Tuesday, July 7, 2026
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‘चन्द्रयान-2’ चंद्रमा वहाँ उतरेगा जहाँ अब तक कोई नहीं पहुँचा

हैदराबाद : इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि भारत का चन्द्र अभियान ‘चन्द्रयान-2’ सोच समझकर लिया गया जोखिम है क्योंकि ऐसे 50 फीसद प्रक्षेपण असफल ही हुए हैं। उन्होंने कहा कि ‘चन्द्रयान-2’ चन्द्रमा पर ऐसे स्थान पर उतरेगा जहाँ अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है।
सिवन ने कहा कि चन्द्रमा पर ‘चन्द्रयान-2’ 70 डिग्री अक्षांश से ऊपर लैंड करेगा। उन्होंने बताया कि भारत 2019 के मध्य में स्मॉल सेटेलाइट लांच व्हीकल (एसएसएलवी) का पहला प्रक्षेपण करेगा। यह दुनिया का सबसे सस्ता लांच व्हीकल होगा। इसके डिजायन में काफी नवाचार किया गया है ताकि इसे 70 दिनों की बजाय 72 घंटों में असेंबल किया जा सके। लैपटॉप के साथ सिर्फ छह लोग इसे असेंबल कर सकते हैं।
इसरो अध्यक्ष ने कहा कि सबसे ज्यादा इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले देशों में भारत का स्थान विश्व में दूसरा है, लेकिन ब्रॉडबैंड स्पीड के मामले में भारत का स्थान दुनिया में 76वां है। उन्होंने बताया कि 2019 के अंत तक जीसैट-11, जीसैट-29 और जीसैट-20 को प्रक्षेपित किया जाएगा और उसके बाद देश में इंटरनेट की गति100 जीबीपीएस से अधिक हो जाएगी।
सिवन ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अगले चार साल में 30 पीएसएलवी, 10 जीएसएलवी एमके-3 और 50 स्पेसक्राफ्ट के प्रक्षेपण के लिए 10,900 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक का होगा विलय

