हिन्दी में हस्ताक्षर करने की प्रतिज्ञा लें : प्रो० सुनील कुमार ‘सुमन’
काँचरापाड़ा हार्नेट इंग्लिश मीडियम स्कूल में मनाया गया हिन्दी दिवस
काँचरापाड़ा : काँचरापाड़ा हार्नेट इंग्लिश मीडियम स्कूल में हिन्दी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य श्यामल कुमार बनर्जी ने कहा कि हिन्दी एक मात्र ऐसी भाषा है जो सम्पूर्ण भारत को एकता के सुत्र में बांधें रखी है। हिन्दी राष्ट्र की गौरव है। इस अवसर पर विद्यालय के छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। साथ ही काव्य आवृति तथा भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई जिसमें छात्रों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया जिसमें अद्वीति तिवारी, मुस्कान शर्मा, संचिता, कयनात, शिवांक्षी कुमारी, प्रिया यादव, ऋतु कुमारी, अभिनव कुमार, आयुष कुमार ,कुसुम कुमारी ,प्रियांशु दास प्रमुख रूप से भागीदारी निभाई। शिक्षकों में चमेली पाल, डॉ मधुमिता धोषाल, प्लावनी राय सेनगुप्ता,अर्पिता राय, पिंटू कुमार ठाकुर ने हिन्दी पर अपने विचार रखें तथा हिन्दी के महत्व से बच्चों को अवगत कराया। कार्यक्रम का संचालन धर्मेंद्र राय ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय की उपप्रधानाचार्य ज्योत्षना बनर्जी ने किया।
‘भारतीय भाषाओं के बीच एक सांस्कृतिक पुल है हिन्दी ’
बंद वातायन
राज्यपाल व कवि केसरीनाथ त्रिपाठी की कविता का पाठ प्रख्यात रंगकर्मी तथा कवियित्री उमा झुनझुनवाला ने किया है
नहीं रहे मशहूर कवि-पत्रकार विष्णु खरे
नयी दिल्ली : मशहूर कवि और पत्रकार विष्णु खरे नहीं रहे। वे 78 साल के थे। पिछले हफ्ते ब्रेन हैमरेज के बाद उन्हें दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां बुधवार को उन्होंने आखिरी सांस ली। खरे ने 30 जून को हिंदी अकादमी के उपाध्यक्ष का पद संभाला था। इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत की थी विष्णु खरे का जन्म मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में 1940 में हुआ था। उन्होंने इंदौर में इंग्लिश से एमए करने के बाद बतौर हिंदी पत्रकार करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ, जयपुर, दिल्ली समेत कई शहरों में हिंदी अखबार के संपादक की भूमिका निभाई। खरे का पहला काव्य संग्रह ‘एक गैर रूमानी समय में’ था। 2008 में प्रकाशित ‘पठांतर’ उनके पांच काव्य संग्रहों में आखिरी था। खरे ने ब्रिटिश कवि टीएस इलियट की कविताओं समेत कई किताबों के अनुवाद भी किए।
‘विलेज रॉकस्टार’ ऑस्कर 2019 के लिये भारत की आधिकारिक प्रविष्टि
मुम्बई : रीमा दास की राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘विलेज रॉकस्टार्स’ को 91वें अकादमी पुरस्कारों में विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिये चुना गया है। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफएफआई) ने शनिवार को इसकी घोषणा की। यह फिल्म गरीबी में पली बढ़ी लड़की धुनू की कहानी है जो इन परिस्थितियों में भी रॉक बैंड बनाने और किसी दिन अपना गिटार हासिल करने के अपने सपने से पीछे नहीं हटती। इस घोषण से प्रसन्न दास कहती हैं कि ‘विलेज रॉकस्टार’ के चुने जाने से पूर्वोत्तर के फिल्म निर्माताओं की एक बड़ी पहचान मिली है। दास ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘बहुत अच्छा लग रहा है। इसे बताने के लिए मेरे पास ज्यादा शब्द नहीं हैं। पूरी यात्रा किसी परी कथा के समान है। यह पूर्वोत्तर के लिए एक बड़ी पहचान है और मुझे लगता है कि चयनित होने वाली यह पहली असमिया फिल्म है। इसलिए मेरा मानना है कि इससे क्षेत्र के फिल्मकारों के लिए बड़ा बदलाव आएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे हमेशा से उम्मीद थी। मैं हमेशा ऐसे फेस्टिवल्स में जाना और पुरस्कार पाना चाहती थी। लेकिन मेरे लिए सबसे अहम यह है कि लोग इस फिल्म से खुद को जुड़ा हुआ महसूस करें। इस फिल्म के जरिए मुझे उसी प्रकार का भावनात्मक जुड़ाव मिला है।’’
