ण पदक जीता था और कभी हार न मानने वाले जज्बे से भरी यह खिलाड़ी अब अगली प्रतियोगिता के लिये ट्रेनिंग में जुटी हैं। वह दौड़ने के अलावा भाला भी फेंकती हैं। उन्होंने कहा कि वह अब भी प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक हासिल करने के लिये बेताब हैं। उन्होंने पटियाला से पीटीआई फोन पर कहा, ‘‘मैं और पदक जीतना चाहती हूं। जीतने के बाद मुझे काफी खुशी होती है। सरकार ने मुझे कुछ नहीं दिया लेकिन यह मायने नहीं रखता क्योंकि मैं सिर्फ दौड़ना चाहती हूं क्योंकि दौड़ने से मुझे खुशी मिलती है। ’ मन कौर ने इस महीने के शुरू में स्पेन के मलागा में हुई विश्व मास्टर्स एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 200 मीटर रेस में 100 से 104 साल के उम्र ग्रुप में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। उन्होंने वहां भाला फेंक स्पर्द्धा में भी स्वर्ण पदक जीता था।
वह इस उम्र की स्पर्द्धा में एकमात्र खिलाड़ी थीं लेकिन उनके प्रशंसकों ने उनकी जीत का जश्न मनाया जिसने 102 सल की उम्र में 200 मीटर की रेस की और भाला फेंका। अब वह अगले साल मार्च में पोलैंड में होने वाली विश्व मास्टर्स एथलेटिक्स इंडोर चैम्पियनशिप के लिये ट्रेनिंग करने में जुटी हैं जिसमें उनका लक्ष्य 60 मीटर और 200 मीटर रेस में भाग लेना है। उन्होंने 93 साल की उम्र में दौड़ना शुरू किया था और पिछले साल न्यूजीलैंड के आकलैंड में विश्व मास्टर्स खेलों में 100 मीटर स्प्रिंट में पदक जीतने के बाद वह सुर्खियों में आयीं।
एथलेटिक्स में और पदक जीतने पर लगी हैं 102 वर्ष की मन कौर की निगाहें
30 साल से नेशनल चैंपियन है लड़कियों की यह टीम, लारा दत्ता बनाएंगी फिल्म
भिलाई : भिलाई सिर्फ पिघलता लोहा ही नहीं उगलता, प्रतिभाओं को भी जन्म देता है। भिलाई की लड़कियों की बास्केटबॉल टीम पिछले 30 साल से नेशनल चैंपियन है। इस टीम के आगे देश की कोई भी दूसरी टीम टिक ही नहीं पाती। इन खिलाड़ियों की प्रतिभा का अब बॉलीवुड भी कायल हो गया है। बॉलीवुड अभिनेत्री लारा दत्ता इस टीम की कहानी पर एक फिल्म बनाने जा रही हैं, जिसका निर्माण इस साल नवंबर से शुरू होगा। यह फिल्म रेलवे की इस टीम के 30 साल से चले आ रहे जीत के सफर और कोच के संघर्ष की कहानी आधारित होगी। फिल्म में दिवंगत अंतरराष्ट्रीय कोच राजेश पटेल की भूमिका एक्टर इरफान खान निभाएंगे।
कोच के संघर्ष की कहानी
बास्केटबॉल के अंतरराष्ट्रीय कोच राजेश पटेल के परिजनों से मिलने फिल्म अभिनेत्री लारा दत्ता सितंबर के पहले पखवाड़े में भिलाई आई थी। लारा दत्ता ने कहा कि यह फिल्म 2014 के नेशनल बास्केटबॉल चैम्पियनशिप पर फोकस है। इसमें लगातार 30 साल से विजेता भारतीय रेलवे की टीम को छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य की बेटियों ने धूल चटा दिया था। साथ ही फिल्म में अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रशिक्षक राजेश पटेल के जीवन पर भी फोकस किया जाएगा।
वे इंदौर में जन्म लेने के बाद कैसे भिलाई आए, भिलाई स्टील प्लांट में उनकी नौकरी और बास्केटबॉल में प्रशिक्षक के तौर पर उनका जीवन, छत्तीसगढ़ जैसे छोटे राज्य की बेटियों का सौ से ज्यादा राष्ट्रीय और अंतररष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीतना। इन सभी का भी उल्लेख होगा। एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले राजेश ने अपने संघर्ष और खेल प्रतिभा के दम पर एक अंतर्राष्ट्रीय कोच के रूप में ख्याती हासिल की थी। वे टीम की खिलाड़ियों को अपनी बेटियों की तरह प्यार देते थे और उन्हें अपने अपने परिवार का हिस्सा समझते हुए अपने घर पर ही रखते थे। इनमें से कई लड़कियां राज्य के अलग-अलग हिस्से के आदिवासी और गरीब परिवारों से आईं और आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम कमाया है। कई लड़कियां रेलवे में अच्छे पदों पर जॉब भी कर रही हैं।