नयी दिल्ली : सरकारी बैंकों को मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम उठाते सरकार ने बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक के विलय घोषणा कर दी है। इन तीनों बैंकों को मिलाकर जो बैंक बनेगा, उसका आकार 14.82 लाख करोड़ रुपये का होगा और वह एसबीआइ तथा पीएनबी के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा।
ब्रांच और एटीएम बढ़ेंगे
बाजार विशेषज्ञ आकाश जिंदल का कहना है कि तीनों बैंकों के विलय से ग्राहकों को अब बैंक संबंधित कार्य या एटीएम से पैसे निकालने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। विलय के बाद बैंकों की नई शाखाओं का निर्माण किया जाएगा और बैकों की संख्या में वृद्धि होगी। इसी के साथ एटीएम की संख्या में वृद्धि होगी। आपको अपने बैंक के एटीएम से पैसे निकालने के लिए भी दूर नहीं जाना पड़ेगा। कई नए एटीएम की स्थापना की जाएगी, जिसका ग्राहकों को लाभ मिलेगा।
नयी तकनीकों से लैस होंगे बैंक
तीनों बैंकों के विलय से बना बैंक देश का तीसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक होगा। इस प्रक्रिया के बाद बैंकों में नयी तकनीक का विकास होगा। तीनों बैंक नई तकनीक की तरफ अग्रसर होंगे, जिससे ग्राहकों का फायदा होगा। लंबी-लंबी लाइनों से छुटकारा मिलेगा।
एफडी की दर पर पड़ेगा असर
तीनों बैंकों के ग्राहकों को दिए जाने वाले एफडी (Fixed deposit) पर दिए जाने वाला ब्याज दर अलग है। आपके मन में भी ये सवाल आया होगा कि बैंकों के विलय से एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर क्या कोई असर पड़ेगा। पुराने ग्राहकों को एफडी पर मिलने वाले ब्याज दर पर कोई असर नहीं पड़ेगा, हालांकि नए ग्राहकों के लिए इनमें बदलाव किया जा सकता है।
एटीएम और चेकबुक पर बदल सकता है बैंक का नाम
तीनों बैंकों के विलय के बाद हो सकता है कि आने वाले दिनों में आपके एटीएम और चेकबुक पर उस बैंक का नाम ही बदल जाए, जहां आपका अकाउंट है। इससे पहले भी ऐसा हो चुका है उस समय एसबीआइ ने अपने 7 बैंकों का विलय किया था।
सुरक्षित रहेगा आपका पैसा
अगर आपको डर है कि इस प्रक्रिया से आपके बैंक डिपॉजिट पर कोई असर होगा, तो बिल्कुल परेशान न हों। इस प्रक्रिया से आपके बैंक डिपॉजिट पर कोई असर नहीं होगा और वह सेफ रहेगा, क्योंकि ऐसे मर्जर पहले भी हुए हैं। कोटक महिंद्रा बैंक में आइएनजी वैश्य बैंक का विलय किया जा चुका है। उस समय भी ग्राहकों का पैसा सेफ रहा था।
एटीएम और पासबुक होंगे अपडेट
बैंकों के मर्ज होने से उस बैंक के ग्राहकों का थोड़ा पेपरवर्क बढ़ जाएगा। इसके लिए केवाईसी का प्रॉसेस फिर से करना होता है। वहीं, आपका एटीएम और पासबुक नए सिरे से अपडेट होता है तो इसके लिए हल्का पेपरवर्क करना पड़ सकता है। हालांकि इसमें कुछ वक्त भी लग सकता है।
कर्ज के ब्याज दर पर नहीं पड़ेगा असर
बैंकों के विलय से आपके कर्ज पर कोई असर नहीं होगा और आपको पहले की तरह उस पर ब्याज देना होगा। जब कोई बैंक किसी दूसरे बैंक में मिल जाता है तो कर्ज का पैसा उस बैंक में ट्रांसफर हो जाता है और मौजूदा ब्याज दर ही उस पर लागू होता है।
बैंकिंग व्यवस्था में होगा सुधार
देश की बैंकिंग व्यवस्था के सामने एनपीए की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा कि देश की बैंकिंग व्यवस्था में सुधार की जरूरत है और सरकार बैंकों की पूंजीगत जरूरतों का ख्याल रख रही है। विलय तक तीनों बैंक स्वतंत्र रूप से काम करते रहेंगे।
इन राज्यों को होगा फायदा
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के साथ विजया बैंक और देना बैंक को मिलाने के बाद बनने वाला देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक संभवत: बैंक ऑफ बड़ौदा के नाम से ही संचालित होगा। हालांकि अंतिम फैसला विलय प्रक्रिया पूरी होने के बाद में ही होगा। अभी तक गुजरात, महाराष्ट्र व उत्तर भारत के कुछ राज्यों में प्रमुखता से काम कर रहे बीओबी को इस विलय से सबसे ज्यादा फायदा होगा। उसे तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल जैसे अपेक्षाकृत संपन्न राज्यों में एक विशाल बैकिंग नेटवर्क हासिल होगा।
बीओबी के प्रमुख पीएस जयकुमार के मुताबिक, ‘तीनों बैंकों के लिए यह समान अवसर होगा। हमें एक साथ चार बड़े राज्यों में कारोबारी विस्तार का मौका मिलेगा।’ तीनों बैंकों के विलय से जो नया बैंक बनेगा, उससे बैंकिंग ऑपरेशन बढ़ेगा और स्थिति में सुधार आएगा। विलय के बाद कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
जेटली ने कहा कि सरकार द्वारा विलय की घोषणा के मद्देनजर इन तीनों बैंकों के कर्मचारियों को अपने करियर को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं। किसी भी कर्मचारी को ऐसी सेवा दशाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा, जो उनके लिए प्रतिकूल प्रकृति की हो। सबसे बेहतर सेवा दशाएं उन सभी पर लागू होंगी। आकाश जिंदल का भी कहना है कि सरकार को कर्मचारियों के लिए ऐसी नीति अपनानी चाहिए जो उनके हित में होगी।

(साभार – दैनिक जागरण)

लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में 0.4 प्रतिशत तक की वृद्धि