इसकी घोषणा एफएफआई की ऑस्कर पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष एस वी राजेंद्र सिंह बाबू ने की। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह मानवीय पहलू पर बनी तकनीकी रूप से अच्छी फिल्म है जो विश्व भर में लोगों को पसंद आएगी। हम ऐसी फिल्म को सम्मान दे रहे हैं जो ऑस्कर के मंच पर पहुंचने की हकदार है। हमें इस बात की उम्मीद है कि लोग इसे देखेंगे और इसे सम्मान देंगे।’’
फिल्म का वर्ल्ड प्रीमियर टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (टीआईएफएफ) 2017 में हुआ था और 70 से अधिक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में यह फिल्म दिखाई जा चुकी है। संजय लीला भंसाली की ‘पद्मावत’, आलिया भट्ट अभिनीत ‘राजी’, रानी मुखर्जी अभिनीत ‘हिचकी’, शूजित सरकार की ‘अक्टूबर’, तबरेज नूरानी निर्देशित ‘लव सोनिया’, ‘तुमबाद’, ‘हल्का’, ‘कड़वी हवा’ और हाल में प्रदर्शित ‘मंटो’ उन 28 फिल्मों की सूची का हिस्सा थी, जिसे अगले साल के ऑस्कर के लिये सौंपा गया था। गौरतलब है कि किसी भी भारतीय फिल्म ने अब तक ऑस्कर पुरस्कार नहीं जीता है। विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्म की श्रेणी में अंतिम पांच में जगह बनाने वाली आखिरी भारतीय फिल्म आशुतोष गोवरीकर निर्देशित ‘लगान’ थी। अमित मासुरकर निर्देशित और राजकुमार राव अभिनीत हिंदी फिल्म ‘न्यूटन’ पिछले साल ऑस्कर के लिये भारत की आधिकारिक प्रविष्टि थी।
‘टाइम’ पत्रिका 19 करोड़ डॉलर में बिकी
वाशिंगटन : अमेरिकी मीडिया कंपनी मेरेडिथ कॉर्प ने मशहूर ‘टाइम’ पत्रिका सेल्सफोर्स के सह-संस्थापक मार्क बेनीऑफ और उनकी पत्नी को 19 करोड़ डॉलर में बेच दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की खबर के मुताबिक यह पत्रिका सेल्सफोर्स के चार सह-संस्थापकों में एक मार्क बेनीऑफ को 19 करोड़ डॉलर में बेची गई है। सेल्सफोर्स ‘क्लाउड कंप्यूटिंग’ की दिग्गज कंपनी है।’पीपल’ और ‘बेटर होम्स एंड गार्डन्स’ जैसी पत्रिकाओं का प्रकाशन करने वाली मेरेडिथ ने ‘टाइम इन्क’ के चार पत्रिकाओं को मार्च में बेचने की पेशकश की थी। ‘टाइम’ के बाद अब बची हुई तीन पत्रिकाओं फॉर्च्यून, मनी और स्पोर्ट्स इल्टस्ट्रेटेड की बिक्री पर भी मोल-भाव चल रहा है।
तीन तलाक देने पर 3 साल जेल, मोदी सरकार के अध्यादेश को राष्ट्रपति की मंजूरी
नयी दिल्ली : एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) देना अब अपराध हो जाएगा। ऐसा करने पर 3 साल जेल की सजा होगी। केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को इससे संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दे दी। जिस पर देर रात राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इसे अवैध बता चुका है।
यह अध्यादेश छह महीने तक लागू रहेगा। इस दौरान तीन तलाक विधेयक को राज्यसभा से पारित कराना होगा। 9 अगस्त को यह विधेयक लोकसभा में पारित हो गया था। कांग्रेस इसमें कुछ बदलाव चाहती है। इसलिए यह राज्यसभा से पारित नहीं हो पाया था। पिछले साल 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने इस पर फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा था कि एक साथ तीन तलाक कहने की प्रथा यानी तलाक-ए-बिद्दत असंवैधानिक और गैर-कानूनी है। केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस अध्यादेश का मुख्य घटक यह है कि अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएं। अभियुक्त को पुलिस जमानत नहीं दे सकेगी। मजिस्ट्रेट पीड़ित पत्नी का पक्ष सुनने के बाद वाजिब वजहों के आधार पर जमानत दे सकते हैं। उन्हें पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार होगा। बच्चा मां के संरक्षण में ही रहेगा। उसका भी गुजारा देना होगा। रविशंकर प्रसाद ने बताया कि जनवरी 2017 से सितंबर 2018 तक तीन तलाक के 430 मामले सामने आए। इनमें 229 मामले सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले और 201 केस उसके बाद के हैं।
इस दौरान सबसे ज्यादा तीन तलाक के मामले उत्तरप्रदेश में सामने आए। कोर्ट के फैसले से पहले वहां 126 और उसके बाद 120 मामले सामने आए। संविधान के अनुच्छेद 123 के मुताबिक, जब संसद सत्र नहीं चल रहा हो तो राष्ट्रपति केन्द्र के आग्रह पर कोई अध्यादेश जारी कर सकते हैं। यह अध्यादेश अगला सत्र समाप्त होने के बाद छह सप्ताह तक लागू रह सकता है। जिस विधेयक पर अध्यादेश लाया जाता है, उसे संसद में अगले सत्र में पारित करवाना होता है। ऐसा नहीं होने पर राष्ट्रपति इसे दोबारा भी लागू कर सकते हैं।
तीन साल पहले पति शहीद हुआ था, अब पत्नी सेना में बनी लेफ्टिनेंट
जम्मू : जम्मू-कश्मीर में सांबा जिले के बारी ब्रह्माना कस्बे में रहने वाली नीरू साम्ब्याल पति की शहादत को भुलाकर सेना में शामिल हो गई हैं। हाल ही में उन्होंने बतौर लेफ्टिनेंट आर्मी ज्वाइन की है। पति राइफलमैन रविंदर साम्ब्याल 2 मई, 2015 को अपनी रेजिमेंट के साथ एक ड्रिल के दौरान शहीद हो गए थे। कॉलेज में एनसीसी का सी सर्टिफिकेट हासिल करने वाली नीरू को 9 सितंबर को आर्मी ऑर्डिनेंस कोर में लेफ्टिनेंट बनाया गया। नीरू ने 2017 में सेना की परीक्षा दी थी और चेन्नै स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में एक साल की कड़ी ट्रेनिंग पूरी की।
नीरू बताती हैं कि 2 मई, 2015 उनके जीवन का सबसे बुरा दिन था, जब उन्होंने अपने पति को खोया। पति के गुजरने के बाद उनकी जिंदगी काफी मुश्किल हो गई थी। कुछ वक्त बाद उन्होंने खुद को संभाल लिया। नीरू के मुताबिक, उनकी दो साल की बेटी उनके लिए प्रेरणा बनी। इसके बाद नीरू ने सेना में शामिल होने का फैसला किया और कई कोशिशों के बाद सफल हो गईं। नीरू बताती हैं कि वे राजपूत परिवार से हैं, जहां विधवा महिलाओं को सामाजिक बंधनों का सामना करना पड़ता है। नीरू के मुताबिक, जब उन्होंने अपनी सास से इस बारे में बात की तो वे उनकी हिम्मत बन गईं। नीरू के भाई वरिंदर सिंह सलाथिया सांबा जिले के गुरहा-सलाथिया गांव में रहते हैं और एयरफोर्स में हैं। वरिंदर अपनी बहन के इस कदम को काफी हिम्मत भरा बताते हैं।
मनचलों की खैर नहीं : ट्रेन में महिलाओं से छेड़खानी पर हो सकती है 3 साल की सजा
नयी दिल्ली : सफर के दौरान ट्रेन में महिलाओं से छेड़खानी और उन्हें परेशान करने वाले मनचलों की अब खैर नहीं होगी। ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने रेलवे अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। प्रस्तावित कानून के तहत अगर कोई छेड़छाड़ करता पकड़ा जाता है तो उसे 3 साल की सजा हो सकती है। रेलवे के एक अधिकारी का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो महिलाओं की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले को 3 साल तक की सजा मिल सकेगी। फिलहाल भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) के तहत इस तरह के मामलों में अधिकतम एक साल की सजा का प्रावधान है।
राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में रेल मंत्रालय की ओर से कहा गया था कि 2014 से 2016 के बीच रेल सफर के दौरान महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों में 35 फीसद तक की बढ़ोतरी हुई है। 2014 में जहां 448 मामले सामने आए थे। वहीं, 2015 में 553 और 2016 में 606 मामले सामने आए।
आरपीएफ की ओर से महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में यात्रा करने वाले पुरुषों पर लगने वाले जुर्माने को भी 500 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये करने का प्रस्ताव दिया है। एक अन्य प्रस्ताव में ई-टिकटिंग में जालसाजी करने वालों पर भी दो लाख का जुर्माना लगाने और तीन साल की सजा की बात कही गई है।