खेल रत्न के लिए कोहली और मीराबाई, अर्जुन के लिए नीरज के नाम की सिफारिश
नयी दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली और भारोत्तोलक मीराबाई चानू को संयुक्त रूप से देश के सबसे बड़े खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार देने की सिफारिश की गयी जबकि भालाफेंक के स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा को उन 20 खिलाड़ियों की सूची में जगह मिली है जिनके नामों की सिफारिश अर्जुन पुरस्कारों के लिए की गयी है। अर्जुन परस्कारों के लिए चोपड़ा के अलावा जूनियर विश्व चैम्पियन हिमा दास और एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली मध्यम दूरी के धावक जिन्सन जॉनसन, क्रिकेटर स्मृति मंधाना, हाकी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह एवं सविता पूनिया, राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा और एशियाई खेलों में युगल मैच में स्वर्ण पदक जीतने वाले टेनिस खिलाड़ी रोहन बोपन्ना के नामों की सिफारिश की गयी है। इन सिफारिशों को खेल मंत्रालय से मंजूरी मिलना बाकी है। एक बार मंत्रालय से अनुमोदित होने पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 25 सितंबर को राष्ट्रपति भवन में पुरस्कार देंगे। अगर मंत्रालय चयन समिति की सिफारिश को मान लेता है तो कोहली खेल रत्न का सम्मान पाने वाले देश के तीसरे क्रिकेटर होंगे। इससे पहले यह खिताब दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (1997) और दो बार विश्व कप जीतने वाले पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी (2007) को मिला है। इस पुरस्कार की चयन समिति से जुडे़ एक सूत्र ने गोपनीयता की शर्त पर पीटीआई से कहा, ‘‘ हां, चयन समिति ने विराट कोहली और मीराबाई चानू के नामों की सिफारिश की है।’ यह भी पता चला है कि भारत के शीर्ष पुरूष बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत भी इस खिताब की दौड़ में थे। उन्होंने पिछले साल सुपर सीरीज सर्किट में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन वह 24 साल की मौजूदा भारोत्तोलन विश्व चैम्पियन मीराबाई से पिछड़ गये। पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने के कारण इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए मीराबाई के नाम की सिफारिश की गई है। उन्होंने इस साल राष्ट्रमंडल खेलों में भी पीला तमगा हासिल किया था लेकिन चोट के कारण एशियाई खेलों में भाग नहीं ले पायी थी। सूत्र ने पीटीआई से कहा कि एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले अमित पंघाल (48 किग्रा) के नाम पर अर्जुन पुरस्कार के लिए चर्चा की गयी लेकिन 2012 में वह डोपिंग के एक मामले में फंसे थे जिस वजह से उनके नाम को खारिज कर दिया गया। एशियाई खेलों के पूर्व कांस्य पदक विजेता और राष्ट्रमंडल खेलों के रजत पदक विजेता सतीश कुमार इस सूची में इकलौते मुक्केबाज है। इस सूची में तीन निशानेबाजों राही सरनोबत, अंकुर मित्तल और श्रेयसी सिंह को जगह मिली है जबकि दो पैरा खिलाड़ी अंकुर धामा और मनोज सरकार के नामों की भी सिफारिश की गयी है। एशियाई खेलों के कारण इस साल पुरस्कार समारोह का आयोजन राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त की जगह 25 सितम्बर को किया जाएगा।
