हिम्मतनगर : 27 वर्षीय अजय बारोट का सपना अपने चचेरे भाई की तरह ही शानदार शादी करने का था, लेकिन दिमागी तौर पर कमजोर होने की वजह से उनके लिए कोई रिश्ता नहीं मिल रहा था। अजय जब भी दूसरों की शादी में जाते, उनकी यह इच्छा और तीव्र हो जाती। इस पर वे अपने परिवार से भी बात करते, लेकिन घर के लोगों के पास इसका कोई जवाब नहीं होता था। कई कोशिशों के बाद जब कोई रिश्ता तय नहीं हो सका, तब परिवार ने बिना दुल्हन के ही अजय की इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया। शादी से एक दिन पहले मेहंदी और संगीत सेरेमनी हुई। इसमें करीबी दोस्तों और रिश्तेदारों ने हिस्सा लिया। अगले दिन अजय को सुनहरी शेरवानी, गुलाबी पगड़ी और लाल और सफेद गुलाबों की माला पहनाकर दूल्हा बनाया गया। फिर अजय को घोड़े पर बैठाकर गांव घुमाया गया। इस रस्म में लगभग 200 लोग शामिल हुए। यही नहीं, गुजराती संगीत और ढोल की धुन पर सभी ने डांस भी किया। परिवार ने घर के करीब सामुदायिक भवन में दावत दी। इसमें लगभग 800 लोग पहुंचे।
समाज की परवाह किए बगैर बेटे का सपना पूरा किया
अजय के पिता विष्णु बारोट ने मीडिया से कहा, ‘‘मेरा बेटा शादी की रस्मों को लेकर बहुत उत्सुक था। उसने बहुत कम उम्र में अपनी मां को खो दिया था। वह चीजों को देर से सीखता। दूसरों की शादी को देखकर वह हमसे अपनी शादी को लेकर सवाल करता, तब हमारे पास कोई जवाब नहीं होता था। वह अपनी शादी का आनंद लेना चाहता था। उसके लिए रिश्ता ढूंढना संभव नहीं था। ऐसे में परिवार से उसकी शादी को लेकर बात की और समारोह आयोजन का फैसला लिया। ताकि उसे लगे कि उसकी शादी हो रही है और उसका सपना पूरा हो रहा है। मैं अब बहुत खुश हूं कि मैंने अपने बेटे के सपने को पूरा किया है, बिना यह सोचे कि समाज क्या कहेगा।’’
शादी सामान्य थी, बस इसमें दुल्हन नहीं थी
अजय के अंकल कमलेश बरोट ने कहा कि उनके भतीजे को संगीत का बहुत शौक है। डांस करने से उसके चेहरे पर चमक आ जाती है। वह गांव की किसी भी शादी को याद नहीं करता था। फरवरी में मेरे बेटे की शादी को देखने के बाद, अजय हमसे अपनी शादी के बारे में पूछने लगा था। जब मेरा भाई अपने बेटे की इच्छा को पूरा करने के लिए बिना दुल्हन वाला आइडिया लेकर आया, तो हम सभी ने उसका साथ देने का फैसला किया।”
बिना दुल्हन की शादी से आहत नहीं हैं हम: परिवार
अजय की छोटी बहन ने कहा, “हमने अपने रिश्तेदारों को शादी का निमंत्रण भेजा और एक पुजारी की उपस्थिति में गुजराती परंपरा के अनुसार सभी रस्में निभाईं। मेरा भाई भाग्यशाली है कि परिवार ने उसकी इच्छा का समर्थन किया। हम सभी उसके लिए खुश हैं। हम बिना दुल्हन की शादी की भावना से आहत नहीं हैं। हम सिर्फ अजय को खुश देखना चाहते थे। क्योंकि वह हमें बहुत प्रिय है।”
न्यूयॉर्क : दुनिया की सबसे बड़ी ईकॉमर्स कंपनी अमेजन सामान की डिलीवरी तेज करना चाहती है। इसके प्राइम मेंबर्स को अभी ऑर्डर के दो दिन में डिलीवरी मिलती है। अमेजन इसे एक दिन करना चाहती है। इसके लिए इसने अपने कर्मचारियों को एक ऑफर दिया है- नौकरी छोड़ो और डिलीवरी बिजनेस शुरू करो।