नयी दिल्ली : केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) और सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) समेत लघु बचत योजनाओं के लिए ब्याज दर अक्तूबर-दिसम्बर तिमाही के लिए 0.4 प्रतिशत तक बढ़ा दी है।
लघु बचत योजनाओं के लिए ब्याज दरों को तिमाही के आधार पर संशोधित किया जाता है।
वित्तमंत्री द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही के लिए विभिन्न लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें संशोधित की जाती हैं।
पाँच वर्ष की सावधि जमा, आवर्ती जमा और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना की ब्याज दरें बढ़ाकर क्रमश: 7.8 प्रतिशत, 7.3 प्रतिशत और 8.7 प्रतिशत कर दी गयी हैं।
हालांकि बचत जमा के लिए ब्याज दर चार प्रतिशत बरकरार है। पीपीएफ और एनएससी पर मौजूदा 7.6 प्रतिशत की जगह अब आठ प्रतिशत की सालाना दर से ब्याज मिलेगा। किसान विकास पत्र पर अब 7.7 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा और अब यह 112 सप्ताह में परिपक्व हो जाएगा।
सुकन्या समृद्धि खातों के लिए संशोधित ब्याज दर 8.5 प्रतिशत होगी। एक से तीन साल की सावधि जमा पर ब्याज दर में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है।

देश को स्वस्थ रखने आया आयुष्मान भारत, 50 करोड़ गरीबों को मिलेगा लाभ

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड से आयुष्मान भारत बीमा योजना- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का शुभारम्भ किया। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत सरकार का देश के 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को पांच लाख रुपए प्रति परिवार स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा मुहैया कराने का लक्ष्य है। सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना के मुताबिक, ग्रामीण इलाके के 8.03 करोड़ और शहरी इलाके के 2.33 करोड़ गरीब परिवारों को इससे लाभ होगा। लगभग 50 करोड़ लोग इस योजना के दायरे में आएंगे। इसके लिए नेशनल हेल्थ एजेंसी ने नेशनल हेल्थ इंसोरेंस के तहत आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना की वेबसाइट और हेल्पलाइन को लांच कर दिया है। ऐसे में आप आयुष्मान योजना के लाभार्थी है या नहीं। यह आप इस एनएचए द्वारा शुरू की वेबसाइट पर देख सकते है। साथ ही इससे सम्बन्धित मदद के हेल्पलाइन पर भी बात कर सकते है। साथ ही अस्पतालों में आयुष्मान मित्र से भी मदद ले सकते है।
लाभार्थियों की सूची में नाम ऐसे जानें
आयुष्मान भारत- नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन मिशन (एबी-एनएचपीएम) को लागू करने वाली नेशनल हेल्थ एजेंसी (एनएचए) ने एक वेबसाइट तथा हेल्पलाइन नम्बर भी जारी किया है, जिसके जरिए यह पता किया जा सकता है कि लाभार्थियों की अंतिम सूची में किसी व्यक्ति नाम है या नहीं। इसके लिए कोई व्यक्ति आयुष्मान भारत की वेबसाइट mera.pmjay.gov.in पर अपना नाम चेक कर सकता है या फिर हेल्पलाइन नंबर 14555 पर कॉल भी कर सकता है। लाभार्थी को अपना मोबाइल नम्बर दर्ज कराना होगा, जिस पर ओटीपी के जरिए सत्यापन होगा और उसके बाद बिना किसी दस्तावेज के केवाईसी (अपने कस्टर को जानिए) की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
आयुष्मान भारत योजना की देश के कर्इ राज्यों और जिलों में पायलट परियोजना की शुरुआत हो चुकी है। लाभार्थियों की मदद करने के लिए आयुष्मान मित्र भी तैनात किये गये है।ये आयुष्मान मित्र आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की मदद करेंगे। वह लाभार्थी व अस्पताल के बीच समन्वय स्थापित करेंगे।

इन अस्पतालों में होगा इलाज
आयुष्मान भारत योजना का लाभ देश भर में दस करोड़ परिवारों को लोगों को मिलेगा।साथ ही इस योजना के लाभार्थी देश भर में सरकारी या निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज करा सकेंगे। इतना ही नहीं सभी राज्यों के सरकारी अस्पतालों को इस योजना में शामिल माना जाएगा। इसके साथ ही प्राइवेट और र्इएसआर्इ अस्पताल में भी शामिल रहेंगे। यहाँ मरीज को भर्ती कराने से लेकर उनका बीमा कम्पनी से भुगतान कराने का सारा काम आयुष्मान मित्र सम्भालेंगे।
आयुष्मान भारत योजना के लाभ
आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष इलाज के लिए 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा।
देश में 1.5 लाख गाँवों में स्वास्थ्य व जागरुकता केन्द्र खुलेंगे। यहाँ सिर्फ बीमारी का इलाज ही नही होगा बल्कि यहाँ पर स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा भी मिलेगी।
आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष इलाज के लिए 5 लाख रुपए तक का बीमा कवर मिलेगा। इस योजना से देश के 10 करोड़ परिवारों और 50 करोड़ लोगों को फायदा होने की सम्भावना है।
यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और वरिष्ठ नागरिक बीमा योजना का स्थान लेगी।
बीमा कवर के लिए उम्र की भी बाध्यता नहीं रहेगी। इसमें पहले से मौजूद बीमारियाँ भी कवर होंगी।
ये योजना कैशलेस होगी और इसमे परिवार के सदस्यों और उम्र का बन्धन नहीं होगा। योजना में रजिस्टर्ड किसी भी निजी या सरकारी अस्पताल में इलाज हो सकेगा। पिछले 10 साल में मेडिकल का खर्च 300 फीसदी बढ़ गया है। देश में मेडिकल का 80 फीसदी खर्च लोग अपनी जेब से उठाते हैं। इस खर्च का बोझ आम आदमी पर न पड़े इसलिए मोदी सरकार ने आयुष्मान भारत योजना बनाई है।

नहीं रहीं देश की पहली महिला आइएएस, जेएनपीटी की चेयरपर्सन अन्‍ना मल्‍होत्रा

मुम्बई : आजादी के बाद पहली महिला आइएएस और कर्इ् प्रमुख पदों पर जिम्‍मेदारी सम्भालने वालीं अन्‍ना राजम मल्‍होत्रा का निधन मुम्बई के अन्धेरी स्थित उनके निवास पर हो गया। परिवार के सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह 91 वर्ष की थीं। मुंबई में उनका अंतिम संस्‍कार किया जाएगा।
अन्‍ना राजम जार्ज का जन्‍म केरल के एर्नाकुलम जिले में जुलाई 1927 को हुआ था। कोझिकोड में प्रारंभिक शिक्षा के बाद मद्रास विश्‍वविद्यालय में उच्‍च शिक्षा के लिए वह चेन्‍नर्इ में शिफ्ट हो गईं। मल्‍होत्रा ने 1951 में सिविल सर्विसेज को ज्‍वाइन किया और उन्‍होंने मद्रास कैडर का विकल्‍प चुना। उन्‍होंने तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री सी राजगोपालाचारी के नेतृत्‍व में मद्रास राज्‍य की सेवा की। उन्‍होंने आरएन मल्‍होत्रा से शादी की जो 1985 से 1990 तक भारत के रिजर्व बैंक के गर्वनर रहे। मुम्बई के पास देश के आधुनिक बंदरगाह जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) की स्थापना में उनका प्रमुख योगदान रहा। जेएनपीटी के कार्यान्‍वयन के दौरान वह इसकी अध्यक्ष थीं। केन्द्र सरकार में प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्‍हें जेएनपीटी का चार्ज मिला। 1989 में उन्‍हें पदम भूषण अवार्ड से सम्‍मानित किया गया। 1982 में दिल्‍ली में एशियन खेलों के दौरान उन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने केन्द्रीय सेवा में नियुक्ति के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय में सेवा की थी। रिटायर होने के बाद होटल लीला वेंचर लिमिटेड के डायरेक्‍टर पद पर काम किया।