खेल रत्न पुरस्कार के लिए चुने गये खिलाड़ियों को साढे साल लाख और अर्जुन पुरस्कार के विजेताओं को पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है। कोहली फिलहाल आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष बल्लेबाज हैं और पिछले तीन साल से शानदार फार्म में चल रहे हैं। 29 साल के कोहली के नाम की 2016 और 2017 में भी सिफारिश की गयी थी लेकिन उस समय चयन समिति में उनके नाम पर सहमति नहीं बनी थी।
कोहली के नाम 71 टेस्ट मैचों में 23 शतकों के साथ 6147 रन हैं जबकि 211 एकदिवसीय में उन्होंने 9779 रन बनाये हैं जिसमें 35 शतक शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतकों के मामले में कुल 58 शतकों के साथ वह भारतीय बल्लेबाजों की सूची में सिर्फ तेंदुलकर (100) से पीछे हैं। बीसीसीआई ने 2016 और 2017 में भी उनके नाम की सिफारिश की थी लेकिन 2016 में साक्षी मलिक, पीवी सिंधू और दीपा करमाकर के रियो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के कारण वह इस खिताब के लिए नहीं चुने गये। पिछले साल पूर्व हाकी खिलाड़ी सरदार सिंह और पैरा एथलीट देवेन्द्र झझारिया को यह पुरस्कार दिया गया था। कोहली उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने खेल रत्न पुरस्कार से पहले पद्म श्री पुरस्कार (2017) हासिल किया है। इस साल कोहली को मजबूत दावेदार माना जा रहा क्योंकि टीम ने उनके नेतृत्व में घरेलू श्रृंखलाओं में इंग्लैंड तथा ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त दी और वेस्टइंडीज तथा श्रीलंका को उनकी सरजमीं पर हराया।
उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने दक्षिण अफ्रीका में एकदिवसीय श्रृंखला में जीत दर्ज की। वह 2011 में आईसीसी विश्व कप और 2013 में आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल थे। उनकी कप्तानी में टीम 2017 में आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी के फाइनल में पहुंची थी। कोहली 2012 और 2017 में क्रमश: आईसीसी के सर्वश्रेष्ठ एकदिवसीय खिलाड़ी और सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का पुरस्कार जीत चुके हैं। उन्होंने पांच बार सर्वश्रेष्ठ भारतीय क्रिकेटर का पुरस्कार भी जीता है। पीठ की चोट से उबर रही मीराबाई का भी हौसला इस खिताब से बढ़ेगा। इस विश्व चैम्पियन से भारत को 2020 तोक्यो ओलंपिक में पदक की उम्मीद है।
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार के लिए सिफारिश किये गये खिलाड़ियों के नाम : विराट कोहली (क्रिकेट), मीराबाई चानू (भारोत्तोलन)
अर्जुन पुरस्कार के लिए सिफारिश किये गये नाम : नीरज चोपड़ा (एथलेटिक्स); जिन्सन जॉनसन (एथलेटिक्स), हिमा दास (एथलेटिक्स); एन सिक्की रेड्डी (बैडमिंटन); सतीश कुमार (मुक्केबाजी); स्मृति मंधाना (क्रिकेट); शुभंकर शर्मा (गोल्फ); मनप्रीत सिंह (हॉकी); सविता (हॉकी); रवि राठौड़ (पोलो); राही सरनोबत (निशानेबाजी); अंकुर मित्तल (निशानेबाजी); श्रेयशी सिंह (निशानेबाजी); मनिका बत्रा (टेबल टेनिस); जी सथियान (टेबल टेनिस); रोहन बोपन्ना (टेनिस); सुमित (कुश्ती); पूजा काडिया (वुशु); अंकुर धामा (पैरा एथलेटिक्स); मनोज सरकार (पैरा बैडमिंटन)
बाढ़ में खराब हुई साड़ियों से बनी गुड़ियों से बुनकरों की मदद, ऐप से बिक्री