कंपनी खोलने और बिजनेस शुरू करने के लिए अमेजन 7 लाख रुपए भी देगी। जो लोग ऐसा करेंगे, उन्हें मुफ्त में तीन महीने की सैलरी मिलेगी। अभी अमेजन ज्यादातर डिलीवरी पोस्ट ऑफिस और कूरियर के जरिए करती है। अब यह डिलीवरी बिजनेस पर भी अपना कंट्रोल चाहती है। इसीलिए यह स्कीम लेकर आई है। अमेजन का यह ऑफर पार्टटाइम और फुलटाइम दोनों कर्मचारियों के लिए है। अमेजन ने पिछले साल ऐसी ही स्कीम शुरू की थी, लेकिन उसमें सेना से रिटायर लोगों को बिजनेस शुरू करने के लिए कंपनी 7 लाख रुपए देती है। इस स्कीम के तहत अब तक 200 लोगों ने डिलीवरी बिजनेस शुरू किया है।
रेक्याविक : आइसलैंड में वैज्ञानिकों ने फैक्ट्रियों और वाहनों से बढ़ रहे कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने का तरीका खोज लिया है। रिसर्चर अब इस खतरनाक ग्रीन हाउस गैस को चट्टानों में बदल रहे हैं। इससे पर्यावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की कमी तो हो रही है। साथ ही जीवाश्म ईधन बनाने की प्रक्रिया को भी छोटा बनाने का तरीका निकाल लिया गया है। इस तकनीक को आइसलैंड में कार्बफिक्स प्रोजेक्ट के तहत ईजाद किया गया है। इसमें आइसलैंड यूनिवर्सिटी, फ्रांस के नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च और अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने योगदान दिया है। प्रोजेक्ट के निदेशक एडा सिफ अरादोतिर के मुताबिक, नए तरीके में सबसे पहले पर्यावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को भाप का इस्तेमाल कर कंटेनरों में कैद किया जाता है। इसके बाद गैस को कंडनसेशन (संघनन) के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद गैस को पानी में मिलाया जाता है और फिर तरल पदार्थ को पाइप के इस्तेमाल से सैकड़ों किलोमीटर दूर मौजूद चट्टानों में भारी दबाव पर जमा दिया जाता है। यह चट्टानें जमीन के करीब 3300 फीट नीचे स्थित होती हैं। भारी दबाव में गैस के दोबारा ठोस होने की प्रक्रिया शुरू होती है। जैसे ही पानी के साथ मिली CO2 चट्टान में मौजूद कैल्शियम, मैग्निशियम या आयरन के संपर्क में आती है, वैसे ही इसका खनिज में बदलना शुरू हो जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस प्रकिया से महज दो साल में ही सारी CO2 खनिज में बदल जाती है। जबकि प्राकृतिक तौर पर तो चट्टान को CO2 सोखने में हजारों साल लग जाते हैं। जिस पावरप्लांट पर वैज्ञानिकों ने यह रिसर्च की वहां कार्बनडाइऑक्साइड उत्सर्जन करीब 33% तक कम हो गया। हालांकि, दुनिया के बाकी किसी हिस्से में यह प्रयोग सफल रहेगा या नहीं यह वहां की स्थिति पर निर्भर करेगा। इसकी वजह यह है कि एक टन CO2 को चट्टान में भरने के लिए करीब 25 टन पानी लगता है। ग्लेशियर के पास मौजूद होने की वजह से आइसलैंड के लिए यह तकनीक फायदेमंद है। लेकिन बाकी देशों में पानी की कमी एक बड़ा मुद्दा है।
गौतम बुद्ध भारत विश्व को भारत की वह देन हैं जिन्होंने समता और मानवता का मतलब पूरी दुनिया को बताया। भारत ही नहीं बल्कि कई देशों में उनके द्वारा शुरू किये गये बौद्ध धर्म को अपनाया। महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़े ऐसी ही ऐतिहासिक जगहों को जानिए
कपिलवस्तु – कपिलवस्तु गौतम बुद्ध के पिता राजा शुद्धोधन के राज्य शाक्य गणराज्य (शाक्य महाजनपद) की राजधानी थी. अब कपिलवस्तु दक्षिण नेपाल में एक जिला है। गृह त्याग से पहले गौतम बुद्ध यहीं अपने पिता के महल में निवास करते थे। लुम्बिनी –गौतम बुद्ध का जन्म स्थान. यह नेपाल में रुपनदेही (Rupandehi) जिले में है। लुम्बिनी वन नेपाल के तराई क्षेत्र में कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से पश्चिम में 8 मील दूर रुक्मिनदेई नामक स्थान के पास स्थित है। दक्षिण मध्य नेपाल में स्थित लुंबिनी में उस स्थल पर महाराज अशोक ने तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व बुद्ध के जन्म की स्मृति में एक स्तम्भ बनवाया था। देवदह – गौतम बुद्ध का ननिहाल देवदह में था. वर्तमान में यह रुपनदेही जिले में एक नगरपालिका है।
कपिलवस्तु
बोधगया – बोधगया भारत में बिहार राज्य के गया जिले में स्थित है। वैशाखी पूर्णिमा के दिन सिद्धार्थ वटवृक्ष के नीचे ध्यानस्थ थे। समीपवर्ती गाँव की एक महिला सुजाता को पुत्र हुआ. उसने बेटे के लिए एक वटवृक्ष से मनौती की थी। वह मनौती पूरी करने के लिए सोने के थाल में गाय के दूध की खीर भरकर पहुँची। सिद्धार्थ वहां बैठे ध्यान कर रहे थे. उसे लगा कि ‘वृक्षदेवता ही मानो पूजा लेने के लिए शरीर धारण करके बैठे हैं।’ सुजाता ने बड़े आदर से सिद्धार्थ को खीर भेंट की और कहा – “जैसे मेरी मनोकामना पूरी हुई, उसी तरह आपकी भी हो।” उसी रात को ध्यान लगाने पर सिद्धार्थ की साधना सफल हुई। उसे सच्चा बोध हुआ. तभी से सिद्धार्थ बुद्ध कहलाए। जिस पीपल के वृक्ष के नीचे सिद्धार्थ को बोध मिला वह बोधिवृक्ष कहलाया और गया का समीपवर्ती वह स्थान बोधगया। सारनाथ – सारनाथ भारत में उत्तरप्रदेश राज्य के वाराणसी जिले में है। आषाढ़ की पूर्णिमा को गौतम बुद्ध काशी के पास मृगदाव (वर्तमान में सारनाथ) पहुँचे। वहीं पर उन्होंने सबसे पहला धर्मोपदेश दिया. और पाँच मित्रों को अपना अनुयायी बनाया. और उन्हें धर्म के प्रचार करने के लिये भेज दिया। कुशीनगर – कुशीनगर भारत में उत्तरप्रदेश राज्य के कुशीनगर जिले में ही एक नगर है. यहाँ गौतमबुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। श्रावस्ती – श्रावस्ती राप्ती नदी के दक्षिणी किनारे पर प्राचीनकाल में भारत के सबसे बड़े शहरों में से एक था. यह गोंडा-बहराइच जिलों की सीमा पर स्थित है। यहाँ प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल है। आज के सहेत-महेत गाँव ही श्रावस्ती है। अब “सहेत” बहराइच ज़िले में और “महेत” गोंडा ज़िले में पड़ता है। प्राचीन काल में यह कौशल देश की दूसरी राजधानी थी। भगवान राम के पुत्र लव ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। यहाँ बुद्ध ने अपना सबसे अधिक तपस्वी जीवन बिताया था। बुद्ध ने इस प्राचीन शहर को 25 बरसात की ऋतुओं में अपना समय दिया. जिसमें अधिकांश समय जेतवन मठ को दिया। हजारों बौद्ध हर साल इस शहर में बुद्ध को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आते हैं। बौद्ध धर्म के विभिन्न संप्रदाय आधुनिक श्रावस्ती में मठों का निर्माण करने के लिए आते हैं। पूरी दुनिया में बौद्धों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। श्रावस्ती उत्तर प्रदेश राज्य का एक जिला भी है, जिसका मुख्यालय भींगा है।
श्रावस्ती
साँची – साँची मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में है। साँची तीसरी शताब्दी ईसवी पूर्व में निर्मित स्तूप के लिए प्रसिद्ध है। बौद्धों के आलावा अन्य धर्मों के सैंकड़ो हजार लोग हर साल साँची का दौरा करते हैं। साँची का महान स्तूप भारत में सबसे पुरानी वास्तु संरचना है। साँची का स्तूप बुद्ध के अनुयायी सम्राट अशोक के शासनकाल में बनाया गया था। यह बौद्धों के लिए आठ पवित्रतम स्थानों में से एक है। 1989 में यूनेस्को ने इस स्मारक को विश्व धरोहर घोषित किया है।
साँची का स्तूप – बौद्धनाथ स्तूप पूरी दुनिया में बौद्धों के लिए पूजा की एक पवित्र स्थान है। नेपाल में काठमांडू शहर से 20 किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्तूप 36 मीटर ऊंचा है। बौद्धनाथ स्तूप दुनिया के सबसे ऊंचे बौद्ध स्तूपों में से एक है। इस स्तूप का निर्माण किया जा रहा था, तब इलाके में भयंकर अकाल पड़ा था. इसलिए पानी न मिलने के कारण ओस की बूंदों से इसका निर्माण किया गया। बौद्धनाथ बौद्धों के लिए सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यह नेपाल में पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है।
बगान – बगान म्यांमार में इरावदी नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन नगर है। यह नगर 9 वीं शताब्दी से लेकर 13 वीं शताब्दी तक पुगं राज्य की राजधानी था। 11 वीं से 13 वीं शताब्दी के समय जब यह राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर था, तब यहाँ 10 हजार से अधिक बौद्ध मन्दिर, पगोडा और मठ निर्मित किये गये थे। इनमें से 2200 मंदिर अब भी अच्छी स्थिति में विद्यमान हैं. बौद्ध मंदिरों को समर्पित दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्र है।
साँची
बोरोबुदुर – बोरोबुदुर सबसे प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थानों में से एक है। यह इंडोनेशिया में जावा द्वीप पर स्थित है। दुनिया में कुछ सबसे बड़े बौद्ध मंदिरों में से है। 20 लाख से अधिक पत्थर के ब्लॉकों निर्मित इन मंदिरों को पूरा करने में 75 साल लगे। इसका मूल आधार वर्गाकार है जिसकी प्रत्येक भुजा 118 मीटर (387 फीट) है। इसमें नौ मंजिले हैं जिनमें नीचली छः वर्गाकार हैं तथा उपरी तीन वृत्ताकार हैं। उपरी मंजिल पर मध्य में एक बड़े स्तूप के चारों ओर बहत्तर छोटे स्तूप हैं। प्रत्येक स्तूप घण्टी के आकार का है, जो कई सजावटी छिद्रों युक्त है. बुद्ध की मूर्तियाँ इन छिद्रयुक्त सहपात्रों के अन्दर स्थापित हैं। स्मारक में सीढ़ियों की विस्तृत व्यवस्था है। गलियारों में 1460 कथा उच्चावचों और स्तम्भवेष्टनों से तीर्थयात्रियों का मार्गदर्शन होता है। बोरोबुदुर विश्व में बौद्ध कला का सबसे विशाल और स्थापत्य कलाओं से पूर्ण स्मारक है।
8 वीं सदी में निर्मित मंदिरों को रहस्यमय तरीके से 14 वीं शताब्दी में छोड़ दिया गया। वैज्ञानिकों का मानना है एक बड़े ज्वालामुखी विस्फोट से ये मंदिर ज्वालामुखी राख के नीचे दब गये थे. जिससे यहाँ सबकुछ नाश हो गया था। उक्त तथ्य 2010 व 2014 में जावा में हुए जवालामुखी विस्फोटो से भी प्रामाणिक लगता है। अक्टूबर और नवम्बर 2010 में मेरापी पर्वत में भारी ज्वालामुखी विस्फोट से बोरोबुदुर बहुत प्रभावित हुआ। मंदिर परिसर से लगभग 28 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित ज्वालामुखी की राख मंदिर परिसर में भी गिरी। 3 से 5 नवम्बर तक ज्वालामुखी विस्फोट के समय मंदिर की मूर्तियों पर 2.5 सेंटीमीटर की राख की परत चढ़ गयी। इससे आस-पास के पेड़-पौधों को भी नुकसान हु। विशेषज्ञों ने इस ऐतिहासिक स्थल के नुकसान की आशंका व्यक्त की। 5 से 9 नवम्बर तक मंदिर परिसर को राख की सफाई करने के लिए बन्द रखान पड़ा।
यूनेस्को ने 2010 में मेरापी पर्वत ज्वालामुखी विस्फोट के बाद बोरोबुदुर के पुनःस्थापन के लिए यूएस $30 लाख दिये। 55,000 से अधिक पत्थरों की सिल्लियाँ बारिस के कारण किचड़ से बन्द हुई जल निकासी प्रणाली की सफ़ाई के लिए हटायी गयी। पुनः स्थापन का कार्य नवम्बर 2011 तक समाप्त हुआ13 फरवरी 2014 में योगकर्ता से 200 किलोमीटर पूर्व में स्थित पूर्वी जावा में केलुड में हुये ज्वालामुखी विस्फोट से निकली ज्वालामुखी राख से प्रभावित होने के बाद बोरोबुदुर पर्यटन यात्रियों के लिए एक बार फिर बन्द करना पड़ा था।
स्वयंभूनाथ – स्वयंभूनाथ भारत के बाहर बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। यह नेपाल की काठमांडू घाटी में एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित प्राचीन धार्मिक परिसर में है। इस परिसर का निर्माण 5 वीं शताब्दी में किया किया गया था. यहाँ एक पुस्तकालय और एक तिब्बती मठ भी है। स्वयंभूनाथ नेपाल में पूजा लिए बौधों का सबसे पुराना स्थान है।
बोधगया
वैशाली – ईसा पूर्व छठी सदी के उत्तरी और मध्य भारत में विकसित हुए 16 महाजनपदों में वैशाली का स्थान अति महत्त्वपूर्ण था। विश्व को सर्वप्रथम गणतंत्र (Republic) का ज्ञान कराने वाला स्थाजन वैशाली ही है। आज वैश्विक स्तर पर जिस लोकतंत्र को अपनाया जा रहा है वह यहाँ के लिच्छवी शासकों की ही देन है।
वैशाली भारत के बिहार का एक जिला है. जिसका मुख्यालय हाजीपुर है। इसी जिले में वैशाली गाँव है। बोध प्राप्ति के पाँच वर्ष बाद गौतम बुद्ध का यहाँ आये थे। यहाँ वैशाली की प्रसिद्ध नगरवधू आम्रपाली सहित चौरासी हजार नागरिक संघ में शामिल हुए। वैशाली के समीप कोल्हुआ में महात्मा बुद्ध ने अपना अंतिम सम्बोधन दिया था। इसकी याद में महान मौर्य महान सम्राट अशोक ने तीसरी शताब्दि ईसा पूर्व सिंह स्तम्भ का निर्माण करवाया था। महात्मा बुद्ध के महा परिनिर्वाण के लगभग 100 वर्ष बाद वैशाली में दूसरे बौद्ध परिषद का आयोजन किया गया था। इस आयोजन की याद में दो बौद्ध स्तूप बनवाये गये. वैशाली के समीप ही एक विशाल बौद्ध मठ है, जिसमें महात्मा बुद्ध उपदेश दिया करते थे. बुद्ध के सबसे प्रिय शिष्य आनंद की पवित्र अस्थियाँ हाजीपुर (पुराना नाम – उच्चकला) के पास एक स्तूप में रखी गयी थी. पाँचवी तथा छठी सदी के दौरान प्रसिद्ध चीनी यात्री फाहियान तथा ह्वेनसांग ने वैशाली का भ्रमण कर यहाँ की भव्यता वर्णन किया है। स्तूप : स्तूप शब्द संस्कृत और पालि: से लिया गया है जिसका शाब्दिक अर्थ “ढेर” होता है। अर्थात एक गोल टीले के आकार की संरचना जिसका प्रयोग पवित्र बौद्ध अवशेषों को रखने के लिए किया जाता है. कभी यह बौद्ध प्रार्थना स्थल होते थे। इसी स्तूप को चैत्य भी कहा जाता है. पगोडा : पगोडा शब्द का प्रयोग नेपाल, भारत, वर्मा, इंडोनेशिया, थाइलैंड, चीन, जापान एवं अन्य पूर्वी देशों में भगवान् बुद्ध अथवा किसी संत के अवशेषों पर निर्मित स्तंभाकृति मंदिरों के लिये किया जाता है। इन्हें स्तूप भी कहते हैं।
हैदराबाद : मुम्बई इंडियंस ने आईपीएल 2019 के रोमांचक फाइनल मुकाबले में अपने चिर प्रतिद्वंद्वी चेन्नई सुपर किंग्स को 1 रन से हराकर चौथी बार खिताब अपने नाम किया। हैदराबाद स्थित राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेले गए मैच में मुम्बई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। लेकिन चेन्नई सुपर किंग्स के गेंदबाजों ने रोहित के फैसले को गलत साबित करते हुए मुंबई इंडियंस को 20 ओवरों में 8 विकेट पर 149 रन के स्कोर पर रोक दिया। चेन्नई के लिए आखिरी ओवर तक सब सही जा रहा था लेकिन शेन वाटसन (80) के रन आउट होते ही बाजी पलट गई। आखिरी गेंद पर चेन्नई को जीत के लिए 2 रन चाहिए थे। लसिथ मलिंगा ने इसी गेंद पर शार्दुल ठाकुर को पगबाधा आउट कर मुम्बई के खाते में चौथा आईपीएल खिताब डाल दिया। चेन्नई 20 ओवरों में 7 विकेट के पर 148 रन ही बना सकी।
शेन वाटसन ने 59 गेंदों पर 8 चौके और चार 6 मारे। वाटसन को इस मैच में तीन जीवनदान भी मिले, लेकिन वह फिर भी चेन्नई को जीत नहीं दिला पाए। इसी के साथ मुम्बई ने एक बार फिर चेन्नई को फाइनल जीतने से रोक दिया। यह चौथी बार था तब चेन्नई और मुम्बई फाइनल खेल रही थीं जिसमें से तीन बार मुंबई को जीत मिली है। 150 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई ने तेज शुरुआत की लेकिन मुम्बई ने तुरंत वापसी करते हुए उसे परेशान किया। लगातार बड़े शॉट मार रहे फैफ डु प्लेसिस (26) को क्रुणाल पंड्या ने क्विंटन डि कॉक के हाथों स्टम्पिंग कराया। वह 33 के कुल स्कोर पर आउट हुए। वाटसन और सुरेश रैना (8) ने टीम का स्कोर 70 तक पहुंचाया। रैना इसी स्कोर पर आउट हो गए। इसके बाद अंबाती रायुडू (1) जसप्रीत बुमराह का शिकार बने तो महेंद्र सिंह धौनी (2) को ईशान किशन ने सीधे थ्रो पर रन आउट कर पवेलियन भेजा। चेन्नई का स्कोर 4 विकेट पर 82 रन था। यहाँ से वाटसन ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने मलिंगा के 16 और क्रुणाल के 18वें ओवर में 20-20 रन बटोरते हुए चेन्नई को मैच में बनाए रखा। वाटसन का साथ दे रहे ड्वेन ब्रावो (15) 19वें ओवर में आउट हो गए। आखिरी ओवर में चेन्नई को 9 रन की जरूरत थी। वाटसन के रहते चेन्नई की जीत की उम्मीदें बरकरार थीं। लेकिन चौथी गेंद पर दो रन लेने के चक्कर में वाटसन रन आउट हो गए। अगली दो गेंदों पर चार रन चाहिए थे। ठाकुर ने पांचवीं गेंद पर 2 रन लिए, लेकिन आखिरी गेंद पर पगबाधा आउट हो गए। जसप्रीत बुमराह रहे ‘मैच ऑफ द मैच’ चुने गए।
खिताबी मुकाबले में दोनों टीमों के खिलाड़ी चेन्नई सुपर किंग्स: फैफ डु प्लेसिस, शेन वाटसन, सुरेश रैना, अंबाती रायुडू, एमएस धौनी (विकेटकीपर/कप्तान), ड्वेन ब्रावो, रवींद्र जडेजा, हरभजन सिंह, दीपक चाहर, शार्दुल ठाकुर, इमरान ताहिर। मुम्बई इंडियंस: रोहित शर्मा (कप्तान), क्विंटन डि कॉक (विकेटकीपर), सूर्य कुमार यादव, ईशान किशन, क्रुणाल पंड्या, हार्दिक पंड्या, कीरन पोलार्ड, राहुल चाहर, मिशेल मैक्लेनाघन, जसप्रीत बुमराह, लसिथ मलिंगा।
अंतरराष्ट्रीय सिख एनजीओ खालसा एड ने सद्बावना और सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए इराक के शरणार्थी शिविर में रहने वालों को पवित्र किताब कुरान का वितरण किया है। खालसा एड ने यह कदम मुसलमानों का पवित्र महीना रमजान मनाने के लिए उठाया।
यूनाइटेड किंगडम के इस समूह ने मोसुल में शिविक प्रबंधक को कुरान की पांच प्रतियां भेंट की। समूह के सदस्य शिविर में इफ्तार के लिए भोजन के पैकेट बांट रहे थे। जब शिविर के प्रबंधक ने उनसे पूछा कि क्या वह कुरान की व्यवस्था कर सकते हैं, खालसा एड ने उनकी यह ख्वाहिश भी पूरी की। कुरान के अलावा समूह ने नमाज पढ़ने के लिए चटाई भी उपलब्ध कराईं। समूह के ट्विटर हैंडल से एक वीडियो भी शेयर किया गया है जिसमें समूह के सदस्य कुरान भेंट कर रहे हैं। वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा है, ‘इस सप्ताह हमारे दल ने इराक में मोसुल के पास एक शिविर में वहां के प्रबंधक के आग्रह पर पवित्र किताब कुरान की पांच प्रतियां और नमाज पढ़ने के लिए चटाई पहुंचाईं। इसके साथ ही हमने रमजान के महीने में इफ्तार के लिए वहां खाने के पैकेट भी वितरित किए।
नयी दिल्ली : मोटरसाइकिल कंपनी रॉयल एनफील्ड ने अपनी बुलेट और बुलेट इलेक्ट्रा की करीब 7,000 मोटरसाइकिलों को वापस मंगवाया है। कंपनी ने मंगलवार को कहा कि इन वाहनों में त्रुटिपूर्ण ब्रेक कैलिपर बोल्ट की पहचान की गयी हैकंपनी ने एक बयान में कहा कि 20 मार्च 2019 से 30 अप्रैल 2019 के बीच उत्पादित इन वाहनों में इस त्रुटि की पहचान की गयी है। इसलिए कंपनी पहले से सक्रियता दिखाते हुए इन वाहनों की सर्विस के लिए वापस बुला रही है। ब्रेक कैलिपर बोल्ट, किसी वाहन में ब्रेक लगाने वाली प्रणाली का अहम कलपुर्जा होता है। यह ब्रेक होज और ब्रेक कैलिपर को सुरक्षित करता है।
मुम्बई : अभिनय गुरु के तौर पर मशहूर रोशन तनेजा का 87 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके बेटे ने गत शनिवार सुबह इस बात की जानकारी दी। उनका निधन गत शुक्रवार को हुआ। वह लंबे समय से बीमार थे। उनका अंतिम संस्कार शनिवार शाम 4: 30 बजे मुंबई के सांताक्रुज वेस्ट के विद्युत शमशान गृह में किया जाएगा। रोशन अपने पीछे पत्नी मिथिका और बेटे रोहित, राहुल को छोड़ गए हैं।
रोशन ने नसीरुद्दीन शाह, जया बच्चन, अनिल कपूर, शबाना आजमी जैसे सितारों को अभिनय के गुर सिखाए थे। उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में पायोनियर ऑफ़ मेथड एक्टिंग कहा जाता है। वह 1960 से अभिनय सिखा रहे थे। उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया (पुणे) से अपने प्रोफेशन की शुरुआत की और फिर मुंबई में द रोशन तनेजा स्कूल ऑफ़ एक्टिंग खोल लिया था। तनेजा परिवार के लिए ट्वीट करते हुए शबाना आजमी ने लिखा-पिछली रात मुझे दुखद सूचना मिली कि रोशन तनेजा नहीं रहे। वह एफटीआईआई में मेरे गुरु थे और वह एकमात्र ऐसे शख्स थे जिनके मैंने पैर छुए। उनके द्वारा एक्टिंग सिखाया जाना मेरे लिए एक सौभाग्य की बात है।
अभिनेता राकेश बेदी ने लिखा-मेरे लिए बुरा दिन,मेरे गुरूजी रोशन तनेजा नहीं रहे। मैं अपना पूरा करियर उन्हें समर्पित करता हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। विंदु दारा सिंह ने ट्वीट किया-हमारे गुरु जी रोशन तनेजा नहीं रहे।भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। वह बेहतरीन शिक्षक थे जिन्होंने एक्टिंग से प्यार करना सिखाया और हमें हमेशा परिवार जैसा महसूस कराया।
संयुक्त राष्ट्र :संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने वैश्विक संस्था (यूएन) के आतंकवाद रोधी कार्य में भारत के सहयोग की सराहना की है। साथ ही, इस्लामिक स्टेट से भाग रहे आतंकवादियों का पता लगाने की जरूरत और किसी हमले को अंजाम देने से पहले उन्हें रोके जाने को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एक उच्च प्राथमिकता बताया है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र आतंकवादी यात्रा रोकथाम कार्यक्रम शुरू किए जाने के दौरान यह कहा। श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए सिलसिलेवार विस्फोटों के करीब दो सप्ताह बाद संयुक्त राष्ट्र ने यह कदम उठाया है। इन हमलों की जिम्मेदारी आईएसआईएस ने ली थी। गुतारेस ने कहा कि यह कार्यक्रम आतंकवाद रोधी अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने, आतंकवादियों का पता लगाने, उनकी पहचान करने, उन्हें रोकने और अभियोजित करने के लिए बहुपक्षीय नेटवर्क को विस्तारित करने में और आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित सदस्य देशों के पास इस खतरे से निपटने की क्षमता को सुनिश्चित करने में मदद करेगा। गुतेरस ने कहा, ‘‘मैं संरा के आतंक रोधी कार्य में भारत, जापान, सउदी अरब और कतर के निरंतर सहयोग की सराहना करता हूं। ’’
उन्होंने कहा कि आईएसआईएस के शिकस्त के बाद कई आतंकी स्वदेश लौटने या सुरक्षित पनाहगाहों या दुनिया के संकटग्रस्त हिस्सों में जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से कई आतंकी अच्छी तरह से प्रशिक्षित हैं और वे भविष्य में आतंकी हमलों को अंजाम दे सकते हैं। अन्य के कट्टरपंथ फैलाने और अपने उद्देश्य के लिए नये साथियों की भर्ती करने की संभावना है। गुतेरस ने कहा कि किसी हमले को अंजाम देने से पहले इन आतंकवादियों और अन्य खतरनाक अपराधियों का पता लगाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक उच्च प्राथमिकता है।
वाराणसी : बिरहा सम्राट व भोजपुरी गायक हीरा लाल यादव का रविवार को 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वो कई दिनों से बीमार थे। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें अस्पताल से चौकाघाट स्थित आवास पर ले आए, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। बेटे सत्यनारायण यादव ने बताया कि दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने हीरालाल के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की है।
हीरलाल यादव को इसी वर्ष जनवरी माह में गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से नवाजा गया था। संगीत के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 2015 में यश भारती पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1993-94 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान और 2014 में यशभारती के साथ ही विश्व भोजपुरी अकादमी का भिखारी ठाकुर सम्मान व रवींद्र नाथ टैगोर सम्मान से भी उन्हें नवाजा था। हीरालाल यादव का जन्म वर्ष 1936 में वाराणसी जिले के चेतगंज स्थित सरायगोवर्द्धन में हुआ था। उनका बचपन गरीबी में गुजरा था। शौकिया गाते-गाते अपनी सशक्त गायकी से बिरहा को उन्होंने राष्ट्रीय फलक पर पहचान दिलाई और बिरहा सम्राट के रूप में मशहूर हुए। वर्ष 1962 से आकाशवाणी व दूरदर्शन पर बिरहा के शौकीनों को अपना दीवाना बनाया। भक्ति रस में पगे लोकगीत और कजरी पर भी श्रोताओं को खूब झुमाया, वहीं गायकी में शास्त्रीय पुट ने बिरहा गायन को विशेष विधा के तौर पर पहचान दिलाई। पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीटर पर भी इनको श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित वाराणसी के बिरहा गायक श्री हीरालाल यादव जी के निधन की खबर से अत्यंत दुख हुआ। दो दिन पहले ही बातचीत कर उनका हालचाल जाना था। उनका निधन लोकगायकी के क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके प्रशंसकों और परिवार के साथ हैं।