Sunday, April 12, 2026
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इंग्लिश विंग्लिश की अभिनेत्री सुजाता कुमार का कैंसर से निधन

मुम्बई : इंग्लिश विंग्लिश’ फिल्म में श्रीदेवी की बहन का किरदार निभाने वाली कलाकार सुजाता कुमार का कल रात निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने पीटीआई-भाषा को बताया कि सुजाता चौथे चरण के मैटास्टैटिक कैंसर से जूझ रही थीं और लीलावती अस्पताल में भर्ती थीं। सुजाता की छोटी बहन सुचित्रा कृष्णमूर्ति ने भी ट्विटर पर उनके निधन की जानकारी दी। कृष्णमूर्ति ने ट्वीट किया, ‘‘हमारी प्रिय सुजाता कुमार का निधन हो गया और वह हमें एक अकल्पनीय रिक्तता में छोड़कर एक बेहतर स्थान के लिए प्रस्थान कर गईं। वह हमें 19 अगस्त 2018 को रात 11.26 बजे छोड़ कर चली गईं….जीवन फिर पहले जैसा कभी नहीं हो सकता….।’’ सुजाता ने ‘गोरी तेरे प्यार में’ और ‘रांझणा’ जैसी फिल्मों के अलावा अनेक टीवी शो में अभिनय किया था।

मिथक और इतिहास के बीच श्रीराम को तलाशती पुस्तक

स्वर्णिमा स्वस्तिका तिवारी

‘द बुक ऑफ राम’ रामायण के नायक श्रीराम पर केन्द्रित और उनके चरित्र को ध्यान में रखकर नये सन्दर्भं में लिखी गयी पुस्तक है। पुस्तक देवदत्त पट्टनायक ने लिखी है जो मिथकीय खोजपरक दृष्टि के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने महाभारत के उपेक्षित पात्र शिखंडी पर भी लिखा है और इस बार वे रामायण के प्रमुख पात्र श्रीराम पर बात करते हैं।

राम को विभिन्न रूपों में इस पुस्तक में देखा गया है। पति, पुत्र, प्रेरणा समेत अन्य सम्बन्धों के आलोक में लेखक ने श्रीराम को देखा है। उनकी यह किताब हिन्दूत्व की मूल अवधारणा से छेड़छाड़ करने वालों पर करारा प्रहार करती है। यह राम राज्य की वास्तविक अवधारणा पर बात करती है जो किसी काल, खंड और स्थान तक सीमित नहीं है बल्कि शान्ति और एकता का सन्देश देती है।

लेखक के मुताबिक राम राज्य की अवधारणा हृदय में प्राप्त की जा सकती है। पट्टनायक को उद्धत करते हुए कहा जा सकता है कि ‘वह (श्रीराम) हमारी आत्मा हैं।’ लेखक अनुभवजन्य सत्य को एकमात्र सत्य मानने वाली शिक्षा प्रणाली की आलोचना करते हैं। पुस्तक धर्म और विज्ञान के बीच की लम्बी बहस को एक बार फिर नया स्वर देती है। वह उस एकरेखीय और चक्रीय समीक्षा दृष्टि का अन्तर भी सामने रखते हैं। हालाँकि पुस्तक एक आदर्शवादी दृष्टिकोण को अपनाती है जिसे तथाकथित भौतिकवाद की दृष्टि से समझना कठिन हो सकता है। हालाँकि मिथक और इतिहास में एक अन्तर अपेक्षित है मगर इसकी विभाजक रेखा स्पष्ट नहीं हो सकती। अँग्रेजी में लिखी गयी इस पुस्तक की भाषा सरल है। पुस्तक का आवरण चित्र अरुन्धती बसु ने बनाया है।

पुस्तक का नाम – द बुक ऑफ राम
लेखक – देवदत्त पट्टनायक
प्रकाशन वर्ष – 2009
प्रकाशक – पेंग्विन बुक्स इंडिया
कीमत – 299 रुपये

(स्वर्णिमा को पौराणिक चरित्रों में रुचि है। वे इस पर पढ़ती हैं और यह कहीं भी प्रकाशित उनकी पहली समीक्षा है। )