तिरुअनन्तपुरम : केरल में बुनकरों की मदद के लिए बाढ़ में खराब हुई साड़ियों से गुड़िया बनाई गईं हैं। इसे चेकुट्टी नाम दिया गया। इन गुड़ियों को दुनियाभर में बेचने के लिए अमेरिका की सिलिकॉन वैली में एक ऐप भी बनाई गई। 2 अक्टूबर से गुड़ियों की बिक्री शुरू हो जाएगी। जिस साड़ी को बेचकर 1500 तक बुनकर कमाते थे, उसी से बनी करीब साढ़े तीन सौ गुड़ियों की बिक्री पर 9 हजार रुपए मिलेंगे। पिछले महीने केरल में आई बाढ़ में 290 लोगों की मौत हुई थी और राज्य को करीब 20 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा।
एर्नाकुलम जिले के चेंडामंगलम गांव को हैंडलूम गांव कहा जाता है। बाढ़ के चलते इस गांव का साड़ियों समेत काफी हैंडलूम मटेरियल खराब हो गया। चेकुट्टी गुड़िया को बुनकरों को त्रासदी से उबारने की उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। हैंडलूम व्यवसाय से जुड़े लोगों की मदद के लिए केरल के दो सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बीड़ा उठाया। इन लोगों ने चेंडामंगलम से बाढ़ में खराब हुई साड़ी इकट्ठी की ताकि उनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके।
डॉल बनाने की मुहिम से जुड़ीं लक्ष्मी मेनन के मुताबिक- इन साड़ियों को क्लोरीन से साफ करने के बाद उबाला जाता है ताकि सारे कीटाणु मर जाएं। इसके बाद ही चेकुट्टी बनाने का काम शुरू होता है। लक्ष्मी कहती हैं- जुलाहों के पास खराब साड़ियों को जलाने के अलावा कोई चारा नहीं था, लेकिन अब वे उम्मीद कर सकते हैं। लोग हमें इन डॉल्स के लिए वेबसाइट, फेसबुक और वॉट्सऐप पर बड़े ऑर्डर बुक कर रहे हैं।
चेकुट्टी यानी मिट्टी में खेलने वाला बच्चा
मलयालम में चेरु का मतलब मिट्टी और कुट्टी यानी बच्चा होता है। चेकुट्टी को मिट्टी में खेलने वाला बच्चा भी कह सकते हैं। लक्ष्मी कहती हैं कि चेकुट्टी में दाग-धब्बे जरूर हैं, लेकिन यह बाढ़ से जूझने वाले हर व्यक्ति की कहानी बयां करती है।
प्योर लिविंग नामक संगठन चलाने वाली लक्ष्मी ने बताया- एक हैंडलूम साड़ी की कीमत 1300-1500 रुपए होती है। एक साड़ी से 360 डॉल्स बनाई गईं। एक डॉल 25 रुपए में बेचने की योजना है। लिहाजा एक साड़ी से 9 हजार रुपए कमाए जा सकेंगे।
बाढ़ के वक्त लक्ष्मी ने अपने टूरिज्म आंत्रप्रेन्योर दोस्त गोपीनाथ परयिल के साथ बचाव और राहत अभियान में हिस्सा लिया था। ओणम त्योहार के लिए साड़ियां तैयार की गई थीं, लेकिन सभी बाढ़ में समा गईं।
दुख में डूबे गाँव में खुशी बनकर आई चेकुट्टी
लक्ष्मी के मुताबिक- बाढ़ पूरा गाँव दुख में डूबा था। हमारे पास कोई विकल्प नहीं बचा था। तभी हमें खराब साड़ियों से डॉल बनाने का आइडिया आया। जुलाहे भी इस बात से खुश हुए कि उनकी मेहनत खराब नहीं होगी। लक्ष्मी और गोपीनाथ ने आइडिया को सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने इसके लिए काम करने वाले वॉलंटियर्स को बुलाया। चेकुट्टी के लिए वेबसाइट बनाई। लक्ष्मी ने खुद जुलाहों को पास जाकर साड़ियां जुटाईं और वॉलंटियर्स को प्रशिक्षण दिया। चेकुट्टी के सपोर्ट के लिए मुख्यमंत्री पिनरई विजयन आगे आए। कोच्चि के आईटी हब इन्फोपार्क ने भी चेकुट्टी की बिक्री के लिए समर्थन दिया है। इन डॉल्स को चाबी के छल्ले, घरों में सजावट, हेंडबैग और गिफ्ट के तौर पर भी दिया जा सकता है।
प्रसिद्ध फिल्मकार कल्पना लाजमी का निधन
मुम्बई : प्रसिद्ध फिल्मकार कल्पना लाजमी का यहां कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में निधन हो गया। परिवार के एक सदस्य ने यह जानकारी दी। वह 64 साल की थीं। लाजमी किडनी और लीवर के काम करना बंद करने की बीमारी से पीड़ित थीं। उनके भाई देव लाजमी ने बताया, ‘‘वह किडनी और लीवर के काम करना बंद करने की बीमारी से पीड़ित थीं।’’
लाजमी एक निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक थीं। वह यथार्थवादी फिल्में बनाने के लिये जानी जाती थीं। उनकी फिल्में अक्सर महिलाओं पर केंद्रित रहती थीं। उनकी कुछ लोकप्रिय फिल्मों में ‘रूदाली’, ‘दमन’, ‘दरमियान’ शामिल है।
लाजमी की बतौर निर्देशक आखिरी फिल्म 2006 में प्रदर्शित ‘चिंगारी’ थी। यह फिल्म भूपेन हजारिका के उपन्यास ‘द प्रॉस्टीट्यूट एंड द पोस्टमैन’ पर आधारित थी। हजारिका उनके पार्टनर भी थे।
अधिक सम्मान की हकदार थीं कल्पना लाजमी : रवीना
मुम्बई : फिल्म ‘दमन’ के दमदार किरदार के जरिये अभिनेत्री रवीना टंडन को अलग पहचान दिलाने वाली निर्देशक कल्पना लाजमी को याद करते हुए रवीना ने कहा कि बतौर फिल्मकार उन्हें जितना सम्मान मिला, वह उससे अधिक की हकदार थीं।
2001 में रजतपट पर आयी ‘दमन’ का विषय घरेलू हिंसा और जातीय विभाजन था। इस फिल्म के लिए रवीना टंडन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। रवीना ने कहा, ‘मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। वह 25 साल पहले महिला प्रधान फिल्में बना रही थीं जबकि उस समय इस तरह की फिल्मों का निर्माण करना और इसके लिए दर्शक खोजना चुनौतीपूर्ण था।’
उन्होंने कहा कि मगर उन्होंने इस चुनौती को कबूल किया और सशक्त तरीके से महिलाओं के मसलों को लोगों के समक्ष रखा। उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए कार्य किया। उन्हें जितना सम्मान मिला है, वह उससे अधिक की हकदार थीं।
उन्होंने कहा कि लाजमी मजबूत फिल्मकार थीं लेकिन वह कलाकारों की निजता का सम्मान करती थीं। उन्होंने कहा कि वह कभी हताश नहीं होती थीं और यह उनकी बड़ी अच्छाई थी। ‘दमन’ का क्लाइमेक्स दुर्गा पूजा के दौरान फिल्माया गया।
जासूसी मामले में इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नम्बी की गिरफ्तारी गैरजरूरी, 50 लाख मुआवजा दें- सुप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली : इसरो में 1994 में कथित जासूसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व वैज्ञानिक नम्बी नारायण को राहत दी। अदालत ने कहा कि नम्बी नारायण को गिरफ्तार किया जाना गैरजरूरी था, उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने नम्बी नारायण को बरी कर दिया था। कांग्रेस ने इस मामले में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के करुणाकरण को निशाना बनाया था। उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
नम्बी की गिरफ्तारी को सीबीआई ने गैरकानूनी करार दिया था : इस मामले में आरोप लगाए गए थे कि इसरो के दो वैज्ञानिकों समेत 6 लोगों ने अंतरिक्ष कार्यक्रम के गोपनीय दस्तावेज विदेशों में भेजे थे। पहले पुलिस ने जांच की और फिर बाद में मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई जाँच में सामने आया था कि किसी तरह की जासूसी नहीं हुई थी। सीबीआई ने अपनी जाँच में केरल के पूर्व डीजीपी सीबी मैथ्यूज और दो पूर्व पुलिस अधिकारियों को नम्बी की गैरकानूनी गिरफ्तारी का जिम्मेदार ठहराया था। नम्बी ने इन अधिकारियों के खिलाफ याचिका दायर की थी। लेकिन, केरल हाईकोर्ट ने कहा था कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद नम्बी ने सुप्रीम कोर्ट में गए।