अमेरिका में ग्रीन कार्ड के लिए छोड़ना होगा सरकारी सहायता का लाभ

सैन डिएगो : ट्रंप प्रशासन ने शनिवार को ऐसे नियम सुझाए हैं जिसके तहत यदि प्रवासी नागरिक चिकित्सा सहायता, फूड स्टाम्प, आवास वाउचर्स तथा अन्य प्रकार की सरकारी सहायता का लाभ उठाते हैं तो उन्हें ग्रीन कार्ड देने से इनकार किया जा सकता है। संघीय कानून में पहले ही यह शर्त थी कि ग्रीन कार्ड पाने की चाह रखने वालों को साबित करना होगा कि वे बोझ नहीं बनेंगे अथवा सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठाएंगे लेकिन नए नियमों में शर्तों की लम्बी फेहरिस्त है। गृह सुरक्षा मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में और अतीत में एक सीमा से अधिक कुछ खास सरकारी लाभ पाने को ग्रीन कार्ड अथवा अस्थायी प्रवास की मंजूरी देने के लिए भारी नकारात्मक तथ्य माना जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रस्ताव में यह स्पष्ट है कि जो भी अमेरिका स्थायी या अस्थायी रूप से आना और यहां रहना चाहते हैं उन्हें अपना खर्च खुद उठाना होगा और वे सरकारी लाभ पर निर्भर नहीं रहेंगे। मंत्रालय की वेबसाइट पर 447 पन्नों वाला यह प्रस्ताव जारी किया गया है। आने वाले वक्त में इसे संघीय रजिस्टर में डाला जाएगा और प्रभाव में आने से पहले 60 दिन तक इस पर लोगों की राय ली जाएगी। वहीं, राष्ट्रीय आप्रवासी विधि केन्द्र की कार्यकारी निदेशक मारीलेना हिनकैपी ने कहा कि यह प्रस्ताव देश के अनेक परिवारों और समुदायों के स्वास्थ्य और उनकी भलाई पर हमला है।

आधुनिक भारत के निर्माता एम. विश्वेश्वरैया

एम. विश्वेश्वरैया को कौन नहीं जानता। कर्नाटक में कृष्णसागर बांध के वास्तुकार, बांधों में पानी का व्यर्थ प्रवाह रोकने के लिए इस्पात के दरवाजे तैयार कर एक चमत्कारिक कार्य कर दिखाया। वह एक प्रख्यात इंजीनियर और कुशल राजनेता थे। उन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सर एम. विश्वेश्वरैया का जन्म मैसूर के पूर्व रियासत कोलार जिले (कर्नाटक) के मुड्डेनहल्ली गांव में 15 सितम्बर 1860 को हुआ था। उनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के विद्वान और आयुर्वैदिक चिकित्सक थे। उनकी माता का नाम वेंकट चेम्मा था। वह एक धार्मिक महिला थीं।
सर एम. विश्वेश्वरैया केवल 15 साल के ही थे जब उनके पिता का देहांत हो गया। विश्वेश्वरैया ने चक्कबालापुर में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। तत्पश्चात उच्च शिक्षा के लिए बेंगलूर आ गए। 1881 में बी.ए. की परीक्षा पास की। उन्हें मैसूर की सरकार से आर्थिक मदद मिल गई और उन्होंने इंजीनियरिंग का अध्ययन करने के लिए पूना के साइंस कालेज में दाखिला ले लिया। 1883 में एल.सी.ई. एवं एफ.सी.ई. की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।

गूगल ने भी इनको याद किया

इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करते ही उन्हें बंबई सरकार ने नौकरी की पेशकश की और वह नासिक में सहायक अभियंता के पद पर नियुक्त हुए। एक इंजीनियर के रूप में उनके कुछ अद्भुत कारनामों ने अपनी पहचान बनाई। उन्होंने सक्खर नामक शहर को सिंधु नदी से पानी की आपूर्ति के लिए एक तरह योजना बनाई। उन्होंने ब्लॉक सिस्टम नामक एक नई सिंचाई प्रणाली तैयार की जिससे पानी के व्यर्थ प्रवाह को रोकने के लिए इस्पात का दरवाजा तैयार किया। कर्नाटक में कृष्णाराज सागर बांध उनके वास्तुकार का एक बेजोड़ नमूना है। उनकी योजनाओं को देख कर सभी इंजीनियर हैरान हो जाते थे। उनकी प्रखर बुद्धि का सब ने लौहा माना।
विश्वेश्वरैया का जीवन बहुत ही सादा एवं साधारण था। उनकी ईमानदारी एवं निष्ठा से ही 1912 में मैसूर के महाराजा ने अपने दीवान के रूप में नियुक्त किया। मैसूर में दीवान के रूप में आपने राज्य में शैक्षणिक और औद्योगिक विकास के लिए अथक प्रयास किया। भद्रावती आयरन एंड स्टील वर्क उनके औद्योगिक विकास का मुंह बोलता उदाहरण है।
उस समय मैसूर राज्य में लगभग 4500 स्कूल थे। उन्होंने इनकी संख्या 6500 मात्र 6 वर्षों में ही पहुंचा दी। महिलाओं के लिए शिक्षा पर उन्होंने काफी जोर दिया। यही कारण था कि उन्होंने न सिर्फ स्कूल खोला बल्कि लड़कियों के लिए छात्रावास का निर्माण भी करवाया। विदेश अध्ययन हेतु जाने वालों के लिए छात्रों का सरकार की ओर से छात्रवृत्ति भी दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
वह एक निडर देशभक्त थे। उन दिनों मैसूर महाराजा द्वारा प्रति वर्ष दशहरा उत्सव के दौरान एक दरबार के आयोजन की परम्परा थी। दरबार के दिन अंग्रेजों को बैठने के लिए आराम कुर्सियाँ दी जाती थीं एवं भारतीयों को फर्श पर बैठने के लिए कहा जाता था। उनके विरोध से ही अगले वर्ष से दोनों कुर्सियाँ उपलब्ध करवाई गईं। ब्रिटिश अधिकारियों के विरोध के बावजूद उन पर इसका कोई प्रभाव न पड़ा।
सर एम. विश्वेश्वरैया स्वेच्छा से 1918 में मैसूर के दीवान पद से सेवानिवृत्त हुए। अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने सक्रिय रूप से काम किया। उन्होंने अपने राष्ट्र के लिए अमूल्य योगदान दिया। 1955 में उन्हें भारत सरकार द्वारा ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। उनके 100 वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष्य में भारत सरकार ने उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया। 101 की उम्र में 14 अप्रैल 1962 को विश्वेश्वरैया का निधन हो गया।

देवताओं के इंजीनियर हैं विश्वकर्मा

महादेव ने ब्रह्मा,विष्णु को अवतरित कर सृष्टि के सृजन,पालन की जिम्मेदारी सौंपी। इस जिम्मेदारी के निर्वाहन हेतु ब्रह्मा ने अपने वंशज देव शिल्पी श्री विश्वकर्मा जी को आदेश किया। जिन्होंने तीनो लोकों का निर्माण किया। भगवान विश्वकर्मा की महत्ता इस बात से समझी जा सकती है कि उनके महत्व का वर्णन ऋग्वेद में 11 ऋचाएं लिख कर किया गया है। उनकी अनंत व अनुपमेय कृतियों में सतयुग में स्वर्गलोक, त्रेतायुग मे लंका, द्वापर में द्वारका, कलयुग में जगगन्नाथ मंदिर की विशाल मूर्ति आदि हैं।
विश्वकर्मा पूजा का आध्यात्मिक महत्व
जिसकी सम्पूर्ण सृष्टि और कर्म व्यापार है वह विश्वकर्मा है। सहज भाषा मे यह कहा जा सकता है कि सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी कर्म सृजनात्मक है, जिन कर्मो से जीव का जीवन संचालित होता है। उन सभी के मूल में विश्वकर्मा है। अतः उनका पूजन जहां प्रत्येक व्यक्ति को प्राकृतिक ऊर्जा देता है वहीं कार्य में आने वाली सभी अड़चनों को खत्म करता है।
17 सितम्बर को ही क्यों होता है पूजन
वर्ष 2018 में भाद्रपद मास के अंतिम तिथि अर्थात 17 सितम्बर को पड़ी है। भारत के कुछ भाग में यह मान्यता है कि अश्विन मास के प्रतिपदा को विश्वकर्मा जी का जन्म हुआ था, लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि लगभग सभी मान्यताओं के अनुसार यही एक ऐसा पूजन है जो सूर्य के पारगमन के आधार पर तय होता है। इस लिए प्रत्येक वर्ष यह 17 सितम्बर को मनाया जाता है।

स्वतंत्रता सेनानी गौड़ चंद्र महापात्र का निधन

भुवनेश्वर : ओड़िशा के भद्रक जिले के एक सरकारी अस्पताल में मंगलवार को वयोवृद्ध स्वतंत्रता सेनानी गौड़ चंद्र महापात्र का 104 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। महापात्र के परिजन ने यह जानकारी दी।
साल 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल की सजा काट चुके महापात्र वृद्धावस्था संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। महापात्र के परिवार में उनकी पत्नी मीरा देवी, चार बेटियां और नौ बेटे हैं। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने महापात्र के निधन पर शोक व्यक्त किया और उन्हें ‘‘सच्चा गांधीवादी’’ करार दिया।

136 साल पहले उदयपुर में लिखा गया था आधुनिक हिन्दी का पहला ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’

उदयपुर : आधुनिक हिंदी के मानक गद्य की सबसे पहली पुस्तक उदयपुर में 136 साल पहले वर्ष 1882 में लिखी गई थी। यह पुस्तक है- सत्यार्थ प्रकाश। इसे लिखा था स्वामी दयानन्द सरस्वती ने। उदयपुर में इस पुस्तक के लेखन स्थल पर आज सत्यार्थ प्रकाश भवन बना हुआ है। दुनियाभर से आने वाले पर्यटक इसे देखते हैं। वे इसे आर्य समाज के संस्थापक और धर्म सुधार आंदोलन के प्रमुख व्यक्ति दयानन्द सरस्वती के ग्रंथ के रूप में देखते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि हिन्दी साहित्य के इतिहासकारों ने अपने ग्रंथों में सत्यार्थ प्रकाश को हिन्दी के उन प्रारम्भिक ग्रंथों में माना है, जिनके गद्य को बाद में सभी ने परम्परा के रूप में ग्रहण किया।
सत्यार्थ प्रकाश के प्रकाशन से पहले हिन्दी गद्य की भाषा ब्रज और अवधी से बहुत अधिक प्रभावित थी। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने हिंदी साहित्य का इतिहास में माना है कि 1868 से 1893 का कालखंड हिन्दी गद्य के विकास का समय था। स्वामी दयानन्द सरस्वती ने वैसे 1873 के आसपास सत्यार्थ प्रकाश का लेखन शुरू किया था, लेकिन इसे पूरा उदयपुर आकर किया।


उनसे पहले आमतौर पर ब्रजभाषा को ही गद्य के रूप में लिखा जा रहा था। उस समय हिन्दी में हों को हूजिए, हो को होय, आता है को आवता है, आए को आवे, जगह को जाघा, इसलिए को इस करके या भाषा को भाखा लिखा जाता था। उस समय हिन्दी साहित्य में ‘सांसें आती जाती हैं’को ‘आतियां जातियां जो सांसें हैं’ लिखा जाता था। तब कहानी या लेख की भाषा गद्य तो होती थी, लेकिन हर पंक्ति के आखिर में तुक मिलाकर लिखा जाता था।
स्वामी दयानन्द सरस्वती को महाराणा सज्जन सिंह ने बुलवाया था : सत्यार्थ प्रकाश भवन के अध्यक्ष अशोक आर्य बताते हैं कि स्वामी दयानन्द सरस्वती को महाराणा सज्जन सिंह ने उदयपुर आमंत्रित किया था। उन्हें एक अलग भवन में ठहराया था। स्वामी जी ने यहीं सत्यार्थ प्रकाश लिखा।
वे यहां 10 अगस्त 1882 से 27 फरवरी 1883 तक ठहरे थे। इसके बाद वह जोधपुर होते हुए पुष्कर चले गए थे। डॉ. चंद्रभानु सीताराम सोनवणे ने हिन्दी गद्य साहित्य में लिखा है कि सत्यार्थ प्रकाश आधुनिक हिंदी का सर्वाधिक लोकप्रिय ग्रंथ है। हिन्दी को नई चाल में ढालने में स्वामी दयानन्द सरस्वती का स्थान भारतेंदु हरिश्चंद्र से कम नहीं है।
दयानन्द की प्रेरणा से निकला था पहला हिन्दी दैनिक : 1856 में जन्मे मनीषी समर्थदान चारण ने स्वामी दयानन्द सरस्वती की प्रेरणा से 1886 में अजमेर में राजस्थान प्रेस यंत्रालय की स्थापना कर राजस्थान समाचार साप्ताहिक प्रारंभ किया था। 1904 में यह पत्र दैनिक हो गया, जिसने राजस्थान में दैनिक समाचार पत्रों की आधार भूमि तैयार की। नागरी लिपि में छपने वाला यह दैनिक 12 पेज का था। चंद्रगुप्त वार्ष्णेय ने भी राजस्थान समाचार को प्रदेश का पहला दैनिक पत्र माना था।

(साभार – दैनिक भास्कर)