 

रक्षाबन्धन मनाइए स्वाद के बन्धन के साथ

मलाई बर्फी

सामग्री :  4 कप चूरा किया हुआ मावा, 2 बड़ा चम्मच घी, 1/2 कप दूध, 1/4 फिटकरी का पाउडर, 1 कप शक्कर, पिस्ता और कटे हुए बादाम

 विधि : मलाई बर्फी बनाने के लिए सबसे पहले एक पैन में दूध और मावा डालकर धीमी आंच पर 5 मिनट तक पकाएं। ध्यान रखें पकाते समय इस मिश्रण को लगातार हिलाते रहें। अब इसमें फिटकरी पाउडर मिलाएं और अच्छे से मिला लें। अब इसमें शक्कर डालें और कुछ देर तक पकाएं। अब एक  एल्युमिनियम के बॉक्स को ग्रीस करें और उस पर पिस्ता और कटे हुए बादाम को डालें। अब इस मिश्रण को बॉक्स से निकालें और पूरे दिन के लिए सेट होने के लिए छोड दें। अब इसके जमने के बाद छोटे- छोटे पीस में चाकू की मदद से काट लें। आपकी मलाई बर्फी बनकर तैयार है।

पनीर गार्लिक कवाब

सामग्री :  कप पनीर (कद्दूकस किया हुआ), आधा कप कॉर्न, 1 प्याज (बारीक कटा हुआ), 2-3 बड़ा चम्मच बेसन , 1 बड़ा चम्मच पोहे का चूरा , 1 बड़ा चम्मच अदरक-लहसुन का पेस्ट, 2 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई) , 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर , 1 छोटा चम्मच चाट मसाला ,नमक स्वादानुसार, तेल जरूरत के अनुसार

विधि  पनीर गार्लिक कबाब बनाने के लिए सबसे पहले एक बाउल में पनीर, कॉर्न और प्याज डालकर अच्छे से मिक्स कर लें। अब इसमें बेसन, अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, जीरा पाउडर, चाट मसाला, नमक मिलाएं और 4 से 5 मिनट के लिए अलग रख दें।  तय समय के बाद पोहा का चूरा मिलाते हुए मिश्रण को अच्छे से गूंद लें। गूंथे हुए मिश्रण को हल्के हाथों से दबाते हुए कबाब का आकार दें। मध्यम आँच में एक पैन में तेल गर्म करने के लिए रखें। साथ ही पैन में कबाब डालकर सुनहरा होने तक फ्राई कर लें और आँच बंद कर दें। पनीर गार्लिक कबाब तैयार है।

 

गौतम गम्भीर ने ट्रांसजेंडर्स को बनाया बहन, बंधवाई राखी!

नयी दिल्ली : साल  2007 वर्ल्ड टी20 और वनडे वर्ल्ड कप 2011 की जीत में भारत को जीत दिलाने वाले गौतम गम्भीर भले ही अभी टीम से बाहर चल रहे हैं, हालांकि इसके बावजूद वो भारतीय फैंस के दिलों पर राज कर रहे है। गौतम गम्भीरअकसर सैनिकों और शहीदों के परिवारों की मदद करते नजर आते हैं. वहीं रक्षाबंधन के पावन अवसर पर उन्होंने एक और बड़ी मिसाल पेश की है.

गौतम गम्भीर ने 2 ट्रांसजेंडर्स को अपनी बहन बनाया है और उनसे राखी भी बंधवाई। गौतम गम्भीर ने इसकी फोटो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की. गौतम गम्भीर ने अबीना अहर और सिमरन शेख को बहन बनाते हुए एक मोटिवेशनल पोस्ट लिखा। गौतम गंभीर के इस कदम को सोशल मीडिया पर फैंस ने बहुत पसंद किया।