केवल मुआवजा काफी नहीं – सुप्रीम कोर्ट: जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि 76 वर्षीय नम्बी नारायण का मामला मानसिक प्रताड़ना से जुड़ा है। केरल सरकार 8 हफ्तों के भीतर उन्हें 50 लाख रुपए मुआवजा दे। अदालत ने कहा कि केवल मुआवजा दिया जाना ही पूर्ण न्याय नहीं है। बेंच ने इस मामले में केरल पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया। इसकी अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस डीके जैन करेंगे।
खरीदने जा रहे हैं हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान तो इन गलतियों से बचें
अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए सही हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीदना आसान काम नहीं है। आज के समय में आप ऑनलाइन कुछ सेकेंड में हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीद सकते हैं। कई बार लोग प्लान की शर्तो को पढें बिना ही जल्द बाजी में हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीद लेते हैं। बाद में उनको इसका खामियजा उठाना पड़ता है। आज हम आपको कुछ ऐसी कॉमन गलतियों के बारे में बता रहे जिनसे हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीदते समय बचना चाहिए।
पर्याप्त कवरेज न होना
आम तौर पर जब कोई भी हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीदने का फैसला करता है तो प्लान का प्रीमियम इसमें अहम भूमिका निभाता है। कई बार लोग प्रीमियम पर खर्च बचाने के लिए कम कवरेज का प्लान ले लेते हैं। जैसे किसी को 6 लाख रुपए कवरेज की जरूरत है लेकिन प्रीमियम ज्यादा होने की वजह से वह व्यक्ति 4 लाख रुपए कवरेज का प्लान ले लेता है। प्लान का प्रीमियम एक अहम फैक्टर है लेकिन सिर्फ प्रीमियम पर आने वाले खर्च के आधार पर ही प्लान का चुनाव नहीं करना चाहिए।
बीमा कम्पनियों के प्लान से तुलना न करना
आपको हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान के लिए किसी एक बीमा कम्पनी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। मान लिया आपने किसी बीमा कंपनी से हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान ले लिया है तब भी रिन्यूअल के समय आपके पास यह ऑप्शन है कि आप तमाम बीमा कंपनियों के प्लान और उसके बेनेफिट को कंपेयर कर सकते हैं अगर आपको लगता है कि आपको कोई दूसरी बीमा कंपनी ज्यादा बेनेफिट दे रही है तो आपको दूसरी बीमा कंपनी का प्लान लेना चाहिए।
मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी न देना
बीमा कम्पनियां कई कारणों से आपका क्लेम रिजेक्ट कर सकती हैं। इसमे एक बड़ा कारण यह हो सकता है कि आपने अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में कम्पनी को सही जानकारी नहीं दी है। हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान खरीदते समय बीमा कम्पनी को प्री एग्जिस्टिंग डिजीज यानी जो बीमारी आपको पहले से है इसके बारे में सही जानकारी देना जरूरी है। इसके अलावा भी आपको अगर कोई मेडिकल प्राब्लम हो चुकी है तो आपको इसके बारे में बीमा कंपनी को बताना चाहिए।
कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन का फीचर है या नहीं
हेल्थ इन्श्योरेंस प्लान लेते समय आपको यह जरूर चेक करना चाहिए कि आपके प्लान में कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन की सुविधा है या नहीं। कैशलेस हॉस्पिटलाइजेशन का मतलब है कि जरूरत पड़ने पर आप हॉस्पिटल में भर्ती हो सकते हैं और मेडिकल बिल का भुगतान बीमा कंपनी करेगी। कई बार लोग इस फीचर पर समझौता कर लेते हैं और सोचते हैं कि वे पैसा जुटा कर इलाज करा लेंगे और बाद में बीमा कंपनी इलाज पर आने वाले खर्च को रीइम्बर्स कर देगी।
(साभार – मनी भास्कर)
साढ़े चार लाख रु. में नीलाम हुआ चरखे की अहमियत बताने वाला गाँधीजी का पत्र
बोस्टन : महात्मा गांधी का लिखा पत्र अमेरिका में 6 हजार 358 डॉलर (करीब 4 लाख 59 हजार रुपए) में नीलाम हुआ। इस पत्र में गांधीजी ने चरखे की अहमियत बताई है। पत्र में तारीख नहीं लिखी है। अमेरिका के आरआर ऑक्शन ने इस बात की जानकारी दी। चरखा खरीदने वाले की पहचान उजागर नहीं की गई है।
गांधीजी द्वारा यह पत्र गुजराती में यशवंत प्रसाद नामक व्यक्ति को लिखा गया था। इसमें हस्ताक्षर के रूप में बापू का आशीर्वाद लिखा गया है। गांधीजी ने यह भी लिखा कि मिलों में जो हुआ, उससे क्या उम्मीद करनी चाहिए। हालांकि, आप जो कह रहे हैं वह सही है।पत्र में गांधीजी ने लिखा- चरखा मैंने इसलिए अपनाया क्योंकि यह आर्थिक आजादी का प्रतीक है। दौरान गांधीजी लोगों को चरखा चलाने के लिए प्रेरित करते थे ताकि आजादी के आंदोलन को समर्थन मिल सके।
स्वदेशी आंदोलन के दौरान गांधीजी ने लोगों से अंग्रेजी कारखाने में बने कपड़े के बजाय खादी पहनने की अपील की थी। दक्षिण अफ्रीका से गांधीजी के आने के बाद से चरखा भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का प्रतीक बन गया।
प्रदूषण कम हो तो 87 फीसदी गाड़ी मालिक इलेक्ट्रिक वाहन के लिए तैयार : सर्वे
नयी दिल्ली : देश में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों के प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है। नए सर्वे में यह बात सामने आई है कि 87% भारतीय ड्राइवर और गाड़ी के मालिक इलेक्ट्रिक गाड़ियां खरीदने को तैयार हैं, अगर ये गाड़ियां वायु प्रदूषण को कम करें।
2,000 लोगों पर किया गया सर्वे
जलवायु के लिए काम करने वाली बेंगलुरू स्थित गैर लाभकारी संस्था द्वारा किए गए सर्वे में 2,000 से ज्यादा भारतीय ड्राइवर, मालिक और कार खरीदने की योजना बनाने वाले लोगों ने मतदान किया। इसके मुताबिक केवल 12% ड्राइवर और गाड़ी के मालिक पेट्रोल और डीजल का उपयोग करने के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ओर स्विच करेंगे। 2017 में भारत ने 900,000 इलेक्ट्रिक गाड़ियां बेची।
गाड़ियों से हो रहा वायु प्रदूषण
2018 की विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार भारत के लगभग 11% गाड़ियां कार्बन उत्सर्जक हैं। देश भर के कई शहरों में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत हैं। दुनिया के शीर्ष 20 सबसे प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं। केंद्र सरकार के थिंक टैंक, नीति आयोग द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत से एक दिन पहले जलवायु रुझान के सर्वेक्षण के निष्कर्ष 6 सितंबर, 2018 को लॉन्च किए गए थे।
इसके लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए ‘तेजी से स्वीकार करने और हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों का विनिर्माण'(FAME-2) पर बहु अनुमानित नीति को लांच करने की उम्मीद थी। इससे पहले FAME-1 को 2015 में जारी किया गया था। हालांकि, 7 सितंबर, 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने पॉलिसी में एक बड़ा बदलाव के ‘संकेत’ के बाद नीति को फिर से शुरू करने के लिए स्थगित कर दिया था।
सरकार का इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार योजना के अंतर्गत सब्सिडी देकर वाहन की कीमत को कम करने के अपने पहले के फोकस से हटकर वाहनों में बैटरी की कीमत को कम करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। एक रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्माता और विक्रेता एक ऐसी पॉलिसी का इंतजार कर रहे हैं जिसमें चार्जिंग स्टेशनों, विनिर्माण और खरीदने के लिए प्रोत्साहन सहित इलेक्ट्रिक गाड़ी के लिए इको सिस्टम बनाने के लिए एक रोडमैप बनाया जाए। ज्यादातर ड्राइवर और गाड़ी मालिक घटिया वायु की गुणवत्ता से प्रभावित हैं।
वायु प्रदूषण से सभी पीड़ित
सर्वे के अनुसार, 76% ड्राइवर और मालिक खुद, उनके दोस्त और पड़ोसी घटिया वायु गुणवत्ता से पीड़ित हैं।उत्तर देने वालों में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण से पीड़ित दिल्ली से थे। सर्वेक्षण में लगभग 91% ने कहा कि या तो उनका स्वास्थ्य या परिवार या पड़ोस में किसी के वायु प्रदूषण से प्रभावित है। इसी प्रकार, सर्वेक्षण के मुताबिक हैदराबाद (78%), चेन्नई (75%), मुंबई (74%), बेंगलुरू (71%), और कोलकाता (70%) में उच्च प्रतिशत दर्ज किए गए। सर्वे के अनुसार, खराब हवा की गुणवत्ता से बीमार होने में सबसे आम लक्षण सांस की तकलीफ, सांस लेने में परेशानी (55%), सिरदर्द (51%) और खांसी (51%) थीं। ये लक्षण दिल्ली और शहरी इलाकों में अधिक आम है। 18 से 24 वर्ष के बच्चों और ग्रामीण इलाकों में कम आम है।
चार्जिंग स्टेशनों की कमी सबसे बड़ा रोड़ा
60% उत्तर देने वालों के अनुसार, घरों के पास चार्जिंग स्टेशनों की कमी को इलेक्ट्रिक गाड़ी को खरीदने के लिए सबसे बड़ा रोड़ा के रूप में देखा गया। इसके बाद 46% ने अपर्याप्त ड्राइविंग को इसकी कमी के रूप में पहचाना गया। 31% के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियां रिचार्ज करने में लंबा समय लेती हैं। 26% के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियों में पेट्रोल या डीजल वाहन के समान सुविधाओं और शैलियों के साथ उपलब्ध नहीं हैं। 25% के अनुसार इलेक्ट्रिक गाड़ियां जो रेंज प्रदान करते हैं, उनके लिए बहुत महंगा हैं, इसमें प्रमुख आपत्तियां थीं।
दोपहिया वाहनों का बढ़ता बाजार
इलेक्ट्रिक गाड़ियों में दोपहिया वाहन भारत में बढ़त हैं। सर्वे के अनुसार भारत ऑटोमोबाइल के लिए दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है, जिसमें 2017 में लगभग 25 मिलियन आंतरिक दहन (आईसी) इंजन बेचे गए थे। किसी भी अन्य देश की तुलना में 80% से अधिक या उनमें से लगभग 20 मिलियन दोपहिया वाहन थे।
इलेक्ट्रिक गाड़ी के निर्माता सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हिकल (एसएमईवी) के अनुसार, भारत ने 2017 में बेचे जाने वाले आईसी इंजन वाहनों में से एक लाख से भी कम बिजली से चलने वाले वाहनों को बेचा। इनमें से 93% से अधिक इलेक्ट्रिक तीन-पहिया वाहन और 6% दोपहिया वाहन थे। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में दोपहिया वाहन ही अग्रणी है, न कि कार या बस।
विदेशियों का भी दोपहिया वाहनों पर जोर
कैलिफोर्निया स्थित वाहन मूल्यांकन और ऑटो रिसर्च फर्म में सीनियर डायरेक्टर और कार्यकारी विश्लेषक रेबेका लिंडलैंड ने बताया कि हम भारत में चार पहिया वाहनों के माध्यम से सामंजस्य स्थापित करने के बजाय इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन मे अपना विकास देखेंगे। हालांकि, दोपहिया निर्माता सरकार के इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर ध्यान से निराश थे। एफएएम-2 पॉलिसी के मसौदे से पता चलता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पूर्व फैक्ट्री मूल्य पर 20% सब्सिडी दी गई है।
(साभार – दैनिक जागरण)