खास हो राखी की थाली

रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने से पहले बहनें खूब प्यार से राखी की थाली को सजाती हैं। रक्षाबंधन के लिए जहाँ एक ओर बहनें अपने भाई के लिए बाजार से सबसे सुंदर राखी चुन कर ले आती हैं, वहीं रक्षाबंधन की थाली को सजाने के लिए भी बड़ी मेहनत करती हैं। दरअसल, राखी थाल में  मौजूद हर एक चीज का खास महत्व होता है। सबसे पहले यह जान लें कि राखी की थाली में किन चीजों का होना अनिवार्य है और यह भी जानें कि उन चीजों का क्या महत्व है –

1. राखी : राखी दरअसल, बहन की रक्षा और प्रेम के बंधन का प्रतीक है। साल दर साल यह भाईयों को याद दिलाता है कि उनकी एक जिम्मेदारी उनकी बहन भी है।

2. रोली: रोली को हिन्दू धर्म के रीति रिवाज और पूजा में इतना महत्वपूर्ण माना गया है। मस्तक के बीचो बीच रोली का टीका लगाने से बौद्धिक और आर्थिक विकास होता है।

3. कुमकुम या हल्दी: यह अच्छे भाग्य और संपूर्ण समृद्धि का प्रतीक है।

4. लंबे साबुत चावल (अक्षत): अक्षत के रूप चावल हमेशा साबुत ही लेते हैं। कहा ही जाता है अक्षत यानी जो टूटा ना हो। चावल अन्न में श्रेष्ठ होता है. इसलिए अक्सर देवी देवताओं की पूजा में अक्षत का इस्तेमाल किया जाता है। कच्चे चावल का तिलक में प्रयोग सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

5. पीली सरसों के बीज: पीली सरसों से नजर उतारी जाती है। भाई पर किसी बुरी नजर का साया न पड़ें इसके लिए पीली सरसों का इस्तेमाल किया जाता है।

6. दीपक:  राखी बांधने से पहले भाई की आरती उतारी जाती है।

7. मिठाई: मिठाई खिलाना इस बात का प्रतीक है कि बहन और भाई के रिश्ते में कभी कड़वाहट न आए, मिठाई की तरह यह मिठास हमेशा बनी रहे।

8. दही: हर शुभ कार्य करने से पहले दही खिलाई जाती है लेकिन राखी के दिन बहनें भाई की ललाट पर रोली और हल्दी के साथ दही का टीका भी लगाती हैं। इसे शुभता का प्रतीक माना गया है।

(साभार – इंडिया डॉट कॉम)

 

क्योंकि फूलों का, तारों का सबका कहना है….

रक्षाबंधन ऐसा त्योहार है जो हर भाई -बहन के लिए बहुत खास है। दरअसल, हर रिश्ते की तरह इस रिश्ते में भी अभिव्यक्ति की जरूरत है। अगर आप एहसास दिलाना चाहते हैं कि आपका भाई या बहन आपके लिए कितने खास हैं मगर कह नहीं पा रहे तो आपकी मदद बॉलीवु़ड करेगा। बस, इन गीतों को चलाइए और कह डालिए अपने दिल की बात –

 फूलों का तारों का, सबका कहना हैः भाई-बहन के प्यार और तकरार को लेकर ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ के इस गाने से बेहतर कुछ नहीं हो सकता। इस रक्षा बंधन आपकी बहन आपसे नाराज है तो यह गाना सुनाकर या गुनगुनाकर आप जीत सकते हैं उसका दिल। आप दफ्तर में बैठे अपनी बहन को मिस कर रहे हैं तो यह गाना तो आपके लिए ही है।

भैया मेरे राखी के बंधन को निभानाः फिल्म ‘छोटी बहन’ का यह गाना न सिर्फ सुनने में बहुत ही नहीं मधुर लगता है बल्कि भाई-बहन की बॉन्डिंग को भी बहुत ही खूबसूरत ढंग से बयान करता है। नंदा, बलराज साहनी के लिए यह गाना गाती हैं। मम्मी मामा को मिस कर रही हैं तो मामा को रिंग टोन में यह गीत सुनाइये…..सब काम छोड़कर वह आ जाएँगे।

मेरे भैया, मेरे चंदाः ‘काजल’ फिल्म का मीना कुमारी का यह गाना लगभग पाँच दशकों से राखी के त्योहार और भाई-बहन के रिश्ते को खास बनाता आया है…माने दिस ओल्ड इज फॉरेवर गोल्ड।

बहना ने भाई की कलाई से प्यार बांधा हैः धर्मेंद्र की ‘रेशम की डोरी’ फिल्म का यह गाना न सिर्फ भावनात्मक है बल्कि फिल्म में इसका काफी महत्व भी है। 1975 से इस गाने के साथ राखी के त्योहार का सफर जारी है।

https://youtu.be/9G6gBFrrpDQ

मेरी प्यारी बहनिया बनेगी दुल्हनियाः राजेश खन्ना जब करियर के पूरे उफान पर थे, उस समय ‘सच्चा झूठा’ फिल्म आई, और उन्हें केयरिंग और प्यारे से भाई के तौर पर स्थापित भी कर गई। अगर बहन की शादी होने जा रही है तो यह गाना जरूर सुनाइए।

 

हार गया जंगल’ का लोकार्पण

काँचरापाड़ा  : उपनगरीय साहित्य किसी महानगर की मुखापेक्षी नहीं है। उपनगर में ही साहित्य का सच्चा माहौल है और पाठक भी। यह बात काँचरापाड़ा के खुदीराम बोस इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ पत्रकार गंगा प्रसाद ने कही। कवि रामचरण विश्वकर्मा के कविता संग्रह ‘हार गया जंगल’ के लोकार्पण समारोह ोका आयोजन सूत्रधार संस्था ने किया था। पुस्तक का प्रकाशन भी काँचरापाड़ा के सूत्रधार प्रकाशन ने किया है। समारोह में वरिष्ठ पत्रकार गंगा प्रसाद ने जहाँ आज के माहौल में ऐसे कार्यक्रमों की महत्ता पर बात की तो रंजीत प्रसाद एवं जनक सिंह ने हार गया जंगल’ के बहाने बिगड़ते पर्यावरण पर चिंता व्यक्त की। कल्याणी से आए कार्तिक बांसफोर ने कहा कि समारोह के बहाने मिलना जुलना जरूरी है। अध्यक्ष भोलाप्रसाद सिंह ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम के माध्यम से छत्रों और युवकों को आगे लाना चाहिए। कई युवकों ने अपनी कविताएँ पढ़ी। छात्रों की अच्छी उपस्थिति रही। आए विशिष्ट जनों का स्वागत राजेश सिंह ने किया और धन्यवाद दिया नेगेश्वर शर्मा ने।

‘तुलसी की अनुभूति और अभिव्यक्ति में कोई अन्तर नहीं’

कोलकाता : गोस्वामी तुलसीदास हर युग में प्रासंगिक हैं, तुलसीदास जी की अनुभूति और अभिव्यक्ति में कोई अन्तर नहीं है। उन्होंने जो अनुभव किया था, जो समाज में था, उसको उसी रूप में रचा। उक्त बातें सेठ सूरजमल जालान पुस्तकालय द्वारा आयोजित तुलसी जयन्ती समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. अवनिजेश अवस्थी ने कहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शान्ति निकेतन के डॉ. रामेश्‍वर मिश्र ने तुलसी साहित्य के प्रभाव पर प्रकाश डाला। वरिष्ठ साहित्यकार पद्मश्री डॉ. कृष्ण बिहारी मिश्र ने अपने आशीर्वचन में तुलसी साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों ने गो×स्वामी तुलसीदास को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देकर की गयी। सेठ सूरजमल जालान बालिका विद्यालय तथा जालान गर्ल्स कॉलेज की छात्राओं ने तुलसी के भजन तथा पद प्रस्तुत किये। अतिथियों का स्वागत इशान जालान और अपूर्वी जालान ने किया। कार्यक्रम का संचालन दुर्गा व्यास ने किया। कार्यक्रम में शहर के प्रतिष्ठित साहित्यकार तथा साहित्यप्रेमी उपस्थित थे। यह जानकारी पुस्तकालय के पुस्तकाध्यक्ष श्रीमोहन तिवारी ने दी।

साहित्य संवाद में शामिल हुए युवा पीढ़ी के रचनाकार

कोलकाता : सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन एवं भारतीय भाषा परिषद के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित ‘साहित्य-संवाद’ के अन्तर्गत विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने आलेख एवं युवा कवियों ने काव्य-पाठ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विमला पोद्दार ने कहा कि साहित्य-संवाद का यह मंच नई प्रतिभाओं को मंच प्रदान करता है। स्वागत भाषण रखते हुए भारतीय भाषा परिषद के निदेशक शंभुनाथ ने कहा कि इस तरह के विमर्श से शोधार्थियों का अनुसंधान कार्य और अधिक समृद्ध होगा। ‘कवि सप्तक’ के अंतर्गत शिव कुमार यादव, नीलकमल, विमलेश त्रिपाठी, रितु तिवारी, राहुल शर्मा, संदीप प्रसाद और धर्मेंद्र राय ने अपनी कविताओं का पाठ किया। आलेख पाठ के अंतर्गत विश्व भारती विश्वविद्यालय की शोध छात्रा पूजा पाठक ने ‘मैत्रेयी पुष्पा के उपन्यासों में स्त्री-चेतना’ विषय पर विचार रखते हुए कहा कि ‘देह विमर्श को लेकर जो रूढ़ियाँ हैं, उसे हमें ध्वस्त करना होगा।’
कलकत्ता विश्वविद्यालय के शोधार्थी रंजीत संकल्प ने ‘साम्प्रदायिकता विमर्श और हिंदी उपन्यास’ शीर्षक विषय पर विचार रखते हुए कहा कि हिंदी उपन्यासों में सांप्रदायिकता को लेकर लेकर एक गंभीर विमर्श की परम्परा है। वर्द्धमान विश्व विद्यालय के शोधार्थी शिव कुमार दास ने ‘ भूमंडलीकरण के दौर में साहित्य के समक्ष चुनौतियाँ’ विषय पर विचार रखते हुए आज के दौर को बाज़ार का दौर कहा। कलकत्ता विश्वविद्यालय के शोधार्थी पीयूषकांत राय ने ‘समकालीन उपन्यास और स्थानीयता का विमर्श’ शीर्षक के अंतर्गत ‘मंडल, कमंडल और भूमंडल के त्रिभुज से प्रभावित समाज का मूल्यांकन समकालीन हिंदी उपन्यासों के परिप्रेक्ष्य में किया सभी आलेखों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कवयित्री रजनी गुप्त ने कहा कि सभी आलेख मौलिक चिंतन से जुड़ी हैं और हमें यह पीढ़ी आश्वस्त भी करती हैं ।कार्यक्रम का संचालन संजय जायसवाल ने कहा कि साहित्य संवाद का यह मंच रचनात्मकता का मंच है जो हमें रचने और संवाद के लिए प्रेरित करता है । धन्यवाद ज्ञापन आनंद गुप्ता ने दिया ।

जायसवाल एडुकेशन ट्रस्ट द्वारा मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान

कोलकाता :  जायसवाल एडुकेशन ट्रस्ट एवं सहयोगी संस्थाओं द्वारा आयोजित 13वें योग्यता पुरस्कार में 80 प्रतिशत या इससे अधिक अंक पाने वाले 46 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों को बैग, कलम सेट, घड़ी एवं 1100 रुपये नकद देकर श्री कृष्ण जायसवाल लोहा सोसायटी भवन में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सचिव राजेश कुमार जायसवाल ने किया। अध्यक्ष जगदीश प्रसाद साव ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर नैन्सी जायसवाल ने की। सहयोगी संस्था के रूप में पश्चिम बंगाल कलचुरी जायसवाल समवर्गीय सभा, नन्दरानी सेवा ट्रस्ट, स्वर्गीय कंचन जायसवाल स्मृति ने सर्वोच्च अंक पाने वाले छात्र को पदक तथा 2500 रुपये नकद प्रदान किये।
बिन्दू जायसवाल, कविता जायसवाल, कुणाल जायसवाल, कुणाल गुप्ता, अनिल राय, श्रीमोहन तिवारी, द्वारका दास जायसवाल, तारकनाथ साव, विजय साव, अमित जायसवाल, ने वक्तव्य रखे